गर्मी में लू लगने से पहले ही शरीर करने लगता है इशारे, इन्हें कैसे पहचानें?

गर्मी में लू लगने से पहले ही शरीर करने लगता है इशारे, इन्हें कैसे पहचानें?


Heatstroke Symptoms : गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप और बढ़ता हुआ तापमान लेकर आता है. जैसे-जैसे पारा चढ़ता है, वैसे-वैसे लू लगने (Heatstroke) का खतरा भी बढ़ने लगता है. यह एक ऐसी स्थिति है जो शरीर के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है और अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो गंभीर परेशानी पैदा कर सकती है. 

अक्सर लोग सोचते हैं कि लू अचानक लग जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है. शरीर पहले ही कुछ संकेत देना शुरू कर देता है, जिन्हें अगर हम समझ लें तो बड़ी समस्या से बचा जा सकता है. खासकर बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और जो लोग धूप में ज्यादा समय तक काम करते हैं, उन्हें इसका खतरा ज्यादा होता है. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि गर्मी में लू लगने से पहले शरीर क्या-क्या संकेत देता है और इन्हें कैसे पहचाना जा सकता है. 

गर्मी में लू लगने से पहले शरीर क्या-क्या संकेत देता है

1. तेज सिरदर्द और चक्कर आना – लू लगने से पहले सबसे आम संकेत है अचानक तेज सिरदर्द होना, ऐसा महसूस होता है जैसे सिर भारी हो गया हो या धड़क रहा हो. इसके साथ-साथ चक्कर भी आने लगते हैं. यह इस बात का संकेत होता है कि शरीर का तापमान बढ़ रहा है और दिमाग पर गर्मी का असर पड़ने लगा है. अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत धूप से हट जाना चाहिए. 

2. बहुत ज्यादा कमजोरी और थकान महसूस होना – दूसरा बड़ा संकेत  शरीर में अचानक बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी आ जाना है. ऐसा लगता है जैसे शरीर में ताकत ही नहीं बची हो और कोई भी काम करना मुश्किल हो रहा हो. कभी-कभी व्यक्ति को चलने-फिरने में भी परेशानी होने लगती है. यह इस बात का संकेत है कि शरीर गर्मी को संभाल नहीं पा रहा है.

3. पसीने में बदलाव – लू लगने से पहले पसीने में बदलाव एक बहुत जरूरी संकेत होता है.कुछ लोगों को बहुत ज्यादा पसीना आने लगता है, जबकि कुछ मामलों में पसीना अचानक बंद हो जाता है. दोनों ही स्थिति खतरनाक होती हैं क्योंकि इसका मतलब है कि शरीर अपना तापमान कंट्रोल नहीं कर पा रहा है.

 4. मुंह सूखना और प्यास ज्यादा लगना – गर्मी बढ़ने पर शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होने लगता है. ऐसे में मुंह सूखने लगता है और बार-बार पानी पीने की इच्छा होती है.अगर इस संकेत को नजरअंदाज किया जाए तो शरीर में पानी की कमी और बढ़ सकती है, जिससे लू लगने का खतरा बढ़ जाता है.

5. बेचैनी, घबराहट और ध्यान लगाने में परेशानी – लू लगने से पहले व्यक्ति को अचानक बेचैनी महसूस होने लगती है. दिल घबराने लगता है और किसी भी काम में मन नहीं लगता है. कई बार ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है और व्यक्ति उलझन महसूस करता है. यह दिमाग पर गर्मी के असर का संकेत होता है.

6. हल्का बुखार या शरीर का गर्म महसूस होना – शुरुआत में शरीर हल्का गर्म महसूस होने लगता है या बुखार जैसा लग सकता है. यह इस बात का संकेत है कि शरीर का तापमान सामान्य से ऊपर जा रहा है. अगर इसे समय पर नहीं संभाला गया तो स्थिति लू में बदल सकती है. 

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लू से बचाव के आसान तरीके

1. लू से बचने के लिए कुछ आसान सावधानियां बहुत मददगार होती हैं. जैसे दोपहर की तेज धूप में बाहर जाने से बचें.

2. हल्के और सूती कपड़े पहनें.

3. सिर को ढक कर रखें.

4. खूब पानी और लिक्विड पीते रहें.

5. नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ का सेवन करें.

6. लंबे समय तक धूप में काम करते समय बीच-बीच में आराम करें.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बिना वजह मोबाइल फोन स्क्रॉल करने की पड़ गई आदत, जानिए इसका दिमाग पर क्या पड़ता है असर?

बिना वजह मोबाइल फोन स्क्रॉल करने की पड़ गई आदत, जानिए इसका दिमाग पर क्या पड़ता है असर?


Endless scrolling: इंटरनेट पर शॉर्ट वीडियो की स्क्रॉलिंग आप भी करते होंगे, स्क्रॉलिंग करते समय बस दिमाग में यह चल रहा होता है कि बस कुछ वीडियो और, 2-4 वीडियो और, और यही थोड़ा-थोड़ा कब घंटों में बदल जाता है पता ही नहीं चलता. अंत में बस यह सोचते हैं कि आज काफी समय बर्बाद हो गया. बात सही है, समय तो बर्बाद होता है, लेकिन आपको पता है इससे आपके मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पड़ता है? यह आपके ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और आपके आवेगों पर नियंत्रण करने की क्षमता को काफी ज्यादा प्रभावित करता है.

लगातार स्क्रॉलिंग की आदत…

शॉर्ट वीडियो को इस तरह से बनाया जाता है कि कम समय में ज्यादा बात या जानकारी दी जा सके. इनमें फास्ट जंप कट्स और अचानक ध्यान खींचने वाले विजुअल्स का इस्तेमाल होता है, जो तुरंत ही लोगों का ध्यान खींचकर उन्हें व्यस्त रखते हैं. इसमें शुरुआत में कोई समस्या नहीं दिखती, लेकिन लंबे समय के साथ यह आपके मस्तिष्क को प्रभावित करता है. Frontiers in Human Neuroscience द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों को शॉर्ट वीडियो की लत होती है उनमें आत्म-नियंत्रण और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कमजोर हो सकती है.

आपके मस्तिष्क पर इसका असर

शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च की, जिसमें उन्होंने कुछ लोगों का EEG स्कैन किया जब वे ध्यान लगाने वाला काम कर रहे थे. उन्होंने पाया कि जो लोग ज्यादा स्क्रॉलिंग वाला कंटेंट देखते हैं, उनका दिमाग बाकी लोगों की तुलना में कम ध्यान केंद्रित कर पा रहा था.

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शॉर्ट वीडियो की आदत कैसे लग जाती है?

शॉर्ट वीडियो की आदत धीरे-धीरे लगती है क्योंकि ये बहुत जल्दी-जल्दी नया और मजेदार कंटेंट दिखाती हैं. जब आप एक वीडियो देखते हैं तो वह आपको कोई भावनात्मक प्रतिक्रिया महसूस कराती है, जिससे आगे और वीडियो देखने का मन करने लगता है. लंबे समय तक आपका मस्तिष्क छोटे और तेज कंटेंट का आदी हो जाता है, जिसके बाद लंबी वीडियो देखने और समझने की इच्छा कम होने लगती है और आप धीरे-धीरे शॉर्ट वीडियो की लत में फंस जाते हैं.

यह सिर्फ ध्यान केंद्रित करने की बात नहीं है…

यह आपके दिमाग की काम करने की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करती है. लगातार छोटे-छोटे और तेज कंटेंट देखने की आदत से दिमाग तुरंत मिलने वाले इनाम का आदी हो जाता है, जिससे धैर्य कम होने लगता है और लंबे समय तक किसी एक काम पर फोकस करना मुश्किल हो जाता है. धीरे-धीरे सोचने-समझने की क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि दिमाग गहराई से सोचने की बजाय जल्दी-जल्दी बदलते कंटेंट के हिसाब से ढलने लग जाता है.

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सर्वाइकल कैंसर के मिथक बन रहे खतरा, जानिए महिलाओं को इसका सच जानना क्यों है बेहद जरूरी

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आंकड़ों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में चौथा सबसे आम कैंसर है. भारत में इसका बोझ काफी ज्यादा है, जहां हर साल बड़ी संख्या में नए मामले सामने आते हैं और हजारों महिलाओं की जान जाती है. ऐसे में जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा हथियार मानी जा रही है.



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गर्मी में बिना काम किए भी क्यों लगती है थकान? डॉक्टर ने बताया असली कारण

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Summer Fatigue: अप्रैल खत्म होते-होते ही चिलचिलाती और चुभने वाली गर्मी ने कहर ढाना शुरू कर दिया है. तापमान 40 डिग्री के पार जाने के बाद लोगों ने अभी से  कयास लगाना शुरू कर दिया है कि इस बार की गर्मी कितनी भीषण होने वाली है. इस बीच डॉक्टर भी Peak Heat (11 से 3 बजे के बीच) के दौरान घर पर रहने की सलाह दे रहे हैं. हर साल Heat wave और UV Rays का खतरा लोगों पर मंडराता रहता है और इस मौसम में लोग बिना काम किए भी थका-थका महसूस करते हैं.

बहुत से लोग गर्मी में एक अजीब पैटर्न नोटिस कर रहे हैं, जिसमें शारीरिक काम न करने पर भी लोग अत्यधिक थका हुआ महसूस करने लगे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक यह कोई भ्रम नहीं, बल्कि आपके शरीर पर पड़ रहे बोझ के कारण हो रहा है. डॉक्टरों के अनुसार, “गर्मी में होने वाली थकावट एक शारीरिक प्रतिक्रिया है, जो हीट, डिहाइड्रेशन और नींद पूरी न होने के कारण होती है.”

गर्मी के कारण बढ़ता है शरीर पर बोझ

गर्म मौसम में शरीर अपना आंतरिक तापमान बनाए रखने की कोशिश करता है, जिसके कारण हमारे हार्ट को जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ता है. पसीना आने से मदद मिलती है, लेकिन पसीने के साथ शरीर में मौजूद जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकल जाते हैं. हल्की-सी डिहाइड्रेशन भी ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करती है, जो थकावट, सिरदर्द और लो एनर्जी का कारण बन जाती है और आपकी पूरे दिन की प्रोडक्टिविटी को प्रभावित करती है.

नींद और सांस लेने में दिक्कत

गर्मी की रातें काफी कष्टदायक होती हैं और अच्छी नींद के लिए थोड़े ठंडे तापमान की जरूरत होती है. जब ऐसा नहीं होता तो नींद खराब होती है. ऐसे में घंटों नींद लेने के बाद भी थका-थका महसूस होता है. गर्मी के कारण सांस से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं, जैसे Sleep Apnea. जब नींद डिस्टर्ब होती है, तो कंसंट्रेशन और मूड बुरी तरह बिगड़ जाता है.

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क्या करना है जरूरी?

गर्मी से होने वाली थकावट आलस के कारण नहीं होती. इसलिए समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, जिससे आप हाइड्रेटेड रहेंगे और इलेक्ट्रोलाइट्स भी संतुलित रहेंगे. साथ ही अपनी सोने की जगह को भी ठंडा रखने की कोशिश करें.

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एकदम फिट दिखने वालों को क्यों आ रहा हार्ट अटैक? डॉक्टर से जानें असली वजह

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Hidden Causes Of Heart Disease In Young Adults: क्या आप पूरी तरह फिट और हेल्दी दिखते हैं, फिर भी दिल की बीमारी का खतरा हो सकता है? यह सवाल सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है. अक्सर हम मान लेते हैं कि अगर हम अच्छा खाते हैं, थोड़ा-बहुत व्यायाम करते हैं और सक्रिय रहते हैं, तो हार्ट पूरी तरह सुरक्षित है. लेकिन असलियत यह है कि दिल की सेहत सिर्फ बाहरी फिटनेस से तय नहीं होती. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एकस्पर्ट क्या कहते हैं. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डॉ. समनजॉय मुखर्जी , जो मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख हैं, उन्होंने TOI को बताया कि “हम में से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि सही खानपान और थोड़ा व्यायाम हमें हार्ट अटैक से बचा लेगा, लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं है.” दरअसल, फिटनेस जो हमें दिखाई देती है कि जैसे सही वजन, अच्छी स्टैमिना या साफ त्वचा, वह सिर्फ सतही संकेत हैं. शरीर के अंदर चल रही प्रक्रियाएं, जैसे इन्फ्लेमेशन, आर्टरीज को होने वाला नुकसान या हार्मोनल असंतुलन, बाहर से नजर नहीं आते. यही छिपे हुए कारक धीरे-धीरे दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं. 

भारत में हार्ट रोग के मामला

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, भारत में 70 साल से कम उम्र के लोगों में आधे से ज्यादा हार्ट रोग के मामले सामने आते हैं. इसका मतलब यह है कि उम्र या बाहरी फिटनेस भी पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती. तनाव भी एक बड़ा लेकिन अनदेखा कारण है. यह हमेशा स्पष्ट नहीं दिखता, बल्कि डेडलाइन, नींद की कमी और मानसिक दबाव के रूप में धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और शरीर में सूजन बढ़ती है, जो दिल पर सीधा असर डालती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट भी बताती है कि लगातार तनाव हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ाता है.

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काफी लोगों को इसके बारे में पता नहीं होता

इसके अलावा, जेनेटिक्स भी अहम भूमिका निभाता है. अगर परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी के मामले रहे हैं, तो जोखिम अपने आप बढ़ जाता है, चाहे आपकी लाइफस्टाइल कितनी भी अच्छी क्यों न हो. कई ऐसी साइलेंट बीमारियां भी हैं, जो बिना लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं. जैसे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज.  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ से जुड़े स्टडी में पाया गया है कि बड़ी संख्या में लोगों को अपने हाई ब्लड प्रेशर के बारे में पता ही नहीं होता.

नींद भी जरूरी

नींद भी दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है. कम या खराब नींद दिल की धड़कन को प्रभावित कर सकती है, तनाव बढ़ा सकती है और मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ सकती है। इसलिए सिर्फ बाहर से फिट दिखना काफी नहीं है. नियमित जांच, जैसे ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ईसीजी कराना जरूरी है. सही समय पर जोखिम की पहचान ही हार्ट को सुरक्षित रखने का सबसे बड़ा तरीका है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मोटापा कम करने वाला ये इंजेक्शन बाजार में मिल रहा नकली, जानें पहचानने का तरीका

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Fake Weight Loss Injection: देशभर में तेजी से पॉपुलर हो रहे वेट लॉस इंजेक्शन खासकर डायबिटीज और वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन अब एक बड़े खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं. दरअसल, गुरुग्राम में ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट की कार्रवाई में नकली इंजेक्शन बनाने और बेचने वाले रैकेट का खुलासा हुआ है. करीब 70 लाख रुपये के फर्जी इंजेक्शन बरामद किए है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी किराए के फ्लैट में ही नकली इंजेक्शन तैयार कर रहे थे. चीन से मंगाए गए सस्ते केमिकल सिरिंज और पैकेजिंग की मदद से इन्हें बिल्कुल असली जैसा बनाया जा रहा था.

हैरानी के बात यह है कि आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए भी असली और नकली दवा में फर्क करना मुश्किल हो रहा था. शुरुआती जानकारी के अनुसार, इन नकली इंजेक्शनों की सप्लाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी की जा रही थी. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि मोटापा कम करने वाले कौन से नकली इंजेक्शन बाजार में मिल रहे हैं और इन्हें पहचानने का तरीका क्या है.

क्या है मौनजारो इंजेक्शन और क्यों बढ़ रही मांग?

ड्रग कंट्रोलर के अनुसार, मौनजारो एक एंटी-डायबिटिक दवा है, जिसे डॉक्टर की सलाह पर वजन घटाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी ट्रेंड और तेजी से वजन कम करने की चाहत के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. इसी बढ़ती डिमांड का फायदा उठाकर नकली दवाओं का कारोबार फैल रहा है और कई लोग वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले नकली मौनजारो इंजेक्शन को बाजार में बेच रहे हैं.

नकली इंजेक्शन से क्या हो सकते हैं खतरे?

एक्सपर्ट के अनुसार, नकली वेट लॉस इंजेक्शन शरीर के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. इनमें या तो असली दवा का एक्टिव तत्व नहीं होता या फिर जहरीले केमिकल मिलाए जाते हैं. इसे लेने से इलाज का असर नहीं होता, जिससे बीमारी बनी रहती है. वहीं शरीर में टॉक्सिक रिएक्शन हो सकते हैं. गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती तक की नौबत आ सकती है और लंबे समय में शरीर के अंगों को नुकसान पहुंच सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि मरीज को सही दवा नहीं मिलती तो पूरा इलाज फेल हो सकता है. इसके अलावा गलत या अधूरी दवा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है, जिससे फ्यूचर में इलाज और मुश्किल हो सकता है.

भारत में क्यों बढ़ रहा है नकली दवाओं का खतरा?

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि भारत में नकली दवाओं की समस्या नई नहीं है, लेकिन अब इसका दायरा बहुत बढ़ गया है. नियम मौजूद होने के बावजूद हर जगह उनका सख्ती से पालन नहीं हो पाता, जिससे सप्लाई चैन में खामियां रह जाती है और नकली दवाएं आसानी से बाजार में पहुंच जाती है.

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कैसे करें नकली इंजेक्शन की पहचान?

  • डॉक्टर के अनुसार नकली इंजेक्शन की पहचान करने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए. जैसे हमेशा लाइसेंस वाली मेडिकल शॉप से ही दवा खरीदें.
  • बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के इंजेक्शन न लें.
  • पैकेजिंग को ध्यान से जांचे, स्पेलिंग मिस्टेक टूटी सील या अजीब लेबल से सावधान रहें.
  • अगर बॉक्स पर क्यूआर कोड हो तो उसे जरूर वेरीफाई करें.
  • सोशल मीडिया या ऑनलाइन अनजान प्लेटफाॅर्म से दवा खरीदने से बचना चाहिए.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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