लगातार खांसी को न समझें मामूली जुकाम, आपके कमजोर दिल की हो सकती है बड़ी चेतावनी

लगातार खांसी को न समझें मामूली जुकाम, आपके कमजोर दिल की हो सकती है बड़ी चेतावनी


Can A Cough Be A Sign Of Heart Failure: हार्ट की बीमारी की बात आते ही ज्यादातर लोग सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षणों के बारे में सोचते हैं. लेकिन एक लगातार बनी रहने वाली खांसी भी दिल से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, खासकर कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर से जूझ रहे मरीजों में खांसी एक अहम लक्षण के रूप में सामने आ सकती है. 

कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर क्या होता है?

हेल्थ और साइंस के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट knowridge की रिपोर्ट के अनुसार, कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर वह स्थिति है, जब दिल शरीर में खून को ठीक से पंप नहीं कर पाता. ऐसे में दिल कमजोर या सख्त हो जाता है और ब्लड फ्लो प्रभावित होने लगता है.  इसका असर यह होता है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, खासकर फेफड़ों में.  यही जमा हुआ फ्लूइड खांसी की मुख्य वजह बनता है.

सांस और खांसी की दिक्कत

दरअसल, दिल और फेफड़े एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं.  फेफड़े शरीर को ऑक्सीजन देते हैं और दिल उस ऑक्सीजन युक्त खून को पूरे शरीर में पहुंचाता है. जब दिल ठीक से काम नहीं करता, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है. ऐसे में फेफड़ों में तरल भरने लगता है, जिसे पल्मोनरी कंजेशन कहा जाता है. इससे सांस लेने में दिक्कत होती है और खांसी शुरू हो जाती है. इस तरह की खांसी की कुछ खास पहचान भी होती है. शुरुआत में यह सूखी हो सकती है, लेकिन कई बार इसमें बलगम भी आ सकता है. अगर बलगम सफेद या गुलाबी रंग का दिखे, तो यह फेफड़ों में फ्लूइड जमा होने का संकेत हो सकता है और ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है. 

इसे भी पढ़ें: नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल, ये संकेत हो सकते हैं खतरनाक, तुरंत लें मेडिकल सलाह

क्या होती है वजह?

कई मरीज बताते हैं कि यह खांसी रात में या लेटने पर ज्यादा बढ़ जाती है. इसकी वजह ग्रेविटी है. जब व्यक्ति खड़ा या बैठा होता है, तो तरल शरीर के निचले हिस्सों में रहता है, लेकिन लेटने पर यह छाती और फेफड़ों की ओर आ जाता है, जिससे सांस और खांसी की समस्या बढ़ जाती है. अक्सर लोग इस खांसी को सर्दी-खांसी या लंग्स की समस्या समझ लेते हैं, जबकि असल में यह दिल से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है. इसलिए अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ सांस फूलना, थकान, पैरों या टखनों में सूजन जैसे लक्षण भी दिखें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट का कहना है कि समय रहते पहचान और इलाज से इस बीमारी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. इलाज में डाइयुरेटिक्स जैसी दवाएं दी जाती हैं, जो शरीर से अतिरिक्त तरल को बाहर निकालने में मदद करती हैं, जिससे फेफड़ों में जमा पानी कम होता है और खांसी व सांस की समस्या में राहत मिलती है. इसके साथ ही, लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी है. नमक का सेवन कम करना, नियमित व्यायाम करना, तनाव को कंट्रोल रखना और वजन संतुलित रखना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है.

इसे भी पढ़ें- Rajasthan Mystery Illness: किस रहस्यमयी बीमारी ने राजस्थान में रोकीं 6 बच्चों की सांसें, जानें लक्षण और यह कितनी खतरनाक?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

छोटे बच्चों की खांसी हो सकती है इस खतरनाक बीमारी का संकेत

छोटे बच्चों की खांसी हो सकती है इस खतरनाक बीमारी का संकेत


Health: अक्सर माता-पिता बच्चों की खांसी को सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.  और इससे मामूली खांसी समझ कर घरेलु नुख्से अजमाते है. मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी की यह खांसी कोई मामूली  खांसी नही बल्कि आपके बच्चे की ज़िन्दगी में आने वाली बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक, छोटे बच्चों में लगातार बनी रहने वाली खांसी कभी-कभी एक गंभीर बीमारी न्यूमोनिया का शुरुआती संकेत हो सकती है. इसलिए इसको नजरंदाज करना आपके बच्चे के लिए बेहद खतरा बन सकता है. 

वहीं अगर बात करें न्यूमोनिया कि तो ये एक ऐसी संक्रमणजनित बीमारी है जो फेफड़ों को प्रभावित करती है और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को होती है. खासतौर पर नवजात के लिए ये खतरनाक साबित हो सकती है. एक रिपोर्ट से पता चलता है कि, हर साल लाखों बच्चों की जान इस बीमारी के कारण ही जाती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां समय पर इलाज और जागरूकता की कमी है.

यह भी पढ़ेंः इन बीमारियों की वैक्सीन एकदम फ्री लगाती है सरकार, एक क्लिक में देख लें पूरी लिस्ट

खांसी कब बनती है खतरे का संकेत?

कुछ विशेषज्ञ का मानना है कि अगर बच्चे को लगातार खांसी आ रही है और उसे तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, छाती का तेजी से ऊपर-नीचे होना, बच्चे का सुस्त पड़ जाना जैसे लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज बिलकुल न करें क्योंकि ये सभी संकेत न्यूमोनिया की ओर इशारा करते है. अक्सर देखा जाता है कि छोटे बच्चों में यह बीमारी तेजी से बढ़ती है, इसलिए शुरुआती में ही इसकी पहचान बेहद जरूरी है. कई बार माता-पिता इसे सामान्य वायरल इंफेक्शन समझकर ध्यान नही देते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है

कैसे होता है न्यूमोनिया?

न्यूमोनिया आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होता है. बच्चों में इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण वे इस संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं.

कैसे करे बचाव?

डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी से बचाव संभव है, अगर कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए जैसे 
• बच्चों को समय-समय पर टीकाकरण जरूर कराएं
• ठंड और प्रदूषण से बचाव करें
• बच्चे को पौष्टिक आहार दें जैसे हरी सब्जी, फल और मेवे 
• खांसी या बुखार लंबे समय तक रहे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

अगर न्यूमोनिया का समय रहते पता चल जाए, तो इसका इलाज संभव है. डॉक्टर दवाइयों, एंटीबायोटिक्स और सही देखभाल से बच्चे को पूरी तरह ठीक कर सकते हैं. लेकिन लापरवाही की स्थिति में यह बीमारी खतरनाक और जानलेवा भी बन सकती है. इसलिए समय पर इलाज और डॉक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए. 

यह भी पढ़ेंः क्या बिना डॉक्टर से पूछे आप भी डाल लेते हैं आई ड्रॉप? छिन सकती है आंखों की रोशनी

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या मोटे लोगों को जरूरी होता है ज्यादा विटामिन सी? आपके होश उड़ा देगी यह स्टडी

क्या मोटे लोगों को जरूरी होता है ज्यादा विटामिन सी? आपके होश उड़ा देगी यह स्टडी


Do Overweight People Need More Vitamin C: हमारे शरीर के लिए विटामिन सी को लंबे समय से एक जरूरी पोषक तत्व माना जाता है. आमतौर पर लोग इसे सर्दी-जुकाम से बचाव और इम्यूनिटी मजबूत करने से जोड़ते हैं. लेकिन अब नई रिसर्च यह बता रही है कि विटामिन सी का महत्व इससे कहीं ज्यादा हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका वजन अधिक है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर रिसर्च में क्या निकला. 

क्या निकला रिसर्च में?

न्यूजीलैंड के ओटागो विश्वविद्यालय के रिसर्चर ने अपनी स्टडी जिसे क्रिटिकल रिव्यूज इन फूड साइंस एंड न्यूट्रिशन जर्नल में पब्लिश किया गया है, उसमें पाया कि ज्यादा वजन वाले लोगों को मौजूदा स्वास्थ्य मानकों से अधिक विटामिन सी की जरूरत हो सकती है.  यह रिजल्ट इसलिए भी अहम है क्योंकि दुनिया भर में मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कई लोग अनजाने में इस जरूरी पोषक तत्व की कमी से जूझ रहे हो सकते हैं. विटामिन सी शरीर में कई अहम भूमिकाएं निभाता है. यह टिश्यू की मरम्मत करता है, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है. इसके अलावा यह त्वचा, घाव भरने और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है. 

इसे भी पढ़ें- बच्चे के दांत निकल रहे हैं और वह हो गया है चिड़चिड़ा? इन 5 तरीकों से कम करें उसका दर्द

सही मात्रा में लेने की सलाह

आमतौर पर स्वास्थ्य दिशानिर्देश सभी लोगों के लिए एक तय मात्रा की सलाह देते हैं. उदाहरण के तौर पर, न्यूजीलैंड में रोजाना 45 मिलीग्राम विटामिन सी लेने की सिफारिश की जाती है, जो लगभग 70 किलो वजन वाले स्वस्थ व्यक्ति के आधार पर तय की गई है. हालांकि, इस स्टडी की प्रमुख रिसर्चर Anitra Carr का कहना है कि यह एक जैसा सभी के लिए वाला तरीका सही नहीं हो सकता. जैसे-जैसे शरीर का वजन बढ़ता है, विटामिन सी की जरूरत भी बढ़ सकती है. 

रिसर्च में क्या निकला?

शोध में पाया गया कि हर अतिरिक्त 10 किलो वजन पर शरीर को लगभग 17 से 22 मिलीग्राम अतिरिक्त विटामिन सी की जरूरत पड़ सकती है. यानी जिन लोगों का वजन ज्यादा है, उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से अधिक मात्रा में यह पोषक तत्व लेना चाहिए. इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों ने दो बड़े स्टडी के डेटा का एनालिसिस किया, जिनमें हजारों प्रतिभागी शामिल थे. 

नतीजों में यह सामने आया कि मौजूदा सिफारिशों के आधार पर तो अधिकांश लोगों में विटामिन सी पर्याप्त लग रहा था, लेकिन जब वजन को ध्यान में रखा गया, तो केवल एक-तिहाई से आधे लोगों में ही इसकी पर्याप्त मात्रा पाई गई. एक्सपर्ट का मानना है कि मोटापे में शरीर में हल्की सूजन  बनी रहती है, जिससे विटामिन सी तेजी से खर्च होता है. यही वजह है कि ज्यादा वजन वाले लोगों में इसकी कमी जल्दी हो सकती है. 

कैसे कर सकते हैं शरीर में पूर्ति?

अच्छी बात यह है कि विटामिन सी की पूर्ति करना आसान है. संतरा, कीवी, स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च जैसे फल और सब्जियां इसके अच्छे सोर्स हैं. छोटे-छोटे बदलाव, जैसे रोजाना एक-दो अतिरिक्त फल खाना, इस कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं.

इसे भी पढ़ें- Flour Storage: ऐसे करेंगे स्टोर तो ज्यादा दिन तक फ्रेश रहेगा आटा, जानें कमाल के टिप्स

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

आसपास की बदबू आपको बना रही है बीमार? जानें सेहत पर इसके गंभीर असर

आसपास की बदबू आपको बना रही है बीमार? जानें सेहत पर इसके गंभीर असर


Are Bad Smells Harmful To Health: आपके आसपास आने वाली तेज बदबू सिर्फ नाक को परेशान ही नहीं करती, बल्कि इसका असर आपकी सेहत और दिमाग दोनों पर पड़ सकता है. हाल के स्टडी में यह बात सामने आई है कि खराब गंध को अक्सर लोग हल्के में लेते हैं, लेकिन इसके प्रभाव कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसमें क्या निकला है और कैसे बदबू आपकी सेहत के लिए हानिकारण है.

हमारे शरीर के लिए चेतावनी

स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर Johan Lundström के मुताबिक, गंध हमारे शरीर के लिए एक चेतावनी संकेत की तरह काम करती है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, साइंटिस्ट के मुताबिक, सड़ी-गली चीजों या गंदगी से आने वाली गंध यह संकेत देती है कि वहां बैक्टीरिया या हानिकारक तत्व मौजूद हो सकते हैं. यही कारण है कि हमारा दिमाग बहुत तेजी से गंध को पहचानकर हमें उस जगह से दूर रहने के लिए अलर्ट करता है.

इसे भी पढ़ें- AIIMS Dry Eye Treatment: गाय के दूध से दूर होगी ड्राई आइज की दिक्कत, दिल्ली एम्स के ट्रायल में हुआ साबित

सेहत पर कैसे होता है असर?

हालांकि, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक खराब गंध के संपर्क में रहता है, तो इसका सीधा असर उसकी सेहत पर दिखने लगता है. रिसर्च के अनुसार, लगातार बदबू में रहने से सिरदर्द, जी मिचलाना, सांस लेने में दिक्कत और नींद खराब होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इतना ही नहीं, यह मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन भी बढ़ा सकती है. एक्सपर्ट का कहना है कि गंध का असर केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक भी होता है. अगर कोई व्यक्ति किसी बदबू को लेकर ज्यादा चिंतित या परेशान रहता है, तो उसका असर और बढ़ जाता है. यानी गंध के प्रति हमारी प्रतिक्रिया भी हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है. 

लाइफस्टाइल पर भी प्रभाव

लगातार बदबू वाले माहौल में रहना लोगों की लाइफस्टाइल को भी बदल देता है. कई लोग ऐसी स्थिति में खिड़कियां बंद रखने लगते हैं, बाहर निकलना कम कर देते हैं या सामाजिक गतिविधियों से दूरी बना लेते हैं. इससे उनकी शारीरिक गतिविधि और मानसिक सेहत दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है. दिलचस्प बात यह है कि हर व्यक्ति बदबू को एक जैसा महसूस नहीं करता. उम्र, आदतें, एलर्जी और लाइफस्टाइल जैसे कई फैक्टर तय करते हैं कि किसी को गंध कितनी परेशान करेगी. लेकिन एक बात साफ है कि लंबे समय तक खराब गंध के संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता.

एक्सपर्ट मानते हैं कि गंध की हमारी क्षमता भी सेहत से जुड़ी होती है. अच्छी सूंघने की क्षमता न सिर्फ हमें खतरों से बचाती है, बल्कि खाने और जीवन के अन्य अनुभवों का आनंद भी बढ़ाती है. वहीं, जिन लोगों की सूंघने की क्षमता कमजोर होती है, उनके स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ सकता है.

इसे भी पढ़ें- Rajasthan Mystery Illness: किस रहस्यमयी बीमारी ने राजस्थान में रोकीं 6 बच्चों की सांसें, जानें लक्षण और यह कितनी खतरनाक?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

मोरिंगा के पत्ते खाने से दूर हो जाती हैं ये बीमारियां, आज से ही शुरू कर दें इस्तेमाल

मोरिंगा के पत्ते खाने से दूर हो जाती हैं ये बीमारियां, आज से ही शुरू कर दें इस्तेमाल


What Happens If You Eat Moringa Leaves Daily: मोरिंगा के पत्ते, जिन्हें आम भाषा में सहजन या ड्रमस्टिक लीव्स कहा जाता है, अब धीरे-धीरे एक सुपरफूड के रूप में लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं.  एक्सपर्ट का मानना है कि रोजमर्रा की डाइट में इन पत्तों को शामिल करने से कई तरह की बीमारियों से बचाव संभव है. यही वजह है कि स्वास्थ्य से जुड़े जानकार अब इसे नियमित खाने की सलाह दे रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं कि सेहत के लिए यह कितना फायदेमंद होता है. 

सेहत के लिए कितना फायदेमंद?

 medanta की रिपोर्ट के अनुसार,  मोरिंगा के पत्ते पोषक तत्वों का खजाना माने जाते हैं. इनमें प्रोटीन, विटामिन A, C और E, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.  साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण शरीर को कई गंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, मोरिंगा के पत्ते इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं, जिससे शरीर इंफेक्शन और मौसमी बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है. इसके अलावा यह शरीर में ऊर्जा बढ़ाने और थकान कम करने में भी मददगार साबित होता है. 

हार्ट की सेहत के लिए फायदेमंद

 हार्ट की सेहत के लिए भी मोरिंगा बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद करता है, जिससे हार्ट रोगों का खतरा कम हो सकता है. वहीं, जिन लोगों को ब्लड शुगर की समस्या है, उनके लिए भी यह उपयोगी साबित हो सकता है, क्योंकि यह शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में सहायक होता है. डाइजेशन को बेहतर बनाए रखने में भी मोरिंगा अहम भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को स्वस्थ रखने, कब्ज से राहत देने और आंतों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है. इसके साथ ही यह शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में भी सहायक माना जाता है.

इसे भी पढ़ें: नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल, ये संकेत हो सकते हैं खतरनाक, तुरंत लें मेडिकल सलाह

कैसे कर सकते हैं सेवन?

मोरिंगा के पत्तों का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है. इन्हें दाल, सब्जी या सूप में डालकर खाया जा सकता है, वहीं इसका जूस या पाउडर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, एस्पर्ट सलाह देते हैं कि इसकी शुरुआत कम मात्रा से करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. अगर आप अपनी डाइट में एक आसान और असरदार बदलाव करना चाहते हैं, तो मोरिंगा के पत्ते एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं, जो आपको लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं.

इसे भी पढ़ें –  दिल्ली की लेट मॉर्निंग…मुंबई की नींद गायब, जानिए भारतीय शहरों की स्लीप स्टोरी, कौन कितना सोता है?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

गाय के दूध से दूर होगी ड्राई आइज की दिक्कत, दिल्ली एम्स के ट्रायल में हुआ साबित

गाय के दूध से दूर होगी ड्राई आइज की दिक्कत, दिल्ली एम्स के ट्रायल में हुआ साबित


How Lactoferrin Tablets Help Treat Dry Eyes: आजकल कम उम्र मे ही लोग आंखों की दिक्कत का सामना कर रहे हैं. मोबाइल, लैपटॉप, टीवी आदि के यूज के चलते इसकी समस्या बढ़ती जा रही है.  दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में किए गए एक ट्रायल के उत्साहजनक नतीजों के बाद वैज्ञानिक अब ड्राई आई  की समस्या के इलाज के लिए एक नई दवा को बाजार में लाने की तैयारी में है. यह दवा दूध से मिलने वाले प्रोटीन लैक्टोफेरिन पर आधारित है, जिसे खासतौर पर आंखों की नमी बनाए रखने और सूजन कम करने के लिए विकसित किया गया है.

कैसे किया गया है इसे तैयार?

दरअसल, यह टैबलेट गाय के कोलोस्ट्रम जिसे पहला दूध कहा जाता है, उससे प्राप्त लैक्टोफेरिन प्रोटीन से तैयार की गई है. कोलोस्ट्रम को पोषक तत्वों और बायोएक्टिव कंपाउंड्स का खजाना माना जाता है, जो शरीर की मरम्मत और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. इस रिसर्च से जुड़ी वैज्ञानिक डॉ सुजाता शर्मा के मुताबिक, इस दवा को विकसित करने के लिए एक जापानी कंपनी के साथ साझेदारी की गई है. इस ट्रायल पर आधारित रिसर्च पेपर फिलहाल एक साइंटिस्ट जर्नल में प्रकाशन के लिए समीक्षा के दौर में है.

ड्राई आई की दिक्कत

ड्राई आई एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है, जो तब होती है जब आंखों में आंसू पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते या उनकी गुणवत्ता ठीक नहीं होती. इससे आंखों में जलन, लालपन और भारीपन महसूस होता है. आजकल लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत इस समस्या को और बढ़ा रही है, क्योंकि इससे पलक झपकने की दर काफी कम हो जाती है. एम्स के आरपी सेंटर में करीब 200 मरीजों पर किए गए इस ट्रायल में, सीनियर आई एक्सपर्ट डॉ नम्रता शर्मा की अगुवाई में मरीजों को तीन महीने तक रोजाना 250 एमजी लैक्टोफेरिन दिया गया.. 

इससे क्या हुआ सुधार?

 इसमें मरीजों की आंखों में आंसू बनने की क्षमता और उनकी गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ. मौजूदा समय में ड्राई आई के इलाज के लिए ज्यादातर लोग आई ड्रॉप्स या कभी-कभी स्टेरॉयड का सहारा लेते हैं, लेकिन ये केवल अस्थायी राहत देते हैं और इनके साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. इसके मुकाबले लैक्टोफेरिन आधारित यह नई थेरेपी सुरक्षित, असरदार और किफायती विकल्प के रूप में सामने आई है. 

इसे भी पढ़ें: नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल, ये संकेत हो सकते हैं खतरनाक, तुरंत लें मेडिकल सलाह

क्या होता है लैक्टोफेरिन?

लैक्टोफेरिन एक प्राकृतिक प्रोटीन है, जो शरीर में इम्यूनिटी बढ़ाने, सूजन कम करने और सेल्स की मरम्मत में मदद करता है. यही कारण है कि साइंटिस्ट अब इसके अन्य उपयोगों, जैसे एनीमिया के इलाज, पर भी रिसर्च कर रहे हैं. शुरुआत में इस प्रोटीन को मानव दूध से निकालने की कोशिश की गई थी, लेकिन सीमित उपलब्धता और नैतिक कारणों की वजह से यह संभव नहीं हो पाया. इसके बाद गाय के कोलोस्ट्रम को एक प्रभावी और सुलभ विकल्प के रूप में अपनाया गया. फिलहाल, रिसर्चर को उम्मीद है कि जरूरी मंजूरी मिलने के बाद यह दवा जल्द ही बाजार में उपलब्ध हो सकती है, जिससे लाखों लोगों को ड्राई आई की समस्या से राहत मिल सकेगी.

इसे भी पढ़ें- Rajasthan Mystery Illness: किस रहस्यमयी बीमारी ने राजस्थान में रोकीं 6 बच्चों की सांसें, जानें लक्षण और यह कितनी खतरनाक?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp