आपकी आंखें भी दे सकती हैं किडनी की बीमारी का संकेत, डॉक्टर से जानें इन 5 लक्षणों का सच

आपकी आंखें भी दे सकती हैं किडनी की बीमारी का संकेत, डॉक्टर से जानें इन 5 लक्षणों का सच


Eye Symptoms Of Kidney Disease: आमतौर पर आंखों को दिल का आईना कहा जाता है, लेकिन सच यह है कि आंखें आपकी किडनी की सेहत के बारे में भी बहुत कुछ बता सकती हैं. किडनी और आंखों की बनावट व काम करने की क्षमताओं में कई समानताएं होती हैं, इसलिए जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो उसके संकेत कई बार सबसे पहले आंखों में दिखने लगते हैं.

अधिकतर लोग किडनी की बीमारी को पैरों में सूजन या लगातार थकान से जोड़कर देखते हैं, लेकिन कुछ अहम लक्षण ऐसे भी होते हैं जो आंखों के जरिए सामने आते हैं. नई दिल्ली स्थित विजन आई केयर सेंटर के कंसल्टेंट ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव कृष्ण पटेल के मुताबिक, अगर इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.

पफी आईलिड्स

सुबह उठते ही आंखों के आसपास सूजन दिखना किडनी की गड़बड़ी का शुरुआती संकेत हो सकता है. जब किडनी प्रोटीन को ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती, तो शरीर में फ्लूड जमा होने लगता है, जिसका असर सबसे पहले आंखों के नाजुक हिस्से पर दिखता है. ऐसे में नमक का सेवन कम करना, प्रोटीन लेवल पर नजर रखना और किडनी फंक्शन टेस्ट कराना जरूरी है.

धुंधली नजर

किडनी की बीमारी से जुड़ा हाई ब्लड प्रेशर या बढ़ा हुआ ब्लड शुगर आंखों की रेटिना की महीन नसों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे नजर धुंधली होने लगती है. यह बदलाव कई बार धीरे-धीरे होता है, इसलिए नियमित आई चेकअप और बीपी व शुगर को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है.

आंखों में सूखापन

जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं. इसका असर आंसुओं के निर्माण पर भी पड़ सकता है, जिससे आंखों में सूखापन, जलन या रेत जैसी चुभन महसूस होती है. पर्याप्त पानी पीना, लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल और लक्षण बने रहने पर डॉक्टर को बताना जरूरी है, खासकर अगर साथ में थकान या सूजन भी हो.

लाल या ब्लडशॉट आंखें

आंखों में जरूरत से ज्यादा लाल नसें दिखना या आंखों का लगातार लाल रहना हाई ब्लड प्रेशर या शरीर में टॉक्सिन जमा होने का संकेत हो सकता है, जो अक्सर किडनी की गंभीर अवस्था से जुड़ा होता है. ऐसे में शराब, कैफीन और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना और अन्य लक्षणों के साथ यह समस्या हो तो मेडिकल जांच कराना जरूरी है.

आंखों का पीला पड़ना

अगर किडनी फेल होने के कारण शरीर में यूरिया जैसे जहरीले तत्व बढ़ जाएं या लिवर पर असर पड़ने लगे, तो आंखों का सफेद हिस्सा पीला दिख सकता है. यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है और तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी होता है.

आंखें सिर्फ देखने का जरिया नहीं हैं, बल्कि आपकी किडनी की सेहत का भी संकेत देती हैं, इन बदलावों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि समय पर पहचान और इलाज आपकी जान बचा सकता है.

इसे भी पढ़ें- Causes Of Body Lumps: शरीर पर बार-बार आ रही है सूजन या बन रही है गांठ, जानिए कब हो जाना चाहिए सावधान?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है पीरियड्स का दर्द? जानिए इसके कारण और राहत पाने के आसान तरीके

सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है पीरियड्स का दर्द? जानिए इसके कारण और राहत पाने के आसान तरीके


Does Winter Worsen Menstrual Cramps: कई महिलाओं को यह महसूस होता है कि सर्दियों में उनके पीरियड्स का दर्द ज्यादा बढ़ जाता है. अगर आपको भी ठंड के मौसम में तेज ऐंठन, मूड में बदलाव या ज्यादा बेचैनी महसूस होती है, तो आप अकेली नहीं हैं. रिसर्च और क्लिनिकल अनुभव बताते हैं कि सर्दियां पीरियड्स से जुड़ी परेशानियों को कई तरीकों से प्रभावित कर सकती हैं. चलिए आपको बताते हैं कि अगर सर्दियों में पीरियड्स में ज्यादा पेन हो रहा है, तो कैसे आप इनको कंट्रोल में रख सकते हैं और इसके कारण क्या होते हैं.

सर्दियों में पीरियड पेन क्यों बढ़ जाता है?

ठंड के मौसम में तापमान, धूप और शरीर की काम करने के तरीके में बदलाव आते हैं, जिससे पीरियड्स के लक्षण ज्यादा तीव्र लग सकते हैं, इसमें- 

ठंड में मांसपेशियों का सख्त होना

Dr Shivika Gupta, Obstetrician-Gynecologist (OBGYN) ने इसको लेकर अपने सोशल मीडिया वीडियो में बताया है कि ठंड पड़ते ही शरीर गर्मी बचाने के लिए ब्लड फ्लो को सीमित कर देता है. इससे यूट्रस की मांसपेशियां ज्यादा सख्त होकर सिकुड़ती हैं, जिससे ऐंठन और दर्द बढ़ सकता है.

विटामिन D की कमी

सर्दियों में धूप कम मिलने से विटामिन D का स्तर घट जाता है. विटामिन D सूजन कम करने और हार्मोन संतुलन में अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी से दर्द, थकान और मूड स्विंग्स बढ़ सकते हैं.

दर्द के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता

ठंड में शरीर दर्द को ज्यादा महसूस करता है. इसी वजह से सामान्य ऐंठन भी सर्दियों में ज्यादा तेज लग सकती है.

हार्मोनल बदलाव

सर्दियों में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे हार्मोन्स में बदलाव हो सकता है, जिससे चिड़चिड़ापन, उदासी और पीएमएस के लक्षण बढ़ जाते हैं.

फिजिकल एक्टिविटी की कमी

ठंड के कारण लोग कम चलते-फिरते हैं. इससे पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो कम होता है और दर्द बढ़ सकता है.

सर्दियों में पीएमएस और मासिक स्वास्थ्य पर असर

इस मौसम में कई महिलाओं को भारीपन, पेट फूलना, मीठा खाने की इच्छा, ज्यादा थकान, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन और एक्सरसाइज की इच्छा कम लगने जैसी दिक्कतें होती हैं.

कैसे पहचानें कि सर्दी आपकी परेशानी बढ़ा रही है?

अगर सर्दियों में ऐंठन ज्यादा हो, पेल्विक दबाव बढ़े, पीएमएस के लक्षण तेज हों, थकान और कमर दर्द ज्यादा हो या मूड ज्यादा खराब रहे, तो यह मौसम से जुड़ा असर हो सकता है.

सर्दियों में पीरियड पेन कैसे कम करें?

  • गर्म पानी की बोतल या हीट पैड का इस्तेमाल करें
  • हल्की एक्सरसाइज, योग या वॉक जारी रखें
  • विटामिन D से भरपूर फूड लें और जरूरत हो तो डॉक्टर से सप्लीमेंट पर बात करें
  • गुनगुना पानी और हर्बल टी पिएं
  • सूजन कम करने वाला खाना जैसे फल, सब्जियां, नट्स शामिल करें
  • तनाव कम करने की कोशिश करें और पर्याप्त नींद लें
  • अपने साइकिल और लक्षणों को ट्रैक करें

डॉक्टर को दिखाना कब जरूरी?

Continentalhospitals की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर दर्द बहुत ज्यादा हो, कई दिनों तक बना रहे, कामकाज प्रभावित करे, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो, पीरियड्स अनियमित हों या घरेलू उपायों से राहत न मिले, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड्स या पीसीओएस जैसी समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं.

इसे भी पढ़ें: Budget 2026 Cancer Relief: कैंसर की ये 17 दवाएं हुई सस्ती, यहां देख लें पूरी लिस्ट

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator





Source link

क्या ब्रांडी पीने से वाकई ठीक हो जाती है खांसी, डॉक्टर से जानें यह बात कितनी सच?

क्या ब्रांडी पीने से वाकई ठीक हो जाती है खांसी, डॉक्टर से जानें यह बात कितनी सच?


Does Brandy Cure Cough: सर्दियों में खांसी, जुकाम या गले में खराश होने पर कई लोग ब्रांडी या रम पीने की सलाह देते हैं. माना जाता है कि इससे गला साफ होता है और जुकाम में राहत मिलती है. लेकिन डॉक्टर इस घरेलू नुस्खे को पूरी तरह सही नहीं मानते. एक्सपर्ट का साफ कहना है कि खांसी या जुकाम के इलाज के तौर पर किसी भी तरह की शराब पीना सही तरीका नहीं है. चलिए आपको इस मिथक की सच्चाई बताते हैं. 

ब्रांडी इलाज नहीं है

इस मिथक को लेकर डॉक्टर बताते हैं कि गर्म पानी के साथ रम या ब्रांडी पीने से सिर्फ थोड़ी देर के लिए गर्माहट महसूस होती है, जिससे लक्षणों में हल्की राहत मिल सकती है. लेकिन यह किसी वायरल इंफेक्शन जैसे खांसी या सर्दी का इलाज नहीं है. उल्टा, नियमित रूप से शराब पीने से इम्युनिटी कमजोर हो सकती है. कई एक्सपर्ट का मानना है कि शराब ब्लड वेसल्स को फैलाती है, जिससे शरीर में गर्माहट महसूस होती है. ऐसे में ब्रांडी या रम गले की खराश पर हल्का सुन्न करने वाला असर डाल सकती है. अगर इसे शहद, नींबू या मसालों के साथ लिया जाए, तो कुछ देर के लिए आराम मिल सकता है, लेकिन यह सिर्फ सतही राहत है, इलाज नहीं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

कुछ लोग बच्चों को भी सर्दी और जुकाम से बचाने के लिए एक चम्मच ब्रांडी पिला देते हैं. इसको लेकर डॉ रवि मलिक ने अपने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके इसके नुकसान के बारे में विस्तार से बताया है. उनके अनुसार, ब्रांडी सर्दी-जुकाम का इलाज नहीं है. यह सिर्फ एक गलत धारणा है, जो समय के साथ घरों में आम हो गई है. उनके अनुसार, ब्रांडी खासतौर पर बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. इससे शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर तेजी से गिर सकता है, जिससे दौरे पड़ने का खतरा रहता है. इतना ही नहीं, यह सांस से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है और बच्चे के दिमाग के विकास पर भी बुरा असर डाल सकती है.

तो फिर क्या करें?

डॉक्टरों का कहना है कि खांसी और जुकाम में शराब की जगह गर्म हर्बल चाय ज्यादा फायदेमंद होती है. एक रिसर्च के मुताबिक, गर्म पेय लेने से खांसी, बहती नाक और छींक जैसे लक्षणों में तुरंत राहत मिल सकती है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि सर्दियों में खांसी-जुकाम होने पर शरीर को हाइड्रेट रखें, भरपूर आराम करें, गुनगुने तरल पदार्थ पिएं और भाप लें. डॉक्टरों के अनुसार, ये उपाय ब्रांडी या रम पीने से कहीं ज्यादा सुरक्षित और असरदार हैं.

इसे भी पढ़ें: नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल, ये संकेत हो सकते हैं खतरनाक, तुरंत लें मेडिकल सलाह

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें 

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

भरपूर नींद के बाद भी दोपहर में महसूस होती है कमजोरी? शरीर में हो सकती है इस एक विटामिन की कमी

भरपूर नींद के बाद भी दोपहर में महसूस होती है कमजोरी? शरीर में हो सकती है इस एक विटामिन की कमी


Why Do I Feel Tired In The Afternoon: दोपहर होते-होते अचानक थकान, सुस्ती और नींद आना आजकल एक आम समस्या बनती जा रही है. कई लोग पूरी नींद लेने, एक्सरसाइज करने और हेल्दी डाइट फॉलो करने के बावजूद दोपहर के बाद खुद को पूरी तरह एनर्जी-लेस महसूस करते हैं. इसको अक्सर इसे काम का दबाव, उम्र या मानसिक थकान मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसके पीछे एक अहम पोषक तत्व की कमी जिम्मेदार हो सकती है विटामिन D.

डॉ. शोवाना वैष्णवी, इंडियन एक्सप्रेस के अपने एक आर्टिकल में बताती हैं कि विटामिन D सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर की एनर्जी लेवल बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी होने पर शरीर की कोशिकाएं सही तरीके से काम नहीं कर पातीं, जिससे दिन के बीच में अचानक थकान महसूस होने लगती है. सामान्य तौर पर विटामिन D का स्वस्थ स्तर 20 से 50 ng/mL के बीच माना जाता है, लेकिन बड़ी आबादी इससे काफी नीचे है.

भारत में विटामिन D की कमी क्यों आम है?

धूप से भरपूर देश होने के बावजूद भारत में विटामिन D की कमी एक गंभीर समस्या बन चुकी है. कई स्टडी के अनुसार, शहरी भारत में 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग इसकी कमी से जूझ रहे हैं। इसके पीछे प्रमुख कारण हैं कि ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर रहना, वायु प्रदूषण के कारण यूवी किरणों का कमजोर होना और धूप से बचने की आदत. विटामिन D माइटोकॉन्ड्रिया के सही कामकाज के लिए जरूरी होता है, जिन्हें शरीर की एनर्जी फैक्ट्री कहा जाता है. जब यह प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो एनर्जी प्रोडक्शन भी घटने लगता है.

दोपहर की थकान कैसे बढ़ती है?

विटामिन D की कमी से शरीर एटीपी यानी एनर्जी करंसी पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पाता. इसका सीधा असर मांसपेशियों और दिमाग पर पड़ता है. यह सेरोटोनिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में भी मदद करता है, जो मूड और एनर्जी को नियंत्रित करता है. दोपहर के समय शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर स्वाभाविक रूप से गिरता है. अगर विटामिन D की कमी हो, तो शरीर इस बदलाव को संतुलित नहीं कर पाता और सुस्ती हावी हो जाती है. इसके अलावा, सूजन बढ़ने से नींद-सी महसूस होने लगती है.

सर्कैडियन रिदम का रोल

शरीर की प्राकृतिक घड़ी के अनुसार दोपहर 2 से 4 बजे के बीच हल्की थकान सामान्य मानी जाती है. लेकिन विटामिन D की कमी इस सामान्य थकान को ज्यादा गहरा बना देती है. यह नींद-जागने के चक्र और मेलाटोनिन के संतुलन में भी भूमिका निभाता है.

अन्य कारण भी हैं जिम्मेदार

भारी और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला लंच, पानी की कमी, प्रोटीन का कम सेवन और लंबे समय तक बैठे रहना भी दोपहर की थकान को बढ़ा सकता है.

क्या करें?

डॉक्टरों के अनुसार, इस समस्या से निपटने के लिए सिर्फ ज्यादा सोना काफी नहीं है. मेडिकल सलाह के बाद विटामिन D सप्लीमेंट, संतुलित भोजन, लंच के बाद हल्की वॉक और सीमित लेकिन नियमित धूप शरीर की एनर्जी वापस लाने में मदद कर सकती है.

ये भी पढ़ें: Alzheimer Disease: अल्जाइमर ने छीनी याददाश्त, पर नहीं मिटा पाया मुहब्बत, बीमारी से जूझते शख्स ने कैसे जिंदा रखा अपना रिश्ता?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

सस्ता भी और दमदार भी! महज इतने रुपये में मिलेगा 100 ग्राम प्रोटीन, जानें पूरे दिन का मील प्लान

सस्ता भी और दमदार भी! महज इतने रुपये में मिलेगा 100 ग्राम प्रोटीन, जानें पूरे दिन का मील प्लान


How To Get 100g Protein On A Vegetarian Diet: शाकाहारी डाइट में पर्याप्त प्रोटीन लेना अक्सर जरूरत से ज्यादा मुश्किल बताकर पेश किया जाता है. फिटनेस कंटेंट देखिए तो ऐसा लगता है जैसे बिना व्हे प्रोटीन, इम्पोर्टेड सुपरफूड्स या सख्त मील प्लान के प्रोटीन टारगेट पूरा ही नहीं हो सकता. लेकिन हकीकत इससे अलग है. भारतीय किचन में पहले से ही ऐसे कई फूड्स मौजूद हैं, जिनसे एक मजबूत हाई-प्रोटीन वेज डाइट बनाई जा सकती है, बस सही चुनाव और बेहतर कॉम्बिनेशन की जरूरत होती है.

यही बात न्यूट्रिशनिस्ट खुशी छाबड़ा  ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में समझाई है. उन्होंने यह मिथक तोड़ा है कि प्रोटीन पूरा करने के लिए मांस या सप्लीमेंट जरूरी हैं. उनका कहना है कि बिना व्हे, पूरी तरह शाकाहारी और बजट-फ्रेंडली डाइट से भी रोज़ाना 100 ग्राम प्रोटीन हासिल किया जा सकता है. उनके अनुसार-

दिन की शुरुआत में इसका रखें ध्यान

खुशी छाबड़ा बताती हैं कि सुबह की शुरुआत भुने हुए अलसी के बीजों से की जा सकती है, जिससे करीब 2 ग्राम प्रोटीन मिलता है. चाहें तो कद्दू के बीज या चिया सीड्स भी शामिल किए जा सकते हैं. 

 बिना भारी कुकिंग के प्रोटीन वाला नाश्ता

अब बात करते हैं नाश्ते की, तो आप इसमें होल व्हीट वेज पनीर सैंडविच के साथ ग्रीक योगर्ट या स्कायर योगर्ट लिया जा सकता है. इससे करीब 15 ग्राम प्रोटीन मिलता है. जो लोग पनीर नहीं खाते, उनके लिए टोफू एक आसान विकल्प है.

मिड-मॉर्निंग के लिए क्या है विकल्प?

मिड-मॉर्निंग में आपके पास बादाम और अमरूद जैसे फलों का कॉम्बिनेशन है, इसमें करीब 6 ग्राम प्रोटीन आपको मिलता है. यह एनर्जी बनाए रखने में मदद करता है और साथ ही साथ मील्स के बीच लंबा गैप नहीं होने देता.

 

लंच में आपके पास क्या होता है विकल्प?

आप बात करते हैं दोपहर के खाने की. लंच में सबसे ज्यादा प्रोटीन मिलता है करीब 41 ग्राम. इसमें होल व्हीट चपाती, मसाला सोया चंक्स, मूंग दाल और सब्जियां शामिल हैं. विकल्प के तौर पर मसूर दाल या टोफू भी लिया जा सकता है.

जंक के बिना शाम का स्नैक

शाम को मखाना वेज चाट, ऊपर से टोफू और बीज डालकर, साथ में अदरक की चाय ली जा सकती है. इससे लगभग 13 ग्राम प्रोटीन मिलता है.

डिनर में क्या खास?

रात के खाने में बेसन चिल्ला, चटनी और रायता शामिल किया गया है, जिससे करीब 26 ग्राम प्रोटीन मिलता है. इसमें आपके पास मूंग दाल चिल्ला या टोफू बेस्ड रायता भी अच्छे विकल्प हैं. पूरे दिन का यह प्लान करीब 103 ग्राम प्रोटीन, 1500 से 1800 कैलोरी देता है और इसकी लागत लगभग 220 रुपये प्रति दिन बताई गई है.

 ये भी पढ़ें: Alzheimer Disease: अल्जाइमर ने छीनी याददाश्त, पर नहीं मिटा पाया मुहब्बत, बीमारी से जूझते शख्स ने कैसे जिंदा रखा अपना रिश्ता?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator





Source link

बिना डॉक्टर की सलाह के लेते हैं सर्दी-खांसी की दवा, जानें इससे सेहत को कितना नुकसान?

बिना डॉक्टर की सलाह के लेते हैं सर्दी-खांसी की दवा, जानें इससे सेहत को कितना नुकसान?


ठंड का मौसम आते ही सर्दी, जुकाम, खांसी और गले में खराश की शिकायतें आम हाे जाती है. ऐसे में ज्यादातर लोगों डॉक्टर के पास जाने के बजाय सीधे मेडिकल स्टोर का रुख करते हैं और बिना पर्ची के दवाएं खरीद लेते हैं. रंगीन पैकिंग, जल्दी राहत की दवाएं और हल्की बीमारी का सोचकर ली गई. ये ओवर-द-काउंटर दवाएं कई बार सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना सलाह दवा लेने की यह आदत आगे चलकर दिल, दिमाग, लिवर और किडनी तक को नुकसान पहुंचा सकती है. 

ओवर-द-काउंटर दवाएं हमेशा सुरक्षित नहीं 

नोएडा स्थित मेदांता अस्पताल में ​चिकित्स्क डॉ. अर्पिता कुलश्रेष्ठ ने बताया कि सर्दी-खांसी में इस्तेमाल होने वाली आम ओटीसी दवाओं में डिकंजेस्टेन्ट, एंटीहिस्टामिन, खांसी दबाने वाली दवाएं और दर्द-बुखार की गोलियां शामिल होती है. लोग अक्सर इनके साइड इफेक्ट्स जाने बिना ही इनका सेवन शुरू कर देते हैं. कई घरों में तो इन दवाओं का स्टॉक पहले से ही रखा रहता है. ताकि लक्षण दिखते ही तुरंत गोली खा ली जाए.

इन दवाओं का शरीर पर गहरा असर पड़ता है और अगर व्यक्ति पहले से कोई दूसरी दवा ले रहा हो तो दवाओं के आपसी रिएक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है. वहीं डिकंजेस्टेन्ट दवाएं नाक की सूजन कम कर सांस लेने में राहत देती है, लेकिन इनका लगातार इस्तेमाल उल्टा असर भी दिख सकता है. कई दिनों तक लेने पर नाक की सूजन कम कर सांस लेने में राहत देती है, लेकिन इनका लगातार इस्तेमाल उल्टा असर  भी दिख सकता है. 

खांसी दबाने वाली दवाएं और दर्द-बुखार की गोलियां 

डेक्स्ट्रोमेथोर्फन जैसी खांसी दबाने वाली दवाओं का गलत ज्यादा इस्तेमाल दिमाग पर बुरा असर डाल सकता है. इससे चक्कर, भ्रम, अजीब व्यवहार और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं देखी जा सकती है. वहीं पेरासिटामोल और इब्रप्रोफेन जैसी दर्द और बुखार की दवाएं जरूरत से ज्यादा लेने पर लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है. कुछ मामलों में पेट में खून की समस्या और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. 

डॉक्टर क्यों देते हैं चेतावनी?

डॉ. अर्पिता कुलश्रेष्ठ बताती हैं कि आजकल भारतीयों में एंटीबायोटिक्स रेजिस्टेंस बढ़ती जा रही है. छोटी से छोटी परेशानी के लिए भी एंटीबायोटिक्स ले लेते हैं. उससे हमारी बॉडी में गट बैक्टीरिया का बैलेंस खराब हो जाता है. साथ ही साथ उन्हीं दवाइयों के प्रति रेजिस्टेंस भी डेवेलोप हो जाती है. आगे जाकर जब हमें उन दवाओं की असल में जरूरत होती है तब तक हमारी बॉडी इतनी रेजिस्टेंस हो जाती है कि वो एंटीबायोटिक्स काम नहीं करती हैं. ज्यादा दवा खाने से हमारे गट बैक्टीरिया पर असर पड़ता है. 

ये भी पढ़ें-कुछ लोग बिना डाइट और जिम जाए भी क्यों होते हैं पतले? जान लें कारण 

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp