हर आठ मिनट में सर्वाइकल कैंसर ले रहा एक महिला की जान, जानें क्या है कारण और इसका इलाज?

हर आठ मिनट में सर्वाइकल कैंसर ले रहा एक महिला की जान, जानें क्या है कारण और इसका इलाज?


भारत में महिलाओं की सेहत से जुड़ी एक गंभीर और चिंताजनक सच्चाई सामने आ रही है. एक ऐसी बीमारी, जिसके बारे में आज भी बहुत सी महिलाएं खुलकर बात नहीं कर पाती हैं, हर साल हजारों जिंदगियों को निगल रही है. यह बीमारी सर्वाइकल कैंसर है, जिसे हिंदी में गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर कहा जाता है. 

आंकड़े बताते हैं कि देश में हर आठ मिनट में एक महिला की मौत सिर्फ इसी बीमारी के कारण हो रही है. यह स्थिति इसलिए और भी दुखद है क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते जांच और टीकाकरण हो जाए, तो इस कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है.  

कितनी गंभीर है स्थिति?

एम्स और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब 1.23 लाख महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं, जिनमें से लगभग 77 हजार महिलाओं की जान चली जाती है. यह कैंसर महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक बन चुका है. खासतौर पर इसका असर ग्रामीण इलाकों और गरीब परिवारों की महिलाओं पर ज्यादा देखा जा रहा है, जहां जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है. 

सर्वाइकल कैंसर क्या है और क्यों होता है?

सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) नामक वायरस के संक्रमण के कारण होता है. यह वायरस लंबे समय तक शरीर में रहने पर आर्ट्स की सर्विस के सेल्स को नुकसान पहुंचाता है, जिससे कैंसर विकसित हो सकता है. ज्यादातर मामलों में शुरुआती दौर में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए महिलाएं समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाती हैं. 

इसके लक्षण जिन पर ध्यान देना जरूरी

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण में असामान्य योनि से इंटरनल ब्लीडिंग, पीरियड्स के बीच या संबंध के बाद खून आना, पेट या कमर में लगातार दर्द, खराब स्मैल डिस्चार्ज, थकान और कमजोरी शामिल हैं. अगर इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक बना रहे, तो तुरंत जांच कराना जरूरी है. 

इसका इलाज क्या है?

विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर को टीकाकरण और नियमित जांच से रोका जा सकता है. HPV टीकाकरण में 9 से 14 साल की लड़कियों को दो डोज, 15 साल से अधिक उम्र में तीन डोज. यह टीका HPV वायरस से बचाव करता है. भारत में विकसित स्वदेशी वैक्सीन सर्वाविक कुछ राज्यों में सरकार से मुफ्त या 200–400 रुपये प्रति डोज की दर से उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि निजी अस्पतालों में इसकी कीमत ज्यादा होती है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत अब तक 10 करोड़ से ज्यादा महिलाओं की जांच की जा चुकी है. 

अब पारंपरिक जांच की जगह HPV डीएनए टेस्ट को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि दूर-दराज की महिलाएं भी लाभ उठा सकें. स्क्रीनिंग के बाद इलाज तक महिला को पहुंचाना एक बड़ी चुनौती रही है. इसे दूर करने के लिए सरकार ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), हब और स्पोक मॉडल, इलाज और फॉलोअप की मजबूत व्यवस्था लागू की है, ताकि जांच में पॉजिटिव पाई गई कोई भी महिला इलाज से वंचित न रह जाए. 

सामाजिक मुद्दा भी है यह बीमारी

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वाइकल कैंसर सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का मुद्दा भी है. क्योंकि इसका सबसे ज्यादा असर उन महिलाओं पर पड़ता है, जो आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारणों से अस्पताल नहीं पहुंच पाती है. 

ये भी पढ़ें: बार-बार मुंह में हो रहे हैं छाले तो न करें नजरअंदाज, हो सकती है यह लाइलाज बीमारी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

इस शख्स ने एक-दो बार नहीं 5 बार दी कैंसर को मात… ब्रेस्ट कैंसर ने भी नहीं बख्शा, ऐसे जीती जंग

इस शख्स ने एक-दो बार नहीं 5 बार दी कैंसर को मात… ब्रेस्ट कैंसर ने भी नहीं बख्शा, ऐसे जीती जंग


Battle Beyond Cancer: अमेरिका के नॉर्थ कैरोलाइना राज्य में रहने वाले एक शख्स ने जानलेवा बीमारी कैंसर का 5 बार सामना किया है और अब अपने अनुभव के जरिए लोगों को समय रहते जांच कराने के लिए जागरूक कर रहे हैं. जॉनस्टन काउंटी के डेविड और पैट पेनी की शादी को 51 साल से ज्यादा हो चुके हैं.

डेविड पहले सेना में थे और फिर बाद में फायरफाइटर के रूप में कार्यरत थे. वह अब तक पांच बार कैंसर से जूझ चुके हैं. इनमें नॉन-हॉजकिन्स लिंफोमा, सारकोमा और हाल ही में पुरुषों में होने वाला ब्रेस्ट कैंसर शामिल है. जो पुरूषों में बहुत ही ज्यादा गंभीर होते हैं और इसके मामले लगभग 1% ही होते हैं, जैसा कि People.com की रिपोर्ट में बताया गया है. 

30 साल की उम्र में बचा पाना था मुश्किल

पैट का कहना है कि उनके पति को 30 साल की उम्र में ही बचा पाना मुश्किल था, लेकिन वह अविश्वसनीय साहस और दृढ़ता का एक प्रतीक हैं. पैट हमेशा उन्हें “एवर-रेडी बनी” कहती हैं, क्योंकि वह हमेशा सक्रिय और ऊर्जा से भरे रहते हैं.

डेविड को अपने कैंसर का पता 2025 की वसंत ऋतु में चला, जब वह खुद की जांच कर रहे थे, तब उन्होंने अपने सीने में एक छोटी-सी गांठ महसूस की. उन्हें यह असामान्य लगा. अगले ही हफ्ते उनकी लम्पेक्टॉमी (गांठ निकालने की सर्जरी) हुई और अब उनकी सभी जांच रिपोर्ट साफ हैं.

जागरूकता से कैंसर पर मिली समय रहते जीत

पैट को 2009 में 56 वर्ष की आयु में एक नियमित मैमोग्राम के दौरान ब्रेस्ट कैंसर का पता चला था. उन्होंने बताया कि समय पर अपॉइंटमेंट मिलने से उनकी जान बच गई, क्योंकि कैंसर शरीर के गहरे हिस्सों में फैल चुका था और अगर उन्होंने खुद इसे देखा होता, तो शायद बहुत देर हो चुकी होती.

आज डेविड और पैट दोनों अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के लिए वॉलंटियर के रूप में काम कर रहे हैं. वे अपनी कहानी सोशल मीडिया पर साझा करते हैं ताकि दूसरों को अपने शरीर के प्रति जागरूक होने और नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराने के लिए उजागर कर सकें. डेविड का कहना है कि आपके शरीर को आपसे बेहतर कोई नहीं जानता. अगर आपको कुछ गड़बड़ लगे, तो उसे एक-दो हफ्ते के लिए टालें नहीं.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

हर किसी के लिए नहीं होता दूध, जानें किसके लिए बन जाता है जहर?

हर किसी के लिए नहीं होता दूध, जानें किसके लिए बन जाता है जहर?


Can Milk Be Harmful For Some People: दूध को लंबे समय से सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता रहा है. कैल्शियम, प्रोटीन और जरूरी विटामिन्स से भरपूर होने की वजह से इसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए फायदेमंद बताया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही दूध कुछ लोगों के लिए फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है? जी हां, हर किसी का शरीर दूध को एक जैसा स्वीकार नहीं करता. कुछ लोगों के लिए यह धीरे-धीरे सेहत पर भारी पड़ सकता है. चलिए आपको इनको बारे में बताते हैं. 

लैक्टोज इनटॉलरेंस वाले लोग

आज के समय में बड़ी संख्या में लोग लैक्टोज इनटॉलरेंस से जूझ रहे हैं. ऐसे लोगों के शरीर में लैक्टेज एंजाइम की कमी होती है, जिससे दूध पच नहीं पाता. नतीजा यह होता है कि दूध पीने के बाद पेट फूलना, गैस, दर्द या दस्त जैसी समस्याएं होने लगती हैं.

दूध से एलर्जी वाले लोग

कुछ लोगों को दूध में मौजूद प्रोटीन से एलर्जी होती है. ऐसे मामलों में दूध पीने से स्किन पर रैशेज, खुजली, सूजन या सांस लेने में दिक्कत तक हो सकती है. इस स्थिति में दूध का सेवन पूरी तरह से नुकसानदायक साबित हो सकता है.

हार्ट के मरीज और हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग

फुल फैट दूध और उससे बने प्रोडक्ट्स में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है. ज्यादा मात्रा में इसका सेवन बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है, जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे लोगों को दूध की मात्रा और उसका प्रकार सोच-समझकर चुनना चाहिए.

कैंसर के जोखिम वाले लोग

कुछ रिसर्च में यह संकेत मिले हैं कि ज्यादा मात्रा में दूध का सेवन प्रोस्टेट कैंसर जैसी बीमारियों के जोखिम से जुड़ा हो सकता है. हालांकि इस पर अभी और रिसर्च की जरूरत है, लेकिन हाई रिस्क वाले लोगों को सतर्क रहना चाहिए.

आयरन की कमी वाले बच्चे

छोटे बच्चों में जरूरत से ज्यादा गाय का दूध पिलाने से आयरन की कमी हो सकती है. इससे एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए बच्चों की डाइट में संतुलन बेहद जरूरी है.

कमजोर इम्युनिटी वाले लोग

कच्चा दूध कुछ लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है. इसमें बैक्टीरिया होने का खतरा रहता है, जो कमजोर इम्युनिटी वालों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है.

दूध सेहत के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए जरूरी या सुरक्षित हो, ऐसा नहीं है. अगर दूध पीने के बाद आपको कोई परेशानी महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज न करें. अपने शरीर के संकेत समझें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह लें.

ये भी पढ़ें: Fatty Liver Disease: भारत के 38% लोग ‘फैटी लिवर’ की गिरफ्त में! घर बैठे इन 5 संकेतों से करें पहचान

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

ये हैं तिल खाने के जबरदस्त फायदे? ज्यादातर लोगों नहीं पता होगी ये बात

ये हैं तिल खाने के जबरदस्त फायदे? ज्यादातर लोगों नहीं पता होगी ये बात


आज के समय में लोग अच्छी सेहत के लिए मल्टीविटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स पर हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारी रसोई में मौजूद एक छोटा-सा बीज कई महंगी गोलियों से ज्यादा असरदार है. दरअसल यह बीज तिल है जिसे आयुर्वेद में महाऔषधि और साइंस में न्यूट्रिएंट्स सुपर फूड माना गया है. तिल में मौजूद पोषक तत्व शरीर से आसानी से अवशोषित हो जाते हैं. यानी नेचुरल तरीके से शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स देता है. यही वजह है कि सर्दियों के मौसम में तिल को खास महत्व दिया जाता है और दादी-नानी के नुस्खों में तिल से बनी चीजें जरूर शामिल होती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि तिल खाने के जबरदस्त फायदे क्या-क्या है. 

तिल को क्यों कहा जाता है सुपरफूड?

तिल कैल्शियम, आयरन, मैग्निशियम, फास्फोरस, जिंक और मैंगनीज जैसे मिनरल्स से भरपूर होता है. 100 ग्राम सफेद तिल में लगभग 975 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है जो एक गिलास दूध से भी ज्यादा है. कैल्शियम हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए जरूरी होता है और तिल इसे प्राकृतिक रूप से पूरा करता है. इसके अलावा तिल में मौजूद आयरन और कॉपर खून की कमी यानी एनीमिया से लड़ने में मदद करता है. जिम जाने वाले युवाओं के लिए यह प्रोटीन का भी अच्छा सोर्स माना जाता है. 
 
दिल और पाचन के लिए भी फायदेमंद 

तिल में सेसामिन और सेसामोलिन जैसे तत्व पाए जाते हैं जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने मदद करते हैं. इससे दिल की सेहत बेहतर रहती है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है. तिल में मौजूद फाइबर पाचन को सुधारता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है. 

कौन सा तिल ज्यादा होता है फायदेमंद?

सेहत के लिएए काले और सफेद तिल दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन इनके गुण थोड़े अलग होते हैं. सफेद तिल पचाने में आसान होते हैं और इनमें कैल्शियम और हेल्दी फैट्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. वहीं काले तिल छिलके के साथ होते हैं, इसलिए इनमें आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स ज्यादा होते हैं.  कम हीमोग्लोबिन कमजोरी और बालों से जुड़ी समस्याओं में काला तिल ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. 

सर्दियों में तिल खाने के फायदे 

आयुर्वेद के अनुसार तिल की तासीर गर्म होती है. सर्दियों में इसका सेवन करने से शरीर अंदर से गर्म रहता है और ठंड से होने वाली समस्याओं से बचाव होता है. यही वजह है कि सर्दियों में तिल के लड्डू, गजक और दूसरी चीजें खूब खाई जाती है. वहीं रोजाना सीमित मात्रा में तिल खाने से हड्डियां मजबूत होती है, पाचन सुधरता है, दिल की सेहत अच्छी रहती है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है. इसके अलावा तिल कब्ज से राहत दिलाने में भी मदद करता है 

एक दिन में कितना तिल खाना चाहिए?

तिल की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसका ज्यादा मात्रा में सेवन नुकसानदायक हो सकता है. रोजाना 1 से 2 चम्मच यानी लगभग 10 से 15 ग्राम तिल खाना पर्याप्त और सुरक्षित माना जाता है. ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पेट में गर्मी, वजन बढ़ने या पाचन की समस्या हो सकती है. वहीं तिल को हल्का भूनकर खाना ज्यादा फायदेमंद होता है. तिल को लड्डू, सलाद, खिचड़ी में या सीधे चबाकर भी खाया जा सकता है.

ये भी पढ़ें-Fatty Liver Disease: भारत के 38% लोग ‘फैटी लिवर’ की गिरफ्त में! घर बैठे इन 5 संकेतों से करें पहचान

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

रीढ़ की हड्डी में लगातार बना हुआ है दर्द, जानें यह किस बीमारी का लक्षण?

रीढ़ की हड्डी में लगातार बना हुआ है दर्द, जानें यह किस बीमारी का लक्षण?


कई लोगों को अक्सर रीढ़ की हड्डी में दर्द रहने की समस्या होती है. आमतौर पर लोग इसे गलत बैठने का तरीका, थकान या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. अगर यह दर्द लगातार बना रहता है या फिर बार-बार उठने लगता है तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. कई मामलों में रीढ़ की हड्डी के दर्द के साथ चलने-फिरने में परेशानी, कमर में अकड़न, हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं. ऐसे लक्षण बताते हैं कि समस्या सिर्फ नॉर्मल नहीं है और समय रहते जांच कराना जरूरी हो जाता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि रीढ़ की हड्डी में लगातार दर्द बना हुआ है तो यह किस बीमारी का लक्षण हो सकता है. 

रीढ़ की हड्डी में दर्द किन बीमारियों से होता है जुड़ा?  

एक्सपर्ट्स के अनुसार रीढ़ की हड्डी में दर्द कई बीमारियों की वजह से हो सकता है. इनमें सबसे आम समस्या स्लिप डिस्क है. स्लिप डिस्क की कंडीशन में रीढ़ की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे तेज दर्द शुरू हो जाता है और यह दर्द हाथ या पैर तक फैल सकता है. इसके अलावा सर्वाइकल और लम्बर स्पोंडिलोसिस में भी गर्दन और पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द बना रहता है. वहीं ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों का कमजोर होना भी रीढ़ की हड्डी में दर्द का बड़ा कारण बन सकता है. कुछ मामलों में चोट लगना, पुरानी सूजन या नसों से जुड़ी समस्याएं भी दर्द को बढ़ा देती है. 

स्लिप डिस्क क्यों बन जाती है बड़ी समस्या? 

स्लिप डिस्क आमतौर पर 30 से 50 साल की उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती है. उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की डिस्क का लचीलापन कम होने लगता है. गलत पोस्चर में बैठना, भारी वजन उठाना, मोटापा या अचानक चोट लगना स्लिप डिस्क की वजह बन सकता है. वहीं अगर समय रहते इसका इलाज न कराया जाए तो नसाें पर दबाव बढ़ने से कमजोरी, सुन्नपन और गंभीर मामलों में पैरालिसिस जैसी कंडीशन भी बन सकती है. 

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज 

अगर रीढ़ की हड्डी के दर्द के साथ हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, मांसपेशियों में कमजोरी, झुकने-उठने में परेशानी या लंबे समय तक बैठने में दिक्कत हो रही है तो यह चेतावनी संकेत हो सकते हैं. ऐसे में खुद से दवाएं लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है. 

कैसे रखें रीढ़ की हड्डी को हेल्दी?

रीढ़ की हड्डी को मजबूत और हेल्दी रखने के लिए सही पोस्चर में बैठना और उठना बहुत जरूरी है. वहीं ज्यादा देर तक एक ही जगह बैठने से बचें और बीच-बीच में स्ट्रेचिंग करें. साथ ही हल्की एक्सरसाइज, योग और नियमित वॉक रीढ़ को मजबूत बनाने में मदद करती है. इसके अलावा भारी वजन उठाने से बचें, वजन को कंट्रोल में रखें और सोने के लिए सही गद्दे का चुनें. 

ये भी पढ़ें: Eggshell Calcium: सफेद-पीले के अलावा अंडे का यह हिस्सा भी होता है ताकतवर, हड्डियों को देता है भरपूर ताकत

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बार-बार मुंह में हो रहे हैं छाले तो न करें नजरअंदाज, हो सकती है यह लाइलाज बीमारी

बार-बार मुंह में हो रहे हैं छाले तो न करें नजरअंदाज, हो सकती है यह लाइलाज बीमारी


मुंह में छाले होना एक आम समस्या है जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है. अक्सर लोग इसे हल्के में लेते हैं और मान लेते हैं कि कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाएगा. लेकिन अगर मुंह में छाले बार-बार हो रहे हैं तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. वहीं ज्यादातर मामलों में छाले 7 से 14 दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन बार-बार छाले होना इस बात इशारा है कि शरीर के अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है, जिसे नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है. 

मुंह में छाले होने के आम कारण 

डॉक्टरों के अनुसार मुंह में छाले होने के पीछे कई वजह हो सकती है. सबसे आम कारण शरीर में विटामिन बी-12, आयरन या फोलिक एसिड की कमी है. इसके अलावा पेट की गड़बड़ी एसिडिटी, कब्ज और ज्यादा मसालेदार या ऑयली खाना खाने से भी छाले हो सकते हैं. महिलाओं में हार्मोनल बदलाव खासकर पीरियड्स के दौरान भी मुंह में छाले की समस्या देखी जाती है. वहीं खराब लाइफस्टाइल और कमजोर इम्यून सिस्टम भी इसका कारण बन सकते हैं. 

कब बन सकता है यह गंभीर बीमारी का संकेत?

डॉक्टरों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को हर महीने बार-बार मुंह में छाले हो रहे हैं और इसके साथ हल्का खून आ रहा है या बिना वजह वजन घट रहा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. इसके अलावा अगर मुंह में कोई एक छाला महीनों तक ठीक नहीं हो रहा है, तो यह ओरल कैंसर का संकेत भी हो सकता है. ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होता है. वहीं बार-बार मुंह में छाले होना केवल पोषक तत्वों की कमी नहीं बल्कि आंतों की बीमारी, थायराइड, डायबिटीज या कमजोर इम्यून सिस्टम से भी जुड़ा हो सकता है. कुछ मामलों में एचआईवी जैसी खतरनाक बीमारी में भी ऐसे लक्षण दिख सकते हैं, हालांकि हर केस में ऐसा होना जरूरी नहीं है. 

इन लोगों को ज्यादा खतरा

कुछ लोगों में मुंह के छाले का खतरा ज्यादा होता है. जैसे तंबाकू या धूम्रपान करने वाले, डायबिटीज के मरीज, विटामिन बी-12 की कमी वाले लोग और जिनको पेट की समस्या रहती है उनमें इसका खतरा ज्यादा रहता है. इसके अलावा जो ज्यादा मसालेदार खाना खाते हैं उनको भी इसकी समस्या रहती है. 

मुंह में छाले होने पर क्या सावधानी रखें?

मुंह में छाले होने पर मिर्च-मसाले, अचार, तली-भुनी चीजें और खट्टे फलों से परहेज करना चाहिए. गर्म चाय-कॉफी भी छालों में जलन बढ़ा सकती है. इसके अलावा ओरल हाइजीन का ध्यान रखना और हल्का सादा खाना खाना भी फायदेमंद होता है. 

ये भी पढ़ें: Fatty Liver Disease: भारत के 38% लोग ‘फैटी लिवर’ की गिरफ्त में! घर बैठे इन 5 संकेतों से करें पहचान

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp