400+ AQI में प्रेग्नेंट महिलाएं भूलकर भी न करें ये काम, बच्चे पर पड़ सकता है उल्टा असर

400+ AQI में प्रेग्नेंट महिलाएं भूलकर भी न करें ये काम, बच्चे पर पड़ सकता है उल्टा असर



Air Pollution During Pregnancy: ठंड आते ही देश की राजधानी दिल्ली गैस चैंबर की तरह दिखने लगती है. हर तरफ प्रदूषण का कहर दिखाई देने लगता है. सोमवार 17 नवंबर को कई जगह एक्‍यूआई लेवल 400 के पार दर्ज किया गया है, जो गंभीर स्तर माना जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे प्रदूषित इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं में प्री-टर्म डिलीवरी (37 हफ्ते से पहले जन्म). कम वजन वाले बच्चे. स्टिलबर्थ और गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है. आइए समझते हैं कि प्रदूषण मां और उसके होने वाले बच्चे को कैसे प्रभावित करता है और इससे बचाव के तरीके क्या हैं.

गर्भवती महिला और भ्रूण पर प्रदूषण के खतरे

सर्दियों में हर साल अस्पताल खांसी. सर्दी. दमा और सांस की दिक्कत वाले मरीजों से भर जाते हैं. लेकिन असल नुकसान उस बच्चे को भी होता है. जो अभी मां के गर्भ में है. Americanpregnancy नॉर्मल गर्भावस्था में आमतौर पर 38 से 40 हफ्तों के बीच छह से नौ पाउंड वजन वाला बच्चा जन्म लेता है. पांच पाउंड आठ औंस से कम वजन वाले बच्चे को “लो बर्थ वेट” माना जाता है. इसके कई कारण हो सकते हैं. लेकिन माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान एयर पॉल्यूशन के संपर्क में आना भी इस समस्या का एक बड़ा कारण बन सकता है. हवा में मौजूद जहरीले कण प्लेसेंटा तक पहुंचकर मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

गर्भवती महिलाओं में प्रदूषण के कारण हाई ब्लड प्रेशर. सांस फूलना या अस्थमा का अटैक हो सकता है. जिससे बच्चे पर सीधा असर पड़ता है. कई शोधों में यह भी पाया गया है कि गर्भ में प्रदूषण के संपर्क में आने वाले बच्चों में आगे चलकर अस्थमा की समस्या होने की संभावना अधिक रहती है.

प्रेग्नेंसी में प्रदूषण से बचने के तरीके

अगर आपको अपने बच्चे की सेहत का ख्याल रखना है. तो आपको कुछ नियमों का पालन करना होगा. जैसे कि-

घर में रहें

इसमें पहले नम्बर पर आता है कि घर में रहें. गर्भवती महिलाओं पर प्रदूषण का असर ज्यादा तेज़ पड़ता है. इसलिए खासकर पीक पॉल्यूशन टाइम में बाहर जाने से बचें.

भरपूर पानी पिएं

शरीर को हाइड्रेट रखने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और खांसी-जैसी दिक्कतें भी कम होती हैं. पानी अंगों को स्वस्थ रखता है.

बाहर जाएं तो मास्क पहनें

एक अच्छी मेडिकल या N95 मास्क हवा में मौजूद हानिकारक कणों को काफी हद तक फिल्टर कर देता है.

घर की हवा शुद्ध रखें

अपने घर को सुरक्षित माहौल बनाएं. अंदर पौधे लगाएं. एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और खराब AQI के समय खिड़कियां बंद रखें.

इसे भी पढ़ें- Morning sugar: सुबह-सुबह क्यों हाई हो जाता है ब्लड शुगर, यह कितना खतरनाक और क्या है इसे मैनेज करने का तरीका?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

आज लाइफस्टाइल में कर लें ये बदलाव, घट जाएगा कल लिवर कैंसर होने का खतरा

आज लाइफस्टाइल में कर लें ये बदलाव, घट जाएगा कल लिवर कैंसर होने का खतरा



Ways to Prevent Liver Cancer: लिवर हमारे शरीर का सबसे मेहनती लेकिन सबसे अनदेखा अंग है. यह लगातार काम करता रहता है जो कुछ हम खाते, पीते या सांस के जरिए अंदर लेते हैं, उसे फिल्टर करता है. यही अंग हमारी एनर्जी, हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को बैलेंस में रखता है. लेकिन सेहत की बात आती है तो अक्सर लिवर पर ध्यान सबसे आखिर में जाता है. दुनिया भर में लंग्स कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट के मुताबिक हर पांच में से तीन मामले रोके जा सकते हैं. इसका राज किसी बड़ी दवा में नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में छिपा है. चलिए आपको बताते हैं कि आपको किन लाइफस्टाइल को चेंज करना है.

ज्यादा चलें, कम बैठें

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे असरदार और आसान तरीका है  एक्टिव रहना. रिसर्च बताती है कि अगर आप हफ्ते में सिर्फ एक घंटे भी तेज चाल से चलते हैं, तो लिवर कैंसर का खतरा लगभग 50 प्रतिशत तक घट सकता है. अगर आपकी नौकरी ऐसी है जिसमें लंबे समय तक बैठना पड़ता है, तो कोशिश करें कि हर घंटे कुछ मिनट टहल लें. फोन पर बात करते हुए उठकर चलें, मीटिंग्स के बीच स्ट्रेच करें या लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां लें. ये छोटे-छोटे बदलाव आपके लिवर के साथ-साथ पूरे शरीर को एक्टिव रखते हैं और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं.

वजन पर रखें नजर और सही खाएं

ज़्यादा वजन सिर्फ दिखने की बात नहीं है, यह सीधा लिवर की सेहत को प्रभावित करता है. शरीर में जमा फैट धीरे-धीरे लिवर में सूजन और स्कारिंग पैदा करता है, जो आगे चलकर कैंसर में बदल सकता है. शोध बताते हैं कि हर 5 यूनिट BMI बढ़ने पर लिवर कैंसर का खतरा लगभग 39 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर आप अपने वजन का सिर्फ 10 प्रतिशत भी कम कर लेते हैं, तो फैटी लिवर जैसी स्थिति को पलटा जा सकता है. इसके लिए डाइट में साबुत अनाज, दालें, ताजे फल और सब्जियां जरूर शामिल करें. ये लिवर को रिपेयर करने और मजबूत बनाने में मदद करती हैं.

शराब और स्मोकिंग से दूरी बनाएं

कैंसर से बचाव के लिए शराब की कोई मात्रा सेफ नहीं मानी जाती. अगर महिलाएं दिन में एक और पुरुष दो से ज़्यादा ड्रिंक लेते हैं, तो लिवर कैंसर का खतरा करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. शराब कम करना या पूरी तरह छोड़ देना लिवर को खुद को रिपेयर करने का मौका देता है. यही बात स्मोकिंग पर भी लागू होती है. तंबाकू लिवर की सेल्स को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन अगर आप इसे छोड़ दें तो कुछ समय बाद आपका रिस्क लगभग सामान्य हो सकता है.

लिवर को सुरक्षा दें और बीमारियों से बचाएं

क्रॉनिक हेपेटाइटिस B और C लिवर कैंसर के मुख्य कारणों में से हैं. हेपेटाइटिस B का टीका लगभग 70 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान करता है. इसके साथ ही सुरक्षित यौन संबंध, डिस्पोजेबल सुई का इस्तेमाल और सही समय पर एंटीवायरल इलाज करवाना बेहद जरूरी है. साथ ही अफ्लाटॉक्सिन जैसे जहरीले फंगस से भी बचें, जो पुराने अनाज या खराब तरीके से रखे गए ड्राई फ्रूट्स में बनता है. हमेशा भरोसेमंद ब्रांड से सामान खरीदें.

नींद और लाइफस्टाइल का ध्यान रखें

रोज 7 से 8 घंटे की नींद आपके लिवर को खुद को रीजेनेरेट करने का समय देती है. संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर नजर रखना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना. ये सब चीजें फैटी लिवर जैसी बीमारियों से बचाती हैं. 

इसे भी पढ़ें- Kidney Disease Symptoms: मौत होने की टॉप-10 वजहों में से एक हैं किडनी की बीमारियां, इन्हें वक्त पर कैसे पहचानें?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

सुबह-सुबह क्यों हाई हो जाता है ब्लड शुगर, यह कितना खतरनाक और क्या है इसे मैनेज करने का तरीका?

सुबह-सुबह क्यों हाई हो जाता है ब्लड शुगर, यह कितना खतरनाक और क्या है इसे मैनेज करने का तरीका?



High Blood Sugar: सुबह उठते ही अगर आपका ब्लड शुगर हाई मिलता है, तो यह परेशान करने वाली बात लगती है. खासकर तब, जब रातभर कुछ खाया भी नहीं होता. टाइप-2 डायबिटीज या प्रीडायबिटीज वाले लोगों में यह स्थिति और भी उलझन पैदा करती है. लेकिन एक्सपर्ट बताते हैं कि खाली पेट ब्लड शुगर बढ़ना एक आम बात है और इसके पीछे शरीर की कुछ प्राकृतिक प्रक्रियाएं और कुछ लाइफस्टाइल कारण काम करते हैं. इसमें सबसे सामान्य वजह है डॉन फिनॉमेनन। यह वह समय है जब सुबह 2 बजे से 8 बजे के बीच शरीर कुछ खास हार्मोन रिलीज करता है. जैसे कॉर्टिसोल, ग्रोथ हार्मोन, ग्लूकागॉन और एड्रेनालिन. ये हार्मोन शरीर को दिन की एक्टिविटी के लिए तैयार करते हैं और इसी दौरान लीवर खून में ग्लूकोज़ छोड़ता है ताकि सुबह ऊर्जा बनी रहे.

जिन लोगों में इंसुलिन अच्छी तरह काम करता है, शरीर तुरंत अतिरिक्त ग्लूकोज को संभाल लेता है. लेकिन टाइप-2 डायबिटीज या इंसुलिन रेसिस्टेंस वाले लोगों में यह ग्लूकोज संतुलित नहीं हो पाता, और सुबह ब्लड शुगर अपेक्षा से ज्यादा दिखाई देता है. गुरुग्राम स्थित फिजियोलॉजिस्ट डॉ. नलिन विकास कहते हैं कि यह प्रक्रिया शरीर के लिए सामान्य है, लेकिन इंसुलिन रेसिस्टेंस की स्थिति में ब्लड शुगर को बढ़ा सकती है.

इन वजहों से भी बढ़ता है शुगर

कुछ मामलों में सुबह का बढ़ा हुआ शुगर सोमोजी इफेक्ट की वजह से भी हो सकता है. यह तब होता है जब रात में ब्लड शुगर बहुत नीचे चला जाता है और शरीर उसे बचाने के लिए स्ट्रेस हार्मोन रिलीज करता है. ये हार्मोन ब्लड शुगर को जरूरत से ज्यादा बढ़ा देते हैं, और सुबह का रीडिंग हाई आता है. कई बार लोग इसे डॉन फिनॉमेनन समझ लेते हैं, लेकिन असल में यह रात के हाइपोग्लाइसीमिया का रिबाउंड होता है. हार्मोनल कारणों के अलावा, कई लाइफस्टाइल फैक्टर्स भी सुबह शुगर बढ़ाते हैं. तनाव और खराब नींद कॉर्टिसोल बढ़ाते हैं, जिससे इंसुलिन रेसिस्टेंस और अधिक हो जाता है. देर रात खाना, खासकर कार्ब्स या मीठा, रातभर ग्लूकोज को ऊंचा रखता है. दवाइयां गलत समय पर लेना भी फास्टिंग शुगर को बिगाड़ सकता है. इसके अलावा कम एक्टिविटी शरीर को ग्लूकोज उपयोग करने में कमजोर बना देती है.

कैसे कंट्रोल कर सकते हैं इसे?

डॉ. विकास सलाह देते हैं कि इन सभी कारणों को समझकर ही सुबह का शुगर कंट्रोल किया जा सकता है. उनका जोरर है कि डायबिटीज मैनेजमेंट सिर्फ दवाइयों पर नहीं टिका होता, बल्कि खानपान, नींद, तनाव और गतिविधि का संतुलन बेहद जरूरी है. शाम के समय हल्का और लो-कार्ब डिनर लेना रात में ग्लूकोज स्पाइक को रोकता है. डिनर के बाद थोड़ी वॉक करने से इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है. नींद और तनाव का ध्यान रखना हार्मोनल बैलेंस बनाए रखता है. कभी-कभार रात में ब्लड शुगर चेक करना मदद करता है यह पहचानने में कि समस्या डॉन फिनॉमेनन है या सोमोजी इफेक्ट और सबसे जरूरी दवाइयों का समय डॉक्टर की सलाह के अनुसार सेट करना.

इसे भी पढ़ें: Mouth Ulcers: मुंह में बार-बार हो रहे हैं छाले तो हल्के में लेने की न करें गलती, हो सकती है ये बड़ी बीमारी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या आप भी हर समय थका हुआ महसूस करते हैं? बॉडी टायर्डनेस के पीछे हो सकते हैं ये कारण

क्या आप भी हर समय थका हुआ महसूस करते हैं? बॉडी टायर्डनेस के पीछे हो सकते हैं ये कारण



आजकल की लाइफ में स्ट्रेस और मेंटल एग्जॉस्शन काफी ज्यादा हो गया है. इसके चलते लोग अक्सर फ्रस्ट्रेटिड और मेंटली ड्रेन्ड महसूस करते हैं. साथ ही, वह हर समय थके हुए रहते हैं. इसका कारण उनका अनहेल्दी लाइफस्टाइल भी है. ऐसे में इस थकान को दूर करने के लिए डॉक्टर्स पूरी नींद लेने की सलाह देते हैं.

लेकिन अपने देखा होगा कि कई लोग पूरी नींद लेने के बावजूद भी हर टाइम टायर्ड फील करते हैं. ऐसे में ये समस्या कई और वजहों से भी हो सकती है. आइए जानते हैं इसके पीछे के बड़े कारण.

आयरन डेफिशिएंसी से होती है थकान

हम सभी जानते हैं कि बैलेंस डाइट हेल्दी बॉडी के लिए काफी जरूरी होती है. इसलिए हमें सही समय पर खाना खाना चाहिए और सही मात्रा में सभी न्यूट्रियंट्स लेने चाहिए. इससे हमारा इम्यून सिस्टम अच्छा रहता है और बॉडी में  एनर्जी लेवल्स भी मेंटेन रहते हैं. ऐसे में जब भी हमारे शरीर में आयरन की कमी हो जाती है तो हीमोग्लोबिन भी कम बनने लगता है. इससे बॉडी में सभी सेल्स तक ऑक्सीजन की सप्लाई ठीक तरह से नहीं होती और हम थका हुआ महसूस करते हैं.

डिहाइड्रेशन से हो सकती है परेशानी

जब शरीर की एनर्जी खत्म हो जाती है तो हमें थकान होने लगती है. ऐसे में इसका एक बड़ा कारण डिहाइड्रेशन भी होता है. दरअसल, पानी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की मूवमेंट समेत ब्लड सर्कुलेशन के लिए भी जरूरी होता है. इसकी कमी से थकान और सिर दर्द जैसी परेशानियां हो जाती है. इसलिए हमें सही मात्रा में पानी पीना चाहिए.

स्ट्रेस करता है बॉडी को टायर्ड 

थकान और चिड़चिड़ेपन का सबसे बड़ा कारण स्ट्रेस है. स्ट्रेस इनडायरेक्टली आपके पूरे बॉडी फंक्शन को डिस्ट्रप्ट करता है. इससे न सिर्फ बॉडी बल्कि आपका माइंड भी एंग्जाइटी और डिप्रेशन को एक्सपीरियंस करता है और बॉडी हाई अलर्ट पर चली जाती है. इससे नींद में कमी आ जाती है और इंसान रिफ्रेश महसूस नहीं करता.

ब्ल्यू लाइट रे का पड़ता है बुरा असर

आजकल हर कोई अपने ऑफिस लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करता है. इसके अलावा मोबाइल फोन का इस्तेमाल तो बहुत कॉमन है. ऐसे में इन डिवाइसेज से निकलने वाली ब्ल्यू लाइट रेस भी आपके दिमाग को रेस्टलैस बनाती है. दरअसल, इनसे निकलने वाली लाइट ब्रेन को इंडीकेशन देती है कि अब भी दिन हो रहा है. इसके चलते ब्रेन मेलाटॉनिन प्रोडक्शन को कम देता है, जिससे हमें सही समय से नींद नहीं आती है और दिमाग एक्टिव मोड में ही रहता है.

इसे भी पढ़ें : अमरूद करेगा शुगर लेवल को कंट्रोल, पिंक या वाइट जानें कौन सा है बेहतर

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बिस्तर पर जाने से पहले कभी नहीं खानी-पीनी चाहिए ये चीजें, नाम जानकर उड़ जाएंगे होश

बिस्तर पर जाने से पहले कभी नहीं खानी-पीनी चाहिए ये चीजें, नाम जानकर उड़ जाएंगे होश


एक्सपर्ट के अनुसार, डिनर के बाद मिठाई खाना आपकी नींद का सबसे बड़ा दुश्मन बन सकता है. आइसक्रीम या चॉकलेट उस वक्त भले अच्छा महसूस कराएं, लेकिन सुबह थकान, डार्क सर्कल और सुस्ती देकर जाती हैं. ज्यादा शुगर ब्लड शुगर को बढ़ाती है और फैट पाचन को धीमा कर देता है, जिससे नींद खराब हो जाती है.

शाम की चाय या कॉफी भले ही आपको रिलैक्स महसूस कराए, लेकिन कैफीन दिमाग को शांत होने नहीं देता. इससे ब्रेन एक्टिव बना रहता है और नींद आने में दिक्कत होती है. कुछ स्टडीज के अनुसार, रात में कैफीन लेने से impulsive behaviour बढ़ सकता है, जिससे देर रात बेवजह ऑनलाइन शॉपिंग जैसी हरकतें भी होती हैं.

शाम की चाय या कॉफी भले ही आपको रिलैक्स महसूस कराए, लेकिन कैफीन दिमाग को शांत होने नहीं देता. इससे ब्रेन एक्टिव बना रहता है और नींद आने में दिक्कत होती है. कुछ स्टडीज के अनुसार, रात में कैफीन लेने से impulsive behaviour बढ़ सकता है, जिससे देर रात बेवजह ऑनलाइन शॉपिंग जैसी हरकतें भी होती हैं.

सोने से पहले तला-भुना खाना भी परेशानी बढ़ा देता है. इन चीजों में फैट ज्यादा होता है, जो पचने में समय लेता है. इससे रात में भारीपन, गैस और हार्टबर्न जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं, और नींद बार-बार टूटती है.

सोने से पहले तला-भुना खाना भी परेशानी बढ़ा देता है. इन चीजों में फैट ज्यादा होता है, जो पचने में समय लेता है. इससे रात में भारीपन, गैस और हार्टबर्न जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं, और नींद बार-बार टूटती है.

एक हैरान करने वाली बात यह है कि कभी-कभी पानी भी नींद खराब कर सकता है. रात में बहुत ज्यादा पानी पीने से बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है, जिसे nocturia कहा जाता है. इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर लगातार थका हुआ महसूस करता है.

एक हैरान करने वाली बात यह है कि कभी-कभी पानी भी नींद खराब कर सकता है. रात में बहुत ज्यादा पानी पीने से बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है, जिसे nocturia कहा जाता है. इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर लगातार थका हुआ महसूस करता है.

कई लोग सोचते हैं कि शराब नींद लाती है, लेकिन यह एक मिथ है. अल्कोहल शरीर को डिहाइड्रेट करता है और रातभर बार-बार बाथरूम जाने की समस्या पैदा करता है. इससे नींद टूटती है और सुबह उठकर सुस्ती महसूस होती है.

कई लोग सोचते हैं कि शराब नींद लाती है, लेकिन यह एक मिथ है. अल्कोहल शरीर को डिहाइड्रेट करता है और रातभर बार-बार बाथरूम जाने की समस्या पैदा करता है. इससे नींद टूटती है और सुबह उठकर सुस्ती महसूस होती है.

डॉक्टर सलाह देते हैं कि सोने से दो से तीन घंटे पहले ऐसे किसी भी पेय या खाने से दूरी रखें जो दिमाग या पाचन को एक्टिव कर दे. इससे आपकी नींद गहरी होगी और सुबह ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करेंगे.

डॉक्टर सलाह देते हैं कि सोने से दो से तीन घंटे पहले ऐसे किसी भी पेय या खाने से दूरी रखें जो दिमाग या पाचन को एक्टिव कर दे. इससे आपकी नींद गहरी होगी और सुबह ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करेंगे.

इसलिए रात के खाने की प्लानिंग करते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है. कई बार वे चीजें भी आपकी नींद खराब कर देती हैं जिन्हें आप बिल्कुल हार्मलैस  समझते हैं. इस मामले में पानी तक अगर ज्यादा ले लिया जाए तो पूरी रात नींद खुलती रह सकती है.

इसलिए रात के खाने की प्लानिंग करते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है. कई बार वे चीजें भी आपकी नींद खराब कर देती हैं जिन्हें आप बिल्कुल हार्मलैस समझते हैं. इस मामले में पानी तक अगर ज्यादा ले लिया जाए तो पूरी रात नींद खुलती रह सकती है.

Published at : 17 Nov 2025 05:42 PM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

विटामिन B12 की रिपोर्ट एकदम सही, फिर भी महसूस हो रही थकान और पैरों में झुनझुनी तो तुरंत हो जाएं

विटामिन B12 की रिपोर्ट एकदम सही, फिर भी महसूस हो रही थकान और पैरों में झुनझुनी तो तुरंत हो जाएं



Hidden Vitamin B12 Deficiency: कई लोग मान लेते हैं कि अगर उनकी Vitamin B12 की रिपोर्ट नॉर्मल है, तो सेहत भी ठीक ही होगी. लेकिन अपोलो दिल्ली के सर्जन डॉ. अंशुमान कौशल, जो सोशल मीडिया पर The Angry Doc के नाम से जाने जाते हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि नॉर्मल रिपोर्ट हमेशा सच नहीं बताती. बहुत से लोग थकान, पैरों में झनझनाहट, भूलने की आदत और चिड़चिड़ापन जैसी दिक्कतों से जूझते रहते हैं, जबकि उनकी रिपोर्ट बिल्कुल सामान्य लगती है.

फंक्शनल B12 डेफिशिएंसी: जब रिपोर्ट ठीक, पर शरीर में रहती है कमी

डॉ. कौशल ने एक वीडियो में कहा कि “क्या आपने ऐसे लोगों को देखा है जो हमेशा थके रहते हैं, भूलते हैं, डिप्रेस रहते हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट में B12 नॉर्मल आता है? यह फंक्शनल B12 डेफिशियेंसी है.” उन्होंने समझाया कि इसमें खून में B12 मौजूद होता है, लेकिन शरीर की सेल्स उसे इस्तेमाल नहीं कर पातीं. उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि “कागज पर B12 लेवल परफेक्ट दिखता है, लेकिन असल में सेल्स के पास कुछ नहीं होता. जैसे बैंक अकाउंट में पैसे हों, पर ATM कार्ड न हो, दिखने में अमीर, महसूस में कंगाल.”


क्यों भरोसेमंद नहीं होते नॉर्मल टेस्ट?

डॉ. कौशल के मुताबिक, ज्यादातर लैब केवल serum B12 मापकर रिपोर्ट दे देती हैं, जबकि असली कमी सेल्स के स्तर पर होती है. उन्होंने कहा, “B12 और फोलेट बैटमैन-रॉबिन की तरह काम करते हैं. DNA रीपेयर से लेकर RBC बनाने और न्यूरॉन बचाने तक दोनों साथ चलते हैं. इनमें से एक भी कमी हो जाए तो दिमाग ‘गॉथम मोड’ में चला जाता है. तनाव, सुन्न हाथ-पैर, झनझनाहट सब मुफ्त में मिलते हैं.”

किन लोगों में ज्यादा खतरा?

डॉ. कौशल बताते हैं कि कुछ ग्रुप्स पहले से ही रिस्क जोन में आते हैं. इनमें metformin या acidity की दवाएं लेने वाले, दूसरे नम्बर पर वीगेन डाइट पर रहने वाले तीसरे नम्बर पर bariatric surgery करा चुके लोग होते हैं.  उनका कहना है कि अगर लक्षण बने हुए हैं लेकिन रिपोर्ट नॉर्मल है, तो MMA, homocysteine या active B12 की जांच जरूरी है. उन्होंने कहा कि “कई बार टैबलेट असर नहीं करतीं और इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है. समस्या विटामिन की नहीं, ऑब्जर्बेशन की होती है.” फंक्शनल डेफिशियेंसी का मतलब है कि आपकी कोशिकाएं B12 को सही से इस्तेमाल नहीं कर रहीं. नंबरों पर मत जाएं, फंक्शन मायने रखता है. अपने न्यूरॉन्स बचाइए और ऊर्जा के लिए B12 gummies पर भरोसा मत कीजिए. यह बायोकेमिस्ट्री है, बॉलीवुड नहीं.

दूसरे डॉक्टर भी दे चुके हैं चेतावनी

अपोलो के ही न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने भी X पर बताया कि B12 की कमी होने पर थकान, भूलेपन और सुस्ती की शिकायतें आम हैं, और नॉर्मल रिपोर्ट हमेशा पूरी कहानी नहीं बताती. उन्होंने कहा कि खून में मौजूद B12 का बड़ा हिस्सा एक ऐसे प्रोटीन से जुड़ा रहता है, जो विटामिन को सेल तक पहुंचाता ही नहीं. इससे रिपोर्ट में B12 सामान्य दिखता है, लेकिन शरीर को उसका फायदा नहीं मिलता. यही वजह है कि टेस्ट सही आने के बावजूद थकान और ब्रेन फंक्शन से जुड़ी समस्याएं बनी रह सकती हैं.

विटामिन B12 क्या है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, B12 एक जरूरी पोषक तत्व है जो नर्व और रेड ब्लड सेल्स को स्वस्थ रखता है और DNA बनाने में मदद करता है. शरीर इसे खुद नहीं बनाता, इसलिए इसे भोजन से लेना पड़ता है जैसे मांस, मछली, अंडे, डेयरी और फोर्टिफाइड फूड. आम तौर पर वयस्कों को रोज लगभग 2.4 माइक्रोग्राम B12 चाहिए होता है, जबकि गर्भवती और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं की जरूरत इससे अधिक होती है.

इसे भी पढ़ें-Poop Timing Health Risks: सुबह और शाम… कितने बजे पॉटी जाते हैं आप? आपकी सेहत के बारे में बहुत कुछ बताती है टाइमिंग

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator





Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp