अब मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज होंगी कोविड वैक्सीन से होने वाली दिक्कतें? इस देश ने बना लिया प्लान

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क्या होता है पैनिक अटैक, जानें इससे निपटने के लिए क्या हैं सबसे आसान तरीके?

क्या होता है पैनिक अटैक, जानें इससे निपटने के लिए क्या हैं सबसे आसान तरीके?


पैनिक अटैक अचानक आने वाला डर या चिंता का दौरा होता है. पैनिक अटैक में व्यक्ति को ऐसा लगता है कि कुछ भयानक होने वाला है. इसमें दिल की धड़कन तेज हो जाती है, सांस रुकने जैसी समस्या होती है, पसीना आता है, हाथ-पैर में सुन्न या झनझनाहट महसूस होती है.

पैनिक अटैक में व्यक्ति को दिल की तेज धड़कन या घबराहट, सांस लेने में मुश्किल या घुटन, पसीना आना या कंपकंपी, सीने में दर्द या बेचैनी, चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना, हाथ-पैर में सुन्नपन या झनझनाहट, खुद से अलग महसूस करना और मरने या कंट्रोल खोने का डर जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं.

पैनिक अटैक में व्यक्ति को दिल की तेज धड़कन या घबराहट, सांस लेने में मुश्किल या घुटन, पसीना आना या कंपकंपी, सीने में दर्द या बेचैनी, चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना, हाथ-पैर में सुन्नपन या झनझनाहट, खुद से अलग महसूस करना और मरने या कंट्रोल खोने का डर जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं.

Published at : 28 Mar 2026 04:10 PM (IST)

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75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट, जानें इससे डरने की जरूरत कितनी?

75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट, जानें इससे डरने की जरूरत कितनी?


New Covid Variant : ऐसा लगने लगा था कि कोरोना महामारी अब हर जगह से धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. लोग बिना डर के बाहर निकल रहे थे. लोगों का मास्क लगाना बिल्कुल बंद हो गया था और अस्पतालों में भी पहले जैसी भीड़ नहीं थी, लेकिन अब एक नए कोविड वैरिएंट की खबर फिर से लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए वैरिएंट में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं. यह वही हिस्सा होता है जिससे वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं में जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैरिएंट हमारी इम्युनिटी को कुछ हद तक धोखा भी दे सकता है और इसके स्पाइक प्रोटीन वायरस को हमारे शरीर में घुसने में मदद करता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट क्या है और इससे डरने की जरूरत कितनी है. 

75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट क्या है?

यह नया कोरोना वैरिएंट पहली बार नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था. इसमें बहुत ज्यादा म्यूटेशन हैं. यह पहले के वैरिएंट (जैसे ओमिक्रॉन) से अलग है. यह शरीर की इम्युनिटी से कुछ हद तक बच सकता है. इसका मतलब यह है कि अगर आपने वैक्सीन लगवाई हो या पहले कोरोना हो चुका हो, फिर भी आपको दोबारा संक्रमण हो सकता है. अब वायरल थोड़ा बदल गया है इसलिए शरीर उसे तुरंत पहचान नहीं पाता है और इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. 

इस नए वैरिएंट से डरने की जरूरत कितनी है?

पिछले कुछ सालों में बहुत से लोगों में हाइब्रिड इम्युनिटी बन चुकी है. विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन और पहले हुए संक्रमण दोनों का असर मिलकर शरीर को कुछ हद तक सुरक्षा देते हैं. इसके अलावा अब इलाज के तरीके पहले से बेहतर हैं, हॉस्पिटल ज्यादा तैयार हैं और टेस्टिंग दवाएं भी आसानी से उपलब्ध हैं. इसलिए अगर मामलों में बढ़ोतरी होती है तो उसका असर पहले जितना खतरनाक होने की संभावना कम है. वहीं ज्यादातर लोगों में इसके लक्षण हल्के या मीडियम ही देखे जा सकते हैं. बुखार, खांसी, थकान, शरीर में दर्द और हल्की कमजोरी जैसे लक्षण सामने आते हैं. ज्यादातर लोग बिना हॉस्पिटल जाए, घर पर आराम और सामान्य इलाज से ठीक हो सकते हैं. 

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किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

हर किसी के लिए जोखिम एक जैसा नहीं होता है. कुछ लोगों को अभी भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. इसमें बुजुर्ग, पहले से किसी बीमारी (जैसे डायबिटीज या दिल की बीमारी) से पीड़ित लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग शामिल हैं. इन लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना अब एंडेमिक हो चुका है, यानी यह पूरी तरह खत्म नहीं होगा बल्कि फ्लू की तरह समय-समय पर आता रहेगा. कभी इसके मामले बढ़ेंगे, तो कभी कम हो जाएंगे. 

क्या सावधानियां रखें?

वैक्सीन और अन्य सावधानियां आज भी कोविड से बचाव के सबसे जरूरी हैं. बूस्टर डोज लेना शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखता है और गंभीर बीमारी होने के जोखिम को कम करता है. इसके अलावा, अगर किसी में लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत टेस्ट करवाना संक्रमण को जल्दी पहचानने और फैलने से रोकने में मदद करता है. भीड़ भाड़ वाली जगहों में सावधानी रखें. मास्क पहन कर जाएं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सुबह उठते ही ये गलतियां करते हैं 99% लोग, डॉक्टर ने बताया- किन बातों का रखें ध्यान

सुबह उठते ही ये गलतियां करते हैं 99% लोग, डॉक्टर ने बताया- किन बातों का रखें ध्यान


Morning Routine Mistakes: आजकल परफेक्ट मॉर्निंग रूटीन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. सुबह जल्दी उठना, वर्कआउट करना, तुरंत ईमेल चेक करना और कॉफी पीना देखने में यह सब हेल्दी और प्रोडक्टिव लगता है. हालांकि, डॉक्टरों के अनुसार यही आदत कई बार शरीर पर उल्टा असर डालती है. डॉक्टर बताते हैं की असली समस्या इन आदतों में नहीं बल्कि इन्हें करने के तरीके और तेजी में हैं.

इंसान का शरीर नींद की अवस्था से एकदम एनर्जेटिक अवस्था में नहीं जाता है. उसे एक ब्रिज की जरूरत होती है, जब वह ब्रिज नहीं मिलता तो अच्छी आदतें भी ताकत के बजाय तनाव बढ़ा सकती है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च में भी इस बात का खुलासा हुआ है कि अचानक तनाव एक्टिव होने से दिन की शुरुआत में ही कॉर्टिसोल का लेवल बढ़ सकता है. जिससे इंसान का मूड और फोकस इफेक्ट होते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सुबह उठते ही 99 प्रतिशत लोग कौन सी गलतियां करते हैं और डॉक्टरों ने किन बातों का ध्यान रखने के लिए कहा है. 

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जल्दबाजी में दिन की शुरुआत बनती है समस्या 

कई लोग सुबह उठते ही अलार्म बंद करके सीधे फोन देखने लगते हैं या तुरंत काम में लग जाते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा करने से दिमाग को अचानक हाई अलर्ट मोड में जाना पड़ता है. इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकता है, जिससे चिड़चिड़ापन, सिर दर्द या मानसिक थकान महसूस हो सकती है. 

प्रोडक्टिव दिखने की चाह बढ़ा रही स्ट्रेस 

इसके अलावा डॉक्टर बताते हैं कि आजकल मॉर्निंग रूटीन को लेकर एक दबाव बन गया है कि जितना ज्यादा काम उतनी अच्छी शुरुआत. लेकिन शरीर इस तरह काम नहीं करता है, बिना तैयारी के तुरंत वर्कआउट या लगातार नोटिफिकेशन देखना शरीर में स्ट्रेस को बढ़ा सकता है. ऐसे में सुबह की शुरुआत शांत और संतुलित होना बहुत जरूरी होती है. 

रात की नींद का असर सुबह पर पड़ता है 

अगर रात की नींद पूरी नहीं होती या देर तक फोन इस्तेमाल किया जाता है तो सुबह की शुरुआत खराब हो जाती है. खराब नींद का असर याददाश्त, मूड और डिसीजन लेने की क्षमता पर पड़ता है. इसलिए अच्छी सुबह के लिए अच्छी नींद जरूरी है. वहीं कई लोग उठते ही सबसे पहले कॉफी पीते हैं, लेकिन डॉक्टर बताते हैं 6 से 8 घंटे की नींद के बाद शरीर हल्का डिहाइड्रेट हो जाता है. ऐसे में पहले पानी पीना ज्यादा जरूरी होता है. पानी पीने से दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है और थकान भी कम होती है. 

शरीर को चाहिए धीरे-धीरे शुरुआत 

डॉक्टर बताते हैं कि सुबह उठने के बाद पहला एक घंटा शरीर के लिए बहुत अहम होता है. इस समय शरीर का सर्केडियन रिदम सेट हो जाता है जो पूरे दिन की एनर्जी और मूड को प्रभावित करता है. अगर इस समय जल्दबाजी की जाए तो दिन भर थकान और फोकस की कमी महसूस हो सकती है. 

कैसी होनी चाहिए सही मॉर्निंग रूटीन?

डॉक्टर के अनुसार एक हेल्दी सुबह के लिए लोगों को कुछ आसान आदतें अपनानी चाहिए. जैसे धीरे-धीरे उठे और कुछ मिनट शांत बैठें. सबसे पहले पानी पिएं, हल्की धूप लें, स्ट्रेचिंग से शुरुआत करें फिर वर्कआउट करें. वहीं सुबह उठते ही फोन इस्तेमाल करने से बचे और दिन की शुरुआत आसान और शांत काम से करें.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कितनी कारगर हैं पेनकिलर वाली आइसक्रीम, जानें ये सेहत के लिए कितनी खतरनाक?

कितनी कारगर हैं पेनकिलर वाली आइसक्रीम, जानें ये सेहत के लिए कितनी खतरनाक?


Painkiller Infused Ice Cream: आजकल सोशल मीडिया पर एक अजीब लेकिन काफी अट्रैक्टिव ट्रेंड देखने को मिलते हैं. यह नया ट्रेंड पेनकिलर मिली आइसक्रीम है. सुनने में यह नया आइडिया बहुत अलग और मजेदार लग रहा है, जिसमें एक तरफ ठंडी-ठंडी आइसक्रीम का टेस्ट और दूसरी तरफ सिरदर्द में राहत मिलती है. इसमें मजा और इलाज के एक साथ है, लेकिन कई लोगों के मन में यह कंफ्यूजन है कि यह सच में इतनी अच्छी है जितनी लगती है.

यह ट्रेंड नीदरलैंड से शुरू हुआ और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया. कई लोग इसे एक आसान और आरामदायक इलाज मान रहे हैं. वहीं डॉक्टरों का कहना है कि यह जितना आसान दिखता है,उतना सुरक्षित नहीं है, ऐसे में आइए जानते हैं कि पेनकिलर वाली आइसक्रीम कितनी कारगर हैं और ये सेहत के लिए कितनी खतरनाक है. 

पेनकिलर वाली आइसक्रीम कितनी कारगर हैं

पेनकिलर वाली आइसक्रीम ज्यादा कारगर नहीं मानी जा रही है. सुनने में यह आइडिया अच्छा लगता है, लेकिन मेडिकल के अनुसार इसमें कई बड़ी समस्याएं है. आइसक्रीम को लोग अक्सर खुशी, आराम और सुकून से जोड़ते हैं. कहा जाता है कि तनाव हो या थकान एक स्कूप आइसक्रीम मूड बेहतर कर देती है. ऐसे में अगर इसमें दवा मिला दी जाए, तो यह दो फायदे एक साथ जैसा लगता है. हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि यहीं से समस्या शुरू होती है. दवाएं खाने के लिए नहीं बल्कि इलाज के लिए बनाई जाती हैं. उन्हें एक निश्चित तरीके और मात्रा में लेना जरूरी होता है. जब इन्हें खाने की चीजों में मिलाया जाता है तो उनका असर और सुरक्षा दोनों सवालों में आ जाता हैं. 

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पेनकिलर वाली आइसक्रीम सेहत के लिए कितनी खतरनाक है

1. पेनकिलर वाली आइसक्रीम सेहत के लिए कई कारणों से खतरनाक है. जब आप कोई गोली लेते हैं तो उसकी मात्रा पहले से तय होती है. डॉक्टर आपकी उम्र, वजन और बीमारी के हिसाब से सही डोज देते हैं. लेकिन अगर वही दवा आइसक्रीम में मिल जाए तो आपको पता ही नहीं चलेगा कि आपने कितनी दवा ली. ज्यादा खाने पर ओवरडोज का खतरा हो सकता है.

2. बार-बार पेनकिलर लेने से सिरदर्द और बढ़ सकता है. इसे मेडिकेशन ओवरयूज हेडेक कहा जाता है. अगर आइसक्रीम के जरिए लोग बार-बार दवा ली जाए, तो सिरदर्द ठीक होने की जगह और बढ़ सकता है. 

3. दवाएं इस तरह बनाई जाती हैं कि शरीर पर वह सही तरीके से असर कर सके, लेकिन जब इन्हें आइसक्रीम जैसे खाने में मिलाया जाता है, तो दवा ठीक से शरीर में नहीं घुल पाती है. दवा का असर कम या अनियमित हो सकता है. साथ ही दवा की क्वालिटी भी प्रभावित हो सकती है. 

4. कुछ लोगों के लिए आइसक्रीम ही सिरदर्द का कारण बन सकती है, खासकर माइग्रेन के मरीज के लिए या जिन्हें ठंडी चीजों से दिक्कत होती है और ज्यादा शुगर या फैट लेने वालों में सिरदर्द का कारण बन सकता है. ऐसे में पेनकिलर वाली आइसक्रीम उल्टा असर कर सकती है. इससे राहत की जगह दर्द बढ़ सकता है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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हेल्दी डाइट लेते हैं, फिर भी क्यों रहती है डेफिशिएंसी? डॉक्टर ने बता दी हकीकत

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Nutrient Deficiency Causes: आज के समय में लोग हेल्दी खाने पर काफी ध्यान देने लगे हैं. घर का बना खाना, फल, सब्जियां और संतुलित डाइट लेने के बावजूद कई लोग कमजोरी, थकान या बार-बार बीमार होने की शिकायत करते हैं. जांच करने पर आयरन, विटामिन बी12 या विटामिन डी की कमी सामने आती है. डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ खाने में नहीं बल्कि शरीर की ओर से पोषक तत्वों को सही तरीके से न सोख पाने में भी हो सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या आपको भी हेल्दी डाइट लेने के बाद भी डेफिशिएंसी रहती है और डॉक्टर ने इसके पीछे की हकीकत क्या बताई.

पाचन की गड़बड़ी बन सकती है बड़ी वजह 

डॉक्टरों के अनुसार, खाना खाने के बाद उसका सही तरीके से पाचन बहुत जरूरी है. अगर पेट में एसिड कम बनता है या डाइजेस्टिव एंजाइम्स कमजोर होते हैं तो खाना सही तरीके से टूट नहीं पाता है. ऐसी कंडीशन में शरीर जरूरी पोषक तत्व को सूचित नहीं कर पाता और धीरे-धीरे शरीर में पोषक तत्व की कमी होने लगती है. 

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आंतों की सेहत भी है जरूरी

छोटी आंत में मौजूद सूक्ष्म संरचनाएं पोषक तत्वों को खून में पहुंचाने का काम करती है. अगर इनमें किसी तरह की सूजन या नुकसान होता है तो आयरन, कैल्शियम और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्व शरीर तक नहीं पहुंच पाते. कई बार सीलिएक डिजीज या आतों से जुड़ी समस्याएं लंबे समय तक बिना लक्षण के बनी रहती है और शरीर में पोषक तत्व की कमी बढ़ती रहती है. 

खाने खाने की क्वालिटी भी बदल रही है सेहत 

एक्सपर्ट का मानना है की मिट्टी के गुणवत्ता में गिरावट और आधुनिक खेती के तरीकों के कारण फसलों में पोषक तत्व पहले जैसे नहीं रहे. वहीं प्रोसेस्ड फूड पेट तो भर देता है, लेकिन पर्याप्त पोषण नहीं देता. जिससे हमेशा पोषण की कमी की स्थिति बनी रहती है. वहीं डॉक्टर के अनुसार हर शरीर की पोषण संबंधी जरूरत एक जैसी नहीं होती है. तनाव, बीमारी या लाइफस्टाइल के अनुसार बदलती रहती है. वही प्रेग्नेंट महिलाओं, स्पोर्ट्स पर्सन या लंबे समय तक काम करने वालों को सामान्य से ज्यादा पोषक तत्व की जरूरत होती है. 

रोजाना की आदतें भी डालती है असर 

ज्यादा चाय कॉफी पीने से आयरन का अवशोषण कम हो सकता है. शराब का सेवन विटामिन स्टोरेज और आंतों की सेहत को प्रभावित करता है. वहीं कुछ दवाइयां जैसे एंटासिड, एंटीबायोटिक या मेटफार्मिन के लंबे इस्तेमाल से शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण कम हो सकता है. इसके अलावा पोषक तत्व की कमी अचानक नहीं होती, बल्कि समय के साथ बढ़ती है. लगातार थकान, बाल झड़ना या बार-बार संक्रमण होना या ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत जैसे लक्षण इसके संकेत हो सकते हैं. 

सिर्फ डाइट नहीं अब्जॉर्प्शन भी जरूर सुधारना भी जरूरी 

डॉक्टरों के अनुसार, समस्या को ठीक करने के लिए सिर्फ ज्यादा खाना ही काफी नहीं है. आंतों की सेहत सुधारना जरूरी है. इसके लिए दही या छाछ जैसे फर्मेंटेड फूड, फाइबर से भरपूर आहार और सही फूड कांबिनेशन अपनाना जरूरी है. डॉक्टरों के अनुसार कैफीन और शराब का सेवन भी कम करना चाहिए. अगर पोषक तत्वों की कमी बनी रहती है तो डॉक्टरों से परामर्श भी ले सकते हैं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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