ठंड में हड्डियां करने लगती हैं कट-कट की आवाज, ये विंटर डाइट लेंगे तो होंगी मजबूत

ठंड में हड्डियां करने लगती हैं कट-कट की आवाज, ये विंटर डाइट लेंगे तो होंगी मजबूत


तिल जैसे छोटे बीज कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और विटामिन D से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी हैं. इन्हें सलाद, चटनी या पराठों में जोड़कर आसानी से रोज की रोजमर्रा की डाइट में शामिल किया जा सकता है.



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ठंड में नीली पड़ जाती हैं कुछ लोगों के अंगुलियां, जानें शरीर में किस चीज की होती है कमी?

ठंड में नीली पड़ जाती हैं कुछ लोगों के अंगुलियां, जानें शरीर में किस चीज की होती है कमी?


सर्दियों का मौसम शुरू होते ही कई लोगों की उंगलियां अचानक सफेद, नीली या बैंगनी पड़ने लगती हैं. इसके साथ झनझनाहट, दर्द और सूजन की समस्या भी होने लगती है. अक्सर लोग इस सामान्य ठंड समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह रेनाड्स सिंड्रोम का संकेत हो सकता है. यह समस्या खास तौर पर 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है.

खासकर उन लोगों में जो ठंडा और गर्म पानी के बीच लगातार कम करते हैं या लंबे समय तक ठंडे माहौल में रहते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ठंड में अगर आपकी उंगलियां भी नीली पड़ जाती है तो यह शरीर में किस चीज की कमी से होती है.

ठंड में उंगलियां क्यों पड़ जाती है नीली?

रेनाड्स सिंड्रोम में हाथ और पैरों की उंगलियों की धमनियां ठंड पड़ते ही सिकुड़ जाती है. इस वजह से उंगलियाें तक प्योर खून और ऑक्सीजन पहुंचाना कम हो जाता है. वहीं जब ऑक्सीजन की कमी होती है तो उंगलियां पहले सफेद फिर नीली और बाद में लाल पड़ने लगती है. वहीं ब्लड सर्कुलेशन रुकने पर उंगलियों में सुन्नपन, जलन और दर्द होता है. इसके अलावा बार-बार ऐसा होने पर उंगलियों में घाव भी बन सकते हैं. यह समस्या अचानक तनाव में आने पर भी ट्रिगर हो सकती है और कुछ लोगों को 60 से 70 डिग्री फारेनहाइट जैसी सामान्य ठंड में भी इसके लक्षण दिखने लगते हैं.

किन लोगों में रहता है सबसे ज्यादा खतरा?

उंगलियां नीली पड़ने का खतरा सबसे ज्यादा होटल और खानपान इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों, वाइब्रेटिंग टूल्स चलने वाले मजदूर, ठंडा-गर्म पानी में लगातार हाथ डालने वाले लोग और घर का काम करने वाली महिलाओं को ज्यादा होता है. डॉक्टरों के अनुसार सर्दियों में ओपीडी में करीब 60 प्रतिशत तक मरीज इसी समस्या के लक्षणों के साथ पहुंचते हैं. लापरवाही बढ़ने पर उंगलियां काली पड़ सकती है और गंभीर मामलों में उत्तक भी नष्ट होने लगते हैं.

कैसे करें इससे बचाव?

रेनाड्स से बचाव करने के लिए कोशिश करें कि आप ज्यादा ठंडे पानी के संपर्क में न आएं, घर में नंगे पैर न चले, फ्रिज में हाथ न डालें और उसके सामने खड़े न हो. इसके अलावा डिटर्जेंट या कपड़े धोने वाले साबुन को सीधे हाथ में न लगाए, ऊनी ग्लव्स और मोजे पहन कर रखें और बर्तन धोते समय रबड़ के ग्लव्स जरूर पहनें. दरअसल रेनाड्स का शुरुआती इलाज दवाओं से किया जा सकता है लेकिन कुछ मामलों में बायोफीडबैक टेक्निक से हाथों का तापमान कंट्रोल किया जाता है. वहीं अगर दवाओं से राहत न मिले तो समस्या बढ़ने पर सर्जरी भी की जाती है. 

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दिनभर लैपटॉप पर झुके रहते हैं? फिजियोथेरेपिस्ट से जानें ऑफिस में काम करने के लिए आसान टिप्स

दिनभर लैपटॉप पर झुके रहते हैं? फिजियोथेरेपिस्ट से जानें ऑफिस में काम करने के लिए आसान टिप्स


आज की हेक्टिक लाइफ में हम सभी कहीं न कहीं अपने शरीर की केयर करना भूल जाते हैं. खासकर जो लोग ऑफिस में घंटों कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठकर काम करते हैं, वे अक्सर कमर दर्द, गर्दन में जकड़न, पीठ में खिंचाव और जोड़ों की समस्याओं से परेशान रहते हैं. लगातार बैठकर काम करने की वजह से न सिर्फ शारीरिक थकान होती है, बल्कि धीरे-धीरे यह आदत कई बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स को बड़ा दे सकती है. ऐसे में बहुत जरूरी हो जाता है कि हम अपनी डेली लाइफ में ऐसी आदतें शामिल करें, जो हमारे शरीर को एक्टिव बनाए रखें. ऐसे में फिजियोथेरेपी एक ऐसा ही आसान, सेफ और कारगर तरीका है जो न सिर्फ चोट या दर्द में राहत देता है, बल्कि फ्यूचर में होने वाली बीमारियों से भी बचाता है. फिजियोथेरेपी सिर्फ इलाज का तरीका नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी लाइफस्टाइल है जिसे अपनाकर लंबे समय तक हेल्दी और एक्टिव रह सकते हैं. तो चलिए आज हम आपको फिजियोथेरेपिस्ट की ऑफिस में बैठकर काम करने वालों के लिए आसान टिप्स बताते हैं. 

क्या है फिजियोथेरेपी और क्यों है जरूरी?

फिजियोथेरेपी एक मेडिकल प्रैक्टिस है जिसमें दवाइयों की जगह एक्सरसाइज, मसाज, स्ट्रेचिंग और सही बॉडी पॉश्चर की मदद से शरीर को ठीक किया जाता है. यह उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जो लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठे रहते हैं, कंप्यूटर या लैपटॉप पर झुककर काम करते हैं, लगातार मोबाइल या टैबलेट यूज करते हैं, बुजुर्ग हैं या जिनकी हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं, किसी चोट, फ्रैक्चर या सर्जरी से रिकवरी कर रहे हैं. ऐसे में फिजियोथेरेपी की मदद से मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है, हड्डियां मजबूत होती हैं, शरीर की मोबिलिटी बेहतर होती है, मेंटल स्ट्रेस भी कम होता है, चोट या सर्जरी के बाद जल्दी रिकवरी होती है. 

ऑफिस में काम करने वालों के लिए आसान और असरदार फिजियोथेरेपी टिप्स

1. हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें – लंबे समय तक बैठना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है. ऐसे में हर आधे घंटे में 2–3 मिनट का छोटा ब्रेक लें, खड़े हों, थोड़ा चलें या स्ट्रेच करें. 

2. सही बैठने का तरीका अपनाएं – ऑफिस में काम करने के लिए बैठते समय पीठ सीधी रखें, कंधे ढीले और रिलैक्स रखें, पैरों को जमीन पर सीधा रखें, साथ ही आपकी स्क्रीन आंखों के सामने हो, ताकि गर्दन न झुके. 

3. हल्की स्ट्रेचिंग करें – काम के बीच-बीच में हाथ, गर्दन, पीठ और पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग करें. इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और जकड़न दूर होती है. 

4. सुबह 20–30 मिनट की हल्की एक्सरसाइज – दिन की शुरुआत हल्की एक्सरसाइज और योग से करें. इससे शरीर में फ्लेक्सिबिलिटी आती है और दिनभर एक्टिव नेस बनी रहती है. 

5. नींद और आराम भी जरूरी है – शरीर को रिकवर करने के लिए 7–8 घंटे की नींद बेहद जरूरी है. सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप का यूज कम करें. 

यह भी पढ़ें : Kidney Disease Skin Signs: ड्राई या इची हो रही स्किन तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना डैमेज हो जाएगी आपकी किडनी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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हाथों-नाखूनों में दिखने वाले ये 5 बदलाव हो सकते हैं गंभीर बीमारी का संकेत, डॉक्टर्स ने दी चेतावनी

हाथों-नाखूनों में दिखने वाले ये 5 बदलाव हो सकते हैं गंभीर बीमारी का संकेत, डॉक्टर्स ने दी चेतावनी


क्लबसिंग एक ऐसा बदलाव है, जिसमें उंगलियों के सिर गोल हो जाते हैं और नाखून आगे की ओर ज्यादा घुमावदार दिखने लगते हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा तब होता है जब शरीर मेगाकैरियोसाइट्स फेफड़ों को बाईपास कर उंगलियां तक पहुंच जाते हैं और वहां ग्रोथ फैक्टर रिलीज करते हैं. यह बदलाव अक्सर क्रॉनिक लंग डिजीज जैसे फेफड़ों का कैंसर सिस्टिक फाइब्रोसिस, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, ब्रोन्किइक्टेसिस या लंबे समय तक कम ऑक्सीजन वाली स्थितियों जैसे हार्ट डिजीज में देखा जाता है. ऐसे में अगर उंगलियां अचानक मोटी और गोल लगने लगे तो तुरंत डॉक्टर से जांच करनी चाहिए. 

इसके अलावा कोइलोनिखिया यानी स्पून नेल्स आयरन डेफिशियेंसी एनीमिया का शुरुआती संकेत होता है. इसमें नाखून इतने पतले हो जाते हैं कि उनकी सतह अंदर की ओर धंस जाती है और चम्मच जैसी दिखाई देती है. इसे लेकर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह आयरन की कमी, भारी पीरियड्स, गर्भावस्था, पोषण की कमी या फिर किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. खास बात यह है कि यह नाखूनों में बदलाव कई बार अन्य लक्षणों से महीनाें पहले दिखाई देते हैं.

इसके अलावा कोइलोनिखिया यानी स्पून नेल्स आयरन डेफिशियेंसी एनीमिया का शुरुआती संकेत होता है. इसमें नाखून इतने पतले हो जाते हैं कि उनकी सतह अंदर की ओर धंस जाती है और चम्मच जैसी दिखाई देती है. इसे लेकर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह आयरन की कमी, भारी पीरियड्स, गर्भावस्था, पोषण की कमी या फिर किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. खास बात यह है कि यह नाखूनों में बदलाव कई बार अन्य लक्षणों से महीनाें पहले दिखाई देते हैं.

Published at : 12 Dec 2025 10:12 AM (IST)

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इडली से लेकर पोहे तक… सुबह का कौन सा नाश्ता गट हेल्थ के लिए सबसे अच्छा?

इडली से लेकर पोहे तक… सुबह का कौन सा नाश्ता गट हेल्थ के लिए सबसे अच्छा?


सुबह का नाश्ता यानी ब्रेकफास्ट पूरे दिन की भागदौड़, काम और मेहनत के लिए शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है. यह आंतों को तंदरुस्त और स्वस्थ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आंत (गट) सिर्फ पाचन का काम नहीं करती, बल्कि इंसान की इम्युनिटी, मूड, ऊर्जा और पूरे मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है. अगर सुबह का नाश्ता संतुलित और फाइबर-युक्त हो, तो यह गट माइक्रोबायोम को मजबूत बनाता है, पाचन को आसान करता है और पेट की समस्याओं जैसे गैस, कब्ज, एसिडिटी को कम करता है. डॉक्टरों के अनुसार सुबह का पहला भोजन हल्का, पोषक और गट को शांत रखने वाला होना चाहिए. नीचे दिए गए कुछ नाश्ते डॉक्टरों के अनुसार गट-फ्रेंडली माने जाते हैं. इन्हें खाने से फाइबर, विटामिन और जरूरी पोषक तत्वों की भरपाई हो जाती है.

इडली, सांभर और नारियल की चटनी – परफेक्ट गट-फ्रेंडली नाश्ता

इडली, सांभर और नारियल की चटनी आंतों को मजबूत और तंदुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. दक्षिण भारत का यह प्रमुख नाश्ता गट हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसका बैटर चावल और दाल को फर्मेंट (खमीर) करके बनाया जाता है. फर्मेंटेशन प्रोबायोटिक्स पैदा करता है, जो आंत में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाकर पाचन को मजबूत करते हैं. सांभर में दाल, सब्जियाँ और मसाले होते हैं, जो फाइबर, पौधे आधारित प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रदान करते हैं, जिससे पेट हल्का रहता है और ऊर्जा स्तर स्थिर रहता है.

होल-ग्रेन एवोकाडो टोस्ट – फाइबर और हेल्दी फैट का बेहतरीन कॉम्बो

होल-ग्रेन एवोकाडो टोस्ट आंत की सेहत के लिए एक बढ़िया नाश्ता माना जाता है क्योंकि इसमें फाइबर, हेल्दी फैट और एंटीऑक्सीडेंट्स का सही मिश्रण मिलता है. होल-ग्रेन ब्रेड पेट को लंबे समय तक भरा रखती है और पाचन को बेहतर बनाती है. यह ब्रेकफास्ट शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करता है.

मूंग दाल चीला – हल्का, प्रोटीन से भरपूर और जल्दी पचने वाला नाश्ता

मूंग दाल चीला ब्रेकफास्ट की उन डिशों में शामिल है जिसे बड़े और बच्चे दोनों पसंद करते हैं. यह आंत की सेहत के लिए बेहतरीन माना जाता है क्योंकि यह हल्का होने के साथ-साथ प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है. भिगोई हुई मूंग दाल को पीसकर बनने वाला यह चीला आसानी से पच जाता है और पेट पर भारीपन नहीं डालता. इसमें मौजूद प्रोटीन सुबह की ऊर्जा बढ़ाता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता, जबकि फाइबर आंत की गति सुधारता है और कब्ज में राहत देता है.

पोहा – गट हेल्थ के लिए एक आसान और हेल्दी विकल्प

पोहा उत्तर भारत में सुबह के नाश्ते के लिए प्रमुख और हेल्दी विकल्प है. अगर आप सुबह पोहा खाते हैं तो यह शरीर को जरूरी फाइबर देता है और पेट फूलना या अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. अगर पोहे में मूंगफली मिलाकर खाया जाए, तो यह और भी फायदेमंद होता है क्योंकि मूंगफली आंत की सेहत को बेहतर बनाती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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जोड़ों की उम्र कम कर देती है रोजाना की ये 8 गलतियां, डॉक्टर्स ने बताया किन आदतों को छोड़ना जरूरी

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एक्सपर्ट्स बताते हैं कि लगातार होने वाला घुटनों का दर्द शरीर का सिग्नल होता है. वहीं अक्सर लोग इसे नजरअंदाज करते हैं, जिससे मामूली समस्या आगे जाकर गंभीर चोट या सूजन का कारण बन सकती है.



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