क्रिकेट मैदान पर पूर्व रणजी प्लेयर की मौत, जानें फिट खिलाड़ियों को क्यों पड़ रहा हार्ट अटैक?

क्रिकेट मैदान पर पूर्व रणजी प्लेयर की मौत, जानें फिट खिलाड़ियों को क्यों पड़ रहा हार्ट अटैक?


मिजोरम में पूर्व रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी के. लालरेमरूआता की क्रिकेट मैदान पर ही हार्ट अटैक से मौत हो गई. मिजोरम के लिए रणजी ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी खेल चुके लालरेमरूआता महज 38 साल के थे और पूरी तरह फिट लगते थे. इससे पहले 2024 के दौरान कर्नाटक के पूर्व क्रिकेटर के. होयसाला की मैच के दौरान मौत हो गई थी तो 2025 के दौरान पंजाब में हरजीत सिंह नाम के एक स्थानीय क्रिकेटर छक्का मारने के तुरंत बाद गिर पड़े और उनकी मौत हो गई थी. ये सभी खिलाड़ी युवा थे और नियमित रूप से क्रिकेट खेलते थे. ऐसे में सवाल उठता है कि फिट खिलाड़ियों को भी हार्ट अटैक क्यों पड़ रहा है?

क्या है पूरा मामला?

आइजॉल के पास सिहमुई में स्थानीय सेकंड डिवीजन टूर्नामेंट चल रहा था. 8 जनवरी के मैच में लालरेमरूआता बैटिंग कर रहे थे. बैटिंग खत्म करके वह पवेलियन की तरफ लौट रहे थे. अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ और वह मैदान पर ही गिर पड़े. साथी खिलाड़ी और दर्शक उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. मिजोरम क्रिकेट असोसिएशन ने बताया कि स्ट्रोक या हार्ट अटैक की वजह से ऐसा हुआ.

फिट दिखने वालों को क्यों पड़ रहा हार्ट अटैक?

मुंबई के सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजित मेनन कहते हैं कि जिम जाने वाले या खेलने वाले जवान लोग अचानक हार्ट अटैक के शिकार हो रहे हैं. इसका कारण नींद की कमी, ज्यादा तनाव, गलत खान-पान, देर रात पार्टी करके सुबह जिम जाना और कभी-कभी नशीले पदार्थों का इस्तेमाल है. दरअसल, कई बार नसों में पहले से प्लाक जमा होता है, जो फट जाता है और खून का थक्का बन जाता है.

यह दिक्कत भी आई सामने

विजयवाड़ा स्थित मणिपाल हॉस्पिटल में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. लक्ष्मी नव्या के मुताबिक, खेलते या एक्सरसाइज करते वक्त दिल तेज धड़कता है. अगर संबंधित व्यक्ति को पहले से ब्लॉकेज है तो अचानक दिक्कत हो सकती है और हार्ट अटैक पड़ सकता है. युवा खिलाड़ियों में जेनेटिक कारण भी होते हैं. साउथ एशियन लोगों में हार्ट की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है. इसके अलावा मोटापे, धूम्रपान, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और परिवार में हार्ट की बीमारी की हिस्ट्री से भी खतरा बढ़ता है. 

फिट लोग भी हो सकते हैं बीमार

डॉक्टरों का कहना है कि फिट दिखने वाले लोग भी हार्ट की समस्या के शिकार हो सकते हैं. कई बार दिल की नसों में ब्लॉकेज पहले से होती है, लेकिन पता नहीं चलता. खेलते समय दिल पर ज्यादा जोर पड़ता है तो ब्लॉकेज फट सकता है और हार्ट अटैक पड़ जाता है. पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में लोग 10 साल पहले ही हार्ट की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं.

कैसे रखें अपना ध्यान?

  • रोजाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें. नींद की कमी दिल पर बुरा असर डालती है.
  • तनाव कम करें. योग, ध्यान या घूमना-फिरना मदद करता है.
  • खान-पान संतुलित रखें. ज्यादा तला-भुना, जंक फूड से बचें. फल, सब्जियां, साबुत अनाज ज्यादा खाएं.
  • व्यायाम धीरे-धीरे बढ़ाएं. अचानक ज्यादा इंटेंस ट्रेनिंग न करें.
  • खेलने या जिम जाने से पहले डॉक्टर से दिल की जांच करवाएं. ईसीजी, ट्रेडमिल टेस्ट या ईको जरूरी है.
  • अगर परिवार में किसी को हार्ट की समस्या है तो ज्यादा अलर्ट रहें.
  • धूम्रपान और शराब बिल्कुल छोड़ दें.
  • खेलते समय अगर सीने में दर्द, सांस फूलना या चक्कर आएं तो तुरंत रुकें और डॉक्टर से मिलें.
  • इनके अलावा व्यायाम के साथ रेस्ट जरूरी है. हफ्ते में एक-दो दिन आराम भी करें.
  • हाइड्रेटेड रहें. खेलते समय खूब पानी पिएं.
  • संतुलित डाइट लें. बादाम, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स दिल के लिए अच्छे होते हैं.
  • ब्लड प्रेशर और शुगर चेक नियमित रूप से कराएं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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हार्ट अटैक से कितना अलग होता है कार्डियक अरेस्ट, वेदांता चीफ के बेटे की इसी से हुई मौत 

हार्ट अटैक से कितना अलग होता है कार्डियक अरेस्ट, वेदांता चीफ के बेटे की इसी से हुई मौत 


वेदांता ग्रुप के चीफ अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल की अमेरिका में मौत हो गई है. 49 साल की उम्र में अग्निवेश अग्रवाल की मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई. रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूयॉर्क में स्कीइंग के दौरान हुए एक हादसे के बाद अग्निवेश अग्रवाल हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था.  वहीं इलाज के दौरान उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा था, लेकिन अचानक आए कार्डियक अरेस्ट ने उनकी जान ले ली.

इस घटना के बाद एक बार फिर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट की चर्चा तेज हो गई है. आमतौर पर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन असल में मेडिकल सेक्टर में ये दोनों बिल्कुल अलग कंडीशन होती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक से कितना अलग होता है. 

कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?

कार्डियक अरेस्ट दिल से जुड़ा एक इलेक्ट्रिकल फेल्योर होता है, जो कि दिल में नेचुरल पेसमेकर होता है जो कि बिजली के सिग्नल भेजता है, जब ये इलेक्ट्रिकल सिग्नल अचानक बिगड़ जाते हैं या पूरी तरह रुक जाते हैं, तो दिल धड़कना बंद कर देता है. ऐसे में व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर सकता है और सांस भी रुक सकती है. इसी वजह से इसे सडन कार्डियक भी अरेस्ट कहा जाता है.

हार्ट अटैक से कैसे अलग है कार्डियक अरेस्ट?

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच सबसे बड़ा फर्क यही है कि हार्ट अटैक में दिल तक पहुंचने वाले खून के रास्ते में रुकावट आ जाती है. यानी दिल को पर्याप्त ब्लड सप्लाई नहीं मिलती, लेकिन दिल धड़कता रहता है और मरीज अक्सर होश में रहता है. वहीं कार्डियक अरेस्ट में दिल की धड़कन चलाने वाले इलेक्ट्रिकल इम्पल्स ही बंद हो जाते हैं, जिससे दिल पूरी तरह रुक जाता है. इसमें मरीज कुछ ही सेकंड में बेहोश हो जाता है और तुरंत इलाज न मिलने पर जान का खतरा बहुत ज्यादा होता है.

कार्डियक अरेस्ट क्यों आता है?

डॉक्टरों के अनुसार कार्डियक अरेस्ट हमेशा पहले से दिल की बीमारी होने की वजह से नहीं आता. यह अचानक भी हो सकता है. कई बार कार्डियक अरेस्ट दिल की धड़कन का असामान्य हो जाने की वजह से भी आ सकता है, जिसे एरिथमिया कहते हैं. वहीं वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन, जिसमें दिल का निचला हिस्सा खून पंप करने की बजाय कांपने लगता है इससे भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. दिल की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारी के चलते भी कार्डियक अरेस्ट हो सकता है. इनके अलावा दिल की नसों में रुकावट या लंबे समय से चल रही कोरोनरी आर्टरी डिजीज की वजह से भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. 

रिकवरी में क्यों बढ़ जाता है कार्डियक अरेस्ट का खतरा?

किसी बड़े हादसे या सर्जरी के बाद शरीर पहले से कमजोर होता है. ऐसे में खून की कमी, ऑक्सीजन लेवल गिरना, छाती पर चोट या ज्यादा तनाव दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है. यही वजह होती है कि कई बार हॉस्पिटल में इलाज के दौरान भी कार्डियक अरेस्ट का खतरा रहता है. वहीं कार्डियक अरेस्ट के लक्षणों में अचानक चक्कर आना या बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, दिल की धड़कन बहुत तेज या अनियमित होना, सीने में दर्द और कमजोरी  जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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24 की उम्र में 70 साल जैसा दिमाग, पढ़ें कैसे खतरनाक बीमारी ने छीन ली आंद्रे यारहम की जिंदगी?

24 की उम्र में 70 साल जैसा दिमाग, पढ़ें कैसे खतरनाक बीमारी ने छीन ली आंद्रे यारहम की जिंदगी?


Dementia Research Brain Donation: इंग्लैंड के नॉरफोक स्थित डेरेहम में रहने वाले आंद्रे यारहम की उम्र महज 22 साल थी, जब उनकी मां सामंथा फेयरबेयरन ने उनके व्यवहार में चिंताजनक बदलाव महसूस किए. उन्हें लगने लगा कि बेटा छोटी-छोटी बातें भूलने लगा है और कई बार उसका व्यवहार उम्र के हिसाब से असामान्य हो जाता है.  इसी वजह से वे उसे डॉक्टर के पास ले गईं और वहां डॉक्टर के मुंह से जो निकला वह सुनकर हैरान रह गईं, चलिए आपको बताते हैं कि डॉक्टर ने किस बीमारी के बारे में बताया था?

डॉक्टर ने किस बीमारी के बारे में बताया?

जांच के बाद डॉक्टरों ने आंद्रे को फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया  होने की पुष्टि की. यह डिमेंशिया का एक रेयर प्रकार है, जो दिमाग में एक खास प्रोटीन म्यूटेशन के कारण होता है. इस बीमारी में याददाश्त के साथ-साथ व्यक्ति के व्यवहार, सोचने-समझने और बोलने की क्षमता पर भी तेजी से असर पड़ता है. बीमारी का पता चलने पर किए गए ब्रेन स्कैन में दिमाग के असामान्य रूप से सिकुड़ने के संकेत मिल. इसके बाद उन्हें कैम्ब्रिज स्थित  रेफर किया गया, जहां डिमेंशिया की पुष्टि हुई. 

24 साल की उम्र में निधन

आंद्रे यारमन की 24 साल की उम्र में दर्दनाक बीमारी के चलते मौत हो गई. यह बीमारी आमतौर पर उम्रदराज लोगों की होती है. एमआरआई के दौरान जो मिला, उसने काफी हैरान किया. दरअसल पता चलता कि उसका ब्रेन 70 साल जैसे इंसान की तरह हो गया था.  BBC से बातचीत में आंद्रे की मां ने कहा कि यह जानना बेहद दर्दनाक था कि इतनी कम उम्र में उनके बेटे को डिमेंशिया हो गया. उन्होंने बताया कि यह बीमारी उम्र नहीं देखती और उनका बेटा शायद सबसे कम उम्र के मरीजों में से एक था.

देखभाल मुश्किल

जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती गई, परिवार के लिए उसकी देखभाल करना मुश्किल होता चला गया. सितंबर में आंद्रे को केयर होम में शिफ्ट करना पड़ा और कुछ ही हफ्तों बाद वह व्हीलचेयर पर आ गया. मौत से करीब एक महीने पहले उसने बोलने की क्षमता भी खो दी थी और केवल आवाजें निकाल पाता था. हालांकि, उनकी मां के मुताबिक, बीमारी के आखिरी दौर तक आंद्रे की मुस्कान, ह्यूमर और व्यक्तित्व बना रहा, 27 दिसंबर को उनकी मौत हो गई. मरने से पहले आंद्रे ने अपना दिमाग रिसर्च के लिए दान करने का फैसला किया, ताकि भविष्य में इस बीमारी पर बेहतर इलाज और समझ विकसित की जा सके. उनकी मां का कहना है कि अगर उनके बेटे का यह फैसला किसी एक परिवार को भी अपने प्रिय के साथ कुछ साल ज्यादा बिताने का मौका दे सके, तो यह सार्थक होगा. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ECG की नॉर्मल रिपोर्ट के भरोसे बैठे हैं तो हो जाएं सावधान, ध्यान नहीं दिया तो हो सकती है मौत

ECG की नॉर्मल रिपोर्ट के भरोसे बैठे हैं तो हो जाएं सावधान, ध्यान नहीं दिया तो हो सकती है मौत


ECG Normal Still Heart Attack: ईसीजी यानी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम दिल की जांच के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला टेस्ट है. इसमें हार्ट की धड़कन को कंट्रोल करने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल रिकॉर्ड किए जाते हैं. इससे हार्ट रिदम की गड़बड़ी या पुराने हार्ट अटैक के संकेत सामने आ सकते हैं. टेस्ट जल्दी हो जाता है, दर्द नहीं होता और खर्च भी कम होता है इसलिए जब रिपोर्ट नॉर्मल आती है, तो ज्यादातर लोग राहत महसूस करते हैं.

लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि नॉर्मल ईसीजी का मतलब यह नहीं होता कि हार्ट पूरी तरह स्वस्थ है. कई बार दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं ईसीजी में पकड़ में ही नहीं आतीं. सिर्फ इसी रिपोर्ट पर भरोसा करने से झूठी तसल्ली मिल सकती है, जो आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकती है.

क्यों सिर्फ ईसीजी से दिल की पूरी सेहत नहीं पता चलती?

दरअसल, दिल तीन अहम सिस्टम पर काम करता है. पहला, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, जिसे ईसीजी जांचता है यह बताता है कि दिल की धड़कन सही रिदम में है या नहीं. दूसरा, मस्क्युलर सिस्टम, यानी दिल की मांसपेशियों की ताकत, जिसे आमतौर पर 2D इको से देखा जाता है. तीसरा, ब्लड फ्लो सिस्टम, जो यह दर्शाता है कि आर्टरीज में खून सही तरीके से बह रहा है या नहीं, इसके लिए एंजियोग्राफी की जाती है.

National Institutes of Health में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, आराम की स्थिति में की गई ईसीजी जांच के आधार पर केवल करीब 62 फीसदी मरीजों में ही कोरोनरी आर्टरी डिजीज की पहचान हो पाई. यानी बड़ी संख्या में ऐसे मरीज होते हैं, जिनकी ईसीजी नॉर्मल होती है, लेकिन हार्ट की धमनियों में ब्लॉकेज मौजूद रहता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक थकान, पसीना या चक्कर जैसे लक्षण दिखें, तो सिर्फ ईसीजी पर निर्भर न रहें. जरूरत पड़ने पर इको, स्ट्रेस टेस्ट या एंजियोग्राफी जैसी जांच भी करानी चाहिए, ताकि दिल की बीमारी समय रहते पकड़ी जा सके.

उम्र के साथ कैसे आपको अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए

जैसे-जैसे इंसान का उम्र बढ़ता है, वैसे-वैसे, हृदय की मांसपेशियों में स्वाभाविक परिवर्तन आते हैं, जिन्हें ईसीजी के माध्यम से ट्रैक किया जा सकता है. इसको लेकर डॉक्टर नरेश त्रेहान चेयरमैन मेडिसिटी मेदान्ता हॉस्पिटल ने कुछ हेल्थ के मंत्र सुझाए हैं, जिन्हें अगर हम अपनी लाइफ में फॉलो करते हैं, तो हम एक बेहतर जिंदगी जी सकते हैं. वे बताते हैं कि

सबसे पहले आपको ध्यान रखना है कि आपको प्यास लगे न लगे पानी पीते रहना है. कम से कम दो लीटर पानी दिन में पीना जरूरी है.

दूसरी बात यह है कि ज्यादा से ज्यादा काम करते रहिए, हमेशा लेटे या फिर लेजी बॉय की तरह मत रहिए. चलिए, फिरिए काम करते रहिए. अगर आप एक्सरसाइज करते हैं, तो शरीर एक्टिव रहता है.

तीसरी सबसे जरूरी बात, खाना कम खाइए. जितना शरीर के लिए जरूरी हो, उतना ही खाना खाने की कोशिश कीजिए. इसमें भी आपको पौष्टिक भोजन खाना है. रात में कार्बोहाइट्रेट खाना बंद कर दीजिए.

चौथा मंत्र यह है कि वाहन का प्रयोग कम करना चाहिए. अगर आपको एक सीमित दूरी तक जाना है, तो कोशिश करिए कि पैदल जाना चाहिए, इससे शरीर में एनर्जी बर्न होती है. कोशिश करिए कि वाहन, लिफ्ट का प्रयोग कम हो.

पांचवा और सबसे जरूरी बात कि गुस्से पर आपको कंट्रोल करना है. इसके लिए आपको कम बोलना है, बोलने से पहले सोचिए कि आपको क्या बोलना है और क्या नहीं बोलना है.

छठा मंत्र यह है कि आपको धन का मोह छोड़ देना चाहिए, एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि उतना ही धन कमाना जरूरी है, जितना जीने के लिए जरूरी हो.

 

सातवां मंत्र यह है कि आपको अगर लाइफ में जो चाहिए वह नहीं मिल रहा है, तो निराश नहीं होना है. इसको साइड में रखकर अपनी लाइफ इंजॉय करना चाहिए.

आठवां यह है कि आपको अहंकार और इगो को त्यागकर अपनी लाइफ को अच्छे से जीना चाहिए. सबसे साथ मिलकर हंसी-खुशी से लाइफ जीना चाहिए.

नौवां मंत्र यह है कि अगर आपके बाल सफेद हो जाते हैं, तो यह मत सोचिए कि आपको इसको काला करना है. जिंदगी को स्मृतियों में जिए और यात्रा करिए और जिंदगी का आनंद लीजिए.

दसवां मंत्र यह है कि अपने छोटों से प्यार करिए, उनके साथ सहानुभूति रखिए और मिल-जुलकर उनके साथ रहिए, क्योंकि कभी-कभी वे आपको बहुत कुछ सिखा सकते हैं.

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पानी कम पीने से शरीर में हो सकते हैं ये 5 गंभीर बदलाव, तुरंत ध्यान दें

पानी कम पीने से शरीर में हो सकते हैं ये 5 गंभीर बदलाव, तुरंत ध्यान दें


जब हम पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, तो हमारे मुंह की नमी कम हो जाती है. इससे मुंह में बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं और सांसों में बदबू आने लगती है. पानी पीने से मुंह साफ और फ्रेश रहता है. इसलिए अगर आप अक्सर मुंह से दुर्गंध महसूस कर रहे हैं, तो यह शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है.

पानी हमारे शरीर के लिए जरूरी है क्योंकि यह स्कैल्प और बालों की जड़ों तक पोषण पहुंचाता है. अगर शरीर में पानी की कमी होती है तो स्कैल्प ड्राई हो जाता है और बाल कमजोर होकर जल्दी झड़ने लगते हैं. बिना किसी और कारण के अगर आपके बाल अचानक ज्यादा गिरने लगें तो इसे अनदेखा न करें.

पानी हमारे शरीर के लिए जरूरी है क्योंकि यह स्कैल्प और बालों की जड़ों तक पोषण पहुंचाता है. अगर शरीर में पानी की कमी होती है तो स्कैल्प ड्राई हो जाता है और बाल कमजोर होकर जल्दी झड़ने लगते हैं. बिना किसी और कारण के अगर आपके बाल अचानक ज्यादा गिरने लगें तो इसे अनदेखा न करें.

Published at : 09 Jan 2026 09:04 AM (IST)

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