हार्ट अटैक कारण बन सकती है ये 5 सफेद चीजें, कहीं आप तो नहीं कर रहे खाने की गलती

हार्ट अटैक कारण बन सकती है ये 5 सफेद चीजें, कहीं आप तो नहीं कर रहे खाने की गलती


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चाय-कॉफी नहीं इन चीजों से भी उड़ जाती है नींद, डिनर में इन चीजों को तो नहीं खा रहे आप?

चाय-कॉफी नहीं इन चीजों से भी उड़ जाती है नींद, डिनर में इन चीजों को तो नहीं खा रहे आप?


Bedtime Eating Mistakes: अक्सर लोग मानते हैं कि नींद उड़ने की सबसे बड़ी वजह चाय या कॉफी है, लेकिन हकीकत यह है कि हमारी डिनर प्लेट में मौजूद कुछ अन्य फूड भी नींद खराब करने में उतने ही जिम्मेदार हो सकते हैं. अगर आप रात को देर तक करवटें बदलते हैं, तो डॉ. सरीन के मुताबिक यह जरूरी है कि आप अपने रात के खाने में मौजूद चीजों पर ध्यान दें. 

मसालेदार और तैलीय खाना

रात को मसालेदार और तैलीय खाना खाने से पाचन पर ज्यादा दबाव पड़ता है. इससे एसिडिटी और सीने में जलन हो सकती है, जो नींद आने में रुकावट डालती है. खासतौर पर भारी करी, तली हुई चीजें और ज्यादा मिर्च वाला खाना डिनर में लेने से बचें.

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मीठे और शुगर वाली चीजें

डिनर में डेजर्ट या मीठा खाने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है और फिर गिरता है, जिससे शरीर में बेचैनी और एनर्जी फ्लक्चुएशन होता है. यह उतार-चढ़ाव नींद के नैचुरल चक्र को बिगाड़ देता है.

चॉकलेट और एनर्जी ड्रिंक

चॉकलेट में कैफीन और थियोब्रोमाइन मौजूद होते हैं, जो दिमाग को उत्तेजित कर देते हैं. वहीं, एनर्जी ड्रिंक में कैफीन और शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो रात में सोने में बाधा डाल सकती है.

हाई प्रोटीन फूड्स

चिकन, रेड मीट या ज्यादा मात्रा में पनीर जैसे हाई प्रोटीन फूड्स रात में पचने में ज्यादा समय लेते हैं. पाचन तंत्र के एक्टिव रहने से शरीर रिलैक्स नहीं हो पाता और नींद आने में देर होती है.

अल्कोहल और कोल्ड ड्रिंक

कई लोग मानते हैं कि अल्कोहल नींद लाती है, लेकिन यह गहरी नींद के चक्र को तोड़ देता है. वहीं, कोल्ड ड्रिंक में मौजूद कैफीन और शुगर नींद को खराब कर देते हैं.

डॉ. सरीन कहते हैं, “बेहतर नींद के लिए रात का खाना हल्का और संतुलित होना चाहिए. रात का खाना खाने और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का वक्त होना चाहिए. ज्यादा मसाले, शुगर और कैफीन वाली चीजों से बचें और नींद के लिए शांत माहौल बनाएं.”

अच्छी नींद सिर्फ बिस्तर और माहौल पर नहीं, बल्कि आपकी डाइट पर भी निर्भर करती है. अगर आप रात को डिनर में इन नींद चुराने वाले फूड्स को कम कर देंगे, तो सुबह उठकर तरोताजा महसूस करेंगे और हेल्दी लाइफस्टाइल जी पाएंगे.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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इस देश में तेजी से बढ़ रहा चिकनगुनिया, मिले 7000 केस; जानिए इसके लक्षण

इस देश में तेजी से बढ़ रहा चिकनगुनिया, मिले 7000 केस; जानिए इसके लक्षण


चीन में हाल ही में चिकनगुनिया वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 7,000 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. यह स्थिति न केवल चीन बल्कि आसपास के देशों के लिए भी खतरे की घंटी है, चलिए आपको बताते हैं कि यह कैसे होता है और इससे बचाव के तरीके कौन-कौन से हैं. 

चिकनगुनिया क्या है?

चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है, जो एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से फैलती है. यह वही मच्छर है जो डेंगू और जीका वायरस भी फैलाता है. चिकनगुनिया का नाम माकोंडे भाषा के शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब है “झुकना”. यह नाम मरीज के झुककर चलने वाले दर्दनाक लक्षणों के कारण पड़ा.

चीन में क्यों बढ़ रहे हैं केस?

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन में इस समय मानसून जैसी नमी और गर्मी का मौसम है, जो मच्छरों के प्रजनन के लिए आदर्श परिस्थितियां पैदा करता है. शहरी इलाकों में पानी के जमा होने, खुले गड्ढों और साफ-सफाई की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. इसके अलावा, इंटरनेशनल ट्रैवल और क्लाइमेट चेंज भी इस वायरस के फैलाव में योगदान दे रहे हैं.

लक्षणकैसे पहचानें चिकनगुनिया?

चिकनगुनिया के लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते हैं, लेकिन इसमें जोड़ों का दर्द अधिक समय तक रह सकता है. आम लक्षण इस प्रकार हैं:

  • तेज बुखार (अचानक)
  • तेज सिरदर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द
  • त्वचा पर लाल चकत्ते
  • थकान और कमजोरी
  • उल्टी या मतली

यह कितना खतरनाक है?

चिकनगुनिया से होने वाला दर्द और थकान कई हफ्तों से लेकर महीनों तक रह सकती है. हालांकि मृत्यु दर कम है, लेकिन बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों के लिए यह गंभीर रूप ले सकता है.

बचाव के तरीके

विशेषज्ञों का कहना है कि चिकनगुनिया का कोई खास टीका या दवा अभी मौजूद नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे अच्छा तरीका है.

  • घर और आसपास पानी जमा न होने दें
  • मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करें
  • पूरी बांह के कपड़े पहनें
  • सुबह और शाम बाहर जाते समय सावधानी बरतें
  • बुखार और जोड़ों के दर्द पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
  • सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तैयारी

चीन के स्वास्थ्य विभाग ने मच्छर नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर फॉगिंग और स्प्रे अभियान शुरू कर दिया है. प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है और लोगों को जागरूक करने के लिए हेल्थ कैंप चलाए जा रहे हैं.

चिकनगुनिया का तेजी से फैलाव को हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए. साफ-सफाई और समय पर सावधानी ही इस खतरे से बचने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है.

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सुबह उठते ही हाथ-पैर में महसूस होता है दर्द, कहीं इस बीमारी के लक्षण तो नहीं?

सुबह उठते ही हाथ-पैर में महसूस होता है दर्द, कहीं इस बीमारी के लक्षण तो नहीं?


Morning Joint Pain Causes: सुबह उठते ही अगर आपके हाथ-पैर में जकड़न, दर्द या भारीपन महसूस होता है तो ये आपकी सेहत के लिए खतरे की घंटी हो सकता है. कई बार लोग इसे थकान या बढ़ती उम्र का असर मानकर टाल देते हैं, लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है. 

डॉ. योगेश कुमार बताते हैं कि, “सुबह के समय हाथ-पैर में दर्द और अकड़न अक्सर जोड़ों की बीमारियों, विटामिन की कमी, थायरॉइड समस्या या ब्लड सर्कुलेशन में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. अगर यह परेशानी रोजाना महसूस हो और लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है. 

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आर्थराइटिस 

सुबह उठते ही जोड़ों में दर्द और सूजन आर्थराइटिस का प्रमुख लक्षण है. यह बीमारी जोड़ों में सूजन पैदा करती है, जिससे अकड़न और मूवमेंट में दिक्कत होती है.

विटामिन D और कैल्शियम की कमी

हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए विटामिन D और कैल्शियम जरूरी है. इनकी कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और सुबह के समय दर्द अधिक महसूस होता है.

थायरॉइड की समस्या

थायरॉइड का स्तर असंतुलित होने पर मांसपेशियों में दर्द, सूजन और जकड़न हो सकती है. खासकर सुबह उठने पर यह समस्या अधिक होती है.

ब्लड सर्कुलेशन में गड़बड़ी होना 

खून का प्रवाह सही न होने से हाथ-पैर सुन्न पड़ना, झुनझुनी या दर्द जैसी समस्या होती है.

डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन

पानी और मिनरल्स की कमी से भी मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द हो सकता है.

क्या करें इस समस्या से बचने के लिए

  • संतुलित आहार लें – विटामिन D, कैल्शियम और प्रोटीन युक्त आहार शामिल करें
  • सुबह हल्का व्यायाम करें – स्ट्रेचिंग और योगासन से मांसपेशियां लचीली बनती हैं
  • पर्याप्त पानी पिएं – दिन भर हाइड्रेटेड रहें ताकि डिहाइड्रेशन न हो
  • सही सोने की मुद्रा अपनाएं – गर्दन और पीठ के लिए सही सपोर्ट वाला तकिया इस्तेमाल करें
  • नियमित हेल्थ चेकअप कराएं – खासकर अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे।

सुबह उठते ही हाथ-पैर में दर्द को हल्के में न लें. यह आपके शरीर का संकेत हो सकता है कि अंदर कुछ गड़बड़ है. समय पर जांच और सही इलाज से आप इस परेशानी को जल्दी दूर कर सकते हैं और खुद को गंभीर बीमारी से बचा सकते हैं.

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आपको भी बार-बार आती है हिचकी, जानें कब हो जाती है यह खतरनाक?

आपको भी बार-बार आती है हिचकी, जानें कब हो जाती है यह खतरनाक?


हिचकी सुनने में मामूली लगती है, लेकिन बार-बार या लंबे समय तक आने वाली हिचकी किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है. आमतौर पर यह कुछ सेकंड या मिनटों तक रहती है और खुद-ब-खुद खत्म हो जाती है. लेकिन अगर यह 48 घंटे से ज्यादा चले तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.

हिचकी होती क्यों है?

रिसर्च के मुताबिक, हिचकी डायाफ्राम (Diaphragm) नाम की मांसपेशी के अचानक सिकुड़ने से होती है. डायाफ्राम फेफड़ों और पेट के बीच होता है और सांस लेने में मदद करता है. जब यह मांसपेशी अनियंत्रित तरीके से सिकुड़ती है, तो वोकल कॉर्ड बंद हो जाता है और “हिक” जैसी आवाज आती है.

हिचकी आने के आम कारण

  • बहुत जल्दी-जल्दी खाना या पीना
  • कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और अल्कोहल
  • मसालेदार खाना
  • ज्यादा हंसना या च्यूइंग गम चबाना
  • अचानक तापमान बदलना
  • ये कारण सामान्य हिचकी के लिए जिम्मेदार होते हैं और इनसे डरने की जरूरत नहीं होती.

डॉक्टर का क्या कहना है

डॉ. विशाल खुराना, डायरेक्टर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, मेट्रो हॉस्पिटल फरीदाबाद ने बातचीत करते हुए कहा कि जब हिचकी बार-बार आती है या बहुत देर तक रुकती नहीं है, तो यह शरीर का सिग्नल हो सकता है. कई बार यह गैस या खाना निगलने से नहीं, बल्कि किसी अंदरूनी रोग या तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी का लक्षण भी हो सकती है. बार-बार हिचकी आना पेट या लिवर की खराबी, डायाफ्राम में जलन, या ब्रेन-नर्व संबंधी समस्या की शुरुआत हो सकती है.

कब हो सकती है हिचकी खतरनाक?

अगर हिचकी लगातार 48 घंटे से ज्यादा आती है, तो इसे Persistent Hiccups कहा जाता है. और अगर यह एक महीने से भी ज्यादा चले, तो इसे Intractable Hiccups कहते हैं. यह आपकी नींद, खाना और रोजमर्रा की जिंदगी को बिगाड़ सकती है.

लंबे समय तक हिचकी आने के संभावित गंभीर कारण

  • नर्व की समस्या: वैगस या फ्रेनिक नर्व में चोट या सूजन
  • दिमाग से जुड़ी बीमारी: स्ट्रोक, मस्तिष्क का ट्यूमर, मेनिंजाइटिस
  • पाचन तंत्र की गड़बड़ी: एसिड रिफ्लक्स (GERD), अल्सर, पैंक्रियाटाइटिस
  • लिवर की खराबी
  • फेफड़े और दिल के रोग: न्यूमोनिया, पेरिकार्डाइटिस
  • कुछ दवाओं का असर: स्टेरॉइड, एनेस्थीसिया, कैंसर ट्रीटमेंट
  • मानसिक कारण: स्ट्रेस और एंग्जायटी

कब जाएं डॉक्टर के पास?

  • हिचकी 48 घंटे से ज्यादा चले
  • इसके साथ नींद न आना, खाना निगलने में दिक्कत, सांस लेने में परेशानी या वजन कम होना
  • सीने में दर्द, तेज बुखार या लगातार थकान
  • डॉक्टर कारण पता करने के लिए ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, MRI या एंडोस्कोपी जैसी जांच कर सकते हैं.

बचाव और राहत के तरीके

  • ठंडा पानी धीरे-धीरे पिएं
  • गहरी सांस लेकर कुछ सेकंड रोकें
  • नींबू का छोटा टुकड़ा चूसें
  • अचानक डराने जैसी ट्रिक (कुछ मामलों में काम आती है)

हिचकी छोटी-सी समस्या जरूर है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक बनी रहे, तो यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकती है. समय पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है.

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