मरीज देखते-देखते डॉक्टर को हार्ट अटैक और मौत, मर्दों में कैसे होते हैं हार्ट फेल्योर के लक्षण?
Heart Attack: मरीज देखते-देखते डॉक्टर को हार्ट अटैक और मौत, मर्दों में कैसे होते हैं हार्ट फेल्योर के लक्षण?
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सर्दियों का मौसम आते ही ठंडक, गरम-गरम खाना, धूप सेंकना और कंर्फटेबल कंबल, ये सब हमारी डेली लाइफ में शामिल हो जाता है. इस मौसम में पसीना कम आता है, शरीर ठंडा रहता है और प्यास भी बहुत कम लगती है. अक्सर ऐसा होता है कि हम पूरा दिन गुजार देते हैं लेकिन पानी पीना याद ही नहीं रहता है. जबकि गर्मियों में थोड़ी-सी भी गर्मी लगते ही हम बार-बार पानी पीते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सर्दियों में भी शरीर को उतनी ही मात्रा में पानी चाहिए जितना गर्मियों में पीते हैं. सर्दी में भी आपका शरीर अंदर से उतना ही काम करता है, और हर सिस्टम को सही चलाने के लिए पानी जरूरी है. ऐसे में आइए जानते हैं कि गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में रोज कितना पानी पीना चाहिए और क्यों पानी कम पीने से आपकी सेहत पर असर पड़ सकता है.
गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में रोज कितना पानी पीना चाहिए
सर्दियों में हमें प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को पानी की जरूरत गर्मियों जितनी ही रहती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक सामान्य और हेल्दी व्यक्ति को रोजाना लगभग 8–10 गिलास यानी 2 से 2.5 लीटर पानी पीना चाहिए. जिन लोगों की फिजिकल एक्टिविटी कम होती है और जो ज्यादातर समय घर या ऑफिस में बैठकर काम करते हैं, उनके लिए लगभग 2 लीटर पानी पीना सही माना जाता है. वहीं जो लोग ज्यादा एक्टिव रहते हैं, नियमित एक्सरसाइज करते हैं या बाहर काम करते हैं, उन्हें रोजाना 10 से 12 गिलास यानी 2.5 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए ताकि शरीर हाइड्रेट रहे. वहीं ठंड के मौसम में प्यास कम लगती है, इसलिए पानी पीने को आदत के रूप में अपनाना जरूरी है, नहीं तो शरीर में पानी की कमी आसानी से हो सकती है.
सर्दियों में पानी पीना क्यों जरूरी है
1. शरीर को अंदर से पानी चाहिए, चाहे मौसम कोई भी हो – सर्दियों में पसीना कम आता है, इसलिए धोखा लगता है कि पानी की जरूरत कम है. लेकिन शरीर के हर अंग को सही से काम करने के लिए पानी हमेशा बराबर मात्रा में चाहिए. पानी कम हुआ तो डिहाइड्रेशन हो सकता है जो सर्दियों में चुपचाप हो जाता है और हमें पता भी नहीं चलता है.
2. स्किन को नमी मिलती है – सर्दियों में हवा सूखी होती है, जिससे स्किन फटने, सूखापन और खुजली जैसी समस्याएं बढ़ती हैं. पानी स्किन में नमी बनाए रखता है और उसे हाइड्रेटेड और ग्लोइंग बनाता है.
3. पाचन दुरुस्त रहता है – सर्दियों में लोग तला-भुना, हैवी और मसालेदार खाना ज्यादा खाते हैं. ऐसे खाने से कब्ज होने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में रोजाना सही और पूरा पानी पाचन बेहतर करता है, कब्ज से बचाता है और पेट को हल्का रखता है.
4. इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है – सर्दी-जुकाम और फ्लू सर्दियों में ज्यादा होते हैं. ऐसे में पानी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे इम्यूनिटी बढ़ती है और बार-बार बीमार पड़ने की संभावना कम हो जाती है.
5. शरीर का टेम्परेचर बैलेंस रहता है – पानी शरीर का नेचुरल थर्मोरेगुलेटर है. सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म रखने में पानी अहम भूमिका निभाता है. इसलिए पानी कम होगा तो शरीर जल्दी थकने लगेगा और ठंड ज्यादा महसूस होगी.
6. जोड़ों और मांसपेशियों में जकड़न कम होती है – सर्दियों में कई लोगों को जोड़ों में दर्द, जकड़न या अकड़न महसूस होती है. पानी जोड़ों को लुब्रिकेशन देता है.जिससे जोड़ों की मूवमेंट आसान होती है, दर्द कम होता है और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं.
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Air Pollution Protection: दिल्ली में इस समय हवा काफी दूषित है, कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स का लेवर 600 तक पहुंच गया है. यह काफी खतरनाक लेवल माना जाता है. कई लोगों को डॉक्टर थोड़े दिन बाहर बिताने की सलाह दे रहे हैं. लोगों को सलाह दी जा रही है कि जहां तक हो, बाहर कम निकलें और यदि निकलते हैं, तो मॉस्क लगाकर निकलें.
5 अक्टूबर को शेयर किए गए एक इंस्टाग्राम पोस्ट में डॉ. सोनिया गोयल, जो पिछले पांच साल से फेफड़ों की बीमारियों का इलाज कर रही हैं, उन्होंने यह समझाया कि क्या चेहरे पर लगाया जाने वाला मास्क वाकई प्रदूषण से बचाता है या नहीं.
क्या मास्क सच में प्रदूषण से बचाते हैं?
डॉ. गोयल बताती हैं कि हम सभी प्रदूषण से बचने की उम्मीद में मास्क पहनते हैं, लेकिन उनकी असली प्रभावशीलता कैसी है, यह कम लोग जानते हैं. उनका कहना है कि हर मास्क एक जैसा नहीं होता. अगर आपको लगता है कि कोई भी मास्क चाहे सर्जिकल हो, N95 हो या KN95 प्रदूषण से बचाने के लिए काफी है, तो यह आपकी गलतफहमी दूर करने का सही समय है. यह जानना जरूरी है कि कौन सा मास्क आपको हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों से सच में सुरक्षित रख सकता है.
सर्जिकल मास्क से कितना फायदा?
डॉ. गोयल कहती हैं, “सर्जिकल या कपड़े के मास्क बड़े कणों को तो रोक लेते हैं, लेकिन PM2.5 जैसे बेहद सूक्ष्म और खतरनाक कण आसानी से इनके आर-पार निकल जाते हैं.” यानी जब AQI बहुत खराब होता है, तब ये मास्क पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते.
N95/KN95 मास्क सबसे असरदार
उनके अनुसार N95 या KN95 मास्क सबसे बेहतर विकल्प हैं. “ये मास्क हवा में मौजूद 95 प्रतिशत सूक्ष्म कणों PM2.5, धुआं और फाइन पार्टिकल्स को फिल्टर करने के लिए बनाए गए हैं. लेकिन ये तभी असर दिखाते हैं जब इन्हें सही फिट के साथ पहना जाए, नोज क्लिप ठीक से सेट की जाए और किनारों पर कोई गैप न हो.” मास्क कितनी देर तक काम करता है, यह भी मायने रखता है सिर्फ मास्क पहनना ही काफी नहीं है. “समय के साथ मास्क नमी और गंदगी पकड़ लेते हैं, जिससे उनकी क्षमता कम होती जाती है. अगर आप हाई पॉल्यूशन में ज्यादा समय बाहर रहते हैं, तो मास्क को नियमित रूप से बदलना जरूरी है.” उनकी सलाह है कि मास्क के साथ कुछ और सावधानियां भी अपनानी चाहिए.
इन बातों का भी रखें ध्यान
डॉ. गोयल सुझाती हैं कि सिर्फ मास्क ही काफी नहीं होता. इसके साथ में यह भी करें:
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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30 की उम्र तक आते-आते लगभग हर कोई सफेद बालों की समस्या से जूझने लगता है. कुछ लोगों को यह समस्या इससे पहले भी होने लगती है, जिसे अर्ली ग्रेइंग कहते हैं. हालांकि, सफेद बाल होना आपकी खूबसूरती को कम नहीं करता, लेकिन कई लोग इसे लेकर असहज महसूस करते हैं. इस कारण वे शुरू-शुरू में दिखाई देने वाले कुछ सफेद बालों को तोड़कर छिपाने की कोशिश करते हैं. क्या सच में ऐसा करना सुरक्षित है?
अक्सर हम दूसरों से यह भी सुनते हैं कि अगर एक सफेद बाल तोड़ दिया तो उसके आसपास और भी सफेद बाल उगने लगते हैं. क्या वाकई ऐसा होता है? यह सवाल सबसे ज्यादा लोगों को परेशान करता है. तो आइए जानते हैं क्या 1 सफेद बाल तोड़ने से बाकी बाल भी सफेद हो जाते हैं.
क्या एक सफेद बाल तोड़ने से बाकी बाल भी सफेद हो जाते हैं?
सफेद बाल तोड़ने से बाकी बाल भी सफेद नहीं होते हैं. यह पूरी तरह मिथ है. स्किन और बालों के विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि एक सफेद बाल को तोड़ने से बाकी बालों का रंग बदलने वाला नहीं है. हर बाल अपनी अलग जड़ यानी हेयर फॉलिकल में बनता है और हर फॉलिकल की अपनी एक कलर फैक्टरी होती है जिसे मेलानोसाइट्स कहते हैं. ये मेलानोसाइट्स ही मेलेनिन बनाते हैं, जिससे बाल काले या भूरे दिखते हैं.
जब किसी फॉलिकल में मेलेनिन बनना कम हो जाता है, तभी उस फॉलिकल से सफेद बाल निकलते हैं. इसलिए एक सफेद बाल तोड़ने से दूसरे फॉलिकल्स पर कोई असर नहीं होता है. बाकी काले बाल सिर्फ इसलिए सफेद नहीं होते कि आपने एक बाल उखाड़ दिया जाता है. उस जगह वही बाल दोबारा उगेगा और अगर वह फॉलिकल अब मेलेनिन नहीं बना रहा तो बाल फिर से सफेद ही आएगा. हालांकि, सफेद बाल तोड़ना सही नहीं माना जाता है क्योंकि इसके कारण कई नुकसान और होते हैं
सफेद बाल तोड़ने के असली नुकसान
1. संक्रमण यानी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है – बार-बार बालों को उखाड़ने से फॉलिकल के आसपास की जगह कमजोर और सेंसिटिव हो जाती है. वहां बैक्टीरिया आसानी से पहुंच जाते हैं, जिससे लालपन, सूजन, दर्द पिंपल जैसे दाने हो सकते हैं. लंबे समय तक ऐसा करने से फॉलिकल इंफेक्ट होकर खराब भी हो सकता है.
2. इनग्रोन हेयर की समस्या – जब आप एक बाल को जोर से खींचकर निकालते हैं, तो कभी-कभी बाल की बढ़ने की दिशा बदल जाती है. इसकी वजह से नया बाल बाहर आने के बजाय स्किन के अंदर ही मुड़ जाता है, जिससे लाल उभार, खुजली, दर्द और जलन हो सकती है. इसे इनग्रोन हेयर कहते हैं.
3. स्कैल्प पर जलन और इरिटेशन – बार-बार बाल खींचने से उस जगह की स्किन पर चोट लग जाती है. खासकर सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को खुजली, चुभन और लाल धब्बे ज्यादा महसूस होते हैं.
4. हाइपरपिग्मेंटेशन और निशान – कुछ लोग बार-बार बाल उखाड़ते-उखाड़ते उस जगह पर दाग या काले निशान बना लेते हैं. फॉलिकल पर दबाव पड़ने से स्किन में पिगमेंटेशन बढ़ जाता है.
5. फॉलिकल कमजोर होने से बाल कम उगना – लगातार खींचने की वजह से फॉलिकल इतना कमजोर हो सकता है कि उस जगह बाल उगना कम हो जाए या बंद भी हो जाए. इससे पैची हेयर ग्रोथ हो सकती है.
ग्रे हेयर की सही देखभाल कैसे करें?
1. बालों को अच्छी तरह मॉइस्चराइज करें – सफेद या ग्रे बाल सामान्य बालों की तुलना में ज्यादा सूखे हो जाते हैं, इसलिए मॉइस्चराइजिंग शैम्पू, कंडीशनर,. हेयर सीरम, नारियल या ऑलिव ऑयल का यूज करें.
2. धूप से बचाएं – तेज सूरज से बाल और ज्यादा खराब दिखने लगते हैं. इसलिए स्कार्फ, कैप, यूवी प्रोटेक्ट स्प्रे का यूज करें.
3. समय-समय पर ट्रिमिंग कराएं – ट्रिमिंग से स्प्लिट एंड्स कम होते हैं, स्ट्रक्चर बेहतर होता है, बाल सॉफ्ट और अच्छे दिखते हैं.
4. षक तत्व लें – बालों के रंग और मजबूती के लिए कुछ न्यूट्रिएंट बहुत जरूरी हैं. जैसे विटामिन B12, विटामिन E, आयरन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन. इससे बाल मजबूत बनते हैं और झड़ना कम होता है.
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Skin Cancer: स्किन कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक है. भारत में भी स्किन कैंसर के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, यह उन कैंसरों में शामिल है, जिनके शुरुआती लक्षण स्किन पर साफ दिखाई देने लगते हैं. इसलिए समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए तो स्किन कैंसर का इलाज आसान और काफी हद तक सफल हो सकता है.
हालांकि, स्किन कैंसर को लेकर समस्या तब बढ़ जाती है, जब लोग स्किन पर होने वाले शुरुआती बदलाव को नजरअंदाज कर देते हैं और इसे नॉर्मल स्किन से जुड़ी समस्या समझ लेते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि स्किन कैंसर में कौन से लक्षण दिखाई देते हैं, जिन्हें आपको बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
क्या होते हैं स्किन कैंसर के शुरुआती लक्षण?
ज्यादातर लोगों को अपने शरीर पर तिल, झाइयों और स्किन पर मौजूद धब्बों के बारे में जानकारी होती है. स्किन कैंसर के शुरुआती लक्षण इन्हीं में बदलाव के रूप में सबसे पहले दिखाई देते हैं. अगर आपकी स्किन पर कोई नया धब्बा बन जाए या पुराना तिल अचानक रंग या बनावट बदलने लगे तो यह स्किन कैंसर का सबसे पहला लक्षण माना जाता है.
ABCDE नियम से भी कर सकते हैं स्किन कैंसर की पहचान
स्किन कैंसर के अन्य शुरुआती लक्षण
किसे होता है स्किन कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा?
एक्सपर्ट्स के अनुसार उन लोगों को स्किन कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा होता है, जिनकी स्किन बहुत गोरी होती है, जो लंबे समय तक धूप में रहते हैं या जिनके परिवार में पहले यह बीमारी रही हो. वहीं बुजुर्ग, कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीज और जिनके शरीर में बहुत सारे तिल हो उनमें भी स्किन कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है. ऐसे में एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आपकी स्किन पर अगर कोई भी असामान्य बदलाव दिखाई दें, घांव समय पर न भरें या किसी तिल में अचानक बदलाव हो तो इस हलके में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Hair Wash During Periods: हर महीने महिलाओं को पीरियड्स आते हैं. यह एक पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है. इसमें यूट्रस की परत से रक्त और ऊतक शरीर से बाहर निकलते हैं. पुराने समय में पीरियड्स के दौरान महिलाओं के लिए कई तरह के नियम बना दिए गए थे. उन्हीं में से एक था. पीरियड्स के पहले तीन दिन बाल न धोना. कई जगहों पर माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान शरीर से गंदगी निकलती है और इस समय शरीर का गर्म रहना जरूरी होता है ताकि ब्लीडिंग ठीक से हो सके.
क्योंकि हर महिला का पीरियड साइकिल अलग होता है, किसी की ब्लीडिंग तीन दिन चलती है, किसी की पांच, तो किसी की सात. ऐसे में लोगों का मानना था कि पहले तीन दिन बाल धोने से शरीर का तापमान कम होता है और इससे ब्लीडिंग रुक सकती है या कम हो सकती है, जिससे आगे चलकर कई दिक्कतें हो सकती हैं. लेकिन साइंस दृष्टि से ये बातें सच नहीं हैं. पीरियड्स के दौरान बाल धोने या किसी खास दिन बाल धोने से ब्लड फ्लो पर कोई असर नहीं पड़ता. यह एक आम मिथ है, जिसे मेडिकल साइंस सपोर्ट नहीं करता. महिलाएं अपने पीरियड्स में भी बिल्कुल सामान्य तरीके से सफाई और नहाने की आदत बनाए रख सकती हैं.
सबसे पहले पीरियड को समझ लीजिए
अमेरिका के National Institute of Child Health and Human Development (NICHD) के अनुसार, पीरियड में यूट्र्स की परत से निकलने वाले रक्त और टिश्यू का सामान्य प्रवाह है, जो हर महीने महिलाओं केमेनस्ट्रुअल साइकिल का हिस्सा होता है. यह प्रक्रिया मेनार्क (पहला पीरियड आमतौर पर 10 से 16 वर्ष की उम्र में) से लेकर मेनोपॉज (45 से 55 वर्ष के बीच) तक चलती है. सामान्यत: एक पीरियड लगभग पांच दिन तक रहता है.
मेंस्ट्रुअल साइकिल क्या है
NICHD बताता है कि मेंस्ट्रुअल साइकिल एक मासिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर एक अंडा रिलीज करता है, गर्भाशय की परत गर्भधारण की तैयारी में मोटी होती है, और गर्भ न होने पर यही परत रक्त के रूप में बाहर निकल जाती है. औसतन मासिक चक्र 28 दिनों का होता है, लेकिन यह महिलाओं और उम्र के अनुसार बदलता रहता है. कम उम्र की लड़कियों में यह 21 से 45 दिन और वयस्क महिलाओं में 21 से 35 दिन तक हो सकता है.
स्कैल्प की सेहत क्यों जरूरी है
CDC के एक्सपर्ट के अनुसार, स्कैल्प प्राकृतिक तेल यानी सीबम बनाता है, जो त्वचा को नमी देने और संक्रमण से बचाने का काम करता है. अगर बाल लंबे समय तक न धोए जाए, तो सीबम, गंदगी, पसीना और प्रोडक्ट बिल्ड-अप जमा होने लगता है. इससे बाल चिपचिपे दिखते हैं, बदबू आ सकती है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. एक स्टडी (Journal of Skin Appendage Disorders) में पाया गया कि बाल न धोने से स्कैल्प पर जमा सीबम रासायनिक रूप से बदलने लगता है. इसमें मौजूद फ्री फैटी एसिड और ऑक्सीडाइज लिपिड त्वचा को इरिटेट कर सकते हैं. अध्ययन में यह भी पाया गया कि कम बार बाल धोने वालों में डैंड्रफ और अन्य स्कैल्प समस्याएं अधिक देखी गईं.
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