सर्दियों में बालों के झड़ने से परेशान तो ये घरेलू उपाय करेंगे मदद, बढ़ जाएगी ग्रोथ

सर्दियों में बालों के झड़ने से परेशान तो ये घरेलू उपाय करेंगे मदद, बढ़ जाएगी ग्रोथ


सर्दियों के मौसम में बाल झड़ने की समस्या से अक्सर लोग परेशान होते हैं. उनका कहना होता है की जैसे ही सर्दियों का मौसम आता है तो तेजी से बाल झड़ने लगते हैं जिसकी सबसे बड़ी वजह है ठंडी और सूखी हवा स्कैल्प की नमी खींच लेती है. इससे सिर की त्वचा ड्राई होकर रूसी बढ़ाती है, बालों की जड़ें कमजोर होने लगती हैं और हेयर फॉल तेज हो जाता है, ऊपर से गर्म पानी से बार बार बाल धोना, ओवर स्टाइलिंग और पोषण की कमी भी झड़ने को और बढ़ा देती है. इसलिए हमें सर्दियों में अपने बालों की एक्स्ट्रा केयर करनी चाहिए. यहां कुछ नुस्खे हैं जिसे अपनाकर आप काफी हद तक अपनी इस समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं और इन नुस्खों में शामिल चीजें आसानी से आपके घर में उपलब्ध होती है जिससे आपको ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी.

ग्रीन टी के इस्तेमाल से हेयर ग्रोथ बढ़ाएं

लोग ग्रीन टी का सेवन करते हैं, आमतौर पर वजन कम करने के लिए लेकिन आपको ये नहीं पता की जिस ग्रीन टी के कवर को आप उपयोग करने के बाद कूड़ा समझ के फेंक देते हो वो बालों की ग्रोथ के लिए बहुत फायदेमंद है. अगर आप उस कवर में बची हुई पट्टी को गरम पानी में मिलाकर अपने स्कैल्प पर लगाए और कुछ देर के लिए ऐसे ही लगे रहने दे फिर अपने बालों को अच्छी तरह से धो. ग्रीन टी एंटी ऑक्सीडेंट्स तत्वों से भरपूर होती है जो हेयर ग्रोथ को बढ़ाने और बालों को झड़ने से रोकती है.

प्याज के रस से जड़ों को मजबूती दें

अगर आपको बालों को झड़ने से रोकना है तो प्याज का रस आपकी बहुत मदद कर सकता है. प्याज के रस में सल्फर होता है जो कोलेजन प्रोडक्शन बढ़ाकर नई हेयर ग्रोथ में मदद करता है. इससे आपके बालों की जो जड़ें होती हैं वो मजबूत हो जाती हैं. प्याज का रस स्कैल्प पर 20–25 मिनट लगाएं और फिर धो लें. इसे हफ्ते में 1 से 2 बार जरूर लगाएं.

आयरन और प्रोटीन वाले फूड बालों के लिए जरूरी

बालों की ग्रोथ को बढ़ाने और उन्हें टूटने से बचने के लिए आपको आयरन और प्रोटीन से भरपूर फूड प्रोडक्ट्स का सेवन करना चाहिए जिससे सर्दियों में बालों को मजबूत बनाया जा सके. पालक, मेथी और ब्रोकली जैसे आयरन वाले फूड, दाल, सोया, पनीर जैसे प्रोटीन स्रोत, बादाम और अखरोट जैसे ओमेगा 3 फूड, गाजर और चुकंदर सब्जियां और तिल गुड़ जैसे खून बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ रोज के खाने में शामिल करने से जड़ें मजबूत होती हैं, झड़ना कम होता है.

गर्म पानी से बाल धोने से बचें

सर्दियों में हम गर्म पानी से नहाते हैं लेकिन अगर आपके बाल कमजोर हैं और बहुत ज्यादा टूट रहे हैं तो आपको गर्म पानी को सिर पर डालने से बचना चाहिए क्योंकि गर्म पानी बालों की नमी को खींचकर उन्हें रुखा और बेजान बना देता है जिससे स्कैल्प ड्राई हो जाता है और सिर में डैंड्रफ जैसे बैक्टीरियल इन्फेक्शन होने का भी खतरा होता है.

नारियल के दूध से हेयर ग्रोथ में तेजी आती है

नारियल का दूध हमारी हेयर ग्रोथ के लिए काफी असरदार होता है. इसमें पर्याप्त मात्रा में आयरन और पोटैशियम होता है जो बालों को मजबूत बनाता है. इसे अपने स्कैल्प पर अच्छे से लगाएं और हो सके तो नारियल के दूध में थोड़ा नींबू निचोड़ ले जो बालों को बढ़ने और मजबूत करने में मदद करेगा.

 यह भी पढ़ें: Viral Infection Prevention: बार-बार हो रहा वायरल इंफेक्शन तो ये 12 स्टेप्स बचाएंगे आपको, डॉक्टर से जानें हर बात

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ये 5 तरीके अपना लिए तो सर्दियों में परेशान नहीं करेगा जोड़ों का दर्द, तुरंत मिलेगी राहत

ये 5 तरीके अपना लिए तो सर्दियों में परेशान नहीं करेगा जोड़ों का दर्द, तुरंत मिलेगी राहत


अक्सर सर्दियों के मौसम में प्यास कम लगती है लेकिन शरीर को पानी पहले जितना ही चाहिए होता है. पानी की कमी से जोड़ों में मौजूद सिनोवियल फ्लूइड सूखने लगता है, जिससे घर्षण बढ़ता है और दर्द व जकड़न अधिक महसूस होती है. दिनभर नियमित रूप से गुनगुना पानी पीने से जोड़ों के दर्द में कमी आती है, सूजन कम होती है और मांसपेशियों को आराम मिलता है.

सर्दियों के मौसम में तिल–गुड़, बादाम, अखरोट, मूंगफली, हल्दी वाला दूध, हरी सब्जियां, सोया, दालें जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ लेने से शरीर में सूजन कम होती है और हड्डियां–जोड़ अंदर से मजबूत बनते हैं.

सर्दियों के मौसम में तिल–गुड़, बादाम, अखरोट, मूंगफली, हल्दी वाला दूध, हरी सब्जियां, सोया, दालें जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ लेने से शरीर में सूजन कम होती है और हड्डियां–जोड़ अंदर से मजबूत बनते हैं.

आपको अगर शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो रहा हो तो उस जगह पर गर्म सेक करने से दर्द में तुरंत राहत मिलती है. आप कपड़े को गर्म करके या हॉट वॉटर बैग से सेक कर सकते हैं.

आपको अगर शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो रहा हो तो उस जगह पर गर्म सेक करने से दर्द में तुरंत राहत मिलती है. आप कपड़े को गर्म करके या हॉट वॉटर बैग से सेक कर सकते हैं.

स्किन नहीं, जोड़ों को भी चाहिए मॉइस्चर. ठंड की ड्राईनेस मांसपेशियों और जोड़ों को कड़ा बना देती है इसलिए सरसों, नारियल या तिल के तेल से 10 मिनट की हल्की मालिश stiffness कम करने, मांसपेशियों को गर्म रखने और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने में बहुत मदद करती है.

स्किन नहीं, जोड़ों को भी चाहिए मॉइस्चर. ठंड की ड्राईनेस मांसपेशियों और जोड़ों को कड़ा बना देती है इसलिए सरसों, नारियल या तिल के तेल से 10 मिनट की हल्की मालिश stiffness कम करने, मांसपेशियों को गर्म रखने और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने में बहुत मदद करती है.

सर्दियों के मौसम में शरीर में विटामिन डी की मात्रा कम हो सकती है जिससे मांसपेशियों में जकड़न और जोड़ों का दर्द ज्यादा हो सकता है. इससे बचने के लिए दिन में कम से कम आधे घंटे धूप में बैठे या सैर करे जिससे आपके शरीर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ेगी. अगर दर्द ज्यादा होता है तो डॉक्टर से सलाह जरूर ले.

सर्दियों के मौसम में शरीर में विटामिन डी की मात्रा कम हो सकती है जिससे मांसपेशियों में जकड़न और जोड़ों का दर्द ज्यादा हो सकता है. इससे बचने के लिए दिन में कम से कम आधे घंटे धूप में बैठे या सैर करे जिससे आपके शरीर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ेगी. अगर दर्द ज्यादा होता है तो डॉक्टर से सलाह जरूर ले.

हमने आमतौर पर देखा है की सर्दियों में ओवर ईटिंग लोग करने लगते हैं क्योकि ठंड के मौसम में कई तरह के पकवान बनते हैं जिसे खाकर हम अपना वजन बढ़ा लेते हैं जो की बेहद गलत कदम है. अगर आपके जोड़ों में दर्द की समस्या है तो वजन बढ़ने की वजह से ये समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं इसलिए अपने खान पान पर ध्यान रखे और वजन को ना बढ़ने दे.

हमने आमतौर पर देखा है की सर्दियों में ओवर ईटिंग लोग करने लगते हैं क्योकि ठंड के मौसम में कई तरह के पकवान बनते हैं जिसे खाकर हम अपना वजन बढ़ा लेते हैं जो की बेहद गलत कदम है. अगर आपके जोड़ों में दर्द की समस्या है तो वजन बढ़ने की वजह से ये समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं इसलिए अपने खान पान पर ध्यान रखे और वजन को ना बढ़ने दे.

जब भी आप सर्दियों के मौसम में बाहर निकले तो इस बात का विशेष ध्यान रखे की शरीर को पूरी तरह से ढके यानी गरम कपड़े पहने और शरीर के वो हिस्से जहां आपको लगता है की मेरे दर्द है खासकर उन हिस्सों को अच्छी तरह से कवर करे, जैसे घुटने को अच्छी तरह से वॉर्म बैंड से कवर करे, हाथो में ग्लव्स या दस्ताने पहने आदि.

जब भी आप सर्दियों के मौसम में बाहर निकले तो इस बात का विशेष ध्यान रखे की शरीर को पूरी तरह से ढके यानी गरम कपड़े पहने और शरीर के वो हिस्से जहां आपको लगता है की मेरे दर्द है खासकर उन हिस्सों को अच्छी तरह से कवर करे, जैसे घुटने को अच्छी तरह से वॉर्म बैंड से कवर करे, हाथो में ग्लव्स या दस्ताने पहने आदि.

Published at : 10 Dec 2025 05:22 PM (IST)

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सिर्फ दांत ही नहीं बचाता रूट कनाल, इन बीमारियों से भी दिलाता है राहत

सिर्फ दांत ही नहीं बचाता रूट कनाल, इन बीमारियों से भी दिलाता है राहत


How Root Canal Saves Natural Tooth: मजबूत और स्वस्थ दांत सिर्फ आपकी मुस्कान के लिए जरूरी नहीं हैं, बल्कि पूरे शरीर की सेहत पर असर डालते हैं. दांतों में इंफेक्शन, सड़न या अंदरूनी नुकसान समय रहते इलाज न मिले तो यह न सिर्फ दांत खराब करता है, बल्कि कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है. ऐसे में रूट कनाल एक ऐसा उपचार है जो न केवल दांत को बचाता है, बल्कि कई तरह की जटिलताओं से भी राहत दिला सकता है.

रूट कनाल क्या है और कैसे काम करता है?

रूट कनाल एक नॉर्मल और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसमें दांत के अंदर मौजूद  हिस्से को निकालकर साफ किया जाता है. अंदरूनी टिश्यू हटाने के बाद दांत को एक सुरक्षित पदार्थ से भरकर सील कर दिया जाता है, ताकि दोबारा इंफेक्शन न हो.  ज्यादातर मामलों में दांत को अधिक मज़बूती देने के लिए ऊपर से क्राउन लगाया जाता है.  यह प्रक्रिया दांत की जड़ों में फैलने वाले इंफेक्शन को रोकती है और दर्द में तुरंत आराम देती है.

कब जरूरत पड़ती है रूट कनाल की?

कुछ संकेत बताते हैं कि दांत के अंदर इंफेक्शन बढ़ रहा है, जैसे कि-

  • लगातार दांत में दर्द
  • गर्म–ठंडा लगने पर तेज सेंसिटिव
  • दांत का काला या भूरा पड़ना
  • मसूड़ों में सूजन या कोमलता
  • मुंह में बार-बार खराब स्वाद

इन संकेतों को अनदेखा करने पर इंफेक्शन जबड़े, मसूड़ों और शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकता है. 

इन बीमारियों से बचाता है यह

पटना में ऑरो डेंटल क्लीनिक की डॉ. अंजलि सौरभ के अनुसार, यह सिर्फ आपके दांतों की सुरक्षा ही नहीं करता, इसके साथ ही यह आपको कई बीमारियों से बचा कर रखता है, जैसे कि –

जबड़े और चेहरे के इंफेक्शन से बचाव

अगर दांत का संक्रमण फैल जाए तो चेहरे में सूजन, बुखार और गंभीर इंफेक्शन हो सकता है. रूट कनाल इससे तुरंत राहत देता है.

मसूड़ों की सूजन और पीरियोडोंटल रोग

अनट्रीटेड इंफेक्शन मसूड़ों तक पहुंचकर मसूड़ों की बीमारी को बढ़ा सकता है। रूट कनाल इसे रोकता है.

साइनस इंफेक्शन से बचाव

ऊपरी दांतों में इंफेक्शन अक्सर साइनस तक पहुंच जाता है. कई मामलों में रूट कनाल कराने के बाद साइनस प्रेशर और दर्द कम हो जाते हैं.

हड्डी गलने से बचाव

दांत की जड़ में लंबे समय तक इंफेक्शन रहने पर जबड़े की हड्डी कमजोर होने लगती है. रूट कनाल हड्डी को भविष्य के नुकसान से बचाता है.

इलाज टालने के नुकसान

रूट कनाल को टालने से समस्या बढ़ती ही जाती है, इसमें

  • दर्द बढ़ता जाता है
  • इंफेक्शन आसपास के दांतों तक पहुंचता है
  • दांत बचाना मुश्किल हो जाता है
  • अंत में एक्सट्रैक्शन यानी दांत निकलवाना पड़ सकता है
  • इलाज महंगा और जटिल हो जाता है

इसे भी पढ़ें: Vitamin Deficiency Liver Risk: बॉडी में कम हुए ये विटामिन तो लिवर हो जाएगा फैटी, तुरंत कर लें बचने की तैयारी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बार-बार हो रहा वायरल इंफेक्शन तो ये 12 स्टेप्स बचाएंगे आपको, डॉक्टर से जानें हर बात

बार-बार हो रहा वायरल इंफेक्शन तो ये 12 स्टेप्स बचाएंगे आपको, डॉक्टर से जानें हर बात


Daily Habits To Avoid Viral Diseases: वायरल इंफेक्शन बार-बार होना आजकल बहुत आम समस्या बन गई है. कमजोरी, सर्दी-जुकाम, बुखार या बार-बार बीमार पड़ने की वजह सिर्फ मौसम नहीं होती, बहुत हद तक हमारी आदतें, इम्यूनिटी और साफ-सफाई की कमी भी इसकी वजह हैं. डॉक्टरों के मुताबिक कुछ सरल रोजमर्रा की चीजें अपनाकर आप वायरल इंफेक्शन का खतरा काफी हद तक कम कर सकते हैं. Verywellhealth के अनुसार, हम 12 तरीकों से इन इंफेक्शन को काबू कर सकते हैं. 

 हाथ अच्छी तरह धोएं

वायरस और बैक्टीरिया कई घंटों से लेकर कई दिनों तक सतहों पर टिके रह सकते हैं.  इसलिए हाथों को बार-बार धोना इंफेक्शन रोकने का सबसे आसान तरीका है. पानी-साबुन न मिले तो सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.

पर्सनल आइटम शेयर न करें

टूथब्रश, तौलिया, रेजर, रूमाल या नेलकटर जैसी चीजें बैक्टीरिया और वायरस फैलाने का बड़ा कारण होती हैं.  इन्हें कभी शेयर न करें और बच्चों को भी यही सिखाएं. 

खांसते-छींकते समय मुंह ढकें

ज्यादातर वायरल बीमारियां ड्रॉपलेट्स से फैलती हैं. खांसते या छींकते समय रूमाल या कोहनी से मुंह ढकें. इससे इंफेक्शन फैलने का जोखिम बहुत कम होता है.

 वैक्सीनेशन पूरा रखें

वैक्‍सीन शरीर को कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया से बचाती है. बच्चों और बड़ों दोनों को अपनी वैक्सीनेशन शेड्यूल का पालन करना चाहिए, खासतौर पर फ्लू और कोविड वैक्सीन. 

जरूरत हो तो मास्क पहनें

अगर आपको सर्दी-जुकाम, खांसी या बुखार है, तो मास्क पहनना न सिर्फ आपको बल्कि दूसरों को भी सुरक्षित रखता है. भीड़ वाली जगहों में भी मास्क उपयोगी है.

खाना बनाने में सावधानी रखें

गलत तरीके से रखा या दूषित खाना पेट के इंफेक्शन का बड़ा कारण है. पका हुआ खाना दो घंटे से ज्यादा बाहर न रखें, कच्चा और पका खाना अलग-अलग रखें और फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं.

सफर करते समय सावधान रहें

यात्रा के दौरान इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. साफ पानी पिएं, बर्फ से बचें, कच्चा या अधपका मांस-मछली न खाएं और आवश्यक टीकाकरण पूरा रखें.

सुरक्षित फीजिकल रिलेशन के नियमों का पालन करें

कंडोम का सही इस्तेमाल कई तरह के इंफेक्शन से बचाता है. पार्टनर की संख्या सीमित रखें और जोखिम हो तो एचआईवी प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस  जैसी दवाओं पर डॉक्टर से बात करें. 

पालतू जानवरों से जुड़े इंफेक्शन से बचें

पेट्स की नियमित जांच और टीकाकरण करवाएं. लिटर बॉक्स साफ करते समय ग्लव्स पहनें और बाद में हाथ धोएं, खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को यह सावधानी जरूरी है.

 हेल्दी डाइट लें

खराब खानपान इम्यूनिटी कम करता है। ज्यादा चीनी, नमक और तला-भुना खाने से बचें. फ्रूट, सब्जियां, प्रोटीन और पानी का पर्याप्त सेवन जरूरी है.

पूरी नींद लें

नींद कम होने से इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है और इंफेक्शन जल्दी पकड़ लेता है.  बड़ों को रोज कम से कम 7 घंटे की नींद जरूरी है. 

अस्पताल में सतर्क रहें

अस्पतालों में कई तरह के इंफेक्शन फैल सकते हैं.  सतहों को छूने के बाद हाथ धोएं, जरूरी हो तो मास्क पहनें और भीड़भाड़ वाले हिस्सों से दूरी रखें.

इसे भी पढ़ें- Kidney Damage Signs: आंखों में दिख रहे ये लक्षण तो समझ जाएं किडनी हो रही खराब, तुरंत कराएं अपना इलाज

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बॉडी में कम हुए ये विटामिन तो लिवर हो जाएगा फैटी, तुरंत कर लें बचने की तैयारी

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Signs Of Liver Damage Due To Vitamin Deficiency: दुनियाभर में फैटी लिवर डिजीज, खासकर नफल्ड, तेजी से बढ़ती हुई हेल्थ समस्या बन चुकी है. जब लिवर में ज्यादा मात्रा में फैट जमा होने लगता है और सूजन पैदा करता है, तब यह बीमारी पैदा होती है.  हाल के वर्षों में एक कारण जिस पर खास ध्यान गया है, वह है विटामिन B12 की कमी, जो फैटी लिवर के बढ़ने और बिगड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.  विटामिन B12 शरीर में कई जरूरी मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है, खासतौर पर फैट मेटाबॉलिज्म के लिए. इसकी कमी होने पर शरीर में होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है और समय के साथ लिवर को नुकसान पहुंच सकता है.

विटामिन B12 लिवर को कैसे प्रभावित करता है?

विटामिन B12 लिवर की मेटाबॉलिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाता है. जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो लिवर फैट को सही तरीके से प्रोसेस और बाहर नहीं निकाल पाता. इसका नतीजा यह फैट लिवर की सेल्स में जमा होने लगता है, जिससे सूजन और बाद में स्कारिंग तक हो सकती है.  कई स्टडीज़ में पाया गया है कि  नफल्ड वाले लोगों में विटामिन B12 का स्तर सामान्य लोगों की तुलना में काफी कम होता है. 

B12 की कमी से होमोसिस्टीन बढ़ता है, जो लिवर को और कमजोर कर सकता है. अच्छी बात ये है कि B12 की सप्लिमेंटेशन से होमोसिस्टीन कम हो सकता है और लिवर एंजाइम्स में सुधार देखा गया है, जो लिवर की स्थिति को बिगड़ने से रोक सकता है.

कमी के लक्षण 

विटामिन B12 की कमी के आम लक्षण हैं जैसे कि थकान, कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनी, और फोकस करने में कठिनाई. लेकिन फैटी लिवर के लक्षण अक्सर देर से दिखाई देते हैं. इसलिए कई लोग अंदाजा भी नहीं लगा पाते कि उन्हें खतरा बढ़ रहा है. कई बार B12 की कमी गॉलस्टोन के जोखिम को भी बढ़ा सकती है, क्योंकि यह पित्त बनने और लिवर की मेटाबॉलिक गतिविधियों में भी भूमिका निभाता है. इसलिए इसकी कमी को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है.

कैसे बचें और क्या है इलाज?

विटामिन B12 की कमी से बचने का सबसे आसान तरीका है कि अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में मांस, मछली, अंडे और डेयरी शामिल करना. कुछ लोगों में उम्र बढ़ने, दवाइयों के असर या डाइजेशन की समस्याओं के कारण B12 का एब्जॉर्ब कम हो जाता है. ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह से सप्लिमेंट या इंजेक्शन लेना प्रभावी रहता है. नियमित हेल्थ चेकअप्स से B12 की कमी का पता जल्दी चलता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें लिवर रोग का खतरा ज्यादा होता है. कमी को पूरा करने से न सिर्फ लिवर में जमा फैट कम हो सकता है, बल्कि सूजन भी घट सकती है.

इसे भी पढ़ें- Egg Storage: क्या फ्रिज में रखने से सड़ जाते हैं अंडे या रहते हैं फ्रेश? जान लें अपने काम की बात

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आंखों में दिख रहे ये लक्षण तो समझ जाएं किडनी हो रही खराब, तुरंत कराएं अपना इलाज

आंखों में दिख रहे ये लक्षण तो समझ जाएं किडनी हो रही खराब, तुरंत कराएं अपना इलाज


Eye Symptoms Of Kidney Disease: अक्सर हम सोचते हैं कि किडनी खराब होने पर थकान, पैरों में सूजन या यूरिन में बदलाव दिखाई देता है. लेकिन बहुत कम लोगों को पता होता है कि इसकी शुरुआती निशानियां आंखों में भी दिखाई दे सकती हैं. क्योंकि आंखें और किडनी, दोनों ही सही तरह से काम करने के लिए शरीर की नाजुक नसों और फ्लूइड बैलेंस पर निर्भर करती हैं. अगर एक जगह दिक्कत शुरू होती है, तो असर दूसरी जगह भी दिख सकता है.

अगर आपकी आंखों में लगातार सूजन, लालिमा, जलन, ड्राइनस, धुंधलापन या रंगों को पहचानने में दिक्कत जैसी परेशानियां दिख रही हैं, तो यह किडनी से जुड़ी कोई गहरी समस्या का संकेत हो सकता है. शुरुआत में ये लक्षण हल्के होते हैं, इसलिए आसानी से नजरअंदाज हो जाते हैं. लेकिन अगर इनके साथ थकान या शरीर में सूजन भी हो, तो किडनी और आंखों की जांच कराना बहुत जरूरी है. चलिए आपको बताते हैं कि इसके लक्षण कौन से दिखते हैं. 

 सूजी हुई आंखें 

कभी-कभी देर रात जागने या ज्यादा नमक खाने पर आंखें सूज जाना आम बात है. लेकिन अगर आपकी आंखों में हर दिन सूजन रहती है, तो यह प्रोटीन के यूरिन में लीक होने यानी प्रोटीन्यूरिया का संकेत हो सकता है. किडनी जब कमजोर होने लगती है तो शरीर से जरूरी प्रोटीन निकलने लगता है और इसी वजह से आंखों के आसपास फ्लूइड जमा होने लगता है. अगर सूजन के साथ-साथ यूरिन में झाग भी दिखे, तो इसे अनदेखा न करें और तुरंत जांच कराएं.

 धुंधला दिखना या डबल दिखाई देना

अचानक धुंधलापन, साफ नहीं दिखना या डबल इमेज दिखना, आंखों की नसों को नुकसान का संकेत हो सकता है. हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज, जो किडनी खराब होने के दो बड़े कारण हैं, रेटिना की नसों को भी नुकसान पहुंचाते हैं. इससे आंखों में सूजन, लीक और गंभीर स्थिति में विजन लॉस तक हो सकता है. अगर आपको बीपी या डायबिटीज है और विजन बदल रहा है, तो आंखों के साथ-साथ किडनी टेस्ट करवाना जरूरी है. 

आंखों का सूखना, जलन या चुभन

लगातार सूखी, जलती हुई या रगड़ जैसा एहसास देने वाली आंखें सिर्फ मौसम का असर नहीं होतीं. उन्नत किडनी बीमारी या डायलिसिस पर रहने वाले लोगों में यह समस्या आम है. किडनी की दिक्कत से मिनरल बैलेंस बिगड़ जाता है और शरीर में जमा टॉक्सिन्स आंसू बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. अगर बिना कारण आंखें सूखी और लाल रहती हैं, तो किडनी की जांच करवाना समझदारी है. 

आंखों का लाल होना 

आंखों का लाल होना आमतौर पर थकान या एलर्जी से जुड़ा होता है. लेकिन किडनी की बीमारी में अनकंट्रोल हाई बीपी छोटी-छोटी ब्लड बेसल्स को फाड़ देता है, जिससे आंखें लगातार लाल दिखती हैं. कुछ मामलों में लूपस नेफ्राइटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारी भी आंखों में सूजन पैदा करती है. अगर लाल आंखों के साथ जोड़ों में दर्द, सूजन या शरीर पर दाने भी हों, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए.

कब आंखों के लक्षण किडनी बीमारी की तरफ इशारा करते हैं?

हल्की जलन या थोड़ी सूजन आम बात है, लेकिन अगर लक्षण लगातार बने रहें और साथ में थकान, सूजन या यूरिन में बदलाव महसूस हो, तो किडनी की जांच कराना जरूरी है.
आंखों की जांच में भी कई बार शरीर की बड़ी बीमारियों के शुरुआती संकेत पकड़े जाते हैं. खासकर डायबिटीज, बीपी या फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों को इन बदलावों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. लगातार सूजन, लालिमा, धुंधलापन, ड्रायनेस या रंगों में बदलाव जैसे संकेत किडनी की शुरुआती खराबी का इशारा हो सकते हैं. समय पर इलाज लेने से न सिर्फ किडनी, बल्कि आपकी आंखों की सेहत भी सुरक्षित रह सकती है.

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