सुबह उठते ही करते हैं ये काम तो घट रही है आपकी उम्र, जानें अपनी गलत आदतें

सुबह उठते ही करते हैं ये काम तो घट रही है आपकी उम्र, जानें अपनी गलत आदतें


Worst Morning Mistakes for Heart Health: सुबह का समय पूरे दिन की दिशा तय करता है. जागने के बाद के शुरुआती कुछ घंटे दिल की सेहत पर गहरा असर डालते हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि सुबह के समय ब्लड प्रेशर और कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन स्वाभाविक रूप से बढ़े होते हैं, इसलिए इस दौरान हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है. अगर इसी समय कुछ गलत आदतें जुड़ जाएं, तो दिल पर दबाव और बढ़ सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि आपकी सुबह की कौन सी आदतें आपकी जिंदगी घटा रही हैं और इनको क्यों सुधार करना चाहिए. 

सुबह उठते ही पानी न पीना

रातभर की नींद के बाद शरीर हल्का डिहाइड्रेटेड होता है. अगर सुबह सबसे पहले पानी नहीं पिया जाए, तो खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. सीधे चाय या कॉफी पीना हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि सुबह उठकर पानी पिया जाए, ताकि आपका शरीर रिलैक्स महसूस करे. 

बिना वॉर्म-अप के तेज एक्सरसाइज शुरू करना

सुबह की एक्सरसाइज फायदेमंद है, लेकिन उठते ही हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है. नींद के बाद रक्त वेसल्स थोड़ी सख्त होती हैं, ऐसे में अचानक जोर डालना दिल के लिए झटका बन सकता है. हल्की स्ट्रेचिंग या वॉक से शुरुआत करना ज्यादा सुरक्षित है.

सुबह ब्लड प्रेशर चेक न करना

हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है. जिन लोगों को जोखिम है, उनके लिए सुबह का समय बीपी बढ़ने का होता है. नियमित मॉर्निंग चेकअप से दिल से जुड़ी समस्याओं के शुरुआती संकेत पकड़े जा सकते हैं.

नमक से भरा नाश्ता करना

अचार, प्रोसेस्ड ब्रेड या रेडी-टू-ईट स्नैक्स जैसे ज्यादा नमक वाले नाश्ते से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. सुबह के समय सोडियम का ज्यादा सेवन दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है. इसकी जगह फल, ओट्स या स्प्राउट्स जैसे हल्के और संतुलित विकल्प बेहतर हैं.

बिस्तर पर ही मोबाइल या ईमेल देखना

सुबह-सुबह काम के ईमेल या सोशल मीडिया देखना तनाव बढ़ा सकता है. इससे कॉर्टिसोल और ब्लड प्रेशर लंबे समय तक ऊंचा रह सकता है. दिन की शांत शुरुआत दिल के लिए ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है.

नाश्ता छोड़ देना

रिसर्च बेवसाइट frontiersin में पब्लिश एक रिसर्च के अनुसार,  नाश्ता न करने से शरीर तनाव की स्थिति में चला जाता है और हार्मोनल असंतुलन बढ़ सकता है. नियमित रूप से नाश्ता छोड़ने वालों में दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा पाया गया है. सुबह संतुलित आहार लेना दिल और ब्लड शुगर दोनों के लिए जरूरी है. आपको सुबह उठकर जल्दी से जल्दी नाश्ता कर लेना चाहिए, ताकि शरीर में एनर्जी पहुंच सके. 

इसे भी पढ़ें: Cancer Warning Symptoms: देश में हर साल बढ़ रहे कैंसर के 15 लाख मामले, जानें जानलेवा बीमारी के 3 सबसे कॉमन लक्षण

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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आपको पता है अपना बीपी नंबर? जानें घर पर ब्लड प्रेशर चेक करने का सही तरीका और एक्सपर्ट्स की राय

आपको पता है अपना बीपी नंबर? जानें घर पर ब्लड प्रेशर चेक करने का सही तरीका और एक्सपर्ट्स की राय


How Often Should You Check Blood Pressure At Home: हाई ब्लड प्रेशर आज की सबसे गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है. यही वजह है कि इसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर, किडनी डिजीज और यहां तक कि डिमेंशिया का भी बड़ा कारण माना जाता है. एक्सपर्ट्स इसलिए बार-बार कहते हैं कि हर व्यक्ति को अपने “बीपी नंबर” जरूर पता होने चाहिए’. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, सामान्य तौर पर 120/80 mmHg को नॉर्मल ब्लड प्रेशर माना जाता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि लगभग आधे एडल्ट का बीपी इससे ज्यादा रहता है और उन्हें इसका अंदाजा तक नहीं होता. इसी कारण घर पर नियमित ब्लड प्रेशर चेक करना सेहत की देखभाल का अहम हिस्सा बन गया है.

कितनी बार ब्लड प्रेशर चेक करना चाहिए?

Daniel W. Jones,अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के एमडी का कहना है कि जिन लोगों को पहले से हाई बीपी की समस्या है, उन्हें हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार ब्लड प्रेशर मापना चाहिए. इसके साथ ही, इन रीडिंग्स को लिखकर या मोबाइल में रिकॉर्ड करना भी जरूरी है, अगर बार-बार रीडिंग 130/80 mmHg से ऊपर आ रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. कुछ खास स्थितियों में डॉक्टर रोजाना बीपी चेक करने की सलाह भी दे सकते हैं.

घर पर मापा गया बीपी क्यों ज्यादा भरोसेमंद होता है?

डॉक्टरों का कहना है कि घर पर लिया गया ब्लड प्रेशर अक्सर ज्यादा सटीक होता है. कई लोगों का बीपी अस्पताल या क्लिनिक में घबराहट की वजह से बढ़ जाता है, जिसे “व्हाइट कोट इफेक्ट” कहा जाता है. घर पर शांत माहौल में ली गई रीडिंग्स शरीर की असली स्थिति को बेहतर तरीके से दिखाती हैं.

सही मशीन का चुनाव जरूरी

हर ब्लड प्रेशर मशीन भरोसेमंद नहीं होती. इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि मान्यता प्राप्त और जांची हुई मशीन का ही इस्तेमाल करें. नई मशीन लेने के बाद उसे कभी-कभी डॉक्टर के पास ले जाकर ऑफिस की मशीन से तुलना करवाना भी अच्छा होता है, ताकि रीडिंग में फर्क न हो.

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?

अगर ब्लड प्रेशर अचानक 180/120 mmHg या उससे ज्यादा पहुंच जाए, तो यह मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है. ऐसी स्थिति में सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, चक्कर या घबराहट जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत इमरजेंसी सेवाओं से संपर्क करना चाहिए.

छोटे बदलाव भी होते हैं अहम

अगर बीपी एक-दो दिन के लिए सामान्य से थोड़ा ऊपर या नीचे जाए, तो रोजाना कुछ दिन मापते रहें और फिर डॉक्टर से सलाह लें. समय रहते बदलाव पकड़ में आ जाएं, तो गंभीर परेशानी से बचा जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मौत के बाद सबसे पहले कौन सा अंग काम करना करता है बंद, ब्रेन-किडनी या फिर हार्ट? जानिए जवाब

मौत के बाद सबसे पहले कौन सा अंग काम करना करता है बंद, ब्रेन-किडनी या फिर हार्ट? जानिए जवाब


Which Organ Fails First When a Person Dies: जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो शरीर एक साथ पूरी तरह बंद नहीं होता अलग-अलग अंग अपनी ऑक्सीजन की जरूरत और ब्लड फ्लो पर निर्भरता के हिसाब से अलग समय पर काम करना बंद करते हैं. इसी ऑर्गन शटडाउन टाइमलाइन को समझना न केवल मृत्यु की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी बताता है कि किन अंगों का प्रत्यारोपण संभव हो सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि सबसे पहले कौन सा अंग काम करना बंद करता है.

सबसे पहले क्या होता है?

दिल की धड़कन रुकते ही शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो जाती है.  ब्रेन को सबसे ज्यादा ऑक्सीजन चाहिए होती है, इसलिए यह सबसे पहले प्रभावित होता है. लगभग 4 से 7 मिनट के भीतर ब्रेन की सेल्स नष्ट होने लगती हैं. जब ब्रेन स्थायी रूप से काम करना बंद कर देता है, तो इसे ‘ब्रेन डेथ’ कहा जाता है और मेडिकल रूप से यही मृत्यु का निर्णायक संकेत माना जाता है.

दिल और सांस की रफ्तार कब थमती है?

नेचुरल मृत्यु के अधिकांश मामलों में सांस रुकने के साथ ही दिल की धड़कन भी बंद हो जाती है. दिल के रुकते ही ब्लड फ्लो समाप्त हो जाता है और फेफड़े भी काम करना बंद कर देते हैं. हालांकि अस्पताल में मशीनों की मदद से कुछ समय तक अंगों को ऑक्सीजन दी जा सकती है. ट्रांसप्लांट के नजरिए से, सही तरीके से संरक्षित किए जाने पर हार्ट और फेफड़े लगभग 4 से 6 घंटे तक उपयोगी रह सकते हैं.

कुछ घंटों बाद किन अंगों पर असर पड़ता है?

लिवर, पैंक्रियाज और आंतें ऊर्जा और एंजाइम पर निर्भर होते हैं, जिससे रक्त संचार रुकने के बाद इनमें तेजी से क्षय शुरू हो जाता है. आम तौर पर 8 से 18 घंटे के भीतर इनकी कार्यक्षमता घटने लगती है. यदि इन्हें तुरंत ठंडे तापमान पर संरक्षित कर लिया जाए, तो ट्रांसप्लांट के लिए सीमित समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

सबसे ज्यादा समय तक कौन से अंग सुरक्षित रहते हैं?

किडनी अपेक्षाकृत अधिक टिकाऊ अंग है. मृत्यु के बाद यदि इसे जल्दी ठंडा कर सुरक्षित रखा जाए, तो 24 से 36 घंटे तक ट्रांसप्लांट योग्य रह सकती है. आंख की पारदर्शी बाहरी परत, यानी कॉर्निया, ऑक्सीजन पर कम निर्भर होती है और लगभग 14 दिन तक दान के लिए उपयोगी रह सकती है. स्किन और हड्डियों जैसे टिश्यू सही संरक्षण में कई दिनों से लेकर वर्षों तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं. यही वजह है कि स्किन ग्राफ्ट और बोन टिश्यू का इस्तेमाल लंबे समय बाद भी संभव होता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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हार्ट अटैक आने से 48 घंटे पहले ही शरीर करता है ये इशारे, समझ लिए तो बच जाएगी जान

हार्ट अटैक आने से 48 घंटे पहले ही शरीर करता है ये इशारे, समझ लिए तो बच जाएगी जान


What Are the Signs of a Heart Attack 48 Hours Before: दिल का दौरा अक्सर अचानक होने वाली घटना की तरह देखा जाता है, लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि शरीर पहले ही कई संकेत देने लगता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि बड़े हार्ट अटैक से 24 से 48 घंटे पहले तक शरीर चेतावनी के लक्षण दिखा सकता है. इस अहम दौर को मेडिकल भाषा में प्रोड्रोमल विंडो कहा जाता है, जिसे लोग अक्सर सामान्य थकान या गैस की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.

डॉक्टर के अनुसार, इस समय दिल तक खून की आपूर्ति प्रभावित होने लगती है और दिल पर दबाव बढ़ जाता है, जबकि पूरी तरह ब्लॉकेज अभी नहीं हुआ होता. अगर इसी चरण में मरीज डॉक्टर से संपर्क कर ले, तो गंभीर नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता है. चलिए आपको ऑनलाइन हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट mayoclinic के अनुसार बताते हैं कि इसके कौन से गंभीर लक्षण दिखते हैं. 

असामान्य और लगातार रहने वाली थकान

सबसे शुरुआती और आम संकेतों में एक है अचानक और बेवजह महसूस होने वाली थकान. यह रोजमर्रा की सामान्य थकावट जैसी नहीं होती. कई मरीज बताते हैं कि थोड़ी-सी गतिविधि, जैसे कुछ कदम चलना या हल्का काम करना भी उन्हें बेहद थका देता है.

सीने में आता-जाता दबाव या जलन

हार्ट अटैक से पहले होने वाला सीने का दर्द हमेशा तेज और चुभने वाला नहीं होता. कई बार यह दबाव, भारीपन, जकड़न या हल्की जलन जैसा महसूस होता है. चूंकि यह आराम करने पर कुछ देर के लिए ठीक हो जाता है, इसलिए लोग इसे एसिडिटी या मांसपेशियों के खिंचाव की समस्या समझ लेते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकती है

ये भी होते हैं लक्षण

अगर आराम की स्थिति में भी सांस लेने में दिक्कत होने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह संकेत हो सकता है कि दिल शरीर तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पा रहा. खासकर जब यह लक्षण अचानक शुरू हो और थकान या सीने की तकलीफ के साथ दिखाई दे, तो तुरंत जांच कराना जरूरी है. कई बार दर्द सिर्फ सीने तक सीमित नहीं रहता. यह बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े, ऊपरी पीठ या पेट के ऊपरी हिस्से तक फैल सकता है. महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों में ऐसे लक्षण ज्यादा देखे जाते हैं, जिस कारण कई बार हार्ट अटैक की पहचान देर से हो पाती है. इसके अलावा अचानक ठंडा पसीना आना, चक्कर आना, मतली महसूस होना या बिना वजह घबराहट होना भी खतरे की घंटी हो सकता है. कई मरीज बताते हैं कि उन्हें ऐसा लगता है जैसे कुछ गड़बड़ होने वाली है. शरीर का यह अलार्म कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

 इसे भी पढ़ें- Cancer Warning Symptoms: देश में हर साल बढ़ रहे कैंसर के 15 लाख मामले, जानें जानलेवा बीमारी के 3 सबसे कॉमन लक्षण

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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देश में हर साल बढ़ रहे कैंसर के 15 लाख मामले, जानें जानलेवा बीमारी के 3 सबसे कॉमन लक्षण

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Early Cancer Symptoms You Should Not Ignore: दुनियाभर में कैंसर के मामले तेजी से फैल रहे हैं. इसका कारण बताया जाता है कि लोग लापरवाह होते हैं और शुरुआती लक्षणों पर ध्यान नहीं देते हैं, हालांकि ऐसा नहीं है. असल वजह यह है कि कैंसर के शुरुआती संकेत अक्सर बहुत हल्के, अस्पष्ट और आसानी से नजरअंदाज किए जाने वाले होते हैं. खासतौर पर पेट और सीने से जुड़े कैंसर शुरुआत में बिना किसी साफ लक्षण के अंदर ही अंदर बढ़ते रहते हैं. हल्की सूजन, मामूली दर्द या थकान जैसी चीजें अक्सर एसिडिटी, तनाव या उम्र का असर मान ली जाती हैं. नतीजा यह होता है कि जब तक कोई यह सोचता है कि “अब जांच करा लेनी चाहिए”, तब तक बीमारी स्टेज 3 या 4 तक पहुंच चुकी होती है.

भारत में बढ़ता कैंसर का बोझ

भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर साल 15 लाख से ज्यादा नए कैंसर केस सामने आ रहे हैं. कुल मामलों के लिहाज से भारत अब दुनिया के टॉप तीन देशों में शामिल है. चिंता की बात यह भी है कि बड़ी संख्या में मरीजों की पहचान बीमारी के एडवांस स्टेज में हो रही है और युवा उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. ऐसे में शुरुआती पहचान और जागरूकता पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है.

क्यों नजरअंदाज हो जाते हैं शुरुआती लक्षण?

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. गोपाल शर्मा ने TOI को बताया कि कैंसर आमतौर पर शुरुआत में कोई बड़ा या डराने वाला लक्षण नहीं दिखाता. उनके क्लीनिक में अक्सर ऐसे मरीज आते हैं, जो महीनों से कुछ लक्षण झेल रहे होते हैं, लेकिन उन्हें तनाव, उम्र या लाइफस्टाइल से जुड़ा मानकर टालते रहे. डॉक्टर कहते हैं कि इलाज में देरी अक्सर बीमारी से ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।

नॉर्मल समझकर लोग टाल देते हैं ये लक्षण

लगातार थकान रहना, बिना वजह वजन कम होना या भूख में बदलाव, ये ऐसे संकेत हैं, जिन्हें लोग अक्सर उम्र या काम का दबाव मान लेते हैं. लंबे समय तक बदहजमी, पेट फूलना या बाउल हैबिट्स में बदलाव को भी गलत खानपान का असर समझ लिया जाता हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर कोई लक्षण दो से तीन हफ्ते से ज्यादा बना रहे और उसकी कोई साफ वजह न हो, तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.

ये तीन लक्षण कभी न करें नजरअंदाज

डॉक्टरों के मुताबिक, किसी भी उम्र में अगर बिना वजह वजन घटे, कोई गांठ या सूजन लंबे समय तक बनी रहे, या पेशाब, मल या मुंह से असामान्य खून आए, तो तुरंत जांच जरूरी है.

इसे भी पढ़ें- Hormonal Health In Women: हर महीने आ रहे पीरियड्स तो क्या सब ठीक है, डॉक्टर्स से समझें आपका शरीर क्या छिपा रहा?

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हर महीने आ रहे पीरियड्स तो क्या सब ठीक है, डॉक्टर्स से समझें आपका शरीर क्या छिपा रहा?

हर महीने आ रहे पीरियड्स तो क्या सब ठीक है, डॉक्टर्स से समझें आपका शरीर क्या छिपा रहा?


Do Regular Periods Mean Hormones Are Balanced: अक्सर महिलाएं यह मान लेती हैं कि अगर उनके पीरियड्स हर महीने समय पर आ रहे हैं, तो उनके हार्मोन बिल्कुल ठीक होंगे. 28 से 30 दिन के अंतर पर नियमित ब्लीडिंग होना उन्हें राहत देता है और यही मान लिया जाता है कि शरीर के अंदर सब कुछ संतुलित है. लेकिन सच्चाई यह है कि नियमित पीरियड्स सिर्फ एक बाहरी संकेत हैं, पूरी तस्वीर नहीं. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं. 

हार्मोनल सिस्टम बेहद जटिल होता है. इसमें ब्रेन ओवरी, थायरॉइड, एड्रिनल ग्लैंड्स और मेटाबॉलिज्म, सभी एक-दूसरे से जुड़े होते हैं. कई बार यह सिस्टम अंदरूनी तनाव और असंतुलन के बावजूद पीरियड्स को नियमित बनाए रखता है. यही वजह है कि कुछ महिलाओं के पीरियड्स तो समय पर आते हैं, लेकिन उन्हें फर्टिलिटी से जुड़ी दिक्कतें, तेज दर्द, मूड स्विंग्स या प्रीमेंस्ट्रुअल समस्याएं झेलनी पड़ती हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

लूमा फर्टिलिटी की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राधिका शेठ ने TOI को बताया कि मेडिकल प्रैक्टिस में यह आम बात है कि नियमित पीरियड्स वाली महिलाओं में भी लंबे समय से हार्मोनल असंतुलन मौजूद रहता है. उनका कहना है कि पीरियड्स केवल एक नतीजा हैं, जबकि इसके पीछे चल रही हार्मोनल प्रक्रिया कहीं ज्यादा गहरी और संवेदनशील होती है. एक आम लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है प्रोजेस्टेरोन की कमी, जिसे ल्यूटियल फेज इंसफिशिएंसी कहा जाता है. ऐसी स्थिति में महिला समय पर ओवुलेट तो करती है और पीरियड्स भी नियमित रहते हैं, लेकिन प्रोजेस्टेरोन पर्याप्त न होने की वजह से प्रेग्नेंसी टिक नहीं पाती. अगर सही समय पर टेस्ट न किया जाए, तो यह समस्या सालों तक पकड़ में नहीं आती.

रेगुलर पीरियड्स में भी दिक्कत

इसी तरह PCOS को अक्सर अनियमित पीरियड्स से जोड़ा जाता है, लेकिन इसके हल्के या मेटाबॉलिक रूप में कई महिलाओं के पीरियड्स नियमित होते हैं. फिर भी उनमें इंसुलिन रेसिस्टेंस या हल्का हार्मोनल असंतुलन मौजूद हो सकता है, जो एग क्वालिटी और फर्टिलिटी को प्रभावित करता है. थायरॉइड या प्रोलैक्टिन में हल्की गड़बड़ी भी पीरियड्स को प्रभावित किए बिना ओवुलेशन और हार्मोन सपोर्ट को कमजोर कर सकती है. इसके अलावा लगातार तनाव, नींद की कमी और अनियमित खानपान शरीर में कोर्टिसोल बढ़ा देता है, जिससे हार्मोनल बैलेंस धीरे-धीरे बिगड़ता है.

किन चीजों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?

डॉक्टरों का कहना है कि तेज मूड स्विंग्स, दर्दनाक पीरियड्स, लगातार थकान, सूजन, लो लिबिडो या इमोशनल अस्थिरता जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ये संकेत बताते हैं कि भले ही पीरियड्स नियमित हों, लेकिन शरीर अंदर से संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है.

ये भी पढ़ें: शरीर के किन अंगों में सबसे पहले होता है कैंसर? होश उड़ा देगी यह रिपोर्ट

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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