हफ्ते में सिर्फ 1 दिन की एक्सरसाइज से भी घट सकता है वजन, नई स्टडी में हुआ खुलासा

हफ्ते में सिर्फ 1 दिन की एक्सरसाइज से भी घट सकता है वजन, नई स्टडी में हुआ खुलासा


यह रिसर्च हांगकांग यूनिवर्सिटी के एलकेएस फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के रिसर्चर्स ने की है. इस रिसर्च में यह जानने की कोशिश की गई है कि क्या हफ्ते में एक बार की जाने वाली इंटरवल ट्रेनिंग हफ्ते में तीन बार की जाने वाली इंटरवल ट्रेनिंग जितनी प्रभावी हो सकती है.

दरअसल दुनिया भर में मोटापा तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है. शरीर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने से हार्ट प्रॉब्लम, मेटाबॉलिक बीमारियां और समय से पहले मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है. खासतौर पर पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा जाता है.

दरअसल दुनिया भर में मोटापा तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है. शरीर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने से हार्ट प्रॉब्लम, मेटाबॉलिक बीमारियां और समय से पहले मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है. खासतौर पर पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा जाता है.

Published at : 02 Jun 2026 09:37 AM (IST)

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क्या कॉफी पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है? रिसर्च में सामने आया बड़ा सच

क्या कॉफी पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है? रिसर्च में सामने आया बड़ा सच


कॉफी और हाइड्रेशन पर किए गए एक रिसर्च में रिसर्चर्स ने कॉफी पीने वाले लोगों और केवल पानी पीने वाले लोगों की तुलना की. रिसर्च में दोनों कैटेगरी के शरीर में पानी के स्तर में कोई ज्यादा बड़ा अंतर नहीं पाया गया. रिसर्च के नतीजे में डिहाइड्रेशन के स्पष्ट परिणाम नहीं मिले, जिससे यह धारणा कमजोर पड़ गई कि सामान्य मात्रा में कॉफी पीना शरीर को डिहाइड्रेट कर देता है.

कॉफी में मौजूद कैफीन को हल्का ड्यूरेटिक माना जाता है, यानी यह पेशाब की मात्रा बढ़ा सकता है. इस वजह से यह माना जाता रहा है कि काॅफी शरीर से पानी बाहर निकाल देती है, हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह धारणा पुरानी रिसर्च पर आधारित है.

कॉफी में मौजूद कैफीन को हल्का ड्यूरेटिक माना जाता है, यानी यह पेशाब की मात्रा बढ़ा सकता है. इस वजह से यह माना जाता रहा है कि काॅफी शरीर से पानी बाहर निकाल देती है, हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह धारणा पुरानी रिसर्च पर आधारित है.

Published at : 02 Jun 2026 09:31 AM (IST)

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गर्मियों में क्या रोज शैंपू करना सही है, क्या इससे ठीक रहते हैं बाल?

गर्मियों में क्या रोज शैंपू करना सही है, क्या इससे ठीक रहते हैं बाल?


Doing Shampoo Everyday In Summer: गर्मियों के मौसम में तेज धूप, धूल-मिट्टी और पसीने के कारण बालों का रुखा और चिपचिपा होना एक आम दिक्कत है. बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या गर्मियों में रोज शैंपू करना सही है? क्या रोज बाल धोने से बाल सही रहते हैं? आइए इस लेख में जानते हैं कि बालों की सेहत के लिए क्या सही है और क्या गलत.

क्या रोज शैंपू करना फायदेमंद है?

गर्मियों में पसीना अधिक आने से सिर की त्वचा पर गंदगी जमा हो जाती है. इस गंदगी को साफ करने के लिए बाल धोना जरूरी है. लेकिन रोजाना शैंपू करना बालों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है. हमारे सिर की त्वचा में प्राकृतिक तेल होता है, जो बालों को नमी प्रदान करता है. जब आप रोज केमिकल वाले शैंपू का इस्तेमाल करते हैं, तो यह प्राकृतिक तेल पूरी तरह खत्म हो जाता है. इससे बाल रूखे, बेजान और कमजोर होकर टूटने लगते हैं.

रोज शैंपू करने के नुकसान

अगर आप रोजाना शैंपू करते हैं, तो सिर की त्वचा बहुत सूखी हो जाती है. इस सूखेपन को कम करने के लिए त्वचा और अधिक तेल बनाने लगती है. इसके कारण बाल और ज्यादा चिपचिपे दिखने लगते हैं. इसके अलावा, रोजाना बाल धोने से बालों की जड़ें कमजोर होती हैं और बाल झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ सकती है.

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गर्मियों में बाल धोने का सही तरीका

गर्मियों में बालों को साफ रखना जरूरी है, लेकिन इसके लिए रोज शैंपू करने की जरूरत नहीं है. आप हफ्ते में केवल दो या तीन बार ही शैंपू का इस्तेमाल करें. अगर किसी दिन बाल ज्यादा चिपचिपे लगें, तो आप शैंपू के बिना केवल साफ पानी से भी बालों को धो सकते हैं. हमेशा हल्के या नेचुरल तत्वों से बने शैंपू का ही प्रयोग करें.

बालों को स्वस्थ रखने के आसान उपाय

शैंपू करने के बाद बालों में कंडीशनर लगाना कभी न भूलें. कंडीशनर बालों की नमी को बनाए रखता है. तेज धूप में बाहर निकलते समय बालों को सूती कपड़े या स्कार्फ से ढक कर रखें. इसके साथ ही, शरीर में पानी की कमी न होने दें और अच्छा खान-पान रखें.

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सुबह की चाय या शाम की चाय? जानिए आपकी सेहत के लिए कौन-सा समय है सबसे बेहतर

सुबह की चाय या शाम की चाय? जानिए आपकी सेहत के लिए कौन-सा समय है सबसे बेहतर


Best Time To Drink Tea: कई लोगों का दिन चाय के बिना शुरू ही नहीं होता. सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले चाय की याद आती है, तो कुछ लोग शाम की थकान दूर करने के लिए चाय का सहारा लेते हैं. भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा माना जाता है. घर की बातचीत हो, ऑफिस का ब्रेक हो या दोस्तों की मुलाकात, चाय हर मौके पर साथ नजर आती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चाय पीने का सही समय कौन-सा है? सुबह की चाय ज्यादा फायदेमंद होती है या शाम की? बता दें कि इस सवाल का जवाब आपकी जरूरत और शरीर की स्थिति पर निर्भर करता है. 

सुबह की चाय देती है एनर्जी

विशेषज्ञों के मुताबिक सुबह की चाय शरीर को जगाने और दिमाग को सक्रिय करने में मदद करती है. चाय में मौजूद कैफीन आपको तरोताजा महसूस करा सकती है और काम पर ध्यान लगाने में मदद कर सकती है. वहीं ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं और यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकते हैं. साथ ही काली चाय और मसाला चाय भी सुबह ऊर्जा देने का काम करती हैं. 

लेकिन सिर्फ चाय पीना ही नहीं, उसे सही तरीके से पीना भी जरूरी है. डाइटिशियन के अनुसार, सुबह खाली पेट बहुत कड़क या तेज चाय नहीं पीनी चाहिए. ऐसा करने से कुछ लोगों को पेट में जलन, गैस या बेचैनी महसूस हो सकती है. इसलिए चाय को नाश्ते या किसी हल्के स्नैक के साथ लेना ही बेहतर माना जाता है. सुबह के समय अदरक वाली चाय, नींबू वाली चाय या दूसरी हर्बल चाय भी अच्छी मानी जाती हैं. ये शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ पाचन को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं. इस तरह अगर चाय सही समय और सही तरीके से पी जाए तो यह दिन की अच्छी शुरुआत का हिस्सा बन सकती है. 

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शाम की चाय सुकून देती है

दिनभर की भागदौड़ के बाद शाम की चाय कई लोगों के लिए आराम का जरिया होती है. लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शाम के समय ज्यादा कैफीन वाली चाय पीने से बचना चाहिए. साथ ही देर शाम कड़क चाय पीने से नींद पर असर पड़ सकता है और कुछ लोगों को बेचैनी भी महसूस हो सकती है.  ऐसे में हर्बल चाय बेहतर विकल्प मानी जाती है. वहीं कैमोमाइल टी, पेपरमिंट टी, लैवेंडर टी और तुलसी की चाय शाम के समय पी जा सकती है. इसके अलावा कैमोमाइल टी शरीर को आराम देने और अच्छी नींद में मदद कर सकती है. साथ ही पेपरमिंट टी पाचन को बेहतर बनाने और पेट फूलने जैसी समस्या को कम करने में मददगार मानी जाती है. तुलसी की चाय तनाव कम करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक हो सकती है. 

आखिर चाय पीने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका कोई एक जवाब नहीं है. अगर आपको सुबह काम के लिए ऊर्जा और फोकस चाहिए तो सुबह की चाय आपके लिए बेहतर हो सकती है. वहीं अगर आप दिनभर की थकान के बाद आराम चाहते हैं तो शाम की हर्बल चाय अच्छा विकल्प हो सकती है.  बस सबसे जरूरी बात यह है कि चाय को सीमित मात्रा में ही पी जाए. बहुत ज्यादा चाय पीने से शरीर में पानी की कमी, एसिडिटी और नींद की परेशानी हो सकती है. इसलिए सही समय और सही मात्रा में पी गई चाय न सिर्फ स्वाद देती है, बल्कि आपकी दिनचर्या को भी बेहतर बना सकती है. 

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रात 9 बजे के बाद खाते हैं खाना, दिल को हो सकता है बड़ा नुकसान

रात 9 बजे के बाद खाते हैं खाना, दिल को हो सकता है बड़ा नुकसान


Late Night Eating Heart Health Side Effects : आज की बिजी और खराब लाइफस्टाइल में देर रात खाना खाना आम बात बन गई है. ऑफिस का काम, ट्रैफिक, मोबाइल और टीवी के बढ़ते यूज के कारण कई लोग रात 9 बजे के बाद ही डिनर कर पाते हैं. कुछ लोगों के लिए तो 10 से 11 बजे खाना खाना रोजमर्रा की आदत बन चुकी है.

यह आदत मामूली लग सकती है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात खाना खाने का असर सिर्फ पाचन तंत्र पर ही नहीं बल्कि दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है. ऐसे में बहुत देर से खाना खाने पर शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे लंबे समय में कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि रात 9 बजे के बाद खाना खाने से दिल को क्या नुकसान हो सकता है. 

शरीर की बॉडी क्लॉक कैसे करती है काम?

हमारे शरीर में एक नेचुरल 24 घंटे की बॉडी क्लॉक होती है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है. यही क्लॉक यह तय करती है कि शरीर कब जागेगा, कब सोएगा, कब हार्मोन रिलीज होंगे और भोजन को कैसे पचाया जाएगा. रात होने पर शरीर की एक्टिविटी धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. ब्लड प्रेशर नीचे आने लगता है और शरीर खुद को अगले दिन के लिए तैयार करता है, लेकिन अगर इस दौरान भारी खाना खा कर लिया जाए तो शरीर को आराम मिलने के बजाय अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है. 
 
देर रात खाना खाने से दिल को क्या नुकसान हो सकता है?
 
विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात खाना खाने से पाचन तंत्र उस समय भी एक्टिव रहता है जब शरीर आराम की तैयारी कर रहा होता है. इससे शरीर का सामान्य संतुलन बिगड़ सकता है. रात में देर से खाना खाने से ब्लड प्रेशर लंबे समय तक ऊंचा रह सकता है. इसके अलावा शरीर में शुगर को कंट्रोल करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है. समय के साथ यह आदत हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट की बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकती है. 
 
देर रात खाने और स्ट्रोक का क्या है संबंध?

कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि जो लोग रोजाना देर रात खाना खाते हैं, उनमें स्ट्रोक का खतरा ज्यादा हो सकता है. इसका एक कारण यह माना जाता है कि देर रात खाने से शरीर की बॉडी क्लॉक के काम करने में रुकावट आ सकती है और हार्ट से जुड़ी कई प्रक्रियाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, हालांकि सिर्फ एक-दो बार देर से खाना खाने से कोई बड़ा नुकसान नहीं होता है, लेकिन अगर यह रोज की आदत बन जाए तो जोखिम बढ़ सकता है. 

नींद की क्वालिटी भी हो सकती है खराब

देर रात खाना खाने का असर नींद पर भी पड़ता है. खाना खाने के तुरंत बाद सोने से एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो सकती है. इसमें पेट का एसिड खाने की नली की तरफ आने लगता है, जिससे सीने में जलन और बेचैनी महसूस होती है, जब नींद बार-बार टूटती है या अच्छी नींद नहीं आती तो इसका सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ सकता है. खराब नींद शरीर में सूजन बढ़ा सकती है और तनाव वाले हार्मोन्स का स्तर भी बढ़ा सकती है. 

रात में शरीर को क्यों चाहिए आराम?

दिनभर काम करने के बाद रात का समय शरीर की मरम्मत और रिकवरी के लिए बेहद जरूरी होता है. इसी दौरान शरीर के कई जरूरी अंग खुद को रिचार्ज करते हैं. सोते समय ब्लड प्रेशर सामान्य रूप से कम हो जाता है, तनाव हार्मोन घटने लगते हैं और शरीर को आराम मिलता है, लेकिन अगर रात में भारी खाना खाया जाए तो शरीर को खाना पचाने के लिए अतिरिक्त एनर्जी लगानी पड़ती है, जिससे रिकवरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. 

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किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?

कुछ लोगों के लिए देर रात खाना खाना ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है.  इनमें हाई ब्लड प्रेशर के मरीज, डायबिटीज से पीड़ित लोग. मोटापे से जूझ रहे लोग, हार्ट हेल्थ के जोखिम वाले व्यक्ति और कोलेस्ट्रॉल की समस्या वाले लोग शामिल हैं. इन लोगों को अपने डिनर के समय और खाने की मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए. 

रात का खाना किस समय खाना सबसे बेहतर माना जाता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि रात का खाना शाम 7 से 8 बजे के बीच कर लेना चाहिए. इसके अलावा डिनर और सोने के समय के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का अंतर होना चाहिए. इससे खाने को पचने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है और नींद भी बेहतर आती है. रात का खाना हल्का और संतुलित रखना बेहतर माना जाता है. डिनर में ज्यादा तला-भुना, ज्यादा तेल वाला या बहुत ज्यादा मीठा खाना खाने से बचना चाहिए.रात के खाने में दाल और सब्जियां, सलाद, मल्टीग्रेन रोटी, हल्की खिचड़ी, सूप और दही शामिल कर सकते हैं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कम खाने से नहीं घटता वजन, मोटापे से जुड़े इन बड़े मिथकों का एक्सपर्ट ने बताया पूरा सच

कम खाने से नहीं घटता वजन, मोटापे से जुड़े इन बड़े मिथकों का एक्सपर्ट ने बताया पूरा सच


Common Obesity Myths Explained By Experts: मोटापा दुनिया की सबसे गलत समझी जाने वाली हेल्थ समस्याओं में से एक है. इसकी वजह यह नहीं है कि साइंस के पास जवाब नहीं हैं, बल्कि समस्या यह है कि वर्षों से चली आ रही गलत धारणाओं, भ्रामक डाइट सलाह और सामाजिक पूर्वाग्रहों ने सही जानकारी को पीछे धकेल दिया है. वॉय इंडिया (पूर्व में अर्लीफिट) की सह-संस्थापक और सीओओ सलोनी पालीवाल के अनुसार, मोटापे को लेकर कई ऐसे मिथक हैं जो न केवल गलत हैं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं.

क्या लाइफस्टाइल की वजह से ऐसा होता है?

सबसे बड़ा भ्रम यह है कि मोटापा केवल व्यक्ति की लाइफस्टाइल का परिणाम होता है. जबकि रिसर्च बताते हैं कि इसके पीछे जैनेटिक, हार्मोन, नींद, तनाव, आंतों के माइक्रोबायोम और पर्यावरण जैसे कई कारक मिलकर काम करते हैं.  यही कारण है कि एक जैसी डाइट और समान शारीरिक गतिविधि के बावजूद दो लोगों का वजन अलग-अलग हो सकता है. 

क्या कम खाने से यह ठीक हो जाता है?

दूसरा आम मिथक है कि “कम खाओ और ज्यादा चलो-फिरो” ही इसका समाधान है. सलोनी पालीवाल बताती हैं कि यह सलाह पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन मोटापे जैसी जटिल और लंबे समय तक चलने वाली बीमारी के इलाज के लिए पर्याप्त भी नहीं है. भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन और शरीर की मेटाबॉलिज्म इस प्रक्रिया को कहीं अधिक मुश्किल बनाते हैं.

क्या वजन कम न होना आपकी जिम्मेदारी है?

इसी तरह कई लोग मानते हैं कि वजन कम न कर पाने के पीछे इच्छाशक्ति की कमी जिम्मेदार होती है. जबकि घ्रेलिन, लेप्टिन, इंसुलिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन भूख और खाने की इच्छा को प्रभावित करते हैं. ऐसे में केवल और मेहनत करो कहना समस्या का समाधान नहीं है. एक्सपर्ट का कहना है कि हर मोटापा बाहर से दिखाई नहीं देताच कई लोगों में शरीर के अंदर अंगों के आसपास चर्बी जमा होती है, जिसे विसरल ओबेसिटी कहा जाता है. दक्षिण एशियाई आबादी में यह जोखिम विशेष रूप से अधिक देखा जाता है. इसलिए केवल वजन या बीएमआई के आधार पर स्वास्थ्य का आकलन करना पर्याप्त नहीं माना जाता. 

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क्या एक बार वजन घटने के बाद दोबारा बढ़ सकता है?

एक और बड़ी गलतफहमी यह है कि एक बार वजन घट जाने के बाद वह हमेशा कम बना रहता है. रिसर्च बताते हैं कि शरीर अपने पुराने वजन को बनाए रखने की कोशिश करता है, जिससे समय के साथ वजन दोबारा बढ़ने की संभावना रहती है. इसी वजह से मोटापे के लिए लंबे समय तक मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ सकती है. जीएलपी-1 दवाओं जैसे सेमाग्लूटाइड और टिरजेपाटाइड को लेकर भी कई मिसकनसेप्शन हैं. हालांकि क्लीनिकल ट्रायल्स में इन दवाओं ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं और ये भूख तथा मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में मदद करती हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, इनका उपयोग आसान रास्ता चुनना नहीं, बल्कि सही तरीके से इलाज करवाना होता है. 

क्या मोटापा कोई बीमारी है?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन और दुनिया की प्रमुख एंडोक्राइनोलॉजी संस्थाएं मोटापे को एक क्रॉनिक बीमारी मानती हैं. यह टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, स्लीप एपनिया और कई प्रकार के कैंसर जैसी 200 से अधिक बीमारियों से जुड़ी हुई है. इसलिए मोटापे को केवल वजन बढ़ने की समस्या मानना सही नहीं है, बल्कि इसे एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के रूप में समझना और समय रहते उपचार लेना जरूरी है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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