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Why Headaches Happen Even With Normal Blood Pressure: अक्सर लोग तब राहत महसूस करते हैं जब हेल्थ चेकअप के दौरान उनका ब्लड प्रेशर सामान्य निकलता है. उन्हें लगता है कि हार्ट पूरी तरह स्वस्थ है और चिंता की कोई बात नहीं है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि केवल एक बार की सामान्य रीडिंग हमेशा पूरी सच्चाई नहीं बताती. कई बार ऐसा होता है कि क्लिनिक में बीपी सामान्य दिखता है, जबकि दिनभर के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव होता रहता है. यही कारण है कि कुछ लोगों को बार-बार सिरदर्द की शिकायत होती है, जबकि जांच में सब कुछ सामान्य नजर आता है.
क्या होते हैं इसके पीछे कारण?
दरअसल ब्लड प्रेशर एक स्थिर संख्या नहीं है. यह दिनभर में कई कारणों से बदलता रहता है. तनाव, नींद की कमी, खानपान, फिजिकल एक्टिविटी और भावनात्मक स्थिति भी इसे प्रभावित करती हैं. कुछ मामलों में लोगों को मास्क्ड हाइपरटेंशन नाम की स्थिति हो सकती है. इसमें डॉक्टर के पास जांच के समय बीपी सामान्य रहता है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में यह काफी बढ़ सकता है. लंबे समय तक ऐसा होने पर दिल और रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ने लगता है.
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एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार होने वाला सिरदर्द कई बार इसी छिपे हुए हाई ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकता है. कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गीतिश गोविल के अनुसार कई लोग यह मान लेते हैं कि सामान्य बीपी का मतलब है कि उन्हें हाइपरटेंशन का खतरा नहीं है. लेकिन कुछ लोगों में दिनभर ब्लड प्रेशर बढ़ने और घटने की समस्या होती रहती है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है.
ये चीजें होती हैं जिम्मेदार
ऐसी स्थिति के पीछे कई रोजमर्रा की आदतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं. ज्यादा तनाव, कम नींद, ज्यादा नमक वाला भोजन, मोटापा, धूम्रपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं. कई बार देखने में पूरी तरह स्वस्थ लगने वाले लोगों में भी यह समस्या धीरे-धीरे विकसित हो सकती है. ब्लड प्रेशर में अचानक बढ़ोतरी होने पर सिरदर्द का अनुभव थोड़ा अलग हो सकता है. कई लोगों को सुबह उठते ही सिर के पीछे भारीपन महसूस होता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बीपी बढ़ने पर दिमाग की ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ता है, जिससे दर्द की अनुभूति हो सकती है.
ब्लड प्रेशर की जांच करते रहना जरूरी
डॉक्टरों के मुताबिक शरीर कई बार छोटे-छोटे संकेत देता है, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं. सुबह के समय सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, हल्की गतिविधि में सांस फूलना या बिना वजह थकान महसूस होना भी ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव के संकेत हो सकते हैं. इसलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच करते रहना जरूरी है. केवल एक बार की जांच के बजाय नियमित मॉनिटरिंग से सही स्थिति समझ में आती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Why Do Eyes Feel Dry Without Screen Time: आजकल कई लोग आंखों में जलन, सूखापन या किरकिराहट महसूस करने की शिकायत करते हैं. अक्सर इसका कारण मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन को माना जाता है. लेकिन आंखों के डॉक्टरों का कहना है कि कई ऐसे मरीज भी क्लिनिक पहुंच रहे हैं जो ज्यादा स्क्रीन का इस्तेमाल नहीं करते, फिर भी उनकी आंखें सूखी और थकी हुई महसूस होती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह समस्या क्यों बढ़ रही है.
क्यों होती है इस तरह की दिक्कत?
दरअसल, हमारी आंखों की सतह पर एक पतली परत होती है जिसे टियर फिल्म कहा जाता है. यही परत आंखों को नम बनाए रखती है और उन्हें आरामदायक महसूस कराती है. जब यह संतुलन बिगड़ जाता है तो आंखों में सूखापन, खुजली या जलन जैसी परेशानी होने लगती है. विशेषज्ञों का कहना है कि आज की लाइफस्टाइल में कई ऐसी आदतें हैं जो धीरे-धीरे इस संतुलन को प्रभावित करती हैं.
भारत में इतने लोगों को होती है दिक्कत
इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक उत्तर भारत में लगभग 32 प्रतिशत लोगों को ड्राई आई की समस्या का सामना करना पड़ता है. रिसर्चर का मानना है कि इसके पीछे एनवायरमेंट, उम्र और रोजमर्रा की लाइफस्टाइल बड़ी भूमिका निभाते हैं. ड्राई आई सिंड्रोम अब दुनिया भर में आंखों से जुड़ी आम समस्याओं में से एक बन चुका है. यह स्थिति तब पैदा होती है जब आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनते या बनने वाले आंसू जल्दी सूख जाते हैं. आंसू सिर्फ पानी नहीं होते, बल्कि उनमें तेल, म्यूकस और कुछ प्रोटीन भी होते हैं जो आंखों को इंफेक्शन से बचाते हैं और उन्हें चिकना बनाए रखते हैं. जब यह मिक्स असंतुलित हो जाता है तो आंखों में जलन और असहजता महसूस होने लगती है.
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क्या होते हैं कारण?
शहरों में बढ़ता प्रदूषण और एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल भी आंखों पर असर डालता है. एयर कंडीशनिंग से हवा में नमी कम हो जाती है, जिससे आंसू जल्दी सूखने लगते हैं. इसके अलावा धूल और प्रदूषण भी आंखों में जलन बढ़ा सकते हैं. एक और अहम कारण है पलक झपकाने की आदत का कम हो जाना. जब हम किसी काम में बहुत ज्यादा ध्यान लगाते हैं, जैसे पढ़ना, लिखना या लंबी ड्राइव करना, तो पलक झपकाने की गति धीमी हो जाती है. इससे आंखों की सतह पर आंसुओं की परत ठीक से नहीं फैल पाती और सूखापन महसूस होने लगता है. एलर्जी भी कई बार आंखों में जलन और खुजली का कारण बन सकती है. पॉलिन, धूल, फफूंदी या पालतू जानवरों के बाल जैसी चीजें आंखों के आसपास की नाजुक त्वचा में सूजन पैदा कर सकती हैं.
कैसे कर सकते हैं बचाव?
इसके अलावा शरीर में पानी की कमी, नींद पूरी न होना या विटामिन A, D और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्वों की कमी भी आंखों के सूखेपन को बढ़ा सकती है. इसलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि पर्याप्त पानी पिएं, आंखों को समय-समय पर आराम दें और जरूरत पड़ने पर आंखों की जांच जरूर कराएं. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Everest Masala Lab Test Report: फेमस भारतीय मसाला ब्रांड एवरेस्ट के कुछ उत्पादों की क्वालिटी को लेकर हाल ही में सोशल मीडिया पर काफी चर्चा देखने को मिली. यह मामला तब सामने आया जब ट्रस्टिफाइड नाम के एक यूट्यूब चैनल ने 1 मार्च 2026 को एक वीडियो जारी किया, जिसमें दावा किया गया कि एवरेस्ट के कुछ मसाला उत्पाद लैब परीक्षण में तय मानकों पर खरे नहीं उतरे. वीडियो के अनुसार चैनल ने ये मसाले डी-मार्ट स्टोर से खरीदे और फिर उनके नमूनों को लैब में जांच के लिए भेजा.
तय मानकों को पूरा नहीं करते
वीडियो में बताया गया कि हर मसाले के तीन-तीन पैकेट खरीदे गए थे, जिनमें से एक पैकेट को परीक्षण के लिए भेजा गया. जिन उत्पादों की जांच की गई उनमें एवरेस्ट गरम मसाला, एवरेस्ट किचन किंग मसाला, एवरेस्ट कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर और एवरेस्ट मीट मसाला शामिल थे. चैनल का कहना था कि इन मसालों की जांच इसलिए कराई गई ताकि यह पता चल सके कि वे इंडियन फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तय सुरक्षा सीमाओं को पूरा करते हैं या नहीं.
क्या निकला रिजल्ट में?
वीडियो में साझा किए गए नतीजों के अनुसार एवरेस्ट गरम मसाला के नमूने में दो कीटनाशक तय सीमा से अधिक पाए गए. इनका नाम एसेटामिप्रिड और एजोक्सीस्ट्रोबिन बताया गया. इसके अलावा नमूने में एंटरोबैक्टीरिएसी परिवार के बैक्टीरिया की मात्रा भी अधिक बताई गई.
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यह मुद्दा बाद में सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी चर्चा में आ गया. एक उपयोगकर्ता ने एआई आधारित चैटबॉट ग्रोक से एंटरोबैक्टीरिएसी बैक्टीरिया के बारे में सवाल पूछा. उपयोगकर्ता ने बताया कि इस बैक्टीरिया समूह में ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे कई बैक्टीरिया शामिल होते हैं, जो अक्सर खाद्य पदार्थों के दूषित होने से जुड़े पाए जाते हैं. जवाब में ग्रोक ने बताया कि एंटरोबैक्टीरिएसी परिवार के कई बैक्टीरिया पेट से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. यदि दूषित भोजन का सेवन किया जाए तो दस्त, उल्टी, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट का कहना है कि मसालों में एंटरोबैक्टीरिएसी की मौजूदगी कई बार सफाई या प्रोसेसिंग से जुड़ी समस्याओं की ओर संकेत करती है. इसका मतलब यह हो सकता है कि कच्चे मसालों को ठीक से साफ नहीं किया गया या सुखाने और पैकिंग की प्रक्रिया में स्वच्छता का पूरा ध्यान नहीं रखा गया. International Journal of Current Microbiology and Applied Sciences में पब्लिश एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, यदि लंबे समय तक ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाए जिनमें कीटनाशकों की मात्रा अधिक हो तो इसका शरीर पर असर पड़ सकता है. समय के साथ इन रसायनों के अवशेष शरीर में जमा हो सकते हैं और यह लीवर, आंतों तथा नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डाल सकते हैं. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून वाले लोगों के लिए इसका खतरा अधिक माना जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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How To Detox Body After Holi Overeating: होली भारत के सबसे पसंदीदा त्योहारों में से एक है. रंगों, खुशियों और मिलन के इस पर्व पर लोग तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवानों का भी जमकर आनंद लेते हैं. होली के मौके पर गुजिया, लड्डू, मालपुआ, ठंडाई, नमकीन स्नैक्स और कई तरह की मिठाइयां और ड्रिंक्स का चलन रहता है. लेकिन त्योहार की मस्ती में कई बार लोग अपनी रोजमर्रा की डाइट का ध्यान नहीं रख पाते और जरूरत से ज्यादा तला-भुना, मीठा और जंक फूड खा लेते हैं.
होली खत्म होने के बाद अक्सर कई लोगों को पेट फूलने यानी ब्लोटिंग की समस्या होने लगती है. दरअसल, शरीर त्योहार के दौरान खाए गए ज्यादा तेल, चीनी और भारी खाने को पचाने और बाहर निकालने की कोशिश करता है. इसी वजह से पेट भारी लगना, गैस बनना, पाचन से जुड़ी दिक्कतें और थकान जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. कई लोगों को वजन बढ़ने या ऊर्जा की कमी का एहसास भी होने लगता है.
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क्या कर सकते हैं आप?
डाइटिशियन सिमरत कथूरिया के अनुसार, ऐसी स्थिति में सबसे पहले दो बातों पर ध्यान देना जरूरी होता है. पहला है शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी देना और दूसरा है डाइजेशन सिस्टम का संतुलन दोबारा ठीक करना. न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार त्योहार के बाद शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है. इसके लिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना चाहिए. इसके साथ ही नींबू पानी या सौंफ का पानी जैसे प्राकृतिक पेय भी फायदेमंद हो सकते हैं, क्योंकि ये पेट की सूजन कम करने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.
खाना खाना नहीं छोड़ना चाहिए
कई लोग होली के बाद ज्यादा खा लेने की भरपाई करने के लिए खाना छोड़ने या क्रैश डाइट करने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसा करना सही तरीका नहीं है. एक्सपर्ट के अनुसार भोजन छोड़ने से शरीर कमजोर हो सकता है और डाइजेशन सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए बेहतर है कि घर का हल्का और संतुलित भोजन किया जाए, ताकि शरीर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट सके.
सुस्ती आने पर क्या करना सही रहेगा?
अगर त्योहार के बाद पेट भारी महसूस हो रहा है या सुस्ती लग रही है, तो इसका मतलब हो सकता है कि ज्यादा तला-भुना और मीठा खाने से गट हेल्थ प्रभावित हुई है. ऐसे में दही और छाछ जैसे फर्मेंटेड फूड्स को डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है. ये आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को संतुलित करने में मदद करते हैं. इसके अलावा अदरक और हल्दी जैसे हल्के मसालों का सेवन भी डाइजेशन को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Why Body Hurts Without Exercise: कई लोग सुबह उठते ही कंधों में दर्द, पीठ में जकड़न या पैरों में भारीपन महसूस करते हैं, जबकि उन्होंने कोई भारी काम या एक्सरसाइज भी नहीं की होती. न कोई चोट लगी होती है और न ही ज्यादा शारीरिक मेहनत की होती है, फिर भी शरीर थका-थका और दर्द से भरा महसूस होता है. आजकल इस तरह का रोजमर्रा का बॉडी पेन काफी आम होता जा रहा है.
क्यों होती है इस तरह की दिक्कत?
डॉक्टरों के मुताबिक यह दर्द हमेशा मांसपेशियों पर पड़े दबाव की वजह से नहीं होता. कई बार यह शरीर के अंदर चल रही कुछ प्रक्रियाओं का संकेत भी हो सकता है. आज की लाइफस्टाइल में लंबे समय तक बैठकर काम करना, नींद पूरी न होना, तनाव और असंतुलित खानपान जैसी आदतें धीरे-धीरे शरीर में हल्की सूजन यानी इंफ्लेमेशन पैदा कर सकती हैं. यही सूजन मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द या थकान का कारण बनती है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. अभिषेक पाटिल बताते हैं कि लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव भी शरीर पर गहरा असर डालता है. जब व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है तो शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन ज्यादा मात्रा में बनने लगते हैं. शुरुआत में ये हार्मोन शरीर को चुनौतियों से निपटने में मदद करते हैं, लेकिन जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो शरीर की नसें और मसल्स लगातार तनाव की स्थिति में रहती हैं. इसके कारण गर्दन, कंधों और पीठ में जकड़न या दर्द महसूस हो सकता है.
नींद की कमी बड़ा कारण
नींद की कमी भी शरीर में दर्द का एक बड़ा कारण बन सकती है. दरअसल, गहरी नींद के दौरान ही शरीर खुद की मरम्मत करता है, एनर्जी को फिर से संतुलित करता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है. अगर नींद पूरी न हो या बार-बार टूटती रहे तो यह प्रक्रिया अधूरी रह जाती है. इसी वजह से कई लोग बिना ज्यादा काम किए भी सुबह उठते ही थकान या दर्द महसूस करते हैं. खानपान का भी शरीर के दर्द से गहरा संबंध होता है. ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड शुगर और अनहेल्दी फैट्स वाले भोजन शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं. वहीं फल, सब्जियां, मेवे, बीज और ओमेगा-3 से भरपूर भोजन शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं और मांसपेशियों को स्वस्थ रखते हैं.
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क्या इसको कम किया जा सकता है?
रोजमर्रा के ऐसे दर्द को अक्सर छोटी-छोटी लाइफस्टाइल आदतों से काफी हद तक कम किया जा सकता है. नियमित हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और तनाव को कम करने वाली गतिविधियां शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं. अगर दर्द कई हफ्तों तक बना रहे या इसके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दें तो एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर होता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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