क्या डायबिटीज में गुड़ खाना है हेल्दी, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

क्या डायबिटीज में गुड़ खाना है हेल्दी, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट?


Diabetics Patients Eat Jaggery: सर्दियों का मौसम आते ही गुड़ की खुशबू और स्वाद हमारे खाने में खास जगह बना लेते हैं. तिल-गुड़ की मिठाई, गुड़ वाली चाय या फिर सर्दियों में गर्म-गर्म गुड़ का टुकड़ा, ये सब सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. गुड़ न सिर्फ मीठा होता है, बल्कि इसमें आयरन, मिनरल्स और कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. लेकिन अगर आपको डायबिटीज है तो क्या आप इसे बेझिझक खा सकते हैं? 

डॉ. सरीन के मुताबिक, गुड़ भले ही चीनी की तुलना में कम प्रोसेस्ड हो, लेकिन इसमें भी शुगर की मात्रा अधिक होती है. गुड़ खाने के बाद शरीर में ग्लूकोज लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को परेशानी हो सकती है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी काफी ज्यादा होता है, जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाता है. 

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गुड़ के पोषक तत्व और फायदे

गुड़ में आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और विटामिन जैसे पोषक तत्व होते हैं. यह पाचन में मदद करता है, खून को साफ करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है. सर्दियों में यह शरीर को गर्म रखता है और थकान दूर करता है। लेकिन डायबिटीज मरीजों के लिए इन फायदों के बावजूद इसका सेवन सीमित मात्रा में करना जरूरी है. 

डायबिटीज में गुड़ खाने के खतरे

अगर डायबिटीज का लेवल कंट्रोल में नहीं है और आप नियमित रूप से गुड़ खाते हैं, तो ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है. इससे थकान, चक्कर, और अन्य डायबिटीज से जुड़ी जटिलताएं हो सकती हैं. खासतौर पर खाली पेट गुड़ खाना शुगर स्पाइक का कारण बन सकता है. 

कितनी मात्रा में खा सकते हैं?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर डायबिटीज कंट्रोल में है और आप डॉक्टर की सलाह लेते हैं, तो दिन में आधा से एक छोटा टुकड़ा गुड़ खाया जा सकता है. इसे सीधे खाने की बजाय किसी हेल्दी रेसिपी जैसे बाजरे की रोटी के साथ या गर्म दूध में मिलाकर लेना बेहतर है. 

गुड़ का हेल्दी विकल्प

अगर आप मीठा खाना चाहते हैं तो गुड़ की जगह  खजूर या शुगर-फ्री स्वीटनर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा मौसमी फल भी आपकी मीठी क्रेविंग को पूरा कर सकते हैं और ब्लड शुगर को भी कम प्रभावित करेंगे. 

गुड़ भले ही सेहत के लिए कई फायदे रखता है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों को इसे सोच-समझकर और डॉक्टर की सलाह के बाद ही खाना चाहिए. सही मात्रा और सही समय पर लिया गया गुड़ नुकसान से बचाते हुए स्वाद भी दे सकता है. 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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इस तरीके से जड़ से साफ हो जाएगा पायरिया! ये चार तरीके आएंगे काम

इस तरीके से जड़ से साफ हो जाएगा पायरिया! ये चार तरीके आएंगे काम


ज्यादातर लोग दांतों और मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं. दिन में दो बार ब्रश करने के बाद भी दांतों में सड़न, पायरिया, मसूड़ों से खून आना या मुंह से बदबू जैसी तकलीफें आम हो गई है. हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी तरह की ओरल हेल्थ प्रॉब्लम से जूझ रहा है. अक्सर लोग रोजाना ब्रश तो करते हैं, महंगे टूथपेस्ट यूज करते हैं, लेकिन फिर भी इन समस्याओं से राहत नहीं मिलती है. इसका कारण यह है कि आमतौर पर यूज किए जाने वाले टूथपेस्ट में केमिकल्स जैसे कि SLS और फ्लोराइड होते हैं, जो लंबे समय तक यूज करने पर फायदे की बजाय नुकसान कर सकते हैं. ऐसे में अगर आप भी लंबे समय से पायरिया या मुंह की बदबू जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है आज हम एक ऐसे 4 तरीके बताते हैं जिससे पायरिया जड़ से साफ हो जाएगा. 

4 तरीके जिससे पायरिया होगा जड़ से खत्म

1.  घर में बने पाउडर से ब्रश करें –  लौंग, हल्दी, तेजपत्ता और सेंधा नमक इन चारों चीजों को मिलाकर बारीक पीस लें और एयरटाइट डिब्बे में रख लें, रोज सुबह-शाम आधा चम्मच इस पाउडर में थोड़ा सरसों का तेल मिलाएं और ब्रश करें. ये आपके पायरिया को जड़े से खत्म करने में मदद करेगा. क्योंकि इसमें मौजूद लौंग दर्द और सूजन में राहत देती है, हल्दी बैक्टीरिया और पायरिया से लड़ती है, तेजपत्ता मुंह की बदबू को दूर करता है और सेंधा नमक दांतों को चमकदार बनाता है और मसूड़े मजबूत करता है.

2. नींबू का यूज – नींबू विटामिन C से भरपूर होता है और मसूड़ों की सूजन कम करने में मदद करता है. ऐसे में रोज नींबू का रस पिएं या दांतों और मसूड़ों पर हल्के हाथों से रगड़कर मसाज करें. यह पायरिया को बढ़ने से रोकता है और मसूड़ों को हेल्दी बनाए रखता है. 

3. प्याज और नमक-तेल का मिक्सचर – प्याज में नैचुरल एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, रोजाना थोड़ी देर तक कच्चा प्याज चबाएं या फिर सरसों के तेल में एक चुटकी नमक मिलाकर मसूड़ों पर लगाएं और 5 मिनट तक छोड़ दें. इससे मसूड़ों से खून आना बंद होता है और पायरिया में राहत मिलती है. 

4. जूस, दालचीनी से गरारे और गेहूं चबाना – भिगोया हुआ गेहूं चबाने से मसूड़ों में खून का संचार बढ़ता है और वह मजबूत होते हैं. इसके अलावा  दालचीनी की छाल को पानी में उबालें, ठंडा करके छान लें और उससे दिन में 1-2 बार कुल्ला करें, साथ ही गाजर का जूस या पालक का रस रोज पीने से भी पायरिया में आराम मिलता है. ये सब उपाय मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करते हैं और दांतों की सफाई नैचुरल तरीके से करते हैं. 

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15 दिनों तक चाय छोड़ने से शरीर में दिखेंगे ये 5 बदलाव, आज से शुरू कर दें ये चैलेंज

15 दिनों तक चाय छोड़ने से शरीर में दिखेंगे ये 5 बदलाव, आज से शुरू कर दें ये चैलेंज


Quit Tea Benefits: सुबह की शुरुआत अक्सर चाय के कप से होती है. कई लोग तो दिन में 4 कप चाय पीने के आदी होते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आप सिर्फ 15 दिनों के लिए चाय छोड़ दें तो आपके शरीर पर क्या असर होगा? यह सुनने में मुश्किल लगता है, लेकिन इसके फायदे जानकर आप भी इस चैलेंज को अपनाने का मन बना लेंगे. 

डॉ. नवनीत कालरा का कहना है कि, चाय छोड़ना शरीर के लिए एक तरह का डिटॉक्स है, जिससे कई सकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं. 

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नींद की क्वालिटी में सुधार

चाय में मौजूद कैफीन आपके नींद चक्र को प्रभावित करता है. लगातार चाय पीने से नींद देर से आती है और नींद गहरी नहीं होती. लेकिन जब आप 15 दिनों तक चाय छोड़ देते हैं, तो कैफीन का असर कम हो जाता है और नींद स्वाभाविक रूप से बेहतर होने लगती है. 

डिहाइड्रेशन की समस्या कम होगी

कैफीन एक डाईयूरेटिक है, यानी यह शरीर से पानी को तेजी से बाहर निकालता है. ज्यादा चाय पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे थकान और स्किन ड्राईनेस होती है. चाय छोड़ने पर शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है और त्वचा भी हेल्दी दिखने लगती है. 

पाचन तंत्र होगा मजबूत

ज्यादा चाय पीना कई बार एसिडिटी, गैस और पेट फूलने की समस्या बढ़ा देता है. चाय छोड़ने पर पेट का pH बैलेंस सुधरता है, पाचन बेहतर होता है और खाना आसानी से पचने लगता है. 

एनर्जी लेवल होगा नेचुरल

चाय में मौजूद कैफीन से मिलने वाली एनर्जी अस्थायी होती है, जिसके बाद थकान और सुस्ती महसूस होती है. लेकिन 15 दिन चाय छोड़ने के बाद आपका शरीर बिना कैफीन के भी पर्याप्त एनर्जी पैदा करने लगता है, जिससे दिनभर एक्टिवनेस बनी रहती है. 

स्किन और बालों में आएगा ग्लो

चाय में मौजूद टैनिन और कैफीन शरीर से मिनरल्स और विटामिन्स को कम कर सकते हैं, जिससे स्किन डल और बाल कमजोर हो जाते हैं. जब आप चाय छोड़ते हैं, तो शरीर को पोषण बेहतर तरीके से मिलता है और स्किन नैचुरली ग्लो करने लगती है. 

  • चैलेंज को आसान बनाने के टिप्स
  • सुबह की चाय की जगह हर्बल टी, नींबू पानी या ग्रीन स्मूदी लें
  • कैफीन की कमी से होने वाले सिरदर्द के लिए पर्याप्त पानी पिएं
  • मीठा और प्रोसेस्ड फूड कम करें, ताकि शरीर जल्दी डिटॉक्स हो सके

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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फेफड़ों के कैंसर से पहले शरीर करता है ये इशारे, न करें नजरअंदाज

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फेफड़े का कैंसर दुनिया में सबसे जानलेवा बीमारी में गिना जाता है. यह बीमारी अक्सर तब सामने आती है जब इसका इलाज मुश्किल हो जाता है.  इसे लेकर डॉक्टरों का कहना है कि अगर इसके शुरुआती लक्षण समय रहते पहचान लिए जाए तो इसका इलाज संभव है. एक्सपर्ट इसे लेकर चेतावनी देते हैं कि शरीर कुछ संकेत पहले ही देने लगता है जिन्हें लोग आम समझ कर अनदेखा कर देते हैं. 

खांसी और खून का आना संकेत

फेफड़ों के कैंसर का एक आम शुरुआती लक्षण लगातार खांसी रहना है.  अगर खांसी लगातार एक से दो हफ्तें से ज्यादा बनी रहे तो इसे हल्के में न लें. वहींं अगर खांसते समय खून आना भी कैंसर की चेतावनी हो सकती हे.

सांस फूलना और सीने में दर्द

रोजाना काम करते हुए अचानक सांस फूलने लगे और गहरी सांस लेने पर सीने में दर्द महसूस होना भी कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. यह फेफड़ों में हवा के प्रभाव में रुकावट की वजह से होता है. 

भूख न लगना और वजन घटना

कई मरीजों में कैंसर बढ़ने के साथ भूख कम हो जाती है और बिना कोशिश किए ही वजन तेजी से घटने लगता है.यह भी बीमारी का एक अहम संकेत है. 

थकान और बार-बार संक्रमण

कैंसर से होने वाली थकान सामान्य थकान से अलग होती है और आराम करने पर भी दूर नहीं होती है. इसके अलावा बार-बार ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसी सांस की बीमारियां होना भी खतरे की घंटी हो सकता है. 

चेहरे में और गर्दन में सूजन

कुछ मामलों में मरीज के चेहरे और गर्दन में सूजन आ सकती है. यह नसों पर दबाव बढ़ने से होता है इसके साथ आवाज बैठना या भारी पड़ना भी संभव है. 

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

  • धूम्रपान करने वाले या सेकंड हैंड स्मोक के संपर्क में रहने वाले लोगों को इससे ज्यादा खतरा रहता है. 
  • इसके अलावा जिनके परिवार में पहले से ही किसी को फेंफड़ों का कैंसर हुआ है उन लोगों को भी इस बीमारी के होने का ज्यादा खतरा रहता है.
  • 40 साल से ज्यादा उम्र के लोग खासकर जो लंबे समय से प्रदूषण में रहते हैं उन्हें भी फेफड़े का कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है 

समय पर जांच जरूरी

एक्सपर्ट्स का मानना है कि शरीर के इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.  शुरुआती जांच और सही इलाज से ही फेफड़ों की कैंसर से बचाव का सबसे आम तरीका है.

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