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  • वैश्विक अनिश्चितता, LPG मूल्य वृद्धि के बीच इथेनॉल विकल्प.
  • सरकारी तेल कंपनियाँ इथेनॉल आधारित कुकिंग फ्यूल ला रही हैं.
  • इथेनॉल सस्ता, स्वच्छ, सुरक्षित; आयातित LPG पर निर्भरता घटाएगा.
  • कई अफ्रीकी, एशियाई देशों में इथेनॉल किचन ईंधन के रूप में.

Ethanol as Kitchen Fuel: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अब एथेनॉल को LPG सिलेंडर के विकल्प के तौर पर देखे जाने की बात चल रही है. यानी कि पेट्रोल में ब्लेंडिंग के बाद अब एथेनॉल को आगे आने वाले समय में किचन फ्यूल के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि LPG की बढ़ती कीमतों और इसकी सप्लाई में आ रही रुकावटों के बीच इसे किचन फ्यूल के रूप में भी अपनाया जा सकता है. इस क्रम में सरकारी तेल कंपनियां भी केंद्र सरकार की ग्रीन एनर्जी नीति के तहत एथेनॉल बेस्ट कुकिंग फ्यूल और इससे चलने वाले चूल्हे बाजार में उतारने की तैयारियों में जुट गई हैं. बताया जा रहा है कि इंडियन ऑयल (IOCL), भारत गैस (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी कंपनियां अब इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रही हैं. 

एथेनॉल के इस्तेमाल पर क्यों जोर? 

देश में एथेनॉल का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसका उत्पादन मुख्यत: गन्ने के रस, मक्का और खराब या सड़े-गले अनाजों से होता है. ऐसे में आयात किए हुए LPG के मुकाबले यह काफी सस्ता बैठेगा. वैसे भी भारत एक ऐसा देश है, जो अपनी जरूरत का 60% से ज्यादा एलपीजी विदेशों से मंगाता है. इसके भुगतान में देश के सरकारी खजाने पर दबाव पड़ता है.

ऊपर से इस बीच दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने जून के लिए एलपीजी के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में 1% से 3% तक का इजाफा भी कर दिया है. ऐसे में एथेनॉल को अगर किचन फ्यूल के रूप में इस्तेमाल करने पर फोकस किया जाए, तो इसकी कीमत काफी कम बैठेगी. 

एथेनॉल से जलने वाले चूल्हे कोयले या लकड़ी से जलने वाले चूल्हों के मुकाबले अधिक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल होगा क्योंकि इससे धुआं और प्रदूषण दोनों कम होगा. एलपीजी की तरह इसमें गैस लीक होने या सिलेंडर फटने का भी डर नहीं रहेगा.

किन देशों में हो रहा किचन फ्यूल के तौर पर इथेनॉल का इस्तेमाल? 

अफ्रीका और एशिया महाद्वीप में ऐसे कई सारे देश हैं, जहां एथेनॉल का इस्तेमाल पहले से ही किचन फ्यूल के रूप में हो रहा है. इनमें केन्या, इथियोपिया, घाना, तंजानिया, मेडागास्कर और मोजांबिक जैसे अफ्रीकी देश शामिल हैं, जहां अस्पतालों से लेकर छात्रावासों और कम्युनिटी किचन में एथेनॉल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. इनके अलावा, फिलीपींस, थाइलैंड जैसे एशियाई देशों और ब्राजील व हैती जैसे लैटिन अमेरिकी देशों में भी इसका इस्तेमाल किचन फ्यूल के रूप में हो रहा है. 

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