देख नहीं सकते तो क्या? अब ‘सुनकर’ पहचानेंगे दुनिया, एम्स ने दिए खास स्मार्ट ग्लासेस

देख नहीं सकते तो क्या? अब ‘सुनकर’ पहचानेंगे दुनिया, एम्स ने दिए खास स्मार्ट ग्लासेस


How AI Glasses Help Blind People In India: तकनीक के जरिये दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए एम्स ने सोमवार को 53 नेत्रहीन और गंभीर दृष्टिबाधित लोगों को एआई आधारित स्मार्ट विज़न ग्लासेस वितरित किए. ये खास चश्मे आसपास के दृश्य को ध्वनि में बदल देते हैं, जिससे यूज करने वाले अपने आसपास की दुनिया को “सुन” सकते हैं. यह डिवाइस प्रिंटेड टेक्स्ट पढ़कर सुनाने, वस्तुओं की पहचान करने, चेहरों को पहचानने, रास्ते में आने वाली बाधाओं को बताने और नेविगेशन में मदद करने में सक्षम है. चलिए आपको बताते हैं कि ये कैसे काम करता है और इससे न देखपाने वाले लोगों को क्या फायदा होगा. 

रोजमर्रा की जिंदगी को बनाता है आसान

रियल-टाइम ऑब्जेक्ट रिकग्निशन और टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक से लैस यह चश्मा रोजमर्रा के काम आसान बनाता है, चाहे दवाइयों के लेबल पढ़ना हो, नोट पहचानना हो या दरवाजे का रास्ता ढूंढना. लाभार्थियों में अमर कॉलोनी स्थित एक ब्लाइंड स्कूल के 28 बच्चे और डॉ. आरपी सेंटर, एम्स से जुड़े 25 एडल्ट शामिल थे. इनमें लो-विजन और रिहैबिलिटेशन क्लिनिक के वे मरीज भी थे, जिन्हें अपूरणीय दृष्टिहानि है.

क्या कहना है एक्सपर्ट का?

करीब 35,000 रुपये कीमत वाला यह उपकरण ‘प्रोजेक्ट दृष्टि’ के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराया गया. यह पहल रोटरी, विजन एड और अन्य सहयोगियों के समर्थन से चलाई जा रही है. एम्स के कम्युनिटी ऑप्थैल्मोलॉजी विभाग से जुड़े डॉ. प्रवीण वशिष्ठ के अनुसार, इस पहल को एक संरचित रिसर्च परियोजना के रूप में लागू किया जा रहा है. लाभार्थियों का एक वर्ष तक हर महीने फॉलो-अप किया जाएगा, ताकि उनकी लाइफ क्वालिटी में आए बदलाव का आकलन किया जा सके. स्टडी के नतीजों को दस्तावेजित कर प्रकाशित भी किया जाएगा.  जिससे आगे इसपर काम हो सके. 

भारत में एक बड़ी समस्या

भारत में लगभग एक करोड़ लोग अंधत्व या गंभीर अंधापन से जूझ रहे हैं. जहां कई मामलों का इलाज संभव है, वहीं कुछ मरीज एडवांस ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी, एज-रिलेटेड मैक्युलर डीजेनेरेशन या ऑप्टिक नर्व डैमेज जैसी स्थितियों से पीड़ित होते हैं, जिनमें सर्जरी समाधान नहीं होती. ऐसे में पुनर्वास ही स्वतंत्र जीवन की राह बनता है. एसएचजी टेक्नोलॉजीज़ द्वारा विकसित ये स्मार्ट ग्लासेस अब अपने पांचवें संस्करण में हैं. पहले के मॉडल अपेक्षाकृत भारी और बटन-आधारित थे, जबकि नया एडिशन  हल्का, सेंसर-आधारित और अधिक उन्नत एआई क्षमताओं से लैस है. एक्सपर्ट का मानना है कि ऐसी एआई आधारित सहायक तकनीक क्लिनिकल इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि उसका मजबूत पूरक है, जो दृष्टिहीन लोगों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नई ताकत देती है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मसूड़ों से खून आना और नीले निशान पड़ना है खतरे की घंटी, शरीर में हो गई है इस खास विटामिन की कमी

मसूड़ों से खून आना और नीले निशान पड़ना है खतरे की घंटी, शरीर में हो गई है इस खास विटामिन की कमी


What Happens If You Have Vitamin K Deficiency: विटामिन K की कमी शरीर के लिए काफी दिक्कतें पैदा कर सकती है. नवजात शिशुओं में यह हेमोरेजिक डिजीज ऑफ द न्यूबॉर्न यानी विटामिन K डिफिशिएंसी ब्लीडिंग का कारण बन सकती है. इसके अलावा खून बहने की गड़बड़ी, हड्डियों की कमजोरी और पहले से मौजूद लिवर की बीमारी को और बिगाड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है. विटामिन K दरअसल फैट में घुलनशील कंपाउंड का एक समूह है, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी है. यह खून के थक्के बनने की प्रक्रिया में शामिल कई प्रोटीन को सक्रिय करता है, जिससे ज्यादा खून बहने से बचाव होता है और शरीर में संतुलन बना रहता है.

क्या होता है शरीर में विटामिन के का रोल

खून जमने के अलावा विटामिन K हड्डियों के स्वास्थ्य में भी अहम भूमिका निभाता है. यह ऑस्टियोकैल्सिन नामक प्रोटीन के निर्माण में मदद करता है, जो कैल्शियम को हड्डियों से जोड़कर उन्हें मजबूत बनाता है. इसकी कमी से हड्डियों का विकास प्रभावित हो सकता है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है. इसके साथ ही विटामिन K हार्ट की सेहत से भी जुड़ा है, क्योंकि यह आर्टरीज में कैल्शियम जमने को कंट्रोल करने में मदद करता है. यदि शरीर में इसका लेवल कम हो जाए तो आर्टरीज में कैल्शियम जमा हो सकता है, जिससे हार्ट रोग का जोखिम बढ़ता है. कुल मिलाकर, पर्याप्त मात्रा में विटामिन K लेना खून बहने से बचाव, मजबूत हड्डियों और लंबे समय तक हार्ट की सेहत के लिए जरूरी है.

नए जन्मे बच्चों के लिए क्यों यह जरूरी

नवजात शिशुओं में एचडीएन इसलिए होता है क्योंकि उनके शरीर में विटामिन K का भंडार कम होता है और आंतों में वे बैक्टीरिया मौजूद नहीं होते जो विटामिन K बनाते हैं. गंभीर मामलों में ब्रेन के भीतर खून बहने जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है. एडल्ट में इसकी कमी से नाक से खून आना, मसूड़ों से खून बहना, हल्की चोट में ज्यादा खून निकलना या आसानी से नीले निशान पड़ना जैसे लक्षण दिख सकते हैं.

किन लोगों को होती है सबसे ज्यादा दिक्कत

यूएस की  National Library of Medicine के अनुसार, कुछ लोग ज्यादा जोखिम में होते हैं. जो लोग खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, लंबे समय तक एंटीबायोटिक का सेवन करते हैं या भोजन से पर्याप्त विटामिन K नहीं लेते, उनमें इसकी कमी हो सकती है. विटामिन A या E की बहुत अधिक मात्रा भी इसके असर को कम कर सकती है. कुछ मेडिकल स्थितियां, जिनमें शरीर फैट को ठीक से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता, भी विटामिन K की कमी का कारण बन सकती हैं. समय रहते पहचान और संतुलित लाइफस्टाइल के जरिए इस कमी से बचाव संभव है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पेट दर्द और थकान को न करें नजरअंदाज, युवाओं को अपना शिकार बना रहा है ये खतरनाक कैंस

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Why Is Colon Cancer Increasing in Young People: अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 50 वर्ष से कम उम्र के अमेरिकियों में कैंसर से होने वाली मौतों में 1990 के बाद से 44 प्रतिशत की कमी आई है. यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिसका क्रेडिट बेहतर इलाज और धूम्रपान में कमी को दिया गया है. लेकिन इसी बीच एक चिंताजनक तथ्य भी सामने आया है कि कोलन कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. जहां लंग्स, ब्रेस्ट और ब्रेन कैंसर से मौतों में गिरावट आई है, वहीं कम उम्र में होने वाला कोलोरेक्टल कैंसर तेजी से बढ़ रहा है. 50 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों में यह कैंसर से मौत का प्रमुख कारण बन चुका है और महिलाओं में दूसरा सबसे बड़ा कारण है.

डॉक्टरों का कहना है कि कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, लगातार पेट दर्द उनमें से एक है.  कभी-कभार होने वाला पेट दर्द आम बात है, लेकिन अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे, खासकर एक ही जगह पर, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट मायो क्लिनिक के अनुसार, के अनुसार, शरीर में इसके कुछ लक्षण दिखाई देते हैं. 

बिना वजह वजन कम होना

बिना वजह वजन कम होना भी एक चेतावनी संकेत हो सकता है. अगर खानपान सामान्य है, फिर भी वजन घट रहा है, तो यह चिंता का विषय है. कैंसर सेल्स शरीर की ऊर्जा का अधिक इस्तेमाल करती हैं, जिससे शरीर कमजोर और थका हुआ महसूस कर सकता है. कपड़े ढीले होने लगें और कारण समझ न आए, तो जांच कराना जरूरी है.

लगातार थकान
लगातार थकान भी एक अहम संकेत है. व्यस्त लाइफस्टाइल के कारण थकान होना सामान्य लग सकता है, लेकिन अगर आराम करने के बाद भी कमजोरी बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कोलन कैंसर की वजह से अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है, जिससे शरीर में खून की कमी हो जाती है और व्यक्ति हमेशा थका हुआ महसूस करता है.

मल में होने वाली दिक्कतें
मल में खून आना एक गंभीर लक्षण है. कई लोग इसे बवासीर समझकर अनदेखा कर देते हैं, जो बड़ी गलती हो सकती है. अगर मल में खून दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. चमकीला लाल खून कभी-कभी हल्की समस्या का संकेत हो सकता है, लेकिन गहरा रंग किसी गंभीर कारण की ओर इशारा कर सकता है. इसके अलावा मल त्याग की आदतों में बदलाव भी ध्यान देने योग्य है। लंबे समय तक कब्ज रहना या अचानक दस्त की समस्या होना सामान्य नहीं है. अगर ये बदलाव कुछ हफ्तों से ज्यादा बने रहें, तो जांच कराना जरूरी है. ट्यूमर आंतों में रुकावट पैदा कर सकता है या हार्मोनल बदलाव के कारण मल त्याग की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.

कब आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है

अगर इनमें से कोई भी लक्षण आपको लगातार दिखता है, तो बिना किसी देरी के आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है. एक्सपर्ट बताते हैं कि शरीर के संकेतों को समझना बेहद जरूरी है. समय पर जांच और इलाज से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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भारत में तेजी से पांव पसार रहे हैं ये 5 कैंसर, ऑन्कोलॉजिस्ट से जानें कैसे खराब लाइफस्टाइल बढ़ा

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Which Cancer Is Most Common in India: कैंसर दुनिया की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक माना जाता है. कैंसर रिसर्च यूके के मुताबिक, कैंसर के 200 से ज्यादा प्रकार हैं, जिन्हें उस सेल्स के आधार पर पांच मुख्य कैटेगरी में बांटा जाता है, जहां से वे शुरू होते हैं. कार्सिनोमा स्किन या अंदरूनी अंगों की परत से शुरू होता है. सारकोमा हड्डी, मांसपेशी, वसा या ब्लड वेसल्स जैसे सहायक टिश्यू से जुड़ा होता है. ल्यूकेमिया ब्लड बनाने वाले टिश्यू, खासकर बोन मैरो, में शुरू होकर व्हाइट ब्लड सेल्स को प्रभावित करता है. लिम्फोमा और मायलोमा इम्यून सिस्टम की सेल्स से जुड़े होते हैं. वहीं ब्रेन और रीढ़ की हड्डी से संबंधित कैंसर को सेंट्रल नर्वस सिस्टम का कैंसर कहा जाता है.

भारत में इस समय कौन से कैंसर सबसे ज्यादा

इन कैटेगरी के भीतर कई विशेष प्रकार कैंसर भी शामिल हैं. 9 फरवरी को एमएचबी बाइट्स पॉडकास्ट में रायपुर के वरिष्ठ सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जयेश शर्मा ने बताया कि इस समय भारत में कौन-कौन से कैंसर सबसे अधिक देखे जा रहे हैं. 25 वर्षों के अनुभव वाले डॉ. शर्मा ने कहा कि कुछ साल पहले महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर सबसे आम था और ब्रेस्ट कैंसर दूसरे स्थान पर था. लेकिन अब ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी सबसे अधिक पाया जा रहा है. इस बदलाव के पीछे बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती उम्र और ब्रेस्टफीडिंग में कमी जैसे कारण माने जा रहे हैं.

इन कैंसर का भी खतरा

वर्तमान में माउथ कैंसर दूसरे स्थान पर है, जो मुख्य रूप से तंबाकू चबाने की आदत से जुड़ा है. तीसरे और चौथे स्थान के लिए सर्वाइकल और लंग्स का कैंसर करीब-करीब बराबरी पर हैं, जबकि कोलन कैंसर पांचवें स्थान पर है. ब्रेस्ट कैंसर का खतरा उम्र बढ़ने, मोटापा, मेनोपॉज, शारीरिक निष्क्रियता, शराब के सेवन और पारिवारिक हिस्ट्री से बढ़ता है. समय रहते जांच, स्वयं परीक्षण और मैमोग्राफी जीवन बचा सकते हैं. सर्वाइकल कैंसर ज्यादातर एचपीवी इंफेक्शन से जुड़ा होता है और टीकाकरण तथा नियमित जांच से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है.

 

माउथ का कैंसर धूम्रपान और गुटखा-पान जैसी तंबाकू आदतों से गहराई से जुड़ा है. भारत में इसकी बड़ी वजह चबाने वाले तंबाकू का प्रचलन है. लंग्स का कैंसर मुख्य रूप से धूम्रपान से होता है. वहीं शहरी भारत में कोलन कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, जिसका संबंध कम फाइबर वाले भोजन, अधिक प्रोसेस्ड मीट, मोटापा, फिजिकल एक्टिविटी न होना और मेटाबॉलिक समस्याओं से जोड़ा जाता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

डॉ. शर्मा का कहना है कि कैंसर पूरी तरह अचानक होने वाली बीमारी नहीं है. इसमें जैनेटिक कारणों के साथ लाइफस्टाइल और पर्यावरण की भूमिका भी अहम होती है. तंबाकू का सेवन, मोटापा, शराब, कम शारीरिक गतिविधि, असंतुलित आहार और लंबे समय तक सूजन जैसी स्थितियां जोखिम बढ़ाती हैं.

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आयरन, पोटैशियम से लेकर आयोडीन तक… शरीर में हो जाए इन जरूरी मिनरल्स की कमी तो दिखते हैं ये संक

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How to Identify Mineral Deficiency Symptoms: ज्यादातर लोग जानते हैं कि शरीर में विटामिन की कमी हो सकती है, लेकिन कई बार जरूरी मिनरल्स की कमी भी बड़ी समस्या बन जाती है. ये माइक्रो और मैक्रो मिनरल शरीर के सही कामकाज के लिए बेहद जरूरी होते हैं. कई मामलों में एक साधारण ब्लड टेस्ट से पता चल सकता है कि किस तत्व की कमी है, लेकिन कुछ संकेत ऐसे भी होते हैं जो पहले ही शरीर में बदलाव का इशारा दे देते हैं. सही समय पर खानपान में बदलाव करके इन कमियों को दूर किया जा सकता है. StarsInsider की रिपोर्ट के अनुसार, शरीर में कुछ ऐसे लक्षण दिखते हैं, जिनसे हम इनकी कमी को पहचान सकते हैं. 

क्रोमियम
क्रोमियम की कमी होने पर शरीर में शुगर को संभालने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और वजन कम होने लगता है. इसे बढ़ाने के लिए मशरूम, हरी पत्तेदार सब्जियां, सोयाबीन, सूरजमुखी के बीज, चना, काजू और गुड़ जैसे खाद्य पदार्थ फायदेमंद होते हैं.

मैंगनीज
मैंगनीज की कमी रेयर है, लेकिन होने पर हड्डियों के विकास में रुकावट, प्रजनन क्षमता में कमी और ग्लूकोज सहनशीलता में गड़बड़ी हो सकती है. इसके लिए हरी सब्जियां, जामुन, ओट्स, ब्राउन राइस, अनानास और चना आहार में शामिल किए जा सकते हैं.

फ्लोराइड
फ्लोराइड की कमी दांतों को कमजोर बना सकती है और कैविटी का खतरा बढ़ जाता है.

सोडियम क्लोराइड
सोडियम क्लोराइड यानी नमक की कमी अक्सर खाने से नहीं, बल्कि शरीर में तरल असंतुलन के कारण होती है. ऐसे में पानी और नमक के संतुलन पर ध्यान देना जरूरी है.

पोटैशियम 
पोटैशियम की कमी आमतौर पर उल्टी, दस्त या ज्यादा पेशाब के कारण होती है. इसे पूरा करने के लिए शकरकंद, टमाटर, गाजर, पालक, केला, खरबूजा, आलू, खजूर, किशमिश और मछली जैसे खाद्य पदार्थ मददगार हैं.

आयोडीन
आयोडीन की कमी से शरीर का विकास और दिमागी कार्य प्रभावित हो सकते हैं. गले के सामने सूजन इसका सामान्य लक्षण है. इससे बचने के लिए आयोडीन युक्त नमक, समुद्री शैवाल, अंडे और हरी सब्जियां खाना जरूरी है.

मैग्नीशियम
मैग्नीशियम कई खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, फिर भी कमी संभव है. इसके लिए दालें, मेवे, बीज, साबुत अनाज, फल और एवोकाडो फायदेमंद हैं.

जिंक 
जिंक की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है. सीप, मांस, बीन्स और मेवे इसके अच्छे सोर्स हैं.

आयरन
आयरन रेड ब्लड सेल्स के लिए जरूरी है. इसकी कमी से एनीमिया हो सकता है. बादाम, सूखे मेवे, राजमा, पालक, ब्रोकली, कद्दू के बीज और मांस जैसे खाद्य पदार्थ आयरन से भरपूर होते हैं.

सेलेनियम
सेलेनियम की कमी कम देखने को मिलती है, लेकिन होने पर थकान, मांसपेशियों की कमजोरी और प्रतिरोधक क्षमता में कमी हो सकती है. ब्राजील नट्स, मशरूम, साबुत अनाज, सैल्मन और अंडे इसके अच्छे सोर्स हैं.

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कौन-सी बीमारी कहलाती है दुनिया की सबसे दर्दनाक बीमारी, कैसे नजर आते हैं इसके लक्षण?

कौन-सी बीमारी कहलाती है दुनिया की सबसे दर्दनाक बीमारी, कैसे नजर आते हैं इसके लक्षण?


Which Is the Most Painful Disease in the World: दर्द एक ऐसा एहसास है जो हमें संकेत देता है कि शरीर में कुछ ठीक नहीं है. सामान्य तौर पर लोगों को समय-समय पर दर्द होता है, लेकिन लगातार बना रहने वाला दर्द अलग होता है. जब दर्द छह महीने या उससे ज्यादा समय तक बना रहे, तो उसे क्रॉनिक यानी दीर्घकालिक दर्द कहा जाता है. यह दर्द हमारे नर्वस सिस्टम का संकेत होता है. यह हल्का, चुभने वाला, सुन्न करने वाला या तेज हो सकता है. कभी यह शरीर के किसी एक हिस्से तक सीमित रहता है, तो कभी पूरे शरीर में महसूस होता है. इसमें नसों, रीढ़ की हड्डी और ब्रेन के बीच मुश्किल कोऑर्डिनेशन काम करता है. 

दर्द दो तरह का माना जाता है एक्यूट ये थोड़े समय के लिए होते हैं और क्रॉनिक जिसका प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिलता है. कम समय तक रहने वाले दर्द आमतौर पर चोट, कट, घाव या मोच जैसी समस्या से जुड़ा होता है और तीन से छह महीने के भीतर ठीक हो जाता है. यह अक्सर तेज और तीव्र होता है, वहीं, क्रॉनिक दर्द छह महीने से ज्यादा समय तक बना रहता है, यह अक्सर गठिया जैसी किसी अंदरूनी बीमारी से जुड़ा होता है. इसकी तीव्रता कम-ज्यादा होती रहती है, लेकिन बीच-बीच में दर्द के दौरे भी आ सकते हैं. क्रॉनिक दर्द व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है. हेल् कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिन्हें दुनिया की सबसे दर्दनाक स्थितियों में गिना जाता है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में. 

क्लस्टर सिरदर्द

यह सिरदर्द का एक रेयर लेकिन बेहद तीव्र प्रकार है. इसमें दर्द अचानक आता है और एक खास अवधि में बार-बार होता है. बेचैनी और घबराहट जैसे लक्षण भी साथ दिख सकते हैं. दर्द अक्सर सिर के एक तरफ होता है और कुछ ही मिनटों में बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. यह कई घंटों तक रह सकता है और दिन में कई बार लौट सकता है.

हरपीज जोस्टर 

यह एक वायरल इंफेक्शन है जो नसों को प्रभावित करता है. इसमें जलन, चुभन, तेज दर्द के साथ खुजली और फफोले हो सकते हैं. चिकनपॉक्स का वही वायरस बाद में दोबारा सक्रिय होकर यह बीमारी पैदा कर सकता है. उम्र बढ़ने और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है.

फ्रोजन शोल्डर

इस स्थिति में कंधे के जोड़ में जकड़न और तेज दर्द होता है. हाथ को घुमाने या ऊपर उठाने में कठिनाई होती है. लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और समय के साथ बढ़ते हैं. आमतौर पर यह समस्या एक से तीन साल में धीरे-धीरे ठीक होती है.

हड्डी का फ्रैक्चर

हड्डी में दरार या टूटने को फ्रैक्चर कहा जाता है. यह शरीर की किसी भी हड्डी में हो सकता है. इसमें तेज दर्द, सूजन और उस हिस्से को हिलाने में परेशानी होती है. फ्रैक्चर का प्रकार चोट की तीव्रता पर निर्भर करता है.

कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम

यह एक लंबे समय के दर्द की स्थिति है, जो अक्सर किसी चोट के बाद एक हाथ या पैर को प्रभावित करती है. माना जाता है कि यह नसों की गड़बड़ी से जुड़ी होती है. दर्द जलन या चुभन जैसा महसूस होता है. प्रभावित हिस्से की त्वचा का रंग, तापमान या सूजन भी बदल सकती है.

हार्ट अटैक

हार्ट अटैक तब होता है जब हार्ट की मांसपेशियों तक ब्लड का फ्लो रुक जाता है. यह जानलेवा स्थिति हो सकती है. इसमें सीने में दबाव या जकड़न जैसा दर्द महसूस होता है, जो हाथ, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है. समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर हो सकती है.

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