होंठ फट रहे हैं या कोनों से कट रहे हैं तो समझ जाएं इस विटामिन की हो गई कमी, ऐसे दूर करें दिक्कत

होंठ फट रहे हैं या कोनों से कट रहे हैं तो समझ जाएं इस विटामिन की हो गई कमी, ऐसे दूर करें दिक्कत


सर्दी का मौसम हो या गर्मी, होंठ फटना एक आम सी दिखने वाली लेकिन बहुत तकलीफ देने वाली समस्या है. जब होंठों में बार-बार दरारें पड़ें, कोनों से कटने लगे या हर समय सूखे और बेजान लगें, तो सिर्फ मौसम के कारण नहीं होता है. बहुत से लोग दिन में कई बार लिप बाम या पेट्रोलियम जेली लगाते हैं, फिर भी उनके होंठ फटे रहते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आपके शरीर में कुछ जरूरी विटामिन्स की कमी भी इस समस्या की वजह हो सकती है. अगर होंठ फटना आपकी रोज की परेशानी बन चुका है, तो हो सकता है यह शरीर में विटामिन की कमी का संकेत हो. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि कौन से विटामिन की कमी से होंठ फटते हैं, उसके और क्या-क्या लक्षण होते हैं, और इसे कैसे यह दिक्कत दूर करें. 

क्यों फटते हैं होंठ? जानिए असली कारण

होंठ फटने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जैसे – 

1. शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन 

2. सर्द या रूखा मौसम

3. बार-बार जीभ से होंठों को गीला करना

4. रोजाना सिगरेट या तंबाकू का सेवन

5. पोषक तत्वों की कमी, खासतौर पर विटामिन की कमी

6. कुछ दवाइयों का साइड इफेक्ट

7. शरीर में विटामिन A और जिंक की जरूरत से ज्यादा मात्रा

कौन से विटामिन की कमी से होंठ फटते हैं?

अगर होंठ फटना आपकी रोज की परेशानी बन चुका है, तो हो सकता है यह शरीर में विटामिन B12 या B2 की कमी का संकेत हो. विटामिन B2 (राइबोफ्लेविन) की कमी के कारण स्किन रूखी और खुरदरी हो सकती है, होंठों पर दरारें पड़ती हैं, मुंह के कोनों पर छाले या घाव बन सकते हैं या जीभ लाल और सूजन वाली हो सकती है. वहीं विटामिन B12 (कोबालामिन) की कमी के कारण होंठों में जलन महसूस होती है, होंठ कोनों से कटने लगते हैं, स्किन और बालों की हालत बिगड़ने लगती है, थकान, चिड़चिड़ापन और नींद की कमी महसूस होती है और स्कैल्प ड्राई होकर बाल भी झड़ने लगते हैं. 

विटामिन B12 और B2 की कमी कैसे करें दूर?

विटामिन B12 और B2 की कमी को दूर करने के लिए कुछ चीजों को अपनी रोज की डाइट में जरूर शामिल करें जैसे दूध और दूध से बनी चीजें दही, पनीर, चीज या अंडा, मछली, साल्मन, टूना, सार्डीन , इसके अलावा मांस अगर आप नॉनवेज खाते हैं और हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, बीन्ससोया प्रोडक्ट्स. वहीं अगर खानपान से विटामिन की पूरा न हो पा रहा हो, तो आप डॉक्टर से सलाह लेकर विटामिन B12 और B2 के सप्लीमेंट भी ले सकते हैं.

इसके साथ ही होंठ फट रहे हैं या कोनों से कट रहे हैं तो दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीएं, SPF वाला लिप बाम लगाएं, खासतौर पर धूप में निकलते वक्त जरूर लगाएं, हफ्ते में 2-3 बार लिप स्क्रब करें, ऑर्गेनिक लिप बाम यूज करें और होंठ पर बीटरूट का रस रात में लगाकर रखें. इससे होंठों को नेचुरल रंग और नमी दोनों मिलेगी. 

यह भी पढ़ें: चेहरे के दाग धब्बे आपकी खूबसूरती को कर सकते हैं खराब, इन घरेलू उपायों से करें इसका इलाज

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शरीर में तेजी से बढ़ेगा Vitamin B12, बस इस तरीके से खा लीजिए मूंग दाल

शरीर में तेजी से बढ़ेगा Vitamin B12, बस इस तरीके से खा लीजिए मूंग दाल


अक्सर लोग इसकी कमी पूरी करने के लिए सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन आपकी किचन में ही एक ऐसा खजाना मौजूद है, जो इस विटामिन की कमी को दूर करने में मददगार है, वह है मूंग दाल.

मूंग दाल सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स के साथ-साथ विटामिन बी12 भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यही वजह है कि इसे 'शाकाहारियों का पावर फूड' कहा जाता है.

मूंग दाल सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स के साथ-साथ विटामिन बी12 भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यही वजह है कि इसे ‘शाकाहारियों का पावर फूड’ कहा जाता है.

Vitamin B12 हमारे DNA बनाने और कोशिकाओं को एनर्जी देने में अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी से थकान, कमजोरी, एनीमिया और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी हो सकती हैं. ऐसे में मूंग दाल आपके लिए नेचुरल और आसान उपाय बन सकती है.

Vitamin B12 हमारे DNA बनाने और कोशिकाओं को एनर्जी देने में अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी से थकान, कमजोरी, एनीमिया और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी हो सकती हैं. ऐसे में मूंग दाल आपके लिए नेचुरल और आसान उपाय बन सकती है.

अगर आप रोजाना सही तरीके से मूंग दाल का सेवन करेंगे तो न सिर्फ Vitamin B12 की कमी दूर होगी, बल्कि शरीर में खून की कमी, इम्यूनिटी की कमजोरी और कमजोरी जैसी समस्याएं भी कम होंगी.

अगर आप रोजाना सही तरीके से मूंग दाल का सेवन करेंगे तो न सिर्फ Vitamin B12 की कमी दूर होगी, बल्कि शरीर में खून की कमी, इम्यूनिटी की कमजोरी और कमजोरी जैसी समस्याएं भी कम होंगी.

इसको यूज करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि रात में सोने से पहले एक कप मूंग दाल को अच्छे से धोकर पानी में भिगो दें. सुबह उसका पानी पी लें और भीगी हुई दाल में प्याज, नींबू, टमाटर डालकर सलाद की तरह खा लें. यह तरीका आपके शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ विटामिन और मिनरल्स का खजाना देगा.

इसको यूज करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि रात में सोने से पहले एक कप मूंग दाल को अच्छे से धोकर पानी में भिगो दें. सुबह उसका पानी पी लें और भीगी हुई दाल में प्याज, नींबू, टमाटर डालकर सलाद की तरह खा लें. यह तरीका आपके शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ विटामिन और मिनरल्स का खजाना देगा.

इसके अलावा, मूंग दाल की खिचड़ी, सूप या स्प्राउट्स के रूप में भी इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है. यह हल्की, पचने में आसान और पोषण से भरपूर होती है.

इसके अलावा, मूंग दाल की खिचड़ी, सूप या स्प्राउट्स के रूप में भी इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है. यह हल्की, पचने में आसान और पोषण से भरपूर होती है.

अगर आप बिना सप्लीमेंट के, सिर्फ नैचुरल तरीके से Vitamin B12 की कमी पूरी करना चाहते हैं, तो मूंग दाल को अपनी डेली डाइट में जरूर शामिल करें. कुछ ही हफ्तों में फर्क खुद महसूस करेंगे.

अगर आप बिना सप्लीमेंट के, सिर्फ नैचुरल तरीके से Vitamin B12 की कमी पूरी करना चाहते हैं, तो मूंग दाल को अपनी डेली डाइट में जरूर शामिल करें. कुछ ही हफ्तों में फर्क खुद महसूस करेंगे.

Published at : 17 Aug 2025 04:38 PM (IST)


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दोनों हाथों में अलग क्यों आता है BP,  जानें यह कब नॉर्मल और कब दे रहा खतरे की दस्तक?

दोनों हाथों में अलग क्यों आता है BP, जानें यह कब नॉर्मल और कब दे रहा खतरे की दस्तक?


सबसे पहले घबराने की जरूरत नहीं है. हेल्दी लोगों में भी दोनों हाथों के BP में थोड़ा फर्क आना बिल्कुल नॉर्मल है. आमतौर पर 10 mmHg (मिलीमीटर ऑफ मर्क्युरी) तक का अंतर बिल्कुल ठीक माना जाता है. यानी अगर एक हाथ में 122/78 है और दूसरे में 128/80, तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं है.

अगर दोनों हाथों के BP में 10–15 mmHg से ज़्यादा का फर्क बार-बार आ रहा है, खासकर ऊपर वाले नंबर (सिस्टोलिक) में, तो इसे हल्के में न लें. ऐसा होने पर डॉक्टर से चेकअप जरूरी है. लगातार ज़्यादा फर्क आना कभी-कभी ब्लड वेसल से जुड़ी बीमारियों का संकेत हो सकता है.

अगर दोनों हाथों के BP में 10–15 mmHg से ज़्यादा का फर्क बार-बार आ रहा है, खासकर ऊपर वाले नंबर (सिस्टोलिक) में, तो इसे हल्के में न लें. ऐसा होने पर डॉक्टर से चेकअप जरूरी है. लगातार ज़्यादा फर्क आना कभी-कभी ब्लड वेसल से जुड़ी बीमारियों का संकेत हो सकता है.

एक कारण हो सकता है Peripheral Artery Disease. इसमें एक हाथ की धमनी में ब्लॉकेज आ जाता है, जिससे ब्लड फ्लो और BP रीडिंग प्रभावित होती है. दूसरा, बहुत ही रेयर लेकिन गंभीर कारण होता है Aortic Dissection. यानी दिल से निकलने वाली बड़ी धमनी में अचानक दरार आना. यह इमरजेंसी है और इसके साथ तेज़ सीने में दर्द जैसे लक्षण भी आते हैं.

एक कारण हो सकता है Peripheral Artery Disease. इसमें एक हाथ की धमनी में ब्लॉकेज आ जाता है, जिससे ब्लड फ्लो और BP रीडिंग प्रभावित होती है. दूसरा, बहुत ही रेयर लेकिन गंभीर कारण होता है Aortic Dissection. यानी दिल से निकलने वाली बड़ी धमनी में अचानक दरार आना. यह इमरजेंसी है और इसके साथ तेज़ सीने में दर्द जैसे लक्षण भी आते हैं.

हाल ही में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने एक वीडियो में बताया कि अगर सिस्टोलिक BP में 10 mmHg और डायस्टोलिक में 5 mmHg तक का फर्क है तो ये नॉर्मल है. अगर 15 mmHg से ज्यादा का फर्क है तो यह वेस्कुलर डिजीज का संकेत हो सकता है और डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

हाल ही में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने एक वीडियो में बताया कि अगर सिस्टोलिक BP में 10 mmHg और डायस्टोलिक में 5 mmHg तक का फर्क है तो ये नॉर्मल है. अगर 15 mmHg से ज्यादा का फर्क है तो यह वेस्कुलर डिजीज का संकेत हो सकता है और डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

मेडिकल गाइडलाइंस के मुताबिक, नए मरीजों या हाई हार्ट रिस्क वाले लोगों का BP दोनों हाथों में मापा जाता है. अगर एक हाथ में लगातार BP ज्यादा आता है, तो आगे से उसी हाथ की रीडिंग को मानक माना जाता है, ताकि नतीजे एक जैसे रहें.

मेडिकल गाइडलाइंस के मुताबिक, नए मरीजों या हाई हार्ट रिस्क वाले लोगों का BP दोनों हाथों में मापा जाता है. अगर एक हाथ में लगातार BP ज्यादा आता है, तो आगे से उसी हाथ की रीडिंग को मानक माना जाता है, ताकि नतीजे एक जैसे रहें.

अगर आपके पास BP मशीन है तो आप घर पर भी दोनों हाथों में चेक कर सकते हैं. इसके लिए 5 मिनट शांत बैठें, पहले एक हाथ में BP लें, फिर एक मिनट रुककर दूसरे हाथ में मापें. अपने रीडिंग्स नोट करें और अगर फर्क बार-बार 10–15 mmHg से ज्यादा आ रहा है तो डॉक्टर को दिखाएं.

अगर आपके पास BP मशीन है तो आप घर पर भी दोनों हाथों में चेक कर सकते हैं. इसके लिए 5 मिनट शांत बैठें, पहले एक हाथ में BP लें, फिर एक मिनट रुककर दूसरे हाथ में मापें. अपने रीडिंग्स नोट करें और अगर फर्क बार-बार 10–15 mmHg से ज्यादा आ रहा है तो डॉक्टर को दिखाएं.

थोड़ा बहुत फर्क होना सामान्य है, लेकिन लगातार बड़ा अंतर आपके शरीर का अलार्म हो सकता है. दोनों हाथों का BP कभी-कभी मापना एक आसान और तेज़ तरीका है अपनी ब्लड सर्कुलेशन हेल्थ पर नज़र रखने का. अगली बार डॉक्टर अगर हाथ बदलकर BP लें तो समझ जाइए. यह सिर्फ चेकअप का हिस्सा है, बोरियत मिटाने के लिए नहीं.

थोड़ा बहुत फर्क होना सामान्य है, लेकिन लगातार बड़ा अंतर आपके शरीर का अलार्म हो सकता है. दोनों हाथों का BP कभी-कभी मापना एक आसान और तेज़ तरीका है अपनी ब्लड सर्कुलेशन हेल्थ पर नज़र रखने का. अगली बार डॉक्टर अगर हाथ बदलकर BP लें तो समझ जाइए. यह सिर्फ चेकअप का हिस्सा है, बोरियत मिटाने के लिए नहीं.

Published at : 17 Aug 2025 02:56 PM (IST)


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डाइट में शामिल कर लें ये चीजें, गलती से भी ब्लड प्रेशर नहीं होगा हाई और किडनी रहेगी फिट!

डाइट में शामिल कर लें ये चीजें, गलती से भी ब्लड प्रेशर नहीं होगा हाई और किडनी रहेगी फिट!


क्या आप हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं? तो आपकी थाली में रखा एक सेब या कटोरी हरी सब्जी, दवाओं से ज्यादा असर दिखा सकता है. जी हां, नई रिसर्च में सामने आया है कि सिर्फ रोजाना की डाइट में फल और सब्जियां शामिल करने से न सिर्फ किडनी की सेहत बेहतर होती है, बल्कि ब्लड प्रेशर कम होता है और हार्ट अटैक का खतरा भी घटता है.

5 साल तक चला अध्ययन

अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, ऑस्टिन में हुई इस स्टडी में 153 हाई BP और मैक्रोएल्ब्यूमिन्यूरिया के मरीजों को तीन ग्रुप में बांटा गया.

  • पहला ग्रुप – रोज़ाना के खाने के साथ 2–4 कप बेस बनाने वाले फल और सब्जियां (acid-reducing) शामिल की गईं.
  • दूसरा ग्रुप – रोज़ाना दो बार सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) की 4–5 गोलियां (650 mg) दी गईं.
  • तीसरा ग्रुप – केवल सामान्य मेडिकल केयर दी गई.

मैक्रोएल्ब्यूमिन्यूरिया क्यों खतरनाक है?

यह स्थिति क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ का संकेत है. इसमें समय के साथ किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क भी कई गुना बढ़ जाता है.

रिसर्च के नतीजे

अध्ययन में पाया गया कि फल और सब्जियां तथा सोडियम बाइकार्बोनेट दोनों से ही किडनी की सेहत में सुधार हुआ. लेकिन, ब्लड प्रेशर कम करने और हार्ट डिजीज का खतरा घटाने में सिर्फ फल और सब्जियां ही असरदार रहीं. बेकिंग सोडा से ये दो फायदे नहीं मिले.

दवाई की खुराक भी घटी

एक और बड़ा फायदा यह रहा कि फल और सब्जियां खाने से BP और हार्ट डिजीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की मात्रा कम करनी पड़ी. यानी मरीज को दवा के कम डोज में भी अच्छे नतीजे मिले.

