चिपचिप वाली प्रचंड गर्मी में भी जाम छलका रहे हैं आप? हो सकती है यह दिक्कत

चिपचिप वाली प्रचंड गर्मी में भी जाम छलका रहे हैं आप? हो सकती है यह दिक्कत


What Happens If You Drink Alcohol In Hot Weather: गर्मियों के मौसम में लोग अक्सर छुट्टियां, पिकनिक, पूल पार्टी, बीच ट्रिप या दोस्तों के साथ आउटडोर ट्रेवल का आनंद लेते हैं. ऐसे मौकों पर कई लोग शराब का सेवन भी करते हैं, लेकिन तेज गर्मी और शराब का यह मेल शरीर के लिए भारी पड़ सकता है. खासकर जब मौसम बेहद गर्म और उमस भरा हो, तब शराब पीने से शरीर पर इसका असर कई गुना बढ़ सकता है. ऐसे में डिहाइड्रेशन से लेकर हीट स्ट्रोक और हादसों तक का खतरा बढ़ सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि इससे क्या दिक्कत हो सकती है. 

गर्मी में जाम छलकाने से क्या दिक्कत हो सकती है?

शराब शरीर में पानी की कमी तेजी से बढ़ाती है. दरअसल, यह एक डाइयूरेटिक ड्रिंक है, यानी इसे पीने के बाद शरीर सामान्य से ज्यादा तरल पदार्थ बाहर निकालने लगता है. दूसरी ओर गर्मी में शरीर पहले से ही पसीने के जरिए पानी खो रहा होता है. ऐसे में दोनों चीजें मिलकर शरीर को तेजी से डिहाइड्रेट कर सकती हैं. अगर शराब पीने के बाद उल्टी भी हो जाए, तो शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी और बढ़ सकती है. इसलिए अगर कोई शराब पी रहा है, तो उसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी माना जाता है.

 हीट स्ट्रोक का भी रहता है खतरा

Pennfoundation संस्था के अनुसार, तेज गर्मी में शराब पीने का एक बड़ा खतरा हीट स्ट्रोक भी है. सामान्य स्थिति में शरीर पसीने के जरिए अपने तापमान को नियंत्रित करता है, लेकिन जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो यह प्रक्रिया ठीक से काम नहीं कर पाती. ऐसे में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है और हीट स्ट्रोक की स्थिति बन सकती है. सिरदर्द, चक्कर आना, भ्रम होना, बेहोशी, दौरे पड़ना या जरूरत से ज्यादा कमजोरी महसूस होना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी होता है.

शराब पीकर इन जगहों जाने से बचना चाहिए

अगर आप गर्मियों में स्विमिंग पूल, नदी, झील या समुद्र के किनारे जा रहे हैं, तो शराब का सेवन और भी ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है. शराब पीने के बाद शरीर का संतुलन, निर्णय लेने की क्षमता और प्रतिक्रिया देने की गति प्रभावित होती है. ऐसे में पानी में फिसलने, डूबने या तैरते समय दूरी का सही अनुमान न लगा पाने का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि एक्सपर्ट शराब पीने के तुरंत बाद पानी में उतरने से बचने की सलाह देते हैं. नाव की सैर के दौरान भी शराब गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है. नाव पर संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, लेकिन शराब पीने के बाद यह क्षमता कमजोर पड़ जाती है. इसके अलावा व्यक्ति जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास में आकर तेज गति से नाव चलाने या जोखिम भरे फैसले लेने लगता है, जिससे हादसे की आशंका बढ़ सकती है.

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किस बात का रखें ध्यान

अगर गर्मियों में कभी शराब का सेवन करें, तो मात्रा सीमित रखें और खुद को ठंडी जगह पर रखने की कोशिश करें. साथ ही पर्याप्त पानी पीते रहें और शराब पीने के बाद वाहन चलाने या पानी में उतरने जैसी एक्टिविटी से बचें.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मौत के करीब ले जाएगी रातभर जागने की आदत, बढ़ रहा मिनी स्ट्रोक का खतरा, एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

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How Sleep Deprivation Increases Mini Stroke Risk: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रात का समय भी पहले जैसा नहीं रहा. आधी रात के बाद तक मोबाइल की स्क्रीन चमकती रहती है, बिस्तर पर लेटे-लेटे लोग ऑफिस के ईमेल चेक करते हैं और सोशल मीडिया स्क्रॉल करते-करते पता ही नहीं चलता कि कब रात बीत गई. खासकर युवा प्रोफेशनल्स के लिए यह अब सामान्य लाइफस्टाइल बन चुकी है. लेकिन न्यूरोलॉजिस्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि यह आदत सिर्फ थकान ही नहीं, बल्कि मिनी स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरे को भी बढ़ा सकती है.

क्या होता है मिनी स्ट्रोक?

मिनी स्ट्रोक, जिसे मेडिकल भाषा में ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक कहा जाता है, तब होता है जब कुछ समय के लिए ब्रेन के किसी हिस्से में ब्लड फ्लो रुक जाता है. इसके लक्षण कुछ मिनटों में खत्म हो सकते हैं, लेकिन इसे हल्के में लेना बड़ी गलती साबित हो सकता है. अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ  के अनुसार, जिन लोगों को ट्रांजिएंट इस्केमिक होता है, उनमें से लगभग हर तीन में एक व्यक्ति को आगे चलकर स्ट्रोक हो सकता है और इनमें से करीब आधे मामले एक साल के भीतर सामने आते हैं. 

नींद से क्यों होती है ये दिक्कत?

 डॉ. चंदना आर गौड़ा ने TOI को बताया कि नींद की कमी तेजी से न्यूरोलॉजिकल और हार्ट संबंधी समस्याओं का बड़ा कारण बनती जा रही है. उनका कहना है कि लगातार कम नींद लेने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का स्तर ऊंचा रहता है, ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है, सूजन बढ़ती है और मेटाबॉलिज्म बिगड़ता है. ये सभी कारक मिलकर मिनी स्ट्रोक और बाद में स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकते हैं.

अच्छी नींद क्यों है जरूरी?

एक्सपर्ट के अनुसार, अच्छी नींद सिर्फ शरीर को आराम नहीं देती बल्कि ब्लड वेसल्स की मरम्मत, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और सूजन कम करने में भी मदद करती है. जब लगातार नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर के ये जरूरी सिस्टम प्रभावित होने लगते हैं. नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट की रिसर्च भी बता चुकी है कि लंबे समय तक नींद की कमी हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ाती है, जो स्ट्रोक के प्रमुख कारण माने जाते हैं.

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रिवेंज बेडटाइम प्रॉक्रैस्टिनेशन  क्या होता है?

हाल के वर्षों में एक नया शब्द भी चर्चा में आया है, जिसे रिवेंज बेडटाइम प्रॉक्रैस्टिनेशन कहा जाता है। इसका मतलब है काम के लंबे दिन के बाद अपने लिए समय निकालने के चक्कर में जानबूझकर देर तक जागना, जबकि शरीर को आराम की जरूरत होती है. डॉ. गौड़ा के मुताबिक, देर रात तक फोन चलाना, लगातार स्क्रीन देखना और सिर्फ कुछ घंटे की नींद लेना आज कई युवाओं की आदत बन चुकी है, जो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकती है.

क्या होते हैं इसके लक्षण?

मिनी स्ट्रोक की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके संकेत अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं. शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में दिक्कत, चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, चेहरे का एक तरफ झुक जाना या कुछ मिनटों तक भ्रम की स्थिति बने रहना इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे किसी भी संकेत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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किन चीजों का सेवन करने पर सबसे ज्यादा रहता है उम्र घटने का खतरा? जान लीजिए काम की बात

किन चीजों का सेवन करने पर सबसे ज्यादा रहता है उम्र घटने का खतरा? जान लीजिए काम की बात


Foods That Can Shorten Lifespan : आजकल की खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की वजह से कम उम्र में ही कई स्वास्थ्य समस्याएं होने लगी हैं. समय के साथ शरीर के सेल्स और टिशू में बदलाव आते हैं, जिससे शरीर की ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है और कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना की खान-पान की आदतें इस प्रक्रिया को काफी हद तक प्रभावित करती हैं. बैलेंस और हेल्दी डाइट जहां लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करता है, वहीं कुछ फूड प्रोडक्ट्स ऐसे भी हैं जिनका नियमित सेवन शरीर में सूजन बढ़ा सकता है, स्किन को समय से पहले बूढ़ा दिखा सकता है और लंबे समय में कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि किन चीजों का सेवन करने पर उम्र घटने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. 

किन चीजों का सेवन करने पर उम्र घटने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है

1. तली हुई चीजें – बहुत ज्यादा टेंपरेचर पर तली हुई चीजों का नियमित सेवन शरीर में फ्री रेडिकल्स बनने का कारण बन सकता है. ये फ्री रेडिकल्स सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं और स्किन की इलास्टिसिटी कम कर सकते हैं. इससे झुर्रियां, सूजन और मुंहासों जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. 

2. सफेद ब्रेड – सफेद ब्रेड जैसे रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट शरीर में ऐसे तत्व बनाते हैं जिन्हें एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (AGEs) कहा जाता है. ये शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं और लंबे समय में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं. 

3. प्रोसेस्ड मीट – सॉसेज, बेकन, सलामी, पेपरोनी और हॉट डॉग जैसे प्रोसेस्ड मीट में सोडियम, फैट और प्रिजर्वेटिव ज्यादा मात्रा में होते हैं. शोध के अनुसार, इनका ज्यादा सेवन स्किन को डिहाइड्रेट कर सकता है और कोलेजन को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे स्किन जल्दी ढीली पड़ सकती है. 

4. ज्यादा नमक वाला खाना – शरीर के लिए नमक जरूरी है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा नुकसान पहुंचा सकती है. ज्यादा नमक खाने से शरीर में पानी की कमी और वॉटर रिटेंशन की समस्या हो सकती है. इससे स्किन रूखी दिखने लगती है और समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत नजर आ सकते हैं. 

5. बहुत ज्यादा मसालेदार खाना  – बहुत ज्यादा तीखा और मसालेदार खाना शरीर में सूजन बढ़ा सकता है.इससे स्किन लाल पड़ सकती है और मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है. लगातार ऐसा खाना खाने से स्किन पर उम्र का असर जल्दी दिखाई दे सकता है. 

6. ज्यादा चीनी वाली चीजें – रिफाइंड चीनी शरीर में सूजन बढ़ाती है और कोलेजन साथ ही इलास्टिन को नुकसान पहुंचाती है. यही दोनों तत्व स्किन को मुलायम और लचीला बनाए रखने में मदद करते हैं. ज्यादा चीनी खाने से वजन बढ़ने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है. 

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7. ट्रांस फैट वाले फास्ट फूड – फास्ट फूड और जंक फूड में अक्सर ट्रांस फैट ज्यादा होता है. इससे धमनियां और ब्लड वेसल्स सख्त हो सकती हैं, जिससे स्किन तक बल्ड का फ्लो कम हो जाता है. इसका असर समय से पहले झुर्रियां आने और उम्र बढ़ने के रूप में दिखाई दे सकता है. 

8. जला हुआ मांस – बहुत ज्यादा जला हुआ मांस ऐसे तत्व पैदा कर सकता है जो शरीर में सूजन बढ़ाते हैं. शोध के अनुसार, इससे कोलेजन टूट सकता है और स्किन पर समय से पहले उम्र बढ़ने के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. 

9. जरूरत से ज्यादा कैफीन – कैफीन शरीर से पानी बाहर निकालने का काम करती है. बहुत ज्यादा कॉफी पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे स्किन रूखी और बेजान दिखाई दे सकती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कॉफी पीने के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी भी पीना चाहिए. 

10. शराब – शराब का नियमित सेवन शरीर में विषैले पदार्थों के जमा होने का कारण बन सकता है. इससे लिवर पर असर पड़ता है और शरीर की विषैले तत्वों को बाहर निकालने की क्षमता कमजोर हो सकती है. इसके कारण स्किन में रूखापन, कोलेजन की कमी और इलास्टिसिटी कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. 

यह भी पढ़ें – Organ Meat Health Risks: मटन खाते हैं? कलेजी, दिमाग और गुर्दा हर किसी के लिए नहीं, डॉक्टर भी देते हैं वार्निंग

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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देश में तीन में से एक व्यक्ति है लिवर से जुड़ी बीमारियों का शिकार, नड्डा बोले- जगरूकता है जरूरी

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आईएलबीएस (ILBS) के दसवें दीक्षांत समारोह में संस्थान की कामयाबियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम रोशन कर रहा है. उन्होंने बताया कि ILBS केवल लिवर रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारी की रोकथाम और जनजागरण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. नड्डा ने कहा कि आजकल घर-घर फैटी लिवर की चर्चा हो रही है और इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने में ILBS ने बड़ा रोल निभाया है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा और ज्ञान को समाज तक पहुंचाएं और स्वस्थ भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं. अपने संबोधन में स्वास्थ्य मंत्री ने देश के स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार का भी उल्लेख किया और बताया कि 20वीं सदी के अंत तक देश में केवल एक एम्स था, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में 6 नए एम्स स्थापित किए गए. उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एम्स की संख्या बढ़कर 23 हो चुकी है और मोदी सरकार के आने के बाद मेडिकल कॉलेजों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है.

देश में 186000 आयुष्मान आरोग्य मंदिर

केंद्रीय मंत्री नड्डा ने यह भी बताया कि देशभर में 1,86,000 आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं, जहां प्राथमिक स्तर पर बीमारियों की जांच होती है. उन्होंने कहा कि स्वस्थ भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समय पर जांच और बीमारी की शीघ्र पहचान अत्यंत आवश्यक है. इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिकल छात्रों को उनकी उपाधियां भी प्रदान कीं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की.

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हर तीन में एक व्यक्ति फैटी लिवर का शिकार 

कार्यक्रम में ILBS के वाइस चांसलर डॉ. एस.के. सरीन ने बताया कि ILBS दुनिया की एकमात्र लिवर यूनिवर्सिटी है और साल 2025 में यहां 1,60,000 मरीजों को देखा गया, जो कि कई यूरोपीय देशों में देखे जाने वाले मरीजों की संख्या से भी अधिक है. डॉ. सरीन ने कहा कि अब तक संस्थान में 1,392 लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए गए हैं और 69 ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के मरीजों का भी ट्रांसप्लांट हुआ है. डॉ. सरीन ने यह भी कहा कि देश में हर तीन में से एक व्यक्ति फैटी लिवर से ग्रस्त है और इसलिए आयुष्मान भारत योजना में किडनी की तरह लिवर ट्रांसप्लांट की भी मांग की जानी चाहिए. उन्होंने गुणवत्ता चिकित्सा सेवाओं, अनुसंधान और प्रशिक्षण को आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि ILBS का यह दसवाँ दीक्षांत समारोह उनके समर्पण और प्रयासों का प्रतीक है.

यह भी पढ़ें: डायबिटीज में फल खाना जहर नहीं, एक्सपर्ट से जानें कौन से फल हैं फायदेमंद और किनसे करें परहेज?

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मटन खाते हैं? कलेजी, दिमाग और गुर्दा हर किसी के लिए नहीं, डॉक्टर भी देते हैं वार्निंग

मटन खाते हैं? कलेजी, दिमाग और गुर्दा हर किसी के लिए नहीं, डॉक्टर भी देते हैं वार्निंग


Health Benefits And Risks Of Organ Meat: मटन खाने के शौकीन लोगों की थाली में अक्सर कलेजी, दिमाग, गुर्दा और दिल जैसी चीजें भी शामिल होती हैं. इन्हें ऑर्गन मीट या ऑफल कहा जाता है. कई लोग इन्हें स्वाद के लिए खाते हैं, तो कुछ इन्हें पोषण का खजाना मानते हैं. सच भी यही है कि इन अंगों में कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ये हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं हैं. कुछ लोगों के लिए इनका ज्यादा सेवन फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है.

किन लोगों को इससे बचकर रहना चाहिए?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट webmd के अनुसार,  फायदों के बावजूद कलेजी, दिमाग और गुर्दा रोजाना या जरूरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए. खासकर कलेजी और दिल में कोलेस्ट्रॉल काफी अधिक होता है. अगर किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल पहले से बढ़ा हुआ है या उसे दिल की बीमारी का खतरा है, तो ज्यादा मात्रा में ऑर्गन मीट खाना हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकता है. इसके अलावा, जिन लोगों को गाउट  की समस्या है, उन्हें भी कलेजी, गुर्दा और दूसरे ऑर्गन मीट से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है. इनमें प्यूरिन की मात्रा ज्यादा होती है, जो शरीर में यूरिक एसिड बढ़ाकर जोड़ों के दर्द और सूजन की समस्या को और गंभीर बना सकती है.

डॉक्टर यह भी बताते हैं कि हीमोक्रोमैटोसिस जैसी बीमारी से पीड़ित लोगों को भी ऑर्गन मीट सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. इस बीमारी में शरीर में पहले से ही आयरन अधिक होता है, इसलिए आयरन से भरपूर कलेजी जैसी चीजें नुकसान पहुंचा सकती हैं.

पूरी तरह फिट लोगों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

एक्सपर्ट की सलाह है कि अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तब भी ऑर्गन मीट को रोज की डाइट का हिस्सा बनाने के बजाय कभी-कभार और सीमित मात्रा में ही खाएं. वहीं अगर आपको दिल की बीमारी, हाई कोलेस्ट्रॉल, गाउट या आयरन ओवरलोड जैसी कोई समस्या है, तो इन्हें खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. स्वाद के साथ सेहत का संतुलन बनाए रखना ही सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है.

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एक्सपर्ट के अनुसार, कलेजी, गुर्दा और दिल में विटामिन बी12, आयरन, जिंक और कई बी-विटामिन अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं. यही वजह है कि जिन लोगों में आयरन की कमी होती है, उनके लिए सीमित मात्रा में कलेजी फायदेमंद मानी जाती है. इससे शरीर में आयरन का स्तर बढ़ सकता है और कमजोरी या थकान जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है.

फायदेमंद भी होता है

कलेजी में मौजूद विटामिन बी1 और अन्य पोषक तत्व दिमाग की काम करने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. वहीं विटामिन बी2 शरीर के सेल्स को स्वस्थ रखने के साथ कुछ तरह के कैंसर के खतरे को कम करने में भी भूमिका निभा सकता है. इसके अलावा दिल, कलेजी और गुर्दे में पाया जाने वाला विटामिन बी12 और फोलेट ब्लड में होमोसिस्टीन के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जिससे हार्ट संबंधी बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है.

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डायबिटीज में फल खाना जहर नहीं, एक्सपर्ट से जानें कौन से फल हैं फायदेमंद और किनसे करें परहेज?

डायबिटीज में फल खाना जहर नहीं, एक्सपर्ट से जानें कौन से फल हैं फायदेमंद और किनसे करें परहेज?


Which Fruits Are Best For Diabetes Patients: भारत इस समय तेजी से बढ़ती डायबिटीज की चुनौती का सामना कर रहा है. साल 2023 में पब्लिश इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च- इंडिया डायबिटीज स्टडी के अनुसार देश में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि लगभग 13.6 करोड़ लोग प्रीडायबिटिक कैटेगरी में आते हैं. यानी ये लोग आने वाले वर्षों में डायबिटीज के शिकार हो सकते हैं. शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी इस बीमारी के बढ़ते मामलों ने खानपान और लाइफस्टाइल को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं.

क्या डायबिटीज में फलों को खाना बंद कर देना चाहिए?

डायबिटीज से जुड़े सबसे आम भ्रमों में से एक यह है कि मरीजों को फल खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, क्योंकि फलों में प्राकृतिक शर्करा होती है. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है. किसी फल का असर केवल उसकी मिठास से तय नहीं होता, बल्कि उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स, ग्लाइसेमिक लोड , फाइबर की मात्रा, फ्रुक्टोज का स्तर और सेवन की मात्रा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 

किन फलों को ज्यादा खाने से बचना चाहिए?

कुछ फल ऐसे होते हैं जिनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है. इनमें आम, चीकू, अंगूर, पका हुआ केला, सीताफल और कटहल शामिल हैं. इनका सेवन यदि अधिक मात्रा में किया जाए तो भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. इसलिए इन फलों को सीमित मात्रा में खाने की सलाह दी जाती है.

कौन से फल डायबिटीज मरीजों के लिए बेहतर विकल्प?

वहीं कुछ फल डायबिटीज मरीजों के लिए बेहतर विकल्प माने जाते हैं. अमरूद, सेब, नाशपाती, संतरा, पपीता, कीवी और बेरीज जैसे फल फाइबर से भरपूर होते हैं और शरीर में ग्लूकोज को धीरे-धीरे रिलीज करते हैं. इससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ने की संभावना कम हो जाती है. एक्सपर्ट के अनुसार अमरूद डायबिटीज मरीजों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है. इसमें प्रति 100 ग्राम लगभग 5 ग्राम फाइबर पाया जाता है, जो लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है और भोजन के बाद ब्लड शुगर में आने वाले उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने में सहायक होता है.

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सीमित मात्रा में खाना फायदेमंद

फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजी एवं डायबिटीज विभाग के प्रमुख डॉ. निशांत रायजादा ने TOI को बताया कि अधिकांश मरीज फलों को केवल उनकी मिठास के आधार पर देखते हैं, जबकि शरीर की प्रतिक्रिया फाइबर, कार्बोहाइड्रेट की मात्रा और हिस्से के आकार पर ज्यादा निर्भर करती है. सीमित मात्रा में खाए गए साबुत फल डायबिटीज डाइट का सुरक्षित हिस्सा हो सकते हैं.  एक्सपर्ट फलों के रस को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. जूस बनाने की प्रक्रिया में फलों का अधिकांश फाइबर निकल जाता है, जिससे ग्लूकोज तेजी से रक्त में पहुंचता है. एक गिलास जूस में कई फलों के बराबर शर्करा हो सकती है, लेकिन उससे पेट भरने का एहसास नहीं होता.

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