जानवरों को भी काटते हैं मच्छर, क्या उनको भी हो जाता है डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया?

जानवरों को भी काटते हैं मच्छर, क्या उनको भी हो जाता है डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया?


बरसात आते ही लोगों के लिए सबसे चिंता की बात जो होती है वह है मच्छरों का आतंक. बरसात में इनका अलग भौकाल रहता है, यानी कि लोगों को इनसे बचने के लिए पूरी तैयारी करनी होती है. हम सब जानते हैं कि मच्छर इंसानों को काटते हैं और डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियां फैलाते हैं. इससे हर साल सैकडों लोगों की मौत भी हो जाती है.  लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मच्छर जानवरों को भी काटते हैं? और अगर काटते हैं, तो क्या उन्हें भी ये बीमारियां हो सकती हैं? वैज्ञानिकों के शोध से इस सवाल का जवाब मिला है, जो हर पालतू जानवर प्रेमी के लिए जानना जरूरी है.

मच्छर जानवरों को क्यों काटते हैं

मादा मच्छर अपने अंडों के विकास के लिए खून चूसती है. ये खून इंसानों के साथ-साथ गाय, बकरी, कुत्ते, बिल्ली, घोड़े, पक्षी और यहां तक कि रेंगने वाले जीवों से भी लिया जा सकता है. यानी, इंसान ही नहीं, जानवर भी मच्छरों का निशाना बनते हैं.

क्या जानवरों को डेंगू हो सकता है?

यूरोपियन पब्लिक हेल्थ रिसर्च (Europe PMC) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, कई घरेलू और जंगली जानवरों में डेंगू वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज पाई गई हैं. इसका मतलब है कि ये जानवर किसी समय डेंगू वायरस के संपर्क में आए थे. शोध में पाया गया:

  • लगभग 34 प्रतिशत सूअरों में डेंगू एंटीबॉडीज पाया जाता है
  • 11 प्रतिशत पक्षियों में मच्छरों के खिलाफ एंटीबॉडीज
  • वहीं यह आंकड़ा 4 प्रतिशत घरेलू पशुओं (गाय, बकरी) में
  •  अगर कुत्तों की बात करें तो 1.6 कुत्तों में एंटीबॉडीज होती है

हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इन जानवरों में बीमारी के लक्षण इंसानों जैसे नहीं दिखते और यह स्पष्ट नहीं है कि वे वायरस आगे फैला सकते हैं या नहीं.

मलेरिया का खतरा

मलेरिया Anopheles मच्छर से फैलता है और इसका Plasmodium मुख्य रूप से इंसानों को संक्रमित करता है. हालांकि मलेरिया वाले मच्छर कभी-कभी जानवरों को काटते हैं, लेकिन शोध में पाया गया है कि इस तरह के मच्छर  ज्यादातर जानवरों में पनप नहीं पाता. यानी, मलेरिया का खतरा इंसानों में ज्यादा है.

चिकनगुनिया और जानवर

चिकनगुनिया Aedes aegypti और Aedes albopictus मच्छरों से फैलता है. ये मच्छर जानवरों को भी काटते हैं, लेकिन अब तक यह साबित नहीं हुआ है कि पालतू या घरेलू जानवरों को चिकनगुनिया की बीमारी होती है. यह बीमारी लगभग पूरी तरह से इंसानों तक सीमित पाई गई है.

 

मच्छर जानवरों में कुछ अन्य बीमारियां भी फैला सकते हैं:

  • जापानी एन्सेफेलाइटिस (JE) – यह खासकर सूअरों और कुछ पक्षियों में पाया जाता है और मच्छर इसे इंसानों में भी फैला सकते हैं.
  • वेस्ट नाइल वायरस (WNV) – यह गाय, बकरी, घोड़े, ऊंट और पक्षियों में पाया गया है.

मच्छर इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी काटते हैं. कुछ मामलों में जानवरों में डेंगू जैसी बीमारियों के एंटीबॉडीज़ पाए गए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे इंसानों की तरह बीमार पड़ते हैं. मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले जानवरों में बेहद कम हैं. हालांकि, जापानी एन्सेफेलाइटिस और वेस्ट नाइल वायरस जैसी बीमारियां जानवरों में पाई जाती हैं और ये इंसानों तक फैल सकती हैं.

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शराब, सिगरेट या भांग… किसका नशा होता है सबसे खराब, एक्सपर्ट से जानें कौन सी चीज सबसे पहले करत

शराब, सिगरेट या भांग… किसका नशा होता है सबसे खराब, एक्सपर्ट से जानें कौन सी चीज सबसे पहले करत


Dangerous Addiction for Health: लोग अक्सर मौज-मस्ती, तनाव कम करने या दोस्तों के साथ वक्त बिताने के लिए नशे का सहारा लेते हैं. लेकिन सच यह है कि, हर तरह का नशा शरीर के किसी न किसी हिस्से को नुकसान जरूर पहुंचाता है. फर्क बस इतना है कि कोई नशा धीरे-धीरे असर करता है और कोई बहुत जल्दी. शराब, सिगरेट और भांग, तीनों ही अलग तरह से शरीर को डैमेज करते हैं, लेकिन इनमें से एक का असर सबसे घातक और लंबा चलने वाला होता है.

डॉ. सरीन बताते हैं कि, नशे की लत किसी भी रूप में शरीर और दिमाग दोनों के लिए खतरनाक होती है, लेकिन इनमें से कौन सा नशा सबसे तेजी से और गंभीर रूप से शरीर को नुकसान पहुंचाता है, यह जानना जरूरी है.

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शराब लिवर की दुश्मन

  • लिवर डैमेज शराब सीधे लिवर पर असर डालती है और फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस जैसी बीमारियों का कारण बनती है
  • ब्रेन पर असर लंबे समय तक शराब पीने से स्मरण शक्ति कम हो सकती है और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है
  • हार्ट हेल्थ शराब का अधिक सेवन ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा देता है

सिगरेट में जहर

  • फेफड़ों का दुश्मन सिगरेट पीने से लंग कैंसर, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं
  • ब्लड सर्कुलेशन पर असर निकोटिन धमनियों को संकरा करता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है
  • त्वचा और इम्यून सिस्टम सिगरेट पीने वालों की त्वचा जल्दी बूढ़ी दिखने लगती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है

भांग पीने से क्या हो सकता है

  • ब्रेन फंक्शन पर असर भांग का नशा स्मृति, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है
  • मानसिक स्वास्थ्य लंबे समय तक सेवन से एंग्जायटी, डिप्रेशन और मानसिक भ्रम की समस्या हो सकती है
  • शरीर पर धीमा असर भांग का असर तुरंत जानलेवा कम होता है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को गहरी चोट पहुंचा सकता है

तीनों में से सबसे खतरनाक कौन?

  • सिगरेट में मौजूद निकोटिन और टार तेजी से फेफड़ों और हार्ट को नुकसान पहुंचाते हैं, और इसका असर स्थायी होता है
  • शराब लिवर और हार्ट के लिए बेहद खतरनाक है, लेकिन कुछ मामलों में इसकी लत को कंट्रोल करना संभव है
  • भांग का असर मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक है, लेकिन यह शराब और सिगरेट जितना शारीरिक नुकसान जल्दी नहीं करता
  • सबसे खतरनाक नशा सिगरेट है, क्योंकि यह हर कश में पूरे शरीर में जहर पहुंचाता है और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का मुख्य कारण है

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पेशाब में बन रहा है ज्यादा झाग? समझ लीजिए हो गई ये बीमारी

पेशाब में बन रहा है ज्यादा झाग? समझ लीजिए हो गई ये बीमारी


Foam in Urine Causes: हम अक्सर पानी में साबुन डालने पर झाग बनते देखते हैं, लेकिन अगर पेशाब में बिना किसी वजह के बार-बार झाग बने तो यह सामान्य नहीं है. शुरुआत में यह लक्षण मामूली लग सकता है, लेकिन यह शरीर के अंदर एक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. झागदार पेशाब अक्सर तब बनता है जब मूत्र में प्रोटीन की मात्रा असामान्य रूप से बढ़ जाती है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है.

डॉ. आदित्य शर्मा का कहना है कि, अगर पेशाब में बार-बार या लगातार ज्यादा झाग बन रहा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह शरीर के अंदर किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है, खासकर किडनी से जुड़ी बीमारियों की दिक्कत हो सकती है.

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पेशाब में झाग आने के मुख्य कारण

किडनी रोग

जब किडनी प्रोटीन को ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती, तो यह मूत्र में आने लगता है और झाग पैदा करता है

डिहाइड्रेशन

शरीर में पानी की कमी होने से मूत्र गाढ़ा हो जाता है और उसमें झाग बनने की संभावना बढ़ जाती है

UTI की समस्या

संक्रमण की वजह से भी मूत्र में असामान्य बदलाव और झाग आ सकते हैं

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर

ये बीमारियां किडनी पर दबाव डालती हैं और पेशाब में झाग बनने का कारण बन सकती हैं

कब करवाएं जांच?

अगर आपको बार-बार पेशाब में झाग बनता नजर आ रहा है और यह कई दिनों तक बना हुआ है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर आमतौर पर यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट और किडनी फंक्शन टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं. इन जांचों से पता चलता है कि झाग आने का कारण सामान्य है या किसी गंभीर बीमारी की शुरुआत.

बचाव के उपाय

  • पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं डिहाइड्रेशन से बचने के लिए दिनभर में 7-8 गिलास पानी पिएं
  • नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करें ज्यादा नमक किडनी पर दबाव डालता है
  • ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल में रखें नियमित जांच कराएं
  • संतुलित आहार लें प्रोटीन की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें, खासकर अगर किडनी में समस्या है

झागदार पेशाब को सिर्फ मामूली लक्षण समझकर अनदेखा करना बड़ी गलती है. यह कई बार किडनी डैमेज, लीवर रोग, या मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का शुरुआती संकेत होता है. समय रहते जांच और इलाज करवाने से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है. 

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अचानक शरीर पर उभरने लगे हैं लाल-लाल तिल, कहीं ये कैंसर तो नहीं?

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Redness on Skin Cause Cancer: हमारे शरीर पर छोटे-छोटे तिल और धब्बे आमतौर पर सामान्य माने जाते हैं. लेकिन अगर अचानक शरीर पर लाल-लाल तिल उभरने लगें, तो यह केवल सौंदर्य की समस्या नहीं, बल्कि किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. कई बार लोग इस पर ध्यान नहीं देते, लेकिन कुछ लाल तिल कैंसर या अन्य गंभीर रोगों की चेतावनी भी हो सकते हैं. 

डॉ. विवेक सुकुमार बताते हैं कि, अगर अचानक आपके साथ ऐसा हो रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी ये आगे चलकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है. 

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लाल तिल क्यों उभरते हैं 

  • हार्मोनल बदलाव: शरीर में हार्मोन का असंतुलन त्वचा पर लाल तिल उत्पन्न कर सकता है
  • एलर्जी और त्वचा की संवेदनशीलता: कुछ फूड्स, दवाइयाँ या स्किन प्रोडक्ट्स से त्वचा पर लाल धब्बे या तिल उभर सकते हैं
  • विरासत: कभी-कभी यह जेनेटिक कारणों से भी हो सकता है
  • इन सामान्य कारणों में लाल तिल आम तौर पर छोटे, स्थिर और दर्द रहित होते हैं

कब सावधान रहें 

  • तिल का आकार या रंग बदलना – अचानक बड़ा होना या रंग में बदलाव
  • खुरचने पर खून बहना – बिना चोट के तिल से खून आना
  • दर्द या खुजली – सामान्य तिल दर्द या खुजली नहीं देते
  • असमान आकार और असिमेट्रिक बॉर्डर – गोल या चिकने किनारों की बजाय अजीब आकृति के तिल
  • शरीर के नए हिस्सों पर तिल उभरना – खासकर अगर यह वयस्क अवस्था में अचानक हो
  • यदि ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डर्मेटोलॉजिस्ट या ऑनकॉलॉजिस्ट से संपर्क करें

क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए 

  • सनस्क्रीन का नियमित उपयोग करें, ताकि त्वचा सूरज की हानिकारक किरणों से सुरक्षित रहे
  • त्वचा की नियमित जांच करें, खासकर नए तिल या धब्बों के लिए
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ – संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, और धूम्रपान से दूरी
  • डॉक्टर से समय पर परामर्श – यदि किसी भी तिल में असामान्य बदलाव दिखाई दे

अचानक शरीर पर लाल-लाल तिल उभरना हमेशा डर का कारण नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं. समय पर पहचान और सही डॉक्टर से सलाह लेने से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है. क्योंकि स्वस्थ त्वचा और स्वस्थ शरीर आपके लिए बहुत जरूरी है. 

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अब गोवा में इलाज हुआ बेहद सस्ता और आसान, सरकार की नई योजना से मरीजों को मिलेगी राहत

अब गोवा में इलाज हुआ बेहद सस्ता और आसान, सरकार की नई योजना से मरीजों को मिलेगी राहत


इस पॉलिसी के तहत सरकार दवाइयां, मेडिकल उपकरण और जांच कम कीमत पर खरीदेगी. इससे बजट का सही इस्तेमाल होगा और ज्यादा मरीजों को इलाज मिलेगा.

स्वास्थ्य मंत्री विशालजित राणे ने कहा कि गोवा देश का पहला राज्य है जिसने यह नीति अपनाई है. इसके जरिए सरकार और दवा कंपनियों के बीच गोपनीय कीमत समझौते संभव होंगे.

स्वास्थ्य मंत्री विशालजित राणे ने कहा कि गोवा देश का पहला राज्य है जिसने यह नीति अपनाई है. इसके जरिए सरकार और दवा कंपनियों के बीच गोपनीय कीमत समझौते संभव होंगे.

इस पहल की शुरुआत लंग कैंसर के इलाज से होने वाली है. बाद में इसे अन्य कैंसर और गंभीर बीमारियों के लिए भी लागू किया जाएगा.

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कैंसर, जेनेटिक रोग और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज सालाना 50 लाख रुपये तक खर्चीले हो सकते हैं. इस पॉलिसी से आम मरीजों के लिए यह आसान होगा.

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गोवा में हर साल लगभग 1,500 नए कैंसर मरीज सामने आते हैं. इसमें सबसे ज्यादा ब्रैस्ट कैंसर और उसके बाद ओरल कैंसर शामिल हैं.

गोवा में हर साल लगभग 1,500 नए कैंसर मरीज सामने आते हैं. इसमें सबसे ज्यादा ब्रैस्ट कैंसर और उसके बाद ओरल कैंसर शामिल हैं.

सरकार का कहना है कि हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत बनाना जरूरी है ताकि बढ़ते कैंसर और दुर्लभ बीमारियों के मरीजों का सही इलाज हो सके.

सरकार का कहना है कि हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत बनाना जरूरी है ताकि बढ़ते कैंसर और दुर्लभ बीमारियों के मरीजों का सही इलाज हो सके.

एक कमेटी बनाई गई है जो दवाइयों और उपकरणों की सही कीमत तय करेगी. यह कंपनियों से सबसे अच्छी कीमत पर समझौते करेगी ताकि मरीजों को फायदा हो.

एक कमेटी बनाई गई है जो दवाइयों और उपकरणों की सही कीमत तय करेगी. यह कंपनियों से सबसे अच्छी कीमत पर समझौते करेगी ताकि मरीजों को फायदा हो.

Published at : 15 Aug 2025 10:15 AM (IST)


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क्या आप भी NEAT पीते हैं शराब, जानें कौन-कौन से बॉडी पार्ट्स तेजी से होते हैं खराब?

क्या आप भी NEAT पीते हैं शराब, जानें कौन-कौन से बॉडी पार्ट्स तेजी से होते हैं खराब?


अगर आप शराब पीते हैं, वो भी बिना पानी, सोडा या किसी मिक्सर के, यानी नीट, तो सावधान हो जाइए. नीट ड्रिंक का मतलब है शराब को सीधे गिलास में डालकर पीना, बिना किसी डाइल्यूशन के. ऐसा करने से शराब का असर शरीर पर ज्यादा तेज और गहरा पड़ता है. कई लोग इसे स्टाइल या टेस्ट के लिए पीते हैं, लेकिन ये आपके कई बॉडी पार्ट्स को तेजी से खराब कर सकता है. आइए जानते हैं, कौन-कौन से अंग ज्यादा प्रभावित होते हैं.

 लिवर 

लिवर शरीर का सबसे बड़ा डिटॉक्स सेंटर है, जो शराब में मौजूद टॉक्सिन को फिल्टर करता है. जब आप नीट शराब पीते हैं, तो इसमें अल्कोहल का लेवल बहुत ज्यादा होता है, जिससे लिवर पर सीधा दबाव पड़ता है. लंबे समय तक और ज्यादा मात्रा में पीने से फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस और लिवर फेलियर का खतरा बढ़ जाता है.

पाचन सिस्टम पर प्रभाव

नीट शराब का स्ट्रॉन्ग असर पेट की लाइनिंग को नुकसान पहुंचाता है. इससे एसिडिटी, अल्सर और गैस्ट्रिक ब्लीडिंग हो सकती है. लंबे समय तक स्ट्रॉन्ग शराब पीने से पेट के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है.

हार्ट

ज्यादा अल्कोहल दिल की धड़कन को अनियमित कर सकता है और ब्लड प्रेशर को तेजी से बढ़ा सकता है. नीट शराब हार्ट की मांसपेशियों को कमजोर कर सकती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है.

ब्रेन

अल्कोहल का सीधा असर दिमाग के न्यूरॉन्स पर पड़ता है. नीट शराब ब्रेन सेल्स को जल्दी डैमेज कर देती है, जिससे याददाश्त कमजोर होना, बैलेंस बिगड़ना और लंबे समय में डिमेंशिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं.

 किडनी 

शराब शरीर से पानी खींच लेती है, जिससे डिहाइड्रेशन और किडनी पर ज्यादा दबाव पड़ता है. नीट शराब में अल्कोहल ज्यादा होने के कारण किडनी को टॉक्सिन फिल्टर करने में परेशानी होती है, जिससे किडनी फेलियर का खतरा बढ़ सकता है.

स्किन

नीट शराब ब्लड सर्कुलेशन और हाइड्रेशन लेवल को खराब करती है, जिससे त्वचा ड्राई, डल और समय से पहले बूढ़ी दिखने लगती है.

 इम्यून सिस्टम 

ज्यादा स्ट्रॉन्ग शराब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है, जिससे बार-बार बीमारियां हो सकती हैं.

नीट पीने के खतरे को कैसे कम करें?

  • शराब को पानी, सोडा या जूस के साथ मिक्स करके पिएं.
  • हफ्ते में 1-2 बार से ज्यादा न पिएं.
  • पीने से पहले और बाद में खूब पानी पिएं.
  • खाली पेट कभी शराब न पिएं.

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