छोटे बच्चों को बात-बात पर पकड़ा देते हैं मोबाइल, जानें आगे चलकर क्या होती हैं दिक्कतें?

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यह रिसर्च अमेरिका के 10 हजार से ज्यादा बच्चों के डेटा पर आधारित है, जिसमें देखा गया कि जिन बच्चों के पास 12 साल की उम्र से पहले फोन था, उनकी नींद और मानसिक स्थिति दूसरों की तुलना में ज्यादा प्रभावित थी.



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सर्दियों में लगती है बार-बार भूख, जानें चिप्स या पॉपकॉर्न में से आपके लिए क्या है बेहतर?

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सर्दियों के मौसम में डाइजेस्टिव फायर तेज होने की वजह से भूख बार-बार और जल्दी लगती है. खाना खाने के कुछ घंटों बाद ही तीखा और मसालेदार खाने का मन करता है. ऐसे में लोग भूख को शांत करने के लिए चाय के साथ चिप्स, नमकीन और तले-भुने फूड आइटम्स का सहारा लेते हैं, जो पाचन सिस्टम से लेकर हार्ट को भी नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसे मौकों पर चिप्स खाना ज्यादा बेहतर होगा या पॉपकॉर्न खाना?

कितना बेहतर होता है पॉपकॉर्न?

पॉपकॉर्न स्नैक के लिए बेहतर ऑप्शन है, क्योंकि यह चिप्स की तुलना में तला और मसालेदार नहीं होता है. दूसरा, चिप्स को पैकेट के अंदर ताजा बनाए रखने के लिए केमिकल का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिसका सेवन सेहत के लिए खतरनाक होता है. दरअसल, पॉपकॉर्न एक साबुत अनाज है, जिसे बनाने में बहुत कम तेल और मसालों का इस्तेमाल होता है और इसे कम मेहनत में आसानी से घर पर भी बनाया जा सकता है. इसे खाने से भूख भी संतुलित रहती है और ओवरईटिंग की समस्या भी नहीं रहती है.

पॉपकॉर्न में कौन-से पोषक तत्व?

पॉपकॉर्न में बाकी सभी स्नैक्स की तुलना में अधिक मात्रा में पोषक तत्व होते हैं. इसमें कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, फैट, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं. सर्दियों में शरीर में वात दोष बढ़ता है. पॉपकॉर्न रुक्ष तासीर की वजह से शरीर में वात की वृद्धि को संतुलित रखता है और इस खाने से कैलोरी भी नहीं बढ़ती है. कुल मिलाकर पॉपकॉर्न का सेवन आपके वजन को भी नियंत्रित रखने में भी मदद करता है.

तली-भुनी चीजें कितनी खतरनाक?

तली-भुनी और मसालेदार चीजों के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जो सीधा हृदय और रक्तवाहिनी को प्रभावित करता है, लेकिन पॉपकॉर्न के अंदर कोलेस्ट्रॉल को घटाने के गुण होते हैं. ये रक्त वाहिकाओं पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है. इसके अलावा, अगर सीमित मात्रा में खाया जाए तो पॉपकॉर्न पेट के स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है, लेकिन अगर गैस बनने या अपच की परेशानी होती है तो इसे खाने से बचें.

कैसे खाना चाहिए पॉपकॉर्न?

अब सवाल है कि पॉपकॉर्न का सेवन कैसे करना फायदेमंद होगा? पॉपकॉर्न को हमेशा काला नमक, देसी घी और जीरा पाउडर के साथ मिलाकर बनाना चाहिए. इससे पॉपकॉर्न का स्वाद भी बढ़ जाता है और पेट के लिए भी फायदेमंद होता है.

ये भी पढ़ें: Heart Attack After Stent: स्टेंट डलवाने के बाद भी क्यों ब्लॉक हो जाती हैं दिल की नसें? डॉक्टर से समझें

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कोल्ड ड्रिंक-च्विंगम खाते हैं तो हो जाइए सावधान, ट्रिगर हो सकता है माइग्रेन और ब्लड शुगर

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स्टीम्ड मोमो बेहतर या फ्राईड मोमो या दोनों नहीं, जानें किससे कितना हो सकता है नुकसान?

स्टीम्ड मोमो बेहतर या फ्राईड मोमो या दोनों नहीं, जानें किससे कितना हो सकता है नुकसान?


Steamed Momos Or Fried Momos Which Is Better: मोमो अगर सही तरीके से बने हों तो ये स्ट्रीट फूड में सबसे बेहतर विकल्पों में गिने जा सकते हैं. बांस की टोकरियों में रखे गरमागरम मोमो, ढक्कन उठाते ही उठती मसालों की खुशबू. आजकल हर गली में लोगों का पसंदीदा कंफर्ट फूड बन चुके हैं. इसके बावजूद इन्हें सेहत के लिए खतरनाक मानते हैं. लेकिन सच यह है कि ठीक ढंग से तैयार किए गए मोमो न सिर्फ हल्के होते हैं, बल्कि पोषण के लिहाज़ से भी बेहतर साबित हो सकते हैं. चलिए आपको इनके बारे में बताते हैं कि मोमा आपके लिए कितना हेल्दी और खतरनाक हैं.

ज्यादातर क्लासिक मोमो भाप में पकते हैं, तेल में नहीं डूबते यही बात उन्हें समोसे, पकौड़े या रोल से हल्का बनाती है. स्टीमिंग से पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और ट्रांस फैट का सवाल ही नहीं उठता, कैलोरी गिनने वालों के लिए भी राहत एक प्लेट वेज मोमो आमतौर पर 250 कैलोरी के आसपास रहती है, जो बर्गर या काठी रोल से कम है. पेट भी भरता है और भारीपन भी नहीं आता. हर मोमो अपने आप में एक मिनी मील है. रैपर से कार्बोहाइड्रेट, फिलिंग से प्रोटीन और फाइबर, और तिल के तेल या पनीर से थोड़ी-सी अच्छी फैट सब कुछ संतुलित. यह ऐसा स्नैक नहीं जो ब्लड शुगर बढ़ाकर तुरंत गिरा देच ऊपर से अगर क्लियर सूप मिल जाए, जो नार्थ-ईस्ट में मिलता है, तो बिना डीप-फ्राइड साइड्स के ही पूरा, हल्का और पोषक भोजन बन जाता है.

हेल्दी विकल्प

स्ट्रीट मोमो सिर्फ आटे की पोटली नहीं होते. इनमें पत्ता गोभी, गाजर, प्याज, स्प्रिंग अनियन या सोया चंक्स जैसी चीजें होती हैं, जो फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हैं. चिकन या पनीर वेरिएंट बिना ज़्यादा फैट के प्रोटीन देते हैं. चाउमीन जैसे स्ट्रीट फूड के मुकाबले मोमो में खाली कैलोरी कम और पोषण ज्यादा मिलता है,खासतौर पर जब फिलिंग ताजा कटी हो और स्टीम्ड हो. भाप में पके होने की वजह से मोमो पेट पर भारी नहीं पड़ते. हल्का बाहरी आवरण और नमी वाली फिलिंग इन्हें तले-भुने, तीखे विकल्पों से ज्यादा पचने लायक बनाती है.

कौन कितना खतरनाक?

स्ट्रीट-स्टाइल मोमो आमतौर पर ब्लीच किए हुए रिफाइंड आटे से बनाए जाते हैं, जिसमें फाइबर लगभग नहीं होता और यह बहुत जल्दी पच जाता है. इसका नतीजा यह होता है कि मोमो खाने के बाद ब्लड शुगर अचानक तेजी से बढ़ती है. बार-बार ऐसा होने पर शरीर के लिए फैट स्टोर करना आसान हो जाता है.वहीं, फ्राई मोमो बड़ी मात्रा में तेल सोख लेते हैं. इससे कैलोरी तो काफी बढ़ जाती है, लेकिन पेट ज्यादा देर तक भरा हुआ महसूस नहीं होता. अगर मोमो हफ्ते में कई बार स्नैक के तौर पर खाने की आदत बन जाए, तो यह धीरे-धीरे आपकी कुल कैलोरी इनटेक बढ़ा देता है, जिससे वजन बढ़ने लगता है और शरीर की इंसुलिन को कंट्रोल करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.

कैसे बढ़ता है खतरा?

मोमो का ज्यादा सेवन पेट और इम्युनिटी दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है और इसकी एक बड़ी वजह है खाने की साफ-सफाई से जुड़ा खतरा, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. स्ट्रीट मोमो भले ही स्वादिष्ट हों, लेकिन उनकी तैयारी और हैंडलिंग कई बार सेहत के लिए जोखिम बन जाती है. दिल्ली के स्ट्रीट फूड वेंडर्स पर किए गए एक माइक्रोबायोलॉजिकल सर्वे में वेज मोमो में चिंताजनक स्तर पर बैक्टीरिया पाए गए थे, जिनमें कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और ई. कोलाई शामिल थे. International Journal of Current Microbiology and Applied Sciences में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, कई विक्रेता बिना दस्ताने सीधे हाथों से खाना बनाते हैं, बर्तन साफ करने के लिए वही गंदे कपड़े बार-बार इस्तेमाल करते हैं और भोजन को सही स्वच्छ स्थितियों में स्टोर नहीं करते.

साफ-सफाई पर ध्यान 

इस तरह की गंदी आदतों के कारण स्टैफाइलोकोकस ऑरियस, साल्मोनेला और अन्य खतरनाक बैक्टीरिया से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जो फूड पॉयजनिंग और पेट से जुड़ी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं. खासतौर पर नमी और मानसून के मौसम में, जब बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, यह जोखिम और भी ज्यादा बढ़ जाता है. कई स्ट्रीट वेंडर बिना सही सफ़ाई के नंगे हाथों से खाना तैयार और परोसते हैं, गलत तरीके से स्टोर किया गया खाना और खुला रहने से बैक्टीरिया का खतरा बढ़ जाता है. इस तरह असुरक्षित हैंडलिंग और पर्यावरणीय हालात फूड-बोर्न बीमारियों की आशंका को कई गुना बढ़ा देते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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