बॉडी फैट तो घट रहा लेकिन वजन नहीं कम हो रहा, जानें कहां है दिक्कत

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पूरे सप्ताह नहीं बस शनिवार और रविवार पीते हैं, क्या इतनी शराब पीने से भी डैमेज हो सकता है लिवर?

पूरे सप्ताह नहीं बस शनिवार और रविवार पीते हैं, क्या इतनी शराब पीने से भी डैमेज हो सकता है लिवर?


Does Weekend Drinking Harm The Liver: कई लोगों को लगता है कि अगर वे पूरे हफ्ते शराब से दूरी बनाए रखते हैं और सिर्फ वीकेंड पर पीते हैं, तो यह आदत सुरक्षित है. जैसे कि लोग सोचते हैं मंगलवार और शनिवार नॉनवेज नहीं खाऊंगा, भगवान माफ कर देंगे. लेकिन भगवान माफ करें न करें.  लेकिन सोमवार से शुक्रवार तक हेल्दी खाना, शराब से परहेज और फिर शनिवार की रात “थोड़ी मस्ती”, इससे आपको नुकसान हो सकता है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं. 

शराब के मामले में लिवर कैलेंडर नहीं देखता

लिवर का काम शरीर में पहुंची शराब को तोड़ना और बाहर निकालना होता है. हर पैग, हर ग्लास उसी से होकर गुजरता है. लिवर मजबूत जरूर होता है, लेकिन वह कोई मशीन नहीं है जो हर बार बिना असर के सब संभाल ले. जब कम समय में ज्यादा मात्रा में शराब पी जाती है जिसे बिंज ड्रिंकिंग कहा जाता है, तो लिवर पर एक साथ बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है.  एक्सपर्ट के मुताबिक, लिवर को नुकसान इस बात से ज्यादा होता है कि आप कितनी और कितनी तेजी से शराब पीते हैं, न कि इस बात से कि हफ्ते में कितने दिन आप शराब नहीं पीते.

क्यों बना कल्चर?

आज की वर्क कल्चर में वीकेंड ड्रिंकिंग को बैलेंस की तरह देखा जाता है. रोज पीने के बजाय शराब को शनिवार-रविवार तक सीमित कर देना जिम्मेदारी जैसा लगता है. ब्रंच, बर्थडे, शादी या फ्राइडे नाइट पार्टी, सब कुछ शराब के इर्द-गिर्द घूमने लगता है. धीरे-धीरे शुक्रवार की रात शनिवार में बदलती है और कभी-कभी रविवार तक खिंच जाती है. यही वह पैटर्न है जो लिवर के लिए खतरनाक बन सकता हैय

क्या इससे नुकसान नहीं पहुंचता?

यह एक आम गलतफहमी है कि कुछ दिन शराब न पीने से लिवर पूरी तरह ठीक हो जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर हर वीकेंड लिवर को नुकसान पहुंच रही है, तो बीच के शराब-मुक्त दिन उस नुकसान को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते. बार-बार होने वाली यह चोट धीरे-धीरे बड़ी होती जाती है और आगे चलकर फैटी लिवर, फाइब्रोसिस और यहां तक कि सिरोसिस का खतरा बढ़ा सकती है.

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

जो लोग मोटापे से जूझ रहे हैं, डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस है, पहले से लिवर की बीमारी है, या परिवार में लिवर रोग का इतिहास रहा है. उनमें वीकेंड बिंज ड्रिंकिंग का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।.हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि बाकी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैंय

ऐसे होता है साइलेंट डैमेज

शुरुआती दौर में लिवर डैमेज के लक्षण सामने नहीं आते. जांच रिपोर्ट और अल्ट्रासाउंड सामान्य दिख सकते हैं, जिससे लोगों को लगता है कि सब ठीक है. लेकिन असल नुकसान चुपचाप बढ़ता रहता है और जब बीमारी पकड़ में आती है, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी होती है.

ये भी पढ़ें: गर्दन चटकाने की आदत कहीं स्ट्रोक का खतरा तो नहीं, फिजिशियन ने बताया- कब बढ़ जाती है यह परेशानी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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दिमाग को ही नहीं इम्यून सिस्टम को भी बर्बाद कर देती है स्ट्रेस, जानें इससे बचने के तरीके

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8 घंटे से ज्यादा सोते हैं फिर भी सुबह उठते ही सिर दर्द होता है, जानें क्या है समस्या?

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सुबह का समय दिन की सबसे अच्छी शुरुआत माना जाता है. अच्छी नींद के बाद ताजगी महसूस होनी चाहिए, लेकिन कई लोगों की सुबह सिर दर्द के साथ शुरू होती है. हैरानी की बात यह है कि कुछ लोग पूरी 8–9 घंटे की नींद लेने के बावजूद जैसे ही बिस्तर से उठते हैं, सिर भारी लगने लगता है या तेज दर्द शुरू हो जाता है.

अक्सर लोग इसे थकान, मौसम या आज कुछ ठीक नहीं है, कहकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो यह आपके शरीर की तरफ से एक संकेत हो सकता है. सुबह होने वाला सिर दर्द कोई छोटी बात नहीं है, इसके पीछे नींद से जुड़ी आदतें, पानी की कमी, तनाव, या कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं. अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में कारण पहचाने जा सकते हैं और सही कदम उठाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है. 

8 घंटे से ज्यादा सोते हैं फिर भी सुबह उठते ही सिर दर्द क्यों होता है?

1. जरूरत से ज्यादा सोना – बहुत से लोगों को लगता है कि जितना ज्यादा सोएंगे, उतना बेहतर होगा. लेकिन सच्चाई यह है कि जरूरत से ज्यादा नींद भी सिर दर्द का कारण बन सकती है. ज्यादा देर तक सोने से दिमाग के केमिकल (न्यूरोट्रांसमीटर) असंतुलित हो जाते हैं. खासतौर पर वीकेंड पर देर तक सोने से वीकेंड हेडेक हो सकता है. इसके कारण उठते ही सिर भारी लगना, सुस्ती और चिड़चिड़ापन जैसे समस्या हो सकती है. 

2. शरीर में पानी की कमी – रात भर सोते समय हम पानी नहीं पीते, अगर दिन में भी पर्याप्त पानी न पिया जाए, तो सुबह शरीर और दिमाग़ दोनों में पानी की कमी हो जाती है. जब शरीर डिहाइड्रेट होता है, तो दिमाग हल्का-सा सिकुड़ता है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है और सिर दर्द होता है.  ज्यादा खतरा तब होता है जब रात में शराब पी हो, कमरा बहुत गर्म हो, दिन भर पानी कम पिया गया हो. 

3. स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) – स्लीप एपनिया एक ऐसी समस्या है जिसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती है. इससे दिमाग को पूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है. ऐसे लोगों को अक्सर तेज खर्राटे आते हैं, सुबह उठते ही सिर दर्द होता है, दिन में बहुत नींद आती है. यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. 

4. रात में दांत पीसना (Bruxism) – कई लोग सोते समय अनजाने में दांत पीसते या जबड़ा कस लेते हैं. इससे जबड़े और कनपटी की मांसपेशियों में तनाव आ जाता है, जो सुबह सिर दर्द का कारण बनता है. इसके लक्षण सुबह जबड़े में दर्द, कनपटियों में हल्का या मध्यम दर्द और दांतों का घिस जाना है. 

5.गलत तकिया या सोने की गलत पोजिशन – अगर आपका तकिया बहुत ऊंचा, बहुत सख्त या बहुत नरम है, तो गर्दन गलत स्थिति में चली जाती है. इससे गर्दन और सिर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है. गलत पोजिशन में सोना भी सुबह सिर दर्द और गर्दन अकड़ने का कारण बन सकता है. 

6. तनाव, चिंता और अवसाद – मानसिक स्वास्थ्य का सीधा असर नींद और सिर दर्द पर पड़ता है. जिन लोगों को चिंता या अवसाद की समस्या होती है, उनमें सुबह सिर दर्द की शिकायत ज्यादा पाई जाती है. तनाव के कारण नींद गहरी नहीं होती, जिससे शरीर पूरी तरह आराम नहीं कर पाता है. 

सुबह के सिर दर्द से बचने के आसान उपाय

1. नियमित नींद का समय रखें –  वीकेंड पर भी रोज एक ही समय पर सोएं और उठें. 

2. पर्याप्त पानी पिएं – दिन भर पानी पीते रहें, सोने से पहले एक गिलास पानी, सुबह उठते ही पानी पिएं . 

3. सही तकिया चुनें – ऐसा तकिया लें जो आपकी गर्दन को सीधी स्थिति में रखे, न ज्यादा सख्त, न ज्यादा नरम. 

4. शराब और देर रात स्क्रीन से बचें – मोबाइल, लैपटॉप और टीवी सोने से पहले दिमाग को एक्टिव कर देते हैं. 

5. हल्का व्यायाम करें – नियमित व्यायाम माइग्रेन और तनाव दोनों को कम करता है. 

यह भी पढ़ें Vitamin B12: क्या खाली पेट विटामिन B12 लेना सही है? एक्सपर्ट से जानें सप्लीमेंट लेने का सबसे सही समय

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या डीजे वाली लेजर लाइट छीन सकती है आपकी आंखों की रोशनी, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

क्या डीजे वाली लेजर लाइट छीन सकती है आपकी आंखों की रोशनी, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?


Can DJ Laser Lights Cause Permanent Vision Loss: डीजे पार्टी, क्लब या किसी इवेंट में चलने वाली लेजर लाइट देखने में भले ही आकर्षक लगे, लेकिन यह आंखों के लिए खतरनाक भी हो सकती है. हाल ही में सामने आए एक मामले ने इस खतरे को गंभीरता से समझने की जरूरत दिखा दी है. चलिए आपको बताते हैं कि यह आपके लिए कितना खतरनाक है. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

आंखों के डॉक्टर डॉ. आशीष मारकन ने एक किशोर लड़के का मामला साझा किया, जिसकी दाहिनी आंख की रोशनी अचानक कम हो गई थी. जांच में पता चला कि उसकी नजर 6/18 तक गिर चुकी थी. जब आंखों की अंदरूनी जांच की गई, तो आंख के बीच वाले हिस्से (मैक्युला) में चोट के निशान मिले. बातचीत के दौरान लड़के ने बताया कि वह कई बार डीजे द्वारा इस्तेमाल की जा रही लेजर लाइट को सीधे देख चुका था. पार्टी के दौरान लेजर बीम उसकी आंखों में बार-बार पड़ी थी.

 

लेजर का आंखों पर नुकसान

डॉक्टरों के अनुसार, इस स्थिति को लेजर से होने वाला आंखों का नुकसान कहा जाता है. लेजर की तेज रोशनी आंख के उस हिस्से को नुकसान पहुंचाती है, जो साफ और सीधी नजर के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है. अगर लेजर की रोशनी कुछ सेकंड के लिए भी सीधे आंखों पर पड़ जाए, या बार-बार ऐसा हो, तो नजर धुंधली हो सकती है, चीजें टेढ़ी दिख सकती हैं और पढ़ने में परेशानी हो सकती है. कुछ मामलों में यह नुकसान हमेशा के लिए भी रह सकता है.

कब बढ़ता है खतरा?

डॉ. बताते हैं कि क्लब या पार्टी में लेजर से आंखों को नुकसान होना आम बात नहीं है, लेकिन अगर लेजर बहुत तेज हो या सही तरीके से इस्तेमाल न की जा रही हो, तो खतरा बढ़ जाता है. खासतौर पर तेज हरी लेजर अगर कुछ सेकंड तक सीधे आंखों पर पड़े, तो वह रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती है. डॉक्टर कहते हैं कि बार-बार लेजर की रोशनी आंखों में पड़ना ज्यादा खतरनाक होता है. आंख लेजर की रोशनी को एक छोटे बिंदु पर केंद्रित कर लेती है, जिससे उसका असर और तेज हो जाता है. अंधेरे माहौल जैसे क्लब में यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि वहां आंखों की पुतलियां ज्यादा खुली रहती हैं.

कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

अगर लेजर देखने के बाद आंखों में जलन हो, नजर धुंधली लगे, काले धब्बे दिखें, रोशनी चुभे या सिरदर्द हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण तुरंत या कुछ घंटों बाद भी आ सकते हैं. डॉक्टरों की सलाह है कि ऐसी स्थिति में उसी दिन आंखों के डॉक्टर को दिखाना चाहिए. इलाज समय पर हो जाए, तो नजर को बचाया जा सकता है, लेकिन हर बार पूरी तरह ठीक होना संभव नहीं होता. इसलिए सबसे जरूरी है सावधानी कि लेजर लाइट को सीधे न देखें, बीम आंखों की ओर आए तो नजर हटा लें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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शरीर और सेहत को लेकर भ्रम में तो नहीं रहते आप, जानें किन गलत बातों को इंसान मान बैठा है सही?

शरीर और सेहत को लेकर भ्रम में तो नहीं रहते आप, जानें किन गलत बातों को इंसान मान बैठा है सही?


Do You Really Need To Detox Your Body: आज हर कोई सेहत को लेकर जागरूक है, लेकिन परेशानी यह है कि जानकारी जितनी ज्यादा मिल रही है, भ्रम भी उतना ही बढ़ता जा रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल सलाह, पुराने घरेलू नुस्खे और “एक उपाय, हर बीमारी का इलाज” जैसे दावे लोगों को आसानी से प्रभावित कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि कई बार बिना जांचे-परखे लोग ऐसी बातों पर भरोसा कर लेते हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता.

मेडिसिन एक्सपर डॉ. अनन्या मेहता बताती हैं कि ज्यादातर हेल्थ मिथ्स इसलिए टिके रहते हैं क्योंकि उनमें सच्चाई का थोड़ा-सा अंश होता है, जिसे समय के साथ बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर दिया जाता है.

गलतफहमी 1: शरीर को बाहर से डिटॉक्स करना जरूरी

डिटॉक्स टी, जूस और पाउडर यह भरोसा दिलाते हैं कि वे शरीर को अंदर से साफ कर देंगे. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक शरीर को अलग से डिटॉक्स की जरूरत ही नहीं होती. डॉ. मेहता कहती हैं कि लिवर और किडनी दिन-रात शरीर से गंदगी बाहर निकालने का काम करते हैं. डिटॉक्स के नाम पर लंबे समय तक सिर्फ लिक्विड लेने से शरीर कमजोर हो सकता है और जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है.

गलतफहमी 2: ज्यादा विटामिन लेने से सेहत और बेहतर हो जाती है

विटामिन जरूरी हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा लेना फायदे की बजाय नुकसान कर सकता है. डॉक्टरों के अनुसार कुछ विटामिन शरीर में जमा हो जाते हैं और अधिक मात्रा में लेने पर टॉक्सिक असर डाल सकते हैं. आम लोगों के लिए संतुलित भोजन ही काफी होता है, जब तक किसी खास कमी की पुष्टि न हो.

गलतफहमी 3: जो नेचुरल है, वह नुकसान नहीं करता

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि हर्बल या देसी चीजें पूरी तरह सुरक्षित होती हैं. लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. डॉ. मेहता बताती हैं कि कई प्राकृतिक तत्व दवाओं की तरह ही शरीर पर असर डालते हैं और दूसरी दवाओं के साथ रिएक्शन भी कर सकते हैं. इसलिए बिना सलाह के सप्लीमेंट या काढ़े लेना सही नहीं है.

गलतफहमी 4: डॉक्टर के पास तभी जाएं, जब बीमारी हो

कई लोग तब तक डॉक्टर से दूरी बनाए रखते हैं, जब तक परेशानी बढ़ न जाए. एक्सपर्ट का कहना है कि रेगुलर हेल्थ चेकअप से बीमारी को शुरुआती स्टेज में पकड़ा जा सकता है. देर करने पर इलाज मुश्किल और महंगा दोनों हो सकता है.

गलतफहमी 5: उम्र बढ़ने पर दर्द होना तय

उम्र के साथ शरीर में बदलाव आते हैं, लेकिन लगातार दर्द को “नॉर्मल” मान लेना सही नहीं है. डॉ. मेहता के मुताबिक लंबे समय तक रहने वाला दर्द किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है.

सेहत से जुड़े भ्रम क्यों बनते हैं खतरा?

गलत धारणाएं सिर्फ जानकारी को नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि सही इलाज में देरी, गलत फैसलों और बेवजह की चिंता का कारण भी बनती हैं. एक्सपर्ट मानते हैं कि अधूरी या गलत जानकारी कई बार बीमारी से भी ज्यादा नुकसानदेह हो सकती है.

सही और गलत में फर्क कैसे करें?

डॉक्टरों की सलाह है कि भरोसा केवल प्रमाणित और वैज्ञानिक स्रोतों पर करें. चमत्कारी इलाज या तुरंत असर के दावों से बचें. किसी भी बड़े फैसले से पहले डॉक्टर से सलाह लें. इसके अलावा ऐसी जानकारी पर सवाल उठाएं जो इलाज से दूर रहने को कहे. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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