गर्मी में बिना काम किए भी क्यों लगती है थकान? डॉक्टर ने बताया असली कारण

गर्मी में बिना काम किए भी क्यों लगती है थकान? डॉक्टर ने बताया असली कारण


Summer Fatigue: अप्रैल खत्म होते-होते ही चिलचिलाती और चुभने वाली गर्मी ने कहर ढाना शुरू कर दिया है. तापमान 40 डिग्री के पार जाने के बाद लोगों ने अभी से  कयास लगाना शुरू कर दिया है कि इस बार की गर्मी कितनी भीषण होने वाली है. इस बीच डॉक्टर भी Peak Heat (11 से 3 बजे के बीच) के दौरान घर पर रहने की सलाह दे रहे हैं. हर साल Heat wave और UV Rays का खतरा लोगों पर मंडराता रहता है और इस मौसम में लोग बिना काम किए भी थका-थका महसूस करते हैं.

बहुत से लोग गर्मी में एक अजीब पैटर्न नोटिस कर रहे हैं, जिसमें शारीरिक काम न करने पर भी लोग अत्यधिक थका हुआ महसूस करने लगे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक यह कोई भ्रम नहीं, बल्कि आपके शरीर पर पड़ रहे बोझ के कारण हो रहा है. डॉक्टरों के अनुसार, “गर्मी में होने वाली थकावट एक शारीरिक प्रतिक्रिया है, जो हीट, डिहाइड्रेशन और नींद पूरी न होने के कारण होती है.”

गर्मी के कारण बढ़ता है शरीर पर बोझ

गर्म मौसम में शरीर अपना आंतरिक तापमान बनाए रखने की कोशिश करता है, जिसके कारण हमारे हार्ट को जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ता है. पसीना आने से मदद मिलती है, लेकिन पसीने के साथ शरीर में मौजूद जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकल जाते हैं. हल्की-सी डिहाइड्रेशन भी ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करती है, जो थकावट, सिरदर्द और लो एनर्जी का कारण बन जाती है और आपकी पूरे दिन की प्रोडक्टिविटी को प्रभावित करती है.

नींद और सांस लेने में दिक्कत

गर्मी की रातें काफी कष्टदायक होती हैं और अच्छी नींद के लिए थोड़े ठंडे तापमान की जरूरत होती है. जब ऐसा नहीं होता तो नींद खराब होती है. ऐसे में घंटों नींद लेने के बाद भी थका-थका महसूस होता है. गर्मी के कारण सांस से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं, जैसे Sleep Apnea. जब नींद डिस्टर्ब होती है, तो कंसंट्रेशन और मूड बुरी तरह बिगड़ जाता है.

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क्या करना है जरूरी?

गर्मी से होने वाली थकावट आलस के कारण नहीं होती. इसलिए समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, जिससे आप हाइड्रेटेड रहेंगे और इलेक्ट्रोलाइट्स भी संतुलित रहेंगे. साथ ही अपनी सोने की जगह को भी ठंडा रखने की कोशिश करें.

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एकदम फिट दिखने वालों को क्यों आ रहा हार्ट अटैक? डॉक्टर से जानें असली वजह

एकदम फिट दिखने वालों को क्यों आ रहा हार्ट अटैक? डॉक्टर से जानें असली वजह


Hidden Causes Of Heart Disease In Young Adults: क्या आप पूरी तरह फिट और हेल्दी दिखते हैं, फिर भी दिल की बीमारी का खतरा हो सकता है? यह सवाल सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है. अक्सर हम मान लेते हैं कि अगर हम अच्छा खाते हैं, थोड़ा-बहुत व्यायाम करते हैं और सक्रिय रहते हैं, तो हार्ट पूरी तरह सुरक्षित है. लेकिन असलियत यह है कि दिल की सेहत सिर्फ बाहरी फिटनेस से तय नहीं होती. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एकस्पर्ट क्या कहते हैं. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डॉ. समनजॉय मुखर्जी , जो मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख हैं, उन्होंने TOI को बताया कि “हम में से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि सही खानपान और थोड़ा व्यायाम हमें हार्ट अटैक से बचा लेगा, लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं है.” दरअसल, फिटनेस जो हमें दिखाई देती है कि जैसे सही वजन, अच्छी स्टैमिना या साफ त्वचा, वह सिर्फ सतही संकेत हैं. शरीर के अंदर चल रही प्रक्रियाएं, जैसे इन्फ्लेमेशन, आर्टरीज को होने वाला नुकसान या हार्मोनल असंतुलन, बाहर से नजर नहीं आते. यही छिपे हुए कारक धीरे-धीरे दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं. 

भारत में हार्ट रोग के मामला

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, भारत में 70 साल से कम उम्र के लोगों में आधे से ज्यादा हार्ट रोग के मामले सामने आते हैं. इसका मतलब यह है कि उम्र या बाहरी फिटनेस भी पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती. तनाव भी एक बड़ा लेकिन अनदेखा कारण है. यह हमेशा स्पष्ट नहीं दिखता, बल्कि डेडलाइन, नींद की कमी और मानसिक दबाव के रूप में धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और शरीर में सूजन बढ़ती है, जो दिल पर सीधा असर डालती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट भी बताती है कि लगातार तनाव हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ाता है.

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काफी लोगों को इसके बारे में पता नहीं होता

इसके अलावा, जेनेटिक्स भी अहम भूमिका निभाता है. अगर परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी के मामले रहे हैं, तो जोखिम अपने आप बढ़ जाता है, चाहे आपकी लाइफस्टाइल कितनी भी अच्छी क्यों न हो. कई ऐसी साइलेंट बीमारियां भी हैं, जो बिना लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं. जैसे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज.  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ से जुड़े स्टडी में पाया गया है कि बड़ी संख्या में लोगों को अपने हाई ब्लड प्रेशर के बारे में पता ही नहीं होता.

नींद भी जरूरी

नींद भी दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है. कम या खराब नींद दिल की धड़कन को प्रभावित कर सकती है, तनाव बढ़ा सकती है और मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ सकती है। इसलिए सिर्फ बाहर से फिट दिखना काफी नहीं है. नियमित जांच, जैसे ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ईसीजी कराना जरूरी है. सही समय पर जोखिम की पहचान ही हार्ट को सुरक्षित रखने का सबसे बड़ा तरीका है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मोटापा कम करने वाला ये इंजेक्शन बाजार में मिल रहा नकली, जानें पहचानने का तरीका

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Fake Weight Loss Injection: देशभर में तेजी से पॉपुलर हो रहे वेट लॉस इंजेक्शन खासकर डायबिटीज और वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन अब एक बड़े खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं. दरअसल, गुरुग्राम में ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट की कार्रवाई में नकली इंजेक्शन बनाने और बेचने वाले रैकेट का खुलासा हुआ है. करीब 70 लाख रुपये के फर्जी इंजेक्शन बरामद किए है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी किराए के फ्लैट में ही नकली इंजेक्शन तैयार कर रहे थे. चीन से मंगाए गए सस्ते केमिकल सिरिंज और पैकेजिंग की मदद से इन्हें बिल्कुल असली जैसा बनाया जा रहा था.

हैरानी के बात यह है कि आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए भी असली और नकली दवा में फर्क करना मुश्किल हो रहा था. शुरुआती जानकारी के अनुसार, इन नकली इंजेक्शनों की सप्लाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी की जा रही थी. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि मोटापा कम करने वाले कौन से नकली इंजेक्शन बाजार में मिल रहे हैं और इन्हें पहचानने का तरीका क्या है.

क्या है मौनजारो इंजेक्शन और क्यों बढ़ रही मांग?

ड्रग कंट्रोलर के अनुसार, मौनजारो एक एंटी-डायबिटिक दवा है, जिसे डॉक्टर की सलाह पर वजन घटाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी ट्रेंड और तेजी से वजन कम करने की चाहत के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. इसी बढ़ती डिमांड का फायदा उठाकर नकली दवाओं का कारोबार फैल रहा है और कई लोग वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले नकली मौनजारो इंजेक्शन को बाजार में बेच रहे हैं.

नकली इंजेक्शन से क्या हो सकते हैं खतरे?

एक्सपर्ट के अनुसार, नकली वेट लॉस इंजेक्शन शरीर के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. इनमें या तो असली दवा का एक्टिव तत्व नहीं होता या फिर जहरीले केमिकल मिलाए जाते हैं. इसे लेने से इलाज का असर नहीं होता, जिससे बीमारी बनी रहती है. वहीं शरीर में टॉक्सिक रिएक्शन हो सकते हैं. गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती तक की नौबत आ सकती है और लंबे समय में शरीर के अंगों को नुकसान पहुंच सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि मरीज को सही दवा नहीं मिलती तो पूरा इलाज फेल हो सकता है. इसके अलावा गलत या अधूरी दवा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है, जिससे फ्यूचर में इलाज और मुश्किल हो सकता है.

भारत में क्यों बढ़ रहा है नकली दवाओं का खतरा?

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि भारत में नकली दवाओं की समस्या नई नहीं है, लेकिन अब इसका दायरा बहुत बढ़ गया है. नियम मौजूद होने के बावजूद हर जगह उनका सख्ती से पालन नहीं हो पाता, जिससे सप्लाई चैन में खामियां रह जाती है और नकली दवाएं आसानी से बाजार में पहुंच जाती है.

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कैसे करें नकली इंजेक्शन की पहचान?

  • डॉक्टर के अनुसार नकली इंजेक्शन की पहचान करने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए. जैसे हमेशा लाइसेंस वाली मेडिकल शॉप से ही दवा खरीदें.
  • बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के इंजेक्शन न लें.
  • पैकेजिंग को ध्यान से जांचे, स्पेलिंग मिस्टेक टूटी सील या अजीब लेबल से सावधान रहें.
  • अगर बॉक्स पर क्यूआर कोड हो तो उसे जरूर वेरीफाई करें.
  • सोशल मीडिया या ऑनलाइन अनजान प्लेटफाॅर्म से दवा खरीदने से बचना चाहिए.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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जम्हाई लेते ही सुनाई क्यों देने लगता है साफ? जानिए इसके पीछे का कारण और एक्सपर्ट की राय

जम्हाई लेते ही सुनाई क्यों देने लगता है साफ? जानिए इसके पीछे का कारण और एक्सपर्ट की राय


Yawning Effect On Ears : हम सभी दिन में कई बार जम्हाई लेते हैं. कभी नींद आने पर, कभी थकान में, या कभी बिना किसी खास वजह के, आमतौर पर हम इसे सिर्फ नींद या बोरियत से जोड़कर देखते हैं, लेकिन शरीर में होने वाली यह साधारण सी क्रिया असल में कई काम करती है. आपने कई बार देखा होगा कि जम्हाई लेने के तुरंत बाद आसपास की आवाजें थोड़ी ज्यादा साफ और तेज सुनाई देने लगती हैं. यह कोई भ्रम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण मौजूद हैं. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि जम्हाई लेते ही साफ सुनाई क्यों देने लगता है और इसके पीछे का कारण और एक्सपर्ट की राय क्या है. 

जम्हाई का कानों पर क्या असर होता है?

हमारे कान के अंदर एक छोटी सी नली होती है जिसे Eustachian tube (यूस्टेशियन ट्यूब) कहा जाता है. यह नली हमारे मिडिल ईयर को गले से जोड़ती है. आमतौर पर यह बंद रहती है. जब हम जम्हाई लेते हैं, तो मुंह और जबड़े के खिंचाव की वजह से यह नली खुल जाती है. इससे कान के अंदर और बाहर के हवा के प्रेशर में संतुलन बन जाता है. ईयरड्रम  सही तरीके से हिलने लगता है. आवाजें ज्यादा साफ सुनाई देने लगती हैं. जम्हाई एक तरह से आपके कानों का रीसेट बटन दबा देती है. 

जम्हाई लेते ही साफ सुनाई क्यों देने लगता है?

जम्हाई लेते समय कान के अंदर मौजूद दो छोटे मांसपेशियां Tensor tympani muscle और Stapedius muscle, कुछ समय के लिए सक्रिय हो जाती हैं. ये कान की हड्डियों को थोड़ी देर के लिए टाइट कर देती हैं. इससे आवाज थोड़ी देर के लिए कम सुनाई देती है. जैसे ही ये मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं, सुनने की क्षमता बेहतर महसूस होती है. इसलिए जम्हाई के बाद आपको आवाजें क्लियर लगती हैं. 

प्लेन में कान क्यों बंद हो जाते हैं और जम्हाई क्यों मदद करती है?

आपने महसूस किया होगा कि हवाई जहाज में सफर करते समय कान बंद हो जाते हैं और पॉप की आवाज आती है. इसका कारण भी वही प्रेशर का असंतुलन है. ऐसे में जम्हाई लेने से यूस्टेशियन ट्यूब खुलती है, दबाव बराबर होता है. साथ ही कान तुरंत हल्के और साफ महसूस होते हैं.

इसके पीछे का कारण

जम्हाई लेने से शरीर में ब्लड फ्लो थोड़ा बढ़ जाता है. इससे दिमाग ज्यादा एक्टिव महसूस करता है, सुनने की प्रक्रिया थोड़ी बेहतर हो सकती है और आप आसपास की आवाजों को ज्यादा ध्यान से पकड़ पाते हैं. 

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एक्सपर्ट की राय क्या है?

कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि जम्हाई हमारे शरीर का एक प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र (defence mechanism) भी हो सकती है. यह कान के अंदर की मांसपेशियों को एक्टिव करती है. ये मांसपेशियां तेज या अंदरूनी आवाजों जैसे अपनी आवाज, दांत पीसना से कान को बचाती हैं. यह अंदरूनी शोर को कम करके बाहरी आवाजों को बेहतर सुनने में मदद करती है. 

कब हो सकती है समस्या?

अगर आपको बार-बार जम्हाई लेकर ही कान खोलने पड़ते हैं, या एक कान खुलता है, दूसरा नहीं, कान में भारीपन बना रहता है, बार-बार पॉप की जरूरत महसूस होती है तो यह यूस्टेशियन ट्यूब में दिक्कत का संकेत हो सकता है. इसके कारण एलर्जी, साइनस की समस्या या एसिड रिफ्लक्स हो सकते हैं. ऐसे में डॉक्टर, ENT स्पेशलिस्ट से सलाह लेना जरूरी है.  

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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