सेहत के लिए खतरनाक है अरबी, जानें इसे खाने के 7 बड़े नुकसान

सेहत के लिए खतरनाक है अरबी, जानें इसे खाने के 7 बड़े नुकसान


पेट में गैस और सूजन: अरबी में मौजूद स्टार्च और फाइबर पाचन में भारी होते हैं. ज्यादा खाने से पेट फूलने, गैस बनने और भारीपन की शिकायत हो सकती है.

कब्ज की समस्या: अगर अरबी को ठीक से नहीं पकाया गया हो तो यह कब्ज का कारण बन सकती है. इसकी चिपचिपी बनावट आंतों में अवरोध पैदा कर सकती है, जिससे मल त्याग में कठिनाई होती है.

कब्ज की समस्या: अगर अरबी को ठीक से नहीं पकाया गया हो तो यह कब्ज का कारण बन सकती है. इसकी चिपचिपी बनावट आंतों में अवरोध पैदा कर सकती है, जिससे मल त्याग में कठिनाई होती है.

स्किन एलर्जी का खतरा: कुछ लोगों को अरबी खाने के बाद स्किन पर खुजली, रैश या जलन जैसी एलर्जी हो सकती है. इसका कारण होता है इसमें मौजूद कैल्शियम ऑक्सलेट, जो स्किन को इरिटेट कर सकता है.

स्किन एलर्जी का खतरा: कुछ लोगों को अरबी खाने के बाद स्किन पर खुजली, रैश या जलन जैसी एलर्जी हो सकती है. इसका कारण होता है इसमें मौजूद कैल्शियम ऑक्सलेट, जो स्किन को इरिटेट कर सकता है.

जोड़ों में दर्द: अरबी में ऑक्सालेट कंटेंट ज्यादा होता है, जो यूरिक एसिड बढ़ाकर गठिया या जोड़ों के दर्द को बढ़ा सकता है. गठिया के मरीज़ों को अरबी से परहेज़ करना चाहिए.

जोड़ों में दर्द: अरबी में ऑक्सालेट कंटेंट ज्यादा होता है, जो यूरिक एसिड बढ़ाकर गठिया या जोड़ों के दर्द को बढ़ा सकता है. गठिया के मरीज़ों को अरबी से परहेज़ करना चाहिए.

वजन बढ़ने का खतरा: अरबी में कैलोरी और कार्ब्स की मात्रा ज़्यादा होती है. अगर आप वजन कंट्रोल कर रहे हैं, तो इसका ज़्यादा सेवन आपके वेट लॉस प्लान को नुकसान पहुंचा सकता है.

वजन बढ़ने का खतरा: अरबी में कैलोरी और कार्ब्स की मात्रा ज़्यादा होती है. अगर आप वजन कंट्रोल कर रहे हैं, तो इसका ज़्यादा सेवन आपके वेट लॉस प्लान को नुकसान पहुंचा सकता है.

किडनी स्टोन का रिस्क:अरबी में पाया जाने वाला कैल्शियम ऑक्सलेट शरीर में जमा होकर किडनी स्टोन का कारण बन सकता है.किडनी से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को अरबी से बचना चाहिए.

किडनी स्टोन का रिस्क:अरबी में पाया जाने वाला कैल्शियम ऑक्सलेट शरीर में जमा होकर किडनी स्टोन का कारण बन सकता है.किडनी से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को अरबी से बचना चाहिए.

शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव:अरबी में फाइबर होते हैं, लेकिन इसके हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा सकता है. जो डायबिटिक मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है.

शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव:अरबी में फाइबर होते हैं, लेकिन इसके हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा सकता है. जो डायबिटिक मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है.

