Winter Hair Care: सर्दियों में बढ़ जाती है डैंड्रफ की समस्या, नहाते समय न करें ये 10 गलतियां

Winter Hair Care: सर्दियों में बढ़ जाती है डैंड्रफ की समस्या, नहाते समय न करें ये 10 गलतियां



Why Dandruff Increases in Winter: सर्दियां आते ही सिर्फ मौसम ही नहीं बदलता, आपकी स्किन और बाल भी इसका असर झेलने लगते हैं. खुजली, सफेद फलक, कंधों पर गिरती “शोल्डर स्नो” ये सब विंटर के साथ बढ़ने लगते हैं. ठंडी हवा और कमरे में चल रहे हीटर स्कैल्प को इतना सूखा बना देते हैं कि डैंड्रफ अचानक तेज हो जाती है और इससे आपको कई जगहों पर शर्मिंदा भी होना पड़ता है, क्योंकि लोग टोक देते हैं कि आपके बाल में काफी डैंड्रफ है. सर्द हवा में नमी बेहद कम होती है, जो स्कैल्प की मॉइस्चर बैरियर को धीरे-धीरे कमजोर कर देती है. यही वजह है कि खुजली, जलन और फ्लेक्स दिखाई देने लगते हैं।

सर्दियों में डैंड्रफ बढ़ने की 10 बड़ी वजहें

ठंडी हवा 

विंटर एयर में ह्यूमिडिटी बहुत कम होती है. स्कैल्प की नमी तेजी से घटती है और त्वचा की सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है. कमजोर बैरियर पर मालासेजिया फंगस तुरंत सक्रिय हो जाता है और मोटे फ्लेक्स बनने लगते हैं।

बहुत गर्म पानी से नहाना

सर्दियों में गर्म पानी आराम देता है, लेकिन स्कैल्प के प्राकृतिक तेल को हटाकर इसे और सूखा बना देता है. इसका परिणाम खुजली, लालपन और ज्यादा फ्लेक्स होता है.

बाल कम धोना

ठंड के कारण लोग शैम्पू टाल देते हैं. इससे, ऑयल जमा होता है, डेड स्किन बढ़ती है और फंगस को तेज़ी से फैलने का मौका मिलता है.

गलत तेल लगाना

विंटर में भारी तेल लगाने से फंगस को “खुराक” मिलती है. नतीजा ज्यादा खुजली, मोटे फ्लेक्स और बार-बार डैंड्रफ लौट आना होता है. 

पूरे दिन कैप या बीनी पहनना

टोपी के अंदर गर्मी और पसीना जमा होता है, यह फंगस के पनपने के लिए बिल्कुल सही माहौल होता है. 

तेज हीटिंग वाले कमरे में रहना

हीटर स्कैल्प को रेत जैसी सूखी अवस्था में बदल देता है, जिससे फ्लेकिंग बढ़ जाती है.

 बालों पर बहुत ज्यादा स्टाइलिंग या हीट टूल्स

ब्लो ड्रायर और स्ट्रेटनर स्कैल्प की नमी खींच लेते हैं, जिससे डैंड्रफ बढ़ जाती है. 

स्कैल्प को सही कंडीशनिंग न देना

लोग सिर्फ बालों को कंडीशन करते हैं, स्कैल्प को नहीं। इससे सिर की त्वचा और ज्यादा सूख जाती है।

पानी कम पीना

सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर और स्कैल्प डिहाइड्रेट रहते हैं. इससे यह होता कि त्वचा छिलने लगती है और डैंड्रफ बढ़ती है.

Vitamin D की कमी

ठंड के मौसम में कम धूप से Vitamin D का स्तर गिरता है, जिससे स्कैल्प की इम्युनिटी कमजोर होती है और इंफेक्शन जल्दी बढ़ता है. 

सर्दियों में डैंड्रफ कैसे कंट्रोल करें?

  •  सही एंटी-डैंड्रफ शैम्पू का इस्तेमाल
  •  गुनगुने पानी से नहाएं
  •  हफ्ते में 2–3 बार बाल धोएं
  • हल्का, नॉन-हेवी ऑयल इस्तेमाल करें
  • स्कैल्प को सांस लेने दें

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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टॉयलेट में घंटों बैठे रहते हैं लेकिन नहीं होता पेट साफ, ये देसी नुस्खे आएंगे काम

टॉयलेट में घंटों बैठे रहते हैं लेकिन नहीं होता पेट साफ, ये देसी नुस्खे आएंगे काम



Natural Remedies for Constipation: अक्सर लोग टॉयलेट में घंटों बैठे रहते हैं, लेकिन उनका पेट नहीं साफ होता है, इसके लिए वे दवा भी खूब खाते हैं, लेकिन उनको यह समस्या बना रहती है. क्या आपको भी अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है?. इसको लेकर गैस्ट्रोएन्टरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी जिन्होंने AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड जैसी संस्थानों से ट्रेनिंग ली है, उन्होंने ने 19 सितंबर को एक इंस्टाग्राम पोस्ट में कब्ज से राहत देने के चार आसान और असरदार तरीके बताए.  उन्होंने लिखा, “डाइट में रोज के छोटे-छोटे बदलाव आपकी आंतों की सेहत को काफी हद तक सुधार सकते हैं और पेट को नियमित रख सकते हैं।”

क्या कहा एक्सपर्ट ने?

अपने वीडियो में उन्होंने सबसे पहले टॉयलेट पर बैठने की पोजिशन बदलने की सलाह दी. उनका कहना है कि टॉयलेट सीट पर बैठते वक्त पैरों के नीचे एक छोटा स्टूल रखकर घुटनों को कूल्हों से ऊपर लाना चाहिए इससे एनोरैक्टल एंगल सीधा हो जाता है और मल त्याग करना काफी आसान हो जाता है. इसके बाद उनकी दूसरी सलाह थी कि पानी ज्यादा पीना. उन्होंने कहा कि रोज कम से कम आठ गिलास पानी पीने की कोशिश करें, इससे स्टूल नरम रहता है और आसानी से निकल जाता है.

 


एक्सरसाइज से सुधरती है आदत

तीसरी टिप में उन्होंने नियमित एक्सरसाइज गतिविधि बढ़ाने की बात कही. उनके मुताबिक, रोजाना चलना या हल्का-फुल्का व्यायाम करना खाने को बड़ी आंत में आगे बढ़ने में मदद करता है, जिससे कब्ज़ की परेशानी कम होती है. आखिर में उन्होंने साफ कहा कि अगर ये सभी खानपान और लाइफस्टाइल वाले उपाय काम न करें, तभी लैक्सेटिव यानी हल्के रेचक दवाओं का सहारा लें. ये दवाएं आंतों की सफाई को आसान बनाती हैं, लेकिन इन्हें सिर्फ अंतिम विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए.

मसाज की विकल्प

कई एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अगर लंबे समय से कब्ज की परेशानी रहती है, तो पेट के निचले हिस्से की हल्की मालिश कई लोगों को राहत दे सकती है. धीरे-धीरे मसाज करने से आंतों की हरकत बढ़ती है और मल को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। अगर आप कर पाएं, तो घुटनों को हल्का उठाकर सीने की तरफ ले आएं और 1 से 2 मिनट इसी पोजिशन में रहें. यह आसन पेट के आसपास जमी हुई कसावट को ढीला करता है, जिससे दबाव कम होता है और मल त्याग आसान हो सकता है।।

कब्ज की हालत में इन चीजों से बचें

कुछ चीजें कब्ज को और खराब कर सकती हैं. अगर आपको पेट साफ़ करने में दिक्कत हो रही है, तो इनसे दूरी रखना बेहतर है

 बहुत प्रोसेस्ड खाना
पैकेज्ड स्नैक्स, फ्राइड फूड या फास्ट फूड में फाइबर बहुत कम होता है. ये आंतों की गति को धीमा कर देते हैं और कब्ज बढ़ा सकते हैं.

 लगातार बैठकर रहना
बहुत देर तक बैठे रहने से पाचन धीमा हो जाता है और आंतों की मूवमेंट कम हो जाती है. थोड़ी-थोड़ी देर में चलना, खड़े होना या हल्की स्ट्रेचिंग करना मददगार रहता है.

 जब जरूरत महसूस हो, तब भी रोकना
मल रोककर रखना कई बार कब्ज को और जटिल बना देता है. कोशिश करें कि जैसे ही इच्छा हो, तुरंत वॉशरूम जाएं.

कुछ दवाएं या सप्लीमेंट
कुछ दवाइयां कब्ज की समस्या बढ़ा सकती हैं. ऐसे में डॉक्टर से बात करके जरूरत पड़े तो दवाओं में बदलाव किया जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सुबह उठते ही बार-बार क्यों होता है जुकाम? समझ जाएं बॉडी में इस चीज की है कमी

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Weak Immunity Symptoms: सर्दी के मौसम में सर्दी-जुकाम सबसे आम समस्याओं में से एक माना जाता है. यह ऐसा मौसम ही होता है कि लोग आसानी से इसकी चपेट में आ जाते हैं. लेकिन अगर आपको सिर्फ सर्दी ही नहीं, बल्कि बाकी मौसम में भी जुकाम की समस्या लगातार बनी रहती है, तो आपको सावधान होने की जरूरत हैं, क्योंकि आपका शरीर आपको किसी तरह की कमी की चेतावनी दे रहा है. बाकी बीमारियों के संकेतों की तरह शरीर जुकाम से भी लोगों को अगाह करता है कि उसे किसी चीज की कमी का सामना करना पड़ रहा है. अगर आपके साथ भी इस तरह की दिक्कत हर मौसम चाहे वह सर्दी हो या फिर गर्मी हो, बनी रहती है, तो चलिए बताते हैं कि किस चीज की दिक्कत है. 

क्यों हर दिन होता है जुकाम?

अब सवाल आता है कि हर दिन जुकाम क्यों होता है. यह सिर्फ मौसम का असर नहीं होता. कई बार वजह यह होती है कि शरीर में उन जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स की कमी हो जाती है जो इम्यून सिस्टम की सेना की तरह काम करते हैं. जब ये पोषक तत्व कम हो जाते हैं, तो शरीर वायरल इंफेक्शन का आसान निशाना बन जाता है, खासतौर पर सर्दी-जुकाम जैसे वायरस का. 

कौन से विटामिन्स और मिनरल्स की कमी?

इसके लिए  आम पोषक की कमी सबसे ऊपर रखा जाता है, जिसमें पहले नम्बर पर विटामिन सी का नाम आता है. विटामिन C आपकी इम्यून सिस्टम का ट्रेनर जैसा है. यह शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स का प्रोडक्शन बढ़ाता है, जो इंफेक्शन से लड़ने की पहली रक्षा होती हैं. यह एक एंटीऑक्सीडेंट भी है, यानी यह उन फ्री रेडिकल्स से लड़ता है जो शरीर को सेल स्तर पर नुकसान पहुंचाते हैं. 

इसकी कमी की संकेत

  • बार-बार सर्दी पड़ना
  • घावों का देर से भरना
  • मसूड़ों से खून आना
  • लगातार थकान
  • रूखी और सुस्त त्वचा

विटामिन डी की कमी

दूसरे नम्बर पर आता है विटामिन डी.  हम इसे ज्यादातर हड्डियों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन यह आपकी इम्यून सिस्टम के काम को कंट्रोल करने में गहरी भूमिका निभाता है. यह इम्यून सेल्स को सक्रिय करता है और बैक्टीरिया-वायरस से लड़ने में मदद करता है. अगर आप अक्सर बीमार पड़ते हैं, खासकर सर्दियों में या लंबे समय तक घर के अंदर रहने पर, तो संभव है आपका शरीर विटामिन D की कमी का संकेत दे रहा हो. 

इसकी कमी के संकेत

  • लगातार थकान
  • बार-बार सर्दी-खांसी 
  • हड्डियों या पीठ में दर्द
  • मूड बदलना या हल्का डिप्रेशन
  • मांसपेशियों में कमजोरी

जिंक 

जिंक को उतना महत्व नहीं मिलता जितना मिलना चाहिए, लेकिन इम्यूनिटी में यह बेहद आवश्यक है. यह इम्यून सेल्स बनाता है और उन्हें सक्रिय रखता है, जो वायरस से लड़ने का काम करती हैं.

कमी के संकेत

  • बार-बार सर्दी या संक्रमण
  • घावों का देर से भरना
  • बालों का झड़ना या पतले होना
  • स्वाद या गंध कम महसूस होना
  • नाखूनों पर सफेद धब्बे

आयरन

अगर आपको बार-बार जुकाम की समस्या है, तो उसमें आयरन की कमी भी हो सकता है. आयरन का जिक्र अक्सर एनीमिया के साथ किया जाता है, लेकिन यह इम्यूनिटी पर भी बड़ा असर डालता है. आयरन कम होने पर शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बनाता, जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है और इम्यून सिस्टम धीमा पड़ जाता है. इस वजह से वायरस आसानी से हमला कर लेते हैं. 

कमी के लक्षण

  • थकान के साथ बार-बार बीमार होना
  • पीला चेहरा या डार्क सर्कल
  • नाखून टूटना, बाल झड़ना
  • सांस फूलना
  • ध्यान न लगना

इसकी कमी को पूरा करने के लिए पालक, मेथी, चौलाई, खजूर, किशमिश, गुड़, दालें, राजमा, सोयाबीन, रेड मीट, चिकन लीवर, अंडे और मछली को डाइट में शामिल किया जा सकता है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बॉडी ओडर से भी पता लगती हैं बीमारियां, जानें शरीर की 7 तरह की गंध और उनके छिपे संकेत

बॉडी ओडर से भी पता लगती हैं बीमारियां, जानें शरीर की 7 तरह की गंध और उनके छिपे संकेत



हम सभी जानते हैं कि पसीना आना और कभी-कभी हल्की बदबू आना एक आम बात है. ज्यादातर लोग इसे सिर्फ सफाई या डियोड्रेंट न लगाने से जुड़ी समस्या मानते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर की गंध में अचानक होने वाला बदलाव कई बार हमारे अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकता है.  

डॉक्टरों के मुताबिक, पसीना खुद में बिना गंध का होता है. असली गंध तब बनती है जब शरीर के अंदर केमिकल बदलाव, हार्मोनल उतार-चढ़ाव, संक्रमण या मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी होती है. कई क्लीनिकल शोध बताते हैं कि शरीर की अलग-अलग गंधें कभी-कभी ऐसी बीमारियों की ओर इशारा कर सकती हैं, जिनका पता हमें समय रहते लगना बहुत जरूरी है. ऐसे में आइए शरीर की 7 खास गंधें जानते हैं जिनसे बीमारी का पता चलता है. 

शरीर की 7 तरह की गंध और उनके छिपे संकेत

1. नेल पॉलिश रिमूवर जैसी गंध – कभी-कभी कुछ लोगों की सांसों या स्किन से हल्की मीठी, फलों जैसी या नेल पॉलिश रिमूवर जैसी एसीटोन की गंध आती है. डॉक्टर इसे शरीर में बढ़े हुए कीटन से जोड़ते हैं. यह स्थिति तब बनती है जब शरीर को एनर्जी के लिए चीनी नहीं मिलती और वह तेजी से फैट जलाना शुरू कर देता है. ऐसा ज्यादातर अनकंट्रोल डायबिटीज, खासकर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) में देखा जाता है. यह गंध कई बार अन्य गंभीर लक्षणों से पहले ही दिखाई देने लगती है. इसलिए इसे एक अर्ली वार्निंग सिग्नल माना जाता है. 

2. खट्टी या सिरके जैसी गंध – अगर आपके शरीर से सिरके जैसी तीखी, खट्टी गंध आने लगी है, तो यह हाइपोथायरायडिज्म का संकेत हो सकता है. अतिसक्रिय थायराइड शरीर का मेटाबॉलिज्म बहुत तेज कर देता है, जिससे पसीना ज्यादा आता है, शरीर में गर्मी बढ़ती है और पसीने में एसीडिक गंध आने लगती है. यह गंध हल्की एक्टिविटी करने पर और भी तेज महसूस होती है. इसके साथ तेज दिल की धड़कन, बेचैनी और बिना कारण वजन घटना जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं. 

3. अमोनिया जैसी तेज गंध – अगर पसीने से अमोनिया जैसी चुभती हुई गंध आने लगे, तो इसे बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह गंध अक्सर उन लोगों में देखी जाती है जिनकी किडनी सही तरह से काम नहीं कर रही होती है. जब किडनी शरीर का यूरिया पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाती, तो उसका कुछ हिस्सा पसीने के जरिए बाहर आता है और स्किन पर टूटकर अमोनिया जैसी गंध बनाता है. कई बार यह गंध किडनी रोग के शुरुआती संकेत के तौर पर भी सामने आती है. 

4. मीठी या खमीरी, ब्रेड जैसी गंध – स्किन पर यीस्ट यानी फंगल संक्रमण होने पर शरीर से एक तरह की मीठी, बासी या ब्रेड जैसी गंध आने लगती है. यह गंध आमतौर पर उन जगहों पर ज्यादा महसूस होती है जहां नमी ज्यादा रहती है, जैसे बगलें, कमर, स्तनों के नीचे, स्किन पर, नहाने के बाद भी यह गंध बनी रह सकती है. यह संकेत है कि स्किन पर मौजूद फंगल संक्रमण बढ़ रहा है और उसे इलाज की जरूरत है.

5. सड़ी हुई मछली जैसी गंध – यह गंध बहुत रेयर है, लेकिन इतनी अलग होती है कि नजरअंदाज नहीं की जा सकती है. इस स्थिति को ट्राइमेथीलेमिनुरिया (Trimethylaminuria) कहा जाता है. यह एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है. जिसमें शरीर ट्राइमेथिलएमाइन नामक केमिकल को तोड़ नहीं पाता है. इसकी गंध सड़ी हुई मछली जैसी होती है. यह गंध पसीने, सांस और यहां तक कि मूत्र में भी महसूस हो सकती है. यह समस्या अक्सर  जेनेटिक कारणों या कभी-कभी लीवर की खराबी से जुड़ी होती है. 

6. बासी, नमी भरे कमरे या गीले तहखाने जैसी गंध – जब लीवर शरीर से टॉक्सिन्स को साफ करने में सक्षम नहीं होता, तो एक अजीब-सी बासी, नम या मिट्टी जैसी गंध आने लगती है. इसे मेडिकल भाषा में फेटर हेपेटिकस कहा जाता है. हार्ट डिजीज से पीड़ित लोगों में शरीर और सांस के जरिए सल्फर आधारित यौगिक निकलने लगते हैं, जिनसे यह विशिष्ट गंध बनती है. यह संकेत देता है कि लीवर की फिल्टरिंग क्षमता घट रही है और तुरंत जांच की जरूरत है. 

7.मैटालिक या बहुत तीखी गंध – कुछ बैक्टीरिया जैसे कौरीनेबैक्टीरियम, स्टैफिलोकोकस, और स्यूडोमोनास पसीने को ऐसे रसायनों में बदल देते हैं जिससे तेज, मैटालिक या चुभने वाली गंध आने लगती है. यह गंध स्किन पर जीवाणु संक्रमण, घाव में संक्रमण या बगल और कमर में बैक्टीरिया के ज्यादा बढ़ने का संकेत हो सकती है. अगर ऐसी गंध के साथ लालिमा, दर्द या दाने हों, तो जांच जरूरी है. 

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दिन में कितनी बार कर सकते हैं मास्टरबेशन? जानें इससे होने वाले फायदे और नुकसान

दिन में कितनी बार कर सकते हैं मास्टरबेशन? जानें इससे होने वाले फायदे और नुकसान



आज के समय में मास्टरबेशन एक ऐसा विषय है जिस पर लोग खुलकर बात नहीं करते हैं. शर्म, झिझक और गलत धारणाओं की वजह से ज्यादातर लोग इसके बारे में सही जानकारी नहीं जुटा पाते. लेकिन सच यह है कि मास्टरबेशन एक बिल्कुल सामान्य, प्राकृतिक और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसे दुनिया भर में लगभग हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी ना कभी करता है.

मास्टरबेशन से तनाव कम होता है, मूड अच्छा होता है और अपने शरीर को समझने में मदद मिलती है. लेकिन किसी भी चीज की तरह, इसका बिना सीमा के किया गया यूज नुकसान भी पहुंचा सकता है. बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि  दिन में कितनी बार मास्टरबेशन करना ठीक है, क्या ज्यादा करने से कमजोरी आती है और क्या इससे प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है. तो आइए जानते हैं कि दिन में कितनी बार मास्टरबेशन कर सकते हैं और इससे होने वाले फायदे और नुकसान क्या हैं. 

दिन में कितनी बार कर सकते हैं मास्टरबेशन?

मास्टरबेशन या हस्तमैथुन का मतलब है अपने प्राइवेट पार्ट को खुद से एक्टिव करना है. इसे करने का कोई तय नंबर नहीं है, जैसे 1 बार, 2 बार या 3 बार, यह हर व्यक्ति पर निर्भर करता है. उसकी उम्र, शरीर की एनर्जी यौन इच्छा, मानसिक और शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है. लेकिन मास्टरबेशन तब तक सामान्य है जब तक यह आपके रूटीन को प्रभावित न करे. यानी:शरीर में दर्द या जलन न हो, नींद, रिश्ते या लाइफस्टाइल खराब न हों, आप इसे रोक नहीं पा रहे हों. सामान्य तौर पर  दिन में 1–2 बार तक करना सामान्य माना जाता है, लेकिन इससे ज्यादा बार तभी ठीक है जब आपको दर्द, थकान या मानसिक परेशानी न हो. 

मास्टरबेशन के फायदे

1.  तनाव और टेंशन कम करता है – मास्टरबेशन करने पर शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो खुशी और आराम देते हैं. इससे दिमाग हल्का होता है और तनाव कम होता है.

2. अच्छी नींद आती है – इसके करने के बाद शरीर रिलैक्स हो जाता है, जिससे नींद जल्दी और अच्छी आती है. 

3. अपने शरीर को जानने में मदद – आप समझ पाते हैं कि आपको किस तरह की एक्टिवनेस पसंद है. यह फ्यूचर लाइफ को भी बेहतर बनाता है. 

4. यौन स्वास्थ्य अच्छा रहता है – मास्टरबेशन से जननांगों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे यौन क्षमता में सुधार होता है. 

5.  मूड अच्छा होता है – डोपामिन और सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन निकलते हैं, जो मूड को बेहतर करते हैं.  

6. इम्यून सिस्टम को थोड़ी मदद – कुछ शोध बताते हैं कि  इससे IgA नामक एंटीबॉडी बढ़ती है, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद देती है. 

7. प्रोस्टेट स्वास्थ्य को फायदा – कुछ अध्ययनों के अनुसार नियमित  मास्टरबेशन से प्रोस्टेट समस्याओं का खतरा थोड़ा कम कर सकता है. 

ज्यादा मास्टरबेशन करने के नुकसान

जब मास्टरबेशन आदत या मजबूरी बन जाए, तब यह नुकसान कर सकता है. बार-बार करने से शरीर थका हुआ महसूस कर सकता है. कभी-कभी जननांगों में दर्द भी हो सकता है. बहुत ज्यादा करने से दिमाग सुस्त या भारी लग सकता है. कुछ लोग इसे गलत समझकर खुद को दोषी महसूस करते हैं. इससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है. 

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