हैवी मील के तुरंत बाद फ्रूट्स खाने चाहिए या नहीं, क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

हैवी मील के तुरंत बाद फ्रूट्स खाने चाहिए या नहीं, क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?


हालांकि कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या खाना खाने के तुरंत बाद फल खाना सही है या नहीं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं की हैवी मिल के तुरंत बाद फ्रूट्स खाने चाहिए या नहीं और इसे लेकर एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं.

कई लोग भारी खाना खाने के बाद फल को मिठाई की तरह खा लेते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा करना हर किसी के लिए सही नहीं होता है. फल में मौजूद नेचुरल शुगर और फाइबर जल्दी पर पच जाते हैं, जबकि भारी भोजन में मौजूद प्रोटीन और वसा को पचाने में ज्यादा समय लगता है.

कई लोग भारी खाना खाने के बाद फल को मिठाई की तरह खा लेते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा करना हर किसी के लिए सही नहीं होता है. फल में मौजूद नेचुरल शुगर और फाइबर जल्दी पर पच जाते हैं, जबकि भारी भोजन में मौजूद प्रोटीन और वसा को पचाने में ज्यादा समय लगता है.

Published at : 07 Mar 2026 06:16 PM (IST)

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प्रेग्नेंसी में पहले महीने से डिलीवरी तक कैसी होनी चाहिए डाइट, एक्सपर्ट से जानें

प्रेग्नेंसी में पहले महीने से डिलीवरी तक कैसी होनी चाहिए डाइट, एक्सपर्ट से जानें


प्रेग्नेंसी हर महिला की लाइफ का बहुत खास और इमोशनल समय होता है. जब किसी महिला को यह पता चलता है कि वह मां बनने वाली है, तो उसकी लाइफ में कई तरह के बदलाव शुरू हो जाते हैं. इस दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, खान-पान की जरूरतें बदल जाती हैं और सेहत का खास ध्यान रखना जरूरी हो जाता है. प्रेग्नेंसी के दौरान सही डाइट लेना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि मां जो भी खाती है उसका सीधा असर बच्चे की ग्रोथ पर पड़ता है इसलिए प्रेग्नेंसी के पहले महीने से लेकर डिलीवरी तक संतुलित और पौष्टिक डाइट लेना बेहद जरूरी है. सही डाइट से मां स्वस्थ रहती है और बच्चे की ग्रोथ भी सही तरीके से होता है. तो आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में पहले महीने से डिलीवरी तक डाइट कैसी होनी चाहिए. 

प्रेग्नेंसी के दौरान सही डाइट क्यों जरूरी है

प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर को सामान्य दिनों से ज्यादा पोषण की जरूरत होती है. विशेषज्ञों के अनुसार, एक प्रेग्नेंट महिला को रोजाना लगभग 300 अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत होती है. यह एक्स्ट्रा एनर्जी बच्चे की ग्रोथ, मां के स्वास्थ्य और शरीर में हो रहे बदलावों को संभालने के लिए जरूरी होती है. अगर प्रेग्नेंट महिला सही मात्रा में पोषक तत्व नहीं लेती है, तो इससे बच्चे की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है और मां को भी कमजोरी, एनीमिया और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान संतुलित और पौष्टिक डाइट लेना बहुत जरूरी होता है. 

प्रेग्नेंसी में पहले महीने से डिलीवरी तक डाइट कैसी होनी चाहिए

1. 1–3 महीना की डाइट – प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे दोनों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित और पौष्टिक डाइट बहुत जरूरी होती है. प्रेग्नेंसी के 9 महीनों में शरीर की जरूरतें बदलती रहती हैं, इसलिए हर महीने सही पोषण लेना जरूरी है. जिसमें पहली तिमाही यानी 1–3 महीना बच्चे के दिमाग और रीढ़ की हड्डी का विकास शुरू होता है, इसलिए फोलिक एसिड और आयरन बहुत जरूरी होते हैं. ऐसे में हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल और अंकुरित अनाज, दूध, दही और पनीर, फल, सूखे मेवे या नारियल पानी लें. 

2. 4–6 महीना की डाइट – दूसरी तिमाही यानी 4–6 महीना में बच्चे की हड्डियों और शरीर का तेजी से विकास होता है, इसलिए कैल्शियम और प्रोटीन की जरूरत बढ़ जाती है. इस समय दूध, दही, पनीर, दाल, राजमा, चना, अंडे , सोयाबीन, हरी सब्जियां, फल और सलाद लें. 

3. 7–9 महीना की डाइट – तीसरी तिमाही में बच्चे का वजन बढ़ता है और शरीर पूरी तरह विकसित होता है, इसलिए एनर्जी और आयरन की जरूरत ज्यादा होती है. ऐसे में आयरन वाली चीजें (पालक, चुकंदर, खजूर), प्रोटीन (दाल, पनीर, अंडे), कैल्शियम (दूध, दही), फल और फाइबर वाली चीजें खाएं. 

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प्रेग्नेंसी में किन चीजों से बचना चाहिए

1. कच्चा या अधपका खाना – कच्चे अंडे, अधपका मांस और मछली में बैक्टीरिया हो सकते हैं जो संक्रमण का कारण बन सकते हैं.

2. ज्यादा कैफीन – ज्यादा मात्रा में चाय, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक पीना प्रेग्रेंसी में नुकसानदायक हो सकता है

3. शराब – शराब बच्चे के विकास पर बुरा असर डाल सकती है और जन्म दोष का खतरा बढ़ा सकती है. 

4. जंक फूड – पिज्जा, बर्गर, चिप्स और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए क्योंकि इनमें पोषण कम और फैट ज्यादा होता है.

5. बिना धोए फल और सब्जियां – इनमें बैक्टीरिया हो सकते हैं, इसलिए हमेशा इन्हें अच्छी तरह धोकर ही खाएं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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महिलाओं की आंखें मांगती हैं हर उम्र में खास देखभाल, जानें आई केयर टिप्स

महिलाओं की आंखें मांगती हैं हर उम्र में खास देखभाल, जानें आई केयर टिप्स


आमतौर पर 12 से 19 साल की उम्र के बीच लड़कियों की आंखें तेजी से बदलती हैं. जिसका मुख्य कारण स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट पर ज्यादा समय बिताना है. ऐसे में डिजिटल आंखों का तनाव, मायोपिया, एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस जैसे संभावित समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच कराएं., धुंधली दूर दृष्टि या बार-बार सिरदर्द पर ध्यान दें.20-20-20 नियम अपनाएं यानी हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें.

20 से 39 की उम्र में लाइफस्टाइल में बदलाव आंखों पर असर डालते हैं. लंबे समय तक काम, स्क्रीन का अधिक उपयोग, कॉन्टैक्ट लेंस. इनसे सूखी आंखें, संक्रमण, गर्भावस्था के दौरान अस्थायी दृष्टि बदलाव जैसे समस्याएं हो सकती है. ऐसे में हर साल आंखों की जांच करवाएं, कॉन्टैक्ट लेंस साफ रखें, स्क्रीन का समय कम करें, सूखी आंखों के लिए लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का यूज करें.

20 से 39 की उम्र में लाइफस्टाइल में बदलाव आंखों पर असर डालते हैं. लंबे समय तक काम, स्क्रीन का अधिक उपयोग, कॉन्टैक्ट लेंस. इनसे सूखी आंखें, संक्रमण, गर्भावस्था के दौरान अस्थायी दृष्टि बदलाव जैसे समस्याएं हो सकती है. ऐसे में हर साल आंखों की जांच करवाएं, कॉन्टैक्ट लेंस साफ रखें, स्क्रीन का समय कम करें, सूखी आंखों के लिए लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का यूज करें.

Published at : 07 Mar 2026 11:59 AM (IST)

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पैरों में दिखें ये 7 लक्षण तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना डैमेज हो जाएगा लिवर

पैरों में दिखें ये 7 लक्षण तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना डैमेज हो जाएगा लिवर


हमारे शरीर में किसी भी बीमारी की शुरुआत अचानक नहीं होती. बीमारी होने से पहले शरीर बार-बार इसके संकेत देता है. अगर समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए तो बीमारी से बचा जा सकता है. ऐसे ही लिवर भी खराब होने से पहले कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं. आज हम आपको आपके पैरों में दिखने वाले वे 7 लक्षण बताएंगे, जो लिवर डैमेज होने का संकेत हो सकते हैं. समय रहते डॉक्टर को दिखाने से बड़ी बीमारी से बचा जा सकता है. 

लिवर और पैरों का संबंध 

लिवर हमारे शरीर का एक बेहद महत्तवपूर्ण अंग है, लेकिन जब लिवर ठीक तरह से काम नहीं करता तो इसके कुछ संकेत पैरों में दिखाई देते है, जिसे आमतौर पर पैरों में होने वाले बदलावों को मामूली बात मानकर नजरअंदाज करना आसान है. हम सोचते है कि शायद यह खराब जूते पहनने या लंबे समय तक खड़े रहने के कारण हो सकता है, लेकिन कभी-कभी, ये बदलाव आंतरिक समस्या पैदा कर सकते हैं. विशेष रूप से लिवर स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं को, नजरअंदाज नहीं करना चाहिए बल्कि फौरन डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

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इन लक्षणों को नजरअंदाज न करेंः-

  • पैरों में अचानक सूजन आनाः अगर आपके तलवों में अचानक सूजन दिखाई देने लगे तो यह लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है. लिवर सही तरीके से काम न करने पर शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है जिससे पैरों में सूजन आ जाती है.
  • तलवों में ज्यादा खुजली होनाः जब लिवर ठीक से काम नहीं करता तो शरीर में कुछ पदार्थ जमा हो जाते हैं, जिससे त्वचा में खुजली होने लगती है.
  • पैरों का रंग बदलनाः अगर पैरों की त्वचा का रंग पीला, गहरा या असामान्य दिखने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार यह शरीर में बिलीरुबिन बढ़ने का संकेत हो सकता है.
  • नसें ज्यादा उभरनाः कभी कभी पैरों की नसें ज्यादा उभरी हुई दिखाई देने लगती हैं और इसके साथ सूजन और दर्द भी हो तो एक तरह से ये भी लिवर से जुड़ी समस्याओं का एक संकेत हो सकता है.
  • लगातार दर्द या भारीपन महसूस होनाः यह भी शरीर के अंदर किसी समस्या की ओर इशारा करता है. जब पैरों में लगातार दर्द, भारीपन या थकान महसूस हो रही हो तो यह भी लिवर की बीमारी का एक संकेत हो सकता है. 
  • पैरों में हद से ज्यादा जलन होनाः जब यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो यह भी लिवर की खराबी का एक संकेत हो सकता है. कई लोगों को पैरों के तलवों में जलन या गर्माहट महसूस होने लगती है.
  • चमड़ी का बहुत ज्यादा सूखनाः अगर पैरों की चमड़ी बहुत ज्यादा सूखी या फटने लगे तो यह भी किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है.

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लक्षण दिखाई देने पर ये उपाय करें

अगर आपको इस प्रकार के लक्षण आपको अपने पैरों में लगातार दिखाई दे रहे है या ये परेशानी बढ़ते ही जा रही है तो  इसे बिलकुल हलके में ना ले और नजरंदाज ना करें इसकी तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपनी परेशानी बताएं और इसका जांच कराएं, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर आपके लिवर को गंभीर नुकसान हो सकता हैं.

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मर्दों को गलती से भी इग्नोर नहीं करने चाहिए ये 5 बेहद कॉमन लक्षण, वरना बढ़ जाएगा प्रोस्टेट

मर्दों को गलती से भी इग्नोर नहीं करने चाहिए ये 5 बेहद कॉमन लक्षण, वरना बढ़ जाएगा प्रोस्टेट


बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में कई स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिलती हैं, जिनमें प्रोस्टेट से जुड़ी परेशानी भी शामिल है. प्रोस्टेट पुरुषों के प्रजनन तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो मूत्राशय के नीचे स्थित होती है और मूत्रमार्ग को घेरता है. उम्र के साथ यह ग्रंथि धीरे-धीरे बड़ी हो सकती है, जिसे प्रोस्टेट का बढ़ना कहा जाता है. यह समस्या आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र वाले पुरुषों में देखने को मिलती है, लेकिन कई मामलों में यह समस्या कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिली है. आमतौर पर इसके लक्षण पेशाब करने में समस्या के रूप में सामने आते हैं, जिन्हें बढ़ती उम्र के लक्षण समझकर नजरअंदाज़ नहीं कर देना चाहिए और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर कि सलाह लेनी चाहिए.

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प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने के 5 संकेत क्या हैं?

1. कमजोर यूरिन स्ट्रीम:

प्रोस्टेट बढ़ने का सबसे पहला संकेत है पेशाब की धार का कमजोर हो जाना. अगर आपको पेशाब करने में ज़्यादा समय लगता है या पेशाब की धार पहले जैसी तेज नहीं है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि प्रोस्टेट ग्रंथि मूत्रमार्ग पर दबाव डाल रही है, जिससे पेशाब का बहाव कम हो सकता तथा रुक सकता है.

2. मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का एहसास:

कई बार पेशाब करने के बाद भी ऐसा लगता है कि मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ है और बार-बार पेशाब करने की इच्छा होती रहती है. दरअसल, प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने से मूत्रमार्ग पर दबाव पड़ता है जिससे मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हो पाता, यह प्रोस्टेट बढ़ने का एक लक्षण है. इसके कारण व्यक्ति को बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस होती रहती है.

3. पेशाब करने में कठिनाई:

कहीं आपके साथ भी ऐसा तो नहीं होता कि पेशाब करने में कुछ ज्यादा समय लगता हो, कई बार पुरुषों को पेशाब करने में परेशानी होती है या काफी समय तक इंतजार करना पडता है, यह प्रोस्टेट कि समस्या हो सकती है. यह स्थिति तब होती है जब बढ़ा हुआ प्रोस्टेट मूत्रमार्ग पर दबाव डालता है, अगर आपको बार-बार इस प्रकार कि समस्या हो रही है, तो इसे बिलकुल भी नजरअंदाज ना करें.

4. रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना (नोक्टूरिया):

अगर आप रात में बार बार उठकर पेशाब करने जाते है, तो यह भी प्रोस्टेट बढ़े हुए होने का संकेत हो सकता है. इससे लोगों की नींद भी पूरी नहीं होती और उनका स्वभाव चिड़चिड़ा रहने लगता है, कई बार लोग इसे एक सामान्य समस्या या बढ़ती हुए उम्र के साथ होने वाली समस्या समझकर समझकर टाल देते हैं.

5. पेशाब का बूंद-बूंद टपकना:

कई बार पेशाब करने के बाद भी कुछ बूंदें टपकती रहती हैं, यह भी प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है.

प्रोस्टेट के इलाज का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?

चिकित्सा क्षेत्र में हुई प्रगति ने प्रोस्टेट का इलाज आसान बना दिया है, अब बिना ऑपरेशन के भी सिर्फ दवाइयों से ही इसका इलाज संभव है. आपको यह ध्यान रखना जरुरी है की जैसे ही आपको कोई लक्षण दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज़ न करें, बस जल्द से जल्द किसी यूरोलॉजिस्ट से मिले.

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