ये हैं दुनिया की सबसे अजीब-ओ-गरीब बीमारियां, इनसे जूझने वालों की हालत सुनकर उड़ जाएंगे होश

ये हैं दुनिया की सबसे अजीब-ओ-गरीब बीमारियां, इनसे जूझने वालों की हालत सुनकर उड़ जाएंगे होश


Most Unusual Diseases In The World: पिछले कुछ साल में तरह-तरह की बीमारी निकलने लगी हैं.  जब बीमारियों की बात होती है तो सबसे पहले हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, माइग्रेन जैसी लाइफस्टाइल बीमारियां या फिर कैंसर और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियां दिमाग में आती हैं. लेकिन इनके अलावा दुनिया में कुछ ऐसी बेहद दुर्लभ बीमारियां भी हैं, जो कई साल से लोगों की जान ले रही हैं या गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रही हैं. आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ अजीब और रेयर बीमारियों के बारे में, जिनके बारे में ज्यादातर लोग शायद जानते भी नहीं होंगे.

रेयर बीमारी क्या होती है?

रेयर बीमारियां वे होती हैं, जो सामान्य आबादी के बहुत ही कम लोगों को प्रभावित करती हैं. इनमें से कई बीमारियों का आज तक कोई पक्का इलाज नहीं मिल पाया है. जहां आम बीमारियों का इलाज बड़े अस्पतालों में संभव होता है, वहीं इन रेयर बीमारियों की पहचान और इलाज बेहद मुश्किल होता है. कई मामलों में ये बीमारियां जानलेवा भी साबित हो सकती हैं.

RPI डेफिशिएंसी

इसे दुनिया की सबसे दुर्लभ बीमारी माना जाता है. यह बीमारी शरीर में मौजूद एक अहम एंजाइम की कमी के कारण होती है, जिससे मांसपेशियों में अकड़न, दौरे और दिमाग के सफेद हिस्से को नुकसान पहुंच सकता है. अब तक इस बीमारी का सिर्फ एक ही मामला सामने आया है, जिसकी पहचान साल 1984 में हुई थी.

फील्ड्स डिजीज

यह एक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है, जिसके अब तक सिर्फ दो ही मामले सामने आए हैं, वह भी जुड़वा बहनों में. इस बीमारी में मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. मेडिकल एक्सपर्ट्स अभी भी इस पर रिसर्च कर रहे हैं.

हचिंसन-गिलफोर्ड प्रोजेरिया सिंड्रोम

इस बीमारी में बच्चों में समय से पहले बुढ़ापा आ जाता है. महज 2 साल के बच्चे भी बुजुर्ग जैसे दिखने लगते हैं। झुर्रीदार त्वचा, आंखों का उभरा होना और बालों का झड़ना इसके प्रमुख लक्षण हैं. यह बीमारी बेहद दुर्लभ है और इसका अब तक कोई इलाज नहीं है.

मेथेमोग्लोबिनेमिया

इस बीमारी में खून का रंग नीला दिखाई देता है. शरीर में एक खास तरह के हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाने से त्वचा, होंठ और नाखून नीले पड़ जाते हैं.

एक्वाजेनिक अर्टिकेरिया

खाने की चीजों से एलर्जी आम बात है, लेकिन पानी से एलर्जी होना बेहद रेयर है. इस बीमारी में पानी के संपर्क में आते ही त्वचा पर खुजली और लाल चकत्ते पड़ जाते हैं. ऐसे लोग पसीने, बारिश और बर्फ से भी एलर्जिक हो सकते हैं.

फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम

इस बीमारी में व्यक्ति अचानक अपनी सामान्य भाषा को अलग लहजे में बोलने लगता है. यह समस्या अक्सर दिमाग में चोट लगने के बाद होती है, जिससे बोलने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है.

स्टोन मैन डिजीज

इस बेहद दुर्लभ बीमारी में मांसपेशियां धीरे-धीरे हड्डियों में बदलने लगती हैं. समय के साथ व्यक्ति का शरीर जकड़ जाता है. हालांकि दिल, जीभ और आंखों की मांसपेशियां इससे प्रभावित नहीं होतीं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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दिनभर रजाई में रहते हैं फिर भी गरम नहीं होते पैर, कहीं ये बीमारी तो नहीं?

दिनभर रजाई में रहते हैं फिर भी गरम नहीं होते पैर, कहीं ये बीमारी तो नहीं?


सर्दियों के मौसम में जब भी हम अपने बिस्तर पर जाते हैं तो अपने पूरे शरीर को रजाई या कंबल से मुंह से लेकर पैरों तक ढक लेते हैं. साथ ही कमरे को पूरी तरह बंद कर हीटर भी चला लेते हैं, ताकि किसी भी तरह की ठंड आप तक न पहुंचे. लेकिन अगर रजाई में ढके रहने और हीटर चलने के बाद भी आपके पैर ठंडे रहते हैं, तो यह चिंता का विषय है.

अगर आपने पैरों में गर्म जुराबें भी पहन रखी हैं और फिर भी पैर ठंडे हैं, तो यह कई बीमारियों के संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है. इस लेख के जरिए हम आपको बताएंगे कि आपको किन दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

ब्लड सर्कुलेशन कमजोर होना

अगर सर्दियों में रजाई या गर्म जुराबें पहनने के बाद भी आपके पैर ठंडे रहते हैं, तो इसका कारण ब्लड सर्कुलेशन हो सकता है. जब पैरों की नसों में खून सही से नहीं पहुंच पाता, तो उस हिस्से में गर्मी नहीं बन पाती. इसी वजह से पैरों में ठंडक बनी रहती है. अगर पैरों में खून का सर्कुलेशन ठीक नहीं है, तो सुन्नपन, दर्द और भारीपन जैसी शिकायतें हो सकती हैं, जो शरीर के लिए खतरनाक हैं.

खराब कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना

खून में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) की मात्रा बढ़ने पर ठंड से बचाव के बावजूद पैर ठंडे रह सकते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नसों में कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है, जिससे ब्लड का सर्कुलेशन धीमा हो जाता है. सबसे खतरनाक बात यह है कि इसकी जानकारी जल्दी नहीं मिलती. जब नसें ज्यादा ब्लॉक हो जाती हैं, तब जाकर बीमारी के लक्षण दिखते हैं. अगर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया है, तो हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

डायबिटीज का असर

डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की पैरों की नसें कमजोर हो जाती हैं. इससे खून की नलियां सख्त और संकरी हो जाती हैं. ठंड के मौसम में ये नसें और ज्यादा सिकुड़ जाती हैं. जब पैरों तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड का सर्कुलेशन नहीं हो पाता, तो ठंडे पैरों की समस्या शुरू हो जाती है.
 

हीमोग्लोबिन की कमी और एनीमिया

अगर खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है, तो एनीमिया जैसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है. जब शरीर में खून की कमी होती है, तो शरीर पर्याप्त मात्रा में गर्मी नहीं बना पाता. एनीमिया की वजह से शरीर में ठंडक बनी रहती है और कमजोरी, हाथ-पैरों में सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.

यह भी पढ़ें: Fatty Liver Disease: चेहरा दे रहा है फैटी लिवर का अलर्ट? नजरअंदाज करने से पहले जान लें ये 5 संकेत

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

 

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शराब का असर महिलाओं पर ज्यादा क्यों होता है? एक्सपर्ट्स ने बताई असली वजह

शराब का असर महिलाओं पर ज्यादा क्यों होता है? एक्सपर्ट्स ने बताई असली वजह


महिलाओं के शरीर में पानी की मात्रा पुरुषों की तुलना में कम होती है और शरीर में फैट ज्यादा होता है. शराब पानी में घुलती है. इसलिए जब शरीर में पानी कम होता है, तो शराब जल्दी ब्लड में मिल जाती है और असर तेज होता है. अगर एक महिला और एक पुरुष एक ही मात्रा में शराब पीते हैं, तो महिला का शरीर जल्दी नशे की स्थिति में पहुंचता है क्योंकि उसके शरीर में शराब को घोलने के लिए पर्याप्त पानी नहीं हो.

हमारे शरीर में एक एंजाइम होता है, Alcohol Dehydrogenase (ADH), जो शराब को टूटने और पचने में मदद करता है. महिलाओं में यह एंजाइम कम मात्रा में पाया जाता है. इसका मतलब यह है कि शराब धीरे-धीरे टूटती है और लंबे समय तक असर दिखाती है.

हमारे शरीर में एक एंजाइम होता है, Alcohol Dehydrogenase (ADH), जो शराब को टूटने और पचने में मदद करता है. महिलाओं में यह एंजाइम कम मात्रा में पाया जाता है. इसका मतलब यह है कि शराब धीरे-धीरे टूटती है और लंबे समय तक असर दिखाती है.

Published at : 04 Jan 2026 10:02 AM (IST)

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न महंगा जिम और न ही फिटनेस कोच, सिर्फ ChatGPT की मदद से 3 महीने में घटा लिया 27 किलो वजन

न महंगा जिम और न ही फिटनेस कोच, सिर्फ ChatGPT की मदद से 3 महीने में घटा लिया 27 किलो वजन


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लोगों के लिए किस प्रकार काम आ रहा है, यह आप इस लड़के की स्टोरी से समझ सकते हैं, जिसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके बिना किसी महंगे जिम और फिटनेस कोच के अपना वजन कम किया. आज AI का उपयोग हम अपनी जरूरतों को पूरा करने और अपने कामों को तेजी और कम गलतियों के साथ करने के लिए कर सकते हैं. यह हमारी जिंदगी और डेली रूटीन का एक अहम हिस्सा बन चुका है. इसका इस्तेमाल गलत कामों के बजाय अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भी किया जा सकता है.

ChatGPT से 3 महीने में घटाया 27 किलो वजन

AI की मदद से वजन कम करने की यह कहानी हसन नाम के एक टेक प्रोफेशनल की है, जिन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी स्टोरी शेयर की. हसन ने बताया कि उन्होंने चैटजीपीटी (ChatGPT) का इस्तेमाल करके सिर्फ 3 महीने में करीब 27 किलो वजन कम किया. उन्होंने साफ कहा कि यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि मेहनत और अनुशासन का नतीजा है. हसन ने यह भी बताया कि उन्होंने कोई चमत्कारी दवा नहीं ली, बल्कि ChatGPT द्वारा बनाए गए एक सटीक सिस्टम को फॉलो किया. उन्होंने चैटजीपीटी (ChatGPT) को अपने “पर्सनल फिटनेस कोच” की तरह इस्तेमाल किया. उन्होंने ऐसे प्रॉम्प्ट्स डिजाइन किए, जो उनकी बॉडी टाइप और जरूरतों के अनुसार डाइट और डेली रूटीन तैयार कर सकें. हसन ने यह भी साफ किया कि उन्होंने न तो कोई महंगी जिम मेंबरशिप ली और न ही किसी पर्सनल फिटनेस कोच की मदद ली.

वजन कम करने के लिए AI प्रॉम्प्ट्स

हसन ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे प्रॉम्प्ट्स भी शेयर किए हैं, जिनकी मदद से कोई भी व्यक्ति चैटजीपीटी (ChatGPT) का इस्तेमाल करके अपने वजन को कम कर सकता है. यह तरीका हेल्थ के लिए काफी उपयोगी बताया जा रहा है. कुछ जरूरी प्रॉम्प्ट्स इस आर्टिकल में दिए जा रहे हैं. बाकी प्रॉम्प्ट्स देखने के लिए आप उनके ऑफिशियल X अकाउंट @Ubermenscchh पर विजिट कर सकते हैं.

बॉडी एनालिसिस और गोल सेटिंग

  • प्रॉम्प्ट:
    “मेरा मौजूदा वजन: [किलो में लिखें],
    लंबाई: [सेमी में लिखें],
    उम्र: [उम्र लिखें],
    जेंडर: [पुरुष/महिला]।
    मेरा लक्ष्य फैट कम करना और लीन मसल बनाना है।
    एक पर्सनल ट्रेनर और न्यूट्रिशनिस्ट की तरह काम करें।
    जिम के बिना किया जा सकने वाला, एक रियलिस्टिक 12 हफ्तों का फिटनेस और न्यूट्रिशन प्लान तैयार करें।”

कस्टमाइज्ड वीकली मील प्लान

  • प्रॉम्प्ट:
    “1800 कैलोरी प्रतिदिन के आधार पर 7 दिनों का मील प्लान तैयार करें, जिसमें
    कम से कम 120 ग्राम प्रोटीन हो
    प्रोसेस्ड कार्ब्स बहुत कम हों
    सामग्री सस्ती और आसानी से पकाई जा सकने वाली हो
    हर दिन के मैक्रोज़ (प्रोटीन, कार्ब्स, फैट) शामिल करें और पूरी ग्रॉसरी लिस्ट भी दें।
    मैं ये चीजें नहीं खाता/खाती: [यहां वे चीजें लिखें जिन्हें आप नहीं खाते]।”

यह भी पढ़ें: शैंपेन की बोतलों पर ऐसा क्या चिपका था, जिससे स्विस बार में लगी थी भयंकर आग?

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