विशेषज्ञ की राय

स्टडी में शामिल डॉ. मनींदर काहलों के मुताबिक, “मरीज को किडनी हेल्थ के फायदे तो बेकिंग सोडा और फल-सब्जियां दोनों से मिल सकते हैं, लेकिन BP कंट्रोल और हार्ट डिजीज से बचाव सिर्फ फल-सब्जियों से संभव है. इसलिए हाई BP के मरीजों के लिए इन्हें फाउंडेशनल ट्रीटमेंट मानना चाहिए.”

क्या करें मरीज?

रोजाना 2–4 कप हरी पत्तेदार सब्जियां, खीरा, टमाटर, गाजर, पपीता, सेब, संतरा आदि डाइट में शामिल करें.

  • जंक फूड, ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड से बचें.
  • नियमित व्यायाम और पर्याप्त पानी पिएं.

अगर आप हाई BP और किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं, तो आपकी प्लेट में फल और सब्जियां किसी भी दवा जितनी ही जरूरी हैं. यह न सिर्फ किडनी को बचाएंगी, बल्कि दिल को भी स्वस्थ रखेंगी और दवा पर निर्भरता कम करेंगी.

इसे भी पढ़ें- बच्चों के लिए रोजाना मेडिटेशन क्यों जरूरी, इससे कैसे बदल सकती है उनकी जिंदगी?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या है वॉटर बर्थ डिलीवरी, जिनमें पानी में जन्म लेता है बच्चा

क्या है वॉटर बर्थ डिलीवरी, जिनमें पानी में जन्म लेता है बच्चा


Water Birth Delivery: गर्भावस्था हर महिला के जीवन का सबसे खास और संवेदनशील समय होता है. इस दौरान मांकेवल अपने लिए, बल्कि अपने बच्चे के लिए भी सबसे सुरक्षित विकल्प चुनना चाहती है. डिलीवरी के समय ज्यादातर महिलाएं सामान्य या सीजेरियन डिलीवरी के बारे में ही सोचती हैं, लेकिन आजकल एक नया और प्राकृतिक तरीका भी लोकप्रिय हो रहा है, वॉटर बर्थ डिलीवरी. इसमें महिला गर्म पानी से भरे टब या पूल में बच्चे को जन्म देती है.

डॉ. सुप्रिया बताती हैं कि, यह तकनीक दुनिया भर में अपनाई जा रही है और इसे लेकर महिलाओं में जागरूकता भी बढ़ रही है. यानी कुछ महिलाएं इस तरह से बेबी बर्थ करवाना चाहती हैं.

ये भी पढ़े- शराब, सिगरेट या भांग… किसका नशा होता है सबसे खराब, एक्सपर्ट से जानें कौन सी चीज सबसे पहले करती है शरीर को डैमेज

वॉटर बर्थ डिलीवरी क्या होती है?

वॉटर बर्थ डिलीवरी में प्रसव प्रक्रिया पानी के अंदर होती है. इसमें महिला एक बड़े टब या पूल में बैठकर लेबर पेन का सामना करती है और बच्चे का जन्म भी पानी के अदंर ही होता है. कहा जाता है कि, यह तरीका मां और बच्चे दोनों के लिए नेचुरल और आरामदायक होता है, क्योंकि पानी का गर्म तापमान शरीर को रिलैक्स करता है और डिलीवरी की प्रक्रिया को आसान बनाता है.

वॉटर बर्थ डिलीवरी के फायदे

  • कम दर्द का अनुभव पानी में होने से शरीर रिलैक्स हो जाता है, जिससे लेबर पेन थोड़ा कम महसूस होता है
  • कम तनाव और डर गर्म पानी मानसिक तनाव को घटाने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है
  • सीजेरियन की संभावना कम कई रिसर्च में पाया गया है कि वॉटर बर्थ डिलीवरी से सी-सेक्शन का खतरा कम हो सकता है
  • बेबी के लिए आरामदायक माहौल बच्चा नौ महीनों तक मां की कोख में फ्लूड (पानी जैसे वातावरण) में ही रहता है, इसलिए पानी में जन्म लेने से उसे ज्यादा सहज महसूस होता है
  • रिकवरी जल्दी होती है पानी की वजह से डिलीवरी के दौरान शरीर पर अधिक दबाव नहीं पड़ता और मां जल्दी रिकवर कर पाती है

वॉटर बर्थ डिलीवरी आधुनिक समय में मां और बच्चे दोनों के लिए एक नेचुरल और कम दर्द वाला अनुभव हो सकता है. हालांकि, इसे अपनाने से पहले अपनी मेडिकल हिस्ट्री और सेहत को ध्यान में रखकर डॉक्टर से सलाह जरूर लें. सही परिस्थितियों में यह तकनीककेवल सुरक्षित है, बल्कि महिलाओं के लिए एक सुखद और यादगार अनुभव भी बन सकती है.

इसे भी पढ़ें- बच्चों के लिए सोने का सही वक्त कौन-सा, जानें कब और कितना सोना सबसे सही?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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किडनी में सूजन की ओर इशारा करते हैं शरीर में दिखने वाले ये 6 संकेत, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

किडनी में सूजन की ओर इशारा करते हैं शरीर में दिखने वाले ये 6 संकेत, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास


आंखों के नीचे सूजन: सुबह उठते ही अगर आंखों के नीचे लगातार सूजन दिखाई देती है, तो यह किडनी में समस्या का संकेत हो सकता है. किडनी प्रोटीन को सही तरीके से फ़िल्टर नहीं कर पाती, जिससे चेहरे पर पफीनेस बढ़ जाती है.

पैरों और टखनों में सूजन: किडनी जब शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह फ्लूइड पैरों और टखनों में जमा होने लगता है. यह किडनी इंफ्लेमेशन का शुरुआती लक्षण हो सकता है.

पैरों और टखनों में सूजन: किडनी जब शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह फ्लूइड पैरों और टखनों में जमा होने लगता है. यह किडनी इंफ्लेमेशन का शुरुआती लक्षण हो सकता है.

बार-बार पेशाब आना: किडनी में सूजन की वजह से पेशाब की मात्रा बदल सकती है. कभी बहुत बार पेशाब आना, तो कभी बहुत कम, दोनों ही स्थितियां खतरे की घंटी हैं। साथ ही पेशाब का रंग गाढ़ा होना भी किडनी की समस्या की ओर इशारा करता है.

बार-बार पेशाब आना: किडनी में सूजन की वजह से पेशाब की मात्रा बदल सकती है. कभी बहुत बार पेशाब आना, तो कभी बहुत कम, दोनों ही स्थितियां खतरे की घंटी हैं। साथ ही पेशाब का रंग गाढ़ा होना भी किडनी की समस्या की ओर इशारा करता है.

थकान और कमजोरी महसूस होना: किडनी सही तरीके से काम न करने पर खून में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं. इससे शरीर जल्दी थक जाता है, कमजोरी महसूस होती है और काम करने की क्षमता घट जाती है.

थकान और कमजोरी महसूस होना: किडनी सही तरीके से काम न करने पर खून में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं. इससे शरीर जल्दी थक जाता है, कमजोरी महसूस होती है और काम करने की क्षमता घट जाती है.

भूख न लगना और जी मिचलाना: किडनी की सूजन के कारण खून में वेस्ट मटेरियल जमा हो जाता है, जिससे पेट संबंधी दिक्कतें होने लगती हैं. भूख कम लगना, जी मिचलाना या उल्टी की इच्छा होना किडनी की समस्या का सीधा संकेत हो सकता है.

भूख न लगना और जी मिचलाना: किडनी की सूजन के कारण खून में वेस्ट मटेरियल जमा हो जाता है, जिससे पेट संबंधी दिक्कतें होने लगती हैं. भूख कम लगना, जी मिचलाना या उल्टी की इच्छा होना किडनी की समस्या का सीधा संकेत हो सकता है.

सांस लेने में तकलीफ: किडनी की सूजन से शरीर में पानी रुक जाता है, जिससे फेफड़ों में भी तरल भरने लगता है. यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है और तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

सांस लेने में तकलीफ: किडनी की सूजन से शरीर में पानी रुक जाता है, जिससे फेफड़ों में भी तरल भरने लगता है. यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है और तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

Published at : 16 Aug 2025 06:29 PM (IST)


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