क्या आप भी टॉयलेट में यूज करते हैं फोन? तुरंत बदल लें आदत वरना शरीर बन जाएगा बीमारियों का घर

क्या आप भी टॉयलेट में यूज करते हैं फोन? तुरंत बदल लें आदत वरना शरीर बन जाएगा बीमारियों का घर


हाई टेक्नोलॉजी की दुनिया में लोगों के लिए मोबाइल से पांच मिनट भी दूर रह पाना मुश्किल होता जा रहा है. रील देखने और सोशल मीडिया पर वक्त बिताने की लत इतनी ज्यादा लग चुकी है कि लोग टॉयलेट में भी मोबाइल अपने साथ लेकर जाते हैं और जरूरत से ज्यादा समय वहीं बिता देते हैं. क्या आप जानते हैं कि टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल आपकी सेहत को कितनी बुरी तरह प्रभावित करता है?

रिसर्च में सामने आई यह बात

टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल करने की बढ़ती आदत पर कई रिसर्च हो चुकी हैं, जिसमें ये साफ पाया गया कि ऐसा करने वाले लोगों में पाचन की परेशानी और पाइल्स की समस्या ज्यादा देखी गई है. टॉयलेट सीट पर समय से अधिक समय तक बैठे रहने से रेक्टम पर असर पड़ता है, जिसकी वजह से पाइल्स होने की आशंका बाकी लोगों की तुलना में ज्यादा बढ़ जाती है. इसके अलावा पेट पर पड़ने वाले दबाव की वजह से पाचन शक्ति पर असर पड़ता है और इससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है.

मांसपेशियों और हड्डियों पर भी पड़ता है असर

टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल करने की आदत से मांसपेशियों और हड्डियों पर भी असहनीय दबाव पड़ता है. मोबाइल को लगातार देखने के लिए गर्दन और कंधों पर बोझ बढ़ता है और मांसपेशियों में दर्द और जकड़न बढ़ जाती है. इससे रीढ़ की हड्डी भी प्रभावित होती है. अगर किसी को पहले से ही स्पाइनल कॉर्ड से जुड़ी परेशानी है तो उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.

सर्वाइकल होने का भी बढ़ता है खतरा

मोबाइल चलाने की खराब आदत की वजह से सर्वाइकल का रिस्क होने का खतरा रहता है. टॉयलेट में लंबे समय तक एक ही पोस्चर में बैठने की वजह से सिर और गर्दन के ऊपरी हिस्से पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है. कभी-कभी इससे तेज सिरदर्द और गर्दन में दर्द की परेशानी भी हो सकती है.

पेट भी नहीं हो पाता है साफ

इसके अलावा मोबाइल को टॉयलेट में ले जाने से उस पर खतरनाक बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं. जितनी बार मोबाइल को पकड़ेंगे, उतनी ही बार हाथ धोना जरूरी होगा. यही वजह है कि टॉयलेट में मोबाइल के इस्तेमाल से परहेज करना चाहिए. टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल करने से पेट पूरी तरह साफ भी नहीं होता है और मेंटल प्रेशर बढ़ता है. शरीर जब विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, तब दिमाग का इस क्रिया में बड़ा योगदान होता है. दिमाग से सिग्नल मिलने के बाद ही शरीर के बाकी अंग अपने काम करते हैं. ऐसे में जब दिमाग मोबाइल चलाने में बिजी होगा तो विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया पूरी तरह से नहीं हो पाती है और पेट में बची गंदगी शरीर को धीरे-धीरे बीमार करने लगती है.

ये भी पढ़ें: गर्दन चटकाने की आदत कहीं स्ट्रोक का खतरा तो नहीं, फिजिशियन ने बताया- कब बढ़ जाती है यह परेशानी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने किया मिलेट्स का जिक्र, जानें यह सेहत के लिए कितना फायदेमंद?

‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने किया मिलेट्स का जिक्र, जानें यह सेहत के लिए कितना फायदेमंद?


पीएम नरेंद्र मोदी ने 25 जनवरी (रविवार) को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के साल 2026 के पहले एपिसोड में एक बार फिर मिलेट्स (मोटे अनाज) का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मिलेट्स देश की परंपरा का हिस्सा हैं और आज पूरी दुनिया इन्हें सुपरफूड मान रही है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी थाली में मिलेट्स को जगह दें, क्योंकि ये सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं. आइए जानते हैं ये सेहत के लिए कितने अच्छे होते हैं?

पीएम मोदी ने क्या कहा? 

पीएम मोदी ने मिलेट्स को न सिर्फ सेहत का खजाना बताया, बल्कि कहा कि ये न सिर्फ पौष्टिक हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद करते हैं. मिलेट्स खाने से शरीर मजबूत होता है और बीमारियां दूर रहती हैं. ये ग्लूटेन फ्री हैं और डायबिटीज-मोटापा जैसी समस्याओं में बहुत मदद करते हैं.

क्या है डॉक्टर की राय?

दिल्ली एम्स के न्यूट्रिशन विभाग के प्रमुख डॉ. अनूप मिश्रा के मुताबिक, मिलेट्स में फाइबर काफी ज्यादा होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और कब्ज की समस्या दूर करते हैं. डायबिटीज के मरीजों के लिए भी मिलेट्स बहुत अच्छे हैं, क्योंकि इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है. इन्हें खाने से ब्लड शुगर जल्दी नहीं बढ़ता. लोगों को रोजाना रागी, ज्वार या बाजरा की रोटी खानी चाहिए, जो उनकी सेहत के लिए काफी अच्छे हैं.

महिलाओं और बच्चों के लिए बेहद फायदेमंद

डॉ. मिश्रा ने बताया कि मिलेट्स में भरपूर आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम होते हैं. एनीमिया की समस्या वाले लोगों के लिए ये रामबाण हैं. खासकर महिलाओं और बच्चों को मिलेट्स जरूर खाने चाहिए. ये हड्डियां मजबूत करते हैं और इम्यूनिटी बढ़ाते हैं. 

दिल की बीमारियों के लिए भी बेहतरीन

एक्सर्ट्स के मुताबिक, दिल की बीमारियां आजकल बहुत कॉमन हैं. मिलेट्स में गुड फैट और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल कम करते हैं और दिल को हेल्दी रखते हैं. बाजरा और ज्वार खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है. मिलेट्स ग्लूटेन फ्री हैं, इसलिए सीलियक डिजीज वाले लोगों के लिए परफेक्ट हैं. इनमें प्रोटीन भी अच्छा होता है. इसके अलावा वजन घटाने वालों के लिए मिलेट्स बेस्ट हैं, क्योंकि ये लंबे वक्त तक पेट भरा रखते हैं.

कैंसर जैसी बीमारियों में भी मददगार

डॉ. मिश्रा ने बताया कि मिलेट्स में एंटीऑक्सीडेंट काफी ज्यादा होते हैं, जो कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. ये लिवर और किडनी को भी हेल्दी रखते हैं. बच्चों के लिए रागी पोरिज बहुत अच्छा है, जो दिमाग के विकास में मदद करता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पीरियड्स के कितने दिन बाद सबसे ज्यादा होते हैं मां बनने के चांस? ऐसे दूर करें कंफ्यूजन

पीरियड्स के कितने दिन बाद सबसे ज्यादा होते हैं मां बनने के चांस? ऐसे दूर करें कंफ्यूजन


How Many Days After Periods Pregnancy Chances Are High: अगर आप प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि पीरियड्स के बाद किन दिनों में गर्भधारण की संभावना सबसे ज्यादा रहती है. अक्सर महिलाएं इसे लेकर कन्फ्यूज रहती हैं, क्योंकि हर महिला का पीरियड साइकल एक-जैसा नहीं होता. लेकिन शरीर के नेचुरल साइकल को समझकर इस कन्फ्यूजन को काफी हद तक दूर किया जा सकता है. चलिए आपका कन्फ्यूजन दूर करते हैं. 

क्या होता है फर्टाइल विंडो?

Babycentre Uk के अनुसार,  फर्टाइल विंडो वह समय होता है, जब प्रेग्नेंट होने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं. इसमें ओव्यूलेशन से पहले के 5 दिन और ओव्यूलेशन का दिन शामिल होता है. ओव्यूलेशन वह प्रक्रिया है, जब ओवरी से एक अंडा रिलीज़ होता है, जिसे स्पर्म फर्टिलाइज कर सकता है. आमतौर पर ओव्यूलेशन अगले पीरियड से करीब 14 दिन पहले होता है. यानी अगर आपका पीरियड साइकल 28 दिन का है, तो ओव्यूलेशन लगभग पीरियड के 13 से 14वें दिन होता है.

पीरियड्स के कितने दिन बाद सबसे ज्यादा चांस होते हैं?

