बॉडी में कम हुए ये विटामिन तो लिवर हो जाएगा फैटी, तुरंत कर लें बचने की तैयारी

बॉडी में कम हुए ये विटामिन तो लिवर हो जाएगा फैटी, तुरंत कर लें बचने की तैयारी


Signs Of Liver Damage Due To Vitamin Deficiency: दुनियाभर में फैटी लिवर डिजीज, खासकर नफल्ड, तेजी से बढ़ती हुई हेल्थ समस्या बन चुकी है. जब लिवर में ज्यादा मात्रा में फैट जमा होने लगता है और सूजन पैदा करता है, तब यह बीमारी पैदा होती है.  हाल के वर्षों में एक कारण जिस पर खास ध्यान गया है, वह है विटामिन B12 की कमी, जो फैटी लिवर के बढ़ने और बिगड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.  विटामिन B12 शरीर में कई जरूरी मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है, खासतौर पर फैट मेटाबॉलिज्म के लिए. इसकी कमी होने पर शरीर में होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है और समय के साथ लिवर को नुकसान पहुंच सकता है.

विटामिन B12 लिवर को कैसे प्रभावित करता है?

विटामिन B12 लिवर की मेटाबॉलिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाता है. जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो लिवर फैट को सही तरीके से प्रोसेस और बाहर नहीं निकाल पाता. इसका नतीजा यह फैट लिवर की सेल्स में जमा होने लगता है, जिससे सूजन और बाद में स्कारिंग तक हो सकती है.  कई स्टडीज़ में पाया गया है कि  नफल्ड वाले लोगों में विटामिन B12 का स्तर सामान्य लोगों की तुलना में काफी कम होता है. 

B12 की कमी से होमोसिस्टीन बढ़ता है, जो लिवर को और कमजोर कर सकता है. अच्छी बात ये है कि B12 की सप्लिमेंटेशन से होमोसिस्टीन कम हो सकता है और लिवर एंजाइम्स में सुधार देखा गया है, जो लिवर की स्थिति को बिगड़ने से रोक सकता है.

कमी के लक्षण 

विटामिन B12 की कमी के आम लक्षण हैं जैसे कि थकान, कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनी, और फोकस करने में कठिनाई. लेकिन फैटी लिवर के लक्षण अक्सर देर से दिखाई देते हैं. इसलिए कई लोग अंदाजा भी नहीं लगा पाते कि उन्हें खतरा बढ़ रहा है. कई बार B12 की कमी गॉलस्टोन के जोखिम को भी बढ़ा सकती है, क्योंकि यह पित्त बनने और लिवर की मेटाबॉलिक गतिविधियों में भी भूमिका निभाता है. इसलिए इसकी कमी को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है.

कैसे बचें और क्या है इलाज?

विटामिन B12 की कमी से बचने का सबसे आसान तरीका है कि अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में मांस, मछली, अंडे और डेयरी शामिल करना. कुछ लोगों में उम्र बढ़ने, दवाइयों के असर या डाइजेशन की समस्याओं के कारण B12 का एब्जॉर्ब कम हो जाता है. ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह से सप्लिमेंट या इंजेक्शन लेना प्रभावी रहता है. नियमित हेल्थ चेकअप्स से B12 की कमी का पता जल्दी चलता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें लिवर रोग का खतरा ज्यादा होता है. कमी को पूरा करने से न सिर्फ लिवर में जमा फैट कम हो सकता है, बल्कि सूजन भी घट सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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आंखों में दिख रहे ये लक्षण तो समझ जाएं किडनी हो रही खराब, तुरंत कराएं अपना इलाज

आंखों में दिख रहे ये लक्षण तो समझ जाएं किडनी हो रही खराब, तुरंत कराएं अपना इलाज


Eye Symptoms Of Kidney Disease: अक्सर हम सोचते हैं कि किडनी खराब होने पर थकान, पैरों में सूजन या यूरिन में बदलाव दिखाई देता है. लेकिन बहुत कम लोगों को पता होता है कि इसकी शुरुआती निशानियां आंखों में भी दिखाई दे सकती हैं. क्योंकि आंखें और किडनी, दोनों ही सही तरह से काम करने के लिए शरीर की नाजुक नसों और फ्लूइड बैलेंस पर निर्भर करती हैं. अगर एक जगह दिक्कत शुरू होती है, तो असर दूसरी जगह भी दिख सकता है.

अगर आपकी आंखों में लगातार सूजन, लालिमा, जलन, ड्राइनस, धुंधलापन या रंगों को पहचानने में दिक्कत जैसी परेशानियां दिख रही हैं, तो यह किडनी से जुड़ी कोई गहरी समस्या का संकेत हो सकता है. शुरुआत में ये लक्षण हल्के होते हैं, इसलिए आसानी से नजरअंदाज हो जाते हैं. लेकिन अगर इनके साथ थकान या शरीर में सूजन भी हो, तो किडनी और आंखों की जांच कराना बहुत जरूरी है. चलिए आपको बताते हैं कि इसके लक्षण कौन से दिखते हैं. 

 सूजी हुई आंखें 

कभी-कभी देर रात जागने या ज्यादा नमक खाने पर आंखें सूज जाना आम बात है. लेकिन अगर आपकी आंखों में हर दिन सूजन रहती है, तो यह प्रोटीन के यूरिन में लीक होने यानी प्रोटीन्यूरिया का संकेत हो सकता है. किडनी जब कमजोर होने लगती है तो शरीर से जरूरी प्रोटीन निकलने लगता है और इसी वजह से आंखों के आसपास फ्लूइड जमा होने लगता है. अगर सूजन के साथ-साथ यूरिन में झाग भी दिखे, तो इसे अनदेखा न करें और तुरंत जांच कराएं.

 धुंधला दिखना या डबल दिखाई देना

अचानक धुंधलापन, साफ नहीं दिखना या डबल इमेज दिखना, आंखों की नसों को नुकसान का संकेत हो सकता है. हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज, जो किडनी खराब होने के दो बड़े कारण हैं, रेटिना की नसों को भी नुकसान पहुंचाते हैं. इससे आंखों में सूजन, लीक और गंभीर स्थिति में विजन लॉस तक हो सकता है. अगर आपको बीपी या डायबिटीज है और विजन बदल रहा है, तो आंखों के साथ-साथ किडनी टेस्ट करवाना जरूरी है. 

आंखों का सूखना, जलन या चुभन

लगातार सूखी, जलती हुई या रगड़ जैसा एहसास देने वाली आंखें सिर्फ मौसम का असर नहीं होतीं. उन्नत किडनी बीमारी या डायलिसिस पर रहने वाले लोगों में यह समस्या आम है. किडनी की दिक्कत से मिनरल बैलेंस बिगड़ जाता है और शरीर में जमा टॉक्सिन्स आंसू बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. अगर बिना कारण आंखें सूखी और लाल रहती हैं, तो किडनी की जांच करवाना समझदारी है. 

आंखों का लाल होना 

आंखों का लाल होना आमतौर पर थकान या एलर्जी से जुड़ा होता है. लेकिन किडनी की बीमारी में अनकंट्रोल हाई बीपी छोटी-छोटी ब्लड बेसल्स को फाड़ देता है, जिससे आंखें लगातार लाल दिखती हैं. कुछ मामलों में लूपस नेफ्राइटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारी भी आंखों में सूजन पैदा करती है. अगर लाल आंखों के साथ जोड़ों में दर्द, सूजन या शरीर पर दाने भी हों, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए.

कब आंखों के लक्षण किडनी बीमारी की तरफ इशारा करते हैं?

हल्की जलन या थोड़ी सूजन आम बात है, लेकिन अगर लक्षण लगातार बने रहें और साथ में थकान, सूजन या यूरिन में बदलाव महसूस हो, तो किडनी की जांच कराना जरूरी है.
आंखों की जांच में भी कई बार शरीर की बड़ी बीमारियों के शुरुआती संकेत पकड़े जाते हैं. खासकर डायबिटीज, बीपी या फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों को इन बदलावों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. लगातार सूजन, लालिमा, धुंधलापन, ड्रायनेस या रंगों में बदलाव जैसे संकेत किडनी की शुरुआती खराबी का इशारा हो सकते हैं. समय पर इलाज लेने से न सिर्फ किडनी, बल्कि आपकी आंखों की सेहत भी सुरक्षित रह सकती है.

इसे भी पढ़ें- 2025 में भारत के लोगों ने गूगल पर सबसे ज्यादा किन बीमारियों को किया सर्च? देखें पूरी लिस्ट

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सुबह बिस्तर छोड़ते ही दिखने लगते हैं किडनी डैमेज होने के ये 5 लक्षण, 89% लोग कर देते हैं इग्नोर

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How to Identify Kidney Disease Early: किडनी शरीर के सबसे अहम अंगों में से एक है, जो पीएच बैलेंस से लेकर नमक, पोटैशियम और कई जरूरी मिनरल्स को कंट्रोल करती है. लेकिन गलत लाइफस्टाइल, बीमारियां और जेनेटिक कारण इसकी कार्यक्षमता को धीमा कर सकते हैं. किडनी का कमजोर होना यानी यह खून को उसी तरह फिल्टर नहीं कर पा रही, जैसे उसे करना चाहिए. डायबिटीज और हाई बीपी वाले लोगों में इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है. कई बार किडनी के शुरुआती लक्षण बहुत सूक्ष्म होते हैं, ये दिखते तो मामूली हैं, लेकिन बहुत कुछ बता जाते हैं. चलिए आपको इसके लक्षणों के बारे में बताते हैं. 

सुबह उठते ही चेहरे पर सूजन

अगर आप रोज सुबह उठकर चेहरे पर हल्का फुलाव या सूजन देखते हैं, तो इसे सामान्य न समझें. यह किडनी के गड़बड़ होने का संकेत हो सकता है, खासकर तब, जब पैरों या टखनों में भी सूजन बनी रहे. डॉक्टर बताते हैं कि यह फ्लूइड रिटेंशन की वजह से होता है, यानी किडनी खून से अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी ठीक से बाहर नहीं निकाल पा रही. कई मामलों में प्रोटीन के यूरिन में ज्यादा लीक होने से भी चेहरे समेत शरीर के कई हिस्सों में सूजन आ जाती है.

 झागदार या बुलबुलेदार पेशाब

सुबह की पहली पेशाब अगर झागदार या बहुत बुलबुलेदार दिखे, तो यह भी किडनी की चेतावनी हो सकती है. ऐसा तब होता है जब यूरिन में जरूरत से ज्यादा प्रोटीन मौजूद हो, इसे प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है.  यह साफ संकेत है कि किडनी फिल्टरिंग का काम ठीक से नहीं कर पा रही और शायद उसमें डैमेज शुरू हो चुका है.

त्वचा का जरूरत से ज्यादा सूखना और खुजली

किडनी कमजोर होने पर शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। इससे स्वेट ग्लैंड सिकुड़ जाते हैं, और त्वचा जल्दी सूखने लगती है. डॉक्टरों के मुताबिक, जब खुजली इतनी बढ़ जाए कि मॉइश्चराइजर लगाने पर भी आराम न मिले, तो यह यूरमिक प्रुरिटस का संकेत हो सकता है जो किडनी डैमेज का एक बड़ा लक्षण है.

दिमाग का धुंधला होना 

किडनी जब पर्याप्त रूप से काम नहीं करती, तो खून में टॉक्सिन्स बढ़ जाते हैं.  इससे थकान, सुस्ती और ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल आने लगती है.  ऐसी स्थिति लंबे समय में एनीमिया भी पैदा कर सकती है, जिसकी वजह से दिमाग तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है और ब्रेन फॉग और बढ़ जाता है. अगर यह लक्षण अन्य किडनी संकेतों के साथ दिखें, तो तुरंत जांच कराना जरूरी है.

सुबह सांस से बदबू आना

कभी-कभी सुबह की बदबू सामान्य हो सकती है, लेकिन अगर यह लगातार हो और अमोनिया जैसी गंध महसूस हो, तो यह किडनी की ओर इशारा हो सकता है. किडनी ठीक से काम न करे, तो शरीर में जमा टॉक्सिन्स सांस के ज़रिए बाहर निकलते हैं, इसे यूरमिक ब्रीथ कहा जाता है. 

किडनी रोग क्या है?

किडनी मुट्ठी के आकार का छोटा-सा अंग है, लेकिन इसके काम बड़े हैं. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाले हार्मोन बनाना, रेड ब्लड सेल्स की संख्या संभालना और विटामिन D को एक्टिव करना.  लेकिन डायबिटीज, हाई बीपी या लंबे समय की क्रॉनिक बीमारियों की वजह से किडनी डैमेज हो सकती है. किडनी रोग आगे चलकर हड्डियां कमजोर, नसों को नुकसान और पोषण की कमी जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है.

इसे भी पढ़ें- Kidney Disease Skin Signs: ड्राई या इची हो रही स्किन तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना डैमेज हो जाएगी आपकी किडनी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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2025 में भारत के लोगों ने गूगल पर सबसे ज्यादा किन बीमारियों को किया सर्च? देखें पूरी लिस्ट

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भारतीयों के लिए साल 2025 में स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी लेने के लिए गूगल पहला भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बन चुका है. हल्का सिरदर्द हो या तेज बुखार, हाथ-पैर सुन्न पड़ना हो या पेट में अचानक दर्द, ज़्यादातर लोग डॉक्टर के पास जाने से पहले इंटरनेट पर खोज कर यह समझने की कोशिश करते हैं कि उनके शरीर में क्या गड़बड़ हो रही है. पूरे साल के गूगल ट्रेंड्स यह दिखाते हैं कि भारतीय यूज़र्स किन स्वास्थ्य लक्षणों के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी ढूंढते हैं और इन लक्षणों के पीछे कौन से संभावित कारण हो सकते हैं.

बुखार

बुखार 2025 में भारतीयों द्वारा सबसे ज्यादा गूगल किया गया लक्षण है. आमतौर पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिसकी मुख्य वजह शरीर के सामान्य तापमान (लगभग 98.6°F) से ऊपर होना है. यह अक्सर संक्रमण या किसी बीमारी से लड़ने की शरीर की प्रतिक्रिया होती है.

सिरदर्द

सिरदर्द भी भारत में सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले लक्षणों में से एक है. यह आम परेशानी है, लेकिन अगर बढ़ता जाए तो गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है, जैसे माइग्रेन होने का खतरा काफी बढ़ जाता है.

खांसी

खांसी भारत में सबसे ज्यादा गूगल किए जाने वाले लक्षणों में से एक है. यह हल्की एलर्जी से लेकर गंभीर फेफड़ों की बीमारी तक का संकेत हो सकती है. मौसम बदलने, प्रदूषण बढ़ने, सर्दी-ज़ुकाम, धूल-मिट्टी या वायरल संक्रमण के कारण खांसी शुरू हो सकती है.

गले में खराश

गले में खराश भारत में सबसे आम और सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले लक्षणों में से एक है. यह प्रदूषण, वायरस, बैक्टीरिया, एलर्जी, एसिडिटी (GERD), टॉन्सिलाइटिस या आवाज़ के अधिक उपयोग के कारण भी हो सकती है.

