खाना खाने से पहले पानी पीने के लिए क्यों कहते हैं डॉक्टर्स, इस आदत से शरीर को कितना फायदा?

खाना खाने से पहले पानी पीने के लिए क्यों कहते हैं डॉक्टर्स, इस आदत से शरीर को कितना फायदा?


Why Doctors Recommend Drinking Water Before Meals: अक्सर आपने सुना होगा कि खाना खाने से पहले पानी पीना चाहिए. डॉक्टर भी इस आदत को अपनाने की सलाह देते हैं. लेकिन क्या यह सच में फायदेमंद है या सिर्फ एक आम धारणा? इस सवाल का जवाब समझना जरूरी है, क्योंकि यह हमारी रोजमर्रा की हेल्थ से जुड़ा हुआ है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर डॉक्टर ऐसा क्यों कहते हैं.

क्यों खाने से पहले पानी पीना चाहिए?

Harvard Health की एक रिपोर्ट के अनुसार,  असल में, खाना खाने से पहले पानी पीने के पीछे सबसे बड़ा तर्क यह दिया जाता है कि इससे पेट पहले से थोड़ा भर जाता है, जिससे आप कम खाना खाते हैं. हमारे पेट में कुछ ऐसे नर्व्स होते हैं जो फैलाव को महसूस करके दिमाग को संकेत भेजते हैं कि अब खाना पर्याप्त है. माना जाता है कि अगर आप पहले पानी पी लेते हैं, तो यही सिग्नल जल्दी मिलने लगता है और ओवरईटिंग से बचाव होता है.

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क्या होता है इसका असर?

कुछ छोटे और सीमित समय वाली स्टडी में यह देखा भी गया है कि जो लोग खाने से पहले एक गिलास पानी पीते हैं, वे दूसरों के मुकाबले थोड़ा कम खाना खाते हैं. खासकर जो लोग वजन घटाने की कोशिश कर रहे होते हैं, उनमें यह आदत हल्का फायदा दे सकती है. हालांकि, लंबे समय में इसका असर कितना होता है, इस पर अभी भी पुख्ता सबूत नहीं हैं.

एक और कारण यह बताया जाता है कि कई बार हमें भूख नहीं बल्कि प्यास लगती है, लेकिन हम इसे समझ नहीं पाते और कुछ खा लेते हैं. ऐसे में अगर पहले पानी पी लिया जाए, तो अनावश्यक कैलोरी लेने से बचा जा सकता है. लेकिन इस थ्योरी को लेकर भी साइंटफिक प्रमाण बहुत मजबूत नहीं हैं.

वजन कम करने में मददगार

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि पानी पीने से शरीर कैलोरी बर्न करता है, क्योंकि शरीर को पानी को अपने तापमान तक गर्म करना पड़ता है. लेकिन हाल के रिसर्च बताते हैं कि इस प्रक्रिया से बहुत कम कैलोरी खर्च होती है, इसलिए इसे वजन घटाने का बड़ा कारण नहीं माना जा सकता. हालांकि, एक बात साफ है कि अगर आप मीठे पेय या हाई-कैलोरी ड्रिंक्स की जगह पानी पीते हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है और वजन कम करने में मदद कर सकता है.  तो क्या खाना खाने से पहले पानी पीना चाहिए? इसका जवाब पूरी तरह  हां या नहीं में नहीं है. कुछ लोगों के लिए यह आदत फायदेमंद हो सकती है, खासकर अगर इससे वे कम खाते हैं या ओवरईटिंग से बचते हैं. लेकिन इसे कोई जादुई उपाय भी नहीं माना जा सकता.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बाल झड़ने और रूखी त्वचा से परेशान? ये हैं ओमेगा-3 की कमी के सिग्नल, आज ही खाएं ये चीजें

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Symptoms Of Omega-3 Deficiency: दुनिया की लगभग तीन-चौथाई आबादी यानी करीब 76  प्रतिशत लोग ओमेगा-3 की पर्याप्त मात्रा नहीं ले रहे हैं. यह वही पोषक तत्व है जिसे हमारा शरीर खुद नहीं बना सकता. हैरानी की बात यह है कि अगर आप ज्यादातर लोगों से पूछें कि वे ओमेगा-3 कितना लेते हैं, तो या तो उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं होगी या फिर वे कभी-कभार लिए गए फिश ऑयल सप्लीमेंट का जिक्र करेंगे.

क्या निकला रिसर्च में

यह कोई मामूली कमी नहीं है. साल 2025 में यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन और हॉलैंड एंड बैरेट के रिसर्च के एक बड़े स्टडी में सामने आया कि दुनिया की 76 प्रतिशत आबादी EPA और DHA के रिकमंड स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है.  ये दोनों ओमेगा-3 के महत्वपूर्ण रूप हैं, जो दिल की सेहत, दिमाग के विकास, सूजन को कंट्रोल करने और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होते हैं. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

किम्स हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु की चीफ ऑफ डाइटेटिक्स Ms. Chitra BK ने TOI Health को बताया कि ओमेगा-3 फैटी एसिड्स ऐसे जरूरी पोषक तत्व हैं, जो आधुनिक डाइट में अक्सर कम पाए जाते हैं. आजकल लोग प्रोटीन, विटामिन D और आयरन की बात तो करते हैं, लेकिन ओमेगा-3 की कमी को नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि शरीर इन्हें खुद नहीं बना सकता, इसलिए इन्हें नियमित रूप से आहार में शामिल करना जरूरी है. 

लाइफस्टाइल में बदलाव आया

उन्होंने आगे बताया कि पिछले कुछ दशकों में खानपान के तरीके में बड़ा बदलाव आया है.  पहले लोग ज्यादा मछली, मेवे और बीज खाते थे, लेकिन अब प्रोसेस्ड फूड और रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल का इस्तेमाल बढ़ गया है. इससे शरीर में ओमेगा-6 की मात्रा ज्यादा हो गई है, जो सूजन को बढ़ावा देती है और कई क्रॉनिक बीमारियों का कारण बन सकती है. इसके अलावा, खासकर शहरी युवाओं 18-25 साल और शाकाहारी लोगों में मछली का सेवन काफी कम हुआ है, जिससे DHA और EPA की कमी और बढ़ गई है.

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इसकी कमी से क्या दिक्कत होती है

अगर शरीर में ओमेगा-3 की कमी हो जाए, तो इसके संकेत धीरे-धीरे नजर आते हैं. जैसे त्वचा का रूखा होना, बालों का कमजोर होना, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत, मूड में बदलाव, थकान महसूस होना और जोड़ों में दर्द. अक्सर लोग इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.

इसकी कमी को कैसे दूर करें

इस कमी को दूर करने के लिए रोजाना के खानपान में कुछ बदलाव करना जरूरी है. हफ्ते में कम से कम दो बार फैटी फिश जैसे सैल्मन, सार्डिन, मैकेरल या टूना शामिल करें. इसके अलावा अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट, ब्राजील नट्स, एवोकाडो, सोया प्रोडक्ट्स और कैनोला ऑयल भी अच्छे सोर्स हैं. जरूरत पड़ने पर ओमेगा-3 से भरपूर फोर्टिफाइड फूड या सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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चोट लगने पर भूल जाएंगे एंटीसेप्टिक लोशन, ये देसी नुस्खे फटाफट भर देते हैं घाव

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Benefits Of Raw Honey For Skin: शहद को हम अक्सर सिर्फ मिठास के लिए जानते हैं, लेकिन यह नेचुरल उपचार का एक बेहद असरदार तरीका भी है. आजकल छोटे-मोटे घावों के इलाज में शहद फिर से चर्चा में हैय जब बागवानी करते समय या घर के काम में हल्की खरोंच लगती है, तो हम आमतौर पर एंटीसेप्टिक लोशन की तरफ बढ़ते हैं, लेकिन अब कई लोग रसोई में रखे शहद को ही प्राथमिक उपचार के तौर पर इस्तेमाल करने लगे हैं.

पहले भी होते थे यूज

दरअसल, शहद का उपयोग घाव भरने के लिए कोई नया तरीका नहीं है. प्राचीन मिस्र और रोम में भी इसे त्वचा के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता था. आज भी इसे एक बेहतरीन प्राकृतिक हीलिंग एजेंट माना जाता है. इसकी खासियत इसके केमिकल कंपोजिशन में छिपी है. जैसे ही शहद को किसी ताजा घाव पर लगाया जाता है, यह एक सुरक्षा परत बना देता है, जो धूल और बैक्टीरिया से बचाती हैय इस बारे में हनी: एन एडवांस्ड एंटीमाइक्रोबियल एंड वूंड हीलिंग बायोमटेरियल फॉर टिशू इंजीनियरिंग एप्लिकेशंस नामक रिसर्च में विस्तार से बताया गया है.

 बैक्टीरिया को खत्म करने में मददगार

शहद की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह त्वचा की नमी के संपर्क में आते ही हाइड्रोजन पेरॉक्साइड बनाता है, जो बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करता है. इसका असर बाजार में मिलने वाले केमिकल एंटीसेप्टिक जैसा ही होता है, लेकिन बिना जलन या दर्द के. इसके साथ ही, शहद का हल्का एसिडिक स्वभाव घाव के pH स्तर को कम कर देता है, जिससे बैक्टीरिया के लिए जीवित रहना मुश्किल हो जाता है.

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 घाव को नम बनाए रखने में भी मददगार

इतना ही नहीं, शहद घाव को नम बनाए रखने में भी मदद करता है. सूखा घाव अक्सर खुजली और पपड़ी बनने का कारण बनता है, जिससे नई त्वचा को नुकसान हो सकता है. इसके विपरीत, शहद नमी बनाए रखकर सेल्स को तेजी से जुड़ने में मदद करता है और घाव जल्दी भरता है. हनी, वूंड रिपेयर एंड रीजेनेरेटिव मेडिसिन में बताया गया है कि शहद नई सेल्स के विकास के लिए ऊर्जा का काम करता है. इसके साथ ही, यह सूजन को भी कम करता है. जब घाव लाल, गर्म और दर्दनाक लगता है, तो यह शरीर की सूजन प्रतिक्रिया होती है.  शहद इस सूजन को शांत करता है और फ्री रेडिकल्स को कम करके हीलिंग को तेज करता है.

कैसे कर सकते हैं इसका यूज?

घर पर शहद का इस्तेमाल करना आसान है. सबसे पहले घाव को साफ पानी से धो लें, ताकि गंदगी हट जाए. फिर उस पर शहद की एक पतली परत लगाएं. अगर जरूरत हो तो उस पर गॉज या पट्टी लगा सकते हैं, ताकि शहद अपनी जगह बना रहे। बेहतर परिणाम के लिए कच्चा या मेडिकल ग्रेड शहद इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि इनमें एंजाइम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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6 साल में डायबिटीज से कैसे उबरे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह? खुद बयां किया जंग जीतने का किस्सा

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Diabetes Control Without Insulin: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी सेहत को लेकर एक प्रेरणादायक अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि कैसे एक समय डायबिटीज से जूझने के बाद उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव कर न सिर्फ बीमारी पर काबू पाया, बल्कि खुद को पहले से ज्यादा फिट बना लिया. चलिए आपको बताते हैं कि उन्होने डायबिटीज से लड़ने में क्या उपाय अपनाया.

अमित शाह ने क्या कहा?

वर्ल्ड लीवर डे के मौके 2025 पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि “मैं डायबिटिक था, लेकिन मई 2020 के बाद मैंने अपनी दिनचर्या में बड़े बदलाव किए.” उन्होंने बताया कि सही मात्रा में नींद लेना, पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार अपनाना और नियमित एक्सरसाइज करना उनकी सेहत के लिए गेमचेंजर साबित हुआ. उन्होंने आगे कहा कि “आज मैं आपके सामने बिना किसी एलोपैथिक दवा और इंसुलिन के खड़ा हूं.” 

 

टी-छोटी आदतों को लगातार अपनाना

उन्होंने यह भी बताया कि इन बदलावों की वजह से उनका वजन 20 किलो से ज्यादा कम हुआ. उनका मानना है कि कोई भी बड़ा बदलाव अचानक नहीं होता, बल्कि छोटी-छोटी आदतों को लगातार अपनाने से ही लंबे समय तक असर दिखता है.

युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि शरीर और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखना जरूरी है. अपने शरीर के लिए रोजाना दो घंटे एक्सरसाइज और दिमाग के लिए कम से कम छह घंटे की नींद जरूर लें। यह मेरे अपने अनुभव से निकली सलाह है.

डिसिप्लिन और संतुलन

अगर उनकी इस जर्नी से कुछ सीखना हो, तो सबसे जरूरी है डिसिप्लिन और संतुलन. अच्छी नींद, भरपूर पानी और घर का संतुलित खाना शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा शुगर से दूरी बनाकर रखना भी उतना ही जरूरी है. नियमित एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए. यह जरूरी नहीं कि हमेशा जिम ही जाएं, आप वॉक, योग, या कोई खेल भी चुन सकते हैं. सबसे अहम है निरंतरता. इसके अलावा, जल्दी परिणाम पाने के चक्कर में क्रैश डाइट या शॉर्टकट अपनाने से बचना चाहिए. असली बदलाव धीरे-धीरे आता है और वही टिकाऊ होता है.

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लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करना चाहिए?

उन्होंने यह भी बताया कि लिवर का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. इसके लिए शराब का सीमित सेवन, ज्यादा तैलीय खाने से बचाव और हरी सब्जियां, खट्टे फल और हल्दी जैसे खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है. अंत में उनका यही संदेश था कि शुरुआत छोटी करें, लेकिन लगातार करें. एक-एक बदलाव जोड़ते जाएं, और समय के साथ यही आदतें आपकी सेहत को पूरी तरह बदल सकती हैं.

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क्या किसी महिला को महीने में दो बार पीरियड्स आ सकते हैं, कितनी खतरनाक होती है यह सिचुएशन? 

क्या किसी महिला को महीने में दो बार पीरियड्स आ सकते हैं, कितनी खतरनाक होती है यह सिचुएशन? 


Irregular Menstruation: महीने में एक बार पीरियड्स होना आम बात है लेकिन 2 बार होना चिंता का विषय बन सकता है. हालांकि, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. अगर यह चीज महिला के साथ बार-बार हो रहा है कि उन्हें महीने में 2 बार पीरियड्स आ रहा है तो बिना समय गवाएं उन्हें तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए. साथ ही आज के समय में महिलाओं में पीरियड्स से जुड़ी कई समस्याएं देखने को मिलती हैं.

अपने पीरियड्स साइकल को समझें    

आमतौर पर पीरियड का चक्र 28 दिनों का होता है, लेकिन अगर यह 21 से 35 दिनों के बीच भी है तो इसे सामान्य माना जाता है. लेकिन वही अगर आपका पीरियड चक्र 21 दिनों से छोटा या 36 दिनों से बड़ा है, या हर महीने इसकी तारीखों में बहुत ज़्यादा अंतर आता है, तो इसे अनियमित माना जाता है. साथ ही तनाव या लाइफस्टाइल में बदलाव की वजह से कभी-कभी पीरियड की तारीख ऊपर-नीचे होना बिल्कुल नॉर्मल बात है. लेकिन अगर ऐसा बार-बार या लगातार हो रहा है, तो ये आपके शरीर के लिए खतरनाक साबित हो रहा है.

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महीने में दो बार पीरियड्स होने के पीछे का कारण

  • हार्मोनल असंतुलन: हार्मोन में उतार-चढ़ाव एक महीने में दो बार पीरियड्स आने का सबसे बड़ा कारण है. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन हमारे पीरियड्स के चक्र को चलाने में मदद करते हैं. वही जब इन हार्मोनों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और महीने में एक से ज़्यादा बार आ सकते हैं. यह समझना ज़रूरी है कि बहुत ज़्यादा तनाव, या जीवन जीने के तरीके में बदलाव की वजह से हार्मोन का यह संतुलन बिगड़ सकता है.
  • PCOS: PCOS (पीसीओएस) हार्मोन से जुड़ी एक आम समस्या है जिसकी वजह से पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और महीने में दो बार भी आ सकते हैं. इसमें महिलाओं की ओवरी में छोटी-छोटी गांठें बन जाते हैं, जो पीरियड्स के सही समय को बिगाड़ देते हैं.
  • गर्भाशय फाइब्रॉएड: Uterine Fibroids गर्भाशय में होने वाली छोटी गांठें होती हैं, ये गांठें कहाँ और कितनी बड़ी हैं, इस आधार पर पीरियड्स में बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग या अनियमितता होती है, और कभी-कभी महीने में दो बार भी पीरियड्स भी आ सकते हैं.
  • थायराइड विकार:  थायराइड की समस्या, जैसे हाइपरथायरायडिज्म या हाइपोथायरायडिज्म, आपके पीरियड्स के चक्र को बिगाड़ सकती है. ये बीमारियाँ थायराइड ग्रंथि (thyroid gland) से निकलने वाले हार्मोन को प्रभावित करती हैं, जिससे पीरियड्स के समय और ब्लीडिंग कम या ज़्यादा होने में बदलाव होने लगता है.

यह भी पढ़ेंः कमर दर्द के साथ दिखें ये बदलाव तो तुरंत कराएं जांच, हो सकती है किडनी फेल

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अच्छी डाइट के बावजूद शरीर में हो रही हीमोग्लोबिन की कमी, जानें कहां हो रही दिक्कत?

अच्छी डाइट के बावजूद शरीर में हो रही हीमोग्लोबिन की कमी, जानें कहां हो रही दिक्कत?


Hemoglobin Deficiency: काफी लोग अपनी सेहत को लेकर बहुत जागरूक होते हैं. वे हर काम समय के अनुसार करते हैं, अच्छी डाइट लेते हैं और नियमित रूप से एक्सरसाइज भी करते हैं। लेकिन इसके बावजूद उनके शरीर में खून की कमी की समस्या खत्म नहीं होती.हीमोग्लोबिन हमारे शरीर में ऑक्सीजन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम करता है,ऐसे में खून की कमी से उन्हें जल्दी थकान होने लगती है, चक्कर आने लगते हैं और कई बार आंखों के सामने अंधेरा भी छाने लगता है.

 क्यों होती है यह समस्या?

यह स्थिति काफी हैरान करने वाली होती है कि इतना अच्छा खानपान और हेल्थ कॉन्शियस होने के बावजूद भी शरीर में खून की कमी क्यों हो रही है.ऐसे में आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि आखिर ऐसा क्यों होता है और क्या यह किसी नई बीमारी का संकेत तो नहीं है

 सही अवशोषण का महत्व

सबसे पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि सिर्फ हेल्दी खाना खाना ही काफी नहीं होता, बल्कि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जो हम खा रहे हैं, उसका हमारे शरीर में सही तरीके से अवशोषण (Absorption) हो रहा है या नहीं.कई बार लोग आयरन से भरपूर चीजें जैसे हरी सब्जियां, दाल और फल तो खाते हैं, लेकिन शरीर उन्हें ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता। यहीं से असली समस्या शुरू होती है और शरीर में खून की कमी होने लगती है.

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 विटामिन C की भूमिका

इसका एक कारण विटामिन C की कमी भी हो सकती है, क्योंकि यह आयरन को शरीर में अवशोषित करने में मदद करता है. इसलिए अगर आप आयरन ले रहे हैं, लेकिन साथ में विटामिन C युक्त चीजें जैसे नींबू, संतरा नहीं ले रहे हैं, तो शरीर आयरन का उपयोग नहीं कर पाता. 

 पाचन तंत्र का प्रभाव

अगर आपका डाइजेशन सही नहीं है, तो शरीर पोषक तत्वों को सही से नहीं ले पाता.जिसमें गैस, एसिडिटी  से जुड़ी समस्याएं हो सकती है जो हीमोग्लोबिन कम होने का कारण बन सकती हैं.

महिलाओं में अधिक समस्या

महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, खासकर उनको जिनको पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होती है इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान भी शरीर को ज्यादा आयरन की जरूरत होती है, और अगर इस दौरान सही ध्यान न रखा जाए तो हीमोग्लोबिन कम हो सकता है.

विटामिन B12 और फोलिक एसिड की कमी

इसके अलावा विटामिन  B12 और फोलिक एसिड की कमी भी हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ने देती क्योंकि  ये दोनों Red Blood Cells के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं वही अगर शरीर में इनकी ही कमी होने लगे तो शरीर में खून बनने कि प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ता है.

यह भी पढ़ेंः क्या आप भी रहते हैं हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को लेकर कन्फ्यूज, जानें दोनों में क्या अंतर?

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