रोहिणी आचार्य ने पिता लालू यादव को दी थी एक किडनी, इससे कितनी बढ़ जाती है उम्र?

रोहिणी आचार्य ने पिता लालू यादव को दी थी एक किडनी, इससे कितनी बढ़ जाती है उम्र?



Kidney Transplant Health: बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद की बेटी रोहणी आचार्य इस समय सुर्खियों में हैं. बिहार विधानसभा में आरजेडी की करारी हार के बाद परिवार के बीच अनबन देखने को मिली थी. उन्होंने परिवार से नाता तोड़ने के साथ-साथ राजनीति छोड़ने का एलान किया है. लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने 2022 में अपने पिता की जान बचाने के लिए अपनी एक किडनी डोनेट की थी. चलिए आपको बताते हैं कि एक किडनी डोनेट करने से कितनी उम्र बढ़ जाती है. 

कितनी बढ़ जाती है उम्र?

किडनी ट्रांसप्लांट करवाने वालों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि ऑपरेशन के बाद कोई व्यक्ति कितने साल तक जी सकता है. इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं होता, क्योंकि यह कई बातों पर निर्भर करता है किडनी कितनी अच्छी तरह मैच हुई, मरीज की पुरानी बीमारियां क्या हैं और शरीर नई किडनी को कैसे स्वीकार करता है.

praram9 हॉस्पिटल के अनुसार, अगर किडनी किसी नजदीकी रिश्तेदार से मिलती है और टिश्यू मैच अच्छा होता है, तो उसके लंबे समय तक ठीक चलते रहने की संभावना कहीं ज्यादा होती है. ऐसे मामलों में मरीज की उम्र बढ़ने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद भी अधिक रहती है. वहीं, यदि किडनी किसी गैर-रिश्तेदार या मरे हुए दाता से मिलती है, तो सफलता दर थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन फिर भी परिणाम काफी अच्छे ही माने जाते हैं.

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद बढ़ी जिंदगी

थाई ट्रांसप्लांटेशन सोसाइटी के 2017 के आंकड़े बताते हैं कि किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले 78.2 प्रतिशत मरीज कम से कम 10 साल तक जीवित रहे. यानी हर 100 लोगों में से 78 मरीजों ने ट्रांसप्लांट के बाद एक दशक से ज्यादा का जीवन जिया. यह किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता को स्पष्ट दिखाता है. हालांकि, लंबी उम्र सिर्फ ऑपरेशन पर नहीं टिकी होती. ट्रांसप्लांट के बाद मरीज कितनी ईमानदारी से दवाइयां लेता है, अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखता है और डॉक्टर की सलाह का पालन करता है लंबे समय की सफलता काफी हद तक इसी पर निर्भर करती है.

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद खुद का ख्याल कैसे रखें? 

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इसी पर निर्भर करता है कि मरीज कितनी जल्दी अपनी सामान्य जिंदगी में लौट पाएगा और नई किडनी कितने समय तक अच्छी तरह काम करेगी. कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें रोजमर्रा की आदत बनाना बहुत जरूरी होता है.

दवाइयों का सही इस्तेमाल

ट्रांसप्लांट के बाद शरीर नई किडनी को अस्वीकार न करे, इसके लिए इम्यूनोसप्रेसेंट दवाइयां लेनी पड़ती हैं. ये दवाएं शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को थोड़ा कमजोर कर देती हैं, इस वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए बीमार लोगों के संपर्क से बचना, भीड़भाड़ से दूरी रखना और दवाइयां समय पर लेना बेहद जरूरी है.

नियमित जांच और डॉक्टर की फॉलो-अप

डॉक्टर द्वारा तय की गई हर अपॉइंटमेंट पर जाना अनिवार्य है. अगर तेज बुखार, सर्दी-जुकाम जैसा महसूस होना, पेशाब में बदलाव, टांकों वाली जगह पर दर्द या सूजन, घाव से पस जैसा रिसाव, सांस लेने में तकलीफ, दस्त, या नई किडनी के आसपास किसी तरह की अजीब दर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए. इस तरह के लक्षण शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं.

इसे भी पढ़ें: Smriti Mandhana Father: किस बीमारी से जूझ रहे हैं स्मृति मंधाना के पिता, जिसकी वजह से तक गई पलाश मुच्छाल संग उनकी शादी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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दुनिया के इस हिस्से में हर तीन में से एक शख्स को टीबी, डरा देगी WHO की यह रिपोर्ट

दुनिया के इस हिस्से में हर तीन में से एक शख्स को टीबी, डरा देगी WHO की यह रिपोर्ट



TB Disease Treatment: दुनिया में हर साल सामने आने वाले नए टीबी मरीजों में से एक-तिहाई से ज्यादा सिर्फ दक्षिण-पूर्व एशिया में मिलते हैं. यह हिस्सा आबादी के लिहाज से दुनिया का सिर्फ चौथा हिस्सा है, लेकिन टीबी का बोझ यहां अनुपात से कहीं अधिक है. मंगलवार 18 नवंबर को जारी की गई अपनी ताजा रिपोर्ट में WHO ने इस स्थिति पर चिंता जताई और देशों से बीमारी को खत्म करने की दिशा में तेज कार्रवाई की अपील की.

WHO के ग्लोबल ट्यूबरकुलोसिस रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, साल 2024 में करीब 10.7 मिलियन लोग टीबी से इंफेक्टेड हुए और 12.3 लाख लोगों की मौत हुई. इनमें सबसे अधिक केस भारत के हैं लगभग 2.71 मिलियन. इसके बाद बांग्लादेश (3.84 लाख), म्यामांर (2.63 लाख), थाईलैंड (1.04 लाख) और नेपाल (67 हजार) का नंबर आता है.

WHO का क्या है कहना?

WHO साउथ-ईस्ट एशिया की ऑफिसर-इन-चार्ज डॉ. कैथरीना बोह्मे ने कहा कि टीबी अब भी इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुरक्षा और विकास के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है और सबसे ज्यादा असर गरीब आबादी झेल रही है. उनके मुताबिक बीमारी की रोकथाम, शुरुआती पहचान, तेज इलाज और मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचा ही सबसे असरदार उपाय हैं. लेकिन इन कदमों को बड़े पैमाने पर और तेज़ी से लागू करने की जरूरत है. रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में क्षेत्रीय तस्वीर काफी असमान रही. म्यामांर और तिमोर-लेस्ते में टीबी की दर अब भी बहुत ज्यादा है. हर एक लाख की आबादी पर 480 से 500 मामले. जबकि बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और थाईलैंड में यह दर 146 से 269 के बीच रही. श्रीलंका और मालदीव अभी भी कम-इंसीडेंस वाले देश माने जाते हैं.

दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे बड़ी चुनौती

दक्षिण-पूर्व एशिया में एक और बड़ी चिंता ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी है. 2024 में यहां ऐसे 1.5 लाख नए मामले अनुमानित हैं. हालांकि 2015 के बाद से क्षेत्र ने टीबी संक्रमण दर में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है, जो वैश्विक औसत 12 प्रतिशत से बेहतर है. लेकिन मौतों में कमी की रफ्तार अभी भी धीमी है. क्षेत्र की टीबी इन्सीडेंस रेट 201 प्रति लाख है, जो वैश्विक औसत 131 से कहीं ऊपर है. कुछ देशों ने बेहतरीन प्रगति भी दिखाई है. बांग्लादेश, भारत और थाईलैंड ने अनुमानित केसों की तुलना में अधिक मरीजों की पहचान की है, जिससे डिटेक्शन गैप कम हुआ है. टीबी से होने वाली मौतों में भी 2015 के मुकाबले कमी देखी गई है. खासकर कोविड के बाद जब टीबी सेवाएं दोबारा पटरी पर आईं. इलाज कवरेज 85 प्रतिशत पार कर चुका है और सफलता दर दुनिया में सबसे बेहतर मानी जा रही है. एचआईवी मरीजों और घर के संपर्कों के लिए प्रिवेंटिव थेरेपी भी तेजी से बढ़ी है.

इसे भी पढ़ें- Vitamin D Heart Health: सेकेंड हार्ट अटैक से कैसे बचा सकता है यह विटामिन? आज ही जानें मौत से बचने का तरीका

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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किस बीमारी से जूझ रहे हैं स्मृति मंधाना के पिता, जिसकी वजह से तक गई पलाश मुच्छाल संग उनकी शादी?

किस बीमारी से जूझ रहे हैं स्मृति मंधाना के पिता, जिसकी वजह से तक गई पलाश मुच्छाल संग उनकी शादी?



Smriti Mandhana Father Health: भारतीय क्रिकेटर स्मृति मंधाना और म्यूजिक कंपोजर पलाश मुच्छल की शादी में सोमवार को तय थी. हालांकि, परिवार में आई इमरजेंसी स्थिति के चलते आज होने वाला विवाह समारोह टाल दिया गया. तैयारियां जोरों पर थीं, तभी स्मृति मंधाना के पिता श्रीनिवास मंधाना को हार्ट अटैक आया, जिसकी पुष्टि उनकी बिजनेस मैनेजर तुहिन मिश्रा ने की.

जानकारी के मुताबिक, श्रीनिवास मंधाना को तुरंत सांगली के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. 

फिलहाल राहत की बात यह है कि उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन अभी भी उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. शादी प्रबंधन टीम ने मीडिया को आधिकारिक रूप से सूचित कर दिया है कि आज का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है. समारोह दोबारा कब आयोजित होगा, इस पर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है. चलिए आपको बताते हैं कि मंधाना के पिता किस बीमारी से पीड़ित हैं. 

किस बीमारी से पीड़ित हैं मंधाना के पिता? 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्मृति मंधाना के पिता श्रीनिवास मंधाना अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद बेचैनी महसूस करने लगे. शुरुआत में लोगों ने सोचा कि शायद शादी की भागदौड़ का तनाव होगा, लेकिन कुछ ही मिनटों में उनकी स्थिति गंभीर हो गई. पता चला कि उन्हें हार्ट अटैक आया है. शादी का माहौल पूरी तरह बदल गया. परिवार वाले तुरंत उनकी मदद के लिए पहुंचे. एंबुलेंस बुलाकर उन्हें सांगली के एक निजी अस्पताल ले जाया गया.

डॉक्टरों ने बताया कि अभी हालत स्थिर है, लेकिन लगातार निगरानी जरूरी है. स्मृति और परिवार के बाकी सदस्य भी तुरंत अस्पताल पहुंच गए.

ऐसे माहौल में अचानक क्यों आते हैं हार्ट अटैक?

यह पहला मामला नहीं है कि शादी के दौरान किसी को हार्ट अटैक आया है. देश में पहले भी ऐसे कई मामले आ चुके हैं, जहां शादी के दौरान दूल्हे को, डांस करने वाले लोगों को अचानक हार्ट अटैक आया. इनमें से कई केस ऐसे आए हैं, जिसमें व्यक्ति की मौत हो गई. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसे मौकों पर हार्ट अटैक क्यों आते हैं.

American Heart Association (AHA) के अनुसार, ऐसे समय शरीर में एड्रेनालिन तेजी से बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन अचानक ऊपर जाती है और पहले से मौजूद ब्लॉकेज टूटकर हार्ट अटैक ट्रिगर कर सकता है. इसके अलावा हार्ट अटैक अक्सर उस समय होता है जब आर्टरी में जमा प्लाक अचानक फटता है. यह फटना कई बार तनाव, थकान, तेज भावनाओं या शारीरिक दबाव की वजह से होता है न कि सिर्फ बीमारी के धीरे-धीरे बढ़ने से.

इसे भी पढ़ें- Vitamin D Heart Health: सेकेंड हार्ट अटैक से कैसे बचा सकता है यह विटामिन? आज ही जानें मौत से बचने का तरीका

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सर्दियों में ये 6 काम किए तो किडनी में नहीं बनेगा स्टोन, डॉक्टर भी देते हैं सलाह

सर्दियों में ये 6 काम किए तो किडनी में नहीं बनेगा स्टोन, डॉक्टर भी देते हैं सलाह


एक्सपर्ट बताते हैं कि ठंड लगने पर प्यास कम महसूस होती है, जबकि शरीर में पानी की कमी बनी रहती है. पसीना कम आता है, हवा शुष्क होती है और धीरे-धीरे पानी की कमी पेशाब को गाढ़ा कर देती है. यही स्थिति पथरी बनने का सबसे बड़ा कारण है. डॉक्टरों का कहना है कि कैल्शियम, ऑक्जेलेट और यूरिक एसिड जैसे तत्व जब ज्यादा जमा होते हैं, तो पथरी का निर्माण तेज हो जाता है.

मुंबई के एक यूरिनरोग एक्सपर्ट डॉ. भाविन पटेल ने TOI से बताया कि सर्दी में लोग अनजाने में कम पानी पीते हैं और यही स्थिति किडनी स्टोन की घटनाओं को बढ़ाती है. उन्होंने बताया कि ज्यादा नमक, रेड मीट, प्रोसेस्ड खाना और तली हुई चीजें भी पथरी बनने का खतरा बढ़ाती हैं. जिन लोगों को पहले पथरी रह चुकी है, मोटापा है, डायबिटीज है या यूरिक एसिड बढ़ा रहता है, उनमें सर्दियों में खतरा और बढ़ जाता है.

मुंबई के एक यूरिनरोग एक्सपर्ट डॉ. भाविन पटेल ने TOI से बताया कि सर्दी में लोग अनजाने में कम पानी पीते हैं और यही स्थिति किडनी स्टोन की घटनाओं को बढ़ाती है. उन्होंने बताया कि ज्यादा नमक, रेड मीट, प्रोसेस्ड खाना और तली हुई चीजें भी पथरी बनने का खतरा बढ़ाती हैं. जिन लोगों को पहले पथरी रह चुकी है, मोटापा है, डायबिटीज है या यूरिक एसिड बढ़ा रहता है, उनमें सर्दियों में खतरा और बढ़ जाता है.

साइंटफिक रिसर्च भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि ठंड के मौसम में पथरी के मामले बढ़ जाते हैं. कई स्टडी में पाया गया है कि सर्दियों में लोग कम पानी पीते हैं, जिससे लंबे समय तक हल्की डिहाइड्रेशन बनी रहती है. 2014 के एक स्टडी में यह भी सामने आया कि ठंडे मौसम में पथरी के केस मौसमी पैटर्न में बढ़ते हैं. दूसरी शोधों में पाया गया कि ज्यादा नमक और ज्यादा प्रोटीन वाली डाइट भी पथरी को बढ़ावा देती है, खासकर तब जब पानी कम लिया जा रहा हो.

साइंटफिक रिसर्च भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि ठंड के मौसम में पथरी के मामले बढ़ जाते हैं. कई स्टडी में पाया गया है कि सर्दियों में लोग कम पानी पीते हैं, जिससे लंबे समय तक हल्की डिहाइड्रेशन बनी रहती है. 2014 के एक स्टडी में यह भी सामने आया कि ठंडे मौसम में पथरी के केस मौसमी पैटर्न में बढ़ते हैं. दूसरी शोधों में पाया गया कि ज्यादा नमक और ज्यादा प्रोटीन वाली डाइट भी पथरी को बढ़ावा देती है, खासकर तब जब पानी कम लिया जा रहा हो.

किडनी स्टोन के लक्षण अक्सर अचानक शुरू होते हैं. पीठ, पेट या कमर में तेज चुभन जैसा दर्द, पेशाब करते समय जलन, बदबूदार या गाढ़ा पेशाब, उलटी जैसा महसूस होना या बार-बार पेशाब लगना, ये सभी चेतावनी के संकेत हैं. अगर दर्द के साथ पेशाब में खून दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि पथरी कहीं डक्ट्स  को ब्लॉक भी कर सकती है.

किडनी स्टोन के लक्षण अक्सर अचानक शुरू होते हैं. पीठ, पेट या कमर में तेज चुभन जैसा दर्द, पेशाब करते समय जलन, बदबूदार या गाढ़ा पेशाब, उलटी जैसा महसूस होना या बार-बार पेशाब लगना, ये सभी चेतावनी के संकेत हैं. अगर दर्द के साथ पेशाब में खून दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि पथरी कहीं डक्ट्स को ब्लॉक भी कर सकती है.

छोटी पथरी कई बार पानी ज्यादा पीने से अपने आप निकल सकती है, लेकिन बड़ी पथरी के लिए इलाज जरूरी होता है. डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार शॉक वेव, लेजर या एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से पथरी को तोड़कर निकालते हैं. जितनी जल्दी निदान होता है, उतनी जल्दी आराम मिलता है.

छोटी पथरी कई बार पानी ज्यादा पीने से अपने आप निकल सकती है, लेकिन बड़ी पथरी के लिए इलाज जरूरी होता है. डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार शॉक वेव, लेजर या एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से पथरी को तोड़कर निकालते हैं. जितनी जल्दी निदान होता है, उतनी जल्दी आराम मिलता है.

सर्दियों में पथरी से बचने के लिए डॉक्टर कुछ सरल लेकिन प्रभावी सलाह देते हैं. दिन में 10 से 12 गिलास पानी जरूर पिएं, चाहें प्यास न लगे. नमक कम करें और पैकेट वाली चीज़ें कम खाएं. नींबू, संतरा जैसे खट्टे फलों में मौजूद साइट्रेट पथरी बनने से रोकने में मदद करता है. रोज थोड़ी-बहुत शारीरिक गतिविधि भी किडनी को स्वस्थ रखती है.

सर्दियों में पथरी से बचने के लिए डॉक्टर कुछ सरल लेकिन प्रभावी सलाह देते हैं. दिन में 10 से 12 गिलास पानी जरूर पिएं, चाहें प्यास न लगे. नमक कम करें और पैकेट वाली चीज़ें कम खाएं. नींबू, संतरा जैसे खट्टे फलों में मौजूद साइट्रेट पथरी बनने से रोकने में मदद करता है. रोज थोड़ी-बहुत शारीरिक गतिविधि भी किडनी को स्वस्थ रखती है.

कुल मिलाकर सर्दियों में किडनी स्टोन का खतरा बिना शोर किए बढ़ता है. पानी पीने में लापरवाही, भोजन में नमक की मात्रा ज्यादा होना और ठंड की वजह से शरीर की सक्रियता कम होना पथरी बनने की स्थितियों को बढ़ाते हैं.

कुल मिलाकर सर्दियों में किडनी स्टोन का खतरा बिना शोर किए बढ़ता है. पानी पीने में लापरवाही, भोजन में नमक की मात्रा ज्यादा होना और ठंड की वजह से शरीर की सक्रियता कम होना पथरी बनने की स्थितियों को बढ़ाते हैं.

Published at : 23 Nov 2025 03:32 PM (IST)

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सेकेंड हार्ट अटैक से कैसे बचा सकता है यह विटामिन? आज ही जानें मौत से बचने का तरीका

सेकेंड हार्ट अटैक से कैसे बचा सकता है यह विटामिन? आज ही जानें मौत से बचने का तरीका



Vitamin D for Heart Attack Prevention: हर दिन कुछ न कुछ नए खुलासे होते रहते हैं.  एक नई स्टडी में सामने आया है कि अगर विटामिन D3 का सेवन हर व्यक्ति के ब्लड लेवल के हिसाब से पर्सनलाइज्ड तरीके से किया जाए, तो यह उन लोगों में दूसरे हार्ट अटैक के खतरे को लगभग आधा कर सकता है, जिन्होंने पहले एक बार हार्ट अटैक झेला है. रिसर्च में पाया गया कि जिन मरीजों का विटामिन D लेवल संतुलित रखा गया, उनमें दूसरे हार्ट अटैक का रिस्क कंट्रोल ग्रुप के मुकाबले काफी कम था. अब सवाल उठता है, क्या सच में यह “सनशाइन विटामिन” दिल को बचाने की चाबी हो सकता है?. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं. 

रिसर्च में क्या निकला?

विटामिन D, जिसे आमतौर पर सनशाइन विटामिन कहा जाता है, शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अब्जोर्वेशन के लिए बेहद जरूरी है. यह हड्डियों को मजबूत रखता है, मांसपेशियों के कामकाज को सपोर्ट करता है, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और मूड को भी कंट्रोल करता है. शरीर इस विटामिन का निर्माण तब करता है जब हमारी त्वचा सूरज की रोशनी के संपर्क में आती है. लेकिन अब वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर सिर्फ हड्डियों तक सीमित नहीं, बल्कि दिल की सेहत पर भी गहरा पड़ सकता है. पिछले स्टडी से पता चला था कि जिन लोगों में विटामिन D का स्तर कम होता है, उनमें हार्ट डिजीज का खतरा अधिक रहता है. विटामिन D ब्लड सेल्स की लचक, सूजन और आर्टरीज के कामकाज को प्रभावित करता है, ये सभी कारक हार्ट हेल्थ के लिए बेहद अहम हैं. इसलिए शोधकर्ताओं ने सोचा, अगर ब्लड में विटामिन D का स्तर बढ़ाया जाए, तो क्या इससे दूसरा हार्ट अटैक रोका जा सकता है?

क्या मिला जवाब?

इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए इंटरमाउंटेन हेल्थ के वैज्ञानिकों ने एक नया अध्ययन शुरू किया. इसमें उन मरीजों को शामिल किया गया जिन्होंने हाल ही में हार्ट अटैक झेला था. रिसर्चर्स ने सबसे पहले हर प्रतिभागी के ब्लड में विटामिन D लेवल मापा और फिर डोज को इस तरह एडजस्ट किया कि पूरे अध्ययन के दौरान लेवल “ऑप्टिमल रेंज” में बना रहे. परिणाम चौंकाने वाले थे, जिन लोगों को इस तरह पर्सनलाइज्ड विटामिन D3 सप्लीमेंट दिया गया, उनमें दूसरे हार्ट अटैक का खतरा उन लोगों के मुकाबले लगभग 50 प्रतिशत कम पाया गया जिन्हें यह विशेष देखभाल नहीं दी गई. यह अध्ययन अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन साइंटिफिक सेशन्स 2025 में पेश किया गया है, हालांकि इसे अभी किसी पीयर-रिव्यू जर्नल में प्रकाशित नहीं किया गया है.

विटामिन की कमी

 ट्रायल के तहत जिन मरीजों को शामिल किया गया उनकी औसत उम्र 63 वर्ष थी और लगभग सभी को हाल ही में हार्ट अटैक हुआ था. अध्ययन की शुरुआत में 87 प्रतिशत प्रतिभागियों में विटामिन D की कमी पाई गई. रिसर्चर्स ने लक्ष्य रखा कि हर व्यक्ति का लेवल 40 ng/mL तक पहुंचाया जाए. शुरुआत में औसतन यह लेवल केवल 27 ng/mL था. अधिकांश मरीजों को 5,000 IU D3 की खुराक दी गई, जो सामान्य सिफारिश से कहीं अधिक थी. नतीजों में यह सामने आया कि विटामिन D3 लेने वाले ग्रुप में दोबारा हार्ट अटैक की घटनाएं लगभग आधी रह गईं,  केवल 3.8 प्रतिशत बनाम 7.9 प्रकिशत उन लोगों में जिन्होंने सप्लीमेंट नहीं लिया. हालांकि यह इलाज सभी प्रकार के हार्ट इवेंट्स को कम नहीं कर पाया, लेकिन दूसरे हार्ट अटैक का खतरा घटाना अपने आप में एक अहम खोज मानी जा रही है. हालांकि, अगर आपको विटामिन D की कमी है, तो अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें और सही डोज तय कराएं. लेकिन याद रखें, विटामिन D3 इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि सपोर्ट सिस्टम है, जो आपके दिल को भीतर से मजबूत बना सकता है.

इसे भी पढ़ें: Heart and Brain Connection: हार्ट का आपके ब्रेन से होता है सीधा कनेक्शन, कमजोर हुआ दिल तो होने लगेगी यह दिक्कत

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या नॉर्मल ब्लड प्रेशर से भी डैमेज हो सकता है हार्ट? इस स्टडी में हुआ डराने वाला खुलासा

क्या नॉर्मल ब्लड प्रेशर से भी डैमेज हो सकता है हार्ट? इस स्टडी में हुआ डराने वाला खुलासा



Blood Pressure Effects on Heart: हम अक्सर दिल को एक मजबूत मसल्स की तरह देखते हैं, जो सालों तक लगातार धड़कता रहता है. लेकिन लंदन की यूनिवर्सिटी कॉलेज की एक नई स्टडी ने दिखाया है कि दिल सिर्फ खून पंप करने का काम नहीं करता, यह आपके ब्लड प्रेशर की यादें भी अपने भीतर सहेज कर रखता है. रिसर्च में बताया गया है कि आपके ब्लड प्रेशर का जो पैटर्न बनता है, उसका असर आपके 70 साल के उम्र में दिल की सेहत पर सीधा पड़ता है. यानी अगर आपकी मिडल ऐज में ब्लड प्रेशर थोड़ा भी ऊंचा रहा, तो उसका असर उम्र बढ़ने पर दिल की पावर पर साफ दिखेगा. चलिए आपको बताते हैं कि क्या नॉर्मल ब्लड प्रेशर से भी डैमेज हो सकता है हार्ट?.

क्या निकला रिसर्च में?

यह स्टडी British Heart Foundation (BHF) द्वारा फंड की गई है और Circulation Cardiovascular Imaging जर्नल में प्रकाशित हुई है. इसमें 450 से अधिक ब्रिटिश नागरिकों को कई दशकों तक ट्रैक किया गया. परिणामों ने साफ दिखाया कि जिन लोगों का ब्लड प्रेशर लगातार थोड़ा बढ़ा हुआ रहा, भले ही ‘नॉर्मल’ रेंज में क्यों न हो, उनके दिल तक ब्लड फ्लो 70 की उम्र में 6 से 12 प्रतिशत तक घट गया.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

इस स्टडी के सीनियर रिसर्चर प्रोफेसर निश चतुर्वेदी का कहना है कि “दिल याद रखता है. लंबे समय तक मामूली बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर भी धीरे-धीरे लेकिन गहराई से असर डालता है.” दरअसल, यह रिसर्च परंपरागत सोच को चुनौती देता है. अब तक हम ब्लड प्रेशर को एक सीमा आधारित समस्या मानते थे, यानी 140/90 से ऊपर गया तो खतरा, नीचे रहा तो सुरक्षित. लेकिन इस स्टडी ने दिखाया है कि असली मायने किसी एक बार की रीडिंग में नहीं, बल्कि आपका ब्लड प्रेशर साल दर साल कैसे बदल रहा है, उसमें हैं. इसका मतलब ये है कि आपकी 30 या 40 साल की उम्र में शरीर भले मजबूत दिखे, लेकिन लगातार हल्का बढ़ा हुआ प्रेशर आने वाले दशकों में दिल की आर्टरीज को संकुचित कर सकता है. यही कारण है कि डॉक्टर अब एकल रीडिंग की बजाय ब्लड प्रेशर ट्रेंड्स पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं.

आपकी 30 की उम्र ही 70 की उम्र की कहानी लिखना शुरू कर देती है. इस समय देर रात तक जागना, ज्यादा नमक वाला खाना, कैफीन और स्ट्रेस जैसी आदतें धीरे-धीरे असर दिखाने लगती हैं.  40 की उम्र में काम और जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, स्ट्रेस हार्मोन भी तेज होते हैं. ऐसे में जरूरी है कि हर बार डॉक्टर से सिर्फ़ रिपोर्ट न दिखाएं, बल्कि पिछले कुछ सालों के ब्लड प्रेशर का ट्रेंड भी जानें. डाइट में ताजा फल, सब्जियां, ओट्स, और फाइबर-युक्त भोजन शामिल करें. साथ ही योग या मेडिटेशन को रूटीन बनाएं.

इसे भी पढ़ें-Dharmendra Health: ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में इलाज का कितना खर्चा आता है? एक्टर धर्मेंद्र यहीं हैं एडमिट

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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