शुगर के मरीज हो जाएं अलर्ट! जानिए कैसे आपकी आंखों को अंदर से अंधा बना रही है डायबिटीज?

शुगर के मरीज हो जाएं अलर्ट! जानिए कैसे आपकी आंखों को अंदर से अंधा बना रही है डायबिटीज?


How Diabetes Affects Eyes And Vision: डायबिटीज को अक्सर दिल, किडनी और नसों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन आंखें भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं. यह नुकसान अचानक नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे बिना दर्द के बढ़ता है और तब सामने आता है जब स्थिति संभालना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि इसे समझना और समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर डॉक्टर का क्या कहना है. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

डॉ. नुसरत बुखारी ने TOI को बताया कि “डायबिटीज सिर्फ दिल, किडनी, लीवर और नसों को ही नहीं, बल्कि आंखों को भी प्रभावित करती है.” यह बात कई लोग तब समझते हैं जब समस्या बढ़ चुकी होती है. आंख एक कैमरे की तरह काम करती है, जिसमें पीछे की परत यानी रेटिना तस्वीरों को कैद करके दिमाग तक भेजती है. इस रेटिना में बहुत ही महीन ब्लड वेसल्स होती हैं. जब लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर ज्यादा रहता है, तो ये नसें कमजोर होने लगती हैं. इनमें सूजन आ सकती है, रिसाव हो सकता है या ये बंद भी हो सकती हैं. कुछ मामलों में शरीर नई ब्लड वेसल्स बनाता है, लेकिन ये बेहद नाजुक होती हैं और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती हैं.

क्या होती है इससे दिक्कत

इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है. यह बिना किसी शुरुआती लक्षण के धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है और दुनिया भर में नजर कमजोर होने के बड़े कारणों में से एक है. इसके अलावा, डायबिटीज आंखों से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी कारण बन सकती है. डायबिटीज के कारण होने वाली आंखों की समस्याओं में डायबिटिक रेटिनोपैथी, डायबिटिक मैक्युलर एडीमा, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा शामिल हैं. डॉ. नुसरत बुखारी के अनुसार “अनकंट्रोल डायबिटीज वाले लोगों में इन समस्याओं का खतरा काफी ज्यादा होता है.” खास बात यह है कि इन बीमारियों के शुरुआती संकेत अक्सर नजर नहीं आते.

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क्या होती है दिक्कत

यही वजह है कि कई लोग तब तक सामान्य महसूस करते रहते हैं जब तक समस्या गंभीर नहीं हो जाती. जब लक्षण दिखते हैं, तो उनमें धुंधला दिखना, आंखों के सामने काले धब्बे नजर आना, रात में देखने में दिक्कत और अचानक नजर में बदलाव शामिल हो सकते हैं. डॉ. बुखारी चेतावनी देती हैं कि आंखों की समस्याएं बिना किसी स्पष्ट संकेत के बढ़ सकती हैं और बाद में तनाव और चिंता का कारण बनती हैं. डायबिटीज शरीर में एक तरह की चेन रिएक्शन भी पैदा करती है. हाई ब्लड शुगर के साथ हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या जुड़ जाए, तो स्थिति और खराब हो जाती है. धूम्रपान करने से ऑक्सीजन की आपूर्ति भी कम हो जाती है, जिससे आंखों को और नुकसान पहुंचता है. इसी कारण हर व्यक्ति में इसके असर अलग-अलग हो सकते हैं. 

कैसे कर सकते हैं इस दिक्कत को ठीक

हालांकि, राहत की बात यह है कि सही देखभाल से इस नुकसान को रोका या कम किया जा सकता है. ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना, नियमित जांच कराना, संतुलित और फाइबर युक्त आहार लेना, रोजाना फिजिकल एक्टिविटी करना और तनाव को कम करना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही, साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए, भले ही नजर सामान्य लग रही हो.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या पेन किलर से सच में खराब हो जाते हैं ऑर्गन, जानें किस मात्रा में सही रहता है इनका सेवन?

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Can Painkillers Cause Kidney Damage: सिर दर्द, बुखार या मांसपेशियों में दर्द होते ही ज्यादातर लोग दर्द कम करने वाली दवाओं का सहारा लेते हैं. ये दवाएं दर्द, बुखार और सूजन को कम करने में मदद करती हैं और आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या इनका ज्यादा इस्तेमाल शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है? जवाब है, हां, अगर इन्हें सही तरीके से न लिया जाए तो खतरा हो सकता है, खासकर किडनी पर असर पड़ता है.

शरीर के किन अंगों पर होता है इसका असर?

नेशनल किडनी फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, के मुताबिक, दर्द कम करने वाली दवाएं अगर लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में ली जाएं तो यह किडनी के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं. यह दवाएं किडनी में खून के फ्लो और टिश्यू पर असर डालती हैं, जिससे धीरे-धीरे नुकसान होने लगता है. जिन लोगों को पहले से किडनी से जुड़ी समस्या है, उनके लिए यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. उम्र बढ़ने के साथ भी यह जोखिम बढ़ सकता है.

इस्तेमाल को लेकर सावधानी

इसलिए इन दवाओं का इस्तेमाल हमेशा सावधानी से करना जरूरी है. डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक इनका सेवन नहीं करना चाहिए. सबसे जरूरी बात यह है कि इन्हें हमेशा कम से कम मात्रा में और कम समय के लिए लिया जाए.  यही तरीका शरीर को सुरक्षित रखने में मदद करता है. 

किन दवाओं से होता है नुकसान?

दर्द कम करने वाली दवाओं में कुछ दवाएं ऐसी होती हैं जिन्हें सामान्य तौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में लेने पर इनके भी दुष्प्रभाव हो सकते हैं. वहीं कुछ दूसरी दवाएं सूजन और दर्द दोनों को कम करती हैं, लेकिन इनका लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है. जिन लोगों को दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की समस्या है, उन्हें ऐसी दवाओं से खास सावधानी बरतनी चाहिए.

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किडनी को सुरक्षित रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. दवा लेते समय हमेशा उसके लेबल पर लिखे निर्देशों को पढ़ें और उसी के अनुसार सेवन करें. शरीर में पानी की कमी न होने दें, क्योंकि पानी की कमी से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इसके साथ ही, एक साथ कई दवाओं का सेवन करने से बचें, खासकर वे दवाएं जिनमें एक से ज्यादा तत्व शामिल हों. 

डॉक्टरों से कब लेनी चाहिए सलाह?

अगर आपको लंबे समय तक इन दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. डॉक्टर खून की जांच के जरिए किडनी की स्थिति का पता लगा सकते हैं. एक साधारण जांच से यह जाना जा सकता है कि किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है. इसके अलावा यूरिन की जांच से भी शुरुआती नुकसान का पता लगाया जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या दिन से ज्यादा खतरनाक है रात की लू? अगर लग गई तो नतीजे गंभीर, MP में पहली बार अलर्ट

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भारत में गर्मी ने अप्रैल के महीने में ही बेहाल कर दिया है. राजस्थान में उदयपुर से टूरिस्ट गायब हो गए और सड़कें सुनसान हैं. उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में लू का अलर्ट होने से स्कूल टाइम बदल गया. बिहार के 9 जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया. छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश समेत सभी जगह लू का अलर्ट है. मध्य प्रदेश में तो पहली बार रात में लू का अल्टीमेटम दिया गया है, लेकिन लू तो धूप में चलती है, तो फिर रात की लू का माजरा क्या है? जानेंगे एक्सप्लेनर में…

सवाल 1: भारत में अभी गर्मी की स्थिति कितनी भयानक है?
जवाब: देश के कई इलाकों में अप्रैल 2026 के आखिरी सप्ताह में गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है. राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में कई जगहों पर तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. प्रयागराज में 44.4 डिग्री, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 43.8 डिग्री और कई जगहों पर 42-43 डिग्री तक पारा चढ़ा है. मौसम विभाग ने इन राज्यों में लू का अलर्ट जारी किया है. सबसे खास बात यह है कि मध्य प्रदेश में मंगलवार को पहली बार ‘रात में लू’ यानी गर्म रात का अलर्ट जारी किया गया.

मध्य प्रदेश के भोपाल, छिंदवाड़ा, मंडला, नर्मदापुरम, ग्वालियर, रतलाम और छतरपुर समेत 16 जिलों में यह अलर्ट है. इससे पहले रविवार-मंगलवार की रातों में इन इलाकों में रात का तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा रहा, जिससे लोगों को दिन की गर्मी के बाद भी राहत नहीं मिली. महाराष्ट्र और ओडिशा में दिन में सिग्नल बंद कर दिए, ताकि लोगों को चौराहे पर धूप में खड़ा न होना पड़े.

 

मध्य प्रदेश के 16 जिलों में रात की लू का अलर्ट जारी है

सवाल 2: लू तो हमेशा दिन की धूप और गर्म हवा में चलती है, फिर रात की लू कैसी होती है?
जवाब: सामान्य लू दिन की घटना होती है. यह तेज धूप और गर्म, सूखी हवा होती है जो दोपहर में 40 डिग्री या उससे ऊपर चली जाती है, लेकिन ‘रात की लू’ या ‘गर्म रात’ बिल्कुल अलग है. यह हवा की तरह नहीं बहती, बल्कि रात का तापमान इतना ज्यादा रह जाता है कि सूरज ढलने के बाद भी दीवारें, जमीन और हवा ठंडी नहीं होती।

मौसम विभाग के नियम के मुताबिक, जब दिन का तापमान 40 डिग्री या उससे ज्यादा हो और रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री ज्यादा हो, तो इसे ‘गर्म रात’ कहा जाता है. अगर 6.4 डिग्री से ज्यादा हो तो ‘बहुत गर्म रात’. मध्य प्रदेश में यही हो रहा है. रात में भी गर्मी बनी रहती है, ठंडक नहीं मिलती.

सवाल 3: दिन के मुकाबले रात की लू में शरीर पर क्या असर पड़ता है?
जवाब: हां, रात की गर्मी दिन की लू से भी ज्यादा चुपके से नुकसान पहुंचाती है. दिन में शरीर गर्म होता है, लेकिन रात में अगर तापमान कम न पड़े तो शरीर को ठंडक मिलने का मौका नहीं मिलता. शरीर का तापमान कंट्रोल करने वाला सिस्टम थक जाता है. इससे दिल, किडनी और दिमाग पर दबाव बढ़ता है. लोग बेचैनी की वजह से सो नहीं पाते, पसीना ज्यादा आता है और सुबह उठते ही थकान महसूस होती है.

गंभीर मामलों में चक्कर आना, उल्टी, बेहोशी और हीट स्ट्रोक के लक्षण दिख सकते हैं. मौसम विभाग और डॉक्टरों के मुताबिक गर्म रातों में नींद पूरी नहीं होती, जिससे अगले दिन शरीर कमजोर हो जाता है. खासकर बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं.

 

लू लगने पर शरीर में गंभीर लक्षण दिख सकते हैं
लू लगने पर शरीर में गंभीर लक्षण दिख सकते हैं

सवाल 4: क्या दिन की लू से ज्यादा रात की लू खतरनाक मानी जाती है? हां तो क्यों?
जवाब: दिन की लू तेज होती है, लेकिन रात में राहत मिल जाती है. शरीर को रात में ठंडक मिलकर रिकवर करने का समय मिलता है, लेकिन जब रात भी गर्म हो तो यह रिकवरी नहीं होती. गर्मी का तनाव लगातार बढ़ता जाता है. इस पर कई रिसर्च स्टडीज हो चुकी हैं, जिसके मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से रातें दिन से ज्यादा तेजी से गर्म हो रही हैं. हवा में नमी ज्यादा होने से दिन की गर्मी रात में फंस जाती है. शहरों में कंक्रीट और इमारतें दिन में गर्मी सोख लेती हैं और रात में छोड़ती हैं.

नतीजा? कई दिनों तक लगातार गर्मी पड़ने पर मौत का खतरा बढ़ जाता है. एक अन्य स्टडी मानें तो अगर रात की गर्मी बढ़े तो सदी के अंत तक गर्मी से मौतें छह गुना बढ़ सकती हैं. रात की गर्मी नींद भी छीन लेती है. औसतन हर व्यक्ति साल में 44 घंटे कम सो रहा है.

सवाल 5: कब तक रात की लू से जूझना पड़ेगा और बचने के लिए क्या करें?
जवाब: रात की लू लगने पर बहुत प्यास लगना, थकान, सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, शरीर का तापमान बढ़ना, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. अगर रात में पसीना ज्यादा आए, नींद न आए या सुबह कमजोरी लगे तो सावधान रहें:

  • रात में भी ज्यादा पानी पिएं.
  • हल्के, ढीले कपड़े पहनें.
  • कमरे में पंखा या कूलर चलाएं, खिड़कियां खुली रखें.
  • दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर न निकलें.
  • बुजुर्गों और बच्चों पर खास नजर रखें.
  • अस्पतालों में बेड रिजर्व किए जा रहे हैं. कई राज्यों में स्कूलों का समय बदला गया है और मजदूरों को दोपहर में काम नहीं करने दिया जा रहा है.

मौसम विभाग के अनुसार अगले 4-5 दिनों तक उत्तर और मध्य भारत में गर्मी बनी रहेगी. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा में लू और गर्म रातों का अलर्ट जारी है. जलवायु परिवर्तन की वजह से ऐसे मौसम पहले से ज्यादा आम हो गए हैं. अगर बारिश न हुई तो स्थिति और बिगड़ सकती है. सरकारें और मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं. लोगों को सलाह दी जा रही है कि गर्मी को हल्के में न लें, यह चुपके से जान ले सकती है.

रात की लू कोई हवा नहीं, बल्कि रात भर न रुकने वाली गर्मी है जो शरीर को ठंडक का मौका नहीं देती. दिन की लू से अलग यह लगातार थकान बढ़ाती है और लंबे समय में ज्यादा खतरनाक साबित होती है. मध्य प्रदेश में पहली बार यह अलर्ट इसलिए जारी हुआ क्योंकि रात का तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा है.

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भारत में तेजी से फैल रही हैं मेटाबॉलिक बीमारियां, कहीं आप भी तो नहीं इसके शिकार?

भारत में तेजी से फैल रही हैं मेटाबॉलिक बीमारियां, कहीं आप भी तो नहीं इसके शिकार?


Why Metabolic Diseases Are Rising In India: भारत में मेटाबॉलिक बीमारियों का बोझ तेजी से बढ़ता जा रहा है और अब यह गंभीर चिंता का विषय बन चुका है. हालिया स्टडी के मुताबिक, टाइप 2 डायबिटीज से होने वाली मौतों और डिसेबिलिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर वर्षों के मामले में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले स्थान पर पहुंच गया है. चलिए आपको बताते हैं कि क्या निकला स्टडी में. 

स्टडी में क्या आया सामने?

11 देशों केएक्सपर्ट द्वारा किए गए इस अध्ययन में बताया गया कि वर्ष 1990 में टाइप 2 डायबिटीज के सबसे ज्यादा मामले चीन में थे, इसके बाद भारत, इंडोनेशिया, जापान और पाकिस्तान का स्थान था. लेकिन वर्ष 2023 तक स्थिति बदल गई और भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए सबसे अधिक मामलों वाला देश बन गया.  यह एनालिसिस ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के आंकड़ों पर आधारित है. स्टडी में यह भी सामने आया कि भारत और चीन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पांच प्रमुख मेटाबॉलिक बीमारियों टाइप 2 डायबिटीज, हाईबीपी, बॉडी मास इंडेक्स, खराब कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर से जुड़ी बीमारी का सबसे ज्यादा बोझ उठा रहे हैं. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

स्टजी के राइटर  अनूप मिश्रा के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज से जुड़े रोग भार और मौतों के मामले में भारत पहले स्थान पर है, जबकि बाकी चार बीमारियों में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है, जो गंभीर चिंता की बात है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मेटाबॉलिक बीमारियों का सबसे बड़ा बोझ झेल रहा है. केवल टाइप 2 डायबिटीज के कारण ही देश में 2.1 करोड़ से अधिक मामले और करीब 5.8 लाख मौतें दर्ज की गईं, जो इसके भारी प्रभाव को दिखाता है.”

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उन्होंने यह भी बताया कि डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी, असामान्य कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर आपस में जुड़ी हुई स्थितियां हैं, जो मुख्य रूप से खराब खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण बढ़ रही हैं. यही बीमारियां आगे चलकर किडनी फेल होना, दिल का दौरा, हार्ट फेलियर, लिवर की गंभीर बीमारी, लकवा और कई तरह के कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बनती हैं.

कितने लोग पीड़ित?

स्टडी के मुताबिक, वर्ष 2023 में भारत में टाइप 2 डायबिटीज से जुड़े 2,13,45,118 मामले और 5,78,367 मौतें दर्ज की गईं, जबकि चीन में यह आंकड़ा 1,09,40,382 मामले और 1,72,911 मौतों का रहा. पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वर्ष 2023 के दौरान टाइप 2 डायबिटीज के कारण करीब 4.9 करोड़ मामले दर्ज किए गए, जिसमें 54.1 प्रतिशत हिस्सा पुरुषों का था। वहीं, इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा बोझ हाई बीपी का रहा, जिसके कारण करीब 13.8 करोड़ रोग-भार वर्ष और 62.7 लाख मौतें हुईं. इसके बाद अधिक शरीर भार, खराब कोलेस्ट्रॉल, टाइप 2 डायबिटीज और फैटी लिवर से जुड़ी बीमारी का स्थान रहा. वर्ष 1990 से 2023 के बीच कुल रोग-भार में 1.7 से 3.7 गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है. अनुमान है कि वर्ष 2030 तक इन बीमारियों का बोझ और बढ़ेगा, जिसमें हाई बीपी सबसे बड़ा कारण बना रहेगा.

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अब दवाओं में इस्तेमाल नहीं होंगी अश्वगंधा की पत्तियां, जानें FSSAI ने इस पर क्यों लगाई रोक?

अब दवाओं में इस्तेमाल नहीं होंगी अश्वगंधा की पत्तियां, जानें FSSAI ने इस पर क्यों लगाई रोक?


FSSAI New Health Supplement Rules: अश्वगंधा को लंबे समय से एक ऐसे प्राकृतिक उपाय के रूप में पेश किया जाता रहा है, जो तनाव कम करने से लेकर नींद सुधारने तक हर समस्या में मददगार माना जाता है. आयुर्वेद की यह पुरानी जड़ी-बूटी आज के दौर में वेलनेस इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा बन चुकी है. लेकिन अब इसी अश्वगंधा को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने उपभोक्ताओं और सप्लीमेंट बनाने वाली कंपनियों दोनों को चौंका दिया है. 

क्या है मामला?

FSSAI और आयुष मंत्रालय ने अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. हालांकि यह पूरी तरह से बैन नहीं है, बल्कि एक सीमित प्रतिबंध है. यानी अश्वगंधा के पूरे पौधे पर नहीं, सिर्फ उसकी पत्तियों के उपयोग पर रोक लगाई गई है. वहीं, इसकी जड़ का इस्तेमाल पहले की तरह जारी रहेगा. 16 अप्रैल को जारी आदेश में FSSAI ने राज्यों को सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर कोई कंपनी अश्वगंधा की पत्तियों या उनके एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए. इसके अलावा कंपनियों को अब यह भी स्पष्ट रूप से बताना होगा कि उनके प्रोडक्ट में पौधे का कौन-सा हिस्सा इस्तेमाल किया गया है.

क्यों लिया गया यह फैसला?

दरअसल, यह फैसला साइंटफिक रिसर्च के आधार पर लिया गया है. रिसर्च में पाया गया है कि अश्वगंधा की पत्तियों में विदेनोलाइड्स नाम के तत्व ज्यादा मात्रा में होते हैं, खासकर विदाफेरिन-ए, जो शरीर पर काफी असर डाल सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, इन तत्वों की अधिकता से लिवर को नुकसान, पेट से जुड़ी समस्याएं और यहां तक कि नर्वस सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है.

तेजी से बढ़ रहा अश्वगंधा का इस्तेमाल

इसी संभावित खतरे को देखते हुए सरकार ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है. खासतौर पर ऐसे समय में जब अश्वगंधा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और यह कैप्सूल, पाउडर और ड्रिंक्स के रूप में बाजार में आसानी से उपलब्ध है. दूसरी तरफ, अश्वगंधा की जड़ को सुरक्षित माना गया है. आयुर्वेद में सदियों से इसी हिस्से का इस्तेमाल होता आया है और आधुनिक रिसर्च भी इसे सही मात्रा में लेने पर सुरक्षित बताती है.  इसलिए नियामक संस्थाओं ने जड़ आधारित उत्पादों को अनुमति दी हुई है.

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क्या मानते हैं एक्सपर्ट?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्रिकॉशनरी एप्रोच का हिस्सा है, यानी जब तक पूरी तरह से सुरक्षित साबित न हो, तब तक संभावित जोखिम वाले तत्वों से दूरी रखना बेहतर है. डाइटिशियन कनिका मल्होत्रा ने indian express को बताया कि अश्वगंधा शरीर को तनाव से निपटने में मदद करता है, नींद सुधारता है और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक होता है, लेकिन पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल सिर्फ जड़ के रूप में ही किया जाता रहा है.

वहीं, डाइटिशियन गरिमा गोयल कहती हैं कि यह प्रतिबंध उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है, क्योंकि अब कंपनियों को साफ-साफ बताना होगा कि वे किस हिस्से का उपयोग कर रही हैं. इससे लोगों को यह समझने में आसानी होगी कि वे क्या खा रहे हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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