घर में रहने वालों को भी बीमार कर रहा पीएम2.5, जानें इनडोर पॉल्यूशन कितना खतरनाक?

घर में रहने वालों को भी बीमार कर रहा पीएम2.5, जानें इनडोर पॉल्यूशन कितना खतरनाक?


हम अक्सर यह सोचते हैं कि घर हमारे लिए सबसे सुरक्षित जगह है. दरवाजे बंद कर के, खिड़कियां बंद कर के हम यह मान लेते हैं कि हमारे परिवार को कोई नुकसान नहीं होगा. लेकिन सच यह है कि हमारे घर के अंदर हवा कई बार बाहरी हवा से भी ज्यादा दूषित हो सकती है. धूल, धुएं, फर्नीचर से निकलने वाले रसायन, खाना पकाने के दौरान बनने वाले छोटे कण, सफाई से निकलने वाले हानिकारक गैस ये सब धीरे-धीरे हमारी हेल्थ को नुकसान पहुंचाते हैं. 

भारत जैसे देश में, जहां अक्सर घरों में वेंटिलेशन यानी हवा का अच्छा प्रवाह नहीं होता, इन प्रदूषकों का असर और भी गंभीर हो जाता है. साथ ही पीएम 2.5 घर में रहने वालों को भी बीमार कर रहा है. लंबे समय तक इनसे संपर्क में रहने से बच्चों में एलर्जी और अस्थमा, वयस्कों में फेफड़ों की बीमारियां और यहां तक कि हार्ट डिजीज और मस्तिष्क संबंधी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं. 

घर में रहने वालों को भी बीमार कर रहा पीएम 2.5

1. खाना पकाने से धुएं और कण की वजह से – जब हम तलते या ग्रिल करते हैं, तब छोटे छोटे धूल और धुएं के कण (PM2.5) हवा में फैलते हैं. ये कण इतने छोटे होते हैं कि वे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं और रक्त में भी प्रवेश कर सकते हैं. 
 
2. फर्नीचर और निर्माण सामग्री से निकलने वाले रसायन – पार्टिकल बोर्ड, प्लाईवुड और कुछ पेंट्स से फॉर्मेल्डिहाइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती रहती हैं. ये रसायन गंधहीन होने के कारण हम अक्सर इसका एहसास नहीं कर पाते है.

3. सफाई उत्पाद और एअर फ्रेशनर – सामान्य घरेलू क्लीनर, एयर फ्रेशनर और सौंदर्य प्रसाधन वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) छोड़ते हैं. लंबे समय तक संपर्क में रहने से सिरदर्द, आंखों में जलन, एलर्जी और यहां तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. 

4. नमी और फफूंद – घर के अंदर ज्यादा नमी होने पर फफूंद पनप जाती है. फफूंद और इसके माइकोटॉक्सिन आपके श्वसन तंत्र और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकते हैं. 

5. पालतू जानवर और धूल – पालतू जानवरों के बाल, रूसी और मूत्र में मौजूद प्रोटीन हवा में एलर्जी कारक बन जाते हैं. सूक्ष्म धूल और मृत त्वचा कोशिकाओं से भी एलर्जी और अस्थमा का खतरा बढ़ता है. 

6. कार्बन मोनोऑक्साइड और रेडॉन – ये दोनों रंगहीन, गंधहीन और बेहद खतरनाक गैसें हैं. कम मात्रा में भी सिरदर्द, थकान और चक्कर ला सकती हैं. ज्यादा मात्रा में ये जानलेवा हो सकती हैं. 

इनडोर पॉल्यूशन कितना खतरनाक?

घर के अंदर की खराब हवा धीरे-धीरे हमारे शरीर पर असर डालती है. इससे लगातार सिरदर्द, थकान और नींद में कमी, आंखों, नाक और गले में जलन, बार-बार खांसी, छींक या एलर्जी, त्वचा पर चकत्ते या जलन, बच्चों में नई एलर्जी या अस्थमा का बढ़ना, मानसिक थकान, याददाश्त में कमी और एकाग्रता में कमी, अगर ये लक्षण केवल घर के अंदर होते हैं और बाहर जाने पर कम हो जाते हैं, तो यह सिक बिल्डिंग सिंड्रोम यानी घर के अंदर की हवा से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है. 

घर की हवा को सुरक्षित बनाने के उपाय

1. रोजाना 15–20 मिनट के लिए खिड़कियां खोलें.

2. खाना बनाते समय एग्जॉस्ट फैन का यूज करें.

3. HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर लगाएं.

4. घर की नमी 50 प्रतिशत से कम रखें. 

5. फर्नीचर और पेंट में से निकलने वाले रसायनों से बचें. 

6. सुगंधित क्लीनर और एयर फ्रेशनर के बजाय नेचुरल ऑप्शन अपनाएं, पौधों का यूज करें, कुछ पौधे हवा से प्रदूषक सोख सकते हैं. 

7. एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग ऐप्स से हवा की क्वालिटी पर नजर रखें. 

यह भी पढ़ें – सिर्फ सुबह-सुबह टहलने से नहीं सुधरेगी हार्ट हेल्थ, जानें क्या-क्या है जरूरी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

सिर्फ सुबह-सुबह टहलने से नहीं सुधरेगी हार्ट हेल्थ, जानें क्या-क्या है जरूरी?

सिर्फ सुबह-सुबह टहलने से नहीं सुधरेगी हार्ट हेल्थ, जानें क्या-क्या है जरूरी?


आजकल ज्यादातर लोग मानते हैं कि अगर रोज सुबह उठकर 20–30 मिनट टहल लें, तो उनका दिल हमेशा हेल्दी रहेगा. वॉक करना वाकई फायदेमंद है, लेकिन सिर्फ टहलना ही दिल की सेहत की गारंटी नहीं है. हार्ट को हेल्दी रखने के लिए पूरा लाइफस्टाइल सही होना जरूरी है, जिसमें खान-पान, एक्सरसाइज, नींद, तनाव, आदतें और सोच सब कुछ शामिल है. 

दिल की बीमारियां आज लाइफस्टाइल डिजीज बन चुकी हैं.गलत खान-पान, बैठे-बैठे काम करना, तनाव, धूम्रपान, शराब और नींद की कमी  ये सभी मिलकर दिल को धीरे-धीरे कमजोर बना देते हैं. अच्छी बात यह है कि अगर समय रहते कुछ सही कदम उठा लिए जाएं, तो हार्ट डिजीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि दिल को मजबूत और हेल्दी रखने के लिए वॉक के अलावा और क्या-क्या जरूरी है. 

दिल को हेल्दी रखने के लिए वॉक के अलावा क्या-क्या जरूरी है

1. दिल की सेहत के लिए सही खानपान सबसे जरूरी – एक्सपर्ट्स के अनुसार, आप क्या खाते हैं, इसका सीधा असर आपके दिल पर पड़ता है. ज्यादा तला-भुना, पैकेट वाला और मीठा खाना दिल की धमनियों में चर्बी जमा कर सकता है. इसलिए हरी सब्जियां जैसे पालक, लौकी, भिंडी, गाजर, ताजे फल जैसे सेब, संतरा, अमरूद, पपीता, साबुत अनाज जैसे दलिया, ओट्स, ब्राउन राइस, दालें, चना, राजमा, मूंग अच्छा फेट जैसे अखरोट, अलसी, जैतून का तेल जैसी चीजें डाइट में शामिल करें. 

2. सिर्फ टहलना नहीं, पूरा व्यायाम जरूरी है – सुबह की वॉक अच्छी शुरुआत है, लेकिन दिल को मजबूत रखने के लिए इतना काफी नहीं, दिल के लिए फायदेमंद एक्सरसाइज तेज  चलना या हल्की दौड़, साइकिल चलाना, रस्सी कूदना, योग और प्राणायाम, हल्की वेट ट्रेनिंग, हफ्ते में कम से कम 150 मिनट हल्की एक्सरसाइज या 75 मिनट तेज एक्सरसाइज करने की कोशिश करें.

3. वजन कंट्रोल में रखें – एक्सपर्ट्स के अनुसार, बढ़ा हुआ वजन दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है. मोटापा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है, जो सीधे हार्ट डिजीज से जुड़े हैं. इसलिए सही डाइट और नियमित एक्सरसाइज आपके वजन को कंट्रोल में रखती है. छोटे-छोटे बदलाव, जैसे देर रात खाना छोड़ना और मीठा कम करना, बहुत फर्क डाल सकते हैं.

4. नमक और सोडियम कम करें – ज्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जो दिल के लिए खतरनाक है. पैकेट वाले और डिब्बाबंद खाने से बचें.अचार, नमकीन, सॉस सीमित मात्रा में लें. खाने में स्वाद के लिए नींबू, धनिया, मसाले यूज करें. 

5. धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं – धूम्रपान दिल की नसों को सख्त कर देता है और ऑक्सीजन की सप्लाई कम कर देता है. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.अगर आप सिगरेट या तंबाकू लेते हैं, तो इसे छोड़ना दिल के लिए सबसे बड़ा तोहफा होगा. 

6. तनाव को हल्के में न लें – एक्सपर्ट्स के अनुसार, लगातार तनाव में रहने से दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है. समय के साथ यह हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है. तनाव कम करने के आसान तरीके गहरी सांस लेना, ध्यान और योग, प्रकृति के बीच समय बिताना, परिवार और दोस्तों से खुलकर बात करना है. 

7. पूरी नींद लें – कम नींद लेने वालों में दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है. हर दिन 7–8 घंटे की अच्छी नींद दिल को आराम देती है और शरीर को रिपेयर करने का मौका देती है.सोने से पहले मोबाइल और टीवी से दूरी बनाना फायदेमंद होता है. 

8. नियमित हेल्थ चेक-अप कराएं – ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच बहुत जरूरी है. बीमारी का जल्दी पता लग जाए, तो इलाज आसान हो जाता है. 

यह भी पढ़ें – बच्चा ऑनलाइन गेम खेलता है, उसके दिमाग में सुसाइड के ख्याल तो नहीं आ रहे? ये संकेत दिखें तो हो जाएं अलर्ट

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बच्चा ऑनलाइन गेम खेलता है, उसके दिमाग में सुसाइड के ख्याल तो नहीं आ रहे? ये संकेत दिखें तो हो ज

बच्चा ऑनलाइन गेम खेलता है, उसके दिमाग में सुसाइड के ख्याल तो नहीं आ रहे? ये संकेत दिखें तो हो ज


उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे देश को झकझोर  कर रख दिया है. यहां तीन नाबालिग सगी बहनों ने नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली. शुरुआती जांच में सामने आया कि तीनों बहनें एक टास्क बेस्ड ऑनलाइन कोरियन लव गेम की आदी थी. वहीं यह घटना सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं बल्कि डिजिटल दौर में बच्चों की मानसिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही है.

दरअसल साहिबाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में रहने वाली तीन बहनें, जिनकी उम्र करीब 12, 14 और 16 साल थी. लंबे समय से मोबाइल गेमिंग में डूबी हुई थी. बताया गया कि वे न स्कूल जाती थी और न ही बाहर किसी से मिलती थी. तीनों ने अपने लिए कोरियन नाम तक रख लिए थे और कोरियन कल्चर को फॉलो करने लगी थी. परिवार के अनुसार पिता ने जब उनकी गेमिंग की आदत पर आपत्ति जताई और मोबाइल फोन छीन लिया, तो तीनों गहरे मानसिक दबाव में चली गई. जिसके बाद उन्होंने फ्लैट की बालकनी से छलांग लगाकर जान दे दी. मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें लिखा था मम्मी-पापा सॉरी… हम गेम नहीं छोड़ पा रही है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि बच्चा ऑनलाइन गेम खेलता है तो उसके दिमाग में सुसाइड के ख्याल तो नहीं आ रहे हैं और कौन से संकेत दिखें तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए. 

क्या है कोरियन लव गेम?

एक्सपर्ट्स के अनुसार कोरियन लव गेम एक ऐसा ऑनलाइन गेम है, जिसमें सोशल मीडिया के जरिए एक अनजान व्यक्ति यूजर से संपर्क करता है. वह खुद को काेरियन बताकर  दोस्ती और प्यार की बातें करता है. वहीं भरोसा जीतने के बाद वह छोटे-छोटे टास्क देना शुरू करता है. वहीं शुरुआत में टास्क आसान होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे मुश्किल और मानसिक दबाव बढ़ाने वाले हो जाते हैं. अगर यूजर टास्क पूरा करने से मना करें तो उसे डराया और धमकाया जाता है. इस तरह के गेम में करीब 50 टास्क होते हैं, जो कई दिनों तक चलते हैं. 

ऑनलाइन गेम बच्चों के दिमाग पर कैसे डालते हैं असर?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों और किशोरों का दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं होता है. ऐसे में वे गेम के कैरेक्टर और चैलेंज को ही असली दुनिया मानने लगते हैं. टास्क पूरे करने का दबाव, डर और हार का भय उनके निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर देता है. इसके अलावा अमेरिकी साइकोलॉजिस्ट जीन एम. ट्वेंग की किताब iGen के अनुसार 2011 के बाद से ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया एडिक्शन के कारण युवाओं में डिप्रेशन और आत्महत्या के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है.

कौन से संकेत दिखें तो हो जाएं अलर्ट 

अगर आपका बच्चा हर वक्त मोबाइल या गेम के बारे में ही सोचता रहता है, गेम रोकने पर गुस्सा या चिड़चिड़ापन दिखाता है, परिवार और दोस्तों से दूरी बनाने लगे,  नींद और दिनचर्या बिगड़ जाए, पढ़ाई में रुचि खत्म हो जाए, बार-बार उदासी, डर  या खालीपन महसूस करें तो ये ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन के संकेत हो सकते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर ऐसे 4 से 5 संकेत लगातार दिखें तो पेरेंट्स को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए. 

पेरेंट्स क्या करें?

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बच्चों को मोबाइल देना पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन निगरानी बहुत जरूरी है. पेरेंट्स को बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए. उनके स्क्रीन टाइम पर नजर रखनी चाहिए  और  स्मार्टफोन में पेरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल करना चाहिए. पेरेंटल कंट्रोल की मदद से बच्चों के गेम्स, ऐप्स और ऑनलाइन कंटेंट को सीमित किया जा सकता है. इससे वे खतरनाक गेम्स और चैलेंज से दूर रह सकते हैं. 

ये भी पढ़ें-Arrhythmia: क्या धड़कते-धड़कते अचानक रुक आता है आपका भी दिल, जानें किस बीमारी में होता है ऐसा?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

गेमिंग की वजह से कौन-सा हार्मोन हो जाता है एक्टिव, इससे बॉडी में कितने होते हैं बदलाव?

गेमिंग की वजह से कौन-सा हार्मोन हो जाता है एक्टिव, इससे बॉडी में कितने होते हैं बदलाव?


Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्यों होता है ब्रेन हैमरेज? एक्सपर्ट्स से जानें इसके कारण, प्रकार और बचाव के सबसे जरूरी तरीके

क्यों होता है ब्रेन हैमरेज? एक्सपर्ट्स से जानें इसके कारण, प्रकार और बचाव के सबसे जरूरी तरीके


Early Signs Of Brain Hemorrhage: ब्रेन हैमरेज स्ट्रोक का एक गंभीर रूप है, जिसमें दिमाग की किसी ब्लड बेसल्स के फटने या लीक होने से खून बहने लगता है. इससे ब्रेन की सेल्स तक ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंच पाता, जिससे जान को खतरा या स्थायी नुकसान हो सकता है. ब्रेन हैमरेज मेडिकल इमरजेंसी है. अगर समय पर इलाज मिल जाए तो ब्रेन को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है और जान बचने की संभावना बढ़ जाती है. देरी होने पर स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है.

ब्रेन हैमरेज कैसे होता है?

जब दिमाग की नस फटती है तो खून आसपास के टिश्यू में फैल जाता है. इससे सूजन होती है, खून का थक्का बन सकता है और दिमाग पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे जरूरी ब्रेन फंक्शन प्रभावित होते हैं.

खोपड़ी की भूमिका

खोपड़ी एक सख्त ढांचा है, जिसमें दिमाग के पास फैलने की जगह नहीं होती. ऐसे में खून या सूजन बढ़ने पर दबाव सीधे दिमाग पर पड़ता है और ब्लड फ्लो कम हो जाता है.

ब्रेन हैमरेज के प्रकार

starsinsider की रिपोर्ट के अनुसार,  हैमरेज को उसके स्थान के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में डिवाइड किया जाता है. एपिड्यूरल हैमरेज खोपड़ी और दिमाग की बाहरी परत के बीच होता है और अक्सर सिर में चोट से जुड़ा होता है. सबड्यूरल हैमरेज दिमाग की परतों के बीच होता है और यह अचानक या धीरे-धीरे भी हो सकता है, खासकर बुजुर्गों में. सबअरेक्नॉइड हैमरेज आमतौर पर तेज सिरदर्द के साथ आता है और एन्यूरिज़्म या चोट से हो सकता है. इंट्रासेरेब्रल हैमरेज सीधे दिमाग के टिश्यू में होता है और यह हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ा पाया जाता है. इंट्रावेंट्रिकुलर हैमरेज दिमाग की अंदरूनी कैविटी में खून बहने से होता है.

कारण क्या हैं?

50 साल से कम उम्र के लोगों में सिर की चोट सबसे बड़ा कारण है. वहीं लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से नसें कमजोर होकर फट सकती हैं. एन्यूरिज़्म भी एक बड़ा रिस्क फैक्टर है.

लक्षण क्या होते हैं?

अचानक तेज सिरदर्द, दौरे, नजर धुंधली होना, हाथ-पैर में कमजोरी या बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिख सकते हैं. ऐसे में तुरंत इमरजेंसी मदद जरूरी है.

जांच और इलाज

CT स्कैन और MRI से हैमरेज की जगह और गंभीरता पता चलती है. इलाज में ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने, दौरे रोकने की दवाएं और जरूरत पड़ने पर सर्जरी शामिल होती है.

रिकवरी और बचाव

हैमरेज के बाद याददाश्त, ध्यान और व्यवहार पर असर पड़ सकता है. फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और लाइफस्टाइल में बदलाव से रिकवरी में मदद मिलती है. हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करना, धूम्रपान से दूरी और हेल्दी डाइट अपनाना ब्रेन हैमरेज से बचाव में अहम भूमिका निभाता है.

इसे भी पढ़ें- Period Pain: सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है पीरियड्स का दर्द? जानिए इसके कारण और राहत पाने के आसान तरीके

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp