इमरजेंसी में ChatGPT कितना सुरक्षित? रिसर्च ने जताई चिंता, जानें AI की सीमाएं

इमरजेंसी में ChatGPT कितना सुरक्षित? रिसर्च ने जताई चिंता, जानें AI की सीमाएं


शोधकर्ताओं ने डॉक्टरों की मदद से 60 अलग-अलग मेडिकल केस तैयार किए. इनमें दिल की बीमारी, सांस की दिक्कत, मानसिक स्वास्थ्य संकट और मेटाबॉलिक रोग जैसी 21 तरह की बीमारियां शामिल थीं. हर केस को 16 अलग-अलग परिस्थितियों में जांचा गया. कुल मिलाकर AI से 960 जवाब लिए गए. मकसद यह देखना था कि क्या ChatGPT सही तरीके से बता सकता है कि मरीज को तुरंत इमरजेंसी में जाना चाहिए या कुछ समय बाद डॉक्टर को दिखाना ठीक रहेगा.

रिसर्च में पता चला कि AI ने आधे से ज्यादा गंभीर इमरजेंसी मामलों को कम खतरनाक बताया. करीब 52 प्रतिशत मामलों में जहां तुरंत अस्पताल जाना जरूरी था, वहां AI ने कम जरूरी इलाज की सलाह दी. डायबिटीज की जानलेवा स्थिति (कीटोएसिडोसिस), सांस रुकने का खतरा और अन्य गंभीर आपात स्थितियां. ऐसे मामलों में देरी मरीज के लिए जानलेवा हो सकती है.

रिसर्च में पता चला कि AI ने आधे से ज्यादा गंभीर इमरजेंसी मामलों को कम खतरनाक बताया. करीब 52 प्रतिशत मामलों में जहां तुरंत अस्पताल जाना जरूरी था, वहां AI ने कम जरूरी इलाज की सलाह दी. डायबिटीज की जानलेवा स्थिति (कीटोएसिडोसिस), सांस रुकने का खतरा और अन्य गंभीर आपात स्थितियां. ऐसे मामलों में देरी मरीज के लिए जानलेवा हो सकती है.

Published at : 28 Feb 2026 07:04 AM (IST)

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राष्ट्रीय प्रोटीन दिवस पर पतंजलि की बड़ी पहल! दिल्ली-NCR की झुग्गी बस्तियों में बांटा भोजन

राष्ट्रीय प्रोटीन दिवस पर पतंजलि की बड़ी पहल! दिल्ली-NCR की झुग्गी बस्तियों में बांटा भोजन


भारत में प्रोटीन की कमी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है. इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पतंजलि फूड्स लिमिटेड के प्रमुख ब्रांड ‘न्यूट्रेला’ ने राष्ट्रीय प्रोटीन दिवस के अवसर पर अपने सामाजिक उत्तरदायित्व अभियान ‘#NutrelaGivesBack’ के तहत दिल्ली-एनसीआर की 52 झुग्गी बस्तियों में एक विशाल भोजन वितरण अभियान चलाया. इस पहल के माध्यम से करीब 1 लाख बच्चों को उच्च प्रोटीन युक्त भोजन परोसा गया. 

गुणवत्ता और पोषण पर विशेष ध्यान

वितरित किए गए प्रत्येक भोजन में पोषण की गुणवत्ता का खास ख्याल रखा गया. यह भोजन न्यूट्रेला चंक्स (Nutrela Chunks) से तैयार किया गया था, जिसमें 52% प्राकृतिक और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन होता है. इसके अतिरिक्त, भोजन पकाने के लिए न्यूट्रेला सोयाबीन तेल का उपयोग किया गया, जो विटामिन A और D से फोर्टिफाइड होने के साथ-साथ ओमेगा 3 और 6 जैसे आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर है. 

राष्ट्र निर्माण की सोच

इस अवसर पर पतंजलि फूड्स लिमिटेड के सीईओ, श्री संजीव अस्थाना ने कहा कि न्यूट्रेला केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के विजन का एक हिस्सा है. उन्होंने जोर देते हुए कहा, “पतंजलि का मानना है कि एक मजबूत राष्ट्र की नींव शिक्षा और स्वास्थ्य पर टिकी होती है. भारत में प्रोटीन की कमी को दूर करना अत्यंत आवश्यक है और हम ‘India ko strong banate hai, Nutrela khate hai’ के संकल्प के साथ इस अंतराल को भरने का प्रयास कर रहे हैं.” 

साझेदारी से मिली सफलता

इस बड़े स्तर के अभियान को सुचारू बनाने के लिए न्यूट्रेला ने रोबिन हुड आर्मी, ट्रूली हेल्प और हेल्पिन ह्यूमैनिटी जैसे प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संगठनों के साथ साझेदारी की. इन संगठनों के सहयोग से बस्तियों के आखिरी बच्चे तक पोषण पहुँचाना संभव हो सका. 

यह अभियान केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की ओर एक सकारात्मक कदम है, जो भारत के बच्चों को बेहतर पोषण देने की न्यूट्रेला की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. 

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सुबह नींद से उठते ही आने लगते हैं चक्कर, ये किस बीमारी का संकेत?

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हफ्ते में एक बार पीना सुरक्षित है या सिर्फ एक भ्रम? जानें एक्सपर्ट्स की असली राय

हफ्ते में एक बार पीना सुरक्षित है या सिर्फ एक भ्रम? जानें एक्सपर्ट्स की असली राय


What Happens If You Drink Once A Week: कई लोग मानते हैं कि हफ्ते में एक बार शराब पीना बिल्कुल सुरक्षित है. लेकिन सच यह है कि कभी-कभार की गई ड्रिंकिंग भी शरीर पर असर डाल सकती है. असर कितना होगा, यह व्यक्ति की उम्र, सेहत, लाइफस्टाइल और पीने की मात्रा पर निर्भर करता है. Healthyy Podcast में बताया गया कि अगर आप दो बियर पीते हैं और साथ में कुछ स्नैक लेते हैं, तो फिर 1200 कैलोरी हो गई, आपको पूरे दिन में 1600 कैलोरी लेनी होती है. ऐसे में आपने जितना पूरे हफ्ते में बचाया होगा, एक दिन में चला जाएगा. चलिए आपको बताते हैं कि एक्सपर्ट क्या कहते हैं इसको लेकर.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

अंबाला स्थित पूजा सुपर स्पेशलिटी क्लिनिक के डॉ. दीपक सहोता के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सप्ताह में लगभग 60 मिलीलीटर तक सीमित मात्रा में शराब लेता है, तो अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए यह अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जा सकती है. हालांकि वे चेतावनी देते हैं कि “कम मात्रा” का मतलब यह नहीं है कि जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाता है. जरूरत से ज्यादा पीना, अगर हफ्ते में सिर्फ एक बार हो, तो भी शरीर के अहम अंगों पर दबाव डाल सकता है.

बिंज ड्रिंकिंग का खतरा

कम समय में ज्यादा मात्रा में शराब पीना, जिसे बिंज ड्रिंकिंग कहा जाता है, सबसे ज्यादा नुकसानदेह है. इससे अचानक लिवर पर असर, हार्ट से जुड़ी दिक्कतों और गंभीर मामलों में जान का खतरा भी हो सकता है. भले ही यह आदत हफ्ते में एक दिन तक सीमित हो, फिर भी शरीर का संतुलन बिगाड़ सकती है.

लिवर और किडनी पर असर

लिवर शराब को तोड़ने का मुख्य काम करता है. नियमित रूप से या पिर सप्ताह में एक बार शराब लेने से लिवर पर दबाव पड़ता है. लंबे समय में फैटी लिवर या अन्य लिवर संबंधी समस्याएं विकसित हो सकती हैं. शराब शरीर को डिहाइड्रेट भी करती है, जिससे किडनी की काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, खासकर अगर पानी कम पिया जाए.

हार्ट और ब्लड प्रेशर

शराब का असर हार्ट सिस्टम पर भी पड़ता है. यह ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है और धड़कन को अनियमित कर सकती है. यदि शराब के साथ धूम्रपान भी हो, तो हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

नींद पर प्रभाव

हालांकि, शराब पीने के बाद नींद जल्दी आ सकती है, लेकिन यह गहरी और आरामदायक नींद में बाधा डालती है। अगले दिन थकान और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। खराब नींद का असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर पड़ता है.

डाइजेशन सिस्टम की दिक्कतें

अधिक मात्रा में शराब एसिडिटी, सीने में जलन और गैस्ट्रिक समस्याएं बढ़ा सकती हैं. गंभीर मामलों में आंतों में सूजन या ब्लीडिंग जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं.

किन लोगों को बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए?

गर्भवती महिलाओं, लिवर या हार्ट की बीमारी से जूझ रहे लोगों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों, कुछ खास दवाएं लेने वालों और वाहन चलाने वालों को शराब से पूरी तरह दूरी रखनी चाहिए. जिन लोगों को एसिड रिफ्लक्स या डाइजेशन संबंधी समस्या है, उनके लिए भी शराब नुकसानदेह हो सकती है.

इसे भी पढ़ें- Brain Hemorrhage: क्यों होता है ब्रेन हैमरेज? एक्सपर्ट्स से जानें इसके कारण, प्रकार और बचाव के सबसे जरूरी तरीके

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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वजन नहीं घट रहा तो घबराएं नहीं, ये 7 संकेत बताते हैं फैट तेजी से हो रहा है कम

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अगर आप लगातार वर्कआउट कर रहे हैं और दो से तीन हफ्तों से वजन नहीं घट रहा तो घबराने की जरूरत नहीं है. फिटनेस कोच के अनुसार यह संकेत हो सकता है कि शरीर जल्द ही एक साथ जमा पानी और फैट को रिलीज करेगा. इसे व्हूश इफेक्ट कहा जाता है, जिसमें अचानक वजन में 3 से 6 पाउंड तक की गिरावट भी देखने को मिल सकती है.



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