वेट लॉस के लिए कहीं इंजेक्शन तो नहीं लेते आप, चली जाएगी आंखों की रोशनी

वेट लॉस के लिए कहीं इंजेक्शन तो नहीं लेते आप, चली जाएगी आंखों की रोशनी


आजकल लोग अपने आपको स्लिम और फिट रखने के लिए तरह-तरह के उपाय अपना रहे हैं. कुछ जिम ज्वाइन करके घंटों पसीना बहा रहे हैं, तो कई ऐसे लोग हैं जो अपनी डायटिंग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. इसके इतर कुछ लोग ऐसे हैं जो इसके लिए अन्य विकल्पों को चुन रहे हैं, जैसे कि दवाओं का इस्तेमाल और इंजेक्शन का यूज. ये लोग ऐसा इसलिए कर रहे हैं, ताकि जल्दी से जल्दी अपने वजन को कम कर सके, जिससे दिखने में स्मार्ट लग सकें. हालांकि स्मार्ट दिखने की यह लालसा आपको बीमार बना सकती है, चलिए आपको बताते हैं कि कैसे वेट लॉस के लिए इस्तेमाल हो रहे इंजेक्शन आपके लिए हानिकारक हो सकते हैं. 

वेट लॉस के इंजेक्शन

आजकल डायबिटीज और मोटापे के इलाज में Ozempic, Wegovy और Mounjaro जैसी दवाएं काफी पॉपुलर हो गई हैं. इन्हें GLP-1 agonists कहा जाता है. ये शरीर में एक खास हार्मोन की तरह काम करती हैं, जिससे भूख कम लगती है, वजन घटता है और ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है. लेकिन हाल ही में आई दो नई स्टडीज ने दिखाया कि इन दवाओं के इस्तेमाल से आंखों की एक गंभीर बीमारी का थोड़ा सा खतरा बढ़ सकता है. इस बीमारी का नाम है NAION (Non-arteritic anterior ischaemic optic neuropathy), जिसे आम भाषा में ‘आई स्ट्रोक’ भी कहते हैं. इसमें आंख की नस तक खून का बहाव अचानक कम हो जाता है और बिना दर्द के एकदम से नजर चली जाती है.

पहले भी हो चुकी है रिसर्च

NAION अचानक होता है और ज्यादातर लोग इसे सुबह उठते समय महसूस करते हैं जब एक आंख से दिखना बंद हो जाता है. यह कुछ हफ्तों में स्थिर हो जाता है, लेकिन लगभग 70 प्रतिशत लोगों की नजर पूरी तरह वापस नहीं आती. 2024 की एक स्टडी में पाया गया था कि डायबिटीज के मरीज जो semaglutide ले रहे थे, उनमें NAION का खतरा 4 गुना ज्यादा था. वहीं, वजन घटाने के लिए लेने वालों में यह खतरा 8 गुना तक बढ़ गया था. यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने इसे काफी रेयर साइड इफेक्ट माना है, यानी 10,000 में से 1 केस. हालिया स्टडीज में मिला कि खतरा पहले जितना सोचा गया था, उतना ज्यादा नहीं है. 1,59,000 डायबिटीज मरीजों में से सिर्फ 0.04 प्रतिशत को NAION हुआ. वहीं, कुछ मरीजों में अन्य ऑप्टिक नर्व की बीमारियां भी देखी गईं.

इसके अलावा, GLP-1 दवाओं से डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) का थोड़ा खतरा भी बढ़ सकता है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इन दवाओं पर रहने वाले मरीजों को आंखों का बड़ा नुकसान कम हुआ और उन्हें कम इनवेसिव ट्रीटमेंट की ज़रूरत पड़ी.

क्या करें अगर आप ये दवाएं ले रहे हैं?

  • नियमित रूप से आंखों की जांच करवाएं.
  • अपने डॉक्टर को बताएं कि आप GLP-1 दवाएं ले रहे हैं.
  • अचानक नजर जाने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
  • ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखें.
  • हार्ट हेल्थ और स्लीप एपनिया का इलाज करवाएं.

अभी रिसर्च जारी है, लेकिन डॉक्टर और आंखों के स्पेशलिस्ट की सलाह के साथ ये दवाएं सुरक्षित तरीके से ली जा सकती हैं.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

भारत में डायबिटीज का बढ़ता खतरा, 10 में से 4 मरीज को नहीं है बीमारी का पता

भारत में डायबिटीज का बढ़ता खतरा, 10 में से 4 मरीज को नहीं है बीमारी का पता


Diabetes in India: हमारे देश में कई बीमारियां ऐसी हैं जो चुपचाप शरीर में घर कर लेती हैं और धीरे-धीरे हमारी सेहत को अंदर से खत्म कर देती हैं. डायबिटीज भी उन्हीं में से एक है, जिसे अक्सर लोग तब तक गंभीरता से नहीं लेते जब तक यह बड़ी समस्या में न बदल जाए. हाल ही में लैंसेट में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. भारत में हर 10 में से लगभग 4 डायबिटीज़ के मरीजों को पता ही नहीं है कि उन्हें यह बीमारी है. 

यह अध्ययन 2017 से 2019 के बीच 45 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों पर हुआ, इसमें पाया गया कि, इस आयु वर्ग के 20 प्रतिशत लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. पुरुष और महिलाएं, दोनों में इसका प्रतिशत लगभग समान है. अध्ययन में यह भी सामने आया कि शहरी इलाकों में डायबिटीज के मरीजों की संख्या ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में लगभग दोगुनी है. इसका कारण जीवनशैली, खाने की आदतें और शारीरिक गतिविधियों में अंतर माना जा रहा है. 

ये भी पढ़े- वजन घटाने की दवाओं से आंखों को खतरा? नई स्टडी ने किया बड़ा खुलासा

भारत में डायबिटीज़ की गंभीर स्थिति

भारत में 20 से 79 वर्ष की आयु के वयस्कों में डायबिटीज़ के मरीजों की संख्या दुनिया में दूसरे नंबर पर है. 2019 में भारत में हुई कुल मौतों में से लगभग 3% मौतें डायबिटीज के कारण हुईं. इसके साथ ही, हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. दोनों ही बीमारियां अगर समय पर पहचानी और नियंत्रित नहीं की गईं, तो यह दिल, किडनी और आंखों जैसी कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती हैं.

गांवों में इलाज की कमी

अध्ययन में यह भी पाया गया कि, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर के इलाज की सुविधाएं काफी कमजोर हैं. ICMR और WHO द्वारा सात राज्यों के 19 जिलों में किए गए सर्वे में पता चला कि,  केवल 40% सब-सेंटर्स इन बीमारियों के इलाज के लिए तैयार हैं. 

  • एक-तिहाई केंद्रों में डायबिटीज़ की दवा मेटफॉर्मिन उपलब्ध नहीं थी
  • लगभग आधे केंद्रों (45%) में हाई ब्लड प्रेशर की दवा एम्लोडिपिन की कमी थी़
  • रोकथाम और समय पर पहचान जरूरी

डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर दोनों ही ऐसी बीमारियां हैं जिन्हें समय पर जांच और सही दवा लेकर नियंत्रित किया जा सकता है. शुरुआती जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर दवा लेने से इनसे होने वाले गंभीर नुकसान को रोका जा सकता है.

इसे भी पढ़ें- जरूरत से ज्यादा विटामिन D तो नहीं ले रहे आप, जानें इससे किडनी और दिल को कितना खतरा?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

स्वाद में तीखी ‘लाल मिर्च’ के होते हैं बहुत से फायदे, आंखों से लेकर दिल तक की है डॉक्टर

स्वाद में तीखी ‘लाल मिर्च’ के होते हैं बहुत से फायदे, आंखों से लेकर दिल तक की है डॉक्टर


डिनर में थोड़ा स्पाइसी फ्लेवर जोड़ने के लिए अगर आप Cayenne Pepper यानी लाल मिर्च का इस्तेमाल करते हैं, तो ये सिर्फ आपके खाने का टेस्ट ही नहीं बढ़ाता, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी कई फायदे लेकर आता है. पाउडर, ड्राइड या फ्रेश किसी भी रूप में Cayenne Pepper में भरपूर मात्रा में जरूरी पोषक तत्व और हेल्दी कंपाउंड्स मौजूद होते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसमें क्या-क्या होता है. 

विटामिन्स से भरपूर

इस लाल रंग की तीखी मिर्च में विटामिन A की भरपूर मात्रा होती है, जो आंखों, शरीर के पार्ट्स (organs), प्रजनन क्षमता और इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है. सिर्फ एक टीस्पून पाउडर से ही आपको दैनिक आवश्यकता का करीब 15 प्रतिशत विटामिन A मिल जाता है. अगर इसे फ्रेश रूप में खाया जाए तो विटामिन की मात्रा और भी बढ़ जाती है. इसके अलावा, Cayenne Pepper में विटामिनB6, विटामिन K और विटामिन C भी मौजूद होते हैं. विटामिन K खून जमाने (blood clotting) में मदद करता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है.  विटामिन C  इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सर्दी-जुकाम से बचाव करता है. एक फ्रेश Cayenne Pepper खाने से आप अपनी 72 प्रतिशत विटामिन C और 50 प्रतिशत विटामिन A की दैनिक आवश्यकता पूरी कर सकते हैं.

एंटीऑक्सीडेंट्स और हेल्थ बेनिफिट्स

Cayenne Pepper एंटीऑक्सीडेंट्स का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और हेल्थ को प्रमोट करते हैं. शोध में पाया गया है कि एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर डाइट कैंसर और हार्ट डिजीज का खतरा कम कर सकती है.

Capsaicin का कमाल

इस मिर्च के तीखेपन का राज है Capsaicin एक ऐसा केमिकल कंपाउंड जो सूजन (inflammation) को कम करता है. स्टडीज़ के अनुसार, यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और हार्ट डिज़ीज़ के रिस्क को घटाता है. Capsaicin वजन घटाने में भी मददगार है. यह कैलोरी बर्न करने की प्रक्रिया तेज करता है और खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराता है. साथ ही, यह पेट में गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स बढ़ाकर पाचन को बेहतर बनाता है. Cayenne Pepper पाउडर और फ्रेश, दोनों रूप में ज्यादातर ग्रोसरी स्टोर्स में आसानी से मिल जाता है.

तीखापन और इतिहास

यह मिर्च Jalapeo से काफी ज्यादा तीखी होती है. इसके तीखापन को मापने वाले Scoville Heat Unit स्केल पर इसका स्कोर 30,000 से 50,000 तक होता है. तुलना के लिए, दुनिया की सबसे तीखी मिर्च Carolina Reaper का स्कोर 2.2 मिलियन है. इतिहास की बात करें तो Cayenne Pepper का इस्तेमाल 7,000 साल पहले से Central और South America में हो रहा है. स्वाद, सेहत और लंबे समय तक उपयोग के कारण यह आज भी दुनिया भर की किचन में खास जगह बनाए हुए है.

इसे भी पढ़ें-  डाइट सोडा रोजाना पीना पड़ सकता है भारी, तीन गुना बढ़ जाता है इन दो खौफनाक बीमारियों का खतरा

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

पैंक्रियाटिक कैंसर का कारण बन रही है शराब, जानें बचाव के तरीके और शुरुआती लक्षण

पैंक्रियाटिक कैंसर का कारण बन रही है शराब, जानें बचाव के तरीके और शुरुआती लक्षण


Pancreatic Cancer Symptoms: दुनिया में कुछ बीमारियां इतनी खतरनाक होती हैं कि उनके बारे में सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. पैनक्रियाटिक कैंसर उन्हीं में से एक है, जिसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है.यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे शरीर में बढ़ती रहती है.  

हाल ही में अमेरिका के मियामी में हुए एक शोध ने चेतावनी दी है कि, नियमित और अधिक मात्रा में शराब पीना इस जानलेवा बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ा सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि, उन्होंने इस बीमारी के पीछे का एक बड़ा कारण और उसे रोकने का संभावित तरीका खोज लिया है. 

ये भी पढ़े- डाइट सोडा रोजाना पीना पड़ सकता है भारी, तीन गुना बढ़ जाता है इन दो खौफनाक बीमारियों का खतरा

शराब और पैनक्रियास पर पड़ने वाला असर

शोध में पाया गया कि ज्यादा मात्रा में शराब पीने से पैनक्रियास की वे कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं जो पाचन एंजाइम बनाती हैं. इस नुकसान से अंग में सूजन हो जाती है. पैनक्रियास भोजन को पचाने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जब इसमें लगातार सूजन बनी रहती है, तो यह प्री-कैंसरस घाव में बदल सकता है, जो आगे चलकर पैनक्रियाटिक कैंसर का रूप ले सकता है. 

कैसे बढ़ता है कैंसर का खतरा?

वैज्ञानिकों के अनुसार, कैंसर बनने के लिए केवल सूजन ही नहीं, बल्कि एक खास जीन में बदलाव  भी जरूरी है. यह जीन कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित करता है. प्रयोगों में पाया गया कि जब शराब और एक प्रो-इंफ्लेमेटरी मिलता है तो यह शराब से होने वाले पैनक्रियाटाइटिस जैसे लक्षण पैदा करता है, जिससे कैंसर बन सकता है. 

‘मास्टर कंट्रोलर’ जीन की खोज

शोधकर्ताओं ने पाया कि, एक और जीन CREB इस पूरी प्रक्रिया में ‘मास्टर कंट्रोलर’ की तरह काम करता है. यह स्वस्थ पैनक्रियास कोशिकाओं को स्थायी रूप से असामान्य और प्री-कैंसरस कोशिकाओं में बदल देता है. जब इस जीन को निष्क्रिय किया गया, तो पैनक्रियास में प्री-कैंसर और कैंसर के घाव बनने बंद हो गए. 

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

  • 65 साल से अधिक उम्र के लोग
  • जिनके परिवार में पैनक्रियाटिक कैंसर का इतिहास है
  • क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस के मरीज
  • धूम्रपान करने वाले, अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त लोग
  • डायबिटीज के मरीज
  • रेड और प्रोसेस्ड मीट का अधिक सेवन करने वाले
  • O, A, B, AB ब्लड ग्रुप के आधार पर भी जोखिम भिन्न हो सकता है

शुरुआती लक्षण कैसे दिखते हैं

  • अचानक वजन कम होना
  • लगातार थकान
  • पेट में दर्द
  • पाचन संबंधी बदलाव
  • त्वचा और आंखों का पीला होना 

इसे भी पढ़ें- IBS और कोलन कैंसर में क्या होता है अंतर? एक जैसे लक्षण कर देते हैं कंफ्यूज

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

रसोई के इन मसालों को इग्नोर तो नहीं कर रहे आप? सेहत का होते हैं खजाना

रसोई के इन मसालों को इग्नोर तो नहीं कर रहे आप? सेहत का होते हैं खजाना


भारतीय रसोई सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि सेहत का भी खजाना मानी जाती है. अक्सर हम खाना बनाते समय मसाले को केवल स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनके औषधीय गुण भी कम नहीं है. खासकर यह मसाले जीरा, हल्दी, धनिया, हींग, अजवाइन, अदरक, दालचीनी, लौंग और काली मिर्च हमारी सेहत के लिए अनमोल साबित होते हैं. 

हल्दी सेहत का जादुई साथी

हल्दी या टरमरिक भारतीय घरों में लगभग हर डिश का हिस्सा होती है. इसका रंग ही नहीं बल्कि इसमें मौजूद कर्क्यूमिन सूजन कम करने और इम्यून सिस्टम मजबूत करने में मदद करता है. सर्दियों में हल्दी वाला दूध या खाने में हल्दी मिलना आम है, लेकिन याद रखिए इसे ज्यादा मात्रा में लेने से कभी-कभी किडनी की समस्या भी हो सकती है. 

जीरा, पाचन का साथी 

जीरा सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि पाचन सुधारने और गैस व अपच कम करने में भी मदद करता है. इसे तवे पर सुखा भुनकर या खाने में डालकर इस्तेमाल किया जाता है. वहीं खाली पेट जीरा पानी पीने से डाइजेशन बेहतर होता है. 

धनिया, ताजगी और संतुलन का मेल

धनिया न केवल खाने को हल्का और सुगंधित बनता है बल्कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं. यह खून में शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में सहायक है. रोटियों, सब्जियों और ग्रेवी में धनिया पाउडर का इस्तेमाल स्वाद और सेहत दोनों को बढ़ता है. 

हींग और अजवाइन, पेट के रक्षक 

हींग और अजवाइन लंबे समय से पेट की समस्याएं जैसे गैस, एसिडिटी, अपच के लिए उपयोग की जाती है. हिंग में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं और अजवाइन में थाइमोल तेल जो पेट की एक्स्ट्रा गैस निकालने में मदद करता है. 

अदरक और दालचीनी रोगों की रोकथाम

अदरक पाचन तंत्र मजबूत करती है और ब्लोटिंग या पेट फूलने में राहत देती है. वहीं दालचीनी पाचन सुधारने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में कारगर मानी जाती है. 

लौंग और काली मिर्च, स्वाद और सेहत दोनों के लिए 

लौंग और काली मिर्च का सेवन सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि ब्लड सर्कुलेशन सुधारने के लिए भी किया जाता है. लौंग की थोड़ी मात्रा सेहत के लिए लाभकारी होती है. जबकि काली मिर्च में पाचन को बेहतर बनाने की शक्ति होती है. भारतीय रसोई में यह मसाले न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि हमारे सेहत, पाचन, इम्यूनिटी और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं. छोटे-छोटे बदलाव जैसे रोजाना हल्दी वाला दूध, जीरा या धनिया का इस्तेमाल, हिंग और अजवाइन का सेवन आपकी सेहत को कई स्तर पर बेहतर बना सकते हैं.

ये भी पढ़ें- जिम शुरू करने से पहले जरूर करा लें ये टेस्ट, कम हो जाएगा हार्ट अटैक का रिस्क

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

29 साल की महिला को वर्क प्रेशर के चक्कर में हो गया Stage-4 कैंसर

29 साल की महिला को वर्क प्रेशर के चक्कर में हो गया Stage-4 कैंसर


Stage-4 Cancer at Young Age: कहते हैं “सेहत ही सबसे बड़ी दौलत है” लेकिन आज के समय में सेहत का दुश्मन सिर्फ जंक फूड या खराब आदतें ही नहीं, बल्कि बढ़ता वर्क प्रेशर भी है. 29 साल की मोनिका चौधरी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं. हेल्दी डाइट, सुबह-शाम की वॉक, फिटनेस के लिए पूरा ध्यान और तला-भुना खाने से दूरी, यह सब करने के बावजूद मोनिका को स्टेज-4 कैंसर हो गया. 

चौंकाने वाली बात यह है कि, इस बीमारी की जड़ सिर्फ काम का तनाव और लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बिताया गया समय था. यह कहानी सिर्फ मोनिका की नहीं, बल्कि हर उस युवा की चेतावनी है जो करियर की दौड़ में अपने स्वास्थ्य को पीछे छोड़ देता है. 

ये भी पढ़े- जिम शुरू करने से पहले जरूर करा लें ये टेस्ट, कम हो जाएगा हार्ट अटैक का रिस्क

हेल्दी लाइफस्टाइल के बावजूद बीमारी का खतरा

मोनिका चौधरी अपने स्वास्थ्य को लेकर बेहद सजग थीं. उनका खान-पान नियंत्रित था, न जंक फूड, न सोडा, न तैलीय खाना. सुबह-शाम की वॉक और योग भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. फिर भी उन्हें स्टेज-4 कैंसर हो गया है. शुरुआत में उन्होंने इसे काम की थकान समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर रूप लेता गया. 

वर्क प्रेशर की समस्या 

गुरुग्राम में स्थित सी.के बिरला हॉस्पिटल के डॉ. विनय गायकवाड बताते हैं कि, लंबे समय तक लगातार मानसिक तनाव और स्क्रीन टाइम हमारे शरीर में ऐसे हार्मोन रिलीज करते हैं जो इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देते हैं. मोनिका की नौकरी में लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम, मीटिंग्स, डेडलाइन्स और नींद की कमी उनकी सेहत पर लगातार बढ़ा रही थी. 

बीमारी के शुरुआती संकेत जिन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए

  • लगातार थकान और कमजोरी
  • बार-बार सिरदर्द
  • भूख में कमी
  • वजन कम होना
  • पेट में दर्द और असहजता

स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें

  • करियर और सपनों की दौड़ में स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है.
  • रोजाना कम से कम 7 घंटे की नींद लें
  • हर घंटे में 5 मिनट का ब्रेक लें
  • मेडिटेशन और योग को रूटीन में शामिल करें
  • परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं
  • साल में कम से कम एक बार हेल्थ चेकअप कराएं

मोनिका की कहानी हमें यह सिखाती है कि, हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज भी तब बेअसर हो जाते हैं जब तनाव और ओवरवर्क आपकी जिंदगी पर हावी हो जाते हैं. काम जरूरी है, लेकिन जीवन उससे कहीं ज्यादा कीमती है. आज अगर आप अपने तनाव को काबू में रखेंगे, तभी कल आप सच में स्वस्थ और खुश रह पाएंगे. 

इसे भी पढ़ें- बच्चों के लिए सोने का सही वक्त कौन-सा, जानें कब और कितना सोना सबसे सही?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp