किन लोगों की हाइट अचानक रह जाती है कम, किस दिक्कत की वजह से होता है ऐसा?

किन लोगों की हाइट अचानक रह जाती है कम, किस दिक्कत की वजह से होता है ऐसा?


Why Do People Lose Height As They Age: जब हम अपनी जवानी यानी उम्र के बीच के पड़ाव में पहुंचते हैं, तब तक हमारी हाइट एक निश्चित स्तर तक पहुंच जाती है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे इसमें कमी आने लगती है.  यह बदलाव इतना धीरे होता है कि कई लोगों को इसका पता भी नहीं चलता. इसको हम एक उदाहरण से समझते हैं कि, एक पुरुष 35 साल की उम्र की तुलना में 80 साल की उम्र में करीब आधा इंच छोटा हो सकता है. वहीं, एक महिला जो कभी 5 फीट 4 इंच की थी, 90 साल की उम्र में 5 फीट 2 इंच तक रह सकती है. 

अधिकतर लोगों में हाइट में यह कमी 40 से 50 साल की उम्र से धीरे-धीरे शुरू होती है, लेकिन 70 साल के बाद यह तेज़ी से बढ़ सकती है.  डॉक्टर्स के अनुसार, उम्र बढ़ने पर रीढ़ की हड्डियों में बदलाव, डिस्क पतली होना और पोस्टर बिगड़ना हाइट घटने के आम कारण हैं.  लेकिन अगर 1 इंच से ज्यादा हाइट कम हो जाए, तो यह सामान्य नहीं माना जाता और किसी गहरी समस्या की ओर इशारा करता हैय 

क्या हाइट कम होना ऑस्टियोपोरोसिस का लक्षण है?

रुथ जेसन हिकमैन, एमडी, रूमेटोलॉजी, ऑटोइम्यून डिजीज और न्यूरोलॉजी एक्सपर्ट बताती हैं कि कई बार हाइट कम होना ऑस्टियोपोरोसिस का शुरुआती संकेत हो सकता है.
इस बीमारी में हड्डियां कमजोर और पतली हो जाती हैं, जिससे हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है, रीढ़ की हड्डियां सिकुड़ने लगती हैं और शरीर का ढांचा झुकने लगता है.  अक्सर लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस का पता तब चलता है जब हाइट कम हो जाती है या अचानक फ्रैक्चर हो जाता है.  एक स्टडी के अनुसार, जिन पुरुषों की हाइट 3 सेंटीमीटर से ज्यादा कम हुई, उनमें हिप फ्रैक्चर का जोखिम दोगुना पाया गया. 

ऑस्टियोपोरोसिस से हाइट क्यों घटती है?

verywellhealth के अनुसार, इसके कई कारण हैं, जिनमें  कम्प्रेशन फ्रैक्चर पहले नम्बर पर आता है, जिसमें  कमजोर हड्डियां आसानी से हल्की दरार या दबाव फ्रैक्चर का शिकार हो जाती हैं. इन फ्रैक्चर में अक्सर तेज दर्द नहीं होता, इसलिए लोग इन्हें सामान्य पीठ दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन इससे रीढ़ की हड्डियां  सिकुड़ जाती हैं और हाइट कम होने लगती है. दूसरे नम्बर पर  काइफोसिस आता है, इसमें ऊपरी पीठ गोल या झुकी हुई दिखने लगती है. ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से जब रीढ़ की हड्डियां कमजोर होती हैं, तो शरीर आगे की ओर झुकने लगता है, जिससे हाइट कम दिखती है. 

क्या खोई हुई हाइट वापस आ सकती है?

ज्यादातर मामलों में ऑस्टियोपोरोसिस से जो हाइट कम हो चुकी है, वह वापस नहीं आती, लेकिन आप आगे हाइट कम होने से जरूर बच सकते हैं. इसके लिए आपको लाइफस्टाइल में बदलाव,धूम्रपान छोड़ें और नियमित एक्सरसाइज करने की जरूरत होती है. 

इसे भी पढ़ें- Root Canal Benefits: सिर्फ दांत ही नहीं बचाता रूट कनाल, इन बीमारियों से भी दिलाता है राहत

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कब-कैसे और कितनी देर इस्तेमाल करें अंगीठी-हीटर, जिससे न घुटें सांसें? जानें डॉक्टर की सलाह

कब-कैसे और कितनी देर इस्तेमाल करें अंगीठी-हीटर, जिससे न घुटें सांसें? जानें डॉक्टर की सलाह


सर्दियों की शुरुआत के साथ ही लोग खुद को गर्म रखने के लिए तरह-तरह के उपाय अपनाने लगते हैं. शरीर को गर्म रखने के लिए जहां गर्म कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, वहीं कमरे का तापमान बढ़ाने के लिए हीटर, ब्लोअर या अंगीठी का सहारा लिया जाता है. इससे कमरा बाहर की ठंड की तुलना में जरूर गर्म हो जाता है, लेकिन कई बार यह तरीका जान के लिए खतरा भी बन सकता है.

बंद कमरे में आग या ब्लोअर जलाने से दम घटने का खतरा

हर साल सर्दियों में ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जहां लोग सोते-सोते दम घुटने से मौत के शिकार हो जाते हैं. बीते साल भी इसी तरह की घटना दर्ज हुई थी, जबकि इस वर्ष जनवरी और सितंबर में भी कई लोगों की जान गई है. एबीपी लाइव की टीम को जानकारी देते हुए पश्चिमी दिल्ली के बड़े अस्पतालों में से एक मग्गो हॉस्पिटल के वरिष्ठ डॉ. अमन ने बताया कि, जब बंद कमरे में अंगीठी या कोई भी जलने वाली वस्तु जलाई जाती है, तो वह कमरे की ऑक्सीजन तेजी से खत्म कर देती है. बाहर से ताज़ी हवा न आने की वजह से ऑक्सीजन की मात्रा लगातार कम होती जाती है और इस दौरान आग से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर में सांस के ज़रिए प्रवेश करती है, जो बेहद जानलेवा होती है.

कार्बन मोनोऑक्साइड से क्यों होता है डीप कोमा?

जब कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर में जाती है तो यह हीमोग्लोबिन से चिपक जाती है. इससे कार्बोक्सी-हीमोग्लोबिन बनता है, जिसकी मात्रा बढ़ने पर व्यक्ति गहरी नींद में चला जाता है. यह स्थिति डीप कोमा जैसी होती है और कई बार व्यक्ति की नींद कभी खुलती नहीं—वह सोते-सोते ही मौत का शिकार हो जाता है 

कैसे बचें इस खतरे से? ध्यान रखें ये जरूरी बातें

  • जहां अलाव या अंगीठी जला रहे हों, वह कमरा पूरी तरह बंद न रखें और एक बाल्टी पानी अवश्य रखें.
  • कमरे में कई लोग सो रहे हों तो सोने से पहले आग अवश्य बुझा दें.
  • अंगीठी जलने से कमरे की ऑक्सीजन कम होती है—इसे आदत न बनाएं.
  • बंद कमरे में रोज अंगीठी या हीटर जलाने से सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत सावधान हो जाएं.
  • हीटर या ब्लोअर चलाते समय थोड़ी-थोड़ी देर के लिए कमरा खोलकर हवा आने दें.
  • हीटर के पास जलने वाली वस्तुएं न रखें.
  • सोने से पहले हीटर अवश्य बंद कर दें, यह जान बचाने के लिए जरूरी है.
  • कमरे में पानी का बर्तन रखें ताकि हवा ड्राई न हो.
  • मजबूरी में हीटर या ब्लोअर का उपयोग करना पड़े तो गुनगुना पानी, सूप या चाय पीते रहें.
  • स्किन को ड्राईनेस से बचाने के लिए मॉइश्चराइज़र का उपयोग करते रहें.

Vitamin Deficiency Liver Risk: बॉडी में कम हुए ये विटामिन तो लिवर हो जाएगा फैटी, तुरंत कर लें बचने की तैयारी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या विटामिन B12 की कमी से लड़खड़ाते हैं आपके पैर? ये 3 सूप दे सकते हैं तुरंत राहत

क्या विटामिन B12 की कमी से लड़खड़ाते हैं आपके पैर? ये 3 सूप दे सकते हैं तुरंत राहत


अगर आपको भी लगता है की चलते समय पैर लड़खड़ाने लगें हैं, शरीर का बैलेंस बिगड़ने लगा है या पैरों में तेज या हल्की झनझनाहट महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ये लक्षण अक्सर विटामिन B12 की कमी का संकेत होते हैं. विटामिन B12 शरीर की नसों को मजबूत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जब उम्र बढ़ती है तो ये दिक्कत अक्सर हमारे सामने आती है जिसे सरकपेनिअ कहते हैं. विटामिन B12 की कमी होने पर तंत्रिका तंत्र कमजोर होने लगता है, जिससे चलने में अस्थिरता, पैरों का डगमगाना, सुन्नपन और थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं कि सही खानपान और खासतौर पर B12 से भरपूर सूप नसों की मरम्मत में तेजी लाते हैं और शरीर को अंदर से मजबूती देते हैं. यहाँ जानिए 3 ऐसे सूप जो B12 की कमी से होने वाली पैरों की कमजोरी और लड़खड़ाहट को कम करने में मदद कर सकते हैं.

चिकन बोन ब्रॉथ सूप

शरीर में विटामिन B12 की पूर्ति करने के लिए चिकन बोन ब्रॉथ सूप काफी असरदार साबित होता है. चिकन बोन ब्रॉथ सूप चिकन की हड्डियों को लंबे समय तक धीमी आंच पर उबालकर बनाया जाता है और यह नसों की मजबूती के लिए बेहद असरदार माना जाता है. इसमें विटामिन B12, कोलेजन और जरूरी अमीनो एसिड भरपूर होते हैं जो नसों की टूट फूट की मरम्मत करते हैं और मांसपेशियों को भीतर से ताकत देते हैं. इस सूप का नियमित सेवन पैरों की झनझनाहट, कमजोरी, डगमगाहट और बैलेंस की समस्या को कम करता है क्योंकि यह शरीर को वह पोषण देता है जो नसों को दोबारा मजबूत बनाने के लिए जरूरी होता है.

पालक का सूप 

पालक का सूप शरीर को स्वस्थ और रोग मुक्त रखने के लिए बेहद कारगर है. पालक पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी है जिसमें नाइट्रेट और आयरन की मात्रा काफी अधिक होती है, जो शरीर में रक्त के प्रवाह को बढ़ाकर मांसपेशियों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करते हैं. इसी कारण पालक का सूप पैरों की कमजोरी, थकान और सुन्नपन जैसी समस्याओं में तेजी से फायदा देता है. इसमें मौजूद आयरन, मैग्नीशियम और नाइट्रेट्स पैरों तक खून की आपूर्ति बढ़ाते हैं, रक्त वाहिकाओं को फैलाते हैं और मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं. नतीजा यह होता है की 10–15 दिनों में ही चलने में स्थिरता, ऊर्जा और मांसपेशियों की ताकत में सुधार महसूस होने लगता है. पालक का सूप सुबह या शाम के समय पीना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है.

अंडे के यॉल्क का सूप 

अंडे का यॉल्क विटामिन B12 से भरपूर होता है जो शरीर को तुरंत ताकत पहुंचाता है. यह दिमाग की तेजी के लिए भी असरदार माना जाता है. अंडे एक ऐसी खाद्य सामग्री है जिसे हमेशा से ही ताकत और शरीर को मजबूत करने वाली खाद्य सामग्री में रखा जाता है. अंडे के सेवन से हमारे शरीर और विशेषकर पैरों की मांसपेशियों में stiffness और कमजोरी कम होती है, हमारा नर्व फंक्शन बेहतर होता है और चलने में stability और नियंत्रण बढ़ता है. इसलिए हमें हफ्ते में 2–3 बार अंडे या यॉल्क का सूप पीना चाहिए. बच्चों को कम मात्रा में पिला सकते हैं

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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गर्म पानी और शहद पीने से होते हैं बड़े फायदे, टॉप-10 तुरंत कर लें नोट

गर्म पानी और शहद पीने से होते हैं बड़े फायदे, टॉप-10 तुरंत कर लें नोट


गर्म पानी और शहद पीने से गले की खराश और सर्दी-खांसी में राहत मिलती है. शहद अपने नेचुरल एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण गले की जलन और खराश को शांत करता है. गुनगुना पानी बलगम को ढीला करता है, जिससे सर्दी-खांसी में जल्दी आराम मिलता है.

गर्म पानी और शहद पीने से पेट की गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है. शहद के एंजाइम पाचन क्रिया को आसान बनाते हैं, जिससे खाना जल्दी पचता है.

गर्म पानी और शहद पीने से पेट की गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है. शहद के एंजाइम पाचन क्रिया को आसान बनाते हैं, जिससे खाना जल्दी पचता है.

गुनगुना पानी और शहद मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं. इससे शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट धीरे-धीरे कम होने लगती है. साथ ही मीठा खाने की तलब भी कंट्रोल में रहती है.

गुनगुना पानी और शहद मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं. इससे शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट धीरे-धीरे कम होने लगती है. साथ ही मीठा खाने की तलब भी कंट्रोल में रहती है.

शहद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं. यह मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करता है और शरीर को इंफेक्शन से लड़ने के लिए तैयार रखता है.

शहद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं. यह मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करता है और शरीर को इंफेक्शन से लड़ने के लिए तैयार रखता है.

नियमित गर्म पानी और शहद पीने से शरीर के अंदर मौजूद टॉक्सिन्स निकलते हैं. इसका असर स्किन पर साफ दिखता है, जिससे चेहरा चमकदार बनता है और पिंपल्स जैसी समस्याएं कम होती हैं.

नियमित गर्म पानी और शहद पीने से शरीर के अंदर मौजूद टॉक्सिन्स निकलते हैं. इसका असर स्किन पर साफ दिखता है, जिससे चेहरा चमकदार बनता है और पिंपल्स जैसी समस्याएं कम होती हैं.

गर्म पानी और शहद बदलते मौसम और लाइफस्टाइल की वजह से जमा हुए हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. साथ ही लिवर भी हेल्दी रहता है.

गर्म पानी और शहद बदलते मौसम और लाइफस्टाइल की वजह से जमा हुए हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. साथ ही लिवर भी हेल्दी रहता है.

सुबह-सुबह यह ड्रिंक शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और शहद की नेचुरल शुगर तुरंत एनर्जी का संचार करती है. आप पूरे दिन तरोताजा महसूस करते हैं.

सुबह-सुबह यह ड्रिंक शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और शहद की नेचुरल शुगर तुरंत एनर्जी का संचार करती है. आप पूरे दिन तरोताजा महसूस करते हैं.

शहद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और शरीर में सूजन कम करते हैं. यह कई तरह की बीमारियों से बचाव में मददगार है.

शहद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और शरीर में सूजन कम करते हैं. यह कई तरह की बीमारियों से बचाव में मददगार है.

अगर रात को सोने से पहले गुनगुने पानी में थोड़ा शहद मिलाकर पिया जाए, तो यह तनाव कम करता है और मेलाटोनिन के स्तर को बढ़ाकर नींद को गहरा और सुकून भरा बनाता है.

अगर रात को सोने से पहले गुनगुने पानी में थोड़ा शहद मिलाकर पिया जाए, तो यह तनाव कम करता है और मेलाटोनिन के स्तर को बढ़ाकर नींद को गहरा और सुकून भरा बनाता है.

शहद के गुण दिल की सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं. नियमित गर्म पानी और शहद पीने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार होता है और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है.

शहद के गुण दिल की सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं. नियमित गर्म पानी और शहद पीने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार होता है और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है.

Published at : 10 Dec 2025 06:48 PM (IST)

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सर्दियों में बालों के झड़ने से परेशान तो ये घरेलू उपाय करेंगे मदद, बढ़ जाएगी ग्रोथ

सर्दियों में बालों के झड़ने से परेशान तो ये घरेलू उपाय करेंगे मदद, बढ़ जाएगी ग्रोथ


सर्दियों के मौसम में बाल झड़ने की समस्या से अक्सर लोग परेशान होते हैं. उनका कहना होता है की जैसे ही सर्दियों का मौसम आता है तो तेजी से बाल झड़ने लगते हैं जिसकी सबसे बड़ी वजह है ठंडी और सूखी हवा स्कैल्प की नमी खींच लेती है. इससे सिर की त्वचा ड्राई होकर रूसी बढ़ाती है, बालों की जड़ें कमजोर होने लगती हैं और हेयर फॉल तेज हो जाता है, ऊपर से गर्म पानी से बार बार बाल धोना, ओवर स्टाइलिंग और पोषण की कमी भी झड़ने को और बढ़ा देती है. इसलिए हमें सर्दियों में अपने बालों की एक्स्ट्रा केयर करनी चाहिए. यहां कुछ नुस्खे हैं जिसे अपनाकर आप काफी हद तक अपनी इस समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं और इन नुस्खों में शामिल चीजें आसानी से आपके घर में उपलब्ध होती है जिससे आपको ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी.

ग्रीन टी के इस्तेमाल से हेयर ग्रोथ बढ़ाएं

लोग ग्रीन टी का सेवन करते हैं, आमतौर पर वजन कम करने के लिए लेकिन आपको ये नहीं पता की जिस ग्रीन टी के कवर को आप उपयोग करने के बाद कूड़ा समझ के फेंक देते हो वो बालों की ग्रोथ के लिए बहुत फायदेमंद है. अगर आप उस कवर में बची हुई पट्टी को गरम पानी में मिलाकर अपने स्कैल्प पर लगाए और कुछ देर के लिए ऐसे ही लगे रहने दे फिर अपने बालों को अच्छी तरह से धो. ग्रीन टी एंटी ऑक्सीडेंट्स तत्वों से भरपूर होती है जो हेयर ग्रोथ को बढ़ाने और बालों को झड़ने से रोकती है.

प्याज के रस से जड़ों को मजबूती दें

अगर आपको बालों को झड़ने से रोकना है तो प्याज का रस आपकी बहुत मदद कर सकता है. प्याज के रस में सल्फर होता है जो कोलेजन प्रोडक्शन बढ़ाकर नई हेयर ग्रोथ में मदद करता है. इससे आपके बालों की जो जड़ें होती हैं वो मजबूत हो जाती हैं. प्याज का रस स्कैल्प पर 20–25 मिनट लगाएं और फिर धो लें. इसे हफ्ते में 1 से 2 बार जरूर लगाएं.

आयरन और प्रोटीन वाले फूड बालों के लिए जरूरी

बालों की ग्रोथ को बढ़ाने और उन्हें टूटने से बचने के लिए आपको आयरन और प्रोटीन से भरपूर फूड प्रोडक्ट्स का सेवन करना चाहिए जिससे सर्दियों में बालों को मजबूत बनाया जा सके. पालक, मेथी और ब्रोकली जैसे आयरन वाले फूड, दाल, सोया, पनीर जैसे प्रोटीन स्रोत, बादाम और अखरोट जैसे ओमेगा 3 फूड, गाजर और चुकंदर सब्जियां और तिल गुड़ जैसे खून बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ रोज के खाने में शामिल करने से जड़ें मजबूत होती हैं, झड़ना कम होता है.

गर्म पानी से बाल धोने से बचें

सर्दियों में हम गर्म पानी से नहाते हैं लेकिन अगर आपके बाल कमजोर हैं और बहुत ज्यादा टूट रहे हैं तो आपको गर्म पानी को सिर पर डालने से बचना चाहिए क्योंकि गर्म पानी बालों की नमी को खींचकर उन्हें रुखा और बेजान बना देता है जिससे स्कैल्प ड्राई हो जाता है और सिर में डैंड्रफ जैसे बैक्टीरियल इन्फेक्शन होने का भी खतरा होता है.

नारियल के दूध से हेयर ग्रोथ में तेजी आती है

नारियल का दूध हमारी हेयर ग्रोथ के लिए काफी असरदार होता है. इसमें पर्याप्त मात्रा में आयरन और पोटैशियम होता है जो बालों को मजबूत बनाता है. इसे अपने स्कैल्प पर अच्छे से लगाएं और हो सके तो नारियल के दूध में थोड़ा नींबू निचोड़ ले जो बालों को बढ़ने और मजबूत करने में मदद करेगा.

 यह भी पढ़ें: Viral Infection Prevention: बार-बार हो रहा वायरल इंफेक्शन तो ये 12 स्टेप्स बचाएंगे आपको, डॉक्टर से जानें हर बात

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ये 5 तरीके अपना लिए तो सर्दियों में परेशान नहीं करेगा जोड़ों का दर्द, तुरंत मिलेगी राहत

ये 5 तरीके अपना लिए तो सर्दियों में परेशान नहीं करेगा जोड़ों का दर्द, तुरंत मिलेगी राहत


अक्सर सर्दियों के मौसम में प्यास कम लगती है लेकिन शरीर को पानी पहले जितना ही चाहिए होता है. पानी की कमी से जोड़ों में मौजूद सिनोवियल फ्लूइड सूखने लगता है, जिससे घर्षण बढ़ता है और दर्द व जकड़न अधिक महसूस होती है. दिनभर नियमित रूप से गुनगुना पानी पीने से जोड़ों के दर्द में कमी आती है, सूजन कम होती है और मांसपेशियों को आराम मिलता है.

सर्दियों के मौसम में तिल–गुड़, बादाम, अखरोट, मूंगफली, हल्दी वाला दूध, हरी सब्जियां, सोया, दालें जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ लेने से शरीर में सूजन कम होती है और हड्डियां–जोड़ अंदर से मजबूत बनते हैं.

सर्दियों के मौसम में तिल–गुड़, बादाम, अखरोट, मूंगफली, हल्दी वाला दूध, हरी सब्जियां, सोया, दालें जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ लेने से शरीर में सूजन कम होती है और हड्डियां–जोड़ अंदर से मजबूत बनते हैं.

आपको अगर शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो रहा हो तो उस जगह पर गर्म सेक करने से दर्द में तुरंत राहत मिलती है. आप कपड़े को गर्म करके या हॉट वॉटर बैग से सेक कर सकते हैं.

आपको अगर शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो रहा हो तो उस जगह पर गर्म सेक करने से दर्द में तुरंत राहत मिलती है. आप कपड़े को गर्म करके या हॉट वॉटर बैग से सेक कर सकते हैं.

स्किन नहीं, जोड़ों को भी चाहिए मॉइस्चर. ठंड की ड्राईनेस मांसपेशियों और जोड़ों को कड़ा बना देती है इसलिए सरसों, नारियल या तिल के तेल से 10 मिनट की हल्की मालिश stiffness कम करने, मांसपेशियों को गर्म रखने और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने में बहुत मदद करती है.

स्किन नहीं, जोड़ों को भी चाहिए मॉइस्चर. ठंड की ड्राईनेस मांसपेशियों और जोड़ों को कड़ा बना देती है इसलिए सरसों, नारियल या तिल के तेल से 10 मिनट की हल्की मालिश stiffness कम करने, मांसपेशियों को गर्म रखने और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने में बहुत मदद करती है.

सर्दियों के मौसम में शरीर में विटामिन डी की मात्रा कम हो सकती है जिससे मांसपेशियों में जकड़न और जोड़ों का दर्द ज्यादा हो सकता है. इससे बचने के लिए दिन में कम से कम आधे घंटे धूप में बैठे या सैर करे जिससे आपके शरीर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ेगी. अगर दर्द ज्यादा होता है तो डॉक्टर से सलाह जरूर ले.

सर्दियों के मौसम में शरीर में विटामिन डी की मात्रा कम हो सकती है जिससे मांसपेशियों में जकड़न और जोड़ों का दर्द ज्यादा हो सकता है. इससे बचने के लिए दिन में कम से कम आधे घंटे धूप में बैठे या सैर करे जिससे आपके शरीर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ेगी. अगर दर्द ज्यादा होता है तो डॉक्टर से सलाह जरूर ले.

हमने आमतौर पर देखा है की सर्दियों में ओवर ईटिंग लोग करने लगते हैं क्योकि ठंड के मौसम में कई तरह के पकवान बनते हैं जिसे खाकर हम अपना वजन बढ़ा लेते हैं जो की बेहद गलत कदम है. अगर आपके जोड़ों में दर्द की समस्या है तो वजन बढ़ने की वजह से ये समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं इसलिए अपने खान पान पर ध्यान रखे और वजन को ना बढ़ने दे.

हमने आमतौर पर देखा है की सर्दियों में ओवर ईटिंग लोग करने लगते हैं क्योकि ठंड के मौसम में कई तरह के पकवान बनते हैं जिसे खाकर हम अपना वजन बढ़ा लेते हैं जो की बेहद गलत कदम है. अगर आपके जोड़ों में दर्द की समस्या है तो वजन बढ़ने की वजह से ये समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं इसलिए अपने खान पान पर ध्यान रखे और वजन को ना बढ़ने दे.

जब भी आप सर्दियों के मौसम में बाहर निकले तो इस बात का विशेष ध्यान रखे की शरीर को पूरी तरह से ढके यानी गरम कपड़े पहने और शरीर के वो हिस्से जहां आपको लगता है की मेरे दर्द है खासकर उन हिस्सों को अच्छी तरह से कवर करे, जैसे घुटने को अच्छी तरह से वॉर्म बैंड से कवर करे, हाथो में ग्लव्स या दस्ताने पहने आदि.

जब भी आप सर्दियों के मौसम में बाहर निकले तो इस बात का विशेष ध्यान रखे की शरीर को पूरी तरह से ढके यानी गरम कपड़े पहने और शरीर के वो हिस्से जहां आपको लगता है की मेरे दर्द है खासकर उन हिस्सों को अच्छी तरह से कवर करे, जैसे घुटने को अच्छी तरह से वॉर्म बैंड से कवर करे, हाथो में ग्लव्स या दस्ताने पहने आदि.

Published at : 10 Dec 2025 05:22 PM (IST)

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