हार्ट अटैक आने वाला है या नहीं? ये टेस्ट करा लिए तो पहले ही पता चल जाएंगे ‘दिल’ के राज

हार्ट अटैक आने वाला है या नहीं? ये टेस्ट करा लिए तो पहले ही पता चल जाएंगे ‘दिल’ के राज


आज के समय में दिल से जुड़ी बीमारियां दुनिया भर में सबसे ज्यादा लोगों की जान ले रही हैं. ये बीमारी इतनी आम हो गई है कि हर साल 5 में से 1 मौत इसकी वजह से हो रही है. लेकिन सबसे बड़ी परेशानी ये है कि लोगों को तब तक पता ही नहीं चलता, जब तक कोई बड़ा हादसा जैसे हार्ट अटैक नहीं हो जाता है. अक्सर हम सुनते हैं कि कोई एकदम से गिर पड़ा और उसे हार्ट अटैक आ गया. ये देखकर लगता है कि हार्ट अटैक बिना किसी चेतावनी के आता है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है. ये बीमारियां धीरे-धीरे बनती हैं, लेकिन हम इसके संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं. हम जब डॉक्टर के पास जाते हैं, तब जाकर पता चलता है कि हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है या कोलेस्ट्रॉल हाई है. लेकिन ये बीमारियां तो बहुत पहले ही शरीर में फैल चुकी होती हैं.

ये बदलाव अंदर ही अंदर लंबे समय से चल रहे होते हैं. बैठे रहने की आदत, ज्यादा तला-भुना और फास्ट फूड खाना, स्ट्रेस और नींद की कमी, तनाव और नींद की कमी ये सब आदतें हमारे दिल के लिए बहुत ही खतरनाक हैं. ये धीरे-धीरे दिल को कमजोर बना देती हैं. लेकिन थोड़े से लाइफस्टाइल में बदलाव और समय-समय पर कुछ जरूरी टेस्ट करवाने से आप इस खतरे को बहुत पहले पहचान सकते हैं और बड़ी बीमारी से खुद को बचा सकते हैं. तो चलिए जानते हैं ​कि हार्ट अटैक आने वाला है या नहीं कौन सा टेस्ट कराने से दिल के राज पहले ही पता चल जाएंगे.

कौन से टेस्ट करवा कर जान सकते हैं कि हार्ट अटैक आने वाला है या नहीं?

1. कोलेस्ट्रॉल टेस्ट – दिल की सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन और खतरा खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL)है .जब यह बढ़ जाता है, तो आर्टीज में जमा होकर ब्लॉकेज बना देता है.  ऐसे में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा देखी जाती है. वहीं Lipoprotein (a) टेस्ट से पता चलता है कि आपकी जेनेटिक हिस्ट्री से आप दिल की बीमारी के लिए कितने रिस्क पर हैं. वहीं ApoB टेस्ट आपके शरीर में मौजूद हर हानिकारक कोलेस्ट्रॉल कण की गिनती करता है. ये टेस्ट करवा लेने से आपको यह पता चल सकता है कि दिल की नली में कोई जहर तो नहीं जमा हो रहा है. 

2. ब्लड शुगर टेस्ट – डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो हार्ट के लिए सबसे ज्यादा खतरा मानी जाती है. ऐसे में A1C टेस्ट यह बताता है कि पिछले 3 महीनों में आपका ब्लड शुगर कैसा रहा, इसके अलावा फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज टेस्ट यह बताता है कि खाना न खाने पर आपकी शुगर कितनी रहती है क्योंकि ब्लड शुगर लगातार बढ़ा हुआ है, तो यह आपकी धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है. 

 3. किडनी और मेटाबोलिक हेल्थ टेस्ट  – आपकी किडनी का दिल से गहरा रिश्ता है. ऐसे में अगर किडनी खराब होगी तो दिल पर दबाव पड़ेगा, और यह सीधा हार्ट अटैक का खतरा बन सकता है. ऐसे में क्रिएटिनिन और eGFR टेस्ट बताते हैं कि किडनी कितना सही काम कर रही है. साथ ही सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस जरूरी है ताकि हार्ट रेट नॉर्मल रहे.

4. हार्मोन और सूजन के टेस्ट – इसमें थायराइड टेस्ट (TSH, T4) से यह पता चलता है कि शरीर का मेटाबॉलिज्म और हार्ट रेट बैलेंस हैं या नहीं. CRP (C-Reactive Protein) शरीर में सूजन का सिग्नल है. दिल की बीमारियों में अक्सर CRP बढ़ जाता है. इसके अलावा विटामिन D की कमी दिल की सेहत पर सीधा असर करती है. ये सभी टेस्ट आपके शरीर के अंदर चल रही दिक्कत  को  बताते हैं, जो आगे चलकर दिल के लिए खतरा बन सकती है.

5. ब्लड टेस्ट – CBC (Complete Blood Count) टेस्ट यह बताता है कि आपके खून में क्या कमी या समस्या है. आयरन और फेरिटिन की जांच से यह पता चलता है कि खून में ऑक्सीजन को ले जाने की क्षमता कितनी हैन में आयरन की कमी है, तो दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और वह जल्दी थक सकता है. यह भी दिल की बीमारियों की शुरुआत हो सकती है.

क्या करना चाहिए?

1. हर 6 महीने या साल में एक बार इन जरूरी टेस्ट करवाएं.

2. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं जैसे हेल्दी डाइट, वॉक, योग और स्ट्रेस कम करें.

3. धूम्रपान, ज्यादा शराब और जंक फूड से दूरी बनाए रखें. 

4. अगर परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है, तो अलर्ट हो जाएं.

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ऑर्गन डोनर हो या रिसीवर, महिलाओं को क्यों नहीं मिलती प्राथमिकता? NOTTO की रिपोर्ट खुलासा

ऑर्गन डोनर हो या रिसीवर, महिलाओं को क्यों नहीं मिलती प्राथमिकता? NOTTO की रिपोर्ट खुलासा


Gender Bias Organ Donation: कभी-कभी जिंदगी और मौत के बीच की दूरी बस एक स्वस्थ अंग होती है. ऐसे में ऑर्गन डोनेशन किसी की जिंदगी बचाने का सबसे बड़ा उपहार है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि, भारत में महिलाओं को चाहे वे डोनर हों या रिसीवर, अक्सर प्राथमिकता नहीं मिल पाती? हाल ही में राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की एक रिपोर्ट ने इस चौंकाने वाली सच्चाई को सामने लाया है.

बता दे, इस रिपोर्ट ने न सिर्फ आंकड़ों से हैरान किया, बल्कि यह भी बताया कि, महिलाओं के साथ इस प्रक्रिया में किस तरह असमानता होती है. हालांकि ऐसा नहीं होना चाहिए. 

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चौंकाने वाले आंकड़े

  • NOTTO की रिपोर्ट में कहा गया है कि, महिला रोगियों और मृतक दाताओं के रिश्तेदारों को लाभार्थियों के रूप में प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है.
  • अंग प्राप्त करने वालों में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में कहीं ज्यादा है.
  • कई मामलों में महिला डोनर्स तो अधिक हैं, लेकिन रिसीवर के तौर पर उन्हें प्राथमिकता नहीं मिलती.
  • सामाजिक, आर्थिक और जागरूकता की कमी इस असमानता का मुख्य कारण है. 

महिलाओं को क्यों नहीं मिलती प्राथमिकता?

  • सामाजिक मानसिकता – कई परिवारों में पुरुष की सेहत को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे महिलाओं के इलाज और अंग प्रत्यारोपण में देरी होती है.
  • आर्थिक कारण – कई बार महंगे ट्रांसप्लांट का खर्च उठाने में परिवार पहले पुरुष सदस्य को चुनता है.
  • जागरूकता की कमी – ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में महिलाएं अंगदान और इसके अधिकारों के बारे में कम जानती हैं.
  • स्वास्थ्य सुविधाओं तक कम पहुंच – महिलाएं समय पर जांच और लिस्टिंग प्रक्रिया पूरी नहीं कर पातीं।

NOTTO की रिपोर्ट में क्या कहा गया 

  • अंग प्रत्यारोपण की सूची में महिला रोगियों को प्राथमिकता दी जाए
  • मृतक दाताओं के रिश्तेदारों में महिला लाभार्थियों को प्राथमिकता मिले
  • अंगदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं
  • जागरूकता अभियान चलाकर महिलाओं को उनके अधिकारों और प्रक्रिया की जानकारी दी जाए

अंगदान में पारदर्शिता और समानता क्यों जरूरी है?

अंगदान सिर्फ चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा रूप है. अगर इसमें लिंग के आधार पर भेदभाव होगा, तो न सिर्फ नैतिकता, बल्कि जीवन बचाने की क्षमता भी प्रभावित होगी. महिलाओं को बराबरी का मौका देना जरूरी है. 

  • समाज में स्वास्थ्य संबंधी समानता आ सके
  • अंगदान के प्रति विश्वास और भागीदारी बढ़े

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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नसों में ब्लॉकेज होने पर दिखते हैं ये 6 लक्षण, इन नुस्खों से तुरंत पाएं आराम

नसों में ब्लॉकेज होने पर दिखते हैं ये 6 लक्षण, इन नुस्खों से तुरंत पाएं आराम


पैरों या हाथों में सुन्नपन: जब नसों में ब्लॉकेज होता है, तो खून का प्रवाह कम हो जाता है. इससे पैरों या हाथों में सुन्नपन और झनझनाहट महसूस होने लगती है. यह खासतौर पर चलने या लंबे समय तक बैठने के बाद महसूस होता है. अदरक की चाय पीना और हल्का व्यायाम करने से रक्त प्रवाह बेहतर होता है.

सांस लेने में तकलीफ: नसों में ब्लॉकेज होने पर दिल को खून पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे सांस फूलना या चढ़ना शुरू हो जाता है.आंवले का रस और गुनगुना पानी नियमित पीना दिल को मजबूत बनाने में मदद करता है.

सांस लेने में तकलीफ: नसों में ब्लॉकेज होने पर दिल को खून पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे सांस फूलना या चढ़ना शुरू हो जाता है.आंवले का रस और गुनगुना पानी नियमित पीना दिल को मजबूत बनाने में मदद करता है.

सीने में दर्द या दबाव: अगर सीने में अचानक दर्द या दबाव महसूस हो रहा है, तो यह नसों में ब्लॉकेज का गंभीर संकेत हो सकता है. इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें. लहसुन को आहार में शामिल करना कोलेस्ट्रॉल कम करके धमनियों को साफ करने में मदद करता है.

सीने में दर्द या दबाव: अगर सीने में अचानक दर्द या दबाव महसूस हो रहा है, तो यह नसों में ब्लॉकेज का गंभीर संकेत हो सकता है. इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें. लहसुन को आहार में शामिल करना कोलेस्ट्रॉल कम करके धमनियों को साफ करने में मदद करता है.

थकान और कमजोरी: खून का सही तरीके से अंगों तक न पहुंचना शरीर को थका देता है. छोटी-सी गतिविधि के बाद भी थकान महसूस होना ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है. बादाम और अखरोट का सेवन नसों को हेल्दी रखने में फायदेमंद है.

थकान और कमजोरी: खून का सही तरीके से अंगों तक न पहुंचना शरीर को थका देता है. छोटी-सी गतिविधि के बाद भी थकान महसूस होना ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है. बादाम और अखरोट का सेवन नसों को हेल्दी रखने में फायदेमंद है.

पैरों में सूजन: ब्लॉकेज होने पर खून और तरल पदार्थ पैरों में जमा हो सकते हैं, जिससे सूजन आ जाती है. रात को सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक डालकर पैरों को डुबोना सूजन कम करने में मदद करता है.

पैरों में सूजन: ब्लॉकेज होने पर खून और तरल पदार्थ पैरों में जमा हो सकते हैं, जिससे सूजन आ जाती है. रात को सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक डालकर पैरों को डुबोना सूजन कम करने में मदद करता है.

चक्कर आना: नसों में ब्लॉकेज से दिमाग तक खून की सप्लाई कम हो जाती है, जिससे चक्कर आना या ध्यान न लग पाना जैसी समस्याएं होती हैं.तुलसी की पत्तियां और शहद का मिश्रण सुबह खाली पेट लेने से रक्त प्रवाह बेहतर होता है.

चक्कर आना: नसों में ब्लॉकेज से दिमाग तक खून की सप्लाई कम हो जाती है, जिससे चक्कर आना या ध्यान न लग पाना जैसी समस्याएं होती हैं.तुलसी की पत्तियां और शहद का मिश्रण सुबह खाली पेट लेने से रक्त प्रवाह बेहतर होता है.

Published at : 14 Aug 2025 06:31 PM (IST)


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लिवर कैंसर की ओर इशारा करते हैं शरीर में दिखने वाले ये 6 संकेत, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

लिवर कैंसर की ओर इशारा करते हैं शरीर में दिखने वाले ये 6 संकेत, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास


पेट के दाहिनी ओर लगातार दर्द: लिवर शरीर के दाहिने हिस्से में होता है, और जब इसमें कोई समस्या होती है तो वहां दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है. अगर यह दर्द लगातार बना रहे या समय के साथ बढ़ रहा हो, तो यह लिवर कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है.

बिना वजह वजन घट जाना: अगर आप डाइट या एक्सरसाइज नहीं कर रहे और फिर भी तेजी से वजन कम हो रहा है, तो यह लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है. कैंसर के कारण शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म होती है, जिससे वजन घटने लगता है.

बिना वजह वजन घट जाना: अगर आप डाइट या एक्सरसाइज नहीं कर रहे और फिर भी तेजी से वजन कम हो रहा है, तो यह लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है. कैंसर के कारण शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म होती है, जिससे वजन घटने लगता है.

भूख में कमी और जल्दी पेट भर जाना: लिवर की खराबी से पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे खाने की इच्छा कम हो जाती है. थोड़ी-सी मात्रा में खाना खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होना भी लिवर कैंसर का संकेत हो सकता है.

भूख में कमी और जल्दी पेट भर जाना: लिवर की खराबी से पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे खाने की इच्छा कम हो जाती है. थोड़ी-सी मात्रा में खाना खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होना भी लिवर कैंसर का संकेत हो सकता है.

आंखों और त्वचा का पीला होना: लिवर खराब होने पर शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे आंखें और त्वचा पीली पड़ जाती हैं. अगर अचानक जॉन्डिस हो जाए और लंबे समय तक ठीक न हो, तो यह गंभीर संकेत है.

आंखों और त्वचा का पीला होना: लिवर खराब होने पर शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे आंखें और त्वचा पीली पड़ जाती हैं. अगर अचानक जॉन्डिस हो जाए और लंबे समय तक ठीक न हो, तो यह गंभीर संकेत है.

शरीर में लगातार थकान और कमजोरी: लिवर कैंसर की वजह से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती बनी रहती है. यह थकान आराम करने के बाद भी दूर नहीं होती.

शरीर में लगातार थकान और कमजोरी: लिवर कैंसर की वजह से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती बनी रहती है. यह थकान आराम करने के बाद भी दूर नहीं होती.

पेट में सूजन और पानी भरना: लिवर में ट्यूमर या उसकी कार्यक्षमता कम होने से पेट में पानी भरने लगता है, जिससे पेट फूल जाता है और सूजन आ जाती है. यह लिवर कैंसर का गंभीर लक्षण है और तुरंत चिकित्सा की जरूरत होती है.

पेट में सूजन और पानी भरना: लिवर में ट्यूमर या उसकी कार्यक्षमता कम होने से पेट में पानी भरने लगता है, जिससे पेट फूल जाता है और सूजन आ जाती है. यह लिवर कैंसर का गंभीर लक्षण है और तुरंत चिकित्सा की जरूरत होती है.

Published at : 14 Aug 2025 05:36 PM (IST)


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सोने से पहले पिएं 1 गिलास अर्जुन की छाल का पानी, इन 6 बीमारियों की हो जाएगी छुट्टी

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दिल की सेहत का रखवाला: अर्जुन की छाल का पानी दिल को मजबूत बनाने में बेहद असरदार है. यह रक्त संचार को बेहतर करता है, धमनियों में ब्लॉकेज की संभावना कम करता है और हार्ट अटैक के खतरे को घटाता है.

हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल: अगर आपका ब्लड प्रेशर अक्सर हाई रहता है, तो अर्जुन की छाल का पानी इसे प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित कर सकता है. इसमें मौजूद पोटैशियम और टैनिन्स ब्लड प्रेशर को बैलेंस करने में मदद करते हैं और स्ट्रोक के खतरे को कम करते हैं.

हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल: अगर आपका ब्लड प्रेशर अक्सर हाई रहता है, तो अर्जुन की छाल का पानी इसे प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित कर सकता है. इसमें मौजूद पोटैशियम और टैनिन्स ब्लड प्रेशर को बैलेंस करने में मदद करते हैं और स्ट्रोक के खतरे को कम करते हैं.

कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार: अर्जुन की छाल शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाकर अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाने में मदद करती है. इससे दिल की धमनियां साफ रहती हैं और ब्लॉकेज की समस्या से बचाव होता है.

कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार: अर्जुन की छाल शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाकर अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाने में मदद करती है. इससे दिल की धमनियां साफ रहती हैं और ब्लॉकेज की समस्या से बचाव होता है.

डायबिटीज में फायदेमंद: अर्जुन की छाल का पानी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है. इसमें मौजूद नेचुरल कंपाउंड्स इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाते हैं, जिससे डायबिटीज के मरीजों को लाभ मिलता है.

डायबिटीज में फायदेमंद: अर्जुन की छाल का पानी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है. इसमें मौजूद नेचुरल कंपाउंड्स इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाते हैं, जिससे डायबिटीज के मरीजों को लाभ मिलता है.

हड्डियों और जोड़ों के लिए अच्छा: इसमें मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाते हैं. नियमित सेवन से गठिया (Arthritis) के लक्षण भी कम हो सकते हैं.

हड्डियों और जोड़ों के लिए अच्छा: इसमें मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाते हैं. नियमित सेवन से गठिया (Arthritis) के लक्षण भी कम हो सकते हैं.

इम्यूनिटी बूस्टर और एंटी-एजिंग: अर्जुन की छाल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव होता है. यह त्वचा को जवां बनाए रखने और समय से पहले बुढ़ापा आने से रोकने में भी सहायक है.

इम्यूनिटी बूस्टर और एंटी-एजिंग: अर्जुन की छाल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव होता है. यह त्वचा को जवां बनाए रखने और समय से पहले बुढ़ापा आने से रोकने में भी सहायक है.

Published at : 14 Aug 2025 04:37 PM (IST)

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वेट लॉस के लिए कहीं इंजेक्शन तो नहीं लेते आप, चली जाएगी आंखों की रोशनी

वेट लॉस के लिए कहीं इंजेक्शन तो नहीं लेते आप, चली जाएगी आंखों की रोशनी


आजकल लोग अपने आपको स्लिम और फिट रखने के लिए तरह-तरह के उपाय अपना रहे हैं. कुछ जिम ज्वाइन करके घंटों पसीना बहा रहे हैं, तो कई ऐसे लोग हैं जो अपनी डायटिंग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. इसके इतर कुछ लोग ऐसे हैं जो इसके लिए अन्य विकल्पों को चुन रहे हैं, जैसे कि दवाओं का इस्तेमाल और इंजेक्शन का यूज. ये लोग ऐसा इसलिए कर रहे हैं, ताकि जल्दी से जल्दी अपने वजन को कम कर सके, जिससे दिखने में स्मार्ट लग सकें. हालांकि स्मार्ट दिखने की यह लालसा आपको बीमार बना सकती है, चलिए आपको बताते हैं कि कैसे वेट लॉस के लिए इस्तेमाल हो रहे इंजेक्शन आपके लिए हानिकारक हो सकते हैं. 

वेट लॉस के इंजेक्शन

आजकल डायबिटीज और मोटापे के इलाज में Ozempic, Wegovy और Mounjaro जैसी दवाएं काफी पॉपुलर हो गई हैं. इन्हें GLP-1 agonists कहा जाता है. ये शरीर में एक खास हार्मोन की तरह काम करती हैं, जिससे भूख कम लगती है, वजन घटता है और ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है. लेकिन हाल ही में आई दो नई स्टडीज ने दिखाया कि इन दवाओं के इस्तेमाल से आंखों की एक गंभीर बीमारी का थोड़ा सा खतरा बढ़ सकता है. इस बीमारी का नाम है NAION (Non-arteritic anterior ischaemic optic neuropathy), जिसे आम भाषा में ‘आई स्ट्रोक’ भी कहते हैं. इसमें आंख की नस तक खून का बहाव अचानक कम हो जाता है और बिना दर्द के एकदम से नजर चली जाती है.

पहले भी हो चुकी है रिसर्च

NAION अचानक होता है और ज्यादातर लोग इसे सुबह उठते समय महसूस करते हैं जब एक आंख से दिखना बंद हो जाता है. यह कुछ हफ्तों में स्थिर हो जाता है, लेकिन लगभग 70 प्रतिशत लोगों की नजर पूरी तरह वापस नहीं आती. 2024 की एक स्टडी में पाया गया था कि डायबिटीज के मरीज जो semaglutide ले रहे थे, उनमें NAION का खतरा 4 गुना ज्यादा था. वहीं, वजन घटाने के लिए लेने वालों में यह खतरा 8 गुना तक बढ़ गया था. यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने इसे काफी रेयर साइड इफेक्ट माना है, यानी 10,000 में से 1 केस. हालिया स्टडीज में मिला कि खतरा पहले जितना सोचा गया था, उतना ज्यादा नहीं है. 1,59,000 डायबिटीज मरीजों में से सिर्फ 0.04 प्रतिशत को NAION हुआ. वहीं, कुछ मरीजों में अन्य ऑप्टिक नर्व की बीमारियां भी देखी गईं.

इसके अलावा, GLP-1 दवाओं से डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) का थोड़ा खतरा भी बढ़ सकता है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इन दवाओं पर रहने वाले मरीजों को आंखों का बड़ा नुकसान कम हुआ और उन्हें कम इनवेसिव ट्रीटमेंट की ज़रूरत पड़ी.

क्या करें अगर आप ये दवाएं ले रहे हैं?

  • नियमित रूप से आंखों की जांच करवाएं.
  • अपने डॉक्टर को बताएं कि आप GLP-1 दवाएं ले रहे हैं.
  • अचानक नजर जाने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
  • ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखें.
  • हार्ट हेल्थ और स्लीप एपनिया का इलाज करवाएं.

अभी रिसर्च जारी है, लेकिन डॉक्टर और आंखों के स्पेशलिस्ट की सलाह के साथ ये दवाएं सुरक्षित तरीके से ली जा सकती हैं.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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