डायबिटीज है तो गलती से भी नहीं खाएं ये 9 फूड, हो जाती है इतनी बुरी हालत

डायबिटीज है तो गलती से भी नहीं खाएं ये 9 फूड, हो जाती है इतनी बुरी हालत


पिज्जा बेस, बर्गर बन, ब्रेड या नान जैसी चीजें देखने में सिंपल लगती हैं, लेकिन ये मैदे से बनती हैं. मैदा शरीर में बहुत जल्दी शुगर में बदल जाता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है. इसकी जगह आप मल्टीग्रेन या साबुत अनाज वाली रोटियां और ब्रेड लें.

पैक में मिलने वाला मीठा दही या फ्रूट दही हेल्दी लगता है, लेकिन इसमें ढेर सारी चीनी छुपी होती है. जो आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक होती है. ऐसे में इसकी जगह सादा दही या ग्रीक योगर्ट लें, उसमें खुद से थोड़े ताजे फल या दालचीनी डालें.

पैक में मिलने वाला मीठा दही या फ्रूट दही हेल्दी लगता है, लेकिन इसमें ढेर सारी चीनी छुपी होती है. जो आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक होती है. ऐसे में इसकी जगह सादा दही या ग्रीक योगर्ट लें, उसमें खुद से थोड़े ताजे फल या दालचीनी डालें.

फ्रूट जूस सुनते ही लगता है कि ये सेहत के लिए अच्छा होगा. लेकिन जब फल का जूस बनता है तो उसका फाइबर निकल जाता है और सिर्फ फ्रुक्टोज बचती है. स्मूदी में भी अगर केला, शहद या मीठा दूध हो तो वो और ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे में साबुत फल खाएं. जूस और स्मूदी को कभी-कभी ही पिएं.

फ्रूट जूस सुनते ही लगता है कि ये सेहत के लिए अच्छा होगा. लेकिन जब फल का जूस बनता है तो उसका फाइबर निकल जाता है और सिर्फ फ्रुक्टोज बचती है. स्मूदी में भी अगर केला, शहद या मीठा दूध हो तो वो और ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे में साबुत फल खाएं. जूस और स्मूदी को कभी-कभी ही पिएं.

कॉर्नफ्लेक्स, चॉकलेट सीरियल, ग्रेनोला बार, ये सभी चीजें बहुत मीठी होती हैं और इसमें रिफाइंड शुगर और कार्ब्स भरे होते हैं. इनकी जगह दलिया, ओट्स, पोहा या उपमा जैसे देसी और लो-शुगर ऑप्शन चुनें.

कॉर्नफ्लेक्स, चॉकलेट सीरियल, ग्रेनोला बार, ये सभी चीजें बहुत मीठी होती हैं और इसमें रिफाइंड शुगर और कार्ब्स भरे होते हैं. इनकी जगह दलिया, ओट्स, पोहा या उपमा जैसे देसी और लो-शुगर ऑप्शन चुनें.

समोसे, पकोड़े, चिप्स और पैकेट वाले स्नैक्स बहुत आम हैं, लेकिन ये तेल, कार्ब्स और नमक से भरे होते हैं. इसके बदलें भुने हुए चने, मूंगफली या एयर-फ्राइड स्नैक्स खाएं.

समोसे, पकोड़े, चिप्स और पैकेट वाले स्नैक्स बहुत आम हैं, लेकिन ये तेल, कार्ब्स और नमक से भरे होते हैं. इसके बदलें भुने हुए चने, मूंगफली या एयर-फ्राइड स्नैक्स खाएं.

शुगर फ्री बिस्कुट और मिठाइयां खाने से बचें. बहुत से लोग सोचते हैं कि शुगर-फ्री लिखा हो तो वो डायबिटीज के लिए ठीक है. लेकिन इनमें अक्सर शुगर अल्कोहल होते हैं, जो ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं और पेट खराब कर सकते है. इसलिए घर की बनी मिठाइयां जैसे खजूर, नारियल और मेवों से बनी चीजें खाएं.

शुगर फ्री बिस्कुट और मिठाइयां खाने से बचें. बहुत से लोग सोचते हैं कि शुगर-फ्री लिखा हो तो वो डायबिटीज के लिए ठीक है. लेकिन इनमें अक्सर शुगर अल्कोहल होते हैं, जो ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं और पेट खराब कर सकते है. इसलिए घर की बनी मिठाइयां जैसे खजूर, नारियल और मेवों से बनी चीजें खाएं.

फुल फैट डेयरी यानी पूरा दूध, क्रीमी पनीर या चीज टेस्ट में तो मजेदार होते हैं लेकिन इनमें सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है जो इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाता है, इसकी जगह टोन्ड दूध, स्किम्ड दूध और हल्के पनीर का सेवन करें.

फुल फैट डेयरी यानी पूरा दूध, क्रीमी पनीर या चीज टेस्ट में तो मजेदार होते हैं लेकिन इनमें सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है जो इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाता है, इसकी जगह टोन्ड दूध, स्किम्ड दूध और हल्के पनीर का सेवन करें.

इन सब के अलावा सफेद चावल का भी परहेज करना चाहिए. हम भारतीयों के खाने का मुख्य हिस्सा चावल होता है. लेकिन सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत ज्यादा होता है, जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाता है. ऐसे में ब्राउन राइस, बाजरा, ज्वार, या क्विनोआ जैसे अनाज यूज करें.

इन सब के अलावा सफेद चावल का भी परहेज करना चाहिए. हम भारतीयों के खाने का मुख्य हिस्सा चावल होता है. लेकिन सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत ज्यादा होता है, जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाता है. ऐसे में ब्राउन राइस, बाजरा, ज्वार, या क्विनोआ जैसे अनाज यूज करें.

केक, पेस्ट्री और मिठाइयां भी डायबिटीज पेशेंट्स के लिए खतरनाक है. मीठा खाना किसे पसंद नहीं, लेकिन केक, मफिन, बेकरी आइटम्स में शुगर, मैदा और ट्रांस फैट का कॉम्बिनेशन होता है. ऐसे में इसकी जगह डार्क चॉकलेट या ओट्स और बादाम से बनी घर की मिठाई खाएं.

केक, पेस्ट्री और मिठाइयां भी डायबिटीज पेशेंट्स के लिए खतरनाक है. मीठा खाना किसे पसंद नहीं, लेकिन केक, मफिन, बेकरी आइटम्स में शुगर, मैदा और ट्रांस फैट का कॉम्बिनेशन होता है. ऐसे में इसकी जगह डार्क चॉकलेट या ओट्स और बादाम से बनी घर की मिठाई खाएं.

Published at : 30 Nov 2025 06:51 AM (IST)

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आने वाले दिनों में घर में है शादी और नहीं मिलेगी पूरी नींद, तो अभी से रेडी कर लें ‘स्लीप बैंक’

आने वाले दिनों में घर में है शादी और नहीं मिलेगी पूरी नींद, तो अभी से रेडी कर लें ‘स्लीप बैंक’



हम सब जानते हैं कि शादी-ब्याह का समय कितना बिजी होता है. दिनभर मेहमानों का आना-जाना, तैयारियों का जोर, खरीदारी, सजावट और फिर रात-रात भर चलने वाली रस्में. ऐसे में सबसे पहले और सबसे ज्यादा जो चीज खराब होती है, वो है नींद. अक्सर शादी वाले हफ्ते में लोग 4 से 5 घंटे ही सो पाते हैं, जिसका असर चिड़चिड़ापन, थकान, ध्यान कम लगना और शरीर टूटने के रूप में सामने आता है.

क्या आप जानते हैं कि जैसे हम शादी की बाकी तैयारियां पहले से कर लेते हैं, जैसे कपड़े, मेकअप, बजट, मेन्यू, फोटोग्राफर, वैसे ही नींद की भी तैयारी की जा सकती है. यही तैयारी ‘स्लीप बैंकिंग’ कहलाती है यानी पहले से नींद जमा कर लेना, ताकि बिजी दिनों में नींद कम मिले तो शरीर और दिमाग पर कम असर पड़े. तो आइए जानते हैं आखिर ये स्लीप बैंकिंग क्या होती है और आने वाले दिनों में घर में शादी है  तो अभी से स्लीप बैंक कैसे रेडी कर लें. 

स्लीप बैंकिंग क्या होती है? 

स्लीप बैंकिंग का मतलब है कि आने वाले दिनों में अगर आपको कम सोना पड़ेगा तो उससे पहले के 4 से 7 दिनों में हर रात अपनी नींद बढ़ा लें. लगभग 1 से 2 घंटे तक यानी अगर आप रोज 7 घंटे सोते हैं तो कुछ दिनों के लिए 8 से 9 घंटे सोने की कोशिश करें. इससे आपका शरीर पहले से आराम जमा कर लेता है और शादी जैसे बिजी समय में नींद कम मिलने पर भी आप ज्यादा थकान महसूस नहीं करेंगे. जैसे बैंक में पैसे जमा कर लेते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर निकाल सकें, वैसे ही नींद का भी स्टॉक बनाया जा सकता है. 

स्लीप बैंकिंग क्यों जरूरी है?

शादी के दिनों में रात देर तक जागना, स्टेज तक दौड़ना, रिश्तेदारों के साथ समय बिताना, सुबह जल्दी उठना, लगातार काम और हलचल इन सबकी वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती है. ऐसे में थकान जल्दी चढ़ती है, मूड खराब होता है और मजा कम हो जाता है. लेकिन अगर आपने 4 से 5 दिन पहले से नींद बढ़ा ली, तो आप ज्यादा एनर्जी महसूस करेंगे, नींद की कमी का असर कम पड़ेगा, चिड़चिड़ापन और सुस्ती कम होगी, दिमाग ज्यादा तेज काम करेगा और आप शादी का हर पल बेहतर एंजॉय कर सकेंगे. वैज्ञानिकों के अनुसार, पहले से ज्यादा नींद लेने से दिमाग की गहरी नींद  की क्वालिटी बढ़ती है, जो शरीर को अंदर से रिपेयर करती है. इससे आने वाले बिजी दिनों में शरीर थकान को और बेहतर झेल पाता है.

अभी से स्लीप बैंकिंग कैसे रेडी करें 

1. शादी से 5 से 7 दिन पहले अपनी नींद बढ़ाएं – हर रात 1 से 2 घंटे ज्यादा सोने की कोशिश करें. अगर आप 11 बजे सोते हैं तो 9:30 पर सो जाएं. 

2. बिस्तर पर 9 से 10 घंटे रहने का लक्ष्य रखें – इससे शरीर को गहरी नींद लेने का पूरा मौका मिलेगा. 

3.  रात को मोबाइल यानी स्क्रीन कम करें – स्क्रीन दिमाग को जगाए रखती है. शादी से पहले ये गलती न करें. 

4. कमरा शांत रखें – इससे नींद जल्दी और गहरी आती है. 

5.  शादी वाली रात अगर नींद कम मिले – तो अगले दिन 20 से 30 मिनट की झपकी ले लें. यह शरीर को तुरंत राहत देती है.

यह भी पढ़ें: हड्डियों को दें अंदर से ताकत, डाइट और लाइफस्टाइल में लाएं ये बदलाव, जाने आसान तरीके

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रात में रूम हीटर चलाकर सोने की आदत तो नहीं है, सुबह हो सकती है ये दिक्कत

रात में रूम हीटर चलाकर सोने की आदत तो नहीं है, सुबह हो सकती है ये दिक्कत


जब हीटर पूरी रात चलता रहता है, कमरे का तापमान लगातार बढ़ता रहता है. इससे कमरे की हवा अपनी नेचुरल फ्रेशनेस खो देती है. हवा भारी लगने लगती है, ऑक्सीजन का लेवल कम होने लगता है और सांस लेते समय घुटन महसूस हो सकती है. यही वजह है कि कई लोग सुबह उठते ही चक्कर, कमजोरी या सिरदर्द महसूस करते हैं.

हीटर की गर्म हवा बहुत तेजी से नमी सोख लेती है. इससे नाक सूख जाती है, गला बैठने लगता है, खांसी बढ़ सकती है और नाक से सांस लेना मुश्किल हो सकता है. इस तरह की सूखी हवा से सर्दियों में बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.

हीटर की गर्म हवा बहुत तेजी से नमी सोख लेती है. इससे नाक सूख जाती है, गला बैठने लगता है, खांसी बढ़ सकती है और नाक से सांस लेना मुश्किल हो सकता है. इस तरह की सूखी हवा से सर्दियों में बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.

हीटर चलने पर कमरे में नमी कम हो जाती है, और इसका सीधा असर आपकी स्किन पर पड़ता है. इसके कारण चेहरा खींचने लगता है, स्किन फटने लगती है, लगातार खुजली रहती है, होंठ बुरी तरह फट जाते हैं. जो लोग पहले से ड्राई स्किन वाले हैं, उन्हें ये दिक्कत और ज्यादा होती है.

हीटर चलने पर कमरे में नमी कम हो जाती है, और इसका सीधा असर आपकी स्किन पर पड़ता है. इसके कारण चेहरा खींचने लगता है, स्किन फटने लगती है, लगातार खुजली रहती है, होंठ बुरी तरह फट जाते हैं. जो लोग पहले से ड्राई स्किन वाले हैं, उन्हें ये दिक्कत और ज्यादा होती है.

हीटर की सूखी गर्मी बच्चों और बुजुर्गों के शरीर पर जल्दी असर करती है. बच्चों में डिहाइड्रेशन, खुजली, बेचैनी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. बुजुर्गों में सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, खांसी बढ़ जाना जैसे दिक्कत हो सकती है. इसलिए उनके कमरे में पूरी रात हीटर बिल्कुल न चलाएं.

हीटर की सूखी गर्मी बच्चों और बुजुर्गों के शरीर पर जल्दी असर करती है. बच्चों में डिहाइड्रेशन, खुजली, बेचैनी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. बुजुर्गों में सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, खांसी बढ़ जाना जैसे दिक्कत हो सकती है. इसलिए उनके कमरे में पूरी रात हीटर बिल्कुल न चलाएं.

जब हीटर पूरी रात चलता रहता है, तो कमरे में आग लगने का बड़ा जोखिम रहता है. यह सबसे गंभीर खतरा है. रातभर हीटर चलने से पुराना या कमजोर तार गर्म होकर चिंगारी दे सकता है.कपड़े, कंबल या कोई चीज हीटर के पास पड़े हों तो खतरा और बढ़ जाता है. इलेक्ट्रॉनिक सामान ओवरहीट हो सकता है.कई दुर्घटनाएं इसी वजह से होती हैं.

जब हीटर पूरी रात चलता रहता है, तो कमरे में आग लगने का बड़ा जोखिम रहता है. यह सबसे गंभीर खतरा है. रातभर हीटर चलने से पुराना या कमजोर तार गर्म होकर चिंगारी दे सकता है.कपड़े, कंबल या कोई चीज हीटर के पास पड़े हों तो खतरा और बढ़ जाता है. इलेक्ट्रॉनिक सामान ओवरहीट हो सकता है.कई दुर्घटनाएं इसी वजह से होती हैं.

अगर किसी के घर में गैस वाला हीटर है, तो यह और भी जोखिम भरा है. ऐसे हीटर से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बेहद खतरनाक होती है. यह गैस सिरदर्द, चक्कर, घुटन, उलझन, बेहोशी तक पैदा कर सकती है. बंद कमरे में यह गैस जानलेवा भी हो सकती है.

अगर किसी के घर में गैस वाला हीटर है, तो यह और भी जोखिम भरा है. ऐसे हीटर से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बेहद खतरनाक होती है. यह गैस सिरदर्द, चक्कर, घुटन, उलझन, बेहोशी तक पैदा कर सकती है. बंद कमरे में यह गैस जानलेवा भी हो सकती है.

हीटर हवा की नमी कम करता है, जिससे आंखें सूख जाती हैं. जिससे आंखों में खुजली, लाल होना, जलन, बार-बार पानी आना जैसे समस्याएं होने लगती हैं. बाल भी सूखे और कमजोर होने लगते हैं, डैंड्रफ बढ़ जाता है, बाल झड़ते हैं और स्कैल्प में खुजली होती है.

हीटर हवा की नमी कम करता है, जिससे आंखें सूख जाती हैं. जिससे आंखों में खुजली, लाल होना, जलन, बार-बार पानी आना जैसे समस्याएं होने लगती हैं. बाल भी सूखे और कमजोर होने लगते हैं, डैंड्रफ बढ़ जाता है, बाल झड़ते हैं और स्कैल्प में खुजली होती है.

Published at : 29 Nov 2025 01:41 PM (IST)

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मिलावट वाले भुने चने खा रहे हैं तो हो जाएं सावधान, बढ़ सकता है कैंसर का खतरा 

मिलावट वाले भुने चने खा रहे हैं तो हो जाएं सावधान, बढ़ सकता है कैंसर का खतरा 



सर्दियों में ज्यादातर लोगों को भुने चने खाना पसंद होता है. लेकिन हाल ही में हुए एक खुलासे ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. राजधानी दिल्ली के कई बाजारों में मिलने वाले भुने चनों में औरामाइन ओ नामक खतरनाक इंडस्ट्रियल डाई की मिलावट की पुष्टि हुई है. यह वही रसायन है जिसका इस्तेमाल कपड़ों और लेदर को रंगने के लिए किया जाता है. खाने में इसका उपयोग सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है.

लाजपत नगर सहित कई बिजी मार्केट से लिए गए नमूनों में इसकी मौजूदगी पाई गई. शुरुआती जांच में 40 फीसदी नमूनों में औरामाइन ओ मिला, जिसके बाद FSSI और खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है. इसे लेकर अब तक 15 एफआईआर दर्ज की गई है और करीब 50 विक्रेताओं के लाइसेंस भी निलंबित किया जा चुके हैं. इसके अलावा कई लोगों पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आप भी मिलावटी भुने चने खा रहे हैं तो तो आपको सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि इससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. 

क्या है औरामाइन ओ और यह कितना खतरनाक?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, औरामाइन ओ एक सिंथेटिक पीला पिगमेंट है जिसे किसी भी खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. यह पानी में घुलकर चनाें को चमकदार पीला बनता है और उन्हें ज्यादा कुरकुरा दिखता है, लेकिन यह वही केमिकल है जिसे डब्ल्यूएचओ (WHO) की इंटरनेशनल कैंसर रिसर्च एजेंसी ने संभावित कार्सिनोजेन यानी कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ घोषित किया हुआ है. यह रसायन शरीर में जाकर सबसे पहले किडनी, फिर लीवर और बाद में ब्लेंडर को नुकसान पहुंचता है. लंबे समय तक इसका सेवन नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे चक्कर आना, थकान, सिर दर्द और उल्टी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं. वहीं बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह मिलावट और भी खतरनाक मानी गई है. 

एक्सपर्ट्स ने क्या बताया नुकसान और पहचान के तरीके?

कई एक्सपर्ट ने भुने चनों को गंभीर खतरा बताते हुए बताया है कि औरामाइन ओ से मिलावटी चने लंबे समय में शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. एक्सपर्ट यह भी बताते है कि लोग घर पर ही कैसे असली और नकली चने की पहचान कर सकते हैं. चने या दाल को कुछ मिनट पानी में भिगोकर देखा जा सकता है. अगर पानी पीला हो जाए या दाल रंग छोड़ दें तो समझ लेना चाहिए कि उसमें रंग मिला हुआ है. असली दाल पानी में धीरे-धीरे नीचे जाती है जबकि नकली दाल तुरंत नीचे चली जाती है और रंग छोड़ती है. 

कैसे करें बचाव?

  • नकली चनों से बचाव करने के लिए बहुत चमकदार, अत्यधिक पीले या अनियमित रूप से कुरकुरे दिखने वाले चने न खरीदें. 
  • चनों को पानी में भिगोकर रंग छोड़ने की जांच करें. 
  • वहीं भरोसेमंद दुकानों और ब्रांडेड पैकेट उत्पादों को ही खरीदें. 
  • चनों में किसी भी तरह का रासायनिक स्वाद या रंग दिखाई दें तो तुरंत ऐसे चनों का सेवन बंद कर दें.

ये भी पढ़ें-हड्डियों को दें अंदर से ताकत, डाइट और लाइफस्टाइल में लाएं ये बदलाव, जाने आसान तरीके

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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आपकी स्किन पर दिखते हैं लिवर डैमेज के ये लक्षण, पता चलते ही दौड़ें डॉक्टर के पास

आपकी स्किन पर दिखते हैं लिवर डैमेज के ये लक्षण, पता चलते ही दौड़ें डॉक्टर के पास


चेहरे पर लिवर खराब होने का सबसे साफ और पहला लक्षण पीलिया होता है. जब खून में बिलीरुबिन जमा होने लगता है तो स्किन और आंखों का सफेद हिस्सा धीरे-धीरे पीला दिखने लगता है. इस बदलाव को कई बार लोग सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं जबकि यह सीधा लिवर फंक्शन खराब होने का संकेत हो सकता है.

इसके अलावा लिवर की बीमारी में हथेलियों में खून का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे स्किन पर लालिमा दिखने लगती है. यह बदलाव सबसे ज्यादा हथेली के बीच वाले हिस्से में दिखाई देता है. यह समस्या हल्की हो सकती है, लेकिन अगर लगातार बनी रहे तो यह लिवर को नुकसान पहुंचाने की तरफ इशारा करती है.

इसके अलावा लिवर की बीमारी में हथेलियों में खून का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे स्किन पर लालिमा दिखने लगती है. यह बदलाव सबसे ज्यादा हथेली के बीच वाले हिस्से में दिखाई देता है. यह समस्या हल्की हो सकती है, लेकिन अगर लगातार बनी रहे तो यह लिवर को नुकसान पहुंचाने की तरफ इशारा करती है.

वहीं स्किन पर मकड़ी के जाल जैसे छोटे-छोटे लाल निशान दिखाई देने लगते हैं जिन्हें स्पाइडर एंजियोमा कहा जाता है. यह स्किन की सतह के पास बनने वाली सूक्ष्म रक्त धमनियां होती है. लिवर की परेशानी बढ़ने पर यह निशान ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं. हालांकि चेहरे, गर्दन और ऊपरी शरीर पर इनका दिखाना आम है और यह लिवर की कमजोरी का एक महत्वपूर्ण लक्षण माना जाता है.

वहीं स्किन पर मकड़ी के जाल जैसे छोटे-छोटे लाल निशान दिखाई देने लगते हैं जिन्हें स्पाइडर एंजियोमा कहा जाता है. यह स्किन की सतह के पास बनने वाली सूक्ष्म रक्त धमनियां होती है. लिवर की परेशानी बढ़ने पर यह निशान ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं. हालांकि चेहरे, गर्दन और ऊपरी शरीर पर इनका दिखाना आम है और यह लिवर की कमजोरी का एक महत्वपूर्ण लक्षण माना जाता है.

लिवर फंक्शन कमजोर होने पर शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है. इस कारण चेहरे, खासकर आंखों के नीचे फुलाव दिखने लगता है. यह सूजन सुबह के समय ज्यादा नजर आती है और धीरे-धीरे दिनभर बनी रह सकती है. कई लोग इसे नींद की कमी या थकान समझते हैं लेकिन यह लिवर डैमेज का भी संकेत हो सकता है.

लिवर फंक्शन कमजोर होने पर शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है. इस कारण चेहरे, खासकर आंखों के नीचे फुलाव दिखने लगता है. यह सूजन सुबह के समय ज्यादा नजर आती है और धीरे-धीरे दिनभर बनी रह सकती है. कई लोग इसे नींद की कमी या थकान समझते हैं लेकिन यह लिवर डैमेज का भी संकेत हो सकता है.

लिवर शरीर के टॉक्सिन को बाहर निकालने का काम करता है. जब यह सही सही तरीके से काम नहीं कर पता तो टॉक्सिन्स शरीर में जमा होने लगते हैं जिसके चलते स्किन पर मुंहासे एक्जिमा और रेशे जैसी समस्याएं बढ़ सकती है. यह बदलाव खासकर उन लोगों में देखा जाता है जिनका लिवर डिटॉक्स सिस्टम कमजोर होने लगता है.

लिवर शरीर के टॉक्सिन को बाहर निकालने का काम करता है. जब यह सही सही तरीके से काम नहीं कर पता तो टॉक्सिन्स शरीर में जमा होने लगते हैं जिसके चलते स्किन पर मुंहासे एक्जिमा और रेशे जैसी समस्याएं बढ़ सकती है. यह बदलाव खासकर उन लोगों में देखा जाता है जिनका लिवर डिटॉक्स सिस्टम कमजोर होने लगता है.

अगर बिना दाने या रेशे के लगातार खुजली हो रही है तो यह भी लिवर से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है. इसके अलावा स्किन का रंग असामान्य रूप से बदलना आसानी से चोट लग जाना या स्किन का गहरा या फीका पड़ना भी लिवर की बीमारी से जुड़ा माना जाता है. यह बदलाव धीरे-धीरे नजर आते हैं और कई बार महीनों तक चलते रहते हैं.

अगर बिना दाने या रेशे के लगातार खुजली हो रही है तो यह भी लिवर से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है. इसके अलावा स्किन का रंग असामान्य रूप से बदलना आसानी से चोट लग जाना या स्किन का गहरा या फीका पड़ना भी लिवर की बीमारी से जुड़ा माना जाता है. यह बदलाव धीरे-धीरे नजर आते हैं और कई बार महीनों तक चलते रहते हैं.

वहीं लिवर की समस्या बढ़ने पर खून बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे आंखों में पीलापन और ज्यादा दिखने लगता है. यह पीलापन कई बार चेहरा और स्किन साफ नजर न आने के बावजूद आंखों में जल्दी दिख जाता है इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

वहीं लिवर की समस्या बढ़ने पर खून बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे आंखों में पीलापन और ज्यादा दिखने लगता है. यह पीलापन कई बार चेहरा और स्किन साफ नजर न आने के बावजूद आंखों में जल्दी दिख जाता है इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

Published at : 29 Nov 2025 12:01 PM (IST)

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