Published at : 04 Aug 2025 05:55 PM (IST)

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हर दिन झड़ रहे हैं बाल… कहीं आपको ये बीमारी तो नहीं? तुरंत भागें डॉक्टर के पास

हर दिन झड़ रहे हैं बाल… कहीं आपको ये बीमारी तो नहीं? तुरंत भागें डॉक्टर के पास


अगर आपके बाल अचानक झड़ने लगे हैं या हर दिन कंघी में बड़ी मात्रा में बाल नजर आ रहे हैं तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. डॉक्टर्स के अनुसार, यह सिर्फ मौसम का असर या तनाव नहीं बल्कि गंभीर मेडिकल कंडीशन एलोपेसिया का लक्षण हो सकता है. एलोपेसिया यानी ज्यादा बाल झड़ना अब एक सामान्य समस्या बन चुकी हैं जो कि किसी भी उम्र में हो सकती है. इससे समय रहते पहचाना और इलाज कराना जरूरी है वरना बालों की जड़ों को स्थाई नुकसान हो सकता है. 

समय पर पहचान और इलाज जरूरी 

कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर किसी के कुछ बोल रोजाना झड़ते हैं, लेकिन जब बाल तेजी से गिरने लगें या पैचेज में झड़ने लगे तो यह चिंता का विषय है. एलोपेसिया का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह स्थाई गंजापन भी पैदा कर सकता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि एलोपेसिया कई कारणों से हो सकता है जैसे हार्मोनल असंतुलन, पोषक तत्वों की कमी सूजन, संबंधी बीमारियां या हाल ही में हुई कोई गंभीर बीमारी इसका मुख्य कारण हो सकती है. 

एलोपेसिया के पीछे यह हो सकते हैं कारण 

हार्मोनल गड़बड़ी 
थायराइड या पीसीओएस जैसी स्थितियां शरीर के हार्मोन लेवल को असंतुलित कर देती है. खासकर महिलाओं में एंड्रोजन हार्मोन की अधिकता बालों की जड़ों को कमजोर कर देती है. जिससे सिर के बीच वाले भाग में बाल पतले होते जाते हैं. 

ऑटोइम्यून बीमारियां 
एलोपेसिया एरिएट और ल्यूपस जैसी बीमारियों में शरीर की रोग प्रतिरोधी प्रणाली खुद बालों की जड़ों पर हमला करने लगती है. इससे अचानक पैचेज में बाल गिरने लगते हैं. सिर, दाढ़ी या यहां तक कि भौंहो पर भी इससे बाल झड़ने लगते हैं. 

पोषण की कमी और गंभीर बीमारियों के बाद असर
कॉविड-19 जैसे संक्रमण तेज बुखार और लंबी बीमारी के बाद शरीर रिकवरी मोड में चला जाता है. जिससे बालों की ग्रोथ रुक जाती है और वह झड़ने लगते हैं. साथ ही प्रोटीन आयरन और विटामिन डी की कमी बालों के कमजोर कर देती है. 

कब जाए डॉक्टर के पास 
अगर आपके भी बाल अचानक तेजी से गिरने लगे तो आपको इसे लेकर डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. इसके अलावा जब सिर पर गोल-गोल पैचेज बनने लगे और सामान्य हेयर केयर से उसे पर कोई फर्क न पड़े साथी बालों की जड़े कमजोर होने लगे तो ऐसे में आपको डॉक्टर से एक बार परामर्श जरूर लेना चाहिए. बालों की इस तरह की समस्या के लिए आपको हार्मोन प्रोफाइल और पोषण संबंधी टेस्ट करवाएं और बालों के लिए सही खानपान और हेयर केयर रूटीन भी अपनाएं. 

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चेहरे से पता चल सकता है कि किडनी ठीक है या नहीं, जानिए कैसे

चेहरे से पता चल सकता है कि किडनी ठीक है या नहीं, जानिए कैसे


आंखों के नीचे सूजन: अगर आपकी आंखों के नीचे लगातार सूजन बनी रहती है, तो ये किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है.

पीली और थकी हुई त्वचा: किडनी की खराबी से खून में टॉक्सिन्स का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे त्वचा मुरझाई हुई, पीली और थकी-सी दिख सकती है.

पीली और थकी हुई त्वचा: किडनी की खराबी से खून में टॉक्सिन्स का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे त्वचा मुरझाई हुई, पीली और थकी-सी दिख सकती है.

चेहरे पर बार-बार मुंहासे: किडनी अगर विषैले तत्व ठीक से बाहर नहीं निकाल पा रही हो, तो उसका असर स्किन पर दिखता है. बार-बार पिंपल्स निकलना भी एक संकेत है.

चेहरे पर बार-बार मुंहासे: किडनी अगर विषैले तत्व ठीक से बाहर नहीं निकाल पा रही हो, तो उसका असर स्किन पर दिखता है. बार-बार पिंपल्स निकलना भी एक संकेत है.

होंठ और आंखों के आसपास सूखापन: किडनी की गड़बड़ी से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे होंठों और आंखों के आसपास की त्वचा सूखने लगती है.

होंठ और आंखों के आसपास सूखापन: किडनी की गड़बड़ी से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे होंठों और आंखों के आसपास की त्वचा सूखने लगती है.

चेहरे पर सूजन: किडनी शरीर में अतिरिक्त पानी नहीं निकाल पाती, जिससे चेहरे पर खासकर सुबह-सुबह सूजन दिखाई देती है. यह सूजन धीरे-धीरे बढ़ती है और दिक्कत देती है.

चेहरे पर सूजन: किडनी शरीर में अतिरिक्त पानी नहीं निकाल पाती, जिससे चेहरे पर खासकर सुबह-सुबह सूजन दिखाई देती है. यह सूजन धीरे-धीरे बढ़ती है और दिक्कत देती है.

डार्क सर्कल्स और थकान भरा चेहरा: किडनी की खराबी से शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जिससे आंखों में डार्क सर्कल्स और लगातार थकान दिखने लगती है.

डार्क सर्कल्स और थकान भरा चेहरा: किडनी की खराबी से शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जिससे आंखों में डार्क सर्कल्स और लगातार थकान दिखने लगती है.

स्किन में खुजली होना: जब किडनी खराब होती है तो स्किन ड्राय और खुजलीदार हो जाती है, क्योंकि फॉस्फोरस और अन्य टॉक्सिन्स खून में जमा होने लगते हैं.

स्किन में खुजली होना: जब किडनी खराब होती है तो स्किन ड्राय और खुजलीदार हो जाती है, क्योंकि फॉस्फोरस और अन्य टॉक्सिन्स खून में जमा होने लगते हैं.

Published at : 04 Aug 2025 04:39 PM (IST)

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फैटी लिवर से हो चुके हैं परेशान, जानिए घर बैठे ठीक करने के असरदार उपाय

फैटी लिवर से हो चुके हैं परेशान, जानिए घर बैठे ठीक करने के असरदार उपाय


Home Remedies for Fatty Liver: अनियमित जीवनशैली ने लिवर से जुड़ी बीमारियों को आम बना दिया है. फैटी लिवर, यानी लिवर में चर्बी जमा हो जाना, ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे गंभीर रोगों का रूप ले सकती है. अधिकतर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय रहते अगर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह लिवर सिरोसिस, टाइप 2 डायबिटीज़ और दिल की बीमारियों जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है.

डॉ. सरीन बताते हैं कि, अगर आप सही समय पर सावधानी रखेंगे, तो फैटी लिवर को पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है. लेकिन इसके लक्षण और जल्द से जल्द उपाय खोजना जरूरी है. 

ये भी पढे़- इस खतरनाक बीमारी की दवा लिवर को रखती है हेल्दी, नई रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला सच

वजन कम करें 

फैटी लिवर से राहत पाने के लिए सबसे जरूरी है वजन को कंट्रोल में रखना. मोटापा, खासकर पेट के आसपास की चर्बी, लिवर में फैट बढ़ाने का मुख्य कारण है. सप्ताह 5 दिन  वॉकिंग, साइकलिंग या योग करना चाहिए. 

चीनी और फ्रूट जूस से बनाएं दूरी

शुगर और पैक्ड फ्रूट जूस लिवर में फैट जमा करने का काम करते हैं. इसलिए मीठे पेय, बेकरी प्रोडक्ट्स और सफेद ब्रेड जैसे रिफाइंड फूड से परहेज करें. इसके बदले में घर का बना खाना, हरी सब्जियां और साबुत अनाज का सेवन करें.

हल्दी और ग्रीन टी 

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एक बेहतरीन एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट है, जो लिवर की सूजन कम करता है. रोज सुबह गर्म पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर पीना फायदेमंद होता है. वहीं, ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो लिवर में जमा चर्बी को घटाने में मदद करते हैं.

तली-भुनी चीजें 

घी, बटर, रेड मीट और डीप फ्राइड फूड लिवर पर सीधा दबाव डालते हैं. डॉ. सरीन सलाह देते हैं कि सैचुरेटेड फैट्स और प्रोसेस्ड फूड को डाइट से हटाकर, एवोकाडो, नट्स और ऑलिव ऑयल जैसी हेल्दी फैट्स को शामिल करें.

आंवला और गिलोय जैसे आयुर्वेदिक उपाय

आंवला लिवर को डिटॉक्स करता है और फैट मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है. आप इसका पाउडर भी ले सकते हैं. वहीं, गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और लिवर को संक्रमण से बचाता है.

फैटी लिवर कोई लाइलाज बीमारी नहीं है. अगर आप अपने खान-पान, दिनचर्या और जीवनशैली पर थोड़ा ध्यान दें, तो इसे घर बैठे भी नियंत्रित किया जा सकता है. एक हेल्दी लाइफस्टाइल ही लिवर की असली दवा है. नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और कुछ आयुर्वेदिक उपायों को अपनाकर आप बिना दवा के भी लिवर को स्वस्थ बना सकते हैं.

ये भी पढ़ें: गैस की वजह से दर्द या हार्ट अटैक? समझें दोनों में अंतर, जो समझ नहीं पाते लोग

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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IT सेक्टर में काम करने वालों पर खतरा, बड़ी तेजी से घेर रही यह खतरनाक बीमारी

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देश में फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इस बीमारी से बचाव के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में बताया कि सभी राज्यों को लोगों की जांच करने और फैटी लिवर की पहचान करने के लिए कहा गया है. नड्डा ने बताया कि सरकार ने इसके लिए गाइडलाइंस जारी की हैं. इन गाइडलाइंस का मकसद लोगों को फैटी लिवर के बारे में जानकारी देना और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है. अब इस बीमारी को मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज (MAFLD) कहा जाता है, जिसे पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता था. यह तब होता है जब लिवर में ज्यादा फैट जमा हो जाता है. इसका संबंध मोटापा, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों से है.

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय गैर संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत फैटी लिवर को रोकने और मैनेज करने के लिए स्वस्थ खाना, रोजाना व्यायाम, वजन पर नियंत्रण और ज्यादा चीनी व फैट से बचना जरूरी बताया गया है. राज्यों को कहा गया है कि डॉक्टर गाइडलाइन के हिसाब से जांच करें और जरूरत होने पर मरीज को सही इलाज दिलाएं.

शोध में चौंकाने वाले नतीजे

नड्डा ने संसद में दो बड़े अध्ययनों के नतीजे भी बताए. पहला अध्ययन Nature Scientific Reports Journal में 2025 में छपा. इसमें हैदराबाद के 345 आईटी कर्मचारियों को शामिल किया गया. रिपोर्ट में पाया गया कि 34 प्रतिशत कर्मचारियों को मेटाबॉलिक सिंड्रोम था और 84 प्रतिशत कर्मचारियों के लिवर में फैट था. यानी आईटी सेक्टर में यह समस्या बहुत आम है.

दूसरा अध्ययन ICMR ने किया. इसमें राजस्थान के कई गांवों में लिवर की बीमारी, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के जोखिम को देखा गया. इसमें पाया गया कि करीब 37 प्रतिशत लोगों को फैटी लिवर था, और पुरुषों में यह समस्या ज्यादा थी. जो लोग हफ्ते में फास्ट फूड खाते थे, उनमें खतरा और ज्यादा पाया गया.

सरकार क्या कर रही है?

नड्डा ने बताया कि डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव के लिए सरकार आयुष्मान आरोग्य मंदिर के जरिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं दे रही है. इसके साथ ही, स्वास्थ्य मंत्रालय समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चला रहा है.

एफएसएसएआई (FSSAI) भी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को लिवर से जुड़ी जानकारी दे रहा है. फिट इंडिया मूवमेंट और योग से जुड़ी गतिविधियां खेल मंत्रालय और आयुष मंत्रालय की तरफ से लगातार चल रही हैं, ताकि लोग स्वस्थ रहें.

क्यों जरूरी है सावधानी?

डॉक्टरों का कहना है कि अगर फैटी लिवर को समय पर नहीं रोका गया, तो यह लिवर फेल्योर, डायबिटीज और हार्ट की बीमारियों का कारण बन सकता है. इसलिए रोजाना व्यायाम, हेल्दी डाइट और नियमित जांच बहुत जरूरी है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सिरदर्द होने पर आप भी बार-बार खा लेते हैं यह दवा तो हो जाएं सावधान, इस बीमारी का बढ़ रहा खतरा

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Headache Medicine Side Effects: दवा का असर सिर्फ उसके नाम या इस्तेमाल पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह शरीर में कैसे पहुंचाई जाती है. सिरदर्द लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवा एसिटामिनोफेन जिसे पैरासिटामोल भी कहते हैं, हालांकि इसे बार-बार लेने से दिक्कत हो सकता है. नई रिसर्च ने यह दिखाया है कि, यह असर गंभीर हो सकता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

IV रूप में देने से क्या बदल जाता है?

अस्पतालों में, खासतौर पर जब मरीज गोली नहीं ले सकते, तो डॉक्टर इसे सीधे नस में देने का विकल्प चुनते हैं. इस तरीके से दवा जल्दी असर करती है और सटीक मात्रा देना आसान होता है. लेकिन एक नई रिसर्च ने बताया है कि, IV Acetaminophen का साइड इफेक्ट हो सकता है. इससे ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट भी हो सकती है. 

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रिसर्च में क्या सामने आया?

कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता थॉमस क्विस्टगार्ड जेप्स और उनकी टीम ने यह रिसर्च की है कि, उन्होंने पाया कि अस्पतालों में IV Acetaminophen लेने वाले गंभीर रूप से बीमार मरीजों में से 60% मरीजों का ब्लड प्रेशर गिर गया. यहां तक कि एक-तिहाई मरीजों को ब्लड प्रेशर को नॉर्मल करने के लिए मेडिकल मदद की जरूरत पड़ी.

ब्लड प्रेशर क्यों गिरता है?

जब Acetaminophen नस में दिया जाता है, तो यह सीधे खून में चला जाता है और लीवर की प्रोसेसिंग को बायपास कर देता है. इससे शरीर के पोटेशियम पर असर होता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं. चूहों पर की गई रिसर्च में देखा गया कि, अगर इन पोटेशियम चैनल्स को ब्लॉक किया जाए, तो ब्लड प्रेशर में गिरावट को रोका जा सकता है. यह खोज भविष्य में नए इलाज के रास्ते खोल सकती है.

क्या गोली लेने वालों को घबराने की जरूरत है?

जो लोग Acetaminophen गोली के रूप में लेते हैं और सही मात्रा में लेते हैं, उन्हें ब्लड प्रेशर की चिंता करने की जरूरत नहीं है. यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में देखी गई है, जिन्हें दवा IV से दी गई हैं. 

डॉक्टरों के लिए क्या है संदेश?

अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों को अब यह जानकारी होनी चाहिए कि IV Acetaminophen देने के बाद मरीज के ब्लड प्रेशर में गिरावट हो सकती है. इससे वे समय रहते सही कदम उठा सकते हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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