शरीर में दर्द

शरीर में दर्द अब भारत में बेहद आम समस्या बन गया है. पहले यह समस्या बुजुर्गों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब यह युवा और यहां तक कि बच्चों में भी बढ़ रही है. अगर कई दिनों से शरीर या जोड़ों में दर्द बना हुआ है तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.

सीने में दर्द

सीने में दर्द भारत में सबसे चिंताजनक लक्षणों में से एक है. अक्सर देखा जाता है कि सीने में दर्द के तुरंत बाद लोगों को हार्ट अटैक हो जाता है. इसी कारण लोग इसे सबसे ज्यादा गूगल करते हैं. हालांकि कई बार यह दर्द सिर्फ गैस, एसिडिटी, मांसपेशियों में खिंचाव या तनाव के कारण भी हो सकता है.

उल्टी

उल्टी ऐसा लक्षण है जिसे भारत में बहुत लोग गूगल करते हैं, क्योंकि यह साधारण बदहज़मी से लेकर गंभीर फूड पॉइज़निंग तक किसी भी कारण से हो सकती है. समय पर इलाज करना जरूरी है.

बाल झड़ना

बाल झड़ना 2025 में भारतीयों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. इसके कारणों में अनुवांशिक कारण, सिर के संक्रमण, हार्मोन में बदलाव, ज्यादा तनाव और थायरॉइड.

 यह भी पढ़ें: महिला अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी! बीपीएससी दे रहा 50,000 रुपये, जानें क्या करना होगा?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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स्मोकिंग नहीं करता था 37 साल का यह शख्स, फिर क्यों डलवाने पड़े 2 हार्ट स्टंट? डॉक्टर ने बताई डराने वाली वजह

स्मोकिंग नहीं करता था 37 साल का यह शख्स, फिर क्यों डलवाने पड़े 2 हार्ट स्टंट? डॉक्टर ने बताई डराने वाली वजह


अगर आपके पिता, चाचा, दादा या परिवार का कोई सदस्य कम उम्र में हार्ट रोग से जूझ चुका है, तो आपका जोखिम भी 2–3 गुना बढ़ जाता है. आप एक्टिव हो या दुबले-पतले हों, फिर भी दिल की बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ सकती है.

लिपोप्रोटीन, यह एक बेहद खतरनाक प्रकार का कोलेस्ट्रॉल है. सामान्य लिपिड प्रोफाइल में इसकी जांच नहीं होती है. यह पूरी तरह जेनेटिक होता है. आपका LDL नॉर्मल होने पर भी यह धमनियों में ब्लॉकेज जमा कर सकता है.

लिपोप्रोटीन, यह एक बेहद खतरनाक प्रकार का कोलेस्ट्रॉल है. सामान्य लिपिड प्रोफाइल में इसकी जांच नहीं होती है. यह पूरी तरह जेनेटिक होता है. आपका LDL नॉर्मल होने पर भी यह धमनियों में ब्लॉकेज जमा कर सकता है.

सिर्फ दौड़ने या जिम जाने से तनाव कम नहीं होता, ज्यादा तनाव से  एड्रेनालाईन बढ़ता है,  ब्लड प्रेशर बढ़ता है,  शरीर में सूजन बढ़ती है और दिल की धमनियां कमजोर हो जाती हैं. आजकल की तेज कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल हार्ट पर बड़ा असर डालती है.

सिर्फ दौड़ने या जिम जाने से तनाव कम नहीं होता, ज्यादा तनाव से एड्रेनालाईन बढ़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है, शरीर में सूजन बढ़ती है और दिल की धमनियां कमजोर हो जाती हैं. आजकल की तेज कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल हार्ट पर बड़ा असर डालती है.

कई लोग बाहर से बिल्कुल फिट दिखते हैं, लेकिन उनके शरीर के अंदर सूजन बनी रहती है. यह सूजन धीरे-धीरे धमनियों को नुकसान पहुंचाती है, और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाती है. आम ब्लड टेस्ट में इसकी जांच नहीं होती है.

कई लोग बाहर से बिल्कुल फिट दिखते हैं, लेकिन उनके शरीर के अंदर सूजन बनी रहती है. यह सूजन धीरे-धीरे धमनियों को नुकसान पहुंचाती है, और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाती है. आम ब्लड टेस्ट में इसकी जांच नहीं होती है.

रोज 6 घंटे सोना काफी नहीं है.अगर आप आधी रात तक मोबाइल देखते रहते हैं या स्क्रीन यूज करते हैं, तो शरीर में मेटाबॉलिक स्ट्रेस बढ़ता है.इससे कॉर्टिसोल बढ़ जाता है,  खून गाढ़ा हो जाता है, प्लाक ज्यादा अस्थिर हो जाता है और अचानक हार्ट अटैक की संभावना बढ़ती है.

रोज 6 घंटे सोना काफी नहीं है.अगर आप आधी रात तक मोबाइल देखते रहते हैं या स्क्रीन यूज करते हैं, तो शरीर में मेटाबॉलिक स्ट्रेस बढ़ता है.इससे कॉर्टिसोल बढ़ जाता है, खून गाढ़ा हो जाता है, प्लाक ज्यादा अस्थिर हो जाता है और अचानक हार्ट अटैक की संभावना बढ़ती है.

दौड़ना, जॉगिंग, योगा फिटनेस के लिए अच्छे हैं,लेकिन ये गारंटी नहीं है कि आपकी धमनियां साफ हैं.दिल की बीमारी सिर्फ लाइफस्टाइल से नहीं बल्कि जीन, तनाव, सूजन, नींद और लिपोप्रोटीन(A) जैसे कई फैक्टर से मिलकर बनती है.

दौड़ना, जॉगिंग, योगा फिटनेस के लिए अच्छे हैं,लेकिन ये गारंटी नहीं है कि आपकी धमनियां साफ हैं.दिल की बीमारी सिर्फ लाइफस्टाइल से नहीं बल्कि जीन, तनाव, सूजन, नींद और लिपोप्रोटीन(A) जैसे कई फैक्टर से मिलकर बनती है.

डॉक्टरों के अनुसार, हर व्यक्ति को 25 साल की उम्र के बाद कुछ जांचें जरूरी करवानी चाहिए. जैसे Lipoprotein(a), HS-CRP (सूजन टेस्ट), ApoB, HbA1c, Fasting Insulin, Vitamin D, Homocysteine, TMT (अगर लक्षण दिखाई दें) और Coronary Calcium Score (35 साल के बाद), ये टेस्ट असली खतरे को समय रहते पकड़ सकते हैं.

डॉक्टरों के अनुसार, हर व्यक्ति को 25 साल की उम्र के बाद कुछ जांचें जरूरी करवानी चाहिए. जैसे Lipoprotein(a), HS-CRP (सूजन टेस्ट), ApoB, HbA1c, Fasting Insulin, Vitamin D, Homocysteine, TMT (अगर लक्षण दिखाई दें) और Coronary Calcium Score (35 साल के बाद), ये टेस्ट असली खतरे को समय रहते पकड़ सकते हैं.

Published at : 10 Dec 2025 07:06 AM (IST)

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ड्राई या इची हो रही स्किन तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना डैमेज हो जाएगी आपकी किडनी

ड्राई या इची हो रही स्किन तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना डैमेज हो जाएगी आपकी किडनी


Chronic Kidney Disease Symptoms: हमारी किडनी शरीर को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभाती है, खून को फिल्टर करने से लेकर मिनरल और फ्लूइड बैलेंस बनाए रखने तकय लेकिन जब किडनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है, तो शरीर में बढ़ते टॉक्सिन कई बार सबसे पहले त्वचा पर दिखाई देते हैं. इन संकेतों को समय रहते पहचान लेना बहुत जरूरी है. ब्लड और यूरिन टेस्ट किडनी रोग की पहचान का मुख्य तरीका हैं, लेकिन त्वचा पर बदलाव क्रॉनिक किडनी डिजीज के बढ़ते स्टेज में दिखाई देते हैं. अपनी स्किन और बाकी लक्षणों पर नजर रखना बीमारी की रफ्तार धीमी करने में मदद कर सकता है. चलिए आपको इन लक्षणों के बारे में बताते हैं. 

 त्वचा का बहुत ज्यादा सूखा होना 

बहुत रूखी, खुरदरी त्वचा किडनी के कमजोर होने का एक आम संकेत है.  TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, CKD वाले करीब 72 प्रतिशत लोगों में जेरोसिस पाया गया है. किडनी हमारे पसीने और ऑयल ग्लैंड को नियंत्रित करने में मदद करती है, इसलिए इनके कमजोर पड़ने पर त्वचा सूखने लगती है।

सूखी त्वचा में दरारें पड़ सकती हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. रिसर्च बताती है कि कई बार त्वचा का अत्यधिक सूखना पीलापन, खुजली या अन्य लक्षणों से पहले दिखाई देता है. इससे राहत पाने के लिए रोजाना हल्के मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें, गर्म पानी से लंबे समय तक नहाने से बचें और कॉटन जैसे सांस लेने वाले कपड़े पहनें. अगर सूखापन लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से किडनी की जांच कराएं. 

 लगातार खुजली होना

किडनी समस्या में लगातार तेज खुजली बहुत आम है. शरीर में यूरिया जैसे अपशिष्ट बढ़ने पर त्वचा के नर्व्स प्रभावित होते हैं, जिससे खुजली बढ़ती है. करीब 56 प्रतिशत CKD मरीज इस समस्या का सामना करते हैं और यह अक्सर फॉस्फोरस और पीटीएच लेवल बढ़ने से जुड़ी होती है. लगातार खुजलाने से त्वचा पर निशान, घाव या मोटे पैच बन सकते हैं. कुछ लोगों में खुजली इतनी बढ़ जाती है कि नींद और डेली रूटीन पर असर पड़ने लगता है. इलाज के लिए डॉक्टर अक्सर टॉपिकल क्रीम, UVB थेरेपी या ओटमील बाथ की सलाह देते हैं, लेकिन किडनी समस्या को कंट्रोल करना सबसे जरूरी है.

 त्वचा पर दाने या रैशेज

किडनी के ज्यादा खराब होने पर त्वचा पर रैशेज या छोटे-छोटे उठे हुए दाने दिख सकते हैं. जब खून में कचरा बढ़ जाता है, तो त्वचा पर छोटे, खुजली वाले बम्प्स बनते हैं, जो बाद में खुरदरे पैच का रूप ले सकते हैं. इसमें रैश, बैंगनी धब्बे या अल्सर भी बन सकते हैं, जो खासकर पैरों पर दिखाई देते हैं. एक गंभीर स्थिति कैल्सिफिलैक्सिस भी किडनी फेल्योर से जुड़ी है, जिसमें त्वचा कड़ी और अल्सर जैसी हो जाती है. लगभग 43 प्रतिशत CKD मरीज त्वचा के फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन से भी जूझते हैं. माइल्ड, फ्रेगरेंस-फ्री साबुन का इस्तेमाल और त्वचा को रगड़ने की बजाय हल्के हाथों से पोंछना जलन-दर्द कम कर सकता है. अगर रैश बढ़े, दर्द हो या पस आने लगे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

इसे भी पढ़ें: Male Infertility: पुरुषों में तेजी से बढ़ रही इनफर्टिलिटी, देश में 40% मामलों में मर्द खुद जिम्मेदार

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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