हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है संकेत, क्या आप भी कर रहे हैं नजरअंदाज? 

हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है संकेत, क्या आप भी कर रहे हैं नजरअंदाज? 


आज के समय में हार्ट अटैक एक गंभीर और तेजी से बढ़ती समस्या बन चुका है, वही अक्सर लोग सोचते हैं कि हार्ट अटैक अचानक आता है, लेकिन सच्चाई यह है कि हमारा शरीर कई हफ्तों पहले ही इसके संकेत देने लगता है, अक्सर इन लक्षणों कोहल्केमें लेने या नजरअंदाज करने की वजह से बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है. वही वैश्विक अनुमानों को अनुसार हृदय रोग आज भी सबसे बड़ा जानलेवा रोग बना हुआ है, दिल से जुड़ी बीमारियां दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण हैं, जिससे हर साल लगभग 1.8 करोड़ मौतें होती हैं. 

तो क्या आपका शरीर वाकई दिल का दौरा पड़ने से हफ़्तों पहले चेतावनी दे सकता है? कई मामलों में, हां. स्ट्रक्चरल हार्ट प्रोग्राम के प्रमुख डॉ. विवेक कुमार कहते हैं कि लक्षण कई दिन या हफ़्तों पहले भी दिख सकते हैं, लेकिन वे हमेशा गंभीर नहीं होते, यह एक अजीब तरह की थकान हो सकती है जो दूर नहीं होती, या सीने में हल्का दबाव जो आता-जाता रहता है. साथ ही  कुछ लोगों को रोज़मर्रा के काम करते समय सांस फूलने लगती है, और कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें कुछ भी महसूस नहीं होता. 

 

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

रिपोर्ट में हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, हार्ट अटैक आने से पहले शरीर कुछ चेतावनी संकेत देता है, लेकिन लोग इन्हें सामान्य थकान या गैस समझकर इग्नोर कर देते हैं, जो आगे चल कर खतरनाक हो सकता है इसलिए अगर शरीर बार-बार कोई संकेत दे रहा है, तो उसे हल्के में लेना सही नहीं है तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहीए. 

शुरुआती लक्षण, जिन्हें लोग कर देते हैं नजरअंदाज

दिल का दौरा पड़ने के कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जो वास्तव में दौरा पड़ने से कई दिन या सप्ताह पहले दिखाई दे सकते हैं . इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी निदेशक डॉ. विनीत भाटिया बताते है कि  शुरुआती लक्षणों में ज्यादातर हल्के सीने में दर्द या दबाव, असामान्य थकान, सांस लेने में तकलीफ, अपच जैसी बेचैनी और जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैलने वाला दर्द शामिल होता है, इसके अलावा सांस लेने में दिक्कत होना, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना और चक्कर आना एक सुरुआती संकेत है , कई मरीज बाद में बताते हैं कि उन्होंने थकान को नजरअंदाज कर दिया या सीने की तकलीफ को गैस समझकर अनदेखा कर दिया था.  जो की आगे चल कर एक दर्द नाक हार्ट अटैक का कारण बन जाता है. 

 

महिलाओं में अलग हो सकते हैं लक्षण

डॉ. विवेक कुमार बताते है की  पुरुषों और महिलाओं में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं,  जहां पुरुषों में सीने में दर्द एक सबसे आम लक्षण होता है, वहीं महिलाओं में सीने में तेज दर्द के बजाय थकान, मतली, या सांस फूलने जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं , इसी कारण महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा पहचानना थोड़ा ज्यादा मुश्किल हो जाता है. 

हमेशा सही नहीं होते टेस्ट

यह संभव है कि सामान्य जांच के नतीजे नेगेटिव आ सकते है, जैसे  ईसीजी में हृदय की लय में कोई समस्या न दिखाइ दे, और रक्त परीक्षण के परिणाम सामान्य हों, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई बार सामान्य मेडिकल टेस्ट भी हार्ट अटैक के खतरे को नहीं पहचान पाते,  छिपे हुए जोखिम अप्रत्याशित रूप से उत्पन्न हो सकते हैं और  तत्काल दिल का दौरा पड़ सकता है, इसलिए शुरुआती जांच के नतीजों की परवाह किए बिना किसी भी लक्षण को कभी भी नज़रअंदाज़ न करे. 

 

टेक्नोलॉजी भी कर सकती है मदद

पहनने योग्य  स्मार्टवॉच और हेल्थ ट्रैकिंग डिवाइस आपकी हृदय गति को ट्रैक करने और उसमें होने वाली अनियमितताओं का पता लगाने में सक्षम होतो है,  जिससे आपके हृदय की स्थिति के बारे में, ऑक्सीजन लेवल और अन्य संकेतों को मॉनिटर करने में मदद मिलती है,  हालांकि, ये उपकरण दिल के दौरे को रोकने में सक्षम नहीं होते हैं, बल्की  शुरुआती बदलावों को पकड़ने में सहायक हो सकते हैं, जिससे समय रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है

आपको क्या करना चाहिए? 

यदि किसी व्यक्ति को कुछ मिनटों से अधिक समय तक सीने में तकलीफ महसूस हो या सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक पसीना आना, बार-बार यह तकलीफ हो, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से सहायता लेनी चाहिए, मुश्किल बात यह है कि ये लक्षण हमेशा जरूरी नहीं लगते, लेकिन अगर कुछ गड़बड़ लगे और बार-बार हो, तो ध्यान देना जरूरी है, समय पर इलाज से बड़ी समस्या को रोका जा सकता है. 

 

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

 

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

3 हफ्ते से ज्यादा रहने वाली खांसी सामान्य नहीं, फेफड़ों के कैंसर के ये संकेत न करें नजरअंदाज

3 हफ्ते से ज्यादा रहने वाली खांसी सामान्य नहीं, फेफड़ों के कैंसर के ये संकेत न करें नजरअंदाज


Can A Persistent Cough Be Lung Cancer: फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा संकेत जानना क्यों जरूरी है? इसकी वजह काफी गंभीर है. अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार हर साल फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतें प्रोस्टेट, ब्रेस्ट और कोलन कैंसर को मिलाकर होने वाली मौतों से भी ज्यादा होती हैं. यही कारण है कि इसके शुरुआती संकेतों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है. चलिए आपको बताते हैं कि इसके लक्षण कब सामने आते हैं और यह कितना खतरनाक होता है. 

65 साल की उम्र के बाद मामले

आंकड़ों के मुताबिक, ज्यादातर मरीजों में यह बीमारी 65 साल की उम्र के बाद सामने आती है. इसका सबसे बड़ा जोखिम कारक धूम्रपान है, जो फेफड़ों के कैंसर का खतरा कई गुना तक बढ़ा देता है. हालांकि, सिर्फ स्मोकिंग ही वजह नहीं है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, रेडॉन गैस जो एक प्राकृतिक गैस है भी इस बीमारी का बड़ा कारण बन सकती है.

क्या होते हैं इसके संकेत?

अब सवाल है कि इसका सबसे अहम संकेत क्या है? David Yashar, जो अमेरिका के मेमोरियलकेयर कैंसर इंस्टीट्यूट से जुड़े हैं, उनके अनुसार, लगातार बनी रहने वाली खांसी इसका सबसे सामान्य संकेत हो सकती है. अगर खांसी 2-3 हफ्तों तक ठीक नहीं होती, चाहे दवाइयां ली जा रही हों या घरेलू उपाय किए जा रहे हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

इसे भी पढ़ें –  New Covid Variant: 75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट, जानें इससे डरने की जरूरत कितनी?

हालांकि, एक बड़ी चुनौती यह है कि लंग्स का कैंसर शुरुआती चरण में अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं देता. कई बार इसके लक्षण तब तक सामने नहीं आते जब तक बीमारी काफी आगे न बढ़ जाए. यही वजह है कि इसके संकेत अक्सर अन्य सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं और लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते.

कुछ अन्य संकेतों में खून के साथ खांसी आना, अचानक वजन कम होना, सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं. लेकिन चूंकि ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखते हैं, इसलिए भ्रम की स्थिति बन जाती है. अगर आप स्मोकिंग करते हैं या पहले कर चुके हैं, तो इन लक्षणों को लेकर और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे किसी भी संकेत को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टरों के मुताबिक, अगर शक ज्यादा हो तो चेस्ट एक्स-रे और सीटी स्कैन जैसे टेस्ट किए जाते हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि फेफड़ों में कोई गांठ या असामान्य बदलाव तो नहीं है. इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर इलाज की दिशा तय की जाती है.

इसे भी पढ़ें- Why Do I Get Headaches: बार-बार होने वाला सिरदर्द मामूली नहीं, शरीर दे रहा ये 5 बड़े संकेत; आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

वजन घटाने के लिए अपनाएं ये 5 बोरिंग आदतें, एक्सपर्ट बोले-यही देती हैं असली रिजल्ट

वजन घटाने के लिए अपनाएं ये 5 बोरिंग आदतें, एक्सपर्ट बोले-यही देती हैं असली रिजल्ट


Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बिना शराब छुए भी बीमार हो सकता है आपका लिवर, जानें क्या है ‘साइलेंट किलर’ फैटी लिवर

बिना शराब छुए भी बीमार हो सकता है आपका लिवर, जानें क्या है ‘साइलेंट किलर’ फैटी लिवर


Why Fatty Liver Happens Without Alcohol: सिर्फ हेल्दी दिखने भर से लिवर स्वस्थ रहेगा, ऐसा मानना अब सही नहीं रह गया है. आजकल डॉक्टर ऐसे लोगों में भी फैटी लिवर की समस्या देख रहे हैं जो न शराब पीते हैं, न धूम्रपान करते हैं और घर का खाना ही खाते हैं. यह स्थिति इसलिए उलझन भरी लगती है क्योंकि बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर लिवर पर दबाव बढ़ता रहता है. असल वजह हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें हैं, जिन पर अक्सर ध्यान ही नहीं जाता. 

लाइफस्टाइल से जुड़ी है बीमारी

डॉक्टरों के मुताबिक, नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज तेजी से बढ़ने वाली लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी बन चुकी है. यह तब होता है जब बिना शराब के सेवन के भी लिवर में फैट जमा होने लगता है. साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित एक बड़ी स्टडी बताती है कि शहरी भारत में यह समस्या अब आम होती जा रही है और इसका सीधा संबंध हमारी बदलती लाइफस्टाइल से है.

इसे भी पढ़ें- Benefits Of Drinking Water: चाय-कॉफी से नहीं मिटेगी शरीर की प्यास, डिहाइड्रेशन से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डॉ. आम्रपाली पाटिल ने TOI को बताया कि “यह एक आम गलतफहमी है कि लिवर की बीमारी सिर्फ शराब से होती है। कई नॉन-अल्कोहोलिक कारण भी लिवर के कामकाज को प्रभावित करते हैं.” दरअसल, जिस नॉर्मल डाइट को हम सही मानते हैं, वह अब पहले जैसी नहीं रही. रिफाइंड आटा, छिपी हुई शुगर, पैकेज्ड स्नैक्स और बार-बार बाहर का खाना मंगाना धीरे-धीरे लिवर में फैट जमा करने लगता है. लिवर का काम शरीर में जाने वाली हर चीज को प्रोसेस करना है, लेकिन जब यह ओवरलोड हो जाता है तो फैट जमा होने लगता है.

इसके अलावा, कम चलना-फिरना, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना और नींद की कमी मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन  के अनुसार, शारीरिक एक्टिविटी न करने की वजह से  मेटाबॉलिक बीमारियों का बड़ा कारण है. कुछ कारण ऐसे भी हैं जिन पर लोग ध्यान नहीं देते, वह है जैसे लंबे समय तक दवाइयों का सेवन, क्रैश डाइटिंग, अनियमित खाने की आदतें और अचानक तेजी से वजन कम करना. डॉ. पाटिल के अनुसार, “ये सभी चीजें लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं और समय के साथ समस्या को बढ़ा सकती हैं.”

शुरूआत में दिखाई नहीं देते हैं लक्षण

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते. हल्की थकान, पेट फूलना या सामान्य असहजता को लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. डॉ. पाटिल बताती हैं कि शुरुआती चरण में मरीज बिना किसी खास लक्षण के भी हो सकते हैं, और जब तक समस्या समझ आती है, तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है. इससे बचने के लिए बहुत बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है, बल्कि छोटे और लगातार किए जाने वाले सुधार ज्यादा असरदार होते हैं. प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा मीठे पेय, देर रात खाना और बिना जरूरत के सप्लीमेंट्स लेने से बचना चाहिए. लिवर की सेहत के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक, संतुलित आहार और अच्छी नींद बेहद जरूरी है.

इसे भी पढ़ें- Cervical Cancer In India: हर 8 मिनट में एक जान! साइलेंट किलर है सर्वाइकल कैंसर, डॉक्टर से जानें इसे रोकने के 5 कारगर तरीके 

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बार-बार होने वाला सिरदर्द मामूली नहीं, शरीर दे रहा ये 5 बड़े संकेत; आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज

बार-बार होने वाला सिरदर्द मामूली नहीं, शरीर दे रहा ये 5 बड़े संकेत; आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज


Why Am I Getting Headaches Frequently: अगर आपको बार-बार सिरदर्द होता है, तो हो सकता है आपने इसे कई बार नजरअंदाज किया हो. कभी काम का दबाव, कभी ज्यादा स्क्रीन टाइम, तो कभी नींद की कमी और एक पेनकिलर लेकर बात खत्म लेकिन जब सिरदर्द बार-बार होने लगे, तो यह सिर्फ एक साधारण परेशानी नहीं, बल्कि शरीर का संकेत भी हो सकता है कि कुछ ठीक नहीं चल रहा. चलिए आपको बताते हैं कि सरदर्द की दिक्कत क्यों होती है और इससे शरीर में किस कमी का पता चलता है. 

क्या होता है कारण?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक की रिपोर्ट के अनुसार, इसके कई कारण हो सकते हैं. कभी यह तनाव से जुड़ा होता है, तो कभी आपकी डेली रूटीन, पानी की कमी, नींद या खानपान से. इसलिए इसे नजरअंदाज करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि आखिर इसके पीछे वजह क्या है. इसमें सबसे आम कारणों में से एक है तनाव. यह हमेशा खुलकर महसूस नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे जमा होता रहता है, काम का दबाव, जिम्मेदारियां या दिमाग में चलती चिंताएं. यह तनाव गर्दन, कंधों और जबड़े की मांसपेशियों को टाइट कर देता है, जो धीरे-धीरे सिरदर्द में बदल जाता है. ऐसा दर्द अक्सर सिर के चारों ओर भारीपन या दबाव जैसा महसूस होता है.

पानी की कमी

दूसरा बड़ा कारण है पानी की कमी. दिनभर में कई लोग पर्याप्त पानी नहीं पीते और कॉफी या चाय को ही पर्याप्त समझ लेते हैं. लेकिन शरीर को जब पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो उसका असर सिरदर्द के रूप में दिख सकता है. ऐसे सिरदर्द में भारीपन और सुस्ती महसूस होती है, जो खासकर दोपहर के समय बढ़ जाती है. 

स्कीन का ज्यादा यूज

आज के समय में स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल भी सिरदर्द की बड़ी वजह बन गया है. लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने से आंखों पर दबाव पड़ता है, जिससे आंखों के पीछे या माथे में दर्द होने लगता है. अगर थोड़ी देर आंखें बंद करने या स्क्रीन से दूर रहने पर आराम मिले, तो यह साफ संकेत है कि आंखों को आराम की जरूरत है. 

नींद की कमी भी कारण

नींद की कमी या खराब नींद भी सिरदर्द को बढ़ा सकती है. सिर्फ घंटों की नींद ही नहीं, बल्कि उसकी क्वालिटी भी मायने रखती है. अगर आप रात में बार-बार जागते हैं, देर तक मोबाइल चलाते हैं या नींद पूरी नहीं होती, तो सुबह उठते ही सिर भारी लग सकता है.

इसे भी पढ़ें – Panic Attack Treatment: क्या होता है पैनिक अटैक, जानें इससे निपटने के लिए क्या हैं सबसे आसान तरीके?

खाना भी हो सकता है कारण

इसके अलावा, भोजन छोड़ना या देर से खाना भी सिरदर्द का कारण बन सकता है. जब लंबे समय तक खाना नहीं खाया जाता, तो ब्लड शुगर गिरने लगता है, जिससे सिरदर्द, कमजोरी और चक्कर जैसी समस्या हो सकती है.

कब ज्यादा दिक्कत?

हालांकि ज्यादातर सिरदर्द खतरनाक नहीं होते, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे या पहले से ज्यादा तेज हो जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बेहतर है कि आप अपनी डेली रूटीन पर ध्यान दें कि कब दर्द होता है, किस वजह से बढ़ता है और क्या करने से कम होता है. छोटे-छोटे बदलाव जैसे पर्याप्त पानी पीना, समय पर सोना, स्क्रीन से ब्रेक लेना और तनाव को संभालना, ये सब मिलकर सिरदर्द की समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

इसे भी पढ़ें –  New Covid Variant: 75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट, जानें इससे डरने की जरूरत कितनी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

सिर्फ मोबाइल छोड़ना काफी नहीं, आपका लैपटॉप और ऑफिस की ‘सफेद रोशनी’ भी छीन रही है नींद

सिर्फ मोबाइल छोड़ना काफी नहीं, आपका लैपटॉप और ऑफिस की ‘सफेद रोशनी’ भी छीन रही है नींद


Why Less Phone Use Doesn’t Improve Sleep: आजकल बहुत से लोग यह सोचकर सुकून महसूस करते हैं कि उन्होंने फोन का इस्तेमाल कम कर दिया है, इसलिए उनकी नींद और मेंटल हेल्थ बेहतर हो जाएगी. लेकिन असलियत इससे थोड़ी अलग है. आधुनिक ऑफिस लाइफ में स्क्रीन से दूरी बनाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि लैपटॉप, मीटिंग्स और तेज रोशनी लगातार दिमाग को एक्टिव बनाए रखते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि मोबाइल के अलावा और क्या है कारण. 

ईमेल भी है कारण

सुबह की शुरुआत ईमेल से होती है और दिन भर स्क्रीन के सामने बैठकर काम चलता रहता है. ऊपर से ऑफिस की तेज, सफेद रोशनी भी दिन जैसी ही लगती है. ऐसे में शरीर को यह संकेत ही नहीं मिल पाता कि अब आराम का समय है. नतीजा यह होता है कि रात में नींद हल्की लगती है, दिमाग शांत नहीं होता और सुबह उठना भारी महसूस होता है.

 छिपे हुए स्क्रीन एक्सपोजर

यह समस्या सिर्फ ज्यादा फोन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि छिपे हुए स्क्रीन एक्सपोजर से जुड़ी है. एक सामान्य ऑफिस जॉब में 6 से 10 घंटे तक स्क्रीन देखना आम बात है. फर्क सिर्फ इतना है कि यह काम का हिस्सा होता है, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन दिमाग के लिए स्क्रीन स्क्रीन ही होती है, चाहे वह काम की हो या मनोरंजन की. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

डॉ. नेहा कपूर बताती हैं कि लोग अक्सर सोचते हैं कि फोन कम इस्तेमाल करने से वे स्क्रीन के नुकसान से बच जाएंगे, जबकि ऑफिस में लैपटॉप और कमरे की रोशनी भी शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करती है. इससे मेलाटोनिन हार्मोन बनने में रुकावट आती है, जो नींद के लिए बेहद जरूरी है.  जब मेलाटोनिन का स्तर प्रभावित होता है, तो सोने का समय आगे खिसक जाता है. भले ही आप समय पर बिस्तर पर चले जाएं, लेकिन दिमाग ऑफ नहीं हो पाता. यही वजह है कि कई लोग थकान के बावजूद देर तक जागते रहते हैं.

इसे भी पढ़ें- Cervical Cancer In India: हर 8 मिनट में एक जान! साइलेंट किलर है सर्वाइकल कैंसर, डॉक्टर से जानें इसे रोकने के 5 कारगर तरीके 

नींद होती है प्रभावित 

इस बात को कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी मान चुकी हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, शाम के समय ब्लू लाइट का एक्सपोजर मेलाटोनिन को कम कर देता है और नींद की क्वालिटी खराब करता है.  वहीं सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन भी मानता है कि सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल नींद को प्रभावित करता है. सिर्फ रोशनी ही नहीं, बल्कि लगातार मानसिक सक्रियता भी एक बड़ी वजह है. दिन भर ईमेल, मैसेज और मीटिंग्स दिमाग को पूरी तरह शांत नहीं होने देते. इसका असर धीरे-धीरे दिखता है, फोकस कम होने लगता है, याददाश्त कमजोर पड़ती है और मूड में बदलाव आने लगता है.

बचने के लिए क्या हैं उपाय

हालांकि इससे बचने के लिए कुछ छोटे बदलाव काफी मदद कर सकते हैं. हर 20 मिनट में कुछ सेकंड के लिए स्क्रीन से नजर हटाना, शाम के समय स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करना, सोने से पहले 45-60 मिनट का गैप रखना और कमरे की लाइट हल्की करना, ये सभी आदतें नींद को बेहतर बना सकती हैं.  एक्सपर्ट्स यही कहते हैं कि नींद को हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह सिर्फ आराम नहीं, बल्कि दिमाग के सही तरीके से काम करने के लिए जरूरी प्रक्रिया है. छोटी-छोटी आदतें बदलकर भी आप अपनी नींद और मेंटल सेहत को बेहतर बना सकते हैं.

इसे भी पढ़ें- Benefits Of Drinking Water: चाय-कॉफी से नहीं मिटेगी शरीर की प्यास, डिहाइड्रेशन से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp