हेल्दी डाइट के बाद भी बढ़ रहा यूरिक एसिड? जानें वे कारण, जो आपको कर रहे बीमार

हेल्दी डाइट के बाद भी बढ़ रहा यूरिक एसिड? जानें वे कारण, जो आपको कर रहे बीमार



Uric Acid Symptoms: यूरिक एसिड हमारे शरीर में बनने वाला एक तरह का नेचुरल तत्व है. जब शरीर कुछ खाने की चीजों को पचाता है, खासकर मांस, मछली या दालों जैसी चीजें जिनमें प्यूरिन नाम का तत्व होता है, तो उससे यूरिक एसिड बनता है. आम तौर पर यह खून के जरिए किडनी तक पहुंचता है और फिर पेशाब के साथ बाहर निकल जाता है. लेकिन जब इसकी मात्रा ज्यााद होने लगती है, तो यह खून में जमा होकर कई दिक्कतें पैदा कर सकता है, जैसे जोड़ों में दर्द गठिया, किडनी स्टोन या आगे चलकर हार्ट की परेशानी.

कई बार यूरिक एसिड सिर्फ गलत खानपान से नहीं, बल्कि दूसरी वजहों से भी बढ़ सकता है. जैसे कम पानी पीना, ज्यादा वजन होना, एल्कोहल पीना या कुछ दवाओं का लगातार इस्तेमाल. यहां तक कि कुछ लोगों में ये समस्या परिवार से भी जुड़ी होती है. चलिए जानते हैं कि यह किन कारणों के चलते हो रहा है. 

1. ज्यादा प्यूरिन वाला खाना

रेड मीट, लीवर, मछली, और सी-फूड जैसी चीजें प्यूरिन से भरपूर होती हैं. इन्हें बार-बार खाने से शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा बनने लगता है. इसलिए इन चीजों को सीमित मात्रा में खाएं और साथ में खूब फल-सब्जियां लें ताकि शरीर इसका असर कम कर सके.

2. मीठे ड्रिंक और जंक फूड

सोडा, कोल्ड ड्रिंक, पैक्ड जूस या मीठे स्नैक्स में मौजूद फ्रुक्टोज यूरिक एसिड को बढ़ा देता है. ऐसे ड्रिंक की जगह नारियल पानी, नींबू पानी या हर्बल टी लें, ये शरीर को ठंडक देते हैं और यूरिक एसिड को कंट्रोल करते हैं.

3. शराब का सेवन

बीयर और हार्ड ड्रिंक्स यूरिक एसिड के स्तर को बहुत बढ़ा देती हैं. इनमें अल्कोहल के साथ प्यूरिन भी होता है, जिससे शरीर पर डबल असर पड़ता है. अगर आप यूरिक एसिड या गठिया से परेशान हैं, तो शराब से दूरी ही सबसे बेहतर है.

4. पानी की कमी

कम पानी पीने से किडनी यूरिक एसिड को बाहर नहीं निकाल पाती और यह खून में जमा होने लगता है. इसलिए दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं.

5. ज्यादा वजन और कम एक्टिविटी

मोटापे में शरीर ज्यादा यूरिक एसिड बनाता है और किडनी उसे ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती. अगर आप थोड़ा-थोड़ा वजन घटाते हैं, तो यूरिक एसिड खुद-ब-खुद कम होने लगता है. रोज थोड़ा टहलना और हल्का एक्सरसाइज बहुत फायदेमंद है.

6. दवाइयों का असर

ब्लड प्रेशर या हार्ट की कुछ दवाइयां यूरिक एसिड बढ़ा सकती हैं. अगर आप कोई दवा लंबे समय से ले रहे हैं, तो डॉक्टर से एक बार यूरिक एसिड लेवल की जांच जरूर करवाएं.

7. फास्टिंग या क्रैश डाइट

बहुत सख्त डाइट या लंबे उपवास से शरीर मांसपेशियों को तोड़कर ऊर्जा लेता है, जिससे यूरिक एसिड बढ़ जाता है. इसलिए वजन घटाने के लिए धीरे-धीरे और संतुलित डाइट अपनाएं.

8. पारिवारिक कारण

कई बार ये समस्या जेनेटिक होती है, यानी परिवार में किसी को है तो आपको भी हो सकती है. इसलिए अगर आपके घर में किसी को गठिया या यूरिक एसिड की दिक्कत रही है, तो अपनी डाइट और पानी की मात्रा पर ध्यान दें और समय-समय पर टेस्ट कराएं.

क्या करें?

अपने शरीर की सुनें. अगर जोड़ों में दर्द, सूजन या अकड़न महसूस हो, तो इसे नज़रअंदाज न करें. पानी ज्यादा पिएं, हेल्दी खाना खाएं और जरूरत हो तो डॉक्टर से सलाह लें. सही खानपान और थोड़ी जागरूकता से यूरिक एसिड को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है.

इसे भी पढ़ें: Kidney Disease Symptoms: मौत होने की टॉप-10 वजहों में से एक हैं किडनी की बीमारियां, इन्हें वक्त पर कैसे पहचानें?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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भूलने की समस्या और सुस्त दिमाग का असली कारण उम्र नहीं,  हो सकती है इस विटामिन की कमी

भूलने की समस्या और सुस्त दिमाग का असली कारण उम्र नहीं, हो सकती है इस विटामिन की कमी


विटामिन B12 मांस, मछली, अंडे और डेयरी उत्पादों में पाया जाता है. इसकी कमी से दिमाग में होमोसिस्टीन बढ़ता है, जो नर्व सेल्स को नुकसान पहुंचाता है और सोचने की क्षमता को धीमा कर देता है.

शाकाहारी, बुजुर्ग और कुछ बीमारियों जैसे डायबिटीज या किडनी डिजीज से पीड़ित लोग इस कमी के ज्यादा शिकार होते हैं. लंबे समय तक एसिड ब्लॉकर या मेटफॉर्मिन जैसी दवाएं लेने वाले लोगों में भी यह समस्या बढ़ सकती है.

शाकाहारी, बुजुर्ग और कुछ बीमारियों जैसे डायबिटीज या किडनी डिजीज से पीड़ित लोग इस कमी के ज्यादा शिकार होते हैं. लंबे समय तक एसिड ब्लॉकर या मेटफॉर्मिन जैसी दवाएं लेने वाले लोगों में भी यह समस्या बढ़ सकती है.

इसकी शुरुआती पहचान जरूरी है. भूलना, ध्यान न लगना, चिड़चिड़ापन, या हाथ-पैरों में झनझनाहट इसके लक्षण हो सकते हैं. ब्लड टेस्ट से इसका पता लगाया जा सकता है.

इसकी शुरुआती पहचान जरूरी है. भूलना, ध्यान न लगना, चिड़चिड़ापन, या हाथ-पैरों में झनझनाहट इसके लक्षण हो सकते हैं. ब्लड टेस्ट से इसका पता लगाया जा सकता है.

बचाव के लिए खाने में B12 से भरपूर चीजें जैसे दूध, अंडा, पनीर और मछली शामिल करें. शाकाहारी लोग फोर्टिफाइड फूड्स या सप्लीमेंट्स ले सकते हैं.

बचाव के लिए खाने में B12 से भरपूर चीजें जैसे दूध, अंडा, पनीर और मछली शामिल करें. शाकाहारी लोग फोर्टिफाइड फूड्स या सप्लीमेंट्स ले सकते हैं.

साथ ही फोलेट, विटामिन B6 और राइबोफ्लेविन का सेवन भी जरूरी है क्योंकि ये तीनों मिलकर दिमाग को स्वस्थ रखते हैं.

साथ ही फोलेट, विटामिन B6 और राइबोफ्लेविन का सेवन भी जरूरी है क्योंकि ये तीनों मिलकर दिमाग को स्वस्थ रखते हैं.

अगर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो विटामिन B12 की कमी से होने वाली याददाश्त की समस्या और मानसिक कमजोरी को आसानी से रोका जा सकता है.

अगर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो विटामिन B12 की कमी से होने वाली याददाश्त की समस्या और मानसिक कमजोरी को आसानी से रोका जा सकता है.

Published at : 23 Nov 2025 10:54 AM (IST)

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खाने में मौजूद यह चीज मर्दों को बना रही नामर्द, लगातार घट रहा स्पर्म काउंट

खाने में मौजूद यह चीज मर्दों को बना रही नामर्द, लगातार घट रहा स्पर्म काउंट



Low Sperm Count Causes: पुरुषों में लगातार फर्टिलिटी रेट की कमी आ रही है. अब इसमें एक चौकाने वाला खुलासा हुआ है. दरअसल  नई रिसर्च के मुताबिक खेती में इस्तेमाल होने वाले आम कीटनाशक पुरुषों की प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचा सकते हैं. अध्ययन में पाया गया है कि नीओनिकोटिनॉइड नामक कीटनाशक लैब में रखे नर जानवरों के स्पर्म काउंट को घटाते हैं और उनकी प्रजनन सिस्टम को कमजोर करते हैं. चूंकि ये रसायन खेती में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं, इसलिए इनके जरिए इंसानों में भी इनके असर की संभावना बढ़ जाती है 

क्या निकला रिसर्च में?

पिछले कुछ वर्षों में किए गए स्टडी  से यह साफ हो गया है कि खेती में इस्तेमाल होने वाले ये कीटनाशक पुरुषों में घटती प्रजनन क्षमता और स्पर्म की गुणवत्ता में गिरावट के पीछे एक बड़ा कारण हो सकते हैं. एनवायर्नमेंटल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित नई समीक्षा में 2005 से 2025 के बीच किए गए 21 प्रयोगों का एनलिसिस किया गया. नतीजे बताते हैं कि नीओनिकोटिनॉइड रसायनों के संपर्क में आए नर चूहों में स्पर्म की संख्या, गतिशीलता और संरचना तीनों पर निगेटिव असर देखा गया, साथ ही टेस्टिस के डिश्यू में भी नुकसान पाया गया.

एक्सपर्ट का क्या कहना है?

रिसर्च की प्रमुख राइटर सुमैया एस. इरफान, जो जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी में एपिडेमियोलॉजिस्ट के अनुसार “हमने पाया कि इन रसायनों के संपर्क से स्पर्म क्वालिटी कम होती है, हार्मोन असंतुलित होते हैं और टेस्टिकुलर टिश्यू को नुकसान पहुंचता है.” उनकी सहयोगी वेरोनिका जी. सांचेज, जो उसी यूनिवर्सिटी में रिसर्च असिस्टेंट का कहना है कि यह स्टडी आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि “खाने में मौजूद कीटनाशक अवशेष भी धीरे-धीरे फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकते हैं.”

चिंता की बात क्यों?

हालांकि यह रिसर्च जानवरों पर की गई थी, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि सभी स्तनधारियों में स्पर्म बनने की प्रक्रिया लगभग समान होती है, इसलिए जानवरों में पाया गया असर इंसानों के लिए भी चिंता का विषय है. अमेरिका में किए गए एक सर्वे में पाया गया कि तीन साल से ऊपर की लगभग आधी आबादी के शरीर में नीओनिकोटिनॉइड्स के रासायनिक निशान पाए गए और बच्चों में यह स्तर और भी ज़्यादा था. यह कीटनाशक पौधों में पूरी तरह समा जाते हैं, इसलिए फलों या सब्जियों को धोने के बाद भी इनके अंश रह जाते हैं.  रिसर्च के मुताबिक, ये रसायन शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जिससे स्पर्म सेल्स और डीएनए को नुकसान होता है. साथ ही ये हार्मोन सिग्नलिंग को प्रभावित करते हैं और टेस्टिस के टिश्यू को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे स्पर्म बनने की प्रक्रिया बाधित होती है. यही वजह है कि स्पर्म की गतिशीलता घटती है और फर्टिलिटी की संभावना कम हो जाती है.

इसे भी पढ़ें: कुर्सी या खराब पोस्चर नहीं, मेंटल स्ट्रेस भी बन सकती है पीठ और कमर दर्द की वजह

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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अंडों का पीला हिस्सा क्यों नहीं खाना चाहिए? जानें इससे होने वाले नुकसान और फायदे

अंडों का पीला हिस्सा क्यों नहीं खाना चाहिए? जानें इससे होने वाले नुकसान और फायदे



अंडे दुनिया भर में हर उम्र के लोगों का पसंदीदा खाना हैं. ये सिर्फ टेस्टी ही नहीं बल्कि पोषण का खजाना भी हैं. अंडे में प्रोटीन, विटामिन, खनिज और अच्छा फैट जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को मजबूत बनाते हैं. अक्सर कहा जाता है कि अंडे की सफेदी वजन घटाने और मांसपेशियां बनाने के लिए अच्छी होती है, जबकि जर्दी यानी अंडे का पीला हिस्सा पोषक तत्वों से भरा होता है. इसमें विटामिन A, D, E, B12, कोलीन, और हेल्दी फैट होते हैं, जो दिमाग, आंखों और हड्डियों के लिए फायदेमंद हैं. लेकिन अक्सर लोगों को कंफ्यूजन रहती है कि क्या हर व्यक्ति अंडे की जर्दी खा सकता है. कुछ लोगों के लिए अंडे की जर्दी का सेवन नुकसानदायक हो सकता है.  तो चलिए जानते हैं कि अंडों का पीला हिस्सा क्यों नहीं खाना चाहिए, इससे होने वाले नुकसान और फायदे क्या हैं?

अंडों का पीला हिस्सा क्यों नहीं खाना चाहिए?

1. उच्च कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज वाले लोग – अंडे की जर्दी में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. एक जर्दी में लगभग 185 mg कोलेस्ट्रॉल होता है. ज्यादातर हेल्दी लोगों के लिए यह ठीक है, लेकिन जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल पहले से ज्यादा है या जिन्हें दिल से जुड़ी बीमारियां हैं, उनके लिए यह हानिकारक हो सकता है. ज्यादा कोलेस्ट्रॉल से ब्लड में चर्बी बढ़ सकती है, धमनियों में प्लाक जम सकता है, दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे लोग जर्दी कम खाएं या डॉक्टर की सलाह से ही आहार तय करें. 

2. टाइप 2 डायबिटीज वाले लोग – डायबिटीज वाले लोगों में दिल की बीमारी का खतरा पहले से ज्यादा रहता है. अगर वे ज्यादा कोलेस्ट्रॉल खाते हैं, तो यह जोखिम और बढ़ सकता है. इसलिए डायबिटीज वाले लोगों को जर्दी का सेवन सीमित रखना चाहिए. 

3. गठिया के मरीज – अंडे की जर्दी में प्यूरीन नाम का तत्व होता है.प्यूरीन शरीर में यूरिक एसिड बनाता है, जो गाउट के मरीजों में समस्या बढ़ा सकता है. यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों में दर्द, सूजन, अचानक तीखे दर्द के अटैक हो सकते हैं इसलिए गठिया के मरीज जर्दी बहुत सीमित मात्रा में ही खाएं. 

4. अंडे से एलर्जी वाले लोग – कई लोगों को अंडों से एलर्जी होती है, खासकर बच्चों को, हालांकि अक्सर एलर्जी सफेदी से होती है, लेकिन कुछ लोगों को जर्दी से भी समस्या हो सकती है. इससे पेट दर्द, उल्टी, स्किन पर रैश और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. एलर्जी वाले व्यक्ति को जर्दी पूरी तरह से छोड़ देनी चाहिए. 

5. कुछ दवाइयां लेने वाले लोग – जो लोग स्टैटिन या blood thinner दवाएं लेते हैं, उन्हें भी अपनी डाइट में बदलाव करना पड़ सकता है. जर्दी कभी-कभी दवाइयों के असर को बदल सकती है या साइड इफेक्ट बढ़ा सकती है. ऐसे लोग डॉक्टर से सलाह लिए बिना जर्दी ज्यादा न खाएं. 

इससे होने वाले नुकसान और फायदे

1.  बेहतरीन प्रोटीन का स्रोत: अंडे में हाई क्वालिटी वाला प्रोटीन होता है, जो मांसपेशियां बनाने, शरीर की मरम्मत और ग्रोथ में मदद करता है. 

2.  दिमाग के लिए फायदेमंद: जर्दी में कोलीन पाया जाता है, जो याददाश्त, दिमागी ग्रोथ और नर्व्स के काम को बेहतर करता है. 

3. विटामिन और खनिजों से भरपूर: अंडे में विटामिन A, D, E, B12, आयरन और सेलेनियम जैसे कई पोषक तत्व होते हैं जो आंखों, हड्डियों, इम्यूनिटी के लिए जरूरी हैं. 

4. दिल की सेहत: अगर आप ज्यादा जर्दी नहीं खाते और आपके स्वास्थ्य की स्थिति ठीक है, तो जर्दी में मौजूद ओमेगा–3 फैट आपको फायदा भी दे सकती है. 

5. आंखों के लिए फायदेमंद: जर्दी में ल्यूटिन और जेक्सैन्थिन होते हैं, जो आंखों को उम्र के साथ कमजोर होने से बचाते हैं. 

6. वजन घटाने में मदद: अंडे पेट भरकर रखते हैं, जिससे भूख कम लगती है और वजन कंट्रोल में मदद मिलती है. 

7. शरीर की इम्यूनिटी  बढ़ाते हैं: जर्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन शरीर की इम्यूनिटी क्षमता बढ़ाते हैं. 

यह भी पढ़ें: यूरिन करते वक्त फ्लो रहता है स्लो तो हो जाएं अलर्ट, इस कैंसर का मिलता है सिग्नल

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यूरिन करते वक्त फ्लो रहता है स्लो तो हो जाएं अलर्ट, इस कैंसर का मिलता है सिग्नल

यूरिन करते वक्त फ्लो रहता है स्लो तो हो जाएं अलर्ट, इस कैंसर का मिलता है सिग्नल



हम अपनी डेली लाइफ में शरीर के कई छोटे-छोटे बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर पेशाब यानी यूरिन से जुड़े संकेतों को, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेशाब के तरीके में आया हल्का-सा फर्क भी कभी-कभी किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती इशारा हो सकता है. अगर आपको कुछ समय से ऐसा महसूस हो रहा है कि यूरिन का फ्लो पहले जैसा तेज नहीं है, पेशाब रुक-रुक कर आता है, या बार-बार बाथरूम की जरूरत महसूस होती है लेकिन राहत नहीं मिलती, तो इन संकेतों को हल्के में लेना सही नहीं है. ऐसे बदलाव किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकते हैं, जिनमें से एक कैंसर है. तो चलिए जानते हैं कि यूरिन करते वक्त फ्लो स्लो हो जाएं तो किस कैंसर का सिग्नल मिलता है. 

यूरिन करते वक्त फ्लो स्लो हो जाएं तो किस कैंसर का सिग्नल मिलता है

यूरिन करते वक्त फ्लो स्लो हो जाएं तो ब्लैडर कैंसर का सिग्नल मिलता है. ब्लैडर कैंसर वह बीमारी है जिसमें कैंसर की शुरुआत ब्लैडर में होने वाली कोशिकाओं से होती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि मूत्राशय कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामले एक ही प्रकार के कैंसर, यूरोथेलियल सेल कार्सिनोमा (UCC)  के होते हैं. यह कैंसर  ब्लैडर के अलावा उन नलियों और हिस्सों में भी हो सकता है जिनसे होकर पेशाब शरीर से बाहर निकलता है. 

किसे होता है ज्यादा खतरा?

डॉक्टरों के अनुसार ब्लैडर कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक सिगरेट पीना है. लंबे समय तक स्मोकिंग करने से शरीर में ऐसे रसायन जमा होते हैं जो ब्लैडर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा भी कई कारण खतरा बढ़ाते हैं, जैसे ब्लैडर में बार-बार इन्फेक्शन या सूजन, रंगों, केमिकल या सॉल्वेंट्स के संपर्क में लंबे समय तक काम करना, कुछ तरह की पुरानी कीमोथेरेपी, बढ़ती उम्र. पुरुषों में यह बीमारी महिलाओं की तुलना में लगभग चार गुना ज्यादा पाई जाती है. हालांकि महिलाएं और युवा भी इससे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. 

ब्लैडर कैंसर के लक्षण 

शरीर कई बार शुरू में हल्के-हल्के संकेत देता है. जैसे पेशाब में खून दिखाई देना, फ्लो स्लो महसूस होना, पेशाब करते समय जलन, बार-बार यूरिन की आना लेकिन पूरा खाली न कर पाना. लेकिन ये लक्षण कई बार यूरिन इन्फेक्शन, बढ़ती उम्र या रोजमर्रा की आदतों से भी जुड़े हो सकते हैं. इसी वजह से लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते और डॉक्टर के पास देर से पहुंचते हैं. अगर आपके साथ इन लक्षणों में से कोई बदलाव लगातार बना हुआ है तो समय रहते यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना बहुत जरूरी है. कई बार शुरुआती अवस्था में ब्लैडर कैंसर का इलाज आसानी से हो सकता है, लेकिन देर होने पर बीमारी बढ़ जाती है.

यह भी पढ़ें क्या है सबक्लेड के और इसे क्यों माना जा रहा खतरनाक फ्लू स्ट्रेन, जानें टेंशन में क्यों वैज्ञानिक?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या है सबक्लेड के और इसे क्यों माना जा रहा खतरनाक फ्लू स्ट्रेन, जानें टेंशन में क्यों वैज्ञानि

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