बच्चों में दिख रहे ये संकेत हो सकते हैं चाइल्डहुड कैंसर का कारण, ऐसे करें पहचान

बच्चों में दिख रहे ये संकेत हो सकते हैं चाइल्डहुड कैंसर का कारण, ऐसे करें पहचान


Cancer In Kids: बच्चों की सेहत में अचानक आने वाले बदलाव जैसे बुखार, जोड़ का दर्द और शरीर पर सूजन को अक्सर सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. लेकिन इलाज से ठीक नहीं होनेवाला लगातार बुखार, जोड़ में दर्द बचपन के कैंसर की ओर इशारा कर सकते हैं. डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों में कैंसर कम ही होता है, लेकिन यह बहुत जल्दी फैलता है. इसलिए, सही समय पर इसकी पहचान करना बहुत जरूरी होता है.

कई बार इसके लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे बुखार या कमजोरी जैसे ही दिखते हैं, जिससे पहचान करना कठिन हो जाता है. ऐसे में माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.  

बच्चों में दिखने वाले सामान्य चेतावनी संकेत

चाइल्डहुड कैंसर के कुछ सामान्य संकेतों में बिना कारण वजन घटना, लगातार बुखार रहना, कमजोरी और थकान शामिल हैं. इसके अलावा शरीर पर बिना वजह चोट के निशान पड़ना या खून आना, बार बार संक्रमण होना और शरीर में गांठ या सूजन भी गंभीर संकेत हो सकते हैं. साथ ही कई बच्चों में हड्डियों या जोड़ों में दर्द, लगातार सिर दर्द या उल्टी जैसी समस्या भी देखी जाती है. ये लक्षण सामान्य बीमारी जैसे लग सकते हैं, लेकिन अगर लंबे समय तक बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.  

यह भी पढ़ेंः क्या गर्मी में आपका भी पेट बार-बार हो रहा खराब? डॉक्टर से जानें इसकी असली वजह

कैंसर के प्रकार के अनुसार अलग लक्षण

बच्चों में अलग अलग प्रकार के कैंसर के लक्षण भी अलग होते हैं. जैसे ल्यूकेमिया में कमजोरी, पीला पड़ना, बार बार संक्रमण और हड्डियों में दर्द हो सकता है. ब्रेन ट्यूमर होने पर सिर दर्द, उल्टी, व्यवहार में बदलाव या संतुलन बिगड़ने जैसे संकेत दिखते हैं. लिम्फोमा में गर्दन, बगल या जांघ में बिना दर्द की गांठ बन सकती है. वहीं न्यूरोब्लास्टोमा या विल्म्स ट्यूमर में पेट में सूजन या गांठ, दर्द और वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरे को बढ़ा सकता है. वही  पारस हॉस्पीटल्स गुरुग्राम में डॉक्टर नेहा सिंह का कहना है कि बचपन के आम प्रकार का कैंसर ब्लड कैंसर और बोन कैंसर हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने खुलासा किया है कि हर साल करीब 4 लाख 0-9 वर्षीय किशोर और बच्चों में कैंसर की पहचान होती है.

समय पर पहचान क्यों है जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में कैंसर की जल्दी पहचान होने पर इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है. अगर कोई लक्षण लगातार बना रहे, बार बार हो या सामान्य इलाज से ठीक न हो, तो तुरंत जांच कराना जरूरी है. नियमित हेल्थ चेकअप और बच्चे के व्यवहार में हो रहे बदलाव पर ध्यान देना भी जरूरी है. सही समय पर कदम उठाने से न केवल बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है, बल्कि बच्चे के स्वस्थ भविष्य की संभावना भी बढ़ जाती है.

यह भी पढ़ेंः क्या आपको भी गर्मी में आ रहा है बुखार? इग्नोर किया तो जा सकती है जान!

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

तरबूज को इंजेक्शन लगाकर तो नहीं किया गया है लाल, खाने से पहले ऐसे करें चेक

तरबूज को इंजेक्शन लगाकर तो नहीं किया गया है लाल, खाने से पहले ऐसे करें चेक


Watermelon Safety Tips: चिलचिलाती गर्मी में तरबूज सबकी पसंद होता है. लोग गर्मी से राहत पाने के लिए तरबूज खाते हैं, जिससे शरीर को ठंडक मिलती है और प्यास भी शांत होती है. लेकिन अगर आपको पता चले कि यही तरबूज आपकी जान के लिए खतरा बन सकता है, तो आप भी हैरान रह जाएंगे. हाल ही में महाराष्ट्र के मुंबई में हुई एक दर्दनाक घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के पायधुनी इलाके में फूड पॉइजनिंग की वजह से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि परिवार ने पहले खाने में बिरयानी  खाया और बाद में तरबूज खाया, जिसके कुछ घंटों बाद ही उनमें उल्टी और तबीयत बिगड़ने जैसे लक्षण सामने आने लगें. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान एक-एक कर चारों की मौत हो गई. इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि कहीं तरबूज में मिलावट या कोई हानिकारक चीज तो नहीं थी.

क्या तरबूज में इंजेक्शन लगाकर किया जाता है लाल

अक्सर यह बात सुनने को मिलती है कि तरबूज को ज्यादा लाल और मीठा दिखाने के लिए उसमें इंजेक्शन लगाया जाता है. हालांक, हर मामले में यह सच नहीं होता, लेकिन बाजार में कुछ जगहों पर मिलावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. कई बार तरबूज को जल्दी पकाने या आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. ऐसे में बिना जांचे फल खाना जोखिम भरा हो सकता है.

यह भी पढ़ेंः शाम के मनपसंद स्नैक्स हो सकते हैं मोटापा बढ़ने का कारण, ऐसे दूर करें अपनी क्रेविंग

खाने से पहले ऐसे करें तरबूज की जांच

तरबूज खरीदते समय कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं. सबसे पहले तरबूज को काटने पर उसका रंग बहुत ज्यादा चमकीला लाल या एक जैसा नजर आए, तो सावधान हो जाएं. साथ ही अगर उसमें अजीब सी गंध आए या स्वाद सामान्य से अलग लगे, तो उसे न खाएं. ध्यान रखें तरबूज को हमेशा साफ पानी से धोकर ही काटें. इसके अलावा कोशिश करें कि कटे हुए फल बाजार से न खरीदें, क्योंकि उनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा ज्यादा होता है.

सतर्कता ही है सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि फूड पॉयजनिंग के मामले अक्सर गर्मियों में बढ़ जाते हैं, क्योंकि इस मौसम में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. इसलिए हमेशा ताजा और साफ फल ही खाएं. अगर किसी फल को खाने के बाद उल्टी, पेट दर्द या चक्कर जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. मुंबई की यह घटना एक चेतावनी है कि खाने-पीने की चीजों को लेकर थोड़ी सी लापरवाही भी आपकी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है. सही जांच और सावधानी अपनाकर ही आप खुद और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं.

यह भी पढ़ेंः गर्मी के साथ बच्चों में बढ़ रहा हीट स्ट्रोक का खतरा, डॉक्टर से जाने कैसे रखें उनका ख्याल

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या बिरयानी के बाद तरबूज खाना जानलेवा है? जानिए- क्या कहते हैं डॉक्टर्स

क्या बिरयानी के बाद तरबूज खाना जानलेवा है? जानिए- क्या कहते हैं डॉक्टर्स


Biryani and Watermelon Myth: मुंबई से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल एक ही परिवार के चार लोगों की बिरयानी खाने से अचानक तबीयत बिगड़ी जिसके बाद उनकी मौत हो गई. बताया जा रहा है कि परिवार के सदस्यों ने बिरयानी खाने के बाद तरबूज खाया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या बिरयानी खाने के बाद तरबूज खाना जानलेवा हो सकता है. हालांकि कई डॉक्टर भी इसे लेकर अपनी-अपनी राय बता रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या बिरयानी खाने के बाद तरबूज जानलेवा है, इसे लेकर डॉक्टर क्या कहते हैं.

क्या बिरयानी और तरबूज साथ खाने से हो सकती है मौत?

मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार बिरयानी और तरबूज जैसे फूड आइटम्स को साथ या थोड़े अंतराल में खाने से सीधे मौत होना संभव नहीं है. डॉक्टर Ishwar gilada का कहना है कि यह दोनों अलग-अलग तरह के फूड है, जिनका पाचन समय अलग-अलग हो सकता है. लेकिन इसे तुरंत जानलेवा स्थिति बनना सामान्य नहीं है. डॉक्टर के अनुसार इस तरह के मामलों में सबसे पहले शक फूड प्वाइजनिंग पर जाता है. अगर खाना या फल लंबे समय तक खुले में रखा हो या बासी हो जाए तो उसमें खतरनाक बैक्टीरिया हो सकते हैं. स्टैफिलोकोकस, साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया खाने के जरिए शरीर में पहुंचकर उल्टी, दस्त और गंभीर संक्रमण का कारण बनते हैं. कुछ मामलों में यह स्थिति से सेप्सिस तक पहुंच सकती है जो जानलेवा हो सकती है.

क्या फूड प्वाइजनिंग से तुरंत हो सकती है मौत?

डॉक्टर बताते हैं कि फूड प्वाइजनिंग के बाद शरीर में लक्षण विकसित होने और स्थिति गंभीर होने में आमतौर पर कुछ समय लगता है. अगर व्यक्ति पहले से हेल्दी हो तो इंफेक्शन से लड़ने की कोशिश करता है. हालांकि लगातार उल्टी-दस्त होने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, जिससे ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है और शॉक की स्थिति बन सकती है. यही स्थिति कुछ मामले में खतरनाक साबित हो सकती है.

खाने के कांबिनेशन को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि नॉनवेज और पानी से भरपूर फलों का पाचन समय अलग होता है. तरबूज जल्दी पचता है, जबकि मांस को पचाने में ज्यादा समय लगता है. ऐसे में दोनों साथ खाने पर पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती है, लेकिन इसे सीधे मौत की वजह नहीं माना जा सकता है.

ये भी पढ़ें-प्रेग्नेंसी के टाइम मलेरिया तो हो जाएं सावधान, बन सकता है प्रीमैच्योर डिलीवरी की वजह 

 

एक्सपर्ट्स ने कहा जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर

इंफेक्शन स्पेशलिस्ट डॉ. ईश्वर गिलाडा के अनुसार इस तरह की घटना में असली कारण जानना आसान नहीं होता है. उन्होंने कहा कि अगर एक ही खाना कई लोगों ने खाया और सभी प्रभावित नहीं हुए तो यह देखना जरूरी है कि पीड़ितों ने अलग से क्या खाया या कोई अन्य वजह तो नहीं थी. उनके अनुसार सड़ा हुआ खाना बैक्टीरियल इन्फेक्शन का कारण बन सकता है, लेकिन कुछ मामलों में बाहरी कारण जैसे किसी केमिकल या टॉक्सिन की मिलावट की आशंकाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता है. उन्होंने साफ कहा की मौत की असली वजह पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद ही सामने आएगी. डॉक्टर बताते हैं कि कई बार तरबूज में कलर लाने के लिए कोई केमिकल इंजेक्ट किया जाता है. अगर वह केमिकल कॉन्टैमिनेटेड है या फिर किसी ने फौल प्ले करके उसमें टॉक्सिन डाला है या कुछ जहर डाला है तो इससे तरबूज खाने वालों के शरीर में जहर फैल सकता है. लेकिन चारों लोगों की मौत कैसे हुई यह जानकारी पोस्टमार्टम के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी.

 

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

तरबूज खाने से पूरे परिवार की मौत! बाजार से खरीदें फल तो इन बातों का रखें ध्यान

तरबूज खाने से पूरे परिवार की मौत! बाजार से खरीदें फल तो इन बातों का रखें ध्यान


Mumbai Watermelon Death Case: मुंबई से एक चौंकाने वाला सामने आया है, जहां कथित तौर पर एक ही परिवार के 4 लोगों की तरबूज खाने से मौत हो गई. सुबह जब परिवार के लोग उठे तो उनमें उल्टी और पेट दर्द की समस्या देखी गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि परिवार के चारों लोगों की ही मौत हो गई है. इस घटना के बाद गर्मियों का पसंदीदा तरबूज खाने को लेकर चिंताएं बढ़ गई है. 

क्या है पूरा मामला? 

जानकारी के मुताबिक, परिवार के लोगों ने अपने रिश्तेदारों के साथ रात को पार्टी की थी, जब रिश्तेदार चले गए तो परिवार के सभी लोगों ने तरबूज खाया और सो गए. सुबह जब लोग उठे तो सभी लोगों को पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्या थी, जिसके बाद उन्होंने अपने फैमिली डॉक्टर को दिखाया. इसके बाद भी हालत में कोई सुधार नहीं आया और परिवार के लोगों की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई. हालत इतनी बिगड़ गई कि लोगों का शरीर नीला पड़ने लगा. परिवार के चारों लोगों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई.  डॉक्टरों द्वारा बताया गया है कि उनके शरीर में किसी प्रकार का टॉक्सिन गया है, जिससे उनकी मौत हुई है.

क्यों और कैसे होती है फूड पॉइजनिंग? 

फूड पॉइजनिंग तब होती है जब हम ऐसा खाना या पेय पदार्थ लेते हैं जिसमें हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या जहरीले पदार्थ (टॉक्सिन्स) मौजूद होते हैं. यह समस्या अक्सर खराब, केमिकल्स के इस्तेमाल, या गलत तरीके से स्टोर किए गए खाने से होती है. फूड पॉइजनिंग होने पर पेट दर्द, उल्टी, दस्त, कमजोरी और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. गंभीर मामलों में शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) भी हो सकती है. अगर समय पर इलाज न मिले तो फूड पॉइजनिंग जानलेवा हो सकती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों के लिए.

यह भी पढ़ेंः IBS Problem: पेट की समस्या IBS में कारगर है सॉल्युबल फाइबर, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

बाजार से तरबूज और अन्य फल खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

बाजार से फल खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले फल की बाहरी सतह को अच्छे से देखें कि कहीं उस पर कोई कट, दरार या सड़न के निशान तो नहीं हैं. पहले से कटे हुए फल खरीदने से बचें क्योंकि उनके अंदर भी केमिकल होने का खतरा हो सकता है. साथ ही खुले में रखे फल जल्दी खराब हो सकते हैं और उनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है. फल खरीदने के बाद उन्हें अच्छे से धोकर ही खाएं ताकि उन पर लगी गंदगी या केमिकल हट जाएं, क्योंकि आजकल फलों को पकाने के लिए काफी ज्यादा केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. हो सके तो फलों को गुनगुने पानी से भी धो सकते हैं, जिससे केमिकल्स अच्छे से साफ हो जाते हैं.

तरबूज हो लेकर बरतें खास सावधानी

गर्मियों में तरबूज खाना हर किसी को पसंद होता है, लेकिन इसको लेकर कुछ सावधानी बरतनी जरूरी है. बाजार से लाए गए तरबूज को खाने से पहले उसे नॉर्मल टेंपरेचर पर ठंडा जरूर करें. गर्म फल खाने से बीमार पड़ सकते हैं. इसके अलावा सीधे धूप से आकर भी तरबूज को नहीं खाना चाहिए. तरबूज को अधिक मात्रा में खाने से भी बचना चाहिए.

यह भी पढ़ेंः Summer Heatwave Tips: हीटवेव से बेहाल! तेज गर्मी में क्या करें और क्या न करें? डॉक्टर से जानें बचाव के 6 आसान उपाय

 

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

शाम के मनपसंद स्नैक्स हो सकते हैं मोटापा बढ़ने का कारण, ऐसे दूर करें अपनी क्रेविंग

शाम के मनपसंद स्नैक्स हो सकते हैं मोटापा बढ़ने का कारण, ऐसे दूर करें अपनी क्रेविंग


Evening Snacks Craving: क्या आपको भी शाम में स्नैक्स की क्रेविंग होती है? इससे निपटने के लिए आप तरह-तरह के पकवानों का स्वाद लेते हैं. आपके यही मनपसंद और चटपटे स्नैक्स मोटापा कम न होने का बड़ा कारण हैं. चौंक गए? यह हमारी नहीं, बल्कि एक्सपर्ट्स की राय है.

शाम के समय होने वाली क्रेविंग्स काफी सामान्य है. इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण होते हैं. थकान भरी दिनचर्या के बाद शरीर की ऊर्जा कम होने लगती है, जिससे ग्लूकोज लेवल कम हो जाता है और कुछ चटपटा खाने की इच्छा बढ़ने लगती है. शाम के समय हंगर हार्मोन घ्रेलिन (Ghrelin) बढ़ सकता है और अगर दिन का खाना सही से न हुआ हो तो क्रेविंग और ज्यादा होती है.

कितना हानिकारक हो सकता है मोटापा?

ओवरईटिंग और शाम की क्रेविंग्स धीरे-धीरे मोटापे का बड़ा कारण बन जाती हैं, क्योंकि इन दोनों का सीधा असर शरीर की कैलोरी बैलेंस और फैट स्टोरेज पर पड़ता है. दिनभर के बाद जब शाम को बार-बार भूख लगती है, तो लोग अक्सर ज्यादा कैलोरी वाले स्नैक्स, जैसे तला-भुना, मीठा या पैकेज्ड फूड खा लेते हैं. इससे शरीर में जरूरत से ज्यादा कैलोरी पहुंचती है, जो तुरंत इस्तेमाल नहीं हो पाती और फैट के रूप में जमा होने लगती है.इसके अलावा, बार-बार स्नैक्स लेने से इंसुलिन लेवल बढ़ जाता है, जो फैट स्टोरेज को बढ़ावा देता है. खासकर मीठा और रिफाइंड कार्ब्स खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता और फिर गिरता है, जिससे फिर से भूख लगती है और यह एक चक्र बन जाता है.

क्यों लगती है भूख?

कई रिसर्च से पता चलता है कि जो लोग सुबह और दोपहर के खाने में सही मात्रा में प्रोटीन और फाइबर नहीं लेते, उन्हें शाम को ज्यादा भूख लगती है, जिससे वे Unhealthy खाना खाने लगते हैं. रोजमर्रा के जीवन में होने वाला तनाव भी इसका एक बड़ा कारण हो सकता है.

यह भी पढ़ें – Pancreatic cancer Vaccine: सबसे खतरनाक कैंसर के खिलाफ दमदार वैक्सीन, जानें इससे कितना सफल होगा पैनक्रिएटिक कैंसर का इलाज

कैसे निपटें ईवनिंग क्रेविंग से

नमामी ने आगे बताया कि ‘क्रेविंग से लड़ने के बजाय हमें उनसे समझदारी से निपटना चाहिए. जो लोग वेट लॉस करना चाहते हैं और अपनी ईवनिंग क्रेविंग को कंट्रोल करना चाहते हैं, उन्हें अपने स्नैक्स में प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए. इससे आपका शुगर लेवल कंट्रोल में रहेगा और पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होगा, जिससे आप ओवरईटिंग से बच पाएंगे.’

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल ने हाल ही में एक रील के जरिए बताया कि ‘खाने की क्रेविंग शाम में सबसे ज्यादा होती है? यह हार्मोन की वजह से होता है. जैसे-जैसे शाम होती है, लेप्टिन (Leptin) नाम का हार्मोन, जो भूख को नियंत्रित करता है, कम होने लगता है. लेप्टिन के गिरते ही शरीर की ऊर्जा भी कम होने लगती है, जिसके बाद दिमाग को शुगर या कार्ब्स की क्रेविंग होने लगती है.’

यह भी पढ़ें – Endless Scrolling: बिना वजह मोबाइल फोन स्क्रॉल करने की पड़ गई आदत, जानिए इसका दिमाग पर क्या पड़ता है असर?

 

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

गर्मी के साथ बच्चों में बढ़ रहा हीट स्ट्रोक का खतरा, डॉक्टर से जाने कैसे रखें उनका ख्याल

गर्मी के साथ बच्चों में बढ़ रहा हीट स्ट्रोक का खतरा, डॉक्टर से जाने कैसे रखें उनका ख्याल


Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp