मोटापा कम करने वाला ये इंजेक्शन बाजार में मिल रहा नकली, जानें पहचानने का तरीका

मोटापा कम करने वाला ये इंजेक्शन बाजार में मिल रहा नकली, जानें पहचानने का तरीका


Fake Weight Loss Injection: देशभर में तेजी से पॉपुलर हो रहे वेट लॉस इंजेक्शन खासकर डायबिटीज और वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन अब एक बड़े खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं. दरअसल, गुरुग्राम में ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट की कार्रवाई में नकली इंजेक्शन बनाने और बेचने वाले रैकेट का खुलासा हुआ है. करीब 70 लाख रुपये के फर्जी इंजेक्शन बरामद किए है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी किराए के फ्लैट में ही नकली इंजेक्शन तैयार कर रहे थे. चीन से मंगाए गए सस्ते केमिकल सिरिंज और पैकेजिंग की मदद से इन्हें बिल्कुल असली जैसा बनाया जा रहा था.

हैरानी के बात यह है कि आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए भी असली और नकली दवा में फर्क करना मुश्किल हो रहा था. शुरुआती जानकारी के अनुसार, इन नकली इंजेक्शनों की सप्लाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी की जा रही थी. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि मोटापा कम करने वाले कौन से नकली इंजेक्शन बाजार में मिल रहे हैं और इन्हें पहचानने का तरीका क्या है.

क्या है मौनजारो इंजेक्शन और क्यों बढ़ रही मांग?

ड्रग कंट्रोलर के अनुसार, मौनजारो एक एंटी-डायबिटिक दवा है, जिसे डॉक्टर की सलाह पर वजन घटाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी ट्रेंड और तेजी से वजन कम करने की चाहत के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. इसी बढ़ती डिमांड का फायदा उठाकर नकली दवाओं का कारोबार फैल रहा है और कई लोग वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले नकली मौनजारो इंजेक्शन को बाजार में बेच रहे हैं.

नकली इंजेक्शन से क्या हो सकते हैं खतरे?

एक्सपर्ट के अनुसार, नकली वेट लॉस इंजेक्शन शरीर के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. इनमें या तो असली दवा का एक्टिव तत्व नहीं होता या फिर जहरीले केमिकल मिलाए जाते हैं. इसे लेने से इलाज का असर नहीं होता, जिससे बीमारी बनी रहती है. वहीं शरीर में टॉक्सिक रिएक्शन हो सकते हैं. गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती तक की नौबत आ सकती है और लंबे समय में शरीर के अंगों को नुकसान पहुंच सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि मरीज को सही दवा नहीं मिलती तो पूरा इलाज फेल हो सकता है. इसके अलावा गलत या अधूरी दवा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है, जिससे फ्यूचर में इलाज और मुश्किल हो सकता है.

भारत में क्यों बढ़ रहा है नकली दवाओं का खतरा?

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि भारत में नकली दवाओं की समस्या नई नहीं है, लेकिन अब इसका दायरा बहुत बढ़ गया है. नियम मौजूद होने के बावजूद हर जगह उनका सख्ती से पालन नहीं हो पाता, जिससे सप्लाई चैन में खामियां रह जाती है और नकली दवाएं आसानी से बाजार में पहुंच जाती है.

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कैसे करें नकली इंजेक्शन की पहचान?

  • डॉक्टर के अनुसार नकली इंजेक्शन की पहचान करने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए. जैसे हमेशा लाइसेंस वाली मेडिकल शॉप से ही दवा खरीदें.
  • बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के इंजेक्शन न लें.
  • पैकेजिंग को ध्यान से जांचे, स्पेलिंग मिस्टेक टूटी सील या अजीब लेबल से सावधान रहें.
  • अगर बॉक्स पर क्यूआर कोड हो तो उसे जरूर वेरीफाई करें.
  • सोशल मीडिया या ऑनलाइन अनजान प्लेटफाॅर्म से दवा खरीदने से बचना चाहिए.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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जम्हाई लेते ही सुनाई क्यों देने लगता है साफ? जानिए इसके पीछे का कारण और एक्सपर्ट की राय

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Yawning Effect On Ears : हम सभी दिन में कई बार जम्हाई लेते हैं. कभी नींद आने पर, कभी थकान में, या कभी बिना किसी खास वजह के, आमतौर पर हम इसे सिर्फ नींद या बोरियत से जोड़कर देखते हैं, लेकिन शरीर में होने वाली यह साधारण सी क्रिया असल में कई काम करती है. आपने कई बार देखा होगा कि जम्हाई लेने के तुरंत बाद आसपास की आवाजें थोड़ी ज्यादा साफ और तेज सुनाई देने लगती हैं. यह कोई भ्रम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण मौजूद हैं. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि जम्हाई लेते ही साफ सुनाई क्यों देने लगता है और इसके पीछे का कारण और एक्सपर्ट की राय क्या है. 

जम्हाई का कानों पर क्या असर होता है?

हमारे कान के अंदर एक छोटी सी नली होती है जिसे Eustachian tube (यूस्टेशियन ट्यूब) कहा जाता है. यह नली हमारे मिडिल ईयर को गले से जोड़ती है. आमतौर पर यह बंद रहती है. जब हम जम्हाई लेते हैं, तो मुंह और जबड़े के खिंचाव की वजह से यह नली खुल जाती है. इससे कान के अंदर और बाहर के हवा के प्रेशर में संतुलन बन जाता है. ईयरड्रम  सही तरीके से हिलने लगता है. आवाजें ज्यादा साफ सुनाई देने लगती हैं. जम्हाई एक तरह से आपके कानों का रीसेट बटन दबा देती है. 

जम्हाई लेते ही साफ सुनाई क्यों देने लगता है?

जम्हाई लेते समय कान के अंदर मौजूद दो छोटे मांसपेशियां Tensor tympani muscle और Stapedius muscle, कुछ समय के लिए सक्रिय हो जाती हैं. ये कान की हड्डियों को थोड़ी देर के लिए टाइट कर देती हैं. इससे आवाज थोड़ी देर के लिए कम सुनाई देती है. जैसे ही ये मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं, सुनने की क्षमता बेहतर महसूस होती है. इसलिए जम्हाई के बाद आपको आवाजें क्लियर लगती हैं. 

प्लेन में कान क्यों बंद हो जाते हैं और जम्हाई क्यों मदद करती है?

आपने महसूस किया होगा कि हवाई जहाज में सफर करते समय कान बंद हो जाते हैं और पॉप की आवाज आती है. इसका कारण भी वही प्रेशर का असंतुलन है. ऐसे में जम्हाई लेने से यूस्टेशियन ट्यूब खुलती है, दबाव बराबर होता है. साथ ही कान तुरंत हल्के और साफ महसूस होते हैं.

इसके पीछे का कारण

जम्हाई लेने से शरीर में ब्लड फ्लो थोड़ा बढ़ जाता है. इससे दिमाग ज्यादा एक्टिव महसूस करता है, सुनने की प्रक्रिया थोड़ी बेहतर हो सकती है और आप आसपास की आवाजों को ज्यादा ध्यान से पकड़ पाते हैं. 

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एक्सपर्ट की राय क्या है?

कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि जम्हाई हमारे शरीर का एक प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र (defence mechanism) भी हो सकती है. यह कान के अंदर की मांसपेशियों को एक्टिव करती है. ये मांसपेशियां तेज या अंदरूनी आवाजों जैसे अपनी आवाज, दांत पीसना से कान को बचाती हैं. यह अंदरूनी शोर को कम करके बाहरी आवाजों को बेहतर सुनने में मदद करती है. 

कब हो सकती है समस्या?

अगर आपको बार-बार जम्हाई लेकर ही कान खोलने पड़ते हैं, या एक कान खुलता है, दूसरा नहीं, कान में भारीपन बना रहता है, बार-बार पॉप की जरूरत महसूस होती है तो यह यूस्टेशियन ट्यूब में दिक्कत का संकेत हो सकता है. इसके कारण एलर्जी, साइनस की समस्या या एसिड रिफ्लक्स हो सकते हैं. ऐसे में डॉक्टर, ENT स्पेशलिस्ट से सलाह लेना जरूरी है.  

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सूरज की तपिश से बढ़ने लगे हीट स्ट्रोक के मामले, डॉक्टर से जानें बचने के तरीके

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Heat stroke:  अप्रैल जैसे-जैसे खत्म हो रहा है, गर्मी बढ़ती जा रही है. घर से बाहर निकलते ही धूप लोगों की परेशानी कर देती है. इस तेज धूप और लगातार हर दिन बढ़ता तापमान इन दिनों हीट स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ा रहा है. ऐसे में लंबे समय तक धूप में घूमना या भारी शारीरिक गतिविधि करने से शरीर का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं गर्मी के दिनों में हीट स्ट्रोक से कैसे बचा जाए. 

हीट स्ट्रोक क्या है?

डॉ. राहुल चिराग (कंसल्टेंट फिजिशियन, Care Hospitals) के अनुसार, हीट स्ट्रोक एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान अत्यधिक गर्मी या लंबे समय तक तेज गर्मी में रहने के कारण बहुत बढ़ जाता है. यह तब होता है जब शरीर का तापमान 104°F या उससे अधिक हो जाता है. यह समस्या भीषण गर्मी में अधिक देखने को मिलती है. डॉक्टर के मुताबिक, हीट स्ट्रोक दो प्रकार का होता है-एक्सर्शनल और नॉन-एक्सर्शनल. एक्सर्शनल हीट स्ट्रोक अधिकतर खिलाड़ियों और मजदूरों में होता है क्योंकि वे तेज धूप में भारी शारीरिक काम या एक्सरसाइज करते हैं, जबकि नॉन-एक्सर्शनल हीट स्ट्रोक बुजुर्गों और छोटे बच्चों में अधिक देखा जाता है क्योंकि इनके शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर होती है.

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हीट स्ट्रोक के लक्षण और खतरे

हीट स्ट्रोक के लक्षणों की बात की जाए तो इसमें बुखार, सिरदर्द, भ्रम की स्थिति, चिड़चिड़ापन, बेहोशी या दौरे पड़ना शामिल है. इसके अलावा स्किन का ड्राई और गर्म होना, दिल की धड़कन तेज हो जाना और सांस का तेज चलना भी हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं. समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है, इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत ध्यान देते हुए डॉक्टर से मिलना जरूरी है.

हीट स्ट्रोक से बचाव और उपचार के तरीके

हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए. हल्के और ढीले कपड़े पहनने चाहिए. अधिक से अधिक पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए  और धूप में छाता या टोपी का उपयोग करना चाहिए. इसके उपचार के लिए व्यक्ति को तुरंत ठंडी या छायादार जगह पर ले जाकर शरीर को ठंडा करना चाहिए. ढीले कपड़े कर देने चाहिए और ठंडे पानी की पट्टियां लगानी चाहिए. अगर स्थिति गंभीर हो जैसे बेहोशी या तेज बुखार हो तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए.

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