बिहार के किस जिले में एड्स के सबसे ज्यादा मरीज, जानें यहां क्यों फैल रही यह महामारी?

बिहार के किस जिले में एड्स के सबसे ज्यादा मरीज, जानें यहां क्यों फैल रही यह महामारी?


Which District In Bihar Has The Highest AIDS Cases: बिहार में एचआईवी/एड्स को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है. राज्य में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या अब एक लाख के पार पहुंच चुकी है.

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने विधान परिषद में जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 1,00,044 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं. यह खुलासा उस समय हुआ जब डॉ. राजवर्धन आजाद समेत अन्य सदस्यों ने इस मुद्दे पर प्रस्ताव के जरिए सरकार से जवाब मांगा. चलिए आपको बताते हैं कि बिहार में इसके मामले क्यों बढ़ रहे हैं. 

किन लोगों में सबसे ज्यादा मामले?

सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, बिहार के 13 जिलों को ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखा गया है, जहां इंफेक्शन की रफ्तार सामान्य से अधिक तेज है. आंकड़ों पर नजर डालें तो राजधानी पटना इस सूची में सबसे ऊपर है. यहां अब तक 8,270 एड्स के मरीजों की पुष्टि हो चुकी है. इसके बाद गया में 5,760, मुजफ्फरपुर में 5,520, सीतामढ़ी में 5,026, बेगूसराय में 4,716 और भागलपुर में 3,078 मामले दर्ज किए गए हैं. ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि शहरी और घनी आबादी वाले इलाकों में इंफेक्शन का दबाव ज्यादा है.

क्यों बढ़ रहे हैं मामले?

सवाल उठ रहा है कि आखिर कुछ जिलों में यह स्थिति इतनी गंभीर क्यों हो रही है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, जागरूकता की कमी, समय पर जांच न कराना, लोगों को एक दूसरे हिस्से में आना जाना और अनसेफ फिजिकल रिलेशन बनाना इस इंफेक्शन के फैलाव में भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि सरकार ने जांच और परामर्श की सुविधाओं को मजबूत करने का दावा किया है. फिलहाल राज्य के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 196 समेकित परामर्श एवं जांच केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां एचआईवी की मुफ्त जांच और काउंसलिंग उपलब्ध है.

पीड़ितों को सरकार की तरफ से सहायता

सरकार की ओर से संक्रमित लोगों के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा रही है. ‘बिहार शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना’ के तहत प्रत्येक एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को 1,500 रुपये प्रतिमाह की मदद दी जाती है. साथ ही, 18 वर्ष से कम आयु के दो आश्रित बच्चों को 1,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता प्रदान की जाती है.

वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 63.81 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं. सरकार का कहना है कि वह इंफेक्शन की रोकथाम, इलाज और जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. लेकिन बढ़ते आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि खासकर पटना समेत हाई रिस्क जिलों में सतर्कता और व्यापक जागरूकता अभियान की और ज्यादा जरूरत है, ताकि इस इंफेक्शन की रफ्तार पर काबू पाया जा सके.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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‘योग सिर्फ व्यायाम नहीं, मन और श्वास का सामंजस्य है’, फेसबुक लाइव में बोले स्वामी रामदेव

‘योग सिर्फ व्यायाम नहीं, मन और श्वास का सामंजस्य है’, फेसबुक लाइव में बोले स्वामी रामदेव


Meditation Benefits: योग गुरु बाबा रामदेव ने हाल ही में पतंजलि संन्यास आश्रम से एक फेसबुक लाइव सत्र के माध्यम से देश-दुनिया को स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश दिया. अपनी टीम के साथ योगासन और प्राणायाम करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानवीय ऊर्जा एक अमूल्य संसाधन है, जिसे बीमारियों से लड़ने में नष्ट करने के बजाय स्वास्थ्य को बनाए रखने और उसे सही दिशा में प्रवाहित करने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

रामदेव बाबा के अनुसार, योग तभी प्रभावी होता है जब मन और श्वास के बीच पूर्ण सामंजस्य हो. सत्र के दौरान उन्होंने प्राणायाम में एकाग्रता के महत्व को रेखांकित किया और बताया कि अनुशासन, जागरूकता और निवारक स्वास्थ्य ही आधुनिक जीवन की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का समाधान हैं.

पारंपरिक चिकित्सा और ‘कायाकल्प’

इस सत्र में पारंपरिक योगिक और उपचारात्मक प्रथाओं पर विशेष चर्चा की गई। बाबा रामदेव ने शंख प्रक्षालन, कोलन थेरेपी, बस्ती और पंचकर्म-षट्कर्म जैसी प्राचीन शोधन विधियों का उल्लेख किया. उन्होंने इन विधियों को आंतरिक शुद्धि और ‘कायाकल्प’ (समग्र कायाकल्प) के लिए समय की कसौटी पर खरा उतरा बताया. उनके अनुसार, ये अभ्यास मार्गदर्शन में किए जाने पर पाचन स्वास्थ्य, चयापचय संतुलन और समग्र जीवन शक्ति को बढ़ाने में मदद करते हैं.

आधुनिक बीमारियों पर योग का प्रभाव

सत्र के दौरान मोटापा, टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह जैसी समकालीन जीवनशैली की चिंताओं को भी संबोधित किया गया. रामदेव ने इंसुलिन पर निर्भर रोगियों से संबंधित ऐतिहासिक और वर्तमान शोध का हवाला देते हुए बताया कि कैसे योग, ध्यान और एक व्यवस्थित दिनचर्या पारंपरिक चिकित्सा उपचार के साथ-साथ सहायक दृष्टिकोण के रूप में काम कर सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये अभ्यास चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि कल्याण के लिए पूरक उपकरण हैं.

वेलनेस क्षेत्र में अवसर और सुलभता

योग गुरु ने ध्यान के माध्यम से मानसिक स्पष्टता, तनाव प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन पर भी प्रकाश डाला. इसके अलावा, उन्होंने वेलनेस क्षेत्र में उभरते रोजगार के अवसरों का भी जिक्र किया, जो प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों के लिए नए रास्ते खोल रहे हैं. अंत में, उन्होंने बताया कि पतंजलि के प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोग घर बैठे ही इन वेलनेस थेरेपी तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं, जिससे पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाया जा सके.

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‘सिर्फ कसरत नहीं, दैनिक अनुशासन है प्राणायाम’, पतंजलि वेलनेस सत्र में बोले बाबा रामदेव

‘सिर्फ कसरत नहीं, दैनिक अनुशासन है प्राणायाम’, पतंजलि वेलनेस सत्र में बोले बाबा रामदेव


Pranayama Benefits: हाल ही में अपने फेसबुक चैनल पर एक लाइव इंटरेक्शन के दौरान, योग गुरु रामदेव बाबा ने शारीरिक संतुलन और मानसिक स्पष्टता बनाए रखने में प्राणायाम और केंद्रित श्वास की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की. हिमालय की तलहटी में स्थित ‘वेद लाइफ पतंजलि वेलनेस’ से प्रसारित इस सत्र में उन्होंने न केवल श्वास तकनीकों का प्रदर्शन किया, बल्कि अभ्यास के दौरान एकाग्रता के महत्व को भी रेखांकित किया.

रामदेव बाबा ने इस बात पर जोर दिया कि प्राणायाम केवल एक कभी-कभार की जाने वाली गतिविधि नहीं, बल्कि एक दैनिक अनुशासन होना चाहिए. लाइव प्रसारण के दौरान उन्होंने दर्शकों को मुद्रा (posture), श्वास की लय और जागरूकता के प्रति सचेत रहने के लिए प्रोत्साहित किया. उनके अनुसार, जब प्राणायाम को निरंतरता और फोकस के साथ किया जाता है, तभी यह सबसे प्रभावी होता है.

आधुनिक जीवन के दबावों के बीच, सचेत श्वास (conscious breathing) शरीर और मन को संरेखित करने और शांति बनाए रखने में सहायक होती है. उन्होंने साधकों को सलाह दी कि वे प्राणायाम को धैर्यपूर्वक अपनाएं और शरीर को धीरे-धीरे इसके अनुकूल होने दें. इस दौरान स्थिरता बनाए रखना और विकर्षणों से दूर रहना अनिवार्य है.

हिमालयी परंपरा से जुड़ाव

रामदेव बाबा ने अपनी चर्चा में ‘देवभूमि’ के रूप में विख्यात हिमालयी क्षेत्र से मिलने वाली प्रेरणा का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि ‘वेद लाइफ पतंजलि वेलनेस’ एक ऐसा स्थान है जहां योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और सनातन जीवन पद्धति के सिद्धांतों का एक साथ अभ्यास किया जाता है. उनके अनुसार, यह क्षेत्र आत्म-चिंतन और अनुशासित जीवन के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करता है, जहां पारंपरिक ज्ञान को केवल वैचारिक रूप से पढ़ने के बजाय व्यावहारिक रूप से अनुभव किया जा सकता है.

परंपरा का दैनिक जीवन में एकीकरण

सत्र के अंत में, रामदेव बाबा ने दर्शकों से आग्रह किया कि वे दुनिया में कहीं भी हों, योगिक प्रथाओं को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. उन्होंने दोहराया कि यदि एकाग्रता के साथ किया जाए, तो प्राणायाम कल्याण बनाए रखने का एक सरल लेकिन प्रभावी साधन है. यह न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि भारत की प्राचीन कल्याण परंपराओं से जुड़े रहने का एक सशक्त तरीका भी है.

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3 साल में इस महिला ने घटाया 72 किलो वजन, केवल 7 आसान स्टेप्स फॉलो कर आप भी हो सकती हैं स्लिम

3 साल में इस महिला ने घटाया 72 किलो वजन, केवल 7 आसान स्टेप्स फॉलो कर आप भी हो सकती हैं स्लिम


आजकल बढ़ता वजन सिर्फ दिखने की समस्या नहीं है, बल्कि यह सेहत से जुड़ी कई परेशानियों की जड़ बन सकता है. कई लोग वजन कम करना चाहते हैं, लेकिन शुरुआत कैसे करें, क्या खाएं, कितनी एक्सरसाइज करें. इन सवालों में उलझकर वे बीच में ही हार मान लेते हैं. कुछ लोग तेजी से वजन घटाने के लिए सख्त डाइट या घंटों जिम में पसीना बहाने लगते हैं, लेकिन कुछ ही समय में थककर छोड़ देते हैं. 

ऐसे में फिटनेस और न्यूट्रिशन कोच Emma Hooker की कहानी प्रेरणा देती है.  उन्होंने 3 साल में लगभग 72 किलो वजन कम किया. खास बात यह है कि उन्होंने कोई जादुई डाइट या शॉर्टकट नहीं अपनाया, बल्कि कुछ आसान और टिकाऊ आदतों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया. उनका मानना है कि वजन कम करना एक दौड़ नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा है, जिसमें पेशंस, बैलेंस और कंटिन्यूटी सबसे जरूरी हैं. तो आइए जानते हैं वे 7 आसान स्टेप्स, जिन्हें अपनाकर आप भी सुरक्षित और स्थायी तरीके से वजन घटा सकते हैं. 

इन 7 आसान स्टेप्स को फॉलो कर आप भी हो सकते हैं स्लिम

1. छोटी शुरुआत करें, बड़े सपने बाद में देखें – अक्सर लोग सोचते हैं कि वे एकदम से सब बदल देंगे. रोज 2 घंटे जिम जाएंगे, सिर्फ सलाद खाएंगे और कुछ ही दिनों में फिट हो जाएंगे. लेकिन यह तरीका ज्यादा दिन नहीं चलता. इसकी बजाय छोटी आदतों से शुरुआत करें. जैसे रोज पर्याप्त पानी पिएं, 15–20 मिनट टहलें, मीठा कम करें, एक समय पर सोने की आदत डालें. छोटे बदलाव ही आगे चलकर बड़े नतीजे देते हैं. 

2. शरीर को भूखा नहीं, पोषित रखें – बहुत कम खाना या सिर्फ सलाद पर जीना वजन घटाने का सही तरीका नहीं है. जब आप शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं देते, तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है. हर खाने में प्रोटीन शामिल करें. जैसे दाल, पनीर, अंडा, चिकन आदि. सब्जियां और फल खाएं. हेल्दी फैट जैसे मेवे सीमित मात्रा में लें. खुद को पूरी तरह किसी चीज से वंचित न करें. संतुलित खाना ही लंबे समय तक वजन कम रखने में मदद करता है. 

3. अकेले मत लड़िए, अपनी सपोर्ट टीम बनाइए – जब मोटिवेशन कम हो जाए, तो किसी का साथ बहुत काम आता है. आप किसी दोस्त के साथ वर्कआउट शुरू कर सकते हैं, फिटनेस ग्रुप जॉइन कर सकते हैं, किसी कोच की मदद ले सकते हैं. सपोर्ट सिस्टम होने से आप हार नहीं मानते हैं. 

4. आराम भी जरूरी है – बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर उन्होंने एक दिन एक्सरसाइज नहीं की तो सब बेकार हो गया, लेकिन आराम भी उतना ही जरूरी है जितनी मेहनत, इसलिए अच्छी नींद लें, जरूरत हो तो झपकी लें, हफ्ते में एक रेस्ट डे रखें. आराम से शरीर रिकवर होता है और आप ज्यादा एनर्जी के साथ दोबारा शुरुआत कर पाते हैं. 

5. नियमित रहें, परफेक्ट बनने की कोशिश न करें – एक दिन 2 घंटे जिम जाने से बेहतर है कि आप हफ्ते में 4–5 दिन 20–30 मिनट एक्टिव रहें. वर्कआउट का समय तय करें, कम समय हो तो भी 10 मिनट जरूर करें.मन न हो तब भी हल्की एक्टिविटी करें. 

6. सिर्फ एक ही स्केल पर मत टिके रहें – वजन कम होना ही सफलता नहीं है. कई बार वजन धीरे घटता है, लेकिन शरीर में पॉजिटिव बदलाव आते रहते हैं. जब कपड़े ढीले होने लगें, एनर्जी बढ़े, नींद बेहतर हो और मूड अच्छा रहे, तब इन छोटी जीतों को लिखें और खुद को किसी अच्छी चीज से इनाम दें. जैसे नए वर्कआउट कपड़े या स्पा ट्रीटमेंट. 

7. वही करें जो आपको सच में पसंद हो – अगर आपको दौड़ना पसंद नहीं, तो खुद को मजबूर न करें. आप डांस कर सकते हैं, तैराकी कर सकते हैं, योग कर सकते हैं या साइकिलिंग कर सकते हैं. ऐसी एक्टिविटी चुनें जिसमें आपको मजा आए. जब आप आनंद लेते हैं, तो उसे लंबे समय तक जारी रखना आसान होता है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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नहाते वक्त पेशाब आना क्या खराब सेहत की निशानी? प्रेमानंद महाराज ने बता दी इस दिक्कत की हकीकत

नहाते वक्त पेशाब आना क्या खराब सेहत की निशानी? प्रेमानंद महाराज ने बता दी इस दिक्कत की हकीकत


Is Urinating In The Shower A Health Problem: नहाते समय यूरिन आने की दिक्कत को हम सामान्य मानकर टाल देते हैं. इसको लेकर आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज जी ने विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि यह दिक्कत यूं ही नहीं होती, इसके पीछे कारण होते हैं. उनका कहना है कि जैसे ही व्यक्ति नहाना शुरू करता है, शरीर आराम की मुद्रा में चला जाता है. शरीर जब रिलैक्स होता है तो दबाव रिलीज करने की प्रक्रिया शुरू होती है. यह कभी यूरिन के रूप में, कभी थकान के रूप में और कभी तनाव के रूप में दिखाई देता है. उनके अनुसार नहाना केवल शरीर को साफ करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें शरीर, मन और चेतना भी जुड़ी होती है. पानी का स्पर्श और उससे मिलने वाला आराम इस प्रतिक्रिया को सक्रिय कर सकता है.

चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर साइंस और डॉक्टर क्या कहते हैं. क्या यह आदत सामान्य है या फिर आपकी सेहत को लेकर कोई गंभीर चेतावनी है, जिस पर आपको ध्यान देना चाहिए?

क्या इससे कोई बीमारी होती है?

नहाते वक्त पेशाब आना कई लोगों के लिए सामान्य बात लग सकती है, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स इसे लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद इस आदत को लेकर चर्चा तेज हो गई. डॉक्टरों का कहना है कि खासकर महिलाओं के लिए शॉवर में खड़े होकर पेशाब करना लंबे समय में नुकसानदेह हो सकता है.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बहते पानी की आवाज दिमाग को यूरिन से जोड़ सकती है. बार-बार ऐसा करने से ब्लैडर उस साउंड के साथ कंडीशन हो सकता है, जिससे अचानक यूरिन की तीव्र इच्छा या लीकेज की समस्या बढ़ सकती है. ओबी-जीवाईएन डॉ. एम्मा कुरेशी ने चेतावनी दी है कि यह आदत पेल्विक फ्लोर मसल्स को कमजोर कर सकती है, क्योंकि खड़े होकर पेशाब करना शरीर की नेचुरल पोजीशन नहीं है. इसलिए बेहतर यूरिनरी हेल्थ के लिए बैठकर पेशाब करना अधिक उचित माना जाता है. पुरुषों के लिए भी, खासकर बढ़ती उम्र में, बैठकर पेशाब करने से ब्लैडर अधिक आराम से खाली हो सकता है. हाइजीन के लिहाज से भी यह आदत पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जाती. अगर बाथरूम साझा है तो बैक्टीरिया सतह पर रह सकते हैं.

New York Post की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि बेहतर यूरिनरी हेल्थ के लिए बैठकर पेशाब करें, पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज जैसे केगेल्स करें और अगर बार-बार अर्जेंसी या लीकेज हो तो डॉक्टर से सलाह लें. छोटी-सी सुविधा भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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किस बीमारी से जूझ रहे रिंकू सिंह के पिता, जिसके लिए छोड़ा टी-20 वर्ल्ड कप, यह कितनी खतरनाक?

किस बीमारी से जूझ रहे रिंकू सिंह के पिता, जिसके लिए छोड़ा टी-20 वर्ल्ड कप, यह कितनी खतरनाक?


What Illness Is Rinku Singh’s Father Suffering From: भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह ने पारिवारिक आपात स्थिति के कारण टीम कैंप छोड़ दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता खचंद्र सिंह गंभीर रूप से बीमार हैं और इसी वजह से रिंकू को अचानक घर लौटना पड़ा. हालांकि बीसीसीआई की ओर से आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि उनके पिता स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे हैं.

बताया जा रहा है कि पिछले एक साल से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन हाल के दिनों में उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी हालत बेहद नाजुक है और वे ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं. इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए रिंकू सिंह ने टीम से अलग होने का फैसला किया.

कितनी खतरनाक है बीमारी?

लिवर कैंसर को गंभीर बीमारियों में गिना जाता है, खासकर जब यह चौथे चरण में पहुंच जाता है. स्टेज-4 का मतलब होता है कि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल चुका है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है और स्थिति बेहद संवेदनशील बन जाती है. ऐसे में मरीज को गहन चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ती है. रिंकू हाल ही में टीम के साथ चेन्नई पहुंचे थे, लेकिन पिता की बिगड़ती हालत की खबर मिलते ही अगली सुबह वापस लौट गए. उनकी उपलब्धता अब जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले अहम टी-20 मुकाबले के लिए संदिग्ध मानी जा रही है. 

कितना खतरनाक है लिवर कैंसर?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली मायो क्लिनिक के अनुसार, लिवर कैंसर वह बीमारी है जिसकी शुरुआत लिवर की सेल्स से होती है. लिवर पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में, डायफ्राम के नीचे और पेट के ऊपर स्थित एक महत्वपूर्ण अंग है. शरीर में यह कई जरूरी काम करता है, जैसे खून को साफ करना, पाचन में मदद करना और पोषक तत्वों को स्टोर करना. लिवर में कई तरह के कैंसर विकसित हो सकते हैं, लेकिन सबसे आम प्रकार हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा है, जो लिवर की मुख्य सेल्स यानी हेपेटोसाइट्स से शुरू होता है. इसके अलावा इंट्राहेपेटिक कोलैंजियोकार्सिनोमा और हेपेटोब्लास्टोमा जैसे अन्य प्रकार भी होते हैं, हालांकि ये अपेक्षाकृत कम देखे जाते हैं. कई मामलों में कैंसर लिवर से शुरू नहीं होता, बल्कि शरीर के किसी दूसरे हिस्से जैसे कोलन, फेफड़े या ब्रेस्ट से फैलकर लिवर तक पहुंचता है. ऐसे मामलों को मेटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है और इसका नाम उस अंग के आधार पर रखा जाता है, जहां से इसकी शुरुआत हुई थी.

क्या होते हैं इसके लक्षण?

प्राथमिक लिवर कैंसर के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. जब बीमारी बढ़ने लगती है, तब कुछ संकेत सामने आ सकते हैं. इनमें बिना कोशिश के वजन कम होना, भूख न लगना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, मतली या उल्टी, लगातार कमजोरी और थकान शामिल हैं. कुछ लोगों में पेट में सूजन, त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ जाना जिसे पीलिया कहा जाता है, और मल का सफेद या फीका दिखना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. यदि ऐसे किसी भी लक्षण का अनुभव हो जो चिंता पैदा करे या लंबे समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है. शुरुआती जांच और सही इलाज से स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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