क्या है एक्सरसाइज करने का सही वक्त, जानिए अचानक हार्ट अटैक के शिकार क्यों हो रहे युवा?

क्या है एक्सरसाइज करने का सही वक्त, जानिए अचानक हार्ट अटैक के शिकार क्यों हो रहे युवा?


Right Time For Exercise: आज के समय में फिट शरीर को लेकर युवाओं में काफी जागरूकता बढ़ गई है. हर कोई चाहता है कि उसका शरीर मजबूत, फिट और मस्कुलर दिखे. इसी वजह से जिम जाना और एक्सरसाइज करना अब एक आम आदत बन गई है, लेकिन चिंता की बात यह है कि पिछले कुछ सालों में युवाओं में हार्ट अटैक और अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़े हैं. खासकर वे लोग जो नियमित रूप से जिम जाते हैं या भारी वर्कआउट करते हैं, उनमें भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि एक्सरसाइज का सही समय क्या है, और क्यों कुछ गलत आदतें या लापरवाही हार्ट अटैक का कारण बन सकती हैं. 

एक्सरसाइज करना हार्ट के लिए कितना फायदेमंद होती है?

आमतौर पर एक्सरसाइज को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. यह वजन कम करने, मसल्स मजबूत करने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है, लेकिन अगर एक्सरसाइज गलत तरीके से या जरूरत से ज्यादा की जाए, तो यह शरीर और दिल पर उल्टा असर भी डाल सकती है. 

क्यों बढ़ रहा है युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा?

1. अचानक बहुत ज्यादा हार्ड वर्कआउट करना – कई लोग बिना तैयारी के सीधे भारी वजन उठाना, तेज दौड़ना या हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज शुरू कर देते हैं. इससे दिल पर अचानक दबाव पड़ता है, जो खतरनाक हो सकता है. 

2. पहले से मौजूद दिल की बीमारी का पता न होना – बहुत से लोगों को पता ही नहीं होता कि उन्हें ब्लॉकेज, हाई बीपी या दिल की कोई समस्या है. ऐसे में ज्यादा मेहनत वाली एक्सरसाइज दिल के लिए जोखिम बढ़ा सकती है. 

3.शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) –वर्कआउट के दौरान पसीना निकलता है. अगर पानी या इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाए तो दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकते हैं. 

4. गलत डाइट और सप्लीमेंट का इस्तेमाल – कुछ लोग एनर्जी ड्रिंक, स्टेरॉयड या बिना सलाह के सप्लीमेंट लेते हैं. ये चीजें दिल की धड़कन को तेज कर सकती हैं और खतरा बढ़ा सकती हैं. 

5. बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड में एक्सरसाइज – बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड के मौसम में एक्सरसाइज करने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हार्ट पर असर हो सकता है.

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क्या है एक्सरसाइज करने का सही वक्त?

एक्सरसाइज का सही समय हर व्यक्ति के रूटीन और शरीर की जरूरत पर निर्भर करता है. सुबह एक्सरसाइज करने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है, शरीर दिनभर एक्टिव रहता है, मानसिक तनाव कम होता है और मूड बेहतर रहता है, हालांकि सुबह शरीर थोड़ा जकड़ा हुआ होता है इसलिए वार्म-अप जरूरी है. वहीं शाम के समय एक्सरसाइज करने से शरीर ज्यादा लचीला होता है, ताकत बेहतर महसूस होती है, चोट लगने का खतरा कम होता है और तनाव भी कम होता है, लेकिन कुछ लोगों में देर शाम की एक्सरसाइज नींद को प्रभावित कर सकती है. 

किन लोगों को ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए?

जिनको पहले से हार्ट प्रॉब्लम है, हाई बीपी या डायबिटीज वाले लोग, बहुत ज्यादा मोटापे से परेशान लोग, लंबे समय से एक्सरसाइज न करने वाले लोगों को ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए. साथ ही एकदम से भारी वर्कआउट शुरू करना गलत है. शरीर को समय देना जरूरी है. एक्सरसाइज से पहले और बाद में हल्की स्ट्रेचिंग करनी चाहिए. वर्कआउट के दौरान सांस रोकना दिल पर दबाव डाल सकता है. अगर चक्कर, सीने में दर्द या घबराहट महसूस हो तो तुरंत एक्सरसाइज रोक दें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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दिन से ज्यादा गर्म क्यों हो गईं रातें? कम नींद, चिड़चिड़ापन और हाई ब्लड प्रेशर से राहत कब…

दिन से ज्यादा गर्म क्यों हो गईं रातें? कम नींद, चिड़चिड़ापन और हाई ब्लड प्रेशर से राहत कब…


भारत में दिन की गर्मी तो सबको पता है, लेकिन अब सूरज ढलने के बाद भी राहत नहीं मिल रही है. रातें पहले से कहीं ज्यादा गर्म हो गई हैं और यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ हिस्सों को छोड़कर पूरे देश में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने वाला है. कई जगहों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो गया है. IMD के अनुसार, जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री ज्यादा होता है तो उसे ‘वार्म नाइट’ कहते हैं और 6.4 डिग्री से ज्यादा को ‘सीवियर वार्म नाइट’. ये गर्म रातें अब आम हो गई हैं, लेकिन क्यों और कैसे? एक्सप्लेनर में समझते हैं… 

सवाल 1: भारत में रात में गर्मी क्यों बढ़ती जा रही है?  

जवाब: रातें अब देश की हीट क्राइसिस का बड़ा हिस्सा बन गई हैं. इसके दो बड़े कारण हैं. एक वैश्विक जलवायु परिवर्तन और दूसरा शहरों में बढ़ता शहरीकरण. कंक्रीट, एस्फॉल्ट और शीशे दिन भर सूरज की गर्मी सोख लेते हैं और रात में धीरे-धीरे गर्मी छोड़ते हैं. ऊंची-ऊंची इमारतें हवा का रुख रोक लेती हैं, जिससे गर्मी जमीन के पास ही फंस जाती है.

गर्मी पर रिसर्च रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहरों में रात के तापमान में होने वाले 60 प्रतिशत बढ़ोतरी का कारण यही स्थानीय गर्मी रोकना है, जबकि 40 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैसों के कारण है. इसके साथ नमी भी बढ़ रही है. उत्तर भारत में 2012-2022 के बीच शहरों में नमी 30-40 प्रतिशत से बढ़कर 40-50 प्रतिशत हो गई.

दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर और लखनऊ में यह बढ़ोतरी 6-9 प्रतिशत तक रही. ज्यादा नमी से पसीना सूखता नहीं और शरीर ठंडा नहीं हो पाता. एयर कंडीशनर चलाने से बाहर और गर्मी निकलती है, जो एक फीडबैक लूप बना रही है. एलनीनो के दौरान यह समस्या और बढ़ जाती है. इस साल एलनीनो विकसित हो रहा है, इसलिए 2026 की सर्दियां और 2027 की गर्मियां खासतौर पर नजर रखने वाली हैं.

 

दिल्ली में रात का न्यूनतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक रहता है

सवाल 2: कितनी तेजी से बढ़ रही हैं गर्म रातें?

जवाब: 2025 में ScienceDirect ने 1980-2020 के बीच यानी 40 सालों की एक स्टडी की. इसके मुताबिक, गर्म रातें हर दशक में 2 से 8 दिन बढ़ गई हैं, खासकर पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और प्रायद्वीपीय भारत में. काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की 2025 जिला-स्तरीय रिपोर्ट कहती है कि 734 जिलों में से 417 जिले यानी आधे से ज्यादा हाई या वेरी हाई हीट रिस्क जोन में हैं. इनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश शामिल हैं.

पूरे देश की 76 प्रतिशत आबादी इन हाई रिस्क जोनों में रहती है. 2012-2022 के बीच बड़े शहरों में गर्म रातों की संख्या बढ़ी है. मुंबई में हर गर्मी में 15 अतिरिक्त बहुत गर्म रातें, बेंगलुरु में 11, भोपाल और जयपुर में 7-7 और दिल्ली में 6 हो गई हैं. CEEW रिपोर्ट के मुताबिक, गर्म रातें गर्म दिनों से भी तेजी से बढ़ रही हैं.

शहर अब रात में ‘ओवन’ जैसा महसूस होता है. खराब शहरी प्लानिंग, कम हरियाली, सूखते जल स्रोत, कंक्रीट बढ़ना और तीन लैंडफिल ने गर्मी बढ़ा दी है. मुंबई, बेंगलुरु, भोपाल, जयपुर, चेन्नई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में गर्म रातें सबसे ज्यादा बढ़ी हैं. स्मार्ट सिटी स्टडी (2001-2024) में श्रीनगर में दिन और कंपाउंड हीटवेव सबसे ज्यादा, गुजरात के दाहोद में सबसे तीव्र कंपाउंड हीटवेव और वाराणसी में सबसे तीव्र नाइट-टाइम हीटवेव दर्ज हुई.

सवाल 3: क्यों कहते हैं कि गर्म रातें दिन से भी ज्यादा खतरनाक हैं?  

जवाब: मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दिन में गर्मी पड़ती है तो रात में शरीर ठंडा होकर रिकवर करता है, लेकिन गर्म रातों में यह राहत नहीं मिलती. इससे डिहाइड्रेशन, नींद खराब होना, हाई ब्लड प्रेशर, थकान, चिड़चिड़ापन और हीट-स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. बुजुर्ग, बच्चे और दिल-फेफड़ों के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं.

मुंबई के ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल की डॉ. मंजुषा अग्रवाल कहती हैं, ‘यह डिहाइड्रेशन, नींद की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर और हीट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाता है. बार-बार गर्म रातें थकान, चिड़चिड़ापन और लगातार हीट स्ट्रेस बढ़ाती हैं.’

गर्म रातों की वजह से सिरदर्द, चक्कर, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, डिहाइड्रेशन और नींद की कमी आम हो गई है. इससे याददाश्त कम होना, एकाग्रता की समस्या, चिंता और डिप्रेशन भी हो सकता है. 1998-2017 के बीच दुनिया में 1.66 लाख लोगों की मौत हीटवेव से हुई थी. भारत में 2023 में 48,000 हीटस्ट्रोक केस और 159 मौतें दर्ज हुईं, लेकिन असली संख्या ज्यादा है.

 

गर्म रातों में सबसे बड़ी बीमारी नींद की समस्या बन जाती है
गर्म रातों में सबसे बड़ी बीमारी नींद की समस्या बन जाती है

सवाल 4: रोजमर्रा की जिंदगी और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है?  

जवाब: गर्म रातों से काम की क्षमता घट रही है. CSE रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत में ग्लोबल वार्मिंग से 5.8 प्रतिशत वर्किंग ऑवर्स (करीब 3.4 करोड़ फुल-टाइम जॉब्स) गंवाने का अनुमान है. रात में AC चलाने से बिजली की मांग बढ़ती है और बाहर गर्मी निकलने से समस्या और बढ़ती है. मजदूरों और आउटडोर वर्कर्स को दिन-रात दोनों समय गर्मी झेलनी पड़ रही है.

सवाल 5: तो क्या वो चांदनी में ठंडी रातें कभी लौट कर नहीं आएंगी?

जवाब: 2015-2100 के बीच एक 2025 मॉडलिंग स्टडी के अनुसार, गर्म रातें हर दशक में 10 से 13 दिन बढ़ सकती हैं. कंपाउंड हीटवेव और आम होंगे. बचाव के लिए शहरों में कूल रूफ, रिफ्लेक्टिव पेवमेंट, ज्यादा पेड़, बेहतर हवा के रास्ते और कम कंक्रीट जरूरी है. सरकार और शहरों को शहरी प्लानिंग सुधारनी होगी. IMD अब रात के तापमान की भी चेतावनी दे रहा है. कुल मिलाकर अगर इंसान अपने दिनचर्या के तरीके सुधार ले, तो पर्यावरण सुधरेगा जिससे ठंडी चांदनी रातें लौट सकती हैं.

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अपनी डाइट में ये तीन चीजें कर लें शामिल, प्रोटीन के लिए नहीं पड़ेगी नॉनवेज खाने की जरूरत

अपनी डाइट में ये तीन चीजें कर लें शामिल, प्रोटीन के लिए नहीं पड़ेगी नॉनवेज खाने की जरूरत


High Protein Diet: भागदौड़ भरी इस जिंदगी में लोगों को आराम के साथ-साथ बैलेंस्ड डाइट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन लोग अक्सर अपनी डाइट ही भूल जाते हैं जिससे उनके शरीर को सभी जरूरी मिनरल्स नहीं मिल पाते. नॉन-वेज खाने वाले लोगों को तो कहीं न कहीं काफी हद तक प्रोटीन मिल जाता है, लेकिन जो लोग नॉन-वेज नहीं खाते वो लोग अपनी डाइट में ऐसा क्या खाएं जिससे उनको पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन मिले. वैसे तो काफी सारे वेज विकल्प मौजूद हैं, लेकिन आज आपको बताते हैं सबसे बेहतरीन विकल्प जिनसे आप अपने शरीर को पर्याप्त प्रोटीन दे सकते हो.

सोयाबीन

सोयाबीन एक हाई प्रोटीन वाला खाना है, शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का एक बेहतरीन सोर्स है. इसमें आवश्यक अमीनो एसिड, फाइबर और हेल्दी फैट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. सोयाबीन से सोया दूध, टोफू, सोया चंक्स और सोया ऑयल जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं, जो रोजाना की डाइट में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं. लगातार सोयाबीन खाने से नॉन-वेज खाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है, यह आपकी मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाता है.

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दूध और डेयरी चीजें

दूध, दही, पनीर और चीज जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत हैं. एक गिलास दूध में लगभग 5-8 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि पनीर और दही में यह मात्रा और भी अधिक मानी जाती है. इसके अलावा, ये हड्डियों के लिए जरूरी कैल्शियम भी देते हैं. यदि आप रोजाना डेयरी उत्पादों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं, तो आप नॉन-वेज खाने को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

नट्स और सीड्स

बादाम, काजू, अखरोट, सूरजमुखी और कद्दू के बीज छोटे लेकिन प्रोटीन और हेल्दी फैट्स का एक बेहतरीन सोर्स हैं. ये स्नैक्स की तरह खाने में आसान हैं और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं, इन्हें अपने पास रखना काफी आसान है आप अपना काम करते हुए भी इन्हें खा सकते हैं. दिन में एक मुट्ठी नट्स और सीड्स खाने से प्रोटीन की जरूरत पूरी होती है और दिल की सेहत भी अच्छी रहती है.

यह है प्रोटीन के कुछ बेहतरीन सोर्सेज जिन्हें आप अपनी डाइट में मिलाकर प्रोटीन की पूर्ति कर सकते हैं और यह बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं. साथ ही इससे आपको नॉन-वेज खाने की जरूरत भी नहीं रहेगी ये चीजें शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, ऊर्जा, और मजबूती देते हैं और आपकी मांसपेशियों, हड्डियों और हृदय की हेल्थ को बेहतर करते हैं.

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क्या रात को ब्रा पहनकर सोने से होता है कैंसर? जान लीजिए इसके पीछे की सच्चाई

क्या रात को ब्रा पहनकर सोने से होता है कैंसर? जान लीजिए इसके पीछे की सच्चाई


Does Wearing A Bra At Night Cause Breast Cancer: सोशल मीडिया पर तमाम तरह के दावे किए जाते हैं. इन्हीं में से एक दावा फिटनेस कोच और इंफ्लुएंसर प्रियंक मेहता ने अपने वीाडियो में दावा किया था कि रात में ब्रा पहनकर सोने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. वीडियो में वह महिलाओं को सलाह देते हैं कि रात के समय ब्रा पहनने से बचें, ताकि किसी संभावित जोखिम से दूर रहा जा सके. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर इस तरह के दावे क्यों होते हैं और इसमें सच्चाई कितनी है. 

 इंफ्लुएंसर ने क्या दावा किया था?

इस वीडियो में वह एक बातचीत के जरिए समझाते हैं कि रात में शरीर अपने अंदर जमा टॉक्सिक तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है. उनके अनुसार बगल, ब्रेस्ट और चेस्ट के आसपास मौजूद लिम्फ नोड्स शरीर की सफाई करते हैं. उनका कहना है कि अगर कोई महिला बहुत टाइट या तार वाली ब्रा पहनकर सोती है, तो यह प्रक्रिया रुक सकती है, जिससे सूजन, तरल पदार्थ जमा होना और समय के साथ ब्रेस्ट के टिश्यू पर  असर पड़ सकता है. 

 

क्या कहता है मेडिकल साइंस?

हालांकि यह दावा सुनने में गंभीर लगता है, लेकिन मेडिकल साइंस इसे सही नहीं मानता. इस तरह की बात पहली बार साल 1995 में सामने आई थी, जब सिडनी रॉस सिंगर और सोमा ग्रिसमाइजर ने अपनी किताब ड्रेस्ड टू किल में ब्रा और स्तन कैंसर के बीच संबंध होने की बात कही थी. इसके बाद में 2017 में इसका दूसरा पार्ट भी आया, लेकिन एक्सपर्ट ने इसे खारिज कर दिया.

अमेरिकी कैंसर सोसायटी की रिपोर्ट

अमेरिकी कैंसर सोसायटी के अनुसार ऐसा कोई साइंटफिक या मेडिकल प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि ब्रा पहनने से लिम्फ का प्रवाह रुकता है या इससे कैंसर होता है. इसी तरह अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान भी साफ कहते हैं कि ब्रा पहनना, पसीना रोकने वाले उत्पादों का उपयोग करना या स्तन प्रत्यारोपण, इनमें से किसी का भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से कोई संबंध नहीं है.

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ब्रिटेन की कैंसर रिसर्च का भी दावा

ब्रिटेन की कैंसर रिसर्च संस्था का भी यही कहना है कि इस विषय पर ज्यादा रिसर्च इसलिए नहीं हुआ क्योंकि ऐसा कोई साइंटफिक आधार ही नहीं है जो ब्रा और कैंसर के बीच संबंध दिखाता हो. उपलब्ध स्टडी में भी ऐसा कोई लिंक सामने नहीं आया है.

साल 2014 में 1500 से ज्यादा महिलाओं पर किए गए एक बड़े  स्टडी में भी यह पाया गया कि ब्रा पहनने की आदत, उसे कितने समय तक पहना गया, उसमें तार का उपयोग या पहनने की शुरुआत की उम्र, इनमें से किसी का भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से कोई संबंध नहीं है. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

firstcheck_in की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर शुएब जैदी भी इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हैं. उनका कहना है कि दिन हो या रात, ब्रा पहनने से कैंसर का खतरा नहीं बढ़ता. उन्होंने यह भी समझाया कि ब्रेस्ट में लिम्फ का प्रवाह कई रास्तों से होता है, इसलिए अगर किसी एक हिस्से पर दबाव भी पड़ता है, तो शरीर दूसरे रास्तों से इसे संतुलित कर लेता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी को हुआ ‘रेटिनल डिटैचमेंट’, जानें क्या है आंखों की यह गंभीर बीमारी?

इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी को हुआ ‘रेटिनल डिटैचमेंट’, जानें क्या है आंखों की यह गंभीर बीमारी?


Imran Khan Wife Medical Update: पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित अडियाला जेल से जुड़ा एक स्वास्थ्य मामला इन दिनों चर्चा में है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी की आंख की गंभीर समस्या के चलते सर्जरी करानी पड़ी. जेल प्रशासन के अनुसार, उनकी दाईं आंख की रोशनी प्रभावित हो रही थी, जिसकी शिकायत के बाद तुरंत  एक्सपर्ट से जांच कराई गई. जांच में रेटिना के अपनी जगह से खिसकने यानी रेटिनल डिटैचमेंट की पुष्टि हुई, जो आंखों से जुड़ी एक गंभीर स्थिति मानी जाती है.

डॉक्टरों की टीम, जिसमें प्रोफेसर डॉक्टर नदीम कुरैशी शामिल थे, ने उनका इलाज किया और सर्जरी की सलाह दी. 16 अप्रैल को उन्हें रावलपिंडी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जरूरी जांच के बाद ऑपरेशन किया गया. सर्जरी के बाद एक रात अस्पताल में निगरानी में रखने के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया. डॉक्टरों ने आगे भी नियमित जांच और देखभाल जारी रखने की सलाह दी है.

रेटिनल डिटैचमेंट क्या होता है?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के अनुसार रेटिनल डिटैचमेंट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आंख के पीछे मौजूद बेहद संवेदनशील परत अपनी जगह से अलग हो जाती है. यह परत रोशनी को पहचानने और उसे दिमाग तक पहुंचाने का काम करती है. अगर समय पर इलाज न हो, तो यह स्थायी रूप से नजर कमजोर कर सकती है. एक्सपर्ट के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ आंख के अंदर मौजूद जेल जैसा पदार्थ बदलने लगता है, जिससे यह समस्या पैदा हो सकती है.

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इस तरह की स्थिति में सबसे जरूरी होता है तुरंत पहचान और इलाज. मरीज को अचानक धुंधला दिखना, आंखों के सामने परछाइयां या चमक जैसी चीजें दिखना या किसी हिस्से में अंधेरा महसूस होना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. ऐसे संकेत मिलते ही देरी किए बिना आंख के विशेषज्ञ से संपर्क करना बेहद जरूरी होता है.

देखभाल भी होती है जरूरी

सर्जरी के बाद देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है. मरीज को आंखों पर दबाव से बचना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेना और समय-समय पर जांच कराना जरूरी होता है. खासकर शुरुआती कुछ दिन बहुत अहम होते हैं, क्योंकि इसी दौरान आंख की रिकवरी तय होती है. बुशरा बीबी की सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने आगे की निगरानी और फॉलोअप जारी रखने की सलाह दी है. जेल प्रशासन के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है और डॉक्टरों की हिदायत के मुताबिक इलाज जारी रहेगा.

इससे पहले भी प्रोफेसर डॉक्टर नदीम कुरैशी की टीम ने इमरान खान की आंखों का परीक्षण किया था. वहीं, मामले के बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की ओर से उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई गई है और बेहतर इलाज की मांग की गई है.

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पीएम मोदी भी जमकर खाते हैं प्याज, जानें इसके फायदे और नुकसान?

पीएम मोदी भी जमकर खाते हैं प्याज, जानें इसके फायदे और नुकसान?


Is Eating Raw Onion Good For Health: पश्चिम बंगाल के दौरे के दौरान व्यस्त चुनावी रैलियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक हल्का-फुल्का पल भी चर्चा में आ गया, जब वह झारग्राम में रुककर झालमुड़ी का स्वाद लेते नजर आए. इसी दौरान एक दुकानदार ने उनसे पूछा कि क्या वह प्याज खाते हैं, जिस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया “हां, प्याज खाते हैं.” यह छोटी सी बातचीत अब लोगों के बीच दिलचस्प चर्चा का विषय बन गई है. 

भारतीय खानपान का हिस्सा

दरअसल, भारतीय खानपान में प्याज एक अहम हिस्सा है. चाहे सब्जी हो, सलाद हो या चटनी, इसके बिना स्वाद अधूरा लगता है. कई लोग इसे कच्चा खाना पसंद करते हैं, लेकिन सवाल यही उठता है कि क्या कच्चा प्याज सेहत के लिए अच्छा है? जवाब है हां, लेकिन संतुलित मात्रा में. चलिए आपको इसके फायदे बताते हैं.

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क्या होते हैं इसके फायदे?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली netmeds की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे प्याज में विटामिन सी, विटामिन बी6, फोलेट और पोटैशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं. खास बात यह है कि इसमें कैलोरी कम होती है, इसलिए यह डाइट में शामिल करने के लिए भी अच्छा विकल्प माना जाता है.

इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद

इम्यूनिटी मजबूत करने में भी प्याज का बड़ा योगदान है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, खासकर क्वेरसेटिन, शरीर को इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं और सूजन को कम करते हैं. यही कारण है कि नियमित रूप से थोड़ी मात्रा में कच्चा प्याज खाने से शरीर की रोग इम्यून सिस्टम बेहतर हो सकती है.

हार्ट के लिए फायदेमंद 

हार्ट की सेहत के लिए भी प्याज फायदेमंद माना जाता है. इसके तत्व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने और ब्लड सर्कुलेशन सुधारने में मदद कर सकते हैं. इससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है. 

डाइजेशन सही रखता है

डाइजेशन सिस्टम को दुरुस्त रखने में भी कच्चा प्याज कारगर है. इसमें मौजूद प्रीबायोटिक फाइबर आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है, जिससे गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. इसकेसाथ ही यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी मददगार माना जाता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है. 

क्या होते हैं इसके नुकसान?

हालांकि, हर चीज की तरह इसका ज्यादा सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है. अधिक मात्रा में कच्चा प्याज खाने से कुछ लोगों को गैस, जलन या बदबू की समस्या हो सकती है. कुछ मामलों में एलर्जी या दवाओं के साथ प्रतिक्रिया भी देखने को मिलती है. इसलिए इसे संतुलित मात्रा में ही खाना बेहतर है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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