हर किसी के लिए हेल्दी नहीं होता नारियल पानी, इन 5 लोगों को हमेशा करना चाहिए अवॉयड

हर किसी के लिए हेल्दी नहीं होता नारियल पानी, इन 5 लोगों को हमेशा करना चाहिए अवॉयड


नारियल पानी को हाइड्रेशन और ताजगी के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें प्राकृतिक रूप से पोटेशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स मौजूद होते हैं, जो शरीर के हाइड्रेट रहने के लिए बेहद जरूरी हैं. पोषक तत्वों से भरपूर नारियल पानी को बच्चे से लेकर बड़े तक पीना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं यह हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता है.  ने बताया है कि किन लोगों के लिए नारियल पानी हेल्दी नहीं होता है.

मशहूर डायटीशियन रुजुता दिवेकर के अनुसार, किडनी डिजीज वाले लोगों को इसमें मौजूद ज्यादा पोटैशियम अवॉयड करना चाहिए. इसी तरह लो ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के पेशेंट्स को भी इसे केयरफुली पीना चाहिए. डाइजेस्टिव प्रॉब्लम या नारियल से एलर्जी वाले लोगों को भी इसे पीने से अवॉयड करना चाहिए. किसी भी हेल्थ कंडीशन में इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से एडवाइस लेना सबसे अच्छा है.

इन लोगों को नारियल पानी से बचना चाहिए

किडनी के पेशेंट्स: नारियल पानी में पोटैशियम बहुत ज्यादा होता है. अगर आपको किडनी की बीमारी है, तो आपकी किडनी एक्स्ट्रा पोटैशियम को फिल्टर नहीं कर पाती. इससे शरीर में पोटैशियम का लेवल बढ़ सकता है, जो हार्टबीट को अन रेगुलर कर सकता है और हार्ट से रिलेटेड प्रॉब्लम बढ़ा सकता है. 

ब्लड प्रेशर की दवा लेने वाले लोग: नारियल पानी ब्लड प्रेशर को कम करने में हेल्प करता है. अगर आप पहले से ही ब्लड प्रेशर कम करने की मेडिसिन ले रहे हैं, तो नारियल पानी पीने से आपका ब्लड प्रेशर और भी ज्यादा लो हो सकता है, जिससे चक्कर आना या बेहोशी जैसी प्रॉब्लम हो सकती हैं.

डायबिटीज के पेशेंट्स: नारियल पानी में नेचुरल शुगर होती है. अगर आपको डायबिटीज है और आप इंसुलिन या दवाएं ले रहे हैं, तो ज्यादा नारियल पानी पीने से आपका ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. इसे पीने से पहले अपने डॉक्टर या डायटिशियन से सलाह जरूर लें.

नट एलर्जी वाले लोग: नारियल वैसे तो एक फल है, लेकिन कुछ लोग जिन्हें ट्री नट एलर्जी है. उन्हें नारियल पानी से भी एलर्जी रिएक्शन हो सकता है. ऐसे लोगों को स्किन पर रैशेज, पेट में प्रॉब्लम या रेयर केसेस में एनाफिलेक्सिस हो सकता है.

हाई सोडियम की जरूरत वाले एथलीट्स: एथलीट्स के लिए एक्सरसाइज के बाद हाइड्रेशन जरूरी होता है, लेकिन नारियल पानी में पोटैशियम ज्यादा और सोडियम कम होता है. ज्यादा पसीना आने पर शरीर से सोडियम कम हो जाता है. इसलिए, हाई-परफॉर्मेंस वाले एथलीट्स को एक बैलेंस्ड स्पोर्ट्स ड्रिंक पीना चाहिए, जिसमें सोडियम और कार्बोहाइड्रेट दोनों हों.

कुल मिलाकर नारियल पानी हेल्दी है, पर अगर आपको कोई हेल्थ इशू है तो इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें.

ये भी पढ़ें: साइलेंट डेंजर है लीकी हार्ट वॉल्व, डॉक्टर से समझें इसके लक्षण-खतरे और बचाव

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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आजमा लें माधवन की ये 3 देसी हैबिट्स, सिर्फ 21 दिन में ग्लो करेगा फेस

आजमा लें माधवन की ये 3 देसी हैबिट्स, सिर्फ 21 दिन में ग्लो करेगा फेस


एक्टर आर माधवन ने अपनी फिटनेस और यंग लुक का राज शेयर किया है, जिससे उनके फैन्स काफी इंस्पायर हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि अपनी बॉडी में बड़ा बदलाव लाने के लिए उन्हें न तो जिम की जरूरत पड़ी, न ही किसी सर्जरी या दवा की. सिर्फ 21 दिनों में उन्होंने अपनी कुछ ट्रेडिशनल हैबिट्स और सिंपल लाइफस्टाइल को अपनाकर यह शानदार ट्रांसफॉर्मेशन हासिल किया.

माधवन ने अपने सीक्रेट्स बताते हुए कहा कि वह घर का बना फ्रेश और सादा खाना खाते हैं और इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसी आदतों को फॉलो करते हैं. वह रात का खाना जल्दी खा लेते हैं और सोने से पहले फोन या टीवी से दूर रहते हैं. माधवन का यह तरीका साबित करता है कि महंगे जिम रूटीन या एक्सट्रीम डाइट के बिना भी हेल्दी और फिट रहा जा सकता है. बस जरूरत है तो कुछ सिंपल और नेचुरल आदतों को अपनाने की.

माधवन की ट्रेडिशनल हैबिट्स और नेचुरल तरीका

माधवन ने बताया कि उनकी फिटनेस और जवां दिखने का राज बचपन से ही अपनाई गई उनकी कुछ खास आदतें हैं. उन्होंने कहा कि उनका रूटीन बेहद सरल है, जिसमें घर का बना ताजा खाना, नारियल तेल का नियमित उपयोग और सप्ताह में एक बार तेल से स्नान करना शामिल है. माधवन का मानना है कि इन पारंपरिक और प्राकृतिक तरीकों से ही उन्हें बिना किसी आधुनिक जिम या सर्जरी के खुद को फिट रखने में मदद मिली है.

  • स्किनकेयर: वह हर संडे को ऑयल बाथ (तिल के तेल से) करते हैं. बाकी दिनों में कोकोनट ऑयल लगाते हैं. उनका मानना है कि मॉर्निंग सन और क्लीन लाइफस्टाइल ने उनकी स्किन को यंग और रिंकल-फ्री रखा है.
  • खाने की आदतें: उन्हें हमेशा फ्रेश और होममेड फूड पसंद है. उन्हें फास्ट फूड, पैकेज्ड आइटम्स और रीहीटेड फूड पसंद नहीं है. वह अपनी मां के हाथों से बना खाना जैसे दाल, सब्जी और चावल ही खाते हैं.
  • बॉडी की सुनें: माधवन टाइम देखकर नहीं, बल्कि भूख फील होने पर ही खाते हैं. वह इस आदत को खुद को यंग और हैप्पी रखने का क्रेडिट देते हैं. वह फ्राइड फूड और अल्कोहल से भी दूर रहते हैं. 

माधवन का 21 डेज का 8 पॉइंट रूटीन

माधवन ने बताया कि अपनी डाइट और रूटीन में डिसिप्लिन लाकर ही उन्होंने 21 दिनों में खुद को बदला. उनका 8 पॉइंट रूटीन इस तरह है.

  1. इंटरमिटेंट फास्टिंग: उन्होंने टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग को फॉलो किया.
  2. खाने को अच्छी तरह चबाना: उन्होंने हर बाइट को 45-60 टाइम्स चबाया, जिससे डाइजेशन बेहतर हुआ और ओवरईटिंग से बचे.
  3. मॉर्निंग वॉक: उन्होंने इंटेंस वर्कआउट के बजाय रोज लंबी वॉक की.
  4. दोपहर 3 बजे के बाद रॉ फूड नहीं: बेहतर डाइजेशन के लिए उन्होंने शाम को कच्चे फ्रूट्स और सलाद से परहेज किया.
  5. शाम 6:45 बजे से पहले लास्ट मील: रात का डिनर जल्दी खाकर उन्होंने बॉडी को सोने से पहले डाइजेस्ट करने का टाइम दिया.
  6. सोने से पहले स्क्रीन टाइम नहीं: अच्छी स्लीप के लिए वह सोने से कम से कम 90 मिनट पहले स्क्रीन से दूर रहते थे.
  7. खूब सारा फ्लूइड पीना: हाइड्रेशन उनके रूटीन का एक इंपॉर्टेंट पार्ट रहा.
  8. सिंपल और डाइजेस्ट होने वाला फूड: उनके खाने में बिना किसी प्रोसेस्ड या आर्टिफिशियल इंग्रीडिएंट्स के सिंपल और पका हुआ खाना शामिल था.

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आपकी अंडरवियर पर दिख रहे हैं ये निशान तो हो जाइए सावधान, महिलाओं के वेजाइनल डिस्चार्ज का रंग

आपकी अंडरवियर पर दिख रहे हैं ये निशान तो हो जाइए सावधान, महिलाओं के वेजाइनल डिस्चार्ज का रंग


Vaginal Discharge Color: महिलाओं के शरीर में होने वाले हर छोटे-बड़े बदलाव का एक मतलब होता है. खासकर जब बात वेजाइनल हेल्थ की हो, तो अक्सर शर्म और झिझक के कारण महिलाएं कई जरूरी संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं. लेकिन क्या आप जानती हैं कि आपकी अंडरवियर पर नजर आने वाले डिस्चार्ज के निशान भी आपके स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में बहुत कुछ बताते हैं? 

डॉ. तनया नरेंद्र बताती हैं कि, यह डिस्चार्ज योनि को साफ रखने और संक्रमण से बचाने का काम करता है. हालांकि, जब इसका रंग, गंध या मात्रा असामान्य हो जाती है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है. 

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सफेद और गाढ़ा डिस्चार्ज

अगर डिस्चार्ज पनीर जैसे गाढ़े रूप में हो रहा है, तो यह फंगल इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है. इसमें खुजली और जलन भी महसूस हो सकती है.

पीला या हरा डिस्चार्ज

पीले या हरे रंग का डिस्चार्ज बैक्टीरियल इन्फेक्शन या एसटीडी का संकेत हो सकता है. इसमें बदबू भी हो सकती है.

भूरा या खून जैसा डिस्चार्ज

अगर आपकी अंडरवियर पर हल्का खून या भूरा रंग दिख रहा है, तो यह पीरियड्स के आसपास सामान्य हो सकता है. लेकिन अगर ऐसा बार-बार या बिना वजह हो, तो यह गर्भाशय या सर्विक्स संबंधी समस्या का इशारा हो सकता है.

साफ और पानी जैसा डिस्चार्ज

ये सामान्य है और अक्सर ओव्यूलेशन के समय होता है. इससे घबराने की जरूरत नहीं होती.

डॉ. तनया कहती हैं कि, “अंडरवियर पर नजर आने वाले डिस्चार्ज के निशान को नजरअंदाज न करें. यह आपके शरीर का एक तरीका होता है, यह बताने का कि अंदर कुछ सही नहीं चल रहाा. हमेशा सूती अंडरवियर पहनें

स्वच्छता है सबसे जरूरी

  • हमेशा सूती अंडरवियर पहनें
  • टाइट कपड़ों से बचें
  • पीरियड्स के दौरान और सामान्य दिनों में भी स्वच्छता बनाए रखें
  • पैंटी लाइनर का इस्तेमाल सोच-समझकर करें

महिलाओं के शरीर में बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन उन संकेतों को समझना और समय पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. वेजाइनल डिस्चार्ज का रंग, बनावट और गंध आपकी सेहत से जुड़े कई राज खोल सकता है. इसलिए अगली बार जब आपकी अंडरवियर पर कोई निशान नजर आए, तो उसे नजरअंदाज न करें.

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किस विटामिन की कमी से सुन्न पड़ जाते हैं हाथ-पैर, कहीं आपके साथ तो नहीं होता ऐसा

किस विटामिन की कमी से सुन्न पड़ जाते हैं हाथ-पैर, कहीं आपके साथ तो नहीं होता ऐसा


Numbness in Hand and Feet: क्या आपको भी कभी अचानक ऐसा महसूस होता है कि ,आपके हाथ या पैर सुन्न हो गए हैं? जैसे किसी ने चुटकी ली हो, लेकिन आपको एहसास ही न हो. कुछ पल बाद झनझनाहट या सुई चुभने जैसा दर्द लगता है. ऐसा होना कभी-कभी सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो यह आपके शरीर में किसी आवश्यक पोषक तत्व की कमी का संकेत हो सकता है. 

डॉ. शुचिन बजाज बताते हैं कि, बार-बार हाथ-पैर सुन्न पड़ना केवल थकान या गलत पॉश्चर की वजह से नहीं होता, बल्कि यह विटामिन B12 की कमी का संकेत भी हो सकता है. आइए जानते हैं कि, विटामिन B12 की कमी शरीर को कैसे प्रभावित करती है और इससे कैसे बचा जा सकता है.

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विटामिन B12 की कमी क्यों होती है?

विटामिन B12 एक ज़रूरी पोषक तत्व है जो शरीर को लाल रक्त कोशिकाएं बनाने, नर्वस सिस्टम को सही तरीके से काम करने में मदद करता है. इसकी कमी उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जो शुद्ध शाकाहारी होते हैं, क्योंकि B12 का मुख्य स्रोत मांस, अंडे, मछली और डेयरी प्रोडक्ट्स होते हैं.

  • हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
  • थकान और कमजोरी
  • स्मरण शक्ति में कमी
  • चक्कर आना
  • डिप्रेशन या मूड स्विंग्स
  • जीभ में सूजन या मुंह में छाले

समाधान क्या है?

  • अपने भोजन में अंडा, दूध, दही, पनीर, मछली, चिकन आदि शामिल करें. यदि आप शुद्ध शाकाहारी हैं, तो B12 सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह से लें.
  • गंभीर मामलों में डॉक्टर विटामिन B12 के इंजेक्शन या गोली के रूप में सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दे सकते हैं.
  • समय-समय पर ब्लड टेस्ट करवाकर B12 के स्तर की जांच करवाना जरूरी है, खासकर अगर आप थकान, सुन्नता या चक्कर जैसी समस्या महसूस करते हैं.

हाथ-पैरों का बार-बार सुन्न होना या झनझनाना एक सामान्य सी लगने वाली समस्या हो सकती है, लेकिन इसके पीछे छिपा कारण गंभीर हो सकता है. विटामिन B12 की कमी न सिर्फ नसों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आपकी संपूर्ण सेहत पर असर डालती है। इसलिए अपने शरीर के इन छोटे-छोटे संकेतों को नज़रअंदाज न करें और समय रहते समाधान करें.

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साइलेंट डेंजर है लीकी हार्ट वॉल्व,  डॉक्टर से समझें इसके लक्षण-खतरे और बचाव

साइलेंट डेंजर है लीकी हार्ट वॉल्व, डॉक्टर से समझें इसके लक्षण-खतरे और बचाव


ऐसी ही एक कंडीशन है लीकी हार्ट वॉल्व या हार्ट वॉल्व रिगर्जिटेशन, जिसकी वजह से हर हार्टबीट के साथ ब्लड पीछे की तरफ फ्लो होने लगता है. बहुत से लोग कई साल तक यह जाने बिना जीते रहते हैं कि उनके हार्ट का वॉल्व ठीक से काम नहीं कर रहा है.

हार्ट एक्सपर्ट डॉ. सईद अफरीदी का कहना है कि वॉल्व से जुड़ी हार्ट डिजीज को अक्सर लोग अंडर-डाइग्नोस और अंडर-ट्रीटेड रखते हैं. इसका रिस्क इसलिए ज्यादा है, क्योंकि इसके सिम्पटम्स क्लियर नहीं होते और नॉर्मल थकान जैसे लग सकते हैं. हालांकि, एक छोटा सा लीक भी हार्ट पर स्ट्रेस डाल सकता है और कॉम्प्लीकेशन्स का रिस्क बढ़ा सकता है. हार्ट की लॉन्ग-टर्म हेल्थ को बचाने के लिए यह जानना जरूरी है कि कब एक्शन लेना है.

हार्ट एक्सपर्ट डॉ. सईद अफरीदी का कहना है कि वॉल्व से जुड़ी हार्ट डिजीज को अक्सर लोग अंडर-डाइग्नोस और अंडर-ट्रीटेड रखते हैं. इसका रिस्क इसलिए ज्यादा है, क्योंकि इसके सिम्पटम्स क्लियर नहीं होते और नॉर्मल थकान जैसे लग सकते हैं. हालांकि, एक छोटा सा लीक भी हार्ट पर स्ट्रेस डाल सकता है और कॉम्प्लीकेशन्स का रिस्क बढ़ा सकता है. हार्ट की लॉन्ग-टर्म हेल्थ को बचाने के लिए यह जानना जरूरी है कि कब एक्शन लेना है.

हार्ट वॉल्व रिगर्जिटेशन तब होता है, जब हार्ट के चार वॉल्व्स में से कोई एक टाइटली बंद नहीं हो पाता. इससे उसमें

हार्ट वॉल्व रिगर्जिटेशन तब होता है, जब हार्ट के चार वॉल्व्स में से कोई एक टाइटली बंद नहीं हो पाता. इससे उसमें “लीकेज” होती है और हर बार वॉल्व बंद होने पर कुछ ब्लड गलत डायरेक्शन में बहता है. वॉल्व एक वन वे डोर की तरह होते हैं, जो ब्लड को पीछे बहने से रोकते हैं.

एक छोटा सा लीक हार्ट की हेल्थ को अफेक्ट नहीं कर सकता, लेकिन अगर लीक मॉडरेट या सीरियस हो तो इससे हार्ट फेलियर या हार्ट का साइज बढ़ सकता है. इस कंडीशन की सीरियसनेस इस बात पर डिपेंड करती है कि कितना ब्लड गलत तरीके से फ्लो हो रहा है.

एक छोटा सा लीक हार्ट की हेल्थ को अफेक्ट नहीं कर सकता, लेकिन अगर लीक मॉडरेट या सीरियस हो तो इससे हार्ट फेलियर या हार्ट का साइज बढ़ सकता है. इस कंडीशन की सीरियसनेस इस बात पर डिपेंड करती है कि कितना ब्लड गलत तरीके से फ्लो हो रहा है.

लीकी हार्ट वॉल्व के सिम्पटम्स शुरुआत में हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ बिगड़ते जाते हैं. इनमें अक्सर चेस्ट पेन या प्रेशर महसूस होना शामिल है. इसके साथ ही, लगातार खांसी आना, खासकर जब आप लेटे हों, क्योंकि यह फेफड़ों में फ्लूइड जमा होने का सिग्नल हो सकता है.

लीकी हार्ट वॉल्व के सिम्पटम्स शुरुआत में हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ बिगड़ते जाते हैं. इनमें अक्सर चेस्ट पेन या प्रेशर महसूस होना शामिल है. इसके साथ ही, लगातार खांसी आना, खासकर जब आप लेटे हों, क्योंकि यह फेफड़ों में फ्लूइड जमा होने का सिग्नल हो सकता है.

खराब ब्लड सर्कुलेशन की वजह से लगातार थकान और वीकनेस महसूस होना भी एक आम लक्षण है. वहीं, तेज या इर्रेगुलर हार्टबीट भी यह संकेत दे सकती है कि आपका हार्ट लीक हुए वॉल्व को मैनेज करने के लिए ज्यादा मेहनत कर रहा है.

खराब ब्लड सर्कुलेशन की वजह से लगातार थकान और वीकनेस महसूस होना भी एक आम लक्षण है. वहीं, तेज या इर्रेगुलर हार्टबीट भी यह संकेत दे सकती है कि आपका हार्ट लीक हुए वॉल्व को मैनेज करने के लिए ज्यादा मेहनत कर रहा है.

इसके अलावा एक्सरसाइज या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस लेने में दिक्कत होना एक कॉमन सिम्प्टम है. खराब ब्लड सर्कुलेशन की वजह से पैरों और एंकल में सूजन भी दिख सकती है.

इसके अलावा एक्सरसाइज या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस लेने में दिक्कत होना एक कॉमन सिम्प्टम है. खराब ब्लड सर्कुलेशन की वजह से पैरों और एंकल में सूजन भी दिख सकती है.

लीकी हार्ट वॉल्व के लक्षण हमेशा नजर नहीं आते हैं, लेकिन इसका इफेक्ट टाइम के साथ धीरे-धीरे बढ़ सकता है. यहां तक कि हल्के सिम्प्टम्स भी यह बता सकते हैं कि हार्ट पर स्ट्रेस है. डाइग्नोसिस टूल्स और ट्रीटमेंट ऑप्शंस की मदद से इस दिक्कत का पता पहले लगाने में मदद मिलती है. असामान्य फिजिकल चेंजेस पर ध्यान देना और फॉलो-अप को प्रायोरिटी देना कॉम्प्लीकेशन को रोकने और हार्ट की लॉन्ग टर्म हेल्थ को सपोर्ट करने में हेल्प कर सकता है.

लीकी हार्ट वॉल्व के लक्षण हमेशा नजर नहीं आते हैं, लेकिन इसका इफेक्ट टाइम के साथ धीरे-धीरे बढ़ सकता है. यहां तक कि हल्के सिम्प्टम्स भी यह बता सकते हैं कि हार्ट पर स्ट्रेस है. डाइग्नोसिस टूल्स और ट्रीटमेंट ऑप्शंस की मदद से इस दिक्कत का पता पहले लगाने में मदद मिलती है. असामान्य फिजिकल चेंजेस पर ध्यान देना और फॉलो-अप को प्रायोरिटी देना कॉम्प्लीकेशन को रोकने और हार्ट की लॉन्ग टर्म हेल्थ को सपोर्ट करने में हेल्प कर सकता है.

Published at : 05 Aug 2025 08:56 AM (IST)

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