30 साल उम्र के बाद नजर आएं ये 4 साइन तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना कोलन कैंसर बना लेगा शिकार

30 साल उम्र के बाद नजर आएं ये 4 साइन तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना कोलन कैंसर बना लेगा शिकार


साल 2025 में करीब 1,07,320 नए कोलन कैंसर केस आने का अनुमान था. सबसे बड़ी चिंता यह है कि कोलन कैंसर अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है. आमतौर पर यह 50 साल के बाद देखा जाता है, लेकिन अब कम उम्र के लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं और इसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है.

ऐसे में सबसे जरूरी है इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना. समय पर लक्षण दिख जाएं तो ठीक जल्दी होता है और इलाज आसान बन जाता है. डॉक्टर लगातार सलाह दे रहे हैं कि छोटी-छोटी चेतावनियों को भी हल्के में न लें.

ऐसे में सबसे जरूरी है इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना. समय पर लक्षण दिख जाएं तो ठीक जल्दी होता है और इलाज आसान बन जाता है. डॉक्टर लगातार सलाह दे रहे हैं कि छोटी-छोटी चेतावनियों को भी हल्के में न लें.

एक वायरल इंस्टाग्राम वीडियो में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जोसेफ सलहाब ने 30 की उम्र में दिखने वाले चार संभावित लक्षण बताए हैं. इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरा बढ़ा सकता है, लेकिन इन्हें समय पर पहचानने से जीवन बच सकता है.

एक वायरल इंस्टाग्राम वीडियो में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जोसेफ सलहाब ने 30 की उम्र में दिखने वाले चार संभावित लक्षण बताए हैं. इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरा बढ़ा सकता है, लेकिन इन्हें समय पर पहचानने से जीवन बच सकता है.

पहला संकेत है बेहद थकान. डॉक्टर के अनुसार, कोलन कैंसर धीरे-धीरे खून में कमी ला सकता है, जिससे कमजोरी और ज्यादा नींद आने लगती है. रिसर्च का भी मानता है कि कैंसर से जुड़ी थकान की एक बड़ी वजह एनीमिया ही है.

पहला संकेत है बेहद थकान. डॉक्टर के अनुसार, कोलन कैंसर धीरे-धीरे खून में कमी ला सकता है, जिससे कमजोरी और ज्यादा नींद आने लगती है. रिसर्च का भी मानता है कि कैंसर से जुड़ी थकान की एक बड़ी वजह एनीमिया ही है.

दूसरा संकेत है रात में पसीना. डॉक्टर बताते हैं कि कैंसर सेल्स इंफ्लेमेटरी प्रोटीन छोड़ते हैं, जिससे शरीर में हल्का बुखार और रात में पसीना आने लगता है. कई रिपोर्टों में यह बताया गया है कि कैंसर से जुड़े नाइट स्वेट्स अक्सर बहुत तेज और असामान्य होते हैं.

दूसरा संकेत है रात में पसीना. डॉक्टर बताते हैं कि कैंसर सेल्स इंफ्लेमेटरी प्रोटीन छोड़ते हैं, जिससे शरीर में हल्का बुखार और रात में पसीना आने लगता है. कई रिपोर्टों में यह बताया गया है कि कैंसर से जुड़े नाइट स्वेट्स अक्सर बहुत तेज और असामान्य होते हैं.

तीसरा बड़ा संकेत है बॉवेल हैबिट में बदलाव, जैसे अचानक कब्ज या दस्त बढ़ जाना. यह आमतौर पर कैंसर से बनने वाले ब्लॉकेज के कारण होता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, पेट दर्द, दस्त, कब्ज ये सभी कोलोरेक्टल कैंसर के संकेत हो सकते हैं.

तीसरा बड़ा संकेत है बॉवेल हैबिट में बदलाव, जैसे अचानक कब्ज या दस्त बढ़ जाना. यह आमतौर पर कैंसर से बनने वाले ब्लॉकेज के कारण होता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, पेट दर्द, दस्त, कब्ज ये सभी कोलोरेक्टल कैंसर के संकेत हो सकते हैं.

चौथा और सबसे अहम संकेत है स्टूल में खून. डॉक्टर इसे  कोलन कैंसर का क्लासिक निशान बताते हैं. जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के अनुसार, मल में खून आना अक्सर कोलन या रेक्टम में कहीं से ब्लीडिंग का संकेत होता है. अगर यह बार-बार हो, तो इसे हल्के में बिल्कुल नहीं लेना चाहिए.

चौथा और सबसे अहम संकेत है स्टूल में खून. डॉक्टर इसे कोलन कैंसर का क्लासिक निशान बताते हैं. जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के अनुसार, मल में खून आना अक्सर कोलन या रेक्टम में कहीं से ब्लीडिंग का संकेत होता है. अगर यह बार-बार हो, तो इसे हल्के में बिल्कुल नहीं लेना चाहिए.

युवाओं में बढ़ते मामलों को देखते हुए, इन छोटे लेकिन गंभीर संकेतों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. समय पर पहचान न सिर्फ कैंसर पकड़ने में मदद करती है, बल्कि इलाज के नतीजों को भी बेहतर बनाती है.

युवाओं में बढ़ते मामलों को देखते हुए, इन छोटे लेकिन गंभीर संकेतों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. समय पर पहचान न सिर्फ कैंसर पकड़ने में मदद करती है, बल्कि इलाज के नतीजों को भी बेहतर बनाती है.

Published at : 05 Dec 2025 12:41 PM (IST)

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गलती से भी मत पी लेना ये 4 ड्रिंक, वरना खराब हो जाएगी आपकी किडनी

गलती से भी मत पी लेना ये 4 ड्रिंक, वरना खराब हो जाएगी आपकी किडनी


रिसर्च भी यही बताती है कि ज्यादा कोला पीने से पेशाब की रसायनिक संरचना बदलती है और स्टोन बनने का खतरा बढ़ता है. इसलिए डार्क सोडा कम करना या छोड़ देना किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है. पानी और हाइड्रेशन यहां सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

बेहतर विकल्प के तौर पर नींबू या लाइम वाले स्पार्कलिंग वॉटर की सलाह दी जाती है. इससे फिज भी मिलता है और मिनरल बैलेंस या ज्यादा चीनी जैसी परेशानियों से भी बचा जा सकता है.

बेहतर विकल्प के तौर पर नींबू या लाइम वाले स्पार्कलिंग वॉटर की सलाह दी जाती है. इससे फिज भी मिलता है और मिनरल बैलेंस या ज्यादा चीनी जैसी परेशानियों से भी बचा जा सकता है.

एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन, चीनी और स्टिमुलेंट्स इतनी मात्रा में होते हैं कि किडनी पर तेज दबाव पड़ता है. ज्यादा कैफीन पेशाब बढ़ाकर डिहाइड्रेशन करता है, जिससे किडनी को गाढ़ा खून फिल्टर करने में परेशानी होती है.

एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन, चीनी और स्टिमुलेंट्स इतनी मात्रा में होते हैं कि किडनी पर तेज दबाव पड़ता है. ज्यादा कैफीन पेशाब बढ़ाकर डिहाइड्रेशन करता है, जिससे किडनी को गाढ़ा खून फिल्टर करने में परेशानी होती है.

ज्यादा शुगर वाले एनर्जी ड्रिंक्स BP बढ़ाते हैं और किडनी का मेटाबॉलिक बोझ तेज कर देते हैं. सामान्य कॉफी नुकसान नहीं करती, लेकिन ज्यादा कैफीन या शुगर मिलाने से किडनी पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है.

ज्यादा शुगर वाले एनर्जी ड्रिंक्स BP बढ़ाते हैं और किडनी का मेटाबॉलिक बोझ तेज कर देते हैं. सामान्य कॉफी नुकसान नहीं करती, लेकिन ज्यादा कैफीन या शुगर मिलाने से किडनी पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है.

ऐसे ड्रिंक्स इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगाड़ते हैं, क्रिएटिनिन बढ़ा सकते हैं और लंबे समय में स्टोन तथा किडनी फंक्शन कम करने का खतरा पैदा करते हैं. अच्छी क्वालिटी की कॉफी सीमित मात्रा में और बिना शुगर पीना सुरक्षित माना जाता है.

ऐसे ड्रिंक्स इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगाड़ते हैं, क्रिएटिनिन बढ़ा सकते हैं और लंबे समय में स्टोन तथा किडनी फंक्शन कम करने का खतरा पैदा करते हैं. अच्छी क्वालिटी की कॉफी सीमित मात्रा में और बिना शुगर पीना सुरक्षित माना जाता है.

स्पोर्ट्स ड्रिंक्स असली तौर पर भारी वर्कआउट के लिए बनाए गए थे, लेकिन इन्हें रोजाना पीने से किडनी पर अनावश्यक बोझ पड़ता है. इनमें चीनी, आर्टिफिशियल स्वीटनर और डाई होते हैं, जिनकी फिल्टरिंग किडनी के लिए मुश्किल होती है.

स्पोर्ट्स ड्रिंक्स असली तौर पर भारी वर्कआउट के लिए बनाए गए थे, लेकिन इन्हें रोजाना पीने से किडनी पर अनावश्यक बोझ पड़ता है. इनमें चीनी, आर्टिफिशियल स्वीटनर और डाई होते हैं, जिनकी फिल्टरिंग किडनी के लिए मुश्किल होती है.

स्मूदी को लोग हेल्दी समझते हैं, लेकिन ज्यादा पालक, केल और नट्स से ऑक्सालेट की मात्रा बहुत बढ़ जाती है. इससे कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन बनने का खतरा बढ़ता है और नेचुरल शुगर भी किडनी पर लोड बढ़ाती है.

स्मूदी को लोग हेल्दी समझते हैं, लेकिन ज्यादा पालक, केल और नट्स से ऑक्सालेट की मात्रा बहुत बढ़ जाती है. इससे कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन बनने का खतरा बढ़ता है और नेचुरल शुगर भी किडनी पर लोड बढ़ाती है.

किडनी की दिक्कतें धीरे-धीरे बनती हैं और शुरू में पता नहीं चलतीं. छोटे बदलाव जैसे सोडा छोड़ना, एनर्जी ड्रिंक सीमित करना और सही हाइड्रेशन किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखते हैं और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट तथा फिल्ट्रेशन को बेहतर बनाते हैं.

किडनी की दिक्कतें धीरे-धीरे बनती हैं और शुरू में पता नहीं चलतीं. छोटे बदलाव जैसे सोडा छोड़ना, एनर्जी ड्रिंक सीमित करना और सही हाइड्रेशन किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखते हैं और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट तथा फिल्ट्रेशन को बेहतर बनाते हैं.

Published at : 05 Dec 2025 12:06 PM (IST)

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सर्दियों में आने वाली इन सब्जियों को खाने से हो रहा कैंसर, इस देश ने जारी कर दी चेतावनी

सर्दियों में आने वाली इन सब्जियों को खाने से हो रहा कैंसर, इस देश ने जारी कर दी चेतावनी



Multiple Pesticides In Produce: ब्रिटेन में बेचे जाने वाले आम फल और सब्ज़ियों में ऐसे कीटनाशक मिले हैं जिनका संबंध कैंसर जैसे गंभीर रोगों से जोड़ा गया है. इससे लोगों की सेहत को लेकर बड़ी चिंता पैदा हो गई है. सरकार ने पिछले साल खाने-पीने की चीजों के 3,482 सैंपल की जांच की, जिनमें अंगूर सबसे ज्यादा संदिग्ध पाए गए. Pesticide Action Network UK (PAN UK) ने इन सैंपल्स का एनालिसिस किया और 17 तरह के फल-सब्ज़ियों में कुल 123 अलग-अलग रसायन पाए गए. इनमें से 42 कीटनाशक ऐसे थे जिनका संबंध कैंसर से बताया जाता है, और 21 ऐसे रसायन मिले जो शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं.

टर्की से आए सुल्ताना अंगूर के एक सैंपल में 16 अलग-अलग कीटनाशक मिले, जिनमें PFA यानि वो फॉरएवर केमिकल्स भी शामिल थे. ये केमिकल्स पर्यावरण में सदियों तक टूटते नहीं और शरीर में जमा होकर सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. कुल 108 अंगूर सैंपल की जांच में पाया गया कि 90 प्रतिशत में एक से ज्यादा कीटनाशक मौजूद थे.
ग्रेपफ्रूट की जांच में भी यही ट्रेंड दिखा 121 सैंपल्स में से 99 प्रतिशत में मल्टीपल कीटनाशक मिले. एक किलो के ग्रेपफ्रूट सैंपल में 10 तरह के रसायन तक पाए गए.

इनमें भी मिले केमिकल्स

लाइम के 24 सैंपल्स में से 79 प्रतिशत में कई कीटनाशक मिले. इसके अलावा केला, शिमला मिर्च, खरबूज़ा, और मिर्च में भी ऊंचे स्तर पर रसायन पाए गए. एक मिर्च के सैंपल में 11 कीटनाशक और एक ब्रोकोली सैंपल में आठ रसायन मिले. सरकारी एनवायरमेंट कमेटी के मुताबिक 2024 में टेस्ट किए गए 46.67 प्रतिशत सैंपल्स में कीटनाशक के बचे हुए अपशिष्ट मिले. इनमें से ज्यादातर कानूनी सीमा के भीतर थे, लेकिन 2.07 प्रतिशत सैंपल्स सीमा से ऊपर पाए गए. हालांकि समिति का कहना है कि सीमा से ऊपर होना जरूरी नहीं कि तुरंत खतरनाक हो.

MRL कैसे तय होते हैं?

 PAN UK का तर्क है कि MRL सिर्फ एक रसायन के हिसाब से तय किया जाता है जबकि असलियत यह है कि हमारे खाने में एक साथ कई रसायन मौजूद होते हैं. वे कहते हैं कि हम ये नहीं जानते कि इतने सारे केमिकल्स आपस में मिलकर शरीर पर क्या असर डालते हैं. कई बार इनका असर मिलकर और भी ज्यादा जहरीला हो सकता है इसे ‘कॉकटेल इफेक्ट’ कहा जाता है. PAN UK ने एक और चौंकाने वाली बात बताई, जांच में मिले 29 प्रतिशत कीटनाशक ऐसे थे जिन्हें ब्रिटेन में इस्तेमाल करने की अनुमति ही नहीं. लेकिन ये रसायन बाहर से आने वाले फलों-सब्जियों के जरिए UK की मार्केट में पहुंच जाते हैं.

इसे भी पढ़ें- IVF Cost In India: IVF इलाज मतलब कर्ज! सरकारी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, पढ़ें गरीब क्यों हो रहे इससे दूर?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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स्टील के बर्तन में कभी न रखें ये फूड आइटम्स, हो सकता है फूड पॉइजनिंग का खतरा

स्टील के बर्तन में कभी न रखें ये फूड आइटम्स, हो सकता है फूड पॉइजनिंग का खतरा



आज के समय में खाना स्टोर करने के लिए स्टील के बर्तन और टिफिन सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि स्टील के बर्तन टिकाऊ होते हैं, इन्हें साफ करना आसान होता है, और ये लंबे समय तक चलते भी हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ खाने की चीजें ऐसी भी होती हैं जिन्हें स्टील के बर्तन में रखना खतरनाक हो सकता है. अगर आप उन्हें स्टोर करते हैं तो न सिर्फ उनका टेस्ट खराब हो सकता है, बल्कि इससे आपकी सेहत को भी खतरा हो सकता है.

दरअसल, कुछ फूड आइटम्स में ऐसे तत्व होते हैं जो स्टील के साथ रिएक्शन कर सकते हैं. इन फूड्स और स्टील के बर्तन के बीच केमिकल रिएक्शन हो सकता है, जिससे खाने का टेस्ट खराब हो सकता है और साथ ही यह फूड पोषण भी खो सकता है और इससे फूड पॉइजनिंग या पेट से जुड़ी अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं. तो आइए जानते हैं कि कौन-कौन सी फूड आइटम्स हैं जिन्हें आपको स्टील के बर्तन में कभी भी स्टोर नहीं करना चाहिए. 

स्टील के बर्तन में ये चीजें रखने से बढ़ सकता है फूड पॉइजनिंग का खतरा

1. फल स्टील के बर्तन में न रखें – फल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं और इन्हें सही तरीके से स्टोर करना बहुत जरूरी होता है. स्टील के बर्तन में फलों को रखने से वे जल्दी खराब हो सकते हैं और उनका टेस्ट भी बिगड़ सकता है. इसके अलावा, स्टील के बर्तन फलों की नमी को बढ़ा सकता है, जिससे फल जल्दी सड़ जाते हैं. फलों को स्टोर करने के लिए एयर टाइट ग्लास कंटेनर सबसे अच्छे ऑप्शन हैं. अगर आप चाहें तो अच्छी क्वालिटी वाले प्लास्टिक कंटेनर का भी यूज कर सकते हैं. इससे फल ज्यादा समय तक ताजा और सुरक्षित रहते हैं. 

2. अचार को स्टील के बर्तन में न रखें – अचार हर घर की रसोई का एक अहम हिस्सा होता है और इसे अक्सर लंबे समय तक स्टोर किया जाता है. अचार में नेचुरल एसिड होता है, जो स्टील के साथ केमिकल रिएक्शन कर सकता है. इससे न सिर्फ स्टील के बर्तन में जंग लगने का खतरा रहता है, बल्कि अचार का टेस्ट भी खराब हो सकता है. कुछ मामलों में तो यह रिएक्शन खाने को नुकसान भी पहुंचा सकता है. इसलिए अचार को हमेशा कांच या प्लास्टिक के कंटेनर में ही स्टोर करना चाहिए ताकि उसकी क्वालिटी बनी रहे और सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े. 

3. दही को स्टील के बर्तन में न रखें – दही हमारे हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद होती है, लेकिन दही को स्टील के बर्तन में रखना सही नहीं है. दही में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो स्टील के साथ मिलकर खराब रिएक्शन कर सकते हैं. इससे दही का टेस्ट खराब हो सकता है और दही जल्दी खराब भी हो जाती है. इसके अलावा, स्टील के बर्तन में रखने से दही में फर्मेंटेशन की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे यह खाने योग्य नहीं रह जाती, इसलिए दही को हमेशा कांच या मिट्टी के बर्तन में स्टोर करना चाहिए. मिट्टी के बर्तन न सिर्फ दही को ताजा रखते हैं, बल्कि यह दही का टेस्ट भी बनाए रखते हैं. 

यह भी पढ़ें Alcohol Side Effects: लिवर को कब सड़ा देती है शराब? एक्सपर्ट्स ने बताया कि कभी नहीं करनी चाहिए ये गलतियां

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40 के बाद ये 5 आदतें आपको पहुंचा सकती हैं नुकसान, डॉक्टर्स ने जारी की चेतावनी

40 के बाद ये 5 आदतें आपको पहुंचा सकती हैं नुकसान, डॉक्टर्स ने जारी की चेतावनी


एक्सपर्ट्स के अनुसार, 40 से 60 साल के लोगों को हर दिन अच्छे से 9 घंटे की नींद जरूरी होती है. क्योंकि इससे शरीर की रिपेयर प्रक्रिया और हार्मोन बैलेंस बना रहता है. 7 घंटे से कम सोने पर टाइप टू डायबिटीज का खतरा 9 प्रतिशत बढ़ जाता है. वहीं नींद की कमी पेट में फैट जमा करती है. इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और शरीर जल्दी थक जाता है. ऐसे में उम्र बढ़ाने के साथ नींद को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

40 की उम्र पार करने के बाद स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को इग्नोर करना बंद कर देना चाहिए. 40 की उम्र के बाद शरीर हर दशक में 3 से 5 प्रतिशत मसल्स खोने लगता है. जिसे रोकने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूरी होती है. वहीं हफ्ते में दो बार की गई स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बोन डेंसिटी बढ़ाती है, मेटाबॉलिज्म बेहतर करती है और हार्ट डिजीज का खतरा 17 प्रतिशत तक कम करती है.

40 की उम्र पार करने के बाद स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को इग्नोर करना बंद कर देना चाहिए. 40 की उम्र के बाद शरीर हर दशक में 3 से 5 प्रतिशत मसल्स खोने लगता है. जिसे रोकने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूरी होती है. वहीं हफ्ते में दो बार की गई स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बोन डेंसिटी बढ़ाती है, मेटाबॉलिज्म बेहतर करती है और हार्ट डिजीज का खतरा 17 प्रतिशत तक कम करती है.

40 की उम्र के बाद प्रोसेस्ड फूड खाना भी बंद करना चाहिए. चिप्स और सोडा जैसे हाईली प्रोसेस्ड फूड 40 के बाद मोटापे का बड़ा कारण बनते हैं. यह ब्लड शुगर स्पाइक करते हैं, इन्फ्लेमेशन बढ़ाते हैं और दिल की बीमारी का खतरा दोगुना कर देते हैं. इन स्नैक्स में फाइबर की कमी पेट और आंतों की सेहत खराब करती है और कोलन कैंसर का खतरा 20 प्रतिशत तक बढ़ा देती है.

40 की उम्र के बाद प्रोसेस्ड फूड खाना भी बंद करना चाहिए. चिप्स और सोडा जैसे हाईली प्रोसेस्ड फूड 40 के बाद मोटापे का बड़ा कारण बनते हैं. यह ब्लड शुगर स्पाइक करते हैं, इन्फ्लेमेशन बढ़ाते हैं और दिल की बीमारी का खतरा दोगुना कर देते हैं. इन स्नैक्स में फाइबर की कमी पेट और आंतों की सेहत खराब करती है और कोलन कैंसर का खतरा 20 प्रतिशत तक बढ़ा देती है.

40 के बाद बिना लक्षणों के भी नियमित ब्लड टेस्ट जरूरी होते हैं. क्योंकि शरीर कई छिपी समस्याएं इन्हीं टेस्ट से पकड़ता है. इन टेस्ट में हाई कोलेस्ट्रॉल, प्री डायबिटीज और थायराइड शामिल होते हैं. वहीं हर साल किए गए टेस्ट 30 प्रतिशत तक क्रॉनिक डिजीज को रोकने में मदद करते हैं.

40 के बाद बिना लक्षणों के भी नियमित ब्लड टेस्ट जरूरी होते हैं. क्योंकि शरीर कई छिपी समस्याएं इन्हीं टेस्ट से पकड़ता है. इन टेस्ट में हाई कोलेस्ट्रॉल, प्री डायबिटीज और थायराइड शामिल होते हैं. वहीं हर साल किए गए टेस्ट 30 प्रतिशत तक क्रॉनिक डिजीज को रोकने में मदद करते हैं.

इसके अलावा 40 की उम्र के बाद स्ट्रेस को जमा करना बंद करना चाहिए. लगातार स्ट्रेस शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर और टाइप टू डायबिटीज का खतरा 45 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. क्रोनिक स्ट्रेस दिमाग के उन हिस्सों को छोटा कर देता है जो मेमोरी संभालते हैं, जिससे एंग्जायटी दोगुनी हो सकती है और लाइफ स्पैन भी घट सकता है.

इसके अलावा 40 की उम्र के बाद स्ट्रेस को जमा करना बंद करना चाहिए. लगातार स्ट्रेस शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर और टाइप टू डायबिटीज का खतरा 45 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. क्रोनिक स्ट्रेस दिमाग के उन हिस्सों को छोटा कर देता है जो मेमोरी संभालते हैं, जिससे एंग्जायटी दोगुनी हो सकती है और लाइफ स्पैन भी घट सकता है.

Published at : 04 Dec 2025 11:04 AM (IST)

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अब वजन घटाने डाइट के लिए प्लान बनाना आसान, फिजियोथेरेपिस्ट ने बताया ChatGPT का स्मार्ट तरीका

अब वजन घटाने डाइट के लिए प्लान बनाना आसान, फिजियोथेरेपिस्ट ने बताया ChatGPT का स्मार्ट तरीका



आजकल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से जगह बना रही है. चाहे ईमेल लिखना हो, ऑफिस का शेड्यूल संभालना हो या घर के छोटे-मोटे काम, हर जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारी मदद कर रहा है. इसी बीच, अब लोग अपनी फिटनेस और हेल्थ को भी तकनीक की मदद से बेहतर बनाने लगे हैं. पहले जहां वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट बनवाने में कई डॉक्टरों या न्यूट्रिशनिस्ट के पास जाना पड़ता था, अब वही काम आप अपने फोन से कुछ ही मिनटों में कर सकते हैं. वह भी ChatGPT की मदद से, फिजियोथेरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और Dr. Rebecca  Physiotherapy की संस्थापक रेबेका पिंटो ने एक आसान और समझने योग्य तरीका बताया है.

उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने ChatGPT की मदद से कुछ ही मिनटों में पर्सनलाइज्ड वजन घटाने की योजना बनाने का तरीका समझाया.रेबेका बताती हैं कि अगर आपको अपने BMR (Basal Metabolic Rate), TDEE (Total Daily Energy Expenditure) और सही माइक्रो ब्रेकडाउन जानना हो, यानी आपको दिन में कितनी कैलोरी और किस अनुपात में प्रोटीन, कार्ब और फैट लेना चाहिए तो ChatGPT यह सब तुरंत बता सकता है. बस आपको सही जानकारी और सही प्रॉम्प्ट डालने की जरूरत है. 
 
1. अपने BMR, TDEE और मैक्रोज की कैल्क्युलेशन करवाएं – रेबेका का कहना है कि ChatGPT आपके शरीर, उम्र और जीवनशैली से जुड़ी जानकारी लेकर आपके लिए एक सटीक कैलोरी लक्ष्य तैयार कर सकता है. इसके लिए आपको ChatGPT से लिखकर पूछना है कि फैट कम करने के लिए मेरे बीएमआर, टीडीईई, और आदर्श कैलोरी प्लस मैक्रो लक्ष्यों की कैल्क्युलेशन करें. मैं [उम्र], वर्षीय [पुरुष/महिला], [ऊंचाई सेमी में], [वजन किलोग्राम में], [ एक्टिविटी लेवल , हल्का, मिडीयम और एक्टिव] हूं. मैं [वसा कम करना] चाहता/चाहती हूं. 

इसमें आप अपनी उम्र, लिंग, वजन, ऊंचाई और अपनी एक्टिविटी लेवल जैसी जानकारी भर देंगे. ChatGPT इन आंकड़ों के आधार पर बताता है कि आपका शरीर आराम की अवस्था में कितनी कैलोरी जलाता है, आप पूरे दिन में कुल कितनी कैलोरी खर्च करते हैं , वजन कम करने के लिए आपको दिन में कितनी कैलोरी खानी चाहिए, प्रोटीन, कार्ब्स और फैट का सही प्लान क्या होना चाहिए. इस तरह आपको एकदम पर्सनलाइज्ड कैलोरी और मैक्रो गाइड मिल जाती है. 

2. अपने लिए एक भारतीय डाइट प्लान बनवाएं – जब आपको अपनी कैलोरी और मैक्रोज मिल जाएं, तब अगला कदम है ChatGPT से एक डाइट प्लान तैयार करवाना. यह प्लान आपकी पसंद के खाने, आपके भोजन के समय और आपकी लाइफस्टाइल के अनुसार बनाया जा सकता है. रेबेका कहती हैं कि इसके लिए ChatGPT को जानकारी दें कि आप दिन में कितनी बार खाना खाते हैं. आपको सबसे ज्यादा भूख किस समय लगती है, कौन-से खाने आपको पसंद और नापसंद हैं, आप शाकाहारी हैं, मांसाहारी, एगिटेरियन या मिक्स डाइट लेते हैं. आप चाहते हैं कि डाइट प्लान भारतीय हो और इसमें आसानी से अवेलेबल जानकारी का यूज हो. इन जानकारियों के आधार पर ChatGPT आपको एक ऐसा डाइट प्लान देता है, जिसे आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बिना किसी परेशानी के अपना कर वजन घटा सकते हैं. अगर आपको और ऑप्शन चाहिए हों, तो आप ChatGPT से अलग-अलग प्रकार के भारतीय, हेल्दी और कम-कैलोरी वाले खाने भी सुझाने के लिए कह सकते हैं. 

यह भी पढ़ें: लंबे समय से बना हुआ है पीठ दर्द तो न मान बैठना थकान, हो सकता इस खतरनाक कैंसर का इशारा

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