सुबह 3 से 5 के बीच रोजाना खुल जाती है नींद? इस वक्त बॉडी देती है खास सिग्नल

सुबह 3 से 5 के बीच रोजाना खुल जाती है नींद? इस वक्त बॉडी देती है खास सिग्नल


अगर आप बिना किसी अलार्म के हर दिन सुबह 3 से 5 बजे के बीच जाग जाते हैं, तो हो सकता है कि आपका शरीर आपको कोई जरूरी संकेत दे रहा हो. यह सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि आपके बॉडी क्लॉक और खराब लाइफस्टाइज से जुड़ा हो सकता है. हमारे शरीर की एक 24 घंटे की इंटरनल रिद्म होती है, जिसे सर्कैडियन साइकल कहते हैं.

यही साइकल शरीर के हार्मोन, टेम्प्रेचर और स्लीप को कंट्रोल करती है. सुबह 2 से 5 बजे के बीच, आपका शरीर सतर्क रहने वाले हार्मोन कोर्टिसोल का उत्पादन बढ़ाना शुरू कर देता है.   आमतौर पर, यह हार्मोन आपको धीरे-धीरे जगाता है, लेकिन अगर आप ज्यादा तनाव में हैं, तो कोर्टिसोल का स्तर बहुत तेजी से बढ़ता है. इसी वजह से आपकी नींद अलार्म बजने से पहले ही खुल जाती है.

स्ट्रेस करता है आपकी नींद को खराब

लंबे समय तक रहने वाला तनाव या स्ट्रेस सिर्फ आपके मूड को ही नहीं, बल्कि आपकी स्लीप को भी खराब करता है. जब आप स्ट्रेस में होते हैं, तो आपका दिमाग हाई अलर्ट पर रहता है. ऐसे में, जब आप गहरी नींद में होते हैं, तो आपका दिमाग इसे एक खतरे के रूप में देखता है और आपको अचानक जगा देता है. सुबह के शुरुआती घंटों में गहरी नींद सबसे ज्यादा प्रभावी होती है. इसलिए इसी समय आपके जागने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है.

कैसे बनाएं अपनी नींद को बेहतर?

अगर आप लगातार सुबह जल्दी जाग जाते हैं, तो इन बातों पर ध्यान देना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

  • नींद के पैटर्न को समझें: अपनी नींद के पैटर्न को ट्रैक करने के लिए किसी जर्नल या ऐप का इस्तेमाल करें.
  • स्क्रीन से दूरी बनाएं: देर रात तक फोन या टीवी देखने से आपकी बॉडी क्लॉक भ्रमित हो सकती है, इसलिए सोने से पहले स्क्रीन से दूर रहें.
  • कैफीन और अल्कोहल से बचें: सोने से पहले कैफीन और अल्कोहल का सेवन न करें, क्योंकि ये आपकी REM नींद में बाधा डालते हैं.
  • स्ट्रेस को कम करें: सिर्फ रात में ही नहीं, बल्कि पूरे दिन तनाव को कम करने की कोशिश करें. इसके लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज़, टहलने या जॉगिंग का सहारा लें.
  • अपने शेड्यूल को बदलें: कोशिश करें कि आपका सोने-जागने का शेड्यूल आपकी क्रोनोटाइप के हिसाब से हो. छोटे-छोटे बदलाव भी आपकी नींद की क्वॉलिटी को सुधार सकते हैं.

अंत में, अगर आप लगातार सुबह 3 से 5 बजे के बीच जागते हैं, तो यह आपकी लाइफस्टाइल, स्ट्रेस के स्तर और डेली रूटीन के बारे में एक जरूरी संकेत हो सकता है. इन संकेतों को समझकर आप बेहतर और गहरी नींद पा सकते हैं.

ये भी पढ़ें: 10 दिनों तक रोज पिएं अजवाइन का पानी, पेट साफ रहेगा और चर्बी भी पिघल जाएगी

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

चुपचाप शिकार बना लेता है ब्लड क्लॉट, ये 7 लक्षण इग्नोर नहीं किए तो बच जाएगी जान

चुपचाप शिकार बना लेता है ब्लड क्लॉट, ये 7 लक्षण इग्नोर नहीं किए तो बच जाएगी जान


रक्त के थक्के या बल्ड क्लॉट्स हमेशा साफ-साफ दिखाई नहीं देते कई बार वे शरीर में धीरे-धीरे बनते रहते हैं और जब तक कोई बड़ी समस्या न हो जाए, तब तक उनका पता नहीं चलता. कुछ लक्षण जैसे पैरों में सूजन या सीने में दर्द तो जाने-पहचाने हैं, लेकिन कुछ ऐसे लक्षण भी हैं जिन पर हम अक्सर ध्यान नहीं देते. इन लक्षणों को हम थकान या मांसपेशियों में ऐंठन जैसी सामान्य समस्या मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन इन लक्षणों को जल्दी पहचानना बहुत जरूरी है. आइए जानते हैं ब्लड क्लॉट के बारे में….

ब्लड क्लॉट क्या है और क्यों होता है?

ब्लड क्लॉट या रक्त का थक्का खून की एक ऐसी गांठ होती है, जो तरल खून को जेल जैसी अवस्था में बदल देती है. चोट लगने पर यह बहुत जरूरी होता है, क्योंकि यह खून को बहने से रोकता है. लेकिन अगर यह थक्का शरीर की नसों के अंदर बन जाए, तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है. सामान्य स्थिति में हमारा खून पूरे शरीर में तरल रूप में बहता है. जब हमें कोई चोट लगती है या कट जाता है, तो हमारा शरीर ब्लड क्लॉट बनाता है, ताकि खून का बहना बंद हो जाए. जब यही थक्का शरीर की नसों के अंदर बनने लगता है, तो यह खून के प्रवाह को रोक सकता है, जिसे थ्रोम्बोसिस भी कहते हैं. इस तरह के थक्के हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं. 

ये 7 लक्षण हो सकते हैं रक्त के थक्के का संकेत

  • अचानक या बिना किसी कारण के खांसी: अगर आपको अचानक सूखी खांसी होने लगे तो यह फेफड़ों में रक्त के थक्के या पल्मोनरी एम्बोलिज्म का संकेत हो सकता है. यह खांसी अक्सर सिरप या दवा से ठीक नहीं होती. कुछ मामलों में, खांसी के साथ खून के छोटे-छोटे निशान भी आ सकते हैं.
  • एक पैर या हाथ का ठंडा होना: अगर आपके किसी अंग में खून का थक्का बन गया है, तो उस जगह पर खून का प्रवाह कम हो सकता है। ऐसे में एक हाथ या पैर दूसरे हाथ या पैर की तुलना में ज्यादा ठंडा महसूस हो सकता है. इसके साथ हल्की झुनझुनी या सुन्नता भी हो सकती है.
  • एक आंख में अचानक धुंधलापन: अगर आंख को खून पहुंचाने वाली धमनियों में थक्का जम जाए, तो एक आंख में अचानक से धुंधलापन या दिखाई देना बंद हो सकता है. यह सिर्फ़ कुछ मिनटों के लिए भी हो सकता है, लेकिन यह एक छोटे स्ट्रोक का संकेत हो सकता है.
  • सांस लेते समय तेज दर्द या कंधे में तकलीफ: फेफड़ों में रक्त का थक्का होने पर गहरी सांस लेते समय एक तेज दर्द हो सकता है. यह दर्द कभी-कभी कंधे या पीठ के ऊपरी हिस्से तक फैल सकता है, जिससे लोग इसे मांसपेशियों का दर्द समझ लेते हैं.
  • एक पैर पर लाल, खुजली वाली त्वचा, बिना दाने के: किसी गहरी नस में खून का थक्का जमने पर उसके ऊपर की त्वचा में सूजन, लालिमा, खुजली और गर्माहट महसूस हो सकती है, जबकि कोई दाना या रैश दिखाई नहीं देता. यह लक्षण अक्सर सिर्फ एक पैर में होता है.
  • अचानक जबड़े में दर्द या दबाव: कुछ मामलों में दिल से जुड़ी समस्याओं का संकेत जबड़े में दर्द या दबाव के रूप में हो सकता है. सीने में दर्द एक आम लक्षण है, लेकिन खासकर महिलाओं में इसके संकेत बहुत ही हल्के हो सकते हैं, जैसे जबड़े या गर्दन में जकड़न.
  • घुटने के पीछे या कमर में सूजन: रक्त के थक्के घुटने के पीछे या पेल्विक क्षेत्र में भी छिपे हो सकते हैं. अगर इन जगहों पर, खासकर एक तरफ सूजन दिखाई दे और इसके साथ हल्का दर्द भी हो, तो यह डीप वेन थ्रोम्बोसिस का एक संकेत हो सकता है.

ये भी पढ़ें: 10 दिनों तक रोज पिएं अजवाइन का पानी, पेट साफ रहेगा और चर्बी भी पिघल जाएगी

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

पैरों में नजर आएं ये 8 लक्षण तो बिल्कुल भी न करें देर, तुरंत भागें डॉक्टर के पास

पैरों में नजर आएं ये 8 लक्षण तो बिल्कुल भी न करें देर, तुरंत भागें डॉक्टर के पास


पैर हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग हैं और ये सच में हमारी सेहत का हाल भी बताते हैं. पैरों में दिखने वाले कुछ लक्षण किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकते हैं. अगर आपको अपने पैरों में कुछ भी असामान्य लगे, तो उसे नजरअंदाज न करें. समय पर इन लक्षणों को पहचानकर आप बड़ी बीमारियों से बच सकते हैं. कानपुर के मशहूर ऑर्थोपीडिक सर्जन डॉ. एके मिश्रा कहते हैं कि आपके पैरों में कुछ खास लक्षण दिखें तो उन्हें नजरअंदाज न करें. ये किसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं, जिनके लिए तुरंत डॉक्टर को सलाह लेना जरूरी है.

पैरों और टखनों में सूजन

पैरों और टखनों में सूजन, जिसे अक्सर फ्लूइड रिटेंशन कहा जाता है, कई स्वास्थ्य समस्याओं का एक लक्षण हो सकता है, जिसमें दिल, किडनी या लिवर से जुड़ी बीमारियां शामिल हैं.  यह प्रोटीन या विटामिन बी12 और फोलेट  की कमी से भी हो सकता है. सूजन को कम करने के लिए अपने पैरों को कुछ देर तक ऊपर उठाकर रखें.खाने में नमक की मात्रा कम करने से भी फ्लूइड रिटेंशन में मदद मिलती है.
 
पैरों या टखनों में दर्द

पैरों या टखनों में दर्द किसी चोट, गठिया या नर्व से जुड़ी प्रॉब्लम की वजह से हो सकता है. अगर चलने पर दर्द बढ़े और आराम करने पर कम हो, तो यह स्ट्रेस फ्रैक्चर या ऑस्टियोपोरोसिस का लक्षण हो सकता है. मैग्नीशियम की कमी से मांसपेशियों में ऐंठन और जोड़ों में तकलीफ हो सकती है. नसों से जुड़ी समस्याएं या टखने तक सही मात्रा में रक्त न पहुंचने के कारण भी दर्द हो सकता है.

सुन्नपन या झुनझुनी

पैरों का सुन्न होना या झुनझुनी महसूस होना नर्व डैमेज का संकेत है, जिसे पेरीफेरल न्यूरोपैथी भी कहते हैं. यह डायबिटीज, शराब के ज्यादा सेवन या कीमोथेरेपी की वजह से भी हो सकता है. डायबिटीज के मरीजों में यह समस्या काफी आम है, क्योंकि हाई ब्लड शुगर नसों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसे अलावा, शरीर में विटामिन बी-12 और विटामिन-ई जैसे जरूरी विटामिन्स की कमी से भी नसों की सेहत खराब होती है, जिससे यह समस्या हो सकती है. 

पैरों में ऐंठन या लेग क्रैम्प्स

बार-बार पैरों में ऐंठन होना डिहाइड्रेशन या मैग्नीशियम जैसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स और मिनरल्स की कमी का संकेत हो सकता है. ये मिनरल्स मांसपेशियों के सही कामकाज और नर्व्स ट्रंसमिशन के लिए बहुत जरूरी हैं. अगर आपको अक्सर ऐंठन होती है, तो आप खूब पानी पिएं, न्यूट्रिएंट्स और मिनल्स से भरपूर डाइट लें और सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग और पैरों की मालिश करें.

एड़ी का दर्द

एड़ी का दर्द या प्लांटर फेशिआइटिस एक आम समस्या है. यह कई कारणों से हो सकता है, लेकिन अगर आपको लगातार दर्द हो रहा है, तो इसके पीछे कुछ गंभीर कारण भी हो सकते हैं. विटामिन डी की कमी, गलत जूते पहनना, ज्यादा वजन, अत्यधिक फिजिकल एक्टिविटीज ऐसे कई कारण हैं, जिनसे एड़ी का दर्द हो सकती है.

ठंडे पैर या कोल्ड फीट

पैरों का अक्सर ठंडा रहना एक आम समस्या है, लेकिन यह किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत भी हो सकती है.  खराब ब्लड सर्कुलेशन, पोषक तत्वों की कमी, थायरॉयड की समस्या, खराब लाइफस्टाइल जैसे कारणों से हाथ-पैर ठंडे रहते हैं. इससे बचाव के लिए अपने खाने में आयरन और थायरॉयड-सपोर्टिंग फूड्स शामिल करें. अपने पैरों को गर्म रखने के लिए इंसुलेटेड जूते या मोजे पहनें.

एड़ियों की फटी त्वचा

एड़ियों या हील में दरारें सिर्फ ड्राई स्किन के कारण ही नहीं होतीं, बल्कि विटामिन ए, जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी भी इसका कारण हो सकती है. डायबिटीज और एक्जिमा भी इसे बढ़ा सकते हैं. नंगे पैर चलना, गलत जूते पहनना और खुरदुरे साबुन का इस्तेमाल करना भी इस समस्या को बढ़ा सकता है. इससे बचने के लिए अपनी एड़ियों को नियमित रूप से मॉइस्चराइज रखें और अपने पैरों की सुरक्षा के लिए सही और आरामदायक जूते पहनें.

स्पाइडर वेन्स

स्पाइडर वेन्स एक आम समस्या है, जो नसों में रक्त जमा होने के कारण होती है. इसमें नसें मकड़ी के जाले जैसी दिखने लगती हैं. नसों में मौजूद वाल्व कमज़ोर होने पर खून सही से ऊपर की तरफ नहीं जा पाता और जमा हो जाता है, जिससे स्पाइडर वेन्स बन जाती हैं. इसके लिए पवि विटामिन सी और बायोफ्लेवोनॉइड्स की कमी से भी यह समस्या हो सकती है.

ये भी पढ़ें: 10 दिनों तक रोज पिएं अजवाइन का पानी, पेट साफ रहेगा और चर्बी भी पिघल जाएगी

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बार-बार हो रहे हैं मुंह में छाले, कहीं आपको इस विटामिन की कमी तो नहीं? 

बार-बार हो रहे हैं मुंह में छाले, कहीं आपको इस विटामिन की कमी तो नहीं? 


मुंह में छाले होना एक आम समस्या है. लेकिन अगर बार-बार यह हो रहा है या लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है तो इसे नजर अंदाज करना आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. छोटी सी दिखने वाली है तकलीफ कई बार किसी गंभीर कमी का संकेत होती है खासकर जरूरी विटामिन की.  डॉक्टर के अनुसार बार-बार होने वाले छाले सिर्फ मौसम में बदलाव या मसालेदार खाने का असर नहीं है बल्कि आपके शरीर में विटामिन की कमी का नतीजा भी हो सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताएंगे कि मुंह में होने वाले बार-बार छोले आपको किस विटामिन की कमी की वजह से हो रहे हैं. 

विटामिन बी12 की कमी सबसे आम कारण

विटामिन बी12 शरीर में रेड ब्लड सेल्स बनाने और नर्वस सिस्टम को सही तरीके से चलाने में अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी से एनीमिया, थकान, चक्कर आना और मुंह में छाले जैसी समस्याएं हो सकती है. लंबे समय तक इसकी कमी रहने पर नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकता है. बी12 की पूर्ति के लिए मीट, मछली चिकन और डेयरी उत्पाद बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं . शाकाहारी लोग दूध, दही, पनीर दाले, सोया और हरी सब्जी  भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. 

विटामिन बी2 राइबोफ्लोविन

राइबोफ्लोविन की कमी से स्किन पर रैश, बाल झड़ना, गले में खराश और मुंह में छाले जैसी समस्या हो सकती है. इसे दूर करने के लिए दूध, हरी सब्जियां और दाले खानी चाहिए. 

विटामिन बी9 फोलेट

डीएनए बनाने और सेल रिपेयर में फोलेट की अहम भूमिका होती है. इसकी कमी से शरीर में नई कोशिकाएं बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. जिससे छाले बनने लगते हैं. हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और साबुत अनाज फोलेट के अच्छे स्रोत माने जाते हैं.

विटामिन बी3 नायसिन

नायसिन की कमी से पेलाग्रा नाम की बीमारी हो सकती है. जिसमें दस्त, स्किन संबंधी समस्याएं, दिमागी कमजोरी और मुंह में छाले शामिल है. मांस, मछली, मेवे और अनाज नायसिन की कमी पूरा करने में मदद करते हैं. 

विटामिन सी की कमी

विटामिन सी की कमी से स्कर्वी रोग हो सकता है. जिससे मसूड़े से खून आना ढीले मसूड़े और मुंह में घाव शामिल है. संतरा, नींबू, अमरुद, किवी, स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च इसके बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं. 

बचाव और इलाज

  • मुंह के छालों से बचाव के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है जिसमें सभी जरूरी विटामिन शामिल हो. 
  • इसके अलावा बार-बार छाले होने पर आपको डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. 
  • नमक वाले पानी से गरारे, मसालेदार और खट्टे खाने से परहेज करना चाहिए और ओवर द काउंटर जेल का इस्तेमाल मुंह के छालों से राहत दे सकता है. 

इसे लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि बार-बार होने वाले छाले आपके शरीर का संकेत है कि पोषण पर ध्यान देने का समय आ गया है. सही समय पर विटामिन की कमी पूरी करके इस परेशानी से बचा जा सकता है.

ये भी पढ़ें- शरीर के इस हिस्से में दर्द हाई यूरिक एसिड की ओर करता है इशारा, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बैठे-बैठे बढ़ जाती है दिल की धड़कन? हो सकती है यह गंभीर बीमारी

बैठे-बैठे बढ़ जाती है दिल की धड़कन? हो सकती है यह गंभीर बीमारी


आज की बिजी और स्ट्रेस भरी लाइफ में सेहत को लेकर छोटी-छोटी बातें भी बड़ी परेशानी का संकेत हो सकती हैं. अक्सर हम यह मान लेते हैं कि सिर्फ दौड़ने, तेज चलना या सीढ़ियां चढ़ने पर ही दिल की धड़कन तेज होती है जो कि एक नेचुरल प्रोसेस है. लेकिन अगर आप बिना किसी फिजिकल एक्टिविटी के, आराम से बैठे हुए भी बार-बार दिल की धड़कन बढ़ने जैसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति शरीर में चल रही किसी अंदरूनी गड़बड़ी या मेंटल हेल्थ का संकेत हो सकती है. बैठे-बैठे अचानक दिल की धड़कन तेज होना कई बार फिजिकल और मेंटल हेल्थ से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं की ओर इशारा करता है. कभी-कभी इसे हम नजरअंदाज कर देते हैं और सोचते हैं कि शायद स्ट्रेस या थकावट की वजह से ऐसा हुआ होगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि बैठे-बैठे दिल की धड़कन बढ़ना कौन सी गंभीर बीमारी हो सकती है. 

बैठे-बैठे दिल की धड़कन बढ़ना कौन सी गंभीर बीमारी?

बैठे-बैठे दिल की धड़कन बढ़ रही है या बिना किसी खास वजह के सीने में बेचैनी, सांस फूलना या कमजोरी जैसे लक्षण भी नजर आ रहे हैं, तो यह सिर्फ थकान या स्ट्रेस नहीं बल्कि एक गंभीर दिल की बीमारी एरिथमिया का संकेत हो सकता है. एरिथमिया एक मेडिकल स्थिति है जिसमें दिल की धड़कन असामान्य हो जाती है यानी दिल कभी बहुत तेज, कभी बहुत धीमी, या अनियमित तरीके से धड़कता है. यह समस्या दिल के पावर सिस्टम में गड़बड़ी के कारण होती है, जिससे हार्ट सही तरीके से पंप नहीं कर पाता है.

किन कारणों से हो सकती है बैठे-बैठे दिल की धड़कन तेज?

1. ज्यादा तनाव या एंग्जायटी – मेंटल स्ट्रेस, चिंता या पैनिक अटैक हार्ट स्पीड को असर कर सकते हैं.

2. कैफीन, शराब या धूम्रपान का ज्यादा सेवन – चाय-कॉफी, शराब या सिगरेट से हार्ट रेट असामान्य रूप से बढ़ सकता है.

3. कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स – कुछ दवाएं भी दिल की गति पर असर डालती हैं.

4. दिल की मांसपेशियों में गड़बड़ी या हार्ट डिजीज – दिल की पहले से मौजूद कोई बीमारी भी एरिथमिया का कारण हो  सकती है.

5. डिहाइड्रेशन – अगर शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो खून का बहाव कम हो जाता है. ऐसे में दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धड़कन तेज हो सकती है.

6. इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस – शरीर में पोटैशियम, मैग्नीशियम और सोडियम जैसे मिनरल्स का सही बैलेंस जरूरी होता है. इनकी कमी से दिल की स्पीड बिगड़ सकती है और बैठने पर भी धड़कन तेज हो सकती है.

7. हाइपरथायरायडिज्म – जब थायराइड ग्रंथि ज्यादा हार्मोन बनाती है, तो मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है. इससे आराम के समय भी दिल तेजी से धड़कने लगता है.

8. लो ब्लड शुगर – जब शरीर में शुगर का लेवल बहुत कम हो जाता है, तो घबराहट, कमजोरी, पसीना आना और दिल की धड़कन तेज हो सकती है. यह स्थिति अक्सर डायबिटीज के मरीजों में देखी जाती है.

9. दिल की बीमारियां – हाई ब्लड प्रेशर या कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसे हार्ट संबंधी बीमारियों में बैठे-बैठे भी हार्ट रेट बढ़ सकता है. ऐसे मरीजों को यह संकेत नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

यह भी पढ़ें: पेट के बल सोने से हो सकती हैं ये 6 परेशानियां, आज से छोड़ दें ये खराब आदत

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

10 दिनों तक रोज पिएं अजवाइन का पानी, पेट साफ रहेगा और चर्बी भी पिघल जाएगी

10 दिनों तक रोज पिएं अजवाइन का पानी, पेट साफ रहेगा और चर्बी भी पिघल जाएगी


Celery Water for Belly Fat: पेट की चर्बी कम करने के लिए लोग महंगे डाइट प्लान और सप्लीमेंट्स पर पैसा खर्च करने लगते हैं, लेकिन असर कम ही दिखता है. आयुर्वेद में एक ऐसा घरेलू उपाय है जो न केवल पाचन को दुरुस्त करता है, बल्कि चर्बी को भी तेजी से कम करने में मदद करता है, अजवाइन का पानी. इस पर डॉ. बिमल छाजेड़ का कहना है कि, अगर आप 10 दिनों तक रोज सुबह खाली पेट अजवाइन का पानी पिएं तो इसका असर आपको खुद महसूस होगा. 

अजवाइन के पानी के चमत्कारी फायदे

अजवाइन में थाइमॉल नामक तत्व पाया जाता है, जो पाचन एंजाइम को सक्रिय करता है और पेट साफ रखने में मदद करता है। इसे रोजाना पीने से कब्ज, गैस और अपच की समस्या खत्म होती है. साथ ही, यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे शरीर में फैट बर्निंग की प्रक्रिया तेज होती है. 

ये भी पढ़े- आपको भी बार-बार आती है हिचकी, जानें कब हो जाती है यह खतरनाक?

वजन घटाने में कैसे मदद करता है अजवाइन का पानी

अजवाइन का पानी शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को पिघलाने में सहायक होता है. यह शरीर में वॉटर रिटेंशन को भी कम करता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है. अगर इसे 10 दिनों तक नियमित रूप से पिया जाए तो पेट की चर्बी visibly कम होने लगती है. 

पेट की सफाई और डिटॉक्स का असर

अजवाइन का पानी आपके पेट को अंदर से साफ करता है. यह एक प्राकृतिक डिटॉक्स ड्रिंक की तरह काम करता है और लीवर के कार्य को बेहतर बनाता है. जब पाचन तंत्र सही तरह से काम करता है, तो शरीर में पोषण का अवशोषण बेहतर तरीके से होता है और पेट फूलने की समस्या भी दूर हो जाती है. 

  • अजवाइन का पानी बनाने का सही तरीका
  • रात को 1 गिलास पानी में 1 चम्मच अजवाइन भिगो दें
  • सुबह इसे हल्का गुनगुना करके खाली पेट पिएं
  • स्वाद के लिए इसमें थोड़ा शहद मिला सकते हैं

अजवाइन का पानी एक सस्ता, आसान और असरदार घरेलू उपाय है जो आपके पाचन को सुधारता है और फैट लॉस में मदद करता है. अगर आप 10 दिनों तक इसे खाली पेट पीने का चैलेंज अपनाते हैं, तो न केवल आपका पेट हल्का महसूस होगा, बल्कि बढ़ी हुई चर्बी भी कम होने लगेगी. 

इसे भी पढ़ें- सिर्फ कैंसर ही नहीं सिगरेट पीने से हो सकती है रीढ़ की हड्डी से जुड़ी ये बीमारी, चौंका देगी रिसर्च

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp