जंग लगे चाकू से खाना बनाकर आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे रेस्तरां, FSSAI ने जारी की एडवायजरी

जंग लगे चाकू से खाना बनाकर आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे रेस्तरां, FSSAI ने जारी की एडवायजरी


आजकल बाहर खाना खाना हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है. वीकेंड हो, कोई छुट्टी हो या फिर ऑफिस के बाद की थकान, हम अक्सर अपने परिवार या दोस्तों के साथ किसी होटल, रेस्टोरेंट या ढाबे पर खाना खाने निकल जाते हैं. जब हम किसी रेस्टोरेंट में जाते हैं तो वहां की सजावट, एसी की हवा और साफ-सुथरी टेबल देखकर खुश हो जाते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि जिस किचन में आपका खाना बन रहा है, वहां कितनी साफ-सफाई है?

हाल ही में भारत की खाद्य सुरक्षा एजेंसी FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने ऐसा खुलासा किया है, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. यह खबर उन सभी लोगों के लिए बहुत जरूरी है, जो अक्सर बाहर का खाना खाते हैं.

किचन के अंदर का छिपा हुआ सच

FSSAI की टीम ने देश के कई होटलों, ढाबों और फूड स्टॉल्स की जांच की. इस जांच में डराने वाली बात सामने आई. अधिकारियों ने पाया कि कई जगहों पर खाना बनाने और सब्जियां काटने के लिए ऐसे चाकू और ब्लेड का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो पूरी तरह से खराब हो चुके थे. किचन में ऐसे चाकू मिले, जिनमें जंग लगा था. कई चाकू बीच से टूटे हुए थे, उनके किनारे घिस चुके थे और कुछ चाकू के हैंडल का पेंट निकलकर खाने में गिर रहा था. बाहर से चमचमाते होटलों के किचन में जब यह हाल देखा गया तो खाद्य विभाग तुरंत हरकत में आ गया.

15 जून 2026 को जारी हुई सख्त एडवाइजरी

इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए FSSAI ने 15 जून 2026 को पूरे देश के सभी फूड बिजनेस के लिए बेहद सख्त एडवाइजरी जारी कर दी. विभाग ने साफ कर दिया है कि लोगों की सेहत के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

जंग लगे और टूटे चाकू से क्या है खतरा?

शायद आप सोचें कि चाकू में थोड़ी सी जंग लगने या उसके टूटे होने से क्या फर्क पड़ता है? साइंस और डॉक्टरों के मुताबिक, यह आपकी सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा है.

  • जंग का पेट में जाना: जब जंग लगे चाकू से सब्जियां या मीट काटा जाता है तो लोहे के जंग के छोटे-छोटे कण कटकर खाने में मिल जाते हैं. यह खाना जब हमारे पेट में जाता है तो इससे पेट में इंफेक्शन, दर्द और कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.
  • बैक्टीरिया का घर: जो चाकू टूटे हुए होते हैं या जिनमें दरारें आ जाती हैं. उन दरारों के अंदर खाने के छोटे टुकड़े फंस जाते हैं. इन्हें चाहे जितना धो लिया जाए, ये पूरी तरह साफ नहीं होते. इन दरारों में खतरनाक बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जो हर बार कटने वाले नए खाने में मिल जाते हैं. इससे आपको फूड पॉइजनिंग हो सकती है.
  • केमिकल का खतरा: जिन चाकू पर घटिया पेंट या कोटिंग होती है, वह पेंट समय के साथ उखड़ने लगता है. यह पेंट केमिकल से बना होता है, जो सीधे आपके सलाद या सब्जी के जरिए आपके शरीर में पहुंच जाता है.

FSSAI के नए और सख्त नियम

इस खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए FSSAI ने सभी ढाबा और रेस्टोरेंट मालिकों को कुछ कड़े निर्देश दिए हैं, जिनका पालन करना अब अनिवार्य हो गया है.

  • सिर्फ फूड-ग्रेड चाकू का इस्तेमाल: अब किचन में केवल हाई क्वालिटी वाले (फूड-ग्रेड) और जंग-रोधी स्टेनलेस स्टील के चाकू ही इस्तेमाल किए जा सकेंगे.
  • खराब चाकू को तुरंत फेंकना: अगर किसी भी चाकू में थोड़ा-सा भी जंग लगा है, उसका हैंडल टूटा है या उसकी धार कटी-फटी है तो उसे तुरंत किचन से बाहर करना होगा.
  • नियमित सफाई जरूरी: सभी कटिंग उपकरणों और चाकू को हर इस्तेमाल के बाद अच्छे से धोना और साफ रखना होगा. उन्हें ऐसी जगह रखना होगा, जहां उन पर नमी न आए.

नियम तोड़ा तो होगी कड़ी कार्रवाई

FSSAI ने सभी राज्यों के फूड सेफ्टी अफसरों को आदेश दिया है कि वे अपनी नियमित चेकिंग के दौरान अब सिर्फ बर्तन और एक्सपायरी डेट ही नहीं देखेंगे, बल्कि किचन में इस्तेमाल हो रहे चाकू की भी बारीकी से जांच करेंगे. अगर किसी भी होटल, रेस्टोरेंट या सड़क किनारे लगे ठेले पर खराब या जंग लगा चाकू मिला तो उस पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. बार-बार गलती दोहराने पर रेस्टोरेंट का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है.

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गुड़ या शक्कर, जानिए किससे जल्दी होता है शुगर स्पाइक? लगातार बोला जा रहा झूठ

गुड़ या शक्कर, जानिए किससे जल्दी होता है शुगर स्पाइक? लगातार बोला जा रहा झूठ


Does Jaggery Cause A Blood Sugar Spike: मीठा खाने की बात हो, तो ज्यादातर लोग सफेद चीनी की जगह गुड़ को हेल्दी विकल्प मानते हैं. खासकर डायबिटीज के मरीजों के बीच यह धारणा काफी आम है कि चीनी नुकसानदायक है, लेकिन गुड़ खाने से ब्लड शुगर पर ज्यादा असर नहीं पड़ता. हालांकि क्या यह सच है? एक्सपर्ट के अनुसार, इस सवाल का जवाब उतना आसान नहीं है जितना लगता है. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों है. 

दोनों में क्या होता है अंतर?

दरअसल, चीनी और गुड़ दोनों का सोर्स एक ही है, यानी गन्ना. फर्क सिर्फ इतना है कि चीनी को रिफाइनिंग और क्रिस्टलाइजेशन की प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जबकि गुड़ अपेक्षाकृत कम प्रोसेस्ड होता है. इसी वजह से गुड़ में आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक, फॉस्फोरस और पोटैशियम जैसे कई खनिज तत्व बने रहते हैं, जो सफेद चीनी में लगभग खत्म हो जाते हैं. 

किससे होता है जल्दी शुगर स्पाइक?

यहीं से लोगों को लगता है कि गुड़ डायबिटीज मरीजों के लिए सुरक्षित है, लेकिन Metropolisindia के एक्सपर्ट बताते हैं कि न्यूट्रिशन और ब्लड शुगर पर असर दो अलग-अलग बातें हैं. गुड़ में भले ही कुछ अतिरिक्त पोषक तत्व मौजूद हों, लेकिन इसकी शुगर मात्रा चीनी के लगभग बराबर होती है, इसलिए डायबिटीज मरीजों को इसका सेवन भी सावधानी से करना चाहिए.

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चीनी ब्लड शुगर को तुरंत बढ़ाती है?

सबसे दिलचस्प बात यह है कि आमतौर पर माना जाता है कि चीनी ब्लड शुगर को तुरंत बढ़ाती है, जबकि गुड़ सुरक्षित रहता है.हकीकत यह है कि चीनी शरीर में तेजी से ऑब्जर्व होती है और ब्लड शुगर को जल्दी बढ़ा सकती है. दूसरी ओर, गुड़ में मौजूद सुक्रोज अपेक्षाकृत मुश्किल संरचना वाला होता है, जिसे टूटने और पचने में थोड़ा अधिक समय लगता है. इसका मतलब यह नहीं है कि गुड़ शुगर स्पाइक नहीं करता, बल्कि इसका असर कुछ देर बाद दिखाई दे सकता है.

गुड़ से क्या तुरंत बढ़ता है ब्लड शुगर?

एक्सपर्ट के मुताबिक, गुड़ खाने के बाद ब्लड शुगर तुरंत नहीं बढ़ता, लेकिन कुछ घंटों के भीतर इसका स्तर ऊपर जा सकता है. इसलिए यह मान लेना कि गुड़ डायबिटीज मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है, सही नहीं होगा. गुड़ और चीनी दोनों में कैलोरी लगभग समान होती है, लेकिन दोनों की गुणवत्ता में अंतर है. चीनी को अक्सर खाली कैलोरी कहा जाता है क्योंकि इसमें पोषक तत्व नहीं होते. वहीं गुड़ में मौजूद मोलासेस की वजह से कुछ जरूरी मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मिल जाते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पुलिस भर्ती में वजन में खा गए मात? ऑन द स्पॉट ऐसा बढ़ाएं वजन

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How To Gain Weight For Police Recruitment: पुलिस भर्ती की शारीरिक परीक्षा में कई उम्मीदवार दौड़, लंबाई और अन्य जरूरी चीजों को तो आसानी से पार कर लेते हैं, लेकिन वजन के मामले पर आकर अटक जाते हैं. कम वजन होने की वजह से कई अभ्यर्थियों का चयन रुक जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि वजन तेजी से कैसे बढ़ाया जाए और क्या सिर्फ ज्यादा खाना ही इसका समाधान है?. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे जल्दी से वजन बढ़ा सकते हैं. 

एक्सपर्ट के अनुसार, वजन बढ़ाना उतना आसान नहीं है जितना लोग समझते हैं. कई बार कुछ लोग भरपूर खाना खाते हैं, लेकिन फिर भी उनका वजन नहीं बढ़ता. इसके पीछे तेज मेटाबॉलिज्म, ज्यादा शारीरिक गतिविधि, तनाव, कम भूख या कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं, 

कैसे बढ़ा सकते हैं वजन?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली clearmedi के अनुसार, अगर आपका लक्ष्य वजन बढ़ाना है, तो सबसे पहले शरीर की जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेना जरूरी होता है. इसे कैलोरी सरप्लस कहा जाता है. यानी शरीर जितनी कैलोरी खर्च करता है, उससे 300 से 500 कैलोरी अधिक लेने पर धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है. वहीं जो लोग तेजी से वजन बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें रोजाना लगभग 700 अतिरिक्त कैलोरी लेने की जरूरत पड़ सकती है. 

किन चीजों को डाइट में शामिल करना चाहिए?

 वजन बढ़ाने के लिए जंक फूड या तली-भुनी चीजों का सहारा लेना सही तरीका नहीं माना जाता. एक्सपर्ट का कहना है कि वजन बढ़ाने के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों पर ध्यान देना चाहिए, इसके लिए एवोकाडो, अखरोट, ऑलिव ऑयल जैसे हेल्दी फैट, ओट्स, शकरकंद और ब्राउन राइस जैसे कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट तथा अंडे, मछली और ग्रीक योगर्ट जैसे प्रोटीन सोर्स फायदेमंद हो सकते हैं.

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भर्ती के लिए कैसी होनी चाहिए आपकी डाइट?

यदि भर्ती से पहले वजन थोड़ा कम पड़ रहा है, तो दिनभर में छोटे-छोटे अंतराल पर 5 से 6 बार भोजन करना मददगार हो सकता है. इसके अलावा दूध, पीनट बटर, केला और प्रोटीन पाउडर से बने हाई-कैलोरी शेक भी कैलोरी बढ़ाने का आसान तरीका माने जाते हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि सिर्फ खाना ही पर्याप्त नहीं है. अगर आप मांसपेशियों के रूप में वजन बढ़ाना चाहते हैं तो वेट ट्रेनिंग भी जरूरी है. बहुत ज्यादा दौड़ने या कार्डियो करने से शरीर अतिरिक्त कैलोरी जला देता है, जिससे वजन बढ़ाने का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है. 

नींद भी जरूरी है?

भोजन के साथ पर्याप्त नींद भी बेहद जरूरी है. रात में कम से कम 8 घंटे की नींद लेने से शरीर को रिकवरी और मांसपेशियों के विकास में मदद मिलती है. इसके अलावा किसी भी भोजन को छोड़ने से बचना चाहिए, क्योंकि लगातार कैलोरी की कमी वजन बढ़ाने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है. अगर लगातार कोशिशों के बावजूद वजन नहीं बढ़ रहा है, तो इसके पीछे हाइपरथायरॉयडिज्म, टाइप-1 डायबिटीज या पोषक तत्वों से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं. ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. सही खानपान, नियमित व्यायाम और पर्याप्त आराम के जरिए स्वस्थ तरीके से वजन बढ़ाया जा सकता है और भर्ती के लिए जरूरी मानकों को हासिल करने में मदद मिल सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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एक साथ 50 अंडे खाने पर क्या सच में हो जाती है मौत, जानिए क्या है इसके पीछे की सच्चाई?

एक साथ 50 अंडे खाने पर क्या सच में हो जाती है मौत, जानिए क्या है इसके पीछे की सच्चाई?


Can Eating 50 Eggs At Once Cause Death: अंडा प्रोटीन, विटामिन और कई जरूरी पोषक तत्वों का बेहतरीन सोर्स माना जाता है. फिटनेस एक्सपर्ट्स से लेकर डॉक्टर तक इसे संतुलित मात्रा में खाने की सलाह देते हैं. लेकिन क्या होगा अगर कोई एक बार में 50 अंडे खाने की कोशिश करे? क्या इससे सच में मौत हो सकती है? यह सवाल तब चर्चा में आया जब उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में एक व्यक्ति की मौत कथित तौर पर 50 अंडे खाने की शर्त के दौरान हो गई. 

क्या है मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जौनपुर के बिबीगंज बाजार इलाके में दो दोस्तों के बीच बहस हो गई. विवाद को खत्म करने के लिए दोनों ने 2,000 रुपये की शर्त लगाई कि कौन सबसे पहले 50 अंडे खा सकता है. बताया जाता है कि 42 वर्षीय सुभाष यादव 42वां अंडा खा रहे थे, तभी अचानक बेहोश होकर गिर पड़े. आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया. इसके बाद में उन्हें बेहतर इलाज के लिए पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रेफर किया गया, लेकिन कुछ घंटों बाद उनकी मौत हो गई. इलाज करने वाले डॉक्टरों का मानना था कि अत्यधिक मात्रा में भोजन करने की वजह से शरीर पर गंभीर असर पड़ा हो सकता है. हालांकि, परिवार ने इससे इंकार किया था. 

क्या ज्यादा अंडे खाने से हो सकती है दिक्कत?

एक्सपर्ट के अनुसार, एक साथ बहुत अधिक मात्रा में अंडे खाने से पाचन तंत्र पर अचानक भारी दबाव पड़ सकता है, इससे उल्टी, सांस की नली में भोजन फंसने एस्पिरेशन, पेट में गंभीर असहजता और कुछ मामलों में हार्ट के काम करने के तरीकों पर भी असर पड़ सकता है. अंडे की जर्दी में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है और इतनी बड़ी मात्रा में इसका सेवन शरीर के लिए सामान्य नहीं माना जाता. एक स्टडी में यह दावा किया गया था कि रोजाना अंडे खाने से मृत्यु का खतरा 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. हालांकि साइंटिस्ट का कहना है कि इस संबंध को पूरी तरह साबित करने के लिए और अधिक शोध की जरूरत है. 

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किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी के रिसर्चर यीगु झांग के अनुसार, हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि हार्ट स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए पूरे अंडों की जगह अंडे की सफेदी या अन्य प्रोटीन स्रोतों को चुनना फायदेमंद हो सकता है. बढ़ी हुई मृत्यु दर पर कोलेस्ट्रॉल सेवन का महत्वपूर्ण प्रभाव देखा गया. वहीं,यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर रियाज पटेल के अनुसार, ज्यादातर लोगों के लिए अंडे संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं और इन्हें सीमित मात्रा में खाना सुरक्षित माना जाता है, जब तक कि किसी एक्सपर्ट या डाइट संबंधी कारण से मना न किया गया हो.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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वक्त से पहले मेनोपॉज हुआ तो बढ़ जाता है इस बीमारी का खतरा, महिलाओं को भारी पड़ रही यह दिक्कत

वक्त से पहले मेनोपॉज हुआ तो बढ़ जाता है इस बीमारी का खतरा, महिलाओं को भारी पड़ रही यह दिक्कत


Early Menopause May Increase Heart Attack Risk: महिलाओं के लिए मेनोपॉज जीवन का एक सामान्य चरण माना जाता है, लेकिन अगर यह प्रक्रिया समय से पहले शुरू हो जाए तो इसके गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं. हाल ही में मेडिकल जर्नल द लैंसेट ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी एंड वीमेंस हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि 40 साल की उम्र से पहले मेनोपॉज का अनुभव करने वाली महिलाओं में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ सकता है.

यह स्टडी 26 देशों की 1.11 लाख से अधिक महिलाओं के आंकड़ों पर आधारित है. रिसर्चर ने पाया कि जिन महिलाओं में 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज हुआ, उनमें सामान्य उम्र में मेनोपॉज होने वाली महिलाओं की तुलना में हृदय रोगों का खतरा 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक था.

भारत में क्या है स्थिति

भारत से जुड़े आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं. स्टडी में शामिल 7,872 भारतीय महिलाओं में से 1,445 महिलाओं यानी 18.4 प्रतिशत ने समय से पहले मेनोपॉज का अनुभव किया था. वहीं 25.3 प्रतिशत महिलाओं में 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज हुआ. कुल मिलाकर 43.6 प्रतिशत भारतीय महिलाओं में या तो प्रीमैच्योर या फिर अर्ली मेनोपॉज देखा गया. 

किन दिक्कतों का बढ़ता है खतरा?

स्टडी की प्रमुख रिसर्चर डॉ. सिमोन मार्शनर, जो ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी स्थित वेस्टमीड एप्लाइड रिसर्च सेंटर से जुड़ी हैं, वो कहती हैं कि जल्दी मेनोपॉज महिलाओं में भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है. इस विषय पर डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी ने बताया कि मेनोपॉज से पहले महिलाओं को एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन हार्ट और ब्लड वेसल्स से जुड़ी बीमारियों से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करते हैं. लेकिन मेनोपॉज के बाद यह सुरक्षा धीरे-धीरे कम हो जाती है और हार्ट अटैक का खतरा पुरुषों के समान स्तर तक पहुंच सकता है.

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दक्षित एशिया में यह स्थिति खराब

रिसर्च में यह भी सामने आया कि दक्षिण एशिया और निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों की महिलाओं में मेनोपॉज अपेक्षाकृत कम उम्र में होता है. जहां वैश्विक स्तर पर मेनोपॉज की औसत उम्र 47.4 वर्ष रही, वहीं दक्षिण एशिया में यह केवल 44.7 वर्ष दर्ज की गई. 

किन कारणों से बढ़ रही है मेनोपॉज की दिक्कत?

डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी के अनुसार, तनाव, धूम्रपान, खराब खानपान, पर्याप्त नींद की कमी, डायबिटीज, पर्यावरण प्रदूषण और यहां तक कि सेकेंड हैंड स्मोकिंग भी समय से पहले मेनोपॉज का कारण बन सकती है. उनका कहना है कि पुरुषों के धूम्रपान से निकलने वाला धुआं भी महिलाओं में अर्ली मेनोपॉज का जोखिम बढ़ा सकता है. एक्सपर्ट का मानना है  कि भारत में एनीमिया, कम उम्र में शादी, बार-बार गर्भधारण और पोषण संबंधी समस्याएं भी मेनोपॉज की उम्र को प्रभावित कर सकती हैं. डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट रोगों की जांच के साथ मेनोपॉज स्क्रीनिंग को भी जोड़ा जाना चाहिए, ताकि जोखिम वाली महिलाओं की समय रहते पहचान की जा सके.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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