हाथों में दिखें ये लक्षण तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, इग्नोर कर देंगे तो डैमेज हो जाएगा लिवर

हाथों में दिखें ये लक्षण तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, इग्नोर कर देंगे तो डैमेज हो जाएगा लिवर


Early Signs Of Liver Disease In Hands: लिवर हमारे शरीर का ऐसा अंग है जो चुपचाप रोज सैकड़ों जरूरी काम करता है. यह खून को डिटॉक्स करता है, डाइजेशन में मदद करता है और शरीर के हार्मोन को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है. लेकिन जब लिवर में कोई समस्या शुरू होती है, तो यह हमेशा तेज लक्षणों के रूप में सामने नहीं आती. कई बार इसके शुरुआती संकेत हमारे हाथों में ही दिखाई देने लगते हैं.

हाथ से कैसे पता चलता है?

जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हेपेटोलॉजी के अनुसार, हाथों की त्वचा का रंग बदलना, हथेलियों का लाल होना, नाखूनों का रंग फीका पड़ना, उंगलियों का कांपना या लगातार खुजली होना जैसे संकेत लिवर से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं. फैटी लिवर, हेपेटाइटिस या सिरोसिस जैसी बीमारियों में ऐसे लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देने लगते हैं. समय रहते इन संकेतों को पहचान लेना गंभीर दिक्कतों से बचा सकता है.

इसे भी पढ़ें – प्रेग्नेंसी में पहले महीने से डिलीवरी तक कैसी होनी चाहिए डाइट, एक्सपर्ट से जानें

हथेलियों का लाल होना

अगर आपकी हथेलियां खासकर अंगूठे और छोटी उंगली के पास असामान्य रूप से लाल दिखाई दें, तो इसे पामर एरिथेमा कहा जाता है. यह अक्सर तब होता है जब लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता और शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है. हालांकि यह कभी-कभी स्वस्थ लोगों में भी दिख सकता है, लेकिन अगर इसके साथ थकान या पीलिया जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

उंगलियों का मुड़ना

कुछ लोगों में हथेली के नीचे की त्वचा धीरे-धीरे मोटी होकर उंगलियों को अंदर की ओर मोड़ने लगती है. इसे ड्यूपिट्रेन कॉन्ट्रैक्चर कहा जाता है. यह समस्या लंबे समय से लिवर की बीमारी या अधिक शराब सेवन से जुड़ी हो सकती है.

टेरीज नेल्स

अगर नाखून लगभग सफेद दिखाई दें और उनके किनारे पर हल्की गुलाबी पट्टी नजर आए, तो यह टेरीज नेल्स का संकेत हो सकता है. यह अक्सर लिवर सिरोसिस के कारण खून के प्रवाह और प्रोटीन के स्तर में बदलाव की वजह से होता है.

नाखूनों का उभरना

कभी-कभी उंगलियों के सिरे गोल और उभरे हुए दिखाई देने लगते हैं, जिसे नेल क्लबिंग कहा जाता है. यह आमतौर पर फेफड़ों और हार्ट की बीमारियों से जुड़ा होता है, लेकिन लंबे समय से लिवर की बीमारी में भी दिखाई दे सकता है.

हाथों का कांपना

अगर हाथ फैलाने पर कलाई या उंगलियों में अचानक झटके जैसी हरकत हो, तो इसे एस्टेरिक्सिस कहा जाता है. यह लिवर की गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है, जिसमें शरीर में जमा टॉक्सिन दिमाग को प्रभावित करने लगते हैं.

हथेलियों में खुजली

हथेलियों और पैरों के तलवों में बिना किसी दाने के लगातार खुजली होना भी लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है. यह अक्सर तब होता है जब शरीर में पित्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता. एक्सपर्ट के अनुसार अगर हाथों में ऐसे बदलाव दिखाई दें तो उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए. समय पर जांच और इलाज से लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखा जा सकता है.

इसे भी पढ़ें – प्रेग्नेंसी में पहले महीने से डिलीवरी तक कैसी होनी चाहिए डाइट, एक्सपर्ट से जानें

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

कितने साल के लिए एग्स फ्रीज करवा सकती हैं महिलाएं, इसमें कितना खर्चा आता है?

कितने साल के लिए एग्स फ्रीज करवा सकती हैं महिलाएं, इसमें कितना खर्चा आता है?


 

How Long Can Women Freeze Their Eggs: आज के समय में कई महिलाएं भविष्य में मां बनने की योजना बनाती हैं, लेकिन हर किसी के लिए सही समय एक जैसा नहीं होता. कई बार सही पार्टनर न मिलना, करियर पर ध्यान देना, जीवन के अन्य लक्ष्य पूरे करना या कोई मेडिकल समस्या ऐसी स्थिति बना देती है, जिसमें तुरंत मां बनना संभव नहीं होता. ऐसे में एग फ्रीजिंग यानी अंडों को सुरक्षित रखकर भविष्य के लिए संरक्षित करना एक विकल्प बनकर सामने आया है.

एग फ्रीजिंग को मेडिकल भाषा में क्रायोप्रिजर्वेशन कहा जाता है. इस प्रक्रिया में महिला के एग्स को निकालकर विशेष तकनीक से फ्रीज कर दिया जाता है, ताकि बाद में IVF की मदद से प्रेग्नेंसी की संभावना बनी रहे. यह तरीका उन महिलाओं के लिए भी फायदेमंद हो सकता है जिन्हें कीमोथेरेपी, गंभीर एंडोमेट्रियोसिस के इलाज, जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी या किसी ऐसी बीमारी का इलाज कराना हो जो फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती है.

कौन महिलाएं एग फ्रीजिंग करा सकती हैं?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्थान hopkinsmedicine की रिपोर्ट के अनुसार, एग फ्रीजिंग हर महिला के लिए जरूरी या उपयोगी नहीं होती. इसके लिए डॉक्टर महिला की उम्र, स्वास्थ्य और फर्टिलिटी से जुड़े कई पहलुओं की जांच करते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर किसी महिला को कैंसर है, तो यह देखना जरूरी होता है कि इलाज शुरू होने से पहले एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया पूरी करने का समय है या नहीं.

हालांकि ज्यादातर मामलों में सबसे महत्वपूर्ण कारक महिला की उम्र होती है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, एग्स की संख्या और उनकी क्वालिटी दोनों कम होने लगती हैं. आमतौर पर 45 से 55 वर्ष के बीच महिलाओं में मेनोपॉज हो जाता है और एग्स बनना बंद हो जाते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार 37 वर्ष के बाद एग्स की संख्या तेजी से घटने लगती है और 43 वर्ष की उम्र तक लगभग 90 प्रतिशत एग्स प्रेग्नेंसी के लिए उपयुक्त नहीं रह जाते. इसलिए 40 वर्ष से पहले एग फ्रीजिंग कराना बेहतर माना जाता है.

इसे भी पढे़: इतनी उमस में भी नहीं आता है पसीना तो इस बीमारी का हो गए हैं शिकार, तुरंत भागें डॉक्टर के पास

कितने साल तक फ्रीज रह सकते हैं अंडे?

Pacific Fertility Center की रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक तकनीक की मदद से अंडों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. कई एक्सपर्ट के अनुसार सही तरीके से फ्रीज किए गए अंडों को कई वर्षों तक सुरक्षित रखा जा सकता है और कुछ देशों में इन्हें 55 साल तक स्टोर करने की अनुमति देने पर भी चर्चा हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, साइंटिस्ट ने ऐसे मामलों में भी सफलता पाई है जहां 10 से 14 साल तक फ्रीज किए गए एग्स से गर्भधारण संभव हुआ.

भारत में कितना आता है खर्च?

Proactiveforher की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एग फ्रीजिंग की लागत शहर और क्लिनिक के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. आमतौर पर एग्स निकालने और फ्रीज करने की प्रक्रिया पर लगभग 50,000 से 1.5 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है. इसके अलावा एग्स को स्टोर करने के लिए हर साल लगभग 5,000 से 15,000 रुपये तक की फीस ली जाती है.

इसे भी पढ़ें- क्या ठीक से काम कर रही है आपकी किडनी, घर में ही ऐसे कर सकते हैं चेक?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

दांतों में बना हुआ है दर्द तो न करें नजरअंदाज, हो सकता है कैंसर

दांतों में बना हुआ है दर्द तो न करें नजरअंदाज, हो सकता है कैंसर


Can Tooth Pain Be A Sign Of Oral Cancer: कई बार दांत में दर्द होना एक सामान्य समस्या लगती है. हमें लगता है कि शायद कुछ ज्यादा ठंडा खा लिया, कुछ सख्त चीज चबा ली या ठीक से ब्रश नहीं किया, इसलिए दर्द हो रहा है. लेकिन अगर यह दर्द लंबे समय तक बना रहे और सामान्य दर्द से थोड़ा अलग महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ज्यादातर मामलों में दांत का दर्द किसी सामान्य दांत की समस्या का संकेत होता है, लेकिन कुछ रेयर मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी, जैसे ओरल कैंसर या जबड़े के कैंसर का संकेत भी हो सकता है. इसलिए सामान्य दांत दर्द और कैंसर से जुड़े लक्षणों के बीच फर्क समझना जरूरी है.

दांत या मुंह का कैंसर कब होता है?

कैंसर के बारे में जानकारी देने वाली oncarecancer की रिपोर्ट के अनुसार,  दांतों के आसपास होने वाला कैंसर आमतौर पर मसूड़ों, दांतों के आसपास की परत या जबड़े की हड्डी में शुरू हो सकता है. कई लोग यह मानते ही नहीं कि मुंह या दांतों के आसपास भी कैंसर हो सकता है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं. यही कारण है कि कई बार मरीज इलाज के लिए देर से पहुंचते हैं. अच्छी बात यह है कि अगर इस बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इसका इलाज संभव है. डॉक्टर छोटे प्रभावित हिस्से को हटाकर कैंसर को फैलने से रोक सकते हैं और मरीज पूरी तरह ठीक भी हो सकता है.

इसे भी पढ़ें- नाखून बता सकते हैं सेहत का राज, आयरन की कमी से लेकर फेफड़ों की बीमारी तक देते हैं ये संकेत

क्यों सामान्य दर्द समझ लेते हैं लोग?

दांत का दर्द बहुत आम है और इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कैविटी, मसूड़ों का इंफेक्शन, दांत पीसने की आदत या साइनस की समस्या. इन स्थितियों में इलाज के बाद दर्द ठीक हो जाता है, लेकिन कैंसर से जुड़ा दर्द अलग तरह का होता है. यह धीरे-धीरे शुरू होकर लगातार बना रह सकता है और समय के साथ बढ़ भी सकता है. कई बार यह दर्द जबड़े, चेहरे या कान तक फैलने लगता है.

क्या होते हैं इसके संकेत?

लगातार बना रहने वाला दर्द: सामान्य दांत दर्द अक्सर कुछ समय बाद कम हो जाता है, लेकिन कैंसर से जुड़ा दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है. ब्रश करने, दवा लेने या घरेलू उपाय करने के बाद भी अगर दर्द कई हफ्तों या महीनों तक रहे, तो यह चिंता की बात हो सकती है.

जबड़े या दांतों के आसपास सूजन: इंफेक्शन या चोट की वजह से सूजन होना सामान्य है, लेकिन अगर सूजन धीरे-धीरे बढ़े, कठोर महसूस हो और लंबे समय तक ठीक न हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार इससे चेहरे का आकार भी थोड़ा बदल सकता है या मुंह खोलने में परेशानी हो सकती है.

बिना कारण दांत का हिलना: कभी-कभी दांत मसूड़ों की बीमारी या चोट की वजह से हिलने लगते हैं, लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के दांत ढीले होने लगें, तो यह जबड़े की हड्डी या आसपास के ऊतकों में बदलाव का संकेत हो सकता है.

सामान्य दर्द से कैसे अलग हैं ये लक्षण?

सामान्य दांत दर्द का कारण स्पष्ट होता है और इलाज के बाद राहत मिल जाती है. लेकिन कैंसर से जुड़े लक्षणों में दर्द लगातार बना रहता है, सूजन खत्म नहीं होती और दांत या जबड़े में बदलाव धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं. इसके साथ मुंह में लंबे समय तक घाव रहना, सुन्नता महसूस होना या बिना कारण दांत ढीले होना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं. अगर ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर या डेंटिस्ट से जांच कराना जरूरी है. समय रहते जांच और इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है.

इसे भी पढ़ें- Haldi Doodh Benefits: क्या रात में सोने से ठीक पहले हल्दी वाला दूध पीना सही? जानें एक्सपर्ट्स की राय

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

दिल्ली में पीने के पानी के 40% से ज्यादा सैंपल टेस्ट में फेल, जानें इससे कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?

दिल्ली में पीने के पानी के 40% से ज्यादा सैंपल टेस्ट में फेल, जानें इससे कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?



दिल्ली में पीने के पानी के 40% से ज्यादा सैंपल टेस्ट में फेल, जानें इससे कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?



Source link

क्या ठीक से काम कर रही है आपकी किडनी, घर में ही ऐसे कर सकते हैं चेक?

क्या ठीक से काम कर रही है आपकी किडनी, घर में ही ऐसे कर सकते हैं चेक?


Early Warning Signs Of Kidney Disease You Should Not Ignore: आजकल किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. समस्या यह है कि अधिकतर लोगों को तब पता चलता है जब किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किडनी की बीमारी अक्सर धीरे-धीरे और बिना किसी क्लियर लक्षण के बढ़ती है. शुरुआती चरण में कई लोगों को बिल्कुल सामान्य महसूस होता है, इसलिए वे इसे पहचान नहीं पाते.

किडनी हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करती ह.। यह खून से गंदगी और विषैले पदार्थों को फिल्टर करती है, शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखती है, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है और रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में भी भूमिका निभाती है. किडनी के बारे में जानकारी देने वाली संस्था नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, इसके कुछ संकेत पहले से दिखने लगते हैं, जिससे आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं. 

इसे भी पढ़ें- नाखून बता सकते हैं सेहत का राज, आयरन की कमी से लेकर फेफड़ों की बीमारी तक देते हैं ये संकेत

किडनी की समस्या के अहम संकेत

यूरिन में बदलाव

किडनी की बीमारी का सबसे शुरुआती संकेत यूरिन से जुड़ा बदलाव हो सकता है. पेशाब बार-बार आना, खासकर रात में, या फिर पहले से कम होना भी समस्या का संकेत हो सकता है. कई बार यूरिन का रंग गहरा, झागदार या धुंधला भी दिखाई देता है.

शरीर में सूजन

जब किडनी अतिरिक्त नमक और पानी को बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है. इससे पैरों, टखनों, हाथों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे सकती है. सुबह-सुबह आंखों के आसपास सूजन भी इसी का संकेत हो सकती है.

लगातार थकान

किडनी ठीक से काम न करे तो खून में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है. इसके अलावा किडनी रेड ब्लड सेल्स के निर्माण से जुड़े हार्मोन का उत्पादन भी कम कर देती है, जिससे एनीमिया हो सकता है.

झागदार यूरिन

अगर पेशाब में साबुन जैसे झाग दिखें और वे जल्दी खत्म न हों, तो यह पेशाब में प्रोटीन जाने का संकेत हो सकता है. इसे प्रोटीनयूरिया कहा जाता है और यह किडनी के शुरुआती नुकसान का संकेत हो सकता है.

ये भी होते हैं संकेत

पेशाब में गुलाबी, लाल या भूरे रंग का दिखाई देना गंभीर संकेत हो सकता है. यह किडनी इंफेक्शन, किडनी स्टोन या किडनी को हुए नुकसान की वजह से हो सकता है. इसके साथ ही जब शरीर में विषैले पदार्थ बढ़ने लगते हैं, तो डाइजेशन सिस्टम भी प्रभावित होता है. इससे भूख कम लग सकती है और मुंह में धातु जैसा स्वाद महसूस हो सकता है. खून में टॉक्सिन जमा होने से मतली और उल्टी जैसी परेशानी भी हो सकती है. किडनी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखती है. जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन हो सकती है.

इनको भी न करें इग्नोर

किडनी के खराब होने से शरीर में मिनरल्स का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे त्वचा सूखी और खुजलीदार हो सकती है. इसके साथ ही किडनी की समस्या में लंग्स में अतिरिक्त तरल जमा हो सकता है या एनीमिया के कारण शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है.

इसे भी पढ़ें- Haldi Doodh Benefits: क्या रात में सोने से ठीक पहले हल्दी वाला दूध पीना सही? जानें एक्सपर्ट्स की राय

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

शरीर में आयरन की कमी कैसे दूर करें? डाइट में शामिल करें ये ‘सुपरफूड्स’

शरीर में आयरन की कमी कैसे दूर करें? डाइट में शामिल करें ये ‘सुपरफूड्स’


Best Foods To Increase Haemoglobin Naturally: भारत में कम हीमोग्लोबिन की समस्या काफी आम है और इसकी सबसे बड़ी वजह आयरन की कमी मानी जाती है. अक्सर लोग थकान, हल्की सांस फूलना, चक्कर आना या चेहरे का पीला पड़ना जैसे लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन ये संकेत शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने की ओर इशारा कर सकते हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, भारत में प्रजनन आयु की आधे से अधिक महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं.

हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है. जब इसकी मात्रा कम हो जाती है तो शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. इससे थकान, सांस फूलना, सिरदर्द, चक्कर और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगती हैं. डाइटिशियन वीना वी ने TOI को बताया कि सही खानपान के जरिए शरीर में आयरन की कमी को काफी हद तक सुधारा जा सकता है.

आयरन की कमी क्यों होती है?

आयरन की कमी अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होती है. अनियमित भोजन, साबुत अनाज की जगह ज्यादा प्रोसेस्ड अनाज खाना, हरी सब्जियों का कम सेवन और आयरन के सही एब्जॉर्ब की कमी इसके मुख्य कारण हैं. पौधों से मिलने वाला आयरन शरीर में आसानी से अब्सॉर्प्शन नहीं हो पाता, इसलिए भोजन के सही संयोजन का ध्यान रखना जरूरी होता है.

आयरन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ

हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और चौलाई आयरन, फोलेट और फाइबर से भरपूर होती हैं. इनका सेवन टमाटर या नींबू जैसे विटामिन-C वाले खाद्य पदार्थों के साथ करने से आयरन का अब्सॉर्प्शन बेहतर होता है. दाल और चना भी आयरन और प्रोटीन के अच्छे सोर्स हैं. दाल में टमाटर डालकर पकाना या चने के साथ कच्चा प्याज और नींबू लेना आयरन के अब्सॉर्प्शन को बढ़ा सकता है.

इसे भी पढ़ें – प्रेग्नेंसी में पहले महीने से डिलीवरी तक कैसी होनी चाहिए डाइट, एक्सपर्ट से जानें

गुड़ और खजूर भी शरीर को आयरन देने में मदद करते हैं. भोजन के बाद थोड़ा सा गुड़ या सुबह भीगे हुए खजूर खाना फायदेमंद हो सकता है, हालांकि मधुमेह के मरीजों को इसे सीमित मात्रा में लेना चाहिए, इसके अलावा कद्दू के बीज और रागी भी आयरन से भरपूर होते हैं. इन्हें सलाद, दही या रोजमर्रा के भोजन में शामिल किया जा सकता है.

आयरन के अब्सॉर्प्शन का महत्व

आयरन लेना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसका सही तरीके से अब्सॉर्प्शन होना भी है. नींबू, संतरा, अमरूद और टमाटर जैसे विटामिन-C वाले खाद्य पदार्थ आयरन के अब्सॉर्प्शन को बढ़ाते हैं. वहीं भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से आयरन का अब्सॉर्प्शन कम हो सकता है, इसलिए कम से कम एक घंटे का अंतर रखना बेहतर माना जाता है.

इसे भी पढ़ें- हैवी मील के तुरंत बाद फ्रूट्स खाने चाहिए या नहीं, क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp