वजन नहीं घट रहा तो घबराएं नहीं, ये 7 संकेत बताते हैं फैट तेजी से हो रहा है कम

वजन नहीं घट रहा तो घबराएं नहीं, ये 7 संकेत बताते हैं फैट तेजी से हो रहा है कम


अगर आप लगातार वर्कआउट कर रहे हैं और दो से तीन हफ्तों से वजन नहीं घट रहा तो घबराने की जरूरत नहीं है. फिटनेस कोच के अनुसार यह संकेत हो सकता है कि शरीर जल्द ही एक साथ जमा पानी और फैट को रिलीज करेगा. इसे व्हूश इफेक्ट कहा जाता है, जिसमें अचानक वजन में 3 से 6 पाउंड तक की गिरावट भी देखने को मिल सकती है.



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वजन घटाने की रेस में नई दवा ने किया कमाल, जानें कितनी कामयाब है यह नई वेट लॉस मेडिसिन?

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ओरल जीएलपी-1 दवाएं, जैसे कि वेगोवी (सेमाग्लूटाइड), पहले वजन घटाने के लिए लोकप्रिय हुई हैं. नई दवा ऑर्फोर्ग्लिप्रोन ने हाल ही में एक बड़े अध्ययन में वेगोवी से बेहतर परिणाम दिखाए. तीसरे चरण के ट्रायल में 97 किलोग्राम के औसत वजन वाले प्रतिभागियों ने ऑर्फोर्ग्लिप्रोन लेने पर 6-8 प्रतिशत वजन कम किया, जबकि वेगोवी लेने वाले केवल 4-5 प्रतिशत वजन घटाने में सफल रहा.

दुनिया भर में मोटापा रोधी दवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है. अनुमान है कि 2024 में यह बाजार लगभग 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था और 2030-2034 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो जाएगा. बढ़ते मोटापे और जीएलपी-1 दवाओं की लोकप्रियता इसके मुख्य कारण हैं.

दुनिया भर में मोटापा रोधी दवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है. अनुमान है कि 2024 में यह बाजार लगभग 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था और 2030-2034 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो जाएगा. बढ़ते मोटापे और जीएलपी-1 दवाओं की लोकप्रियता इसके मुख्य कारण हैं.

Published at : 27 Feb 2026 07:51 AM (IST)

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पानी पीते ही भागते हैं टॉयलेट, एक्सपर्ट से जानें क्या ऐसा होना नॉर्मल या किसी बीमारी का संकेत?

पानी पीते ही भागते हैं टॉयलेट, एक्सपर्ट से जानें क्या ऐसा होना नॉर्मल या किसी बीमारी का संकेत?


Is Frequent Urination After Drinking Water Normal:  मान लीजिए कि आप ऑफिस में हैं या किसी जरूरी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. इस दौरान आपने आधा या एक गिलास पानी पिया और ठीक 15 मिनट भी नहीं हुए कि आपको भागकर टॉयलेट जाना पड़ा. एक-दो बार यह स्थिति हो तो समझ में आता है, लेकिन अगर आपके साथ ऐसा बार-बार हो रहा है, तो मन में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? अगर आपके साथ भी ऐसी स्थिति बन रही है, तो घबराएं नहीं. चलिए, आपको बताते हैं कि इस स्थिति से निपटने के लिए आपको क्या करने की जरूरत है और इस पर एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं.

क्या हो सकते हैं कारण?

देवघर स्थित मधुमेह क्लिनिक के यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि बार-बार यूरिन आने का एक आम कारण ओवरएक्टिव ब्लैडर हो सकता है. इसमें ब्लैडर की मांसपेशियां जरूरत से ज्यादा सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लैडर भरा न होने पर भी तेज यूरिन की इच्छा होती है. इसके अलावा यूरिन इंफेक्शन, चाय-कॉफी या शराब से होने वाली जलन, अनियंत्रित ब्लड शुगर, तनाव के कारण ब्लैडर की संवेदनशीलता बढ़ना या बहुत कम समय में ज्यादा पानी पी लेना भी वजह हो सकता है. जब कोई व्यक्ति एक साथ बहुत ज्यादा पानी पी लेता है, तो किडनी तेजी से अतिरिक्त पानी को फिल्टर करने लगती है, जिससे पेशाब बार-बार आता है. दिनभर में पानी को थोड़े-थोड़े अंतराल पर पीने से यह समस्या अक्सर कम हो जाती है.

कब हो सकता है खतरे का संकेत?

अगर बार-बार यूरिन आने के साथ जलन, दर्द, पेशाब में खून, निचले पेट में परेशानी, बुखार, अचानक तेज पेशाब लगना या रात में बार-बार उठकर टॉयलेट जाना पड़े, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए. ये लक्षण इंफेक्शन, ब्लैडर में सूजन, पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या या डायबिटीज जैसी मेटाबॉलिक बीमारियों की ओर इशारा कर सकते हैं. इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ ब्लैडर की क्षमता और नियंत्रण में बदलाव आ सकता है. वहीं तनाव और चिंता भी ब्लैडर को ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं, जिससे कम पेशाब बनने पर भी बार-बार पेशाब की तीव्र इच्छा महसूस होती है.

क्या करें जिससे राहत मिले?

सबसे पहले यह देखें कि आप कितना और कितनी तेजी से पानी पी रहे हैं. चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे ब्लैडर को परेशान करने वाले पेय कम करें. तय समय पर पेशाब करने की आदत डालें और “जस्ट इन केस” टॉयलेट जाने से बचें. पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज भी ब्लैडर कंट्रोल बेहतर करने में मददगार हो सकती हैं।

इसे भी पढ़ें- Brain Hemorrhage: क्यों होता है ब्रेन हैमरेज? एक्सपर्ट्स से जानें इसके कारण, प्रकार और बचाव के सबसे जरूरी तरीके

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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वक्त न हो या मन न करे तो कैसे रहें फिट? हेल्थ एक्सपर्ट के बताए ये टिप्स रखेंगे आपको एकदम हेल्दी

वक्त न हो या मन न करे तो कैसे रहें फिट? हेल्थ एक्सपर्ट के बताए ये टिप्स रखेंगे आपको एकदम हेल्दी


How To Stay Fit Without Exercise: अक्सर फिट रहने की बात आते ही हमें जिम जॉइन करने, पहाड़ों पर दौड़ने या किसी हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट क्लास में नाम लिखवाने की सलाह दी जाती है. लेकिन हकीकत यह है कि हर किसी के पास न तो इतना वक्त होता है और न ही हर दिन एक्सरसाइज करने का मन, ऐसे में सवाल उठता है कि अगर समय की कमी हो या शरीर साथ न दे, तो क्या फिट रहना संभव है?. चलिए आपको इस सवाल का जवाब देते हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

हेल्थ रिसर्चर जो ब्लॉजेट मानती हैं कि फिटनेस के लिए रोजाना लंबे वर्कआउट जरूरी नहीं होते.  यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट, एक्सरसाइज एंड हेल्थ में सीनियर रिसर्च फेलो हैं ब्लॉजेट के मुताबिक, दिनभर में किए गए छोटे-छोटे शारीरिक मूवमेंट भी सेहत पर बड़ा असर डाल सकते हैं. उनका कहना है कि अगर रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़ा-सा भी अतिरिक्त प्रयास जोड़ दिया जाए, तो शरीर को उसका फायदा मिलने लगता है.

खुद को फिट रखने के मौके तलाशे जाएं

उनके अनुसार, फिट रहने का एक आसान तरीका यह है कि अपनी दिनचर्या में ऐसे मौके तलाशे जाएं, जहां बिना किसी तैयारी के हल्की-सी तेज एक्टिविटी की जा सके. जैसे लिफ्ट की जगह सीढ़ियां लें. पूरा 10 से 12 फ्लोर चढ़ने की जरूरत नहीं, दो फ्लोर चढ़िए और फिर लिफ्ट ले लीजिए. बस से एक स्टॉप पहले उतर जाएं और आखिरी स्टॉप तक तेज चाल में चलें. अगर आप पहले से वॉक करते हैं, तो दो खंभों या लाइट पोस्ट के बीच रफ्तार थोड़ी बढ़ा दें. रिसर्च बताती है कि दिन में कुछ बार एक-दो मिनट की तेज गतिविधि दिल की सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है.

जिम और खेल कूद पर ही निर्भरता नहीं

ब्लॉजेट यह भी कहती हैं कि हफ्ते में एक-दो बार जिम जाना या कभी-कभार खेलकूद करना अच्छी बात है, लेकिन सिर्फ इसी पर निर्भर रहना सही नहीं। बहुत से लोग एक्सरसाइज करने के बावजूद दिन का ज्यादातर वक्त कुर्सी या सोफे पर बैठे रहते हैं. ऐसे लोगों के लिए वह मानती हैं कि असली चुनौती पूरे दिन के मूवमेंट की है, न कि सिर्फ जिम के कुछ मिनटों की।

उनका कहना है कि लगातार लंबे समय तक बैठे रहना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है, भले ही आप रोज वर्कआउट करते हों. इसलिए जरूरी है कि काम के दौरान बीच-बीच में उठें, थोड़ा चलें-फिरें और शरीर को हिलाएं. लंच ब्रेक में टहलना या फोन कॉल के दौरान चलते रहना जैसे छोटे बदलाव भी शरीर को एक्टिव रखने में मदद करते हैं.

फिटनेस के लिए नजरिया बदलने की जरूरत

ब्लॉजेट का मानना है कि फिटनेस को देखने का नजरिया बदलने की जरूरत है, सिर्फ यह गिनने के बजाय कि आपने कितनी एक्सरसाइज की, यह देखना ज्यादा जरूरी है कि आपने दिनभर कितना समय बिल्कुल बिना हिले बिताया. अगर इस समय को कम किया जाए, तो सेहत में अपने आप सुधार दिखने लगता है. उनके मुताबिक, घर के कामकाज, सामान उठाना, सफाई करना या बच्चों के साथ खेलना भी शरीर को सक्रिय रखने के अच्छे तरीके हैं. कोई एक तय नियम नहीं है कि रोज कितनी एक्टिविटी काफी है, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि जितना ज्यादा शरीर को हिलाया जाएगा, उतना ही बेहतर असर सेहत पर पड़ेगा.

यह भी पढ़ें – सिर्फ सुबह-सुबह टहलने से नहीं सुधरेगी हार्ट हेल्थ, जानें क्या-क्या है जरूरी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या सिर्फ स्पर्म ही बनाने का काम करते हैं टेस्टिकल्स? इनके काम जान लेंगे तो उड़ जाएंगे होश

क्या सिर्फ स्पर्म ही बनाने का काम करते हैं टेस्टिकल्स? इनके काम जान लेंगे तो उड़ जाएंगे होश


Natural Ways To Maintain Testosterone Levels: टेस्टिकल्स पुरुष शरीर का यह हिस्सा अक्सर सिर्फ एक ही काम से जोड़ा जाता है स्पर्म बनाना. लेकिन सच इससे कहीं बड़ा है. टेस्टिकल्स और उन्हें सुरक्षित रखने वाला स्क्रोटम शरीर की एक बेहद मुश्किल और जरूरी सिस्टम का हिस्सा हैं. स्क्रोटम पेनिस के नीचे स्थित त्वचा की एक थैली होती है, जिसके भीतर दोनों टेस्टिकल्स सुरक्षित रहते हैं. ये दो न केवल स्पर्म का निर्माण और स्टोर करती हैं, बल्कि पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन भी बनाती और छोड़ती हैं, जो आवाज भारी होने, मांसपेशियों के विकास, दाढ़ी-मूंछ और यौन क्षमता जैसे कई शारीरिक बदलावों के लिए जिम्मेदार होता है.

क्या होता है टेस्टोस्टेरोन?

टेस्टोस्टेरोन एक जरूरी पुरुष हार्मोन है, जो मुख्य रूप से टेस्टिकल्स में बनता है. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली Mayoclinic के अनुसार, यह सिर्फ यौन क्षमता से जुड़ा हार्मोन नहीं है, बल्कि शरीर के कई जरूरी कामों में भूमिका निभाता है. हड्डियों की मजबूती बनाए रखना, शरीर में फैट का संतुलन, मांसपेशियों की ताकत और आकार, चेहरे व शरीर के बालों का विकास, रेड ब्लड सेल्स का निर्माण, फिजिकल रिलेशन ड्राइव और स्पर्म प्रोडक्शन इन सभी प्रक्रियाओं में टेस्टोस्टेरोन की अहम भागीदारी होती है. यही हार्मोन पुरुषों में शारीरिक विशेषताओं के विकास और उन्हें बनाए रखने में मदद करता है.

कब यह शरीर में सबसे ज्यादा बनता है?

आमतौर पर किशोरावस्था और शुरुआती युवावस्था में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अपने चरम पर होता है. इसके बाद उम्र बढ़ने के साथ इसमें धीरे-धीरे कमी आने लगती है. 30 या 40 वर्ष की उम्र के बाद हर साल लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट सामान्य मानी जाती है. लेकिन हर गिरावट को सामान्य बुढ़ापे का हिस्सा नहीं माना जा सकता. कुछ मामलों में कम टेस्टोस्टेरोन किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जिसे हाइपोगोनाडिज्म कहा जाता है. यह स्थिति तब होती है जब टेस्टिकल्स या उन्हें नियंत्रित करने वाली पिट्यूटरी ग्लैंज ठीक से काम नहीं करती और पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती.

इसके कारण क्या होते हैं बदलाव?

कम टेस्टोस्टेरोन के कारण पुरुषों में कई बदलाव देखे जा सकते हैं. यौन इच्छा में कमी, नींद के दौरान होने वाले स्वाभाविक इरेक्शन में गिरावट या इनफर्टिलिटी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. शारीरिक स्तर पर शरीर में फैट बढ़ना, मांसपेशियों की ताकत कम होना, हड्डियों का कमजोर होना, ब्रेस्ट में सूजन या कोमलता और शरीर के बालों का झड़ना भी संभव है. कई लोगों को एनर्जी में कमी महसूस होती है. इमोशनल रूप से भी असर दिख सकता है,जैसे आत्मविश्वास में गिरावट, उदासी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या याददाश्त कमजोर होना. हालांकि ये सभी लक्षण सिर्फ कम टेस्टोस्टेरोन की वजह से ही हों, यह जरूरी नहीं. दवाओं के साइड इफेक्ट, स्लीप एपनिया, थायरॉयड की समस्या, डायबिटीज या डिप्रेशन भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकते हैं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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