चेहरे की स्किन हो रही खराब? गंदे तकिये की वजह से हो सकते हैं पिंपल-एलर्जी, जानें बचने का तरीका

चेहरे की स्किन हो रही खराब? गंदे तकिये की वजह से हो सकते हैं पिंपल-एलर्जी, जानें बचने का तरीका


तकिये का कवर पसीने, ऑयल्स, धूल और बैक्टीरिया से भरा रहता है. जब हम रात में इसका यूज करते हैं, तो ये बैक्टीरिया और ऑयल्स हमारे स्किन पोर्स में जम जाते हैं. इससे पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं और पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स जैसी समस्याएं होने लगती हैं. खासकर अगर आपकी स्किन ऑयली है, तो यह और भी जल्दी हो सकता है.

अगर आपकी स्किन थकी-थकी और बेजान लग रही है, तो इसके पीछे तकिये का गंदा कवर हो सकता है. गंदे कवर से आपकी स्किन की नेचुरल चमक धीरे-धीरे खत्म होने लगती है. इसलिए स्किन केयर प्रोडक्ट्स लेने के बाद भी आपकी स्किन ग्लोइंग नहीं दिखती.

अगर आपकी स्किन थकी-थकी और बेजान लग रही है, तो इसके पीछे तकिये का गंदा कवर हो सकता है. गंदे कवर से आपकी स्किन की नेचुरल चमक धीरे-धीरे खत्म होने लगती है. इसलिए स्किन केयर प्रोडक्ट्स लेने के बाद भी आपकी स्किन ग्लोइंग नहीं दिखती.

Published at : 18 Jan 2026 08:35 AM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

मुंह के बैक्टीरिया बन सकते हैं लिवर की बीमारी की वजह, इस स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

मुंह के बैक्टीरिया बन सकते हैं लिवर की बीमारी की वजह, इस स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा


अक्सर हम यह सोचते हैं कि मुंह की बीमारी का असर सिर्फ दांतों और मसूड़ों तक ही सीमित रहता है. अगर दांत में कीड़ा लग गया या मसूड़ों से खून आने लगा, तो लोग इसे मामूली समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन हाल ही में सामने आए एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. अब शोधकर्ताओं का कहना है कि मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया धीरे-धीरे शरीर के अंदर जाकर लिवर जैसी अहम अंग को नुकसान पहुंचा सकते हैं यानी अगर आप अपने मुंह की सफाई पर ध्यान नहीं देते, तो इसका सीधा असर आपके लिवर की सेहत पर भी पड़ सकता है. यह अध्ययन बताता है कि मुंह और लिवर भले ही अलग-अलग अंग लगते हों, लेकिन दोनों के बीच गहरा संबंध है। खासतौर पर उन लोगों के लिए यह खबर ज्यादा अहम है जो पहले से मधुमेह, मोटापा या शराब पीने की आदत से जूझ रहे हैं.

अध्ययन में क्या सामने आया?

यह अध्ययन नेचर माइक्रोबायोलॉजी नाम की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. इसमें जर्मनी के म्यूनिख तकनीकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 86 मरीजों पर रिसर्च की, शोध के दौरान मरीजों की लार (थूक) और मल के नमूनों की जांच की गई. वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ ऐसे बैक्टीरिया, जो आमतौर पर सिर्फ मुंह में पाए जाते हैं, वे गंभीर लिवर रोग से पीड़ित लोगों की आंतों में बड़ी मात्रा में मौजूद थे. इन बैक्टीरिया में खासतौर पर वेइलोनेला (Veillonella) और स्ट्रेप्टोकोकस (Streptococcus) शामिल थे. 

मुंह के बैक्टीरिया आंत और लिवर तक कैसे पहुंचते हैं?

वैज्ञानिकों का कहना है कि सामान्य स्थिति में ये बैक्टीरिया आंतों में नहीं पाए जाते हैं. लेकिन जिन लोगों को क्रोनिक लिवर डिजीज होती है, उनमें ये बैक्टीरिया मुंह से आंत तक पहुंच जाते हैं और वहीं बस जाते हैं. शोधकर्ताओं ने बताया कि ये बैक्टीरिया ऐसे एंजाइम बनाते हैं जो आंतों की सुरक्षा परत (Intestinal Barrier) को नुकसान पहुंचाते हैं. जब यह परत कमजोर हो जाती है तो बैक्टीरिया आसानी से रक्त में घुस जाते हैं और फिर रक्त के जरिए सीधे लिवर तक पहुंच जाते हैं. इससे लिवर में सूजन बढ़ती है और बीमारी और गंभीर हो सकती है. 

