सोने से पहले पिएं दालचीनी का पानी, इन 5 बीमारियों की हो जाएगी छुट्टी

सोने से पहले पिएं दालचीनी का पानी, इन 5 बीमारियों की हो जाएगी छुट्टी


Cinnamon Water Benefits: आजकल हमारी जीवनशैली इतनी व्यस्त और अस्वस्थ हो चुकी है कि, शरीर को रोजाना कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है. फास्ट फूड, तनाव और कम नींद ने हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर दिया है. ऐसे में अगर आप एक छोटा-सा बदलाव अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, तो शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सकता है.

डॉ. बिमल छाजेड़ के अनुसार, दालचीनी का पानी न केवल स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी सुरक्षा प्रदान करता है. आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में…

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ब्लड शुगर को करता है कंट्रोल

दालचीनी में प्राकृतिक गुण होते हैं जो रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. अगर आप रात को सोने से पहले दालचीनी का पानी पीते हैं, तो यह सुबह तक ब्लड शुगर को संतुलित बनाए रखता है. यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें डायबिटीज की समस्या है या जो इसके जोखिम में हैं.

पाचन तंत्र को बनाता है मजबूत

दालचीनी का पानी पाचन शक्ति को बढ़ाने में भी मदद करता है। यह गैस, अपच और पेट की सूजन जैसी समस्याओं को दूर करता है. रात में सोने से पहले इसे पीने से खाना अच्छे से पचता है और अगली सुबह पेट हल्का और आरामदायक महसूस होता है.

हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

दालचीनी का पानी हृदय को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है. यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है. इससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है और रक्तचाप संतुलित रहता है.

प्रतिरक्षा प्रणाली को करता है मजबूत

शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए दालचीनी का पानी बेहद उपयोगी है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं जो शरीर में संक्रमण से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं. ठंड, खांसी और जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों से भी यह आपको दूर रखता है.

वजन घटाने में मददगार

अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं तो दालचीनी का पानी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और शरीर में फैट जलाने की प्रक्रिया को तेज करता है. सोने से पहले पीने पर यह अगले दिन तक शरीर में कैलोरी बर्न करने में मदद करता है.

कैसे बनाएं दालचीनी का पानी?

  • एक गिलास पानी उबालें
  • इसमें 1 इंच दालचीनी की छाल डालें
  • 5–7 मिनट उबालें और फिर छान लें
  • रात को सोने से 30 मिनट पहले इसे गर्म या हल्का ठंडा पीएं

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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घर में ही कर लें यह छोटा-सा टेस्ट, ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी का लग जाएगा पता

घर में ही कर लें यह छोटा-सा टेस्ट, ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी का लग जाएगा पता


अगर आप सोचते हैं कि ब्रेन की सेहत जांचने के लिए हमेशा बड़े और महंगे टेस्ट ही जरूरी होते हैं, तो यह सच नहीं है. कुछ आसान घरेलू टेस्ट भी आपके ब्रेन हेल्थ के बारे में शुरुआती संकेत दे सकते हैं. इनमें से एक है RAM टेस्ट यानी Rapid Alternate Movement टेस्ट.

RAM टेस्ट क्या है?

RAM टेस्ट एक सिंपल न्यूरोलॉजिकल टेस्ट है, जो आपके दिमाग और मांसपेशियों के बीच कोऑर्डिनेशन को चेक करता है. खासतौर पर यह टेस्ट सेरेबेलम की सेहत को जांचने में मदद करता है, जो बैलेंस, मांसपेशियों के तालमेल और मूवमेंट को कंट्रोल करता है. इस टेस्ट में आपको तेजी से हाथ पलटने या उंगलियों से खास पैटर्न में टैपिंग करने की जरूरत होती है. अगर इस टेस्ट के दौरान आपकी गति धीमी हो जाए या मूवमेंट स्मूथ न हो, तो यह ब्रेन या नर्वस सिस्टम में दिक्कत का संकेत हो सकता है. यह समस्या ब्रेन इंजरी, स्ट्रोक या ट्यूमर जैसी बीमारियों में दिख सकती है.

RAM टेस्ट कैसे किया जाता है?

  • कुर्सी पर आराम से बैठ जाएं और दोनों पैर जमीन पर रखें.
  • अपने हाथों को जांघों पर रख लें, हथेलियां नीचे की तरफ हों.
  • हथेलियों को ऊपर की तरफ पलटें और फिर तुरंत वापस नीचे करें. यह मूवमेंट लगातार 10 सेकंड तक जितनी जल्दी और स्मूथ हो सके करें.

उंगलियों वाला वर्जन करने के लिए, अपने अंगूठे को पहले index finger से, फिर middle finger, फिर ring finger और आखिर में little finger से टच करें. इसके बाद उल्टे order में दोहराएं. यह sequence लगातार 10 सेकंड तक जितना fast और smooth हो सके करें.

RAM टेस्ट क्या बताता है?

यह टेस्ट आपके ब्रेन के मोटर कोऑर्डिनेशन को चेक करता है. अगर टेस्ट करते समय आपके मूवमेंट स्लो, अनस्टेबल या अनकॉर्डिनेटेड हों, तो यह सेरेबेलम या उससे जुड़े नर्व पाथवे में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, ब्रेन इंजरी और ट्यूमर जैसी बीमारियों में यह समस्या देखी जा सकती है.

कब डॉक्टर को दिखाएं?

अगर टेस्ट के दौरान आपको दिक्कत हो और साथ में चक्कर आना, बैलेंस बिगड़ना या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

RAM टेस्ट की लिमिटेशन

यह टेस्ट सिर्फ शुरुआती संकेत देता है. यह कोई बीमारी डायरेक्ट डायग्नोज नहीं कर सकता. स्ट्रेस, थकान या पोषण की कमी भी टेस्ट रिजल्ट को प्रभावित कर सकते हैं. सही कारण जानने के लिए पूरा न्यूरोलॉजिकल चेकअप जरूरी है. RAM टेस्ट एक आसान तरीका है जिससे आप घर बैठे अपने ब्रेन कोऑर्डिनेशन का अंदाजा लगा सकते हैं. लेकिन अगर इसमें कोई गड़बड़ी दिखे तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बेबी की गुलाबी आंख के लिए नेचुरल केयर, घर पर आजमाएं ये आसान टिप्स

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साफ और गुनगुना पानी से आंख धोना: गुनगुना पानी आंख की सफाई में मदद करता है और उसमें जमी गंदगी या संक्रमण पैदा करने वाले तत्वों को हटाता है. दिन में 2 बार बच्चे की आंख को हल्के हाथ से गुनगुने पानी से साफ करें. पानी हमेशा उबालकर ठंडा किया हुआ और साफ होना चाहिए.

कॉटन पैड से हल्की सफाई: स्टेराइल कॉटन पैड को गुनगुने पानी में भिगोकर आंख के कोनों में जमा डिस्चार्ज को धीरे-धीरे साफ करें. इससे बैक्टीरिया फैलने का खतरा कम होता है. हर सफाई के लिए नया कॉटन पैड इस्तेमाल करें.

कॉटन पैड से हल्की सफाई: स्टेराइल कॉटन पैड को गुनगुने पानी में भिगोकर आंख के कोनों में जमा डिस्चार्ज को धीरे-धीरे साफ करें. इससे बैक्टीरिया फैलने का खतरा कम होता है. हर सफाई के लिए नया कॉटन पैड इस्तेमाल करें.

मां के दूध की कुछ बूंदें: मां का दूध न केवल पोषण देता है बल्कि इसमें प्राकृतिक एंटीबॉडी भी होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकते हैं. डॉक्टर की सलाह के बाद, प्रभावित आंख में स्तन दूध की 2 बूंद डाल सकते हैं. यह उपाय तभी अपनाएं जब डॉक्टर अनुमति दें.

मां के दूध की कुछ बूंदें: मां का दूध न केवल पोषण देता है बल्कि इसमें प्राकृतिक एंटीबॉडी भी होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकते हैं. डॉक्टर की सलाह के बाद, प्रभावित आंख में स्तन दूध की 2 बूंद डाल सकते हैं. यह उपाय तभी अपनाएं जब डॉक्टर अनुमति दें.

गुलाब जल की ठंडी सिकाई: गुलाब जल में ठंडक और आराम पहुंचाने वाले गुण होते हैं. एक साफ कॉटन पैड को फ्रिज में रखे गुलाब जल में भिगोकर 2–3 मिनट के लिए आंख पर रखें. गुलाब जल हमेशा शुद्ध और बिना केमिकल वाला होना चाहिए.

गुलाब जल की ठंडी सिकाई: गुलाब जल में ठंडक और आराम पहुंचाने वाले गुण होते हैं. एक साफ कॉटन पैड को फ्रिज में रखे गुलाब जल में भिगोकर 2–3 मिनट के लिए आंख पर रखें. गुलाब जल हमेशा शुद्ध और बिना केमिकल वाला होना चाहिए.

धूल और तेज रोशनी से बचाव: गुलाबी आंख में धूल और तेज रोशनी से जलन बढ़ सकती है. बच्चे को ऐसी जगह रखें जहां हवा और धूल कम हो, और बाहर जाते समय हल्का कपड़ा आंखों पर ढकें. धूप में लंबे समय तक न रखें.

धूल और तेज रोशनी से बचाव: गुलाबी आंख में धूल और तेज रोशनी से जलन बढ़ सकती है. बच्चे को ऐसी जगह रखें जहां हवा और धूल कम हो, और बाहर जाते समय हल्का कपड़ा आंखों पर ढकें. धूप में लंबे समय तक न रखें.

डॉक्टर से समय पर परामर्श: अगर आंख की लालिमा, सूजन या पानी आना 2  दिन में कम न हो, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें. घर के नुस्खे केवल शुरुआती और हल्के मामलों में ही अपनाएं. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा या आई ड्रॉप न दें.

डॉक्टर से समय पर परामर्श: अगर आंख की लालिमा, सूजन या पानी आना 2 दिन में कम न हो, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें. घर के नुस्खे केवल शुरुआती और हल्के मामलों में ही अपनाएं. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा या आई ड्रॉप न दें.

Published at : 15 Aug 2025 05:57 PM (IST)


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इन 6 कारणों से होता है लीवर सिरोसिस, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां

इन 6 कारणों से होता है लीवर सिरोसिस, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां


ज्यादा शराब का सेवन: अत्यधिक शराब पीना लीवर सिरोसिस का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. शराब लीवर पर सीधा असर डालती है और लंबे समय तक सेवन से लीवर की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं. अगर आप रोज़ाना या सप्ताह में कई बार शराब पीते हैं, तो लीवर पर लगातार दबाव पड़ता है और स्कार टिश्यू बनने लगता है.

हेपेटाइटिस की दिक्कत: हेपेटाइटिस B और C वायरस लंबे समय तक शरीर में रहने पर लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं. इससे क्रॉनिक इंफेक्शन होता है और धीरे-धीरे लीवर सिरोसिस में बदल सकता है. समय-समय पर हेपेटाइटिस की जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार वैक्सीन या इलाज करवाएं.

हेपेटाइटिस की दिक्कत: हेपेटाइटिस B और C वायरस लंबे समय तक शरीर में रहने पर लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं. इससे क्रॉनिक इंफेक्शन होता है और धीरे-धीरे लीवर सिरोसिस में बदल सकता है. समय-समय पर हेपेटाइटिस की जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार वैक्सीन या इलाज करवाएं.

फैटी लिवर: गलत खानपान, ज्यादा जंक फूड और मोटापा लीवर में फैट जमा कर देता है. अगर यह फैट लंबे समय तक जमा रहे, तो यह लीवर को नुकसान पहुंचाकर सिरोसिस का कारण बन सकता है. संतुलित आहार लें, वजन नियंत्रित रखें और रोज़ाना एक्सरसाइज करें.

फैटी लिवर: गलत खानपान, ज्यादा जंक फूड और मोटापा लीवर में फैट जमा कर देता है. अगर यह फैट लंबे समय तक जमा रहे, तो यह लीवर को नुकसान पहुंचाकर सिरोसिस का कारण बन सकता है. संतुलित आहार लें, वजन नियंत्रित रखें और रोज़ाना एक्सरसाइज करें.

ज्यादा दवाइयों का सेवन: कुछ दवाइयां जैसे पेनकिलर्स, स्टेरॉयड या बिना डॉक्टर की सलाह के ली जाने वाली दवाएं लीवर पर दबाव डालती हैं. लंबे समय तक इनका गलत इस्तेमाल लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है. दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लें और अनावश्यक मेडिसिन का सेवन न करें.

ज्यादा दवाइयों का सेवन: कुछ दवाइयां जैसे पेनकिलर्स, स्टेरॉयड या बिना डॉक्टर की सलाह के ली जाने वाली दवाएं लीवर पर दबाव डालती हैं. लंबे समय तक इनका गलत इस्तेमाल लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है. दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लें और अनावश्यक मेडिसिन का सेवन न करें.

केमिकल और प्रदूषण का असर: अगर आप ऐसे माहौल में काम करते हैं जहां केमिकल, पेंट, सॉल्वेंट्स या जहरीली गैसों का ज्यादा इस्तेमाल होता है, तो यह धीरे-धीरे लीवर को डैमेज कर सकता है. काम करते समय सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें और डिटॉक्स डाइट अपनाएं.

केमिकल और प्रदूषण का असर: अगर आप ऐसे माहौल में काम करते हैं जहां केमिकल, पेंट, सॉल्वेंट्स या जहरीली गैसों का ज्यादा इस्तेमाल होता है, तो यह धीरे-धीरे लीवर को डैमेज कर सकता है. काम करते समय सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें और डिटॉक्स डाइट अपनाएं.

खराब डाइट और पोषण की कमी: जरूरी पोषक तत्वों की कमी लीवर की सेल रिपेयर प्रक्रिया को धीमा कर देती है. खासकर प्रोटीन और विटामिन की कमी से लीवर कमजोर हो जाता है. डाइट में हरी सब्जियां, फल, दालें और हेल्दी फैट शामिल करें.

खराब डाइट और पोषण की कमी: जरूरी पोषक तत्वों की कमी लीवर की सेल रिपेयर प्रक्रिया को धीमा कर देती है. खासकर प्रोटीन और विटामिन की कमी से लीवर कमजोर हो जाता है. डाइट में हरी सब्जियां, फल, दालें और हेल्दी फैट शामिल करें.

Published at : 15 Aug 2025 04:57 PM (IST)


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