पैरों में बार-बार हो रहा दर्द तो हल्के में न लें, दिल के लिए खतरनाक हो सकती है लापरवाही

पैरों में बार-बार हो रहा दर्द तो हल्के में न लें, दिल के लिए खतरनाक हो सकती है लापरवाही


हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डॉक्टर ब्रेट कैरोल के अनुसार, अगर पैरों की नसों में ब्लॉकेज हो जाए तो यह उतना ही खतरनाक है जितना दिल की नसों में ब्लॉकेज होना. इसका मतलब है कि पैरों का दर्द दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है.

अगर आपको दिल की बीमारी का खतरा है तो पैरों में होने वाला दर्द Peripheral Artery Disease (PAD) हो सकता है. यह वही बीमारी है जिसमें धमनियों में ब्लॉकेज बन जाता है और खून का प्रवाह रुकने लगता है. PAD और दिल की बीमारी (CAD) की वजहें लगभग एक जैसी होती हैं.

अगर आपको दिल की बीमारी का खतरा है तो पैरों में होने वाला दर्द Peripheral Artery Disease (PAD) हो सकता है. यह वही बीमारी है जिसमें धमनियों में ब्लॉकेज बन जाता है और खून का प्रवाह रुकने लगता है. PAD और दिल की बीमारी (CAD) की वजहें लगभग एक जैसी होती हैं.

PAD तब होता है जब पैरों में खून ले जाने वाली धमनियों में कैल्शियम और कोलेस्ट्रॉल की परत जम जाती है. इस परत को प्लाक कहते हैं. धीरे-धीरे यह प्लाक नसों को ब्लॉक कर देता है और खून का सही तरीके से प्रवाह नहीं हो पाता, जिससे पैरों में दर्द और कमजोरी महसूस होती है.

PAD तब होता है जब पैरों में खून ले जाने वाली धमनियों में कैल्शियम और कोलेस्ट्रॉल की परत जम जाती है. इस परत को प्लाक कहते हैं. धीरे-धीरे यह प्लाक नसों को ब्लॉक कर देता है और खून का सही तरीके से प्रवाह नहीं हो पाता, जिससे पैरों में दर्द और कमजोरी महसूस होती है.

PAD ज्यादातर उम्रदराज लोगों में देखने को मिलता है. आंकड़ों के अनुसार, 50 साल से ऊपर के करीब 20 में 1 व्यक्ति और 70 साल से ऊपर के 5 में 1 व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित होता है. मतलब उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा भी बढ़ जाता है.

PAD ज्यादातर उम्रदराज लोगों में देखने को मिलता है. आंकड़ों के अनुसार, 50 साल से ऊपर के करीब 20 में 1 व्यक्ति और 70 साल से ऊपर के 5 में 1 व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित होता है. मतलब उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा भी बढ़ जाता है.

PAD का सबसे बड़ा लक्षण है चलते समय पिंडली या जांघ में दर्द होना और आराम करने पर दर्द कम हो जाना. इसे क्लॉडिकेशन कहते हैं. इसके अलावा पैरों के बाल झड़ जाना, पैरों में ऐसे जख्म होना जो जल्दी न भरें और पैरों में भारीपन महसूस होना भी इसके लक्षण हैं.

PAD का सबसे बड़ा लक्षण है चलते समय पिंडली या जांघ में दर्द होना और आराम करने पर दर्द कम हो जाना. इसे क्लॉडिकेशन कहते हैं. इसके अलावा पैरों के बाल झड़ जाना, पैरों में ऐसे जख्म होना जो जल्दी न भरें और पैरों में भारीपन महसूस होना भी इसके लक्षण हैं.

PAD उन्हीं कारणों से होता है जिनसे दिल की बीमारी होती है. इनमें डायबिटीज, ज्यादा खराब कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और स्मोकिंग शामिल हैं. इनमें से स्मोकिंग सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर माना जाता है क्योंकि यह नसों को सीधा नुकसान पहुंचाता है.

PAD उन्हीं कारणों से होता है जिनसे दिल की बीमारी होती है. इनमें डायबिटीज, ज्यादा खराब कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और स्मोकिंग शामिल हैं. इनमें से स्मोकिंग सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर माना जाता है क्योंकि यह नसों को सीधा नुकसान पहुंचाता है.

अगर पैरों में बार-बार दर्द हो रहा है तो डॉक्टर ankle-brachial index नाम का टेस्ट करके PAD की पहचान कर सकते हैं. वहीं, अगर आप खुद सावधानी रखना चाहते हैं तो पैदल चलना और नियमित व्यायाम करना बहुत फायदेमंद है. इससे पैरों में खून का प्रवाह बेहतर होता है और स्थिति में सुधार आता है.

अगर पैरों में बार-बार दर्द हो रहा है तो डॉक्टर ankle-brachial index नाम का टेस्ट करके PAD की पहचान कर सकते हैं. वहीं, अगर आप खुद सावधानी रखना चाहते हैं तो पैदल चलना और नियमित व्यायाम करना बहुत फायदेमंद है. इससे पैरों में खून का प्रवाह बेहतर होता है और स्थिति में सुधार आता है.

Published at : 22 Aug 2025 02:22 PM (IST)


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शरीर में हो रही पानी की कमी, बॉडी करती है ये इशारे

शरीर में हो रही पानी की कमी, बॉडी करती है ये इशारे


हमारा शरीर लगभग 60 से 70 प्रतिशत पानी से बना होता है. यही पानी हमारे शरीर के तापमान को संतुलित रखता है, ब्लड फ्लो बनाए रखता है और पाचन को सही ढंग से चलाता है. लेकिन अक्सर लोग पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते, जिससे डिहाइड्रेशन (Dehydration) यानी पानी की कमी हो जाती है. कई बार यह कमी इतनी धीरे-धीरे होती है कि हमें पता भी नहीं चलता. हालांकि, शरीर समय-समय पर इसके संकेत देने लगता है. आइए जानते हैं कि पानी की कमी होने पर शरीर कौन-कौन से इशारे करता है.

 बार-बार सिर दर्द होना

डिहाइड्रेशन की सबसे आम समस्या है बार-बार सिर दर्द होना. जब शरीर में पानी की मात्रा कम होती है, तो खून का प्रवाह दिमाग तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाता. इससे चक्कर आना और सिर दर्द की समस्या शुरू हो जाती है.

 त्वचा का रूखापन

पानी की कमी का सीधा असर आपकी त्वचा पर भी दिखाई देता है. यदि आपकी स्किन लगातार ड्राई, बेजान और रूखी हो रही है, तो यह संकेत है कि शरीर में पानी की मात्रा घट रही है.

 बार-बार थकान महसूस होना

डिहाइड्रेशन की वजह से शरीर में एनर्जी का लेवल गिर जाता है. आप थोड़े-से काम के बाद ही थकान महसूस करने लगते हैं. लगातार कमजोरी या सुस्ती आना इस बात का इशारा है कि आपके शरीर को पानी की जरूरत है.

 पेशाब का गहरा रंग

अगर पेशाब का रंग पीला या गहरा दिख रहा है तो समझ लीजिए कि शरीर में पानी की कमी हो रही है. सामान्य स्थिति में पेशाब का रंग हल्का और साफ होता है, लेकिन डिहाइड्रेशन होने पर यह गहरा हो जाता है.

 मुंह और होंठों का सूखना

जब भी शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता तो सबसे पहले असर मुंह और होंठों पर दिखता है. होंठ फटने लगते हैं और मुंह सूखा-सूखा महसूस होता है.

 मांसपेशियों में खिंचाव

डिहाइड्रेशन की वजह से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है. इससे मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन होने लगती है.

पानी की कमी से बचाव कैसे करें?

  • दिनभर में कम से कम 7–8 गिलास पानी जरूर पिएं.
  • गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने वाले फल जैसे तरबूज, खीरा और नारियल पानी का सेवन करें.
  • ज्यादा देर तक धूप में रहने से बचें और समय-समय पर पानी पीते रहें.

इसे भी पढ़ें- पैंक्रियाटिक कैंसर से अमेरिका के फेमस जज फ्रैंक कैप्रियो का निधन, जानें यह बीमारी कितनी खतरनाक?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने की नई गाइडलाइन, जानें क्या बदला और क्यों जरूरी है

हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने की नई गाइडलाइन, जानें क्या बदला और क्यों जरूरी है


New Guidelines for Blood Pressure: उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर (BP) को अक्सरसाइलेंट किलर” कहा जाता है. यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाता है. हृदय रोग, स्ट्रोक, डिमेंशिया, किडनी रोग और समय से पहले मौत तक का खतरा बढ़ जाता है. हाल ही में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशनृ ने हाई बीपी को लेकर अपने गाइडलाइन में बदलाव किया है. इन बदलावों का मकसद है कि, बीमारी की शुरुआत से ही ठीक से जांच की जाए.

ब्लड प्रेशर के नए पैरामीटर

  • सिस्टोलिक: जब दिल खून पंप करता है
  • डायस्टोलिक: जब दिल धड़कनों के बीच आराम करता है

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नए मानदंड इस प्रकार हैं

  • एलीवेटेड बीपी: 120–129 mm Hg (सिस्टोलिक) और 80 mm Hg (डायस्टोलिक)
  • स्टेज 1 हाइपरटेंशन: 130–139 mm Hg (सिस्टोलिक) या 80–89 mm Hg (डायस्टोलिक)
  • स्टेज 2 हाइपरटेंशन: 140 mm Hg (सिस्टोलिक) या 90 mm Hg (डायस्टोलिक)

दवा कब शुरू करनी चाहिए?

डॉ. बलबीर सिंह बताते हैं कि, 130–139/80–89 mm Hg पहले लाइफस्टाइल बदलाव (जैसे खानपान, व्यायाम) अपनाए जाएं. अगर फर्क न पड़े तो दवा शुरू करें. 140/90 mm Hg ऐसे मामलों में तुरंत दो दवाएं एक साथ दी जाती हैं, ताकि अलग-अलग तरीकों से बीपी को जल्दी और स्थायी रूप से नियंत्रित किया जा सके.

किन टेस्ट की जरूरत है?

  • लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
  • किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT)
  • सोडियम-पोटैशियम बैलेंस
  • यूरिक एसिड और ब्लड शुगर प्रोफाइल
  • पोटैशियम और डायट का महत्व
  • एएचए के अनुसार, पोटैशियम ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में बहुत अहम है
  • पोटैशियम युक्त आहार (जैसे केला, नारियल पानी, हरी सब्जियां) लें
  • पोटैशियम-बेस्ड साल्ट का इस्तेमाल भी फायदेमंद हो सकता है, लेकिन किडनी रोगियों के लिए यह सावधानी से लेना चाहिए

बीपी रोकने के उपाय

  • नमक की मात्रा घटाएं
  • सिगरेट और शराब से दूरी
  • योग, मेडिटेशन, गहरी सांस लेना
  • कम से कम 5% वजन घटाना लक्ष्य बनाएं

हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह हमारे दिल, दिमाग और किडनी की सेहत से जुड़ा एक गंभीर संकेत है. एएचए के नए गाइडलाइन हमें याद दिलाते हैं कि रोकथाम, समय पर जांच और सही इलाज से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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सिर्फ शरीर ही नहीं दिमाग को भी बूढ़ा बना गया है कोरोना वायरस, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

सिर्फ शरीर ही नहीं दिमाग को भी बूढ़ा बना गया है कोरोना वायरस, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा


Coronavirus Brain Aging: कोरोना महामारी के समय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था. इस दौरान हमने जाना कि यह वायरस सिर्फ फेफड़ों या प्रतिरोधक क्षमता पर ही नहीं, बल्कि हमारे मानसिक और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है. अब एक नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि कोविड-19 महामारी ने इंसानों के दिमाग की उम्र को तेजी से बढ़ा दिया है, चाहे व्यक्ति वायरस से संक्रमित हुआ हो या नहीं.

क्या कहती है नई स्टडी?

नई स्टडी के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने MRI स्कैन का इस्तेमाल कर दिमाग की उम्र का अनुमान लगाने वाले मॉडल बनाए. इसके बाद 996 प्रतिभागियों के दो-दो MRI स्कैन की तुलना की गई. दोनों स्कैन मार्च 2020 से पहले किए गए थे. पहले स्कैन में दोनों ग्रुप्स में कोई बड़ा अंतर नहीं दिखा. लेकिन दूसरे स्कैन में महामारी ग्रुप में दिमाग की उम्र तेज से बढ़ी हुई पाई गई.

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बिना कोविड संक्रमण के भी बढ़ी ब्रेन एजिंग

शोधकर्ताओं के मुताबिक, दोनों रिसर्च में दिमाग की उम्र बढ़ने की रफ्तार कंट्रोल ग्रुप से ज्यादा थी. यानी ब्रेन एजिंग सिर्फ कोविड संक्रमण से नहीं, बल्कि महामारी के माहौल और उससे जुड़े तनाव, जीवनशैली और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं से भी जुड़ी है.

उम्र और लिंग के आधार पर फर्क

उम्र के साथ कंट्रोल ग्रुप में दिमाग लगभग 3 दिन तेज से बूढ़ा हो रहा था. लेकिन महामारी ग्रुप में यह बढ़कर 7 से 8 दिन प्रति साल हो गया था. कोविड संक्रमण वाले लोगों में यह दर और भी ज्यादा देखने को मिली, जो 9 से 10 दिन का दिखाई दिया था. दिलचस्प बात यह रही कि पुरुषों में ग्रे मैटर एजिंग और तेज पाई गई.

इस रिसर्च से क्या सीख मिलती है?

  • महामारी ने केवल संक्रमित लोगों को नहीं, बल्कि हर किसी के मानसिक और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य को प्रभावित किया
  • बढ़ती ब्रेन एजिंग का मतलब है कि भविष्य में याददाश्त की समस्या, डिप्रेशन और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है
  • शोधकर्ता मानते हैं कि इसे रोकने के लिए सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल और सामाजिक असमानताओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है

यह स्टडी हमें याद दिलाती है कि कोरोना महामारी का प्रभाव गहरा और बहुआयामी रहा है. भले ही वायरस अब उतना घातकदिखे, लेकिन इसका दीर्घकालिक असर दिमाग की उम्र बढ़ने के रूप में सामनेरहा है. ऐसे में जरूरी है कि हम मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, और स्वस्थ जीवनशैली को प्राथमिकता दें, ताकि अपने दिमाग को अनावश्यक रूप से जल्दी बूढ़ा होने से बचा सकें.

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आंखों में हो रही जलन और बार-बार आ रहा पानी, कहीं इस बीमारी के संकेत तो नहीं?

आंखों में हो रही जलन और बार-बार आ रहा पानी, कहीं इस बीमारी के संकेत तो नहीं?


Eye Allergy Symptoms: आप सभी जानते हैं कि, आंखों में दिक्कत आना, यानी सबकुछ खत्म होने जैसा नजर आता है. स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल और प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, पानी आना और लालिमा जैसी समस्याएं हो जाती हैं. कई बार लोग इसे मामूली समझकर ऐसी ही छोड़ देते हैं. लेकिन आंखों से जुड़े ये लक्षण गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं.

डॉ. तुषार ग्रोवर बताते हैं कि, इन संकेतों को हल्के में लेना आपकी आंखों की सेहत को खतरे में डाल सकता है. जानिए आखिर कौनसे हैं वो लक्षण, जो आपकी आंखों को परेशान कर रहे हैं.

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आंखों से पानी आने और जलन होने के कारण

  • ड्राई आई सिंड्रोम जब आंखें पर्याप्त नमी नहीं बना पातीं
  • एलर्जी धूल, परागकण, धुआं या प्रदूषण से होने वाली समस्या
  • इन्फेक्शन कंजक्टिवाइटिस (आंख आना) जैसी बीमारियां
  • स्क्रीन टाइम मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी पर लंबे समय तक नजर गड़ाए रखना
  • कॉन्टैक्ट लेंस का गलत इस्तेमाल लेंस की सफाई न करना या देर तक पहनना

कब समझें इस बीमारी का संकेत

  • आंखों में लगातार जलन हो रही है और साथ में यह लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए
  • आंखों का बार-बार लाल होना
  • धुंधला दिखाई देना
  • तेज रोशनी में असहजता
  • आंखों में सूजन या भारीपन
  • लगातार सिरदर्द

खुद को कैसे करें सुरक्षित?

  • हर 20 मिनट बाद स्क्रीन से नजर हटाकर 20 सेकंड कहीं दूर देखें
  • आंखों को आराम दें पर्याप्त नींद लें और आंखों पर ठंडी सिकाई करें
  • स्वच्छता का ध्यान रखें गंदे हाथों से आंखों को न मलें
  • कॉन्टैक्ट लेंस का सही इस्तेमाल करें समय पर बदलें और साफ रखें
  • डाइट में शामिल करें विटामिन A और ओमेगा-3 युक्त आहार जैसे गाजर, पालक, मछली और अखरोट

घरेलू नुस्खे भी दे सकते हैं राहत

  • गुलाबजल की कुछ बूंदें डालने से जलन और सूखापन कम होता है
  • ठंडी खीरे की स्लाइस आंखों पर रखने से ठंडक और आराम मिलता है
  • नारियल पानी या ग्रीन टी बैग से सिकाई करना भी उपयोगी है

आंखों की छोटी सी परेशानी को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकता है। जलन, पानी आना या लालिमा को केवल सामान्य थकान समझने की भूल न करें। समय पर इलाज, सही आदतें और आंखों की देखभाल से बेहद जरूरी है.

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गलती से भी इन 5 रेड फ्लैग्स को मत कर देना नजरअंदाज, हार्ट वेन्स के ब्लॉक होने का देते हैं सिग्न

गलती से भी इन 5 रेड फ्लैग्स को मत कर देना नजरअंदाज, हार्ट वेन्स के ब्लॉक होने का देते हैं सिग्न


अक्सर लोग मानते हैं कि दिल से जुड़ी किसी भी समस्या के बारे में तुरंत पता चल जाता है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. कई बार दिल की बीमारियां बिना स्पष्ट लक्षणों के सामने आती हैं. खासकर अगर आपकी उम्र 50 साल से ज्यादा है, मोटापा है, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, तो आपको ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है.

सीने में दर्द और दबाव

दिल की धमनियों के ब्लॉक होने या हार्ट अटैक का सबसे सामान्य लक्षण सीने में दर्द, जकड़न या दबाव है. यह दर्द कुछ मिनटों तक बना रहता है और आराम करने पर भी ठीक नहीं होता. अगर दर्द हल्का है और दबाने पर बढ़ता है, तो यह दिल से जुड़ा न होकर मांसपेशियों का भी हो सकता है.

 जी मिचलाना और उल्टी जैसा लगना

कई लोग हार्ट अटैक के समय उल्टी, एसिडिटी या जी मिचलाने जैसी समस्या महसूस करते हैं. खासकर महिलाओं में यह लक्षण ज्यादा आम है. इसलिए इसे नजरअंदाज न करें.

 बाईं ओर दर्द का फैलना

एक क्लासिक हार्ट अटैक लक्षण है कि दर्द सीने से शुरू होकर बाईं बांह, कंधे या पीठ की तरफ फैलता है. यह दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है और कभी-कभी पूरे शरीर को असहज कर देता है.

अचानक चक्कर या बेहोशी जैसा लगना

अगर अचानक चक्कर आने लगे या संतुलन बिगड़ जाए और साथ में सीने में दर्द या सांस लेने में दिक्कत हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. यह हार्ट से जुड़ी समस्या का गंभीर संकेत हो सकता है.

जबड़े और गले में दर्द

सामान्य तौर पर गले या जबड़े का दर्द सर्दी-जुकाम या मांसपेशियों से जुड़ा होता है. लेकिन अगर यह दर्द सीने के दबाव के साथ गले या जबड़े तक फैलता है, तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है.

पूरी तरह ब्लॉकेज होने का असर

धमनियों में ब्लॉकेज अलग-अलग स्तर का हो सकता है. 97 प्रतिशत ब्लॉकेज का इलाज करना आसान होता है, लेकिन अगर धमनी पूरी तरह लंबे समय से बंद हो तो खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसे मामलों में शरीर नई छोटी नसें (collaterals) बना लेता है, जो खून पहुंचाती तो हैं लेकिन पर्याप्त मात्रा में नहीं. इसका नतीजा सीने में दर्द और सांस फूलने के रूप में सामने आता है.

क्या करें?

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण बार-बार महसूस हो रहा है तो लापरवाही न करें. तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं और जरूरत पड़ने पर स्ट्रेस टेस्ट या अन्य टेस्ट कराएं. सही समय पर पहचान और इलाज से बड़े खतरे से बचा जा सकता है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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