डॉक्टर क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, मसूड़ों में मौजूद बैक्टीरिया रोजमर्रा की गतिविधियों जैसे ब्रश करने या चबाने के दौरान बने छोटे घावों से खून में प्रवेश कर सकते हैं. इसके बाद ये बैक्टीरिया लिवर तक पहुंचकर वहां सूजन पैदा करते हैं और इम्यून सिस्टम पर दबाव डालते हैं. वे बताते हैं कि लंबे समय तक ऐसी सूजन रहने से फैटी लिवर, लिवर फाइब्रोसिस और गंभीर लिवर रोग का खतरा बढ़ जाता है. 

किन लोगों को ज्यादा खतरा है?

डॉक्टरों के मुताबिक यह समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में खतरा ज्यादा होता है, जैसे डायबिटीज के मरीज, मोटापा या ज्यादा वजन वाले लोग, नियमित शराब पीने वाले, कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग इन लोगों में पहले से ही शरीर में सूजन बनी रहती है, जिससे बैक्टीरिया को पनपने का ज्यादा मौका मिलता है. 

मुंह की बीमारी के शुरुआती लक्षण पहचानें

मसूड़ों से बार-बार खून आना, मुंह से बदबू आना जो ठीक न हो, मसूड़ों में सूजन या दर्द, मसूड़ों का सिकुड़ना और दांतों का ढीला होना. ये संकेत बताते हैं कि मुंह में बैक्टीरिया बढ़ रहे हैं, जो आगे चलकर पूरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. 

लिवर को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी मौखिक स्वच्छता लिवर की सेहत बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है. इसके लिए दिन में दो बार सही तरीके से ब्रश करें. रोजाना फ्लॉसिंग करें ताकि दांतों के बीच फंसा खाना और बैक्टीरिया निकल जाए. समय-समय पर डेंटिस्ट से जांच कराएं. मुंह की किसी भी समस्या को हल्के में न लें. शराब से दूरी रखें और स्वस्थ खानपान अपनाएं. 

यह भी पढ़ें: सबकुछ परफेक्ट होने के बाद भी क्यों फेल हो जाता है IVF, जानें कहां आती है दिक्कत?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बिना बीमारी हर समय थका-थका सा होता है महसूस, कहीं आपमें इस चीज की कमी तो नहीं?

बिना बीमारी हर समय थका-थका सा होता है महसूस, कहीं आपमें इस चीज की कमी तो नहीं?


Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

सबकुछ परफेक्ट होने के बाद भी क्यों फेल हो जाता है IVF, जानें कहां आती है दिक्कत?

सबकुछ परफेक्ट होने के बाद भी क्यों फेल हो जाता है IVF, जानें कहां आती है दिक्कत?


आज के समय में IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) उन कपल्स के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बन चुका है, जो लंबे समय से माता-पिता बनने का सपना देख रहे हैं. जब सालों की कोशिशों, इलाज, दवाइयों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बाद IVF का सहारा लिया जाता है, तो उम्मीदें बहुत बढ़ जाती हैं. डॉक्टर कहते हैं कि एग अच्छे हैं, स्पर्म ठीक हैं, एम्ब्रायो सुंदर है, बच्चेदानी भी तैयार है फिर भी जब रिपोर्ट नेगेटिव आती है, तो मन में सिर्फ एक ही सवाल गूंजता है जब सबकुछ परफेक्ट था, तो IVF फेल क्यों हो गया.

IVF कोई मशीन की तरह काम करने वाली प्रक्रिया नहीं है. यह शरीर, हार्मोन, जेनेटिक्स और मानसिक स्थिति सबका मिला-जुला है. कई बार बाहर से सबकुछ ठीक दिखता है, लेकिन अंदर कहीं न कहीं कोई छोटी-सी दिक्कत छिपी होती है, जो प्रेगनेंसी को आगे बढ़ने नहीं देती. ऐसे में आइए जानते हैं कि सबकुछ परफेक्ट होने के बाद भी IVF क्यों फेल हो जाता है.

IVF फेल होने के लक्षण कैसे पहचानें?

IVF में एम्ब्रायो ट्रांसफर के बाद के लगभग 14 दिन बहुत अहम होते हैं. इसे टू-वीक वेट कहा जाता है. इस दौरान महिलाएं प्रोजेस्टेरोन जैसी दवाइयां लेती हैं, जिनकी वजह से प्रेगनेंसी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं, चाहे प्रेगनेंसी हो या न हो. लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जो IVF फेल होने की तरफ इशारा कर सकते हैं. जैसे अगर एम्ब्रायो ट्रांसफर के कुछ दिनों बाद आपको सामान्य पीरियड्स जैसा ब्लीडिंग शुरू हो जाए, तो इसका मतलब हो सकता है कि एम्ब्रायो बच्चेदानी की दीवार से चिपक नहीं पाया.

घर पर टेस्ट कुछ भी दिखाए, लेकिन IVF में सबसे भरोसेमंद टेस्ट बीटा-HCG ब्लड टेस्ट होता है. अगर इसमें हार्मोन का लेवल नहीं बढ़ा, तो IVF साइकिल को फेल माना जाता है. अगर आपको पहले स्तनों में भारीपन, हल्का पेट दर्द या थकान महसूस हो रही थी और अचानक ये सब खत्म हो जाए, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि प्रेगनेंसी हार्मोन बनना बंद हो गया. ऐसे में ध्यान रखें कि बिना डॉक्टर से पूछे दवाइयां बंद न करें, क्योंकि कुछ मामलों में ब्लीडिंग के बावजूद प्रेगनेंसी चल रही होती है. 

सबकुछ परफेक्ट होने के बाद भी IVF क्यों फेल हो जाता है

1. एम्ब्रायो की  – कई बार एम्ब्रायो देखने में बहुत सुंदर लगता है, लेकिन उसके अंदर जेनेटिक समस्या हो सकती है. ऐसे एम्ब्रायो या तो चिपकते नहीं हैं या जल्दी खराब हो जाते हैं. यह IVF फेल होने की सबसे आम वजह मानी जाती है.

2.  बच्चेदानी की परत – एंडोमेट्रियम यानी बच्चेदानी की अंदरूनी परत अगर बहुत पतली (7mm से कम), कमजोर या सही समय पर तैयार नहीं होती, तो एम्ब्रायो को पोषण नहीं मिल पाता और इम्प्लांटेशन फेल हो जाता है. 

3. प्रेगनेंसी की अंदरूनी समस्याएं – फाइब्रॉएड, पॉलीप्स, सिस्ट या पुरानी सर्जरी की वजह से बनी चिपकन (Adhesions) भी एम्ब्रायो के चिपकने में रुकावट बन सकती हैं. 

4. ब्लड फ्लो की कमी – अगर बच्चेदानी तक खून का बहाव सही नहीं है, तो एम्ब्रायो को जरूरी ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता. 

5. इंफेक्शन या टीबी – गर्भाशय या ट्यूब्स में पुराना इंफेक्शन (जैसे टीबी) होने पर ट्यूब्स में गंदा तरल जमा हो जाता है, जो एम्ब्रायो के लिए जहरीला साबित हो सकता है. 

 6. उम्र का बढ़ना – 35 साल के बाद अंडों की संख्या और क्वालिटी दोनों कम होने लगती हैं. इससे जेनेटिक खराबियों का खतरा बढ़ जाता है. 

7. लाइफस्टाइल और तनाव – मोटापा, धूम्रपान, खराब खान-पान और ज्यादा तनाव IVF की सफलता को काफी हद तक कम कर देते हैं. 

8. इम्यून सिस्टम की समस्या – कुछ महिलाओं में शरीर का इम्यून सिस्टम एम्ब्रायो को बाहरी चीज समझकर उस पर हमला कर देती है, जिससे इम्प्लांटेशन फेल हो जाता है. 

9. दवाइयों में लापरवाही – दवाइयां समय पर न लेना या डॉक्टर की सलाह को ठीक से फॉलो न करना भी IVF फेल होने की एक बड़ी वजह हो सकती है. 

यह भी पढ़ें: Heart Attack After Stent: स्टेंट डलवाने के बाद भी क्यों ब्लॉक हो जाती हैं दिल की नसें? डॉक्टर से समझें

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

डाइट में ये चीजें कर ली शामिल तो कभी नहीं होगी फर्टिलिटी की समस्या, बढ़ जाएगा स्पर्म काउंट

डाइट में ये चीजें कर ली शामिल तो कभी नहीं होगी फर्टिलिटी की समस्या, बढ़ जाएगा स्पर्म काउंट


आज की बिजी लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी जिंदगी में इनफर्टिलिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. यह समस्या अब सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि बड़ी संख्या में पुरुष भी कम स्पर्म काउंट और खराब स्पर्म क्वालिटी की समस्या से जूझ रहे हैं. बदलती लाइफस्टाइल, तनाव, गलत खानपान और नींद की कमी इसके बड़े कारण माने जा रहे हैं. ऐसे में कई लोग स्पर्म काउंट के कई तरीके अपनाते हैं लेकिन वह काम नहीं आते हैं.

एक्सपर्ट्स भी बताते हैं कि कई मामलों में दवाइयों से पहले अगर खानपान और दिनचर्या को ठीक कर लिया जाए, तो फर्टिलिटी में काफी सुधार देखा जा सकता है. सही डाइट न सिर्फ हार्मोन बैलेंस करती है, बल्कि स्पर्म की संख्या और क्वालिटी दोनों को बेहतर बनाने में मदद करती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कौन सी चीजें डाइट में शामिल करने से कभी फर्टिलिटी की समस्या नहीं होगी और स्पर्म काउंट बढ़ेगा. 

क्यों घटता है स्पर्म काउंट?

स्पर्म काउंट कम होने के पीछे कई वजहें हो सकती है. लगातार स्ट्रेस और मेंटल प्रेशर हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है. ज्यादा गर्मी, टाइट कपड़े, स्मोकिंग, शराब और पोषक तत्वों की कमी भी स्पर्म पर सीधा असर डालती है. इसके अलावा मोटापा, हॉर्मोन से जुड़ी समस्याएं और कुछ दवाइयां भी स्पर्म प्रोडक्शन को प्रभावित कर सकती है. वहीं डॉक्टरों के अनुसार अगर रोजाना की डाइट में कुछ खास चीजें शामिल कर ली जाएं, तो स्पर्म काउंट बढ़ाने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा सही पोषण शरीर में टेस्टोस्टेरोन लेवल को संतुलित करता है, जिससे फर्टिलिटी बेहतर होती है.

स्पर्म काउंट बढ़ाने वाले फूड्स

हरी पत्तेदार सब्जियां और बीज

पालक, मेथी और दूसरी हरी सब्जियों में भरपूर फॉलिक एसिड होता है. वहीं अलसी, सूरजमुखी और कद्दू के बीज जिंक से भरपूर होते हैं, जिन्हे डाइट में शामिल करने से स्पर्म की क्वालिटी सुधारने में मदद मिलती है. 

मेवे और ड्राई फ्रूट्स

बादाम, अखरोट, किशमिश और अंजीर जैसे ड्राई फ्रूट्स में हेल्दी फैट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. यह हार्मोन बैलेंस बनाए रखने के साथ-साथ स्पर्म काउंट बढ़ाने में भी मददगार माने जाते हैं. 

प्रोटीन से भरपूर चीजें

अंडा, दूध, दालें और पनीर जैसी प्रोटीन से भरपूर चीजें स्पर्म की क्वालिटी के लिए जरूरी मानी जाती है. इससे स्पर्म काउंट और एक्टिविटी दोनों में सुधार हो सकता है.

फल और सब्जियां

अनार, केला, गाजर और सिट्रस फल जैसे संतरा और नींबू विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं. ये स्पर्म को नुकसान से बचाते हैं और उनकी मोबिलिटी बढ़ाने में मदद करते हैं.

इन चीजों से बनाएं दूरी

एक्सपर्ट्स के अनुसार बहुत ज्यादा कैफीन, शराब, जंक फूड, प्रोसेस्ड शुगर और स्मोकिंग फर्टिलिटी पर नेगेटिव असर डालते हैं. ये आदतें शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ाती है और हार्मोनल असंतुलन पैदा करती है, जिससे स्पर्म काउंट और क्वालिटी दोनों प्रभावित होती है.

ये भी पढ़ें-Bluetooth Earphones Cancer Risk: क्या कान में लगाने वाले ब्लूटूथ से भी हो जाता है कैंसर, जानें कितना रहता है रिस्क?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

हाइजीन के लिए प्यूबिक हेयर हटाना जरूरी या नहीं? डॉक्टर्स से समझें काम की बात

हाइजीन के लिए प्यूबिक हेयर हटाना जरूरी या नहीं? डॉक्टर्स से समझें काम की बात


आज के समय में लोग अपनी पर्सनल हाइजीन को लेकर पहले से कहीं ज्यादा अलर्ट हो गए हैं. नहाना, साफ कपड़े पहनना, स्किन केयर करना, ये सब अब हमारी रोजमर्रा की आदत बन चुके हैं. लेकिन जब बात प्राइवेट पार्ट्स की साफ-सफाई की आती है, तो यहां जानकारी से ज्यादा भ्रम देखने को मिलता है.

सोशल मीडिया, विज्ञापनों और ब्यूटी प्रोडक्ट्स के कारण लोगों के मन में यह धारणा बन गई है कि प्यूबिक हेयर यानी गुप्तांग के बाल गंदे होते हैं और इन्हें हटाना ही क्लीन और हाइजीनिक माना जाता है. कई कंपनियां तो सीधे-सीधे यह दावा करती हैं कि अगर आपने प्यूबिक हेयर नहीं हटाए, तो इंफेक्शन हो सकता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई प्यूबिक हेयर गंदे होते हैं, क्या इन्हें हटाने से इंफेक्शन कम होता है या बढ़ता है. तो आइए जानते हैं कि हाइजीन के लिए प्यूबिक हेयर हटाना जरूरी या नहीं. 

प्यूबिक हेयर क्यों होते हैं? 

डॉक्टरों के अनुसार, प्यूबिक हेयर भी शरीर की एक नेचुरल सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं. ये बैक्टीरिया, धूल और गंदगी को अंदर जाने से रोकते हैं. वेजाइना और प्राइवेट पार्ट्स को इंफेक्शन से बचाते हैं. स्किन को आपसी घर्षण (friction) से बचाते हैं. टाइट कपड़े पहनने या फिजिकल इंटिमेसी के दौरान स्किन को सुरक्षा देते हैं. प्राइवेट एरिया का तापमान संतुलित बनाए रखते हैं यानी प्यूबिक हेयर हमारी बॉडी की पहली सुरक्षा ढाल (First Line of Defense) होते हैं. 

हाइजीन के लिए प्यूबिक हेयर हटाना जरूरी या नहीं

डॉक्टरों की साफ राय है कि प्यूबिक हेयर को पूरी तरह हटाना जरूरी नहीं है. हाइजीन का मतलब सिर्फ बाल हटाना नहीं होता, बल्कि उस एरिया को साफ और सूखा रखना ज्यादा जरूरी होता है. अगर प्यूबिक हेयर बहुत ज्यादा लंबे हो गए हों, पसीना ज्यादा जमा हो रहा हो, खुजली या बदबू महसूस हो रही हो तो ऐसे में हल्का ट्रिम करना बेहतर ऑप्शन है. 

पूरी तरह बाल हटाने से क्या नुकसान हो सकता है?

कई लोग रेजर, वैक्स, हेयर रिमूवल क्रीम या केमिकल प्रोडक्ट्स का यूज करते हैं, जो इस सेंसिटिव एरिया के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. इससे स्किन कट या छोटे घाव, खुजली और जलन, रैशेज और एलर्जी, फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन, वेजाइनल इंफेक्शन का खतरा, छोटे-छोटे कट्स के जरिए बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. 

अगर बाल हटाने हों तो सुरक्षित तरीका क्या है?

अगर आप प्यूबिक हेयर हटाना चाहते हैं, तो डॉक्टर सलाह देते हैं कि पहले बालों को हल्का ट्रिम करें, सेफ्टी ट्रिमर या क्लिपर का यूज करें, रेजर और केमिकल क्रीम से बचें, शेविंग से पहले गुनगुने पानी से नहाएं, बाद में हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं, जिन लोगों की स्किन ज्यादा सेंसिटिव है, उन्हें किसी भी तरीके से बाल हटाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए. 

यह भी पढ़ें: Bluetooth Earphones Cancer Risk: क्या कान में लगाने वाले ब्लूटूथ से भी हो जाता है कैंसर, जानें कितना रहता है रिस्क?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp