सुबह बिस्तर छोड़ते ही दिखने लगते हैं किडनी डैमेज होने के ये 5 लक्षण, 89% लोग कर देते हैं इग्नोर

सुबह बिस्तर छोड़ते ही दिखने लगते हैं किडनी डैमेज होने के ये 5 लक्षण, 89% लोग कर देते हैं इग्नोर


How to Identify Kidney Disease Early: किडनी शरीर के सबसे अहम अंगों में से एक है, जो पीएच बैलेंस से लेकर नमक, पोटैशियम और कई जरूरी मिनरल्स को कंट्रोल करती है. लेकिन गलत लाइफस्टाइल, बीमारियां और जेनेटिक कारण इसकी कार्यक्षमता को धीमा कर सकते हैं. किडनी का कमजोर होना यानी यह खून को उसी तरह फिल्टर नहीं कर पा रही, जैसे उसे करना चाहिए. डायबिटीज और हाई बीपी वाले लोगों में इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है. कई बार किडनी के शुरुआती लक्षण बहुत सूक्ष्म होते हैं, ये दिखते तो मामूली हैं, लेकिन बहुत कुछ बता जाते हैं. चलिए आपको इसके लक्षणों के बारे में बताते हैं. 

सुबह उठते ही चेहरे पर सूजन

अगर आप रोज सुबह उठकर चेहरे पर हल्का फुलाव या सूजन देखते हैं, तो इसे सामान्य न समझें. यह किडनी के गड़बड़ होने का संकेत हो सकता है, खासकर तब, जब पैरों या टखनों में भी सूजन बनी रहे. डॉक्टर बताते हैं कि यह फ्लूइड रिटेंशन की वजह से होता है, यानी किडनी खून से अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी ठीक से बाहर नहीं निकाल पा रही. कई मामलों में प्रोटीन के यूरिन में ज्यादा लीक होने से भी चेहरे समेत शरीर के कई हिस्सों में सूजन आ जाती है.

 झागदार या बुलबुलेदार पेशाब

सुबह की पहली पेशाब अगर झागदार या बहुत बुलबुलेदार दिखे, तो यह भी किडनी की चेतावनी हो सकती है. ऐसा तब होता है जब यूरिन में जरूरत से ज्यादा प्रोटीन मौजूद हो, इसे प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है.  यह साफ संकेत है कि किडनी फिल्टरिंग का काम ठीक से नहीं कर पा रही और शायद उसमें डैमेज शुरू हो चुका है.

त्वचा का जरूरत से ज्यादा सूखना और खुजली

किडनी कमजोर होने पर शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। इससे स्वेट ग्लैंड सिकुड़ जाते हैं, और त्वचा जल्दी सूखने लगती है. डॉक्टरों के मुताबिक, जब खुजली इतनी बढ़ जाए कि मॉइश्चराइजर लगाने पर भी आराम न मिले, तो यह यूरमिक प्रुरिटस का संकेत हो सकता है जो किडनी डैमेज का एक बड़ा लक्षण है.

दिमाग का धुंधला होना 

किडनी जब पर्याप्त रूप से काम नहीं करती, तो खून में टॉक्सिन्स बढ़ जाते हैं.  इससे थकान, सुस्ती और ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल आने लगती है.  ऐसी स्थिति लंबे समय में एनीमिया भी पैदा कर सकती है, जिसकी वजह से दिमाग तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है और ब्रेन फॉग और बढ़ जाता है. अगर यह लक्षण अन्य किडनी संकेतों के साथ दिखें, तो तुरंत जांच कराना जरूरी है.

सुबह सांस से बदबू आना

कभी-कभी सुबह की बदबू सामान्य हो सकती है, लेकिन अगर यह लगातार हो और अमोनिया जैसी गंध महसूस हो, तो यह किडनी की ओर इशारा हो सकता है. किडनी ठीक से काम न करे, तो शरीर में जमा टॉक्सिन्स सांस के ज़रिए बाहर निकलते हैं, इसे यूरमिक ब्रीथ कहा जाता है. 

किडनी रोग क्या है?

किडनी मुट्ठी के आकार का छोटा-सा अंग है, लेकिन इसके काम बड़े हैं. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाले हार्मोन बनाना, रेड ब्लड सेल्स की संख्या संभालना और विटामिन D को एक्टिव करना.  लेकिन डायबिटीज, हाई बीपी या लंबे समय की क्रॉनिक बीमारियों की वजह से किडनी डैमेज हो सकती है. किडनी रोग आगे चलकर हड्डियां कमजोर, नसों को नुकसान और पोषण की कमी जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है.

इसे भी पढ़ें- Kidney Disease Skin Signs: ड्राई या इची हो रही स्किन तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना डैमेज हो जाएगी आपकी किडनी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

2025 में भारत के लोगों ने गूगल पर सबसे ज्यादा किन बीमारियों को किया सर्च? देखें पूरी लिस्ट

2025 में भारत के लोगों ने गूगल पर सबसे ज्यादा किन बीमारियों को किया सर्च? देखें पूरी लिस्ट


भारतीयों के लिए साल 2025 में स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी लेने के लिए गूगल पहला भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बन चुका है. हल्का सिरदर्द हो या तेज बुखार, हाथ-पैर सुन्न पड़ना हो या पेट में अचानक दर्द, ज़्यादातर लोग डॉक्टर के पास जाने से पहले इंटरनेट पर खोज कर यह समझने की कोशिश करते हैं कि उनके शरीर में क्या गड़बड़ हो रही है. पूरे साल के गूगल ट्रेंड्स यह दिखाते हैं कि भारतीय यूज़र्स किन स्वास्थ्य लक्षणों के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी ढूंढते हैं और इन लक्षणों के पीछे कौन से संभावित कारण हो सकते हैं.

बुखार

बुखार 2025 में भारतीयों द्वारा सबसे ज्यादा गूगल किया गया लक्षण है. आमतौर पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिसकी मुख्य वजह शरीर के सामान्य तापमान (लगभग 98.6°F) से ऊपर होना है. यह अक्सर संक्रमण या किसी बीमारी से लड़ने की शरीर की प्रतिक्रिया होती है.

सिरदर्द

सिरदर्द भी भारत में सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले लक्षणों में से एक है. यह आम परेशानी है, लेकिन अगर बढ़ता जाए तो गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है, जैसे माइग्रेन होने का खतरा काफी बढ़ जाता है.

खांसी

खांसी भारत में सबसे ज्यादा गूगल किए जाने वाले लक्षणों में से एक है. यह हल्की एलर्जी से लेकर गंभीर फेफड़ों की बीमारी तक का संकेत हो सकती है. मौसम बदलने, प्रदूषण बढ़ने, सर्दी-ज़ुकाम, धूल-मिट्टी या वायरल संक्रमण के कारण खांसी शुरू हो सकती है.

गले में खराश

गले में खराश भारत में सबसे आम और सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले लक्षणों में से एक है. यह प्रदूषण, वायरस, बैक्टीरिया, एलर्जी, एसिडिटी (GERD), टॉन्सिलाइटिस या आवाज़ के अधिक उपयोग के कारण भी हो सकती है.

शरीर में दर्द

शरीर में दर्द अब भारत में बेहद आम समस्या बन गया है. पहले यह समस्या बुजुर्गों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब यह युवा और यहां तक कि बच्चों में भी बढ़ रही है. अगर कई दिनों से शरीर या जोड़ों में दर्द बना हुआ है तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.

सीने में दर्द

सीने में दर्द भारत में सबसे चिंताजनक लक्षणों में से एक है. अक्सर देखा जाता है कि सीने में दर्द के तुरंत बाद लोगों को हार्ट अटैक हो जाता है. इसी कारण लोग इसे सबसे ज्यादा गूगल करते हैं. हालांकि कई बार यह दर्द सिर्फ गैस, एसिडिटी, मांसपेशियों में खिंचाव या तनाव के कारण भी हो सकता है.

उल्टी

उल्टी ऐसा लक्षण है जिसे भारत में बहुत लोग गूगल करते हैं, क्योंकि यह साधारण बदहज़मी से लेकर गंभीर फूड पॉइज़निंग तक किसी भी कारण से हो सकती है. समय पर इलाज करना जरूरी है.

बाल झड़ना

बाल झड़ना 2025 में भारतीयों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. इसके कारणों में अनुवांशिक कारण, सिर के संक्रमण, हार्मोन में बदलाव, ज्यादा तनाव और थायरॉइड.

 यह भी पढ़ें: महिला अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी! बीपीएससी दे रहा 50,000 रुपये, जानें क्या करना होगा?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

स्मोकिंग नहीं करता था 37 साल का यह शख्स, फिर क्यों डलवाने पड़े 2 हार्ट स्टंट? डॉक्टर ने बताई डराने वाली वजह

स्मोकिंग नहीं करता था 37 साल का यह शख्स, फिर क्यों डलवाने पड़े 2 हार्ट स्टंट? डॉक्टर ने बताई डराने वाली वजह


अगर आपके पिता, चाचा, दादा या परिवार का कोई सदस्य कम उम्र में हार्ट रोग से जूझ चुका है, तो आपका जोखिम भी 2–3 गुना बढ़ जाता है. आप एक्टिव हो या दुबले-पतले हों, फिर भी दिल की बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ सकती है.

लिपोप्रोटीन, यह एक बेहद खतरनाक प्रकार का कोलेस्ट्रॉल है. सामान्य लिपिड प्रोफाइल में इसकी जांच नहीं होती है. यह पूरी तरह जेनेटिक होता है. आपका LDL नॉर्मल होने पर भी यह धमनियों में ब्लॉकेज जमा कर सकता है.

लिपोप्रोटीन, यह एक बेहद खतरनाक प्रकार का कोलेस्ट्रॉल है. सामान्य लिपिड प्रोफाइल में इसकी जांच नहीं होती है. यह पूरी तरह जेनेटिक होता है. आपका LDL नॉर्मल होने पर भी यह धमनियों में ब्लॉकेज जमा कर सकता है.

सिर्फ दौड़ने या जिम जाने से तनाव कम नहीं होता, ज्यादा तनाव से  एड्रेनालाईन बढ़ता है,  ब्लड प्रेशर बढ़ता है,  शरीर में सूजन बढ़ती है और दिल की धमनियां कमजोर हो जाती हैं. आजकल की तेज कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल हार्ट पर बड़ा असर डालती है.

सिर्फ दौड़ने या जिम जाने से तनाव कम नहीं होता, ज्यादा तनाव से एड्रेनालाईन बढ़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है, शरीर में सूजन बढ़ती है और दिल की धमनियां कमजोर हो जाती हैं. आजकल की तेज कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल हार्ट पर बड़ा असर डालती है.

कई लोग बाहर से बिल्कुल फिट दिखते हैं, लेकिन उनके शरीर के अंदर सूजन बनी रहती है. यह सूजन धीरे-धीरे धमनियों को नुकसान पहुंचाती है, और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाती है. आम ब्लड टेस्ट में इसकी जांच नहीं होती है.

कई लोग बाहर से बिल्कुल फिट दिखते हैं, लेकिन उनके शरीर के अंदर सूजन बनी रहती है. यह सूजन धीरे-धीरे धमनियों को नुकसान पहुंचाती है, और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाती है. आम ब्लड टेस्ट में इसकी जांच नहीं होती है.

रोज 6 घंटे सोना काफी नहीं है.अगर आप आधी रात तक मोबाइल देखते रहते हैं या स्क्रीन यूज करते हैं, तो शरीर में मेटाबॉलिक स्ट्रेस बढ़ता है.इससे कॉर्टिसोल बढ़ जाता है,  खून गाढ़ा हो जाता है, प्लाक ज्यादा अस्थिर हो जाता है और अचानक हार्ट अटैक की संभावना बढ़ती है.

रोज 6 घंटे सोना काफी नहीं है.अगर आप आधी रात तक मोबाइल देखते रहते हैं या स्क्रीन यूज करते हैं, तो शरीर में मेटाबॉलिक स्ट्रेस बढ़ता है.इससे कॉर्टिसोल बढ़ जाता है, खून गाढ़ा हो जाता है, प्लाक ज्यादा अस्थिर हो जाता है और अचानक हार्ट अटैक की संभावना बढ़ती है.

दौड़ना, जॉगिंग, योगा फिटनेस के लिए अच्छे हैं,लेकिन ये गारंटी नहीं है कि आपकी धमनियां साफ हैं.दिल की बीमारी सिर्फ लाइफस्टाइल से नहीं बल्कि जीन, तनाव, सूजन, नींद और लिपोप्रोटीन(A) जैसे कई फैक्टर से मिलकर बनती है.

दौड़ना, जॉगिंग, योगा फिटनेस के लिए अच्छे हैं,लेकिन ये गारंटी नहीं है कि आपकी धमनियां साफ हैं.दिल की बीमारी सिर्फ लाइफस्टाइल से नहीं बल्कि जीन, तनाव, सूजन, नींद और लिपोप्रोटीन(A) जैसे कई फैक्टर से मिलकर बनती है.

डॉक्टरों के अनुसार, हर व्यक्ति को 25 साल की उम्र के बाद कुछ जांचें जरूरी करवानी चाहिए. जैसे Lipoprotein(a), HS-CRP (सूजन टेस्ट), ApoB, HbA1c, Fasting Insulin, Vitamin D, Homocysteine, TMT (अगर लक्षण दिखाई दें) और Coronary Calcium Score (35 साल के बाद), ये टेस्ट असली खतरे को समय रहते पकड़ सकते हैं.

डॉक्टरों के अनुसार, हर व्यक्ति को 25 साल की उम्र के बाद कुछ जांचें जरूरी करवानी चाहिए. जैसे Lipoprotein(a), HS-CRP (सूजन टेस्ट), ApoB, HbA1c, Fasting Insulin, Vitamin D, Homocysteine, TMT (अगर लक्षण दिखाई दें) और Coronary Calcium Score (35 साल के बाद), ये टेस्ट असली खतरे को समय रहते पकड़ सकते हैं.

Published at : 10 Dec 2025 07:06 AM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

ड्राई या इची हो रही स्किन तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना डैमेज हो जाएगी आपकी किडनी

ड्राई या इची हो रही स्किन तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना डैमेज हो जाएगी आपकी किडनी


Chronic Kidney Disease Symptoms: हमारी किडनी शरीर को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभाती है, खून को फिल्टर करने से लेकर मिनरल और फ्लूइड बैलेंस बनाए रखने तकय लेकिन जब किडनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है, तो शरीर में बढ़ते टॉक्सिन कई बार सबसे पहले त्वचा पर दिखाई देते हैं. इन संकेतों को समय रहते पहचान लेना बहुत जरूरी है. ब्लड और यूरिन टेस्ट किडनी रोग की पहचान का मुख्य तरीका हैं, लेकिन त्वचा पर बदलाव क्रॉनिक किडनी डिजीज के बढ़ते स्टेज में दिखाई देते हैं. अपनी स्किन और बाकी लक्षणों पर नजर रखना बीमारी की रफ्तार धीमी करने में मदद कर सकता है. चलिए आपको इन लक्षणों के बारे में बताते हैं. 

 त्वचा का बहुत ज्यादा सूखा होना 

बहुत रूखी, खुरदरी त्वचा किडनी के कमजोर होने का एक आम संकेत है.  TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, CKD वाले करीब 72 प्रतिशत लोगों में जेरोसिस पाया गया है. किडनी हमारे पसीने और ऑयल ग्लैंड को नियंत्रित करने में मदद करती है, इसलिए इनके कमजोर पड़ने पर त्वचा सूखने लगती है।

सूखी त्वचा में दरारें पड़ सकती हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. रिसर्च बताती है कि कई बार त्वचा का अत्यधिक सूखना पीलापन, खुजली या अन्य लक्षणों से पहले दिखाई देता है. इससे राहत पाने के लिए रोजाना हल्के मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें, गर्म पानी से लंबे समय तक नहाने से बचें और कॉटन जैसे सांस लेने वाले कपड़े पहनें. अगर सूखापन लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से किडनी की जांच कराएं. 

 लगातार खुजली होना

किडनी समस्या में लगातार तेज खुजली बहुत आम है. शरीर में यूरिया जैसे अपशिष्ट बढ़ने पर त्वचा के नर्व्स प्रभावित होते हैं, जिससे खुजली बढ़ती है. करीब 56 प्रतिशत CKD मरीज इस समस्या का सामना करते हैं और यह अक्सर फॉस्फोरस और पीटीएच लेवल बढ़ने से जुड़ी होती है. लगातार खुजलाने से त्वचा पर निशान, घाव या मोटे पैच बन सकते हैं. कुछ लोगों में खुजली इतनी बढ़ जाती है कि नींद और डेली रूटीन पर असर पड़ने लगता है. इलाज के लिए डॉक्टर अक्सर टॉपिकल क्रीम, UVB थेरेपी या ओटमील बाथ की सलाह देते हैं, लेकिन किडनी समस्या को कंट्रोल करना सबसे जरूरी है.

 त्वचा पर दाने या रैशेज

किडनी के ज्यादा खराब होने पर त्वचा पर रैशेज या छोटे-छोटे उठे हुए दाने दिख सकते हैं. जब खून में कचरा बढ़ जाता है, तो त्वचा पर छोटे, खुजली वाले बम्प्स बनते हैं, जो बाद में खुरदरे पैच का रूप ले सकते हैं. इसमें रैश, बैंगनी धब्बे या अल्सर भी बन सकते हैं, जो खासकर पैरों पर दिखाई देते हैं. एक गंभीर स्थिति कैल्सिफिलैक्सिस भी किडनी फेल्योर से जुड़ी है, जिसमें त्वचा कड़ी और अल्सर जैसी हो जाती है. लगभग 43 प्रतिशत CKD मरीज त्वचा के फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन से भी जूझते हैं. माइल्ड, फ्रेगरेंस-फ्री साबुन का इस्तेमाल और त्वचा को रगड़ने की बजाय हल्के हाथों से पोंछना जलन-दर्द कम कर सकता है. अगर रैश बढ़े, दर्द हो या पस आने लगे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

इसे भी पढ़ें: Male Infertility: पुरुषों में तेजी से बढ़ रही इनफर्टिलिटी, देश में 40% मामलों में मर्द खुद जिम्मेदार

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

आज ही खाना छोड़ दें ये 6 फूड, वरना आपकी बॉडी में घर बना लेगी डायबिटीज

आज ही खाना छोड़ दें ये 6 फूड, वरना आपकी बॉडी में घर बना लेगी डायबिटीज


Foods That Cause Diabetes: डायबिटीज सिर्फ मीठा खाने से नहीं होती, यह आपकी रोजमर्रा की खान-पान की आदतों से भी गहराई से जुड़ी है.  कई ऐसे फूड हैं, जिन्हें हम या तो कम आंके लेते हैं या नॉर्मल मानकर रोज खा लेते हैं, लेकिन लंबे समय में यही चीजें ब्लड शुगर को अंनकंट्रोल कर सकती हैं.  चलिए आपको ऐसे फूड के बारे में बताते हैं, अगर आप इनको बेवजह या ज्यादा खाने से टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है.

डीप-फ्राइड स्नैक्स

सामोसा, पकौड़ा, चिप्स ये सब हमारे रोजमर्रा के पसंदीदा स्नैक्स हैं, लेकिन लगातार तलकर बनाई गई चीजें अनहेल्दी फैट से भरी होती हैं. यह फैट धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर वजन बढ़ाता है. वजन बढ़ेगा तो इंसुलिन रेजिस्टेंस भी बढ़ेगा और यही टाइप-2 डायबिटीज की बड़ी वजह है. फास्ट फूड में इस्तेमाल होने वाला तेल कई बार बार-बार गर्म किया जाता है, जिससे उसमें ट्रांस फैट बनता है, जो ब्लड शुगर को और तेजी से बिगाड़ता है.

ग्रेनोला और हेल्दी सीरियल्स

ग्रेनोला और कई तरह के नाश्ते के सीरियल्स हेल्दी टैग के साथ बेचे जाते हैं, लेकिन इनमें छिपी शुगर की मात्रा आपको चौंका सकती है. बहुत से ग्रेनोला बार, ओट बार और सीरियल्स में एडेड शुगर इतनी होती है कि एक छोटी सर्विंग भी ब्लड शुगर को तुरंत ऊपर ले जाती है. बार-बार शुगर स्पाइक्स शरीर को इंसुलिन पर ज्यादा निर्भर बना देते हैं और यह आदत लंबे समय में डायबिटीज़ का खतरा बढ़ाती है.

प्रोसेस्ड मीट

सॉसेज, बेकन, सलामी जैसे प्रोसेस्ड मीट में सोडियम और नाइट्रेट्स काफी ज्यादा होते हैं. ये तत्व न सिर्फ हार्ट के लिए खराब हैं, बल्कि रिसर्च के मुताबिक इनका डायबिटीज से भी सीधा संबंध है. प्रोसेस्ड मीट शरीर में सूजन बढ़ाता है और मेटाबॉलिज़्म को धीमा करता है, जिसकी वजह से ब्लड शुगर नियंत्रित रखना मुश्किल होने लगता है.

सोडा और मीठे ड्रिंक्स

कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड सोडा में शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है. एक कैन सोडा में जितनी चीनी होती है, वह कई दिनों के नेचुरल शुगर सेवन से ज्यादा होती है. ऐसे ड्रिंक्स तुरंत ब्लड ग्लूकोज बढ़ाते हैं और पैनक्रियाज़ पर लगातार दबाव डालते हैं. हर बार मीठा पेय पीने पर शरीर को अतिरिक्त इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता जाता है.

सफेद ब्रेड और मैदा वाली चीजें

मैदा से बनी चीजें, जैसे व्हाइट ब्रेड, बन, कुकीज़, नान बहुत जल्दी ग्लूकोज़ में टूट जाती हैं. मैदा में फाइबर नहीं होता, इस वजह से यह ब्लड शुगर को तुरंत बढ़ाती है. बार-बार हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड खाने से शरीर को ब्लड शुगर संतुलित रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. यह आदत धीरे-धीरे डायबिटीज का जोखिम बढ़ा देती है.

सफेद चावल

सफेद चावल भारतीय भोजन का एक अहम हिस्सा है, लेकिन यह पूरी तरह रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी काफी ज्यादा है, यानी यह खाने के साथ ही ग्लूकोज बनकर सीधे ब्लड शुगर बढ़ाता है रोज़ाना बड़ी मात्रा में सफेद चावल खाने से वजन बढ़ता है और शुगर कंट्रोल बिगड़ता है जिससे टाइप-2 डायबिटीज़ का खतरा और बड़ा हो जाता है.

इसे भी पढ़ें- Digital Drug Promotion: एंटीबायोटिक्स और प्रिस्किप्शन वाली दवाओं के प्रचार पर क्यों लग रही रोक, इससे आम लोगों को कितना खतरा?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बीमार होने पर भर-भरकर इलेक्ट्रॉल तो नहीं पीने लगते हैं आप, जानिए ओवरडोज कितनी खतरनाक?

बीमार होने पर भर-भरकर इलेक्ट्रॉल तो नहीं पीने लगते हैं आप, जानिए ओवरडोज कितनी खतरनाक?


Electrolyte Supplements Risks: जब आप बीमार पड़ते हैं, खासतौर पर उल्टी-दस्त, बुखार या लगातार पसीना आने पर, तो अक्सर लोग जल्दी ठीक होने के चक्कर में इलेक्ट्रॉल या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक ज्यादा मात्रा में पीने लगते हैं. जबकि शरीर आमतौर पर अपने इलेक्ट्रोलाइट्स को आपके रोजमर्रा के खाने-पीने से ही संतुलित रख लेता है. लेकिन अगर आप बहुत पसीना बहा रहे हों या बार-बार उल्टी, दस्त हो रहे हों तो शरीर से सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल तेजी से बाहर निकल जाते हैं और डिहाइड्रेशन होने लगता है.  ऐसे में इलेक्ट्रॉल या स्पोर्ट्स ड्रिंक फायदेमंद होते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं. चलिए आपको बताते हैं कि अगर आप इसका ज्यादा यूज करते हैं, तो इसका नुकसान क्या हो सकता है. 

क्या होता है नुकसान?

सबसे पहले आपको यह समझने की जरूरत है कि लेक्ट्रोलाइट्स शरीर के फ्लूइड लेवल को बैलेंस रखते हैं और मांसपेशियों, नसों और अंगों को सही तरह काम करने में मदद करते हैं. लेकिन ओवरडोज होने पर यही मिनरल्स उल्टा असंतुलन पैदा कर देते हैं. brgeneral की रिपोर्ट के अनुसार, इसका असर कमजोरी, सिरदर्द, कंपकंपी, कन्फ्यूजन, मांसपेशियों में खिंचाव, तेज धड़कन, मतली और पेट खराब जैसे लक्षणों में दिखाई दे सकता है.शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का अत्यधिक बढ़ जाना हाइपरनैट्रेमिया या हाइपरकैलिमिया जैसी स्थितिय पैदा कर सकता है, जिनसे नसों और हार्ट की काम करने के तरीकों पर असर पड़ता है. ऐसी ओवरलोड स्थिति में दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे शरीर का फ्लूइड बैलेंस बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है.  इलेक्ट्रोलाइट पाउडर बेचने वाले कई ब्रांड एक पैकेट को तय मात्रा में पानी में घोलकर पीने की सलाह देते हैं. कुछ लोग इसे रोजाना इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कंपनियां भी यह मानती हैं कि बार-बार सेवन को लेकर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.

आपको क्या करना चाहिए?

अगर आपका इलेक्ट्रोलाइट लॉस बहुत ज्यादा नहीं है, जैसे भारी पसीना, एक्सरसाइज या स्टमक इंफेक्शन न हो तो इलेक्ट्रॉल बार-बार पीना ओवरडोज ही माना जाएगा. ऐसी स्थिति में पानी सबसे बेहतर है. वर्कआउट के लिए, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि  शुरू करने से 45 से 60 मिनट पहले 8 से 16 औंस पानी, एक्सरसाइज के दौरान हर 15 से 20 मिनट में 5 से 9 औंस पानी और अगर 30 मिनट से ज्यादा की एक्टिविटी हो, तभी इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक लें, वो भी शुगर लेवल देखकर.  इलेक्ट्रॉल जरूरी है, लेकिन सिर्फ उतना जितना शरीर को जरूरत हो.  ज्यादा मात्रा में यह भी नुकसान कर सकता है. 

इसे भी पढ़ें: Prem Chopra: कितनी खतरनाक बीमारी है सीवियर ऑर्टिक स्टेनोसिस, जिससे जूझ रहे प्रेम चोपड़ा?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp