क्या सच में इंजेक्शन में एयर बाकी रह जाने से हो जाती है मौत, क्या है इसके पीछे का सच?

क्या सच में इंजेक्शन में एयर बाकी रह जाने से हो जाती है मौत, क्या है इसके पीछे का सच?


Injection Air Bubble Myth Or Fact: इंजेक्शन लगने से पहले डॉक्टर या नर्स अक्सर सिरिंज में मौजूद हवा को बाहर निकालते दिखते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि अगर इंजेक्शन में थोड़ी-सी हवा रह जाए, तो क्या इससे मौत हो सकती है? फिल्मों और सोशल मीडिया में भी इस बात को लेकर तरह-तरह की बातें कही जाती हैं. लेकिन सच यह है कि हर बार सिरिंज में हवा का छोटा-सा बुलबुला दिखना जानलेवा नहीं होता. मामला इस बात पर निर्भर करता है कि हवा कितनी मात्रा में शरीर में गई है और वह शरीर के किस हिस्से तक पहुंची है.

क्या सच में वह जानलेवा होता है?

दरअसल, जब हवा का बुलबुला नस या आर्टरीज में पहुंचकर खून के बहाव में रुकावट पैदा करता है, तो इस स्थिति को एयर एम्बोलिज्म कहा जाता है. यह तब खतरनाक हो सकता है, जब हवा की मात्रा ज्यादा हो या वह शरीर के किसी संवेदनशील हिस्से, जैसे ब्रेन, हार्ट या लंग्स तक पहुंच जाए. यही वजह है कि डॉक्टर इंजेक्शन या ड्रिप लगाते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि हवा शरीर में न जाए.

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कब होती है इंसान को दिक्कत?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट Medicalnewstoday की रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसों में बहुत कम मात्रा में पहुंची हवा कई बार शरीर खुद ही संभाल लेता है और उससे कोई गंभीर नुकसान नहीं होता. हालांकि, अगर हवा सीधे ब्लड सर्कुलेशन में ज्यादा मात्रा में चली जाए, तो दिक्कत बढ़ सकती है. यही स्थिति एयर एम्बोलिज्म का रूप ले सकती है. रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि अगर हवा दिमाग तक पहुंच जाए, तो यह जानलेवा हो सकती है. कुछ मामलों में बहुत कम मात्रा में हवा भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है, लेकिन ऐसा आमतौर पर सामान्य इंजेक्शन लगने के दौरान नहीं होता.

किन मेडिकल प्रक्रियाओं में यह खतरनाक?

असल में, एयर एम्बोलिज्म का खतरा ज्यादा उन मेडिकल प्रक्रियाओं में माना जाता है, जहां हवा के सीधे खून की नसों तक पहुंचने की संभावना होती है. जैसे कुछ तरह की सर्जरी, सेंट्रल लाइन, डायलिसिस या बड़े मेडिकल प्रोसीजर. यही वजह है कि सामान्य मसल इंजेक्शन और नस में लगने वाले कुछ इंजेक्शन के बीच फर्क समझना जरूरी है. हर इंजेक्शन में हवा का छोटा बुलबुला दिखना मौत का संकेत नहीं होता. इंजेक्शन में थोड़ी हवा दिखने भर से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह भी सही है कि शरीर में हवा जाने को पूरी तरह हल्के में नहीं लिया जाता. डॉक्टर और नर्स इसी वजह से सावधानी बरतते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Pushups Benefits: रोज 100 पुशअप्स मारने पर कितने दिन में बन जाएगी बॉडी, क्या कहते हैं जिम एक्सप

Pushups Benefits: रोज 100 पुशअप्स मारने पर कितने दिन में बन जाएगी बॉडी, क्या कहते हैं जिम एक्सप


How Long Does It Take To Build Muscle With Pushups:  आजकल हर कोई फिट दिखना चाहता है. इसके लिए कई लोग जिम जा रहे हैं, कई लोग घर पर तरह-तरह की एक्सरसाइज कर रहे हैं और कई लोग कई-कई किलोमीटर की दौड़ लगा रहे हैं, ताकि खुद को इस बदलती लाइफस्टाइल में भी फिट रख सकें. ऐसे में सवाल आता है कि आखिर जो लोग रोज पुशअप्स मारते हैं, उनको अपनी बॉडी बनाने में कितना समय लगता है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं और कैसे आप अपनी बॉडी पुशअप्स मारकर बना सकते हैं.

क्या पुशअप्स बॉडी बनाने के लिए बेहतर विकल्प है?

रोज 100 पुशअप्स मारने से बॉडी कितने दिनों में बनेगी, यह जानने से पहले यह जान लेते हैं कि आखिर पुशअप्स मारने से बॉडी बनती है या फिर नहीं बनती है. हेल्थ और फिटनेस पर जानकारी देने वाली वेबसाइट vinmec के अनुसार, यह आसान लेकिन काफी असरदार एक्सरसाइज है. इसको करने के लिए आपको किसी जिम या फिर किसी खास जगह की जरूरत नहीं होती है, आप इसको आसानी से कहीं भी कर सकते हैं. इसको कई फिटनेस रूटीन में शामिल किया जाता है और इसे अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है. यह उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है, जो नियमित रूप से खेलकूद या फिटनेस गतिविधियों में भाग लेते हैं. इससे कंधों, छाती और बाहों की ताकत बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

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रोज 100 पुशअप्स मारने से बॉडी कितने दिनों में बनेगी?

रिपोर्ट के अनुसार, अगर आप शुरुआती हैं, तो दूसरे हफ्ते तक आपको अपनी बाहों, छाती और शरीर के दूसरे बड़े हिस्सों में बदलाव महसूस होने लग सकता है. हालांकि, अगर 100 पुशअप्स आपके लिए पहले से ही आसान हैं, तो इससे ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा और यह एक्सरसाइज ताकत बढ़ाने के बजाय एंड्योरेंस ट्रेनिंग जैसी हो सकती है.

क्या होते हैं इसके फायदे?

अगर आप इसको डेली करते हैं, तो इससे आपके वर्कआउट रूटीन में काफी सुधार होता है और ट्राइसेप्स, पेक्स और कंधे की मांसपेशियों के विकास में मदद मिलती है. हार्ट हेल्थ और बॉडी की स्टैमिना बेहतर हो सकती है. हालांकि, यह ध्यान रखें कि अगर आपसे एक बार में 100 नहीं लगते, तो आप इन्हें चार या फिर पांच सेट में कर सकते हैं.

क्या होती है दिक्कत?

कई रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र किया गया है कि इससे शरीर के आगे के हिस्से यानी छाती और ट्राइसेप्स की मांसपेशियां ज्यादा मजबूत हो जाती हैं, लेकिन पीठ के हिस्से में इसका ज्यादा असर नहीं दिखता है, जिसके कारण शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है. यही कारण है कि एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि आप पुश-अप्स के साथ पुल-अप्स, डिप्स और स्क्वैट्स को भी जोड़ सकते हैं, जिससे शरीर को संतुलन मिलता है. अगर 100 पुश-अप्स करना आपके लिए मुश्किल है, तो आपकी मांसपेशियों को ज्यादा आराम की जरूरत हो सकती है. ताकत बढ़ाने के लिए, आमतौर पर मांसपेशियों को कम से कम 48 घंटे आराम देने की सलाह दी जाती है. पर्याप्त आराम के बिना इन मांसपेशियों पर लगातार जोर डालने से चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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किन लोगों को होती है अलका याज्ञनिक वाली बीमारी? जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

किन लोगों को होती है अलका याज्ञनिक वाली बीमारी? जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके


Alka Yagnik viral video Padma Bhushan: रोडवेज का सफर हो या फिर अकेले में कुछ गुनगुनाने का मन हो, तो हमारे जेहन में एक नाम आता है अलका याज्ञनिक का, जिन्होंने हमें तमाम कल्ट सॉन्ग्स दिए हैं. फिर चाहे वह ताल से ताल मिला हो या फिर दिल ने ये कहा है दिल से, ऐसे तमाम गाने हैं, जो आज भी लोगों के दिलों और दिमाग में छाए रहते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि आपके दिलों पर राज करने वाली यह सिंगर एक गंभीर बीमारी से गुजर रही है.

दरअसल 23 जून को भारत सरकार की तरफ से दिए जाने वाले तीसरे सबसे बड़े पुरस्कार पद्म भूषण से उनको नवाजा गया. इसको लेकर उन्होंने एक भावुक नोट शेयर किया. इसमें उन्होंने अपनी हेल्थ के बारे में भी बताया.

किस बीमारी से गुजर रही हैं अलका याज्ञनिक

सिंगर ने म्यूजिक में योगदान के लिए आभार जताने के साथ-साथ हेल्थ को लेकर ऐसा अपडेट दिया, जिसने उनके फैंस को दुखी कर दिया. साल 2024 में उन्होंने अपनी इस रेयर बीमारी के बारे में लोगों को जानकारी दी थी, जिसका नाम सेंसोरिन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस है. वह अभी तक इस बीमारी से उबर नहीं पाई हैं. पिछले कुछ समय से वह लाइमलाइट से दूर ही रहती हैं. जब उनको पद्म भूषण से नवाजा जा रहा था, तो 60 वर्षीय सिंगर एक वायरल वीडियो में अटेंडेंट की मदद लेती दिखीं, जिसने सभी को भावुक कर दिया. चलिए आपको बताते हैं कि यह बीमारी कितनी खतरनाक है और इसके लक्षण और इलाज क्या हैं. 

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कितना खतरनाक है सेंसोरिन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस

सेंसोरिन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस एक रेयर हियरिंग डिसऑर्डर होता है, जिसमें इंसान की सुनने की क्षमता काफी प्रभावित हो जाती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अलका को यह बीमारी अचानक एक वायरल अटैक की वजह से हुई थी, जिसे सिंगर ने अपनी जिंदगी का एक झटका बताया था और फैंस से दुआ करने की अपील की थी. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के अनुसार, यह तब किसी को होता है, जब ध्वनि आपके भीतरी कान तक नहीं पहुंच पाती. यह स्थिति अचानक भी हो सकती है या फिर इंसान इसकी चपेट में धीरे-धीरे भी आ सकता है. यह इंसान में जन्म के साथ मौजूद हो सकता है और बाद में भी इस तरह की दिक्कत हो सकती है.

क्या इसका इलाज संभव है

clevelandclinic की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक इस रेयर बीमारी का इलाज संभव नहीं है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि आप सुन नहीं सकते. इसके लिए हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट या अन्य उपकरण आपको फिर से सुनने में मदद कर सकते हैं. अगर इसके होने के कारणों की बात करें, तो इसमें इंफेक्शन, चोट और तेज ध्वनि के संपर्क शामिल होते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सुबह के नाश्ते में पराठा खाना पड़ सकता है महंगा, एक्सपर्ट्स के मुताबिक होते हैं ये पांच बड़े नुकसान

सुबह के नाश्ते में पराठा खाना पड़ सकता है महंगा, एक्सपर्ट्स के मुताबिक होते हैं ये पांच बड़े नुकसान


एक्सपर्ट्स का कहना है कि पराठा अपने आप में खराब खाना नहीं है, लेकिन इसे किस तरह बनाया जाता है, किसके साथ खाया जाता है, आपकी लाइफस्टाइल कैसी है यह तय करता है कि इसका शरीर पर क्या असर होगा.



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पैरों में इन लक्षणों के दिखने का मतलब विटामिन बी12 की कमी, तुरंत भागें डॉक्टर के पास

पैरों में इन लक्षणों के दिखने का मतलब विटामिन बी12 की कमी, तुरंत भागें डॉक्टर के पास


Foot Symptoms Of Vitamin B12 Deficiency: विटामिन बी12 शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्वों में से एक है. यह न केवल रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में मदद करता है, बल्कि नसों और ब्रेन के बेहतर कामकाज के लिए भी आवश्यक माना जाता है. इसकी कमी होने पर थकान, कमजोरी और मूड में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन कई बार इसके शुरुआती संकेत पैरों में भी नजर आने लगते हैं, जिन्हें लोग अक्सर सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. 

क्या आपके पैर हमेशा ठंडे रहते हैं?

अगर आपके पैर हमेशा ठंडे रहते हैं, जबकि मौसम सामान्य हो, तो यह विटामिन बी12 की कमी का संकेत हो सकता है. बी12 की कमी से रेड ब्लड सेल्स का निर्माण प्रभावित होता है, जिससे शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन और ब्लड का फ्लो कम हो सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार, खराब ब्लड फ्लो के कारण पैरों में लगातार ठंडापन महसूस हो सकता है. क्लिवलैंड क्लिनिक  के अनुसार, बी12 की कमी से जुड़े एनीमिया और नसों की समस्या ऐसे लक्षण पैदा कर सकती है. 

पीलापन भी हो सकता है कारण

पैरों की त्वचा का सामान्य से ज्यादा पीला या हल्का पीला दिखाई देना भी चेतावनी का संकेत हो सकता है. जब शरीर पर्याप्त स्वस्थ रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता, तो एनीमिया की स्थिति पैदा हो सकती है. अमेरिकन जर्नल ऑफ हेमेटोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, विटामिन बी12 की कमी से होने वाले एनीमिया में त्वचा का रंग फीका पड़ सकता है, जिसका असर पैरों जैसे हिस्सों पर भी नजर आ सकता है. 

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संतुलन बिगड़ना या बार-बार लड़खड़ाना

चलते समय संतुलन बिगड़ना या बार-बार लड़खड़ाना भी इस कमी से जुड़ा हो सकता है. विटामिन बी12 नसों के चारों ओर मौजूद सुरक्षात्मक परत माइलिन को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसार, लंबे समय तक बी12 की कमी रहने पर नसों के सिग्नल प्रभावित हो सकते हैं, जिससे चलने-फिरने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में दिक्कत हो सकती है.

पैरों में जलन की शिकायत 

कई लोगों को पैरों में जलन की शिकायत भी रहती है. बिना किसी चोट या स्पष्ट कारण के अगर पैरों में बार-बार जलन महसूस हो रही है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, कम बी12 स्तर वाले लोगों में हाथों और पैरों में जलन जैसी समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी गई है. यह नसों के प्रभावित होने का संकेत हो सकता है.

पैरों में झुनझुनी या सुई चुभने जैसा एहसास

इसके अलावा पैरों में झुनझुनी या सुई चुभने जैसा एहसास विटामिन बी12 की कमी का सबसे आम लक्षण माना जाता है. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के अनुसार, लंबे समय तक कमी बने रहने पर नसों को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है. इसलिए अगर पैरों में बार-बार झुनझुनी, सुन्नपन, जलन, ठंडापन या संतुलन की समस्या महसूस हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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