अगर 28 दिन का रेगुलर साइकल माना जाए, तो पीरियड खत्म होने के बाद 8वें दिन से लेकर 14वें दिन तक गर्भधारण की संभावना तेजी से बढ़ती है. 12वें से 14वें दिन के बीच चांस सबसे ज्यादा होते हैं. इसकी वजह यह है कि स्पर्म महिला के शरीर में 3 से 5 दिन तक जिंदा रह सकते हैं, जबकि अंडा ओव्यूलेशन के बाद 12 से 24 घंटे ही जीवित रहता है. इसलिए ओव्यूलेशन से पहले के दिन सबसे अहम माने जाते हैं।

ओव्यूलेशन कैसे पहचानें?

हर महिला को ओव्यूलेशन का दिन अलग-अलग हो सकता है, लेकिन कुछ संकेत मदद कर सकते हैं-

सर्वाइकल म्यूकस में बदलाव- ओव्यूलेशन के आसपास डिस्चार्ज ज्यादा साफ, स्लिपरी और स्ट्रेची हो जाता है

हल्का पेट दर्द या खिंचाव– निचले पेट में हल्की चुभन महसूस हो सकती है

बेसल बॉडी टेम्परेचर– ओव्यूलेशन के बाद शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है

एनर्जी और मूड में बदलाव– कई महिलाओं को इस समय ज्यादा एक्टिव और पॉजिटिव महसूस होता है

अगर पीरियड साइकल अनियमित हो तो?

जिन महिलाओं का पीरियड साइकल रेगुलर नहीं होता, उनके लिए ओव्यूलेशन का दिन पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. ऐसे में

  • ओव्यूलेशन किट
  • बॉडी टेम्परेचर ट्रैकिंग
  • सर्वाइकल म्यूकस पर ध्यान

इन तरीकों से फर्टाइल दिनों का अंदाजा लगाया जा सकता है

ध्यान रखने वाली जरूरी बात

फर्टिलिटी कैलकुलेटर और कैलेंडर सिर्फ अनुमान देते हैं. स्ट्रेस, दवाइयां, लाइफस्टाइल और हार्मोनल बदलाव ओव्यूलेशन को आगे-पीछे कर सकते हैं. इसलिए अपने शरीर के संकेतों को समझना सबसे ज्यादा जरूरी है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या आपका शरीर मां बनने के लिए तैयार है? हाई फर्टाइल महिलाओं में दिखते हैं ये पांच लक्षण

क्या आपका शरीर मां बनने के लिए तैयार है? हाई फर्टाइल महिलाओं में दिखते हैं ये पांच लक्षण


Natural Signs Your Body Is Ready For Pregnancy: फर्टिलिटी की बात आते ही ज्यादातर चर्चा टेस्ट, ट्रीटमेंट या फिर नियमित पीरियड्स तक ही सीमित रह जाती है. लेकिन सच यह है कि कई बार हमारा शरीर बहुत हल्के इशारों में बता देता है कि रिप्रोडक्टिव सिस्टम ठीक से काम कर रहा है. ये संकेत इतने सटल होते हैं कि अक्सर महिलाएं इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं या किसी परेशानी का लक्षण मान लेती हैं. असल में, ये बदलाव शरीर के नेचुरल फर्टाइल रिदम का हिस्सा होते हैं. ऐसे ही पांच अहम संकेत, जो बताते हैं कि शरीर फर्टाइल है. चलिए आपको इनके बारे में बताते हैं.

साइकल के बीच अचानक एनर्जी बढ़ना

कई महिलाओं को पीरियड साइकल के बीच अचानक ज्यादा एनर्जी महसूस होती है. यह कोई यूं ही अच्छा दिन नहीं होता, बल्कि ओव्यूलेशन का संकेत हो सकता है. इस समय एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन अपने पीक पर होते हैं, जिससे शरीर गर्भधारण के लिए तैयार होता है. खुद को ज्यादा एक्टिव, फोकस्ड या सोशल महसूस करना भी इसी फर्टाइल फेज का हिस्सा हो सकता है.

रात में शरीर का हल्का गर्म महसूस होना

ओव्यूलेशन के बाद शरीर का बेसल टेम्परेचर थोड़ा बढ़ जाता है. कई बार यह बदलाव सुबह उठने पर या रात में हल्की गर्माहट के रूप में महसूस होता है. आमतौर पर महिलाएं इसे मौसम या थकान से जोड़ देती हैं, जबकि यह शरीर के फर्टाइल विंडो का एक भरोसेमंद संकेत हो सकता है.

निचले पेट में हल्का सा दर्द या खिंचाव

पीरियड्स से अलग, साइकल के बीच पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द या चुभन महसूस होना भी ओव्यूलेशन से जुड़ा हो सकता है. इसे मेडिकल भाषा में मिटलशमर्ज कहा जाता है. यह उस समय होता है जब ओवरी से अंडा रिलीज होता है, जिसे अक्सर मामूली गैस या पेट दर्द समझ लिया जाता है.

सर्वाइकल म्यूकस में नेचुरल बदलाव

ओव्यूलेशन के आसपास सर्वाइकल फ्लूइड ज्यादा स्लिपरी और स्ट्रेची हो जाता है, जिससे स्पर्म को आगे बढ़ने में मदद मिलती है. कई महिलाएं इसे किसी इंफेक्शन या असंतुलन का संकेत मान लेती हैं, जबकि यह फर्टिलिटी का सबसे नेचुरल और मजबूत संकेतों में से एक है.

 पीरियड्स का नियमित और संतुलित होना

सिर्फ समय पर पीरियड आना ही नहीं, बल्कि उसका फ्लो और दर्द का स्तर भी फर्टिलिटी की कहानी बताता है. अगर पीरियड्स बहुत ज्यादा दर्दनाक या असामान्य रूप से भारी नहीं हैं और नियमित हैं, तो यह संकेत है कि हार्मोनल बैलेंस सही है और ओव्यूलेशन ठीक से हो रहा है.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

चंडीगढ़ के एक निजी हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी की डॉक्टर अमृता गुप्ता के मुताबिक फर्टिलिटी को समझना हमेशा आसान नहीं होता. कई संकेत इतने सामान्य लगते हैं कि महिलाएं उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देती हैं. 

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प्रोटीन और विटामिन्स का पावरहाउस… जानें कटहल खाने के 5 फायदे, जो आपको चौंका देंगे

प्रोटीन और विटामिन्स का पावरहाउस… जानें कटहल खाने के 5 फायदे, जो आपको चौंका देंगे


Health Benefits Of Jackfruit Vegetable: कटहल ऐसी सब्ज़ी है जिसे शाकाहारी और मांसाहारी, दोनों ही पसंद से खाते हैं. इससे कई तरह की स्वादिष्ट रेसिपी बनाई जाती हैं. दरअसल, कटहल सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें प्रोटीन, विटामिन A और C, थायमिन, पोटैशियम, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, आयरन, नायसिन, फाइबर और ज़िंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं. आइए जानते हैं किन लोगों के लिए कटहल का सेवन फायदेमंद हो सकता है.

कटहल खाने के तरीके

कटहल को डाइट में कई तरह से शामिल किया जा सकता है. इससे स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है, अचार भी तैयार किया जाता है. इसके अलावा कटहल के पकौड़े भी काफी पसंद किए जाते हैं. अलग-अलग तरीकों से इसका सेवन स्वाद और पोषण दोनों देता है.

कटहल खाने के फायदे

दिल की सेहत के लिए
कटहल में पोटैशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायक होता है, वहीं फाइबर खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है. नियमित रूप से संतुलित मात्रा में कटहल खाने से दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है.

वजन नियंत्रण में सहायक
कटहल फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है. इससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है और ओवरईटिंग से बचाव होता है. इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जो मोटापे से जुड़ी समस्याओं को कंट्रोल करने में सहायक हो सकते हैं.

इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार
कटहल में विटामिन C, जिंक और अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं. नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, जिससे सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रमणों से बचाव में मदद मिल सकती है. बदलते मौसम में यह शरीर को अंदर से मजबूत रखने में सहायक है.

कब्ज और पाचन के लिए फायदेमंद
कटहल में अच्छी मात्रा में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. यह आंतों की सफाई में मदद करता है और कब्ज, गैस और पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत दिला सकता है. जिन लोगों को पाचन से जुड़ी दिक्कत रहती है, उनके लिए कटहल फायदेमंद हो सकता है.

आंखों की सेहत के लिए लाभकारी
कटहल में विटामिन A और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी को बनाए रखने में मदद करते हैं. ये तत्व आंखों को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं और उम्र के साथ होने वाली आंखों की समस्याओं के खतरे को कम करने में सहायक हो सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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