किन तरीकों से उम्र निकलने के बाद भी बढ़ा सकते हैं लंबाई? जानिए ये आसान तरीके

किन तरीकों से उम्र निकलने के बाद भी बढ़ा सकते हैं लंबाई? जानिए ये आसान तरीके


Height Increase Tips: आखिर लंबी हाईट कौन नहीं चाहता, हर किसी की यही ख्वाहिश होती है कि उसकी हाईट परफेक्ट हो. लेकिन कई लोगों का मानना है कि एक उम्र के बाद लंबाई नहीं बढ़ती. हालांकि हमारे शरीर में हड्डियों की ग्रोथ एक तय उम्र तक ही होती है. साथ ही ऐसा माना जाता है कि लंबाई का 60 से 80 प्रतिशत हिस्सा आपके जेनेटिक्स से आता है जिसे आप कंट्रोल नहीं कर सकते. लेकिन बाकी का 40 से 20 प्रतिशत हिस्सा आप कंट्रोल कर सकते हैं, ऐसे में आपको बता दें कि सही जानकारी होने से आप आसानी से अपने शरीर की पोस्टर और पर्सनैलिटी को बेहतर बना सकते हैं. अगर आप भी अपनी हाईट को लेकर परेशान हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है. सही लाइफस्टाइल, डाइट और कुछ एक्सरसाइज से आप अच्छा फर्क महसूस कर सकते हैं.

अच्छी नींद और सही लाइफस्टाइल अपनाएं

लंबाई और शरीर के विकास में अच्छी नींद का भी अहम योगदान होता है. रोजाना 6 से 8 घंटे की गहरी नींद लेने से शरीर को आराम मिलता है और ग्रोथ हार्मोन बेहतर तरीके से काम करता है, इसलिए पर्याप्त नींद लेना भी लंबाई बढ़ाने का तरीका हो सकता है. साथ ही सही तरीके से बैठना और चलना भी जरूरी है, क्योंकि गलत पोस्टर आपकी लंबाई को कम दिखा सकता है. जैसे झुक कर खड़ा होना, कमर सीधी करके न बैठना. ऐसे में अगर आप अपनी रोजमर्रा की आदतों में सुधार करते हैं, तो आप न केवल लंबा दिख सकते हैं बल्कि खुद को ज्यादा कॉन्फिडेंट भी महसूस करा सकते हैं. 

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बैलेंस डाइट और सही पोषण जरूरी

बैलेंस डाइट लेने से शरीर की ओवरऑल ग्रोथ में मदद मिलती है, जिससे हाईट बढ़ने के चांस काफीहद तक बढ़ जाते हैं. इसलिए एक्सपर्ट का मानना है कि अगर आप अपनी लंबाई और बॉडी ग्रोथ को बेहतर करना चाहते हैं, तो सही डाइट लेना बहुत जरूरी है. ऐसे में अगर आप कम उम्र से ही अच्छी डाइट लेते है तो जाहिर सी बात है आपको हाईट बढ़ाने के लिए उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. अच्छी डाइट में  प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर भोजन जैसे दूध, दही, हरी सब्जियां और फल लें जो आपके शरीर को मजबूती देगा . साथ ही पानी ज्यादा पीना भी जरूरी है, ताकि शरीर हाइड्रेट रहे. इसके अलावा जंक फूड और ज्यादा तेल वाली चीजों से दूरी बनाकर आप अपनी सेहत को बेहतर रख सकते हैं, जिससे आपकी ओवरऑल ग्रोथ पर अच्छा असर पड़ता है.

सही एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग का महत्व

लंबाई को बेहतर दिखाने में एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग का बहुत बड़ा रोल होता है. रोजाना स्ट्रेचिंग करने से शरीर की मसल्स लचीली बनती हैं और रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है.बच्चों, युवाओं और हाइट बढ़ाने वाले लोगों को दिन में कम से कम 20 से 30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए.  जैसे कि हैंगिंग, टो टच और योगासन करना काफी फायदेमंद होता है.  इससे आपकी बॉडी की पोस्टर सुधरती है और आप पहले से ज्यादा लंबे नजर आते हैं.  

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सुबह उठते ही एड़ियों में होता है दर्द, जानें यह किस बीमारी का है संकेत?

सुबह उठते ही एड़ियों में होता है दर्द, जानें यह किस बीमारी का है संकेत?


Why Do My Heels Hurt In The Morning: सुबह उठते ही एड़ियों में दर्द महसूस होना कई लोगों के लिए आम बात है. बिस्तर से उठते ही जैसे ही पहला कदम जमीन पर पड़ता है, एड़ी में तेज चुभन या जकड़न महसूस होती है. अक्सर लोग इसे सामान्य थकान या हल्की परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह शरीर का एक संकेत भी हो सकता है, जिसे समझना जरूरी है. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट healthline  के अनुसार, सुबह के समय एड़ी में दर्द का सबसे आम कारण प्लांटर फैसाइटिस हो सकता है. यह पैर के तलवे में मौजूद एक मोटी लिगामेंट में सूजन की स्थिति होती है. रातभर आराम की स्थिति में रहने के कारण उस हिस्से में ब्लड फ्लो कम हो जाता है, जिससे सुबह उठते ही जकड़न और दर्द ज्यादा महसूस होता है. कुछ मिनट चलने के बाद यह दर्द थोड़ा कम हो जाता है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो समस्या बढ़ सकती है.

एचिलीस टेंडिनाइटिस की दिक्कत

इसके अलावा, एक और कारण एचिलीस टेंडिनाइटिस भी हो सकता है. इसमें पिंडली की मांसपेशियों को एड़ी से जोड़ने वाली नस में सूजन आ जाती है. इस स्थिति में सुबह के साथ-साथ दिनभर भी दर्द बना रह सकता है. खासकर उन लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है जो ज्यादा दौड़ते हैं या पैरों पर ज्यादा दबाव डालते हैं. कुछ मामलों में यह दर्द रूमेटॉइड आर्थराइटिस से भी जुड़ा हो सकता है. यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम ही जोड़ों पर असर डालने लगती है. इससे एड़ी और पैरों में सूजन और दर्द बढ़ सकता है, जो सुबह के समय ज्यादा महसूस होता है.

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ये भी हो सकती हैं दिक्कतें

अगर दर्द धीरे-धीरे बढ़ रहा है और चलने में तकलीफ हो रही है, तो यह स्ट्रेस फ्रैक्चर का संकेत भी हो सकता है.  यह हड्डी में छोटी दरार की तरह होता है, जो ज्यादा दबाव या गलत तरीके से चलने-भागने के कारण होता है. इस स्थिति में दर्द दिनभर बना रहता है और समय के साथ बढ़ता जाता है. इसके अलावा, थायरॉयड से जुड़ी समस्या यानी हाइपोथायरॉयडिज्म भी एड़ी के दर्द का कारण बन सकती है. शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ने से पैरों और एड़ी में सूजन आ सकती है, जिससे सुबह उठते ही दर्द महसूस होता है. 

इसको कैसे कर सकते हैं ठीक?

हल्के मामलों में बर्फ से सिकाई, आराम और स्ट्रेचिंग जैसे घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं. सुबह उठने से पहले हल्की एक्सरसाइज या पैरों को धीरे-धीरे मूव करना भी मददगार हो सकता है. लेकिन अगर दर्द लगातार बना रहे या ज्यादा बढ़ जाए, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. एड़ी का यह दर्द छोटा लग सकता है, लेकिन यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है, सही समय पर ध्यान देना और इलाज कराना ही इसे गंभीर होने से रोक सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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40 की उम्र के बाद पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के 5 नेचुरल तरीके, जानें आसान डेली हैबिट्स

40 की उम्र के बाद पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के 5 नेचुरल तरीके, जानें आसान डेली हैबिट्स


दिन की शुरुआत में, उठने के 30 मिनट के अंदर धूप लेना बहुत फायदेमंद होता है. सुबह की धूप शरीर की बॉडी क्लॉक (circadian rhythm) को सही करती है और स्ट्रेस हार्मोन यानी कोर्टिसोल को बैलेंस करती है. जब कोर्टिसोल कंट्रोल में रहता है, तो टेस्टोस्टेरोन पर उसका नकारात्मक असर कम होता है. इसलिए रोज सुबह थोड़ी देर धूप में रहना एक आसान लेकिन असरदार तरीका है.

अगर आप 40 की उम्र के बाद भी फिट और स्ट्रॉन्ग रहना चाहते हैं, तो स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बहुत जरूरी है.स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट्स और पुश एक्सरसाइज जैसी कंपाउंड मूवमेंट्स शरीर में नेचुरल तरीके से टेस्टोस्टेरोन और ग्रोथ हार्मोन को बढ़ावा देती हैं. सिर्फ हल्की वॉक या कार्डियो पर्याप्त नहीं होता, शरीर को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है.

अगर आप 40 की उम्र के बाद भी फिट और स्ट्रॉन्ग रहना चाहते हैं, तो स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बहुत जरूरी है.स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट्स और पुश एक्सरसाइज जैसी कंपाउंड मूवमेंट्स शरीर में नेचुरल तरीके से टेस्टोस्टेरोन और ग्रोथ हार्मोन को बढ़ावा देती हैं. सिर्फ हल्की वॉक या कार्डियो पर्याप्त नहीं होता, शरीर को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है.

Published at : 21 Apr 2026 06:21 AM (IST)

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डायबिटीज में आम खा सकते हैं या नहीं? एक्सपर्ट से जानें सेहत से जुड़ी बात

डायबिटीज में आम खा सकते हैं या नहीं? एक्सपर्ट से जानें सेहत से जुड़ी बात


Can Diabetic Patients Eat Mango Safely: डायबिटीज के मरीज अक्सर अपने पसंदीदा फलों से दूरी बना लेते हैं, खासकर आम से. वजह साफ है कि शुगर बढ़ने का डर. लेकिन क्या सच में आम पूरी तरह छोड़ देना चाहिए? या फिर सही तरीके से खाया जाए तो इसका आनंद लिया जा सकता है? यही सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है जिसे डायबिटीज है और आम बेहद पसंद है. चलिए आपको इस सवाल का जवाब देते हैं. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

 इंटीग्रेटिव लाइफस्टाइल एक्सपर्ट Luke Coutinho ने इसको लेकर सोशल मीडिया पर अपने एक वीडियो में बताया कि आम से डरने की जरूरत नहीं, बल्कि समझदारी से खाने की जरूरत है. अगर आपकी शुगर कंट्रोल में नहीं है, या आप जरूरत से ज्यादा आम खा रहे हैं, खासकर रात में, तो यह नुकसानदायक हो सकता है. लेकिन अगर आप संतुलन बनाए रखें, तो आम को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है.

आम में नेचुरल शर्करा जरूर अधिक होती है, लेकिन इसमें कई पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं. खास बात यह है कि इसमें मैंगिफेरिन नाम का एक तत्व पाया जाता है, जिसे एंटी-डायबिटिक गुणों के लिए जाना जाता है. यानी सही तरीके से खाया जाए तो यह शरीर को नुकसान पहुंचाने के बजाय फायदा भी दे सकता है.

किन बातों का रख सकते हैं ध्यान?

Luke Coutinho सलाह देते हैं कि आम को अकेले खाने के बजाय इसे संतुलित तरीके से लिया जाए. जैसे आप इसे मेवे, बीज या दही के साथ खा सकते हैं. इससे शरीर में शुगर का लेवल अचानक बढ़ने से बचता है और ग्लूकोज धीरे-धीरे रिलीज होता है. यही तरीका आम खाने को ज्यादा सुरक्षित बनाता है.

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सबसे जरूरी बात है मात्रा और समय का ध्यान रखना. एक बार में बहुत ज्यादा आम खाना सही नहीं है. अगर आपका शरीर सहन करता है तो एक छोटा हिस्सा खाया जा सकता है, और अगर शुगर बढ़ती महसूस हो तो मात्रा और कम करनी चाहिए. देर रात आम खाना भी सही नहीं माना जाता, क्योंकि उस समय शरीर की प्रोसेसिंग धीमी हो जाती है.

 

अगर शुगर लेवल बढ़े तो क्या करना चाहिए?

यह भी समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है. इसलिए जरूरी है कि आप अपने शरीर को समझें और उसी के अनुसार फैसला लें. अगर आम खाने के बाद शुगर लेवल बढ़ता है, तो उसे सीमित करना ही बेहतर होगा. डायबिटीज में आम पूरी तरह वर्जित नहीं है, लेकिन लापरवाही बिल्कुल नहीं चलती. सही मात्रा, सही समय और सही तरीके के साथ आप इस फल का आनंद ले सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पेन किलर लेने के तुरंत बाद कैसे खत्म हो जाता है शरीर का दर्द, कैसे काम करती है दवा?

पेन किलर लेने के तुरंत बाद कैसे खत्म हो जाता है शरीर का दर्द, कैसे काम करती है दवा?


Pain killers: जब शरीर में किसी प्रकार का दर्द होता है, तो लोग अक्सर पेन किलर का रुख करते हैं. खास बात यह है कि दवा लेने के कुछ ही समय बाद दर्द कम होना शुरू हो जाता है. आखिर यह कैसे संभव हो पाता है? शरीर में दर्द उठते ही यह एक प्रकार का संकेत होता है कि कहीं न कहीं कोई समस्या, चोट या सूजन हुई है. जब भी यह दर्द होता है, तो शरीर में Prostaglandius नामक केमिकल बनते हैं, जो नसों के जरिए दिमाग को संकेत देते हैं कि कहां दर्द हो रहा है.

कैसे काम करती है पेन किलर?

अधिकांश पेन किलर जैसे paracetamol और ibuprofen, शरीर में इन दर्द पैदा करने वाले केमिकल्स के निर्माण को कम करने में सहायक होती हैं. ये दवाइयां Prostaglandius के बनने की प्रक्रिया को रोकने में मदद करती हैं. जब ये केमिकल कम बनते हैं, तो नसों तक दर्द का संकेत कम पहुंचता है. परिणामस्वरूप, हमें दर्द में राहत महसूस होने लगती है.

क्यों दिखता है इतनी जल्दी असर?

ये दवाइयां पेट में जाते ही जल्दी से खून में जाकर घुल जाती हैं. खून के जरिए ये फिर तेजी से पूरे शरीर में पहुंचती हैं. ये खास रूप से दिमाग और दर्द वाले हिस्से पर अपना असर दिखाती हैं. आमतौर पर, अधिकांश पेन किलर 20 से 30 मिनट के भीतर ही असर दिखाना शुरू कर देती हैं.

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कितने प्रकार के होते हैं पेन किलर?

पेन किलर अलग-अलग प्रकार के होते हैं और उनका काम करने का तरीका भी अलग-अलग होता है.

  • Analgesics – आम पेन किलर जैसे paracetamol, दर्द और बुखार को कम करती हैं, लेकिन सूजन पर ज्यादा असर नहीं डाल पातीं.
  • NSAIDs – ibuprofen जैसी दवाइयां, जो दर्द के साथ-साथ सूजन पर भी असर दिखाती हैं.
  • Opioids – ये तब दिए जाते हैं जब दर्द नियंत्रित नहीं हो पा रहा हो, क्योंकि ये सीधे दिमाग पर असर डालती हैं. लेकिन इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के लेना हानिकारक हो सकता है.

पेन किलर को सही मात्रा और जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल करना चाहिए. ज्यादा या बार-बार लेने से पेट में जलन या अल्सर, किडनी या लिवर पर असर और ब्लड प्रेशर बढ़ने जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं.

सावधानियां बरतनी हैं जरूरी

  • हमेशा निर्धारित मात्रा में ही दवा लें.
  • खाली पेट पेन किलर लेने से बचें.
  • अगर दर्द लंबे समय तक रहे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.
  • बच्चों और बुजुर्गों को दवा देते समय विशेष सावधानी बरतें.

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शरीर में आयरन कम है तो हल्के में न लें, हो सकता है अल्जाइमर; इस देश में 1 करोड़ लोगों पर खतरा

शरीर में आयरन कम है तो हल्के में न लें, हो सकता है अल्जाइमर; इस देश में 1 करोड़ लोगों पर खतरा


Can Iron Deficiency Increase Alzheimer Risk: आयरन की कमी को अक्सर लोग सिर्फ कमजोरी या थकान से जोड़कर देखते हैं. लेकिन अब नई रिसर्च इस धारणा को बदल रही है. साइंटिस्ट का कहना है कि शरीर में कम हीमोग्लोबिन सिर्फ ऊर्जा ही नहीं, बल्कि दिमाग पर भी असर डाल सकता है और यह असर धीरे-धीरे डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारी की ओर ले जा सकता है. 17 अप्रैल 2026 को जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित एक स्टडी ने इस कड़ी को और मजबूत किया है. इसमें कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट  और स्टॉकहोम विश्वविद्यालय के रिसर्चर ने 2200 से ज्यादा बुजुर्गों पर लंबे समय तक स्टडी किया.

क्या निकला रिसर्च में?

इस रिसर्च में देखा गया कि जिन लोगों में एनीमिया था, उनके खून में अल्जाइमर से जुड़े बायोमार्कर पहले से ही ज्यादा थे. इसके साथ ही, फॉलो-अप के दौरान उनमें डिमेंशिया विकसित होने का खतरा भी ज्यादा पाया गया. यानी आयरन की कमी सिर्फ एक साधारण समस्या नहीं, बल्कि दिमागी बीमारियों का संकेत भी हो सकती है. स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों में कम हीमोग्लोबिन और अल्जाइमर से जुड़े प्रोटीन जैसे p-tau217 दोनों मौजूद थे, उनमें डिमेंशिया का जोखिम सबसे ज्यादा था. यह संकेत देता है कि शरीर में खून की कमी और दिमागी बदलाव एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं. 

आयरन की कमी से क्या होती है दिक्कत?

आयरन की कमी से शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई भी प्रभावित होती है. जब ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो उसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है. यही कारण है कि एनीमिया को अब केवल शारीरिक नहीं, बल्कि न्यूरोलॉजिकल समस्या के तौर पर भी देखा जा रहा है. एक और दिलचस्प बात यह सामने आई कि पुरुषों में एनीमिया होने पर डिमेंशिया का खतरा महिलाओं के मुकाबले ज्यादा देखा गया, जबकि महिलाओं में यह समस्या ज्यादा आम होती है. रिसर्चर का मानना है कि इसके पीछे शरीर की अलग-अलग जैविक प्रतिक्रिया जिम्मेदार हो सकती है. 

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कितने लोग इससे प्रभावित?

आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में करीब 1.2 अरब लोग आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया से प्रभावित हैं. वहीं यूके में ही लगभग 1 करोड़ लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं, जो इसे एक बड़ी पब्लिक हेल्थ चिंता बना देता है.

क्या इसका कोई इलाज है?

अच्छी बात यह है कि आयरन की कमी को काफी हद तक रोका जा सकता है. संतुलित आहार, आयरन से भरपूर फूड, जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, अनाज और रेड मीट और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट लेने से इसे कंट्रोल किया जा सकता है. एक्सपर्ट का मानना है कि अगर समय रहते एनीमिया की पहचान और इलाज किया जाए, तो डिमेंशिया के खतरे को कम किया जा सकता है. क्योंकि लगभग 45 प्रतिशत मामलों में सही लाइफस्टाइल और समय पर जांच से इस बीमारी को टाला या धीमा किया जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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