बच्चा पैदा करने के लिए कितना होना चाहिए स्पर्म काउंट, इस बारे में क्या कहते हैं डॉक्टर्स?

बच्चा पैदा करने के लिए कितना होना चाहिए स्पर्म काउंट, इस बारे में क्या कहते हैं डॉक्टर्स?


Sperm Count for Pregnancy: माता-पिता बनने का सपना हर कपल के लिए खास होता है, लेकिन कभी-कभी यह सपना पूरा करने में मुश्किलें आती हैं. बहुत से कपल्स महीनों या सालों तक कोशिश करते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलती. इस दौरान पुरुषों की फर्टिलिटी से जुड़ा एक अहम पहलू है स्पर्म काउंट. यह जानना जरूरी है कि, बच्चा पैदा करने के लिए स्पर्म काउंट कितना होना चाहिए और अगर यह कम हो तो क्या किया जा सकता है. 

अक्सर आपने देखा होगा अगर बच्चे नहीं हो रहे होते हैं तो महिलाओं में कमी बता दी जाती है और अगर डॉक्टर के पास जाना हो तो चेकअप भी महिलाओं का ही होता है. क्योंकि कई बार परिवार वाले पुरुषों का टेस्ट नहीं करवाना चाहते, ऐसे में ये जानना जरूरी है कि, बच्चा करने में स्पर्म काउंट बहुत जरूरी चीज है. 

डॉ. सुनील जिंदल के मुताबकि, एक स्वस्थ पुरुष में स्पर्म काउंट कम से कम 15 मिलियन प्रति मिलीलीटर या उससे अधिक होना चाहिए. अगर यह संख्या 15 मिलियन से कम है, तो इसे ‘लो स्पर्म काउंट’ कहा जाता है, जो गर्भधारण में कठिनाई पैदा कर सकता है. 

ये भी पढ़े- कहीं हार्ट फेलियर का कारण तो नहीं बन रही पेन किलर, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

स्पर्म काउंट कम होने के कारण

  • अनहेल्दी लाइफस्टाइल – धूम्रपान, शराब, असंतुलित आहार
  • तनाव और नींद की कमी
  • अत्यधिक गर्मी – लैपटॉप गोद में रखना, टाइट कपड़े पहनना
  • हार्मोनल असंतुलन
  • इंफेक्शन या चोट

स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए टिप्स

  • हेल्दी डाइट लें – हरी सब्जियां, फल, ड्राई फ्रूट्स और प्रोटीन
  • एक्सरसाइज करें – नियमित योग और वॉक
  • तनाव कम करें – मेडिटेशन और रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं
  • बुरी आदतें छोड़ें – स्मोकिंग और शराब से दूरी बनाएं
  • सप्लीमेंट्स – डॉक्टर की सलाह से जिंक, विटामिन C, विटामिन E आदि का सेवन करें

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए

अगर एक साल तक नियमित प्रयास के बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो दोनों पार्टनर्स को फर्टिलिटी टेस्ट कराना चाहिए. पुरुषों को स्पर्म काउंट, स्पर्म की मूवमेंट और क्वालिटी की जांच करवानी जरूरी है. 

बच्चा पैदा करने की चाहत पूरी करने के लिए सिर्फ भावनात्मक तैयारी नहीं, बल्कि शारीरिक सेहत भी उतनी ही जरूरी है. सही स्पर्म काउंट, हेल्दी लाइफस्टाइल और समय पर डॉक्टर की सलाह से पैरेंट बनने का सपना आसानी से पूरा किया जा सकता है.

ये भी पढ़ें: गैस की वजह से दर्द या हार्ट अटैक? समझें दोनों में अंतर, जो समझ नहीं पाते लोग

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

कहीं हार्ट फेलियर का कारण तो नहीं बन रही पेन किलर, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

कहीं हार्ट फेलियर का कारण तो नहीं बन रही पेन किलर, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?


Painkiller Cause Herat Failure: हम में से कई लोग सिर दर्द, पीठ दर्द या चोट लगने पर तुरंत पेन किलर का सेवन कर लेते हैं. छोटी सी गोली हमें जल्दी राहत देती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही आदत आपके दिल के लिए खतरा बन सकती है? विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार और लंबे समय तक पेन किलर लेने से हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ सकता है. 

दरअसल, बहुत  से लोग छोटी-छोटी दिक्कतों के लिए पैंनकिलर ले लेते हैं. लेकिन बाद में जाकर पता चलता है कि, शरीर में ये किस तरह से परेशानी बनकर सामने आ रही है. हालांकि इस मसले में डॉक्टर का क्या कहना है, ये भी जान लीजिए.

ये भी पढे़- शरीर के इस हिस्से में दर्द हाई यूरिक एसिड की ओर करता है इशारा, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

पेनकिलर और हार्ट हेल्थ

पेनकिलर्स खासकर जैसे इबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक या नैप्रोक्सेन शरीर में सूजन और दर्द को कम करते हैं. लेकिन इन दवाओं का साइड इफेक्ट यह है कि यह किडनी और हार्ट पर दबाव डाल सकती हैं. 

कब बढ़ सकता है खतरा?

डॉ. रजनीश कुमार के अनुसार, जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज, ब्लड प्रेशर, किडनी प्रॉब्लम या डायबिटीज है, उन्हें पेनकिलर लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. रोजाना पेनकिलर लेने की आदत बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर बुजुर्गों और क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए. 

किन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से मिलें?

  • अगर पेनकिलर लेने के बाद ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.
  • सांस लेने में तकलीफ
  • पैरों या टखनों में सूजन
  • तेज धड़कन या धड़कन अनियमित होना
  • अचानक वजन बढ़ना

सुरक्षित विकल्प क्या हो सकते हैं

  • पेनकिलर से बचने के लिए आप कुछ प्राकृतिक और सेफ विकल्प आज़मा सकते हैं.
  • गर्म या ठंडी सिकाई – मांसपेशियों के दर्द में फायदेमंद
  • हल्की स्ट्रेचिंग और योगा – जोड़ों के दर्द में राहत
  • हर्बल ड्रिंक्स – अदरक, हल्दी या ग्रीन टी सूजन कम करने में मदद करती हैं
  • मेडिटेशन और रिलैक्सेशन – स्ट्रेस से जुड़े सिर दर्द में असरदार

पेनकिलर तुरंत राहत का आसान रास्ता है, लेकिन बिना सोचे-समझे इसका सेवन आपके दिल के लिए खतरा बन सकता है. डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक पेनकिलर लेने से बचें और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर दर्द से निपटने के प्राकृतिक तरीकों को अपनाएं. 

ये भी पढ़ें: गैस की वजह से दर्द या हार्ट अटैक? समझें दोनों में अंतर, जो समझ नहीं पाते लोग

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

शरीर के इस हिस्से में दर्द हाई यूरिक एसिड की ओर करता है इशारा, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

शरीर के इस हिस्से में दर्द हाई यूरिक एसिड की ओर करता है इशारा, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास


Sings of Uric Acid: अक्सर लोग जोड़ों में हल्का दर्द या सूजन को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह आपके शरीर में हाई यूरिक एसिड का शुरुआती संकेत हो सकता है. समय रहते इसे पहचानना जरूरी है, वरना यह गठिया जैसी गंभीर समस्या का कारण बन सकता है. डॉ. हंसाजी बताती हैं कि, “यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने पर यह जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में जमने लगता है, जिससे सूजन, लालिमा और तेज दर्द होता है. “

ये भी पढे़- सुबह उठते ही हाथ-पैर में महसूस होता है दर्द, कहीं इस बीमारी के लक्षण तो नहीं?

यूरिक एसिड बढ़ने पर दर्द कहां होता है?

  • पैर के अंगूठे में तेज दर्द – यह सबसे आम लक्षण है. दर्द अचानक शुरू होता है और रात के समय ज्यादा महसूस होता है.
  • घुटनों और टखनों में सूजन – सूजन के साथ गर्माहट और दबाव पड़ने पर दर्द बढ़ सकता है.
  • हाथ की उंगलियों में अकड़न – खासकर सुबह के समय हाथ मुड़ाने या काम करने में तकलीफ.
  • एड़ी में दर्द – चलने या खड़े होने में दिक्कत होने लगती है. 

यूरिक एसिड बढ़ने के कारण

  • ज्यादा मात्रा में रेड मीट और सीफूड का सेवन
  • शक्कर और मीठे पेय पदार्थों की आदत
  • शराब, खासकर बीयर का ज्यादा सेवन
  • मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि
  • किडनी की समस्या के कारण यूरिक एसिड का सही से बाहर न निकलना

कब जाएं डॉक्टर के पास?

अगर आपको बार-बार इन हिस्सों में दर्द, सूजन और लालिमा महसूस हो, तो तुरंत ब्लड टेस्ट करवाएं. लंबे समय तक इलाज न करने पर यह क्रॉनिक गाउट, किडनी स्टोन और किडनी डैमेज तक पहुंच सकता है.

हाई यूरिक एसिड से बचाव के उपाय

  • रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं
  • मीट, शराब और शक्करयुक्त ड्रिंक्स से परहेज करें
  • ताजे फल और हरी सब्जियां डाइट में शामिल करें
  • नियमित एक्सरसाइज करें और वजन नियंत्रित रखें
  • लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें

शरीर के किसी हिस्से में लगातार होने वाला दर्द कभी नजरअंदाज न करें, खासकर अगर यह जोड़ों से जुड़ा हो. हाई यूरिक एसिड का समय पर पता लगाना और उसका इलाज करना आपके जोड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकता है.

ये भी पढ़ें: गैस की वजह से दर्द या हार्ट अटैक? समझें दोनों में अंतर, जो समझ नहीं पाते लोग

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

ये लक्षण दिखें तो समझ जाएं टीनएजर्स को पड़ने वाला है हार्ट अटैक, जानें बच्चे को बचाने के तरीके

ये लक्षण दिखें तो समझ जाएं टीनएजर्स को पड़ने वाला है हार्ट अटैक, जानें बच्चे को बचाने के तरीके


हार्ट अटैक ज्यादातर बड़े लोगों को होता है, लेकिन आजकल की लाइफस्टाइल के कारण टीनएजर्स में भी इसका खतरा बढ़ रहा है. खराब डाइट, कम एक्सरसाइज, स्मोकिंग, ड्रग्स और ज्यादा स्ट्रेस जैसी आदतें दिल को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे कम उम्र में भी हार्ट प्रॉब्लम हो सकती हैं.

सागर हॉस्पिटल के हार्ट सर्जन डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं कि गलत लाइफस्टाइल के कारण टीनएजर्स में हार्ट की बीमारियों का जोखिम बढ़ रहा है. जैसा कि इस उम्र में हार्ट प्रॉब्लम की उम्मीद कम होती है, इसलिए अक्सर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है. यह अनदेखी इलाज में देरी का कारण बन सकती है, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। इस जोखिम को कम करने के लिए जागरूकता और स्वस्थ आदतें अपनाना बहुत जरूरी है.

टीनएजर्स में हार्ट अटैक के आम लक्षण

टीनएजर्स में हार्ट अटैक के लक्षण एडल्ट्स से थोड़े अलग हो सकते हैं. इन लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है.

  • सीने में दर्द या बेचैनी: यह सबसे कॉमन सिम्पटम है. सीने के बीच में प्रेशर, टाइट फीलिंग या भारीपन महसूस हो सकता है, जो कुछ मिनटों तक रहता है. इस लक्षण को नजरअंदाज न करें, भले ही यह हल्का या रुक-रुक कर हो.
  • सांस लेने में दिक्कत: बिना किसी वजह के सांस फूलना या ऐसा लगना कि पूरी सांस नहीं मिल रही है. यह अचानक हो सकता है या समय के साथ धीरे-धीरे बिगड़ सकता है.
  • दूसरे हिस्सों में दर्द: चेस्ट पेन अक्सर बाएं हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है. लोग इसे अक्सर मसल पेन या इनडाइजेशन समझ लेते हैं.
  • अजीब थकान या कमजोरी: बिना किसी खास वजह के बहुत ज़्यादा थकान या कमजोरी महसूस होना. यह लक्षण डेली एक्टीविटीज में बाधा डाल सकता है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
  • चक्कर आना या लाइटहेडेडनेस: अचानक चक्कर आना या बेहोश होने जैसा महसूस होना. इसके साथ तेज या अनियमित दिल की धड़कन भी हो सकती है.
  • उल्टी या पसीना: कुछ टीनएजर्स को हार्ट अटैक के समय अचानक उल्टी या ठंडा पसीना आ सकता है, जिसे लोग अक्सर फ्लू समझ लेते हैं।

यह जानना क्यों जरूरी है?

टीनएजर्स और उनके पैरेंट्स अक्सर इन लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं या इन्हें चिंता,  मांसपेशियों में खिंचाव जैसी कम गंभीर समस्याएं समझ लेते हैं. ऐसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से इलाज में देरी हो सकती है और गंभीर हार्ट डैमेज या अचानक कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ सकता है. अगर इनमें से कोई भी सिम्पटम दिखे, खासकर सीने में दर्द या सांस लेने में दिक्कत, तो फौरन इमरजेंसी मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए. समय पर इलाज मिलने से बड़ी दिक्कत से बचा जा सकता है.

ये भी पढ़ें: हार्ट अटैक का कारण बन सकती है ये 5 सफेद चीजें, कहीं आप तो नहीं कर रहे खाने की गलती

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

जीरा और सौंफ का पानी मिनटों में पेट करे कम, बस आज से ऐसे करें सेवन

जीरा और सौंफ का पानी मिनटों में पेट करे कम, बस आज से ऐसे करें सेवन


Detox Drink for Weight Loss: वजन घटाने और पेट की चर्बी कम करने के लिए लोग जिम, डाइटिंग और तरह-तरह के सप्लीमेंट का सहारा लेते हैं, लेकिन अक्सर नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलते. ऐसे में आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खे आपकी मदद कर सकते हैं. डॉ. सुभाष गोयल के अनुसार, जीरा और सौंफ का पानी पेट की चर्बी को कम करने के साथ-साथ पाचन सुधारने और शरीर से टॉक्सिन निकालने में बेहद असरदार है. 

दरअसल, आजकल ज्यादातर लोग अपनी पेट की चर्बी को लेकर परेशान रहते हैं. इसके लिए बहुत कुछ करते हैं, लेकिन पेट कम होने का नाम नहीं लेता, ऐसे में ये घरेलू नुस्खा आजमाकर देखें, शायद कुछ तो फर्क पड़ेगा. 

ये भी पढ़े- आपको भी बार-बार आती है हिचकी, जानें कब हो जाती है यह खतरनाक?

ऐसे बनाएं जीरा-सौंफ का पानी

  • एक गिलास पानी लेकर 1 चम्मच जीरा और 1 चम्मच सौंफ डाल दें
  • इसे रातभर भिगोकर छोड़ दें
  • सुबह इस पानी को हल्की आंच पर 5 मिनट उबालें
  • जब ये पानी गुनगुना हो जाए, तब इसे छान लें और खाली पेट सेवन करें 

कब और कैसे पिएं?

  • सुबह खाली पेट इसे पीना से सबसे अधिक फायदा मिलता है
  • चाहें तो रात के खाने के एक घंटे बाद भी पी सकते हैं
  • लगातार 15-20 दिन तक पीने से फर्क नजर आने लगेगा
  • फायदे सिर्फ पेट कम करने तक सीमित नहीं

पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है

  • शरीर से टॉक्सिन निकालकर स्किन को हेल्दी बनाता है
  • गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग को कम करता है
  • हार्मोनल बैलेंस में मददगार और महिलाओं के लिए पीरियड्स के दौरान फायदेमंद

किन बातों का रखें ध्यान

  • किसी भी तरह की एलर्जी या गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें
  • जरूरत से ज्यादा सेवन न करें, वरना पेट में जलन हो सकती है
  • डाइट और एक्सरसाइज के साथ इसे शामिल करें, तभी बेहतर नतीजे मिलेंगे

जीरा और सौंफ का पानी एक बेहद आसान, सस्ता और प्राकृतिक तरीका है पेट की चर्बी कम करने और पाचन सुधारने का, यह न केवल वजन घटाने में मदद करता है, बल्कि शरीर को अंदर से साफ कर हेल्दी और एनर्जेटिक बनाए रखता है. सही समय पर और सीमित मात्रा में इसका सेवन आपकी फिटनेस जर्नी को आसान बना सकता है. बेहतर नतीजों के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ इस नुस्खे को अपनाना जरूरी है.

इसे भी पढ़ें- युवाओं में होने वाला तीसरा सबसे कॉमन है ये कैंसर, शुरुआती संकेत ही होते हैं बेहद खतरनाक

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर इन हिस्सों में होता है दर्द, संकेत दिखाई देते है भागें डॉक्टर के पास

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर इन हिस्सों में होता है दर्द, संकेत दिखाई देते है भागें डॉक्टर के पास


सीने में दर्द: कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से धमनियों में प्लाक जमने लगता है, जिससे खून का प्रवाह बाधित होता है. इससे एंजाइना नामक स्थिति होती है, जिसमें सीने में दबाव या जलन महसूस होती है. यह हार्ट अटैक का शुरुआती संकेत हो सकता है.

पैरों में दर्द और सूजन: हाई कोलेस्ट्रॉल से ब्लड फ्लो कम हो जाता है, जिससे पैरों में दर्द, भारीपन और सूजन हो सकती है. यह पेरिफेरल आर्टरी डिज़ीज़ का लक्षण हो सकता है. पैरों में सुन्नपन या ठंडापन भी महसूस हो सकता है,

पैरों में दर्द और सूजन: हाई कोलेस्ट्रॉल से ब्लड फ्लो कम हो जाता है, जिससे पैरों में दर्द, भारीपन और सूजन हो सकती है. यह पेरिफेरल आर्टरी डिज़ीज़ का लक्षण हो सकता है. पैरों में सुन्नपन या ठंडापन भी महसूस हो सकता है,

गर्दन और जबड़े में दर्द: कोलेस्ट्रॉल के कारण हृदय की ओर जाने वाली रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं.इससे दर्द सिर्फ सीने में ही नहीं, बल्कि गर्दन और जबड़े तक फैल सकता है.अगर यह दर्द अचानक और तीव्र हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

गर्दन और जबड़े में दर्द: कोलेस्ट्रॉल के कारण हृदय की ओर जाने वाली रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं.इससे दर्द सिर्फ सीने में ही नहीं, बल्कि गर्दन और जबड़े तक फैल सकता है.अगर यह दर्द अचानक और तीव्र हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

सिरदर्द: कोलेस्ट्रॉल जमा होने से दिमाग तक खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है.इससे बार-बार तेज सिरदर्द या माइग्रेन जैसी समस्या हो सकती है.यह स्ट्रोक के खतरे का भी संकेत हो सकता है.

सिरदर्द: कोलेस्ट्रॉल जमा होने से दिमाग तक खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है.इससे बार-बार तेज सिरदर्द या माइग्रेन जैसी समस्या हो सकती है.यह स्ट्रोक के खतरे का भी संकेत हो सकता है.

पीठ में दर्द: पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द कभी-कभी हृदय से जुड़ी समस्या का लक्षण हो सकता है.कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हार्ट पर दबाव पड़ता है, जिससे दर्द कंधों और पीठ तक फैल सकता है.अगर यह दर्द लगातार हो, तो जांच जरूरी है.

पीठ में दर्द: पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द कभी-कभी हृदय से जुड़ी समस्या का लक्षण हो सकता है.कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हार्ट पर दबाव पड़ता है, जिससे दर्द कंधों और पीठ तक फैल सकता है.अगर यह दर्द लगातार हो, तो जांच जरूरी है.

हाथों में दर्द और सुन्नपन: हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण खून का प्रवाह हाथों तक सही से नहीं पहुंच पाता.इससे हाथों में दर्द, कमजोरी और सुन्नपन हो सकता है.यह दिल की ओर जाने वाली धमनियों में ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है.

हाथों में दर्द और सुन्नपन: हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण खून का प्रवाह हाथों तक सही से नहीं पहुंच पाता.इससे हाथों में दर्द, कमजोरी और सुन्नपन हो सकता है.यह दिल की ओर जाने वाली धमनियों में ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है.

Published at : 08 Aug 2025 06:21 PM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp