मुंबई में तरबूज तो झारखंड में गोलगप्पे खाने से मौत! किन खानों से होती फूड पॉइजनिंग?

मुंबई में तरबूज तो झारखंड में गोलगप्पे खाने से मौत! किन खानों से होती फूड पॉइजनिंग?


इन दिनों देश भर से फूड पॉइजनिंग की कई चौंकाने वाली खबरें सामने आई हैं. हाल ही में मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की रहस्यमयी मौत, झारखंड में गोलगप्पे खाने से एक बच्चे की जान जाना और उत्तर प्रदेश में शादी की दावत में सैकड़ों लोगों का बीमार पड़ना. इन सभी घटनाओं ने एक बार फिर से हमारे खाने की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आइए एक्सप्लेनर में समझेंगे कि आखिर ये घटनाएं क्यों होती हैं, कौन से खाने सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं और आप अपनी सुरक्षा कैसे कर सकते हैं….

सवाल 1: मुंबई में बिरयानी और तरबूज खाने के बाद परिवार की मौत का मामला क्या है?
जवाब: यह बेहद दुखद और फिलहाल रहस्यमयी मामला मुंबई के पायधुनी इलाके का है. 25 अप्रैल 2026 की रात अब्दुल्ला डोकाडिया (40), पत्नी नसरीन (35), दो बेटियां आयशा (16) और जेनब (13) ने परिवार के अन्य लोगों के साथ मिलकर बिरयानी खाई थी. खाना खाने वाले अन्य पांच रिश्तेदारों को कुछ नहीं हुआ. इसके बाद देर रात करीब 1-1:30 बजे जब बच्चियों को भूख लगी तो परिवार ने एक तरबूज काटकर खाया. यह तरबूज बाकी मेहमानों ने नहीं खाया था. सुबह करीब 5 बजे चारों को उल्टी और दस्त शुरू हुए और कुछ ही घंटों में उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई. अस्पताल में इलाज के दौरान रविवार (26 अप्रैल) को चारों की मौत हो गई.

सवाल 2: तो क्या रात को तरबूज खाने से सीधे मौत हो सकती है?
जवाब: फिलहाल इसका सीधा जवाब नहीं दिया जा सकता. पुलिस और फॉरेंसिक जांच अभी जारी है और मौत का वास्तविक कारण 15 दिनों में पोस्टमॉर्टम और फूड सैंपल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा. अभी तक की जानकारी के मुताबिक:

  • सबसे ज्यादा शक फूड पॉइजनिंग पर है.
  • पुलिस ने आधा खाया हुआ तरबूज जांच के लिए भेजा है.
  • राज्य का खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) इस बात की जांच कर रहा है कि कहीं तरबूज में कोई जहरीला पदार्थ या मिलावट तो नहीं था.
  • जेजे अस्पताल की माइक्रोबायोलॉजी लैब बैक्टीरिया या किसी अन्य संक्रमण की जांच कर रही है.

डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तरबूज अपने आप में जहरीला नहीं होता, लेकिन यह दूषित हो सकता है. अगर तरबूज को उगाते समय या काटते समय गंदे पानी या सतह का इस्तेमाल हुआ हो, या उसमें किसी जहरीले रसायन की मिलावट की गई हो, तो वह गंभीर रूप से नुकसानदेह हो सकता है. यह पहला मामला नहीं है जहां तरबूज खाने से मौत हुई हो, लेकिन ऐसे मामलों में आमतौर पर दूषित पानी या केमिकल इंजेक्शन (मिठास के लिए) ही वजह बनता है. जांच रिपोर्ट का इंतजार है.

 

दूषित तरबूज खाने से हो सकती है मौत

सवाल 3: क्या हाल ही में फूड पॉइजनिंग की ऐसी ही अन्य घटनाएं भी हुई हैं?
जवाब: जी हां, देश के अलग-अलग हिस्सों से फूड पॉइजनिंग की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं:

  • झारखंड: गिरिडीह जिले में गोलगप्पे (पानी पूरी) खाने के बाद एक 7 साल के बच्चे की मौत हो गई और 19 लोग बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हुए. प्रारंभिक जांच में मुख्य संदेह गोलगप्पे के दूषित पानी पर है.
  • उत्तर प्रदेश: संभल जिले में एक शादी समारोह के दौरान लौकी की बर्फी खाने से 15 बच्चों समेत 100 से ज्यादा लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए. खाद्य सुरक्षा विभाग ने लौकी की बर्फी का सैंपल जांच के लिए भेजा है.

ये घटनाएं दिखाती हैं कि फूड पॉइजनिंग सिर्फ एक हल्की बीमारी नहीं है, बल्कि यह जानलेवा भी साबित हो सकती है. स्ट्रीट फूड से लेकर बड़े आयोजनों के खाने तक कहीं भी खतरा हो सकता है.

सवाल 4: आखिर फूड पॉइजनिंग मौत के दरवाजे तक कैसे धकेल देती है?
जवाब: फूड पॉइजनिंग को अक्सर लोग सामान्य अपच या पेट खराब होना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह जानलेवा तब बन जाती है जब स्थिति गंभीर रूप ले लेती है. NHS.UK की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 5 बड़ी वजहों से मौत हो सकती है:

  1. गंभीर डिहाइड्रेशन: यह सबसे आम और बड़ा खतरा है. बहुत ज्यादा उल्टी और दस्त से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की भारी कमी हो जाती है. यह कमी खून के गाढ़े होने, ब्लड प्रेशर गिरने, किडनी फेल होने और शॉक की स्थिति पैदा कर सकती है, जो जानलेवा है.
  2. खास किस्म के टॉक्सिन्स और संक्रमण: साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे कुछ बैक्टीरिया सिर्फ संक्रमण ही नहीं फैलाते बल्कि शरीर में ऐसे जहरीले पदार्थ छोड़ते हैं जो सीधे तौर पर नर्वस सिस्टम या अंगों को प्रभावित कर सकते हैं. बोटुलिज्म नाम का एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक बीमारी इसका उदाहरण है, जो नर्वस सिस्टम पर हमला करके लकवा और सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकती है.
  3. रासायनिक संदूषण: अगर भोजन किसी जहरीले रसायन, कीटनाशक या मिलावटी पदार्थ से दूषित हो गया है, तो परिणाम बहुत गंभीर और तेजी से घातक हो सकते हैं.
  4. सेप्टीसीमिया (खून में जहर मिलना): अगर आंतों से बैक्टीरिया खून में पहुंच जाए, तो पूरे शरीर में संक्रमण फैल सकता है, जिसे सेप्टिक शॉक कहते हैं. यह स्थिति कई अंगों को एक साथ काम करने से रोक सकती है. नतीजतन, मौत भी हो सकती है.
  5. उम्र और कमजोर इम्यूनिटी: 5 साल से छोटे बच्चे, 65 से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोग सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं.

सवाल 5: आखिर कौन से खाने सबसे ज्यादा फूड पॉइजनिंग की वजह बनते हैं?
जवाब: मेडस्केप की रिपोर्ट के मुताबिक, कोई भी खाना अगर ठीक से न बनाया जाए या न रखा जाए तो फूड पॉइजनिंग की वजह बन सकता है, लेकिन कुछ खाद्य पदार्थों को ‘हाई-रिस्क फूड’ माना जाता है क्योंकि उनमें हानिकारक कीटाणु आसानी से पनप सकते हैं.

  • पानी वाली चीजें: गोलगप्पे का पानी, बर्फ के गोले, बिना ढका कटा फल और गंदे पानी से धुली सब्जियां.
  • स्ट्रीट फूड और कटे हुए फल: विशेष रूप से वो जो खुली या अस्वच्छ जगहों पर रखे हों. जैसे, ऊपर बताए गए गोलगप्पे और तरबूज का मामला.
  • डेयरी प्रोडक्ट्स: बिना उबला दूध, गलत तरीके से रखी गई मिठाइयां, पनीर, रबड़ी आदि.
  • अंडे और मांस-मछली: अधपका या कच्चा मांस, चिकन, अंडा, मछली. बिरयानी में अगर मीट ठीक से न पका हो या पकाने के बाद उसे बहुत देर तक सामान्य तापमान पर रखा गया हो, तो खतरा बढ़ जाता है.
  • बचा हुआ खाना: पका हुआ खाना जो फ्रिज में न रखा गया हो और लंबे समय से बाहर रखा हो.
  • डिब्बाबंद भोजन: टूटे या फूले हुए डिब्बे, क्योंकि इनमें बोटुलिज्म का खतरा हो सकता है.

 

डिब्बा बंद खाने में बैक्टिरिया जल्दी बन जाते हैं
डिब्बा बंद खाने में बैक्टिरिया जल्दी बन जाते हैं

सवाल 6: फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखने पर तुरंत क्या करें और डॉक्टर के पास कब जाएं?
जवाब: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, फूड पॉइजनिंग के लक्षण आमतौर पर दूषित खाना खाने के कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के अंदर शुरू होते हैं, जैसे जी मचलाना, उल्टी, दस्त, पेट में तेज दर्द, बुखार और कमजोरी. ऐसा होने पर घर पर तुरंत ये करें:

  • सबसे जरूरी है डिहाइड्रेशन से बचना है इसलिए बार-बार थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें.
  • शरीर में पानी और मिनरल्स की पूर्ति के लिए डॉक्टर की सलाह पर ओ.आर.एस. का घोल, नारियल पानी या छाछ जैसे तरल पदार्थ लेते रहें.
  • आराम करें और हल्का, सादा खाना ही खाएं. मसालेदार और तला-भुना खाना बिल्कुल न खाएं.

लेकिन ये खतरे के संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं या अस्पताल ले जाएं:

  • बार-बार उल्टी होना और कुछ भी पेट में न रुकना.
  • खून वाली उल्टी या दस्त होना.
  • तेज बुखार होना जो न उतर रहा हो.
  • पेशाब बहुत कम या बिल्कुल न होना और पेशाब का रंग गहरा पीला होना.
  • मुंह और जीभ का सूखना, प्यास के मारे बेहाल होना.
  • बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर आना या खड़े होने पर बेहोशी जैसा लगना.
  • बच्चों में रोते समय आंसू न निकलना.
  • पेट में असहनीय और मरोड़दार तेज दर्द होना.
  • देखने में धुंधलापन, मांसपेशियों में कमजोरी, या शरीर में झुनझुनी महसूस होना.

5 साल से छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या पहले से बीमार व्यक्ति को फूड पॉइजनिंग होने पर शुरू से ही सावधानी बरतें और बिना देर किए डॉक्टरी सलाह लें.

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कौन हैं डॉ. निखिल टंडन, बनाए गए Delhi AIIMS के डायरेक्टर; जानें इनके बारे में

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गर्मियों में क्यों बढ़ जाते हैं हीट क्रैम्प्स के मामले, कैसे रखें खुद का ख्याल

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Heat Cramps Symptoms and Causes : गर्मियों का मौसम आते ही शरीर पर असर साफ दिखने लगता है. तेज धूप, उमस और पसीना मिलकर शरीर को जल्दी थका देते हैं. कई बार लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही स्थिति आगे चलकर हीट क्रैम्प्स यानी गर्मी के कारण होने वाले मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन में बदल सकती है. यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जो धूप में काम करते हैं, ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं या पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं.

हीट क्रैम्प्स को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह शरीर के ओवरहीट होने का पहला संकेत हो सकता है. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति आगे बढ़कर हीट एक्सॉशन या हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि गर्मियों में हीट क्रैम्प्स के मामले क्यों बढ़ जाते हैं और इससे कैसे खुद का ख्याल रखें. 

हीट क्रैम्प्स क्या होते हैं

हीट क्रैम्प्स मांसपेशियों में होने वाली दर्दनाक ऐंठन होती है, जो शरीर के ज्यादा गर्म हो जाने और पानी और जरूरी मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) की कमी के कारण होती है. ये ऐंठन आमतौर पर पैरों में, हाथों में, पेट या पेट के आसपास और पीठ के हिस्सों में होती है. जब हम बहुत ज्यादा पसीना बहाते हैं, तो शरीर से नमक और जरूरी तत्व बाहर निकल जाते हैं. इससे मांसपेशियां सही तरह से काम नहीं कर पाती और उनमें अकड़न या दर्द शुरू हो जाता है. 

गर्मियों में हीट क्रैम्प्स के मामले क्यों बढ़ जाते हैं

 1. शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) – गर्मी में पसीना ज्यादा आता है. अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इससे ब्लड सर्कुलेशन और तापमान कंट्रोल प्रभावित होता है.

2. इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी – सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे तत्व शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं. ये मांसपेशियों और नसों को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं. पसीने के साथ ये तत्व बाहर निकल जाते हैं, जिससे क्रैम्प्स होने लगते हैं. 

3. ज्यादा शारीरिक मेहनत – धूप में काम करना, एक्सरसाइज करना या भारी काम करना शरीर को जल्दी थका देता है और पसीना ज्यादा निकलता है, जिससे क्रैम्प्स का खतरा बढ़ जाता है. 

4. ज्यादा गर्मी और उमस – अगर आप बहुत गर्म और बंद जगह पर हैं, जहां हवा का सही प्रवाह नहीं है, तो शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता है. इससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है. 

5. उम्र का असर – छोटे बच्चे और बुजुर्ग जल्दी प्रभावित होते हैं, बच्चों का शरीर तापमान जल्दी नियंत्रित नहीं कर पाता है और बुजुर्गों में पसीना कम बनता है, जिससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता है. 

यह भी पढ़ें – Biryani and Watermelon Myth: क्या बिरयानी के बाद तरबूज खाना जानलेवा है? जानिए- क्या कहते हैं डॉक्टर्स

हीट क्रैम्प्स के लक्षण

हीट क्रैम्प्स धीरे-धीरे या अचानक शुरू हो सकते हैं. इसके कुछ आम लक्षण मांसपेशियों में तेज दर्द या ऐंठन, अचानक झटके या खिंचाव, बहुत ज्यादा पसीना आना, त्वचा का नम और लाल हो जाना, कमजोरी या थकान और कभी-कभी हल्का बुखार है. 

हीट क्रैम्प्स से कैसे खुद का ख्याल रखें

1. अगर आपको या किसी और को हीट क्रैम्प्स हो जाएं, तो धूप या गर्म जगह से हट कर ठंडी जगह पर जाएं और शरीर को आराम दें. 

2. ठंडा पानी पीएं, गीले कपड़े या ठंडी पट्टी शरीर पर रखें और पंखे या एसी के पास बैठें. 

3. ज्यादा से ज्यादा पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लें. जैसे नॉर्मल पानी, नारियल पानी, ORS या स्पोर्ट्स ड्रिंक. 

4. जिस मांसपेशी में दर्द है, उसे धीरे-धीरे स्ट्रेच करें और हल्की मालिश करें.  

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या वेजीटेरियन लोगों में जल्दी ठीक हो जाता है कैंसर, जानें डॉक्टरों की राय

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बच्चों में दिख रहे ये संकेत हो सकते हैं चाइल्डहुड कैंसर का कारण, ऐसे करें पहचान

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Cancer In Kids: बच्चों की सेहत में अचानक आने वाले बदलाव जैसे बुखार, जोड़ का दर्द और शरीर पर सूजन को अक्सर सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. लेकिन इलाज से ठीक नहीं होनेवाला लगातार बुखार, जोड़ में दर्द बचपन के कैंसर की ओर इशारा कर सकते हैं. डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों में कैंसर कम ही होता है, लेकिन यह बहुत जल्दी फैलता है. इसलिए, सही समय पर इसकी पहचान करना बहुत जरूरी होता है.

कई बार इसके लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे बुखार या कमजोरी जैसे ही दिखते हैं, जिससे पहचान करना कठिन हो जाता है. ऐसे में माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.  

बच्चों में दिखने वाले सामान्य चेतावनी संकेत

चाइल्डहुड कैंसर के कुछ सामान्य संकेतों में बिना कारण वजन घटना, लगातार बुखार रहना, कमजोरी और थकान शामिल हैं. इसके अलावा शरीर पर बिना वजह चोट के निशान पड़ना या खून आना, बार बार संक्रमण होना और शरीर में गांठ या सूजन भी गंभीर संकेत हो सकते हैं. साथ ही कई बच्चों में हड्डियों या जोड़ों में दर्द, लगातार सिर दर्द या उल्टी जैसी समस्या भी देखी जाती है. ये लक्षण सामान्य बीमारी जैसे लग सकते हैं, लेकिन अगर लंबे समय तक बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.  

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कैंसर के प्रकार के अनुसार अलग लक्षण

बच्चों में अलग अलग प्रकार के कैंसर के लक्षण भी अलग होते हैं. जैसे ल्यूकेमिया में कमजोरी, पीला पड़ना, बार बार संक्रमण और हड्डियों में दर्द हो सकता है. ब्रेन ट्यूमर होने पर सिर दर्द, उल्टी, व्यवहार में बदलाव या संतुलन बिगड़ने जैसे संकेत दिखते हैं. लिम्फोमा में गर्दन, बगल या जांघ में बिना दर्द की गांठ बन सकती है. वहीं न्यूरोब्लास्टोमा या विल्म्स ट्यूमर में पेट में सूजन या गांठ, दर्द और वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरे को बढ़ा सकता है. वही  पारस हॉस्पीटल्स गुरुग्राम में डॉक्टर नेहा सिंह का कहना है कि बचपन के आम प्रकार का कैंसर ब्लड कैंसर और बोन कैंसर हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने खुलासा किया है कि हर साल करीब 4 लाख 0-9 वर्षीय किशोर और बच्चों में कैंसर की पहचान होती है.

समय पर पहचान क्यों है जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में कैंसर की जल्दी पहचान होने पर इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है. अगर कोई लक्षण लगातार बना रहे, बार बार हो या सामान्य इलाज से ठीक न हो, तो तुरंत जांच कराना जरूरी है. नियमित हेल्थ चेकअप और बच्चे के व्यवहार में हो रहे बदलाव पर ध्यान देना भी जरूरी है. सही समय पर कदम उठाने से न केवल बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है, बल्कि बच्चे के स्वस्थ भविष्य की संभावना भी बढ़ जाती है.

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तरबूज को इंजेक्शन लगाकर तो नहीं किया गया है लाल, खाने से पहले ऐसे करें चेक

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Watermelon Safety Tips: चिलचिलाती गर्मी में तरबूज सबकी पसंद होता है. लोग गर्मी से राहत पाने के लिए तरबूज खाते हैं, जिससे शरीर को ठंडक मिलती है और प्यास भी शांत होती है. लेकिन अगर आपको पता चले कि यही तरबूज आपकी जान के लिए खतरा बन सकता है, तो आप भी हैरान रह जाएंगे. हाल ही में महाराष्ट्र के मुंबई में हुई एक दर्दनाक घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के पायधुनी इलाके में फूड पॉइजनिंग की वजह से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि परिवार ने पहले खाने में बिरयानी  खाया और बाद में तरबूज खाया, जिसके कुछ घंटों बाद ही उनमें उल्टी और तबीयत बिगड़ने जैसे लक्षण सामने आने लगें. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान एक-एक कर चारों की मौत हो गई. इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि कहीं तरबूज में मिलावट या कोई हानिकारक चीज तो नहीं थी.

क्या तरबूज में इंजेक्शन लगाकर किया जाता है लाल

अक्सर यह बात सुनने को मिलती है कि तरबूज को ज्यादा लाल और मीठा दिखाने के लिए उसमें इंजेक्शन लगाया जाता है. हालांक, हर मामले में यह सच नहीं होता, लेकिन बाजार में कुछ जगहों पर मिलावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. कई बार तरबूज को जल्दी पकाने या आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. ऐसे में बिना जांचे फल खाना जोखिम भरा हो सकता है.

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खाने से पहले ऐसे करें तरबूज की जांच

तरबूज खरीदते समय कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं. सबसे पहले तरबूज को काटने पर उसका रंग बहुत ज्यादा चमकीला लाल या एक जैसा नजर आए, तो सावधान हो जाएं. साथ ही अगर उसमें अजीब सी गंध आए या स्वाद सामान्य से अलग लगे, तो उसे न खाएं. ध्यान रखें तरबूज को हमेशा साफ पानी से धोकर ही काटें. इसके अलावा कोशिश करें कि कटे हुए फल बाजार से न खरीदें, क्योंकि उनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा ज्यादा होता है.

सतर्कता ही है सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि फूड पॉयजनिंग के मामले अक्सर गर्मियों में बढ़ जाते हैं, क्योंकि इस मौसम में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. इसलिए हमेशा ताजा और साफ फल ही खाएं. अगर किसी फल को खाने के बाद उल्टी, पेट दर्द या चक्कर जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. मुंबई की यह घटना एक चेतावनी है कि खाने-पीने की चीजों को लेकर थोड़ी सी लापरवाही भी आपकी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है. सही जांच और सावधानी अपनाकर ही आप खुद और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं.

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