Capital Gain: एक टैक्सपेयर के लिए टैक्स फाइल करना जीवन का वित्तय हिस्सा है. अक्सर लोग अपनी इनकम की हिसाब लगाते है. एक टैक्सपेयर जिसकी लिस्टेड शेयरों से शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन के तौर पर 8.15 लाख रूपये की कमाई हुई थी और कोई दूसरी इनकम नहीं थी, यह जानना चाहता था कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत कुल इनकम 12 लाख से कम होने के बावजूद इनकम टैक्स पोर्टल 20 प्रतिशत टैक्स क्यों लगा रहा है.
टैक्सपेयर का सवाल
‘आस्क वॉलेट वाइज़’ वेबसाइाट पर एक टैक्सपेयर ने पूछा, मैंने 8 महीने के अंदर लिस्टेड शेयर बेचकर ₹8,15,000 का शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन कमाया है. मेरी कोई और इनकम नहीं है. चूंकि मेरी कुल सालाना इनकम नई टैक्स व्यवस्था के तहत 12 लाख की टैक्स-फ्री सीमा से काफी कम है, इसलिए मुझे लगता है कि सेक्शन 87A की छूट की वजह से मेरी टैक्स देनदारी ज़ीरो होनी चाहिए. हालांकि, इनकम टैक्स पोर्टल 20 दर की फ्लैट दर से टैक्स कैलकुलेट कर रहा है. क्या पोर्टल में कोई गड़बड़ी है?
एक्सपर्ट ने क्या सलाह दी ?
दरअसल, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 87A के तहत, नई टैक्स व्यवस्था में 60,000 रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है, अगर टैक्सपेयर भारत का नागरिक है और स्लैब दरों पर टैक्स लगने वाली आय 12 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं है, तो नई टैक्स व्यवस्था के तहत, सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली छूट सिर्फ़ सामान्य आय पर लगने वाले टैक्स पर ही मिलती है . यह छूट उन आय पर लगने वाले टैक्स के लिए नहीं मिलती जिन पर खास रेट से टैक्स लगता है, चाहे ही ऐसी स्पेशल आय को मिलाकर कुल आय 12 लाख रुपये से ज़्यादा न हो.
जानकार के मुताबिक, पोर्टल में कोई गड़बड़ी नहीं है. अगर आप एक देश के नागरिक के तौर पर टैक्सपेयर हैं, तो पोर्टल लिस्टेड शेयरों से होने वाले शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (कम समय में होने वाले पूंजीगत लाभ) पर चार लाख रुपये की शुरुआती छूट सीमा के बाद 20 दर की फ्लैट दर से सही ढंग से टैक्स कैलकुलेट कर रहा है. अगर आप नॉन-रेजिडेंट (एनआरआई)हैं, तो आपको पूरे शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स पर 20 प्रतिशत टैक्स देना होगा, क्योंकि ऐसे में कम समय में पूंजीगत लाभ के मामले में मामूली छूट के मुकाबले सामान्य आय में कमी को एडजस्ट करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
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