क्या आपके घर में भी हैं चूहे? जानलेवा ‘हंता वायरस’ को लेकर डॉक्टरों ने क्या कहा?

क्या आपके घर में भी हैं चूहे? जानलेवा ‘हंता वायरस’ को लेकर डॉक्टरों ने क्या कहा?


Can Hantavirus Spread From Person To Person: हाल ही में एक रेयर इंफेक्शन ने पूरी दुनिया में चिंता बढ़ा दी है. एक जहाज पर कई लोगों की मौत के बाद यह बीमारी फिर चर्चा में आ गई. जांच में पता चला कि यह इंफेक्शन चूहों से फैलने वाले एक खास प्रकार के वायरस हंता वायरस से जुड़ा है. हालांकि एक्सपर्ट मानते हैं कि आम लोगों के लिए इसका खतरा बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन लापरवाही करना भी ठीक नहीं माना जा रहा. 

कैसे फैलती है यह बीमारी?

यह इंफेक्शन नया नहीं है. कई दशकों से अलग-अलग देशों में इसके मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर समय यह बीमारी सामान्य चर्चा से दूर रही. अब जब इसके मामले बढ़ने लगे हैं, तो लोग इसके बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं. यह बीमारी मुख्य रूप से चूहों के मल, पेशाब और लार से फैलती है. जब बंद पड़े कमरे, गोदाम या धूलभरी जगहों की सफाई की जाती है, तब हवा में मौजूद इंफेक्शन कण सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं. यही वजह है कि लंबे समय से बंद घरों या स्टोर रूम की सफाई के दौरान खतरा बढ़ जाता है. 

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

हैदराबाद के सीनियर डॉक्टर के. सी. मिश्रा ने TOI को बताया कि लोगों में सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि यह बीमारी सामान्य बुखार की तरह तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है. जबकि अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता. उनका कहना है कि असली खतरा इंफेक्टेड वातावरण से होता है, न कि किसी इंफेक्टेड व्यक्ति के पास बैठने से. बेंगलुरु के इंफेक्शन रोग एक्सपर्ट सुब्रमण्यम स्वामीनाथन के मुताबिक, कई लोग मानते हैं कि यह बीमारी सिर्फ जंगलों या दूरदराज इलाकों तक सीमित है, जबकि सच्चाई यह है कि जहां चूहे मौजूद हैं, वहां खतरा हो सकता है. चाहे वह घर का स्टोर रूम हो, पुराना गोदाम या लंबे समय से बंद पड़ा कमरा. 

क्या होते हैं इस बीमारी के लक्षण?

इस बीमारी की शुरुआत बेहद सामान्य लक्षणों से होती है, तेज बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी और थकान जैसी दिक्कतें शुरू में साधारण वायरल इंफेक्शन जैसी लगती हैं. यही कारण है कि कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते. लेकिन कुछ मामलों में अचानक सांस लेने में परेशानी, लंग्स में पानी भरना और शरीर के जरूरी अंगों पर असर जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है. एक्सपर्ट का कहना है कि इस इंफेक्शन का कोई निश्चित इलाज या टीका फिलहाल उपलब्ध नहीं है. इसलिए समय पर अस्पताल पहुंचना और सही देखभाल सबसे जरूरी मानी जाती है. जल्दी इलाज मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ऑफिस की चाय-कॉफी और AC की हवा आपको कर रही बीमार, बढ़ रहा किडनी खराब होने का खतरा

ऑफिस की चाय-कॉफी और AC की हवा आपको कर रही बीमार, बढ़ रहा किडनी खराब होने का खतरा


Why Office Workers Get Dehydrated In AC Rooms: पहली नजर में यही लगता है कि तेज धूप में काम करने वाले लोग ही सबसे ज्यादा डिहाइड्रेशन का शिकार होते होंगे. लेकिन असल तस्वीर कुछ अलग है. कई बार पूरे दिन एसी में बैठे ऑफिस जाने वाले लोग दिन के अंत तक ज्यादा डिहाइड्रेटेड मिलते हैं, बस फर्क इतना है कि यह समस्या धीरे-धीरे और चुपचाप बढ़ती है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

केयर हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. पी. विक्रांत रेड्डी ने TOI को बताया कि यह अब उनके लिए नई बात नहीं रही. उनके अनुसार, ऐसा लगता है कि बाहर काम करने वाले लोग ज्यादा डिहाइड्रेट होंगे, लेकिन व्यवहार में अक्सर ऑफिस में बैठे लोग ही कम पानी पीते हैं.” इसकी वजह आलस नहीं, बल्कि हमारा काम करने का तरीका और माहौल है.

एयर कंडीशनर का क्या होता है असर?

एयर कंडीशनर में बैठने से शरीर के संकेत कमजोर पड़ जाते हैं. आमतौर पर प्यास हमें पानी पीने का संकेत देती है, लेकिन जब न पसीना आता है, न गर्मी लगती है, तो यह संकेत धीरे-धीरे नजरअंदाज हो जाता है. ऐसे में घंटों निकल जाते हैं और हमें एहसास भी नहीं होता कि शरीर पानी खो रहा है. डॉ. रेड्डी बताते हैं कि ठंडी हवा आराम जरूर देती है, लेकिन वह सूखापन भी बढ़ाती है. शरीर त्वचा और सांस के जरिए लगातार पानी खोता रहता है, बस यह नजर नहीं आता. यही कारण है कि एसी में बैठने वाले लोग बिना महसूस किए डिहाइड्रेशन की तरफ बढ़ जाते हैं.

चाय और कॉफी भी नुकसानदायक

ऑफिस में चाय और कॉफी का चलन भी इस समस्या को बढ़ाता है. दिनभर लोग कई कप चाय या कॉफी पीते रहते हैं और मान लेते हैं कि उन्होंने पर्याप्त तरल ले लिया है. लेकिन हकीकत यह है कि ये ड्रिंक्स पानी की जगह ले लेती हैं, उसे बढ़ाती नहीं हैं. डॉ. रेड्डी के मुताबिक, लोगों को लगता है कि वे दिनभर कुछ न कुछ पीते रहे हैं, लेकिन असल में उनका शरीर उतना हाइड्रेट नहीं होता जितना होना चाहिए. यही वजह है कि दिन के अंत तक थकान और भारीपन महसूस होता है.

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क्या होते हैं इसके लक्षण?

डिहाइड्रेशन के लक्षण भी बहुत सामान्य लगते हैं कि जैसे हल्का सिरदर्द, ध्यान में कमी या शाम तक थकावट. लोग इन्हें काम का दबाव या नींद की कमी समझ लेते हैं, जबकि कई बार असली कारण पानी की कमी होता है. लंबे समय तक बैठे रहने से यह समस्या और बढ़ जाती है. जब हम घंटों एक जगह बैठकर काम करते हैं, तो शरीर के संकेतों पर ध्यान ही नहीं जाता. न उठने का मौका मिलता है, न पानी पीने का ध्यान आता है.

क्या हो सकती है दिक्कत?

डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि अगर लंबे समय तक पानी की कमी बनी रहे, तो इससे किडनी स्टोन या यूरिन इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. ये असर तुरंत नहीं दिखते, लेकिन धीरे-धीरे गंभीर हो सकते हैं. अच्छी बात यह है कि इसका समाधान बहुत मुश्किल नहीं है. बस दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीने की आदत डालनी होगी, चाय-कॉफी पर निर्भरता कम करनी होगी और बीच-बीच में उठकर ब्रेक लेना होगा.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या कमजोरी दूर करने के लिए कलेजी खाना है सही? खाने से पहले जान लें ये सच

क्या कमजोरी दूर करने के लिए कलेजी खाना है सही? खाने से पहले जान लें ये सच


Does Eating Liver Increase Blood In The Body: हममे से ज्यादातर लोगों ने बचपन से यह बात जरूर सुनी होगी कि कलेजी खाने से शरीर में खून बढ़ता है और कमजोरी दूर होती है. खासकर गर्भवती महिलाओं या शरीर में खून की कमी वाले लोगों को इसे खाने की सलाह दी जाती रही है. यही वजह है कि बकरी या मुर्गे की कलेजी बहुत से लोग स्वाद और सेहत दोनों के लिए खाते हैं. लेकिन क्या सच में यह शरीर के लिए इतनी फायदेमंद होती है, और क्या इसे खाने से इंसानी जिगर मजबूत हो सकता है?. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक कलेजी पोषक तत्वों से भरपूर मानी जाती है. इसमें शरीर के लिए जरूरी लौह तत्व, प्रोटीन और कई तरह के विटामिन पाए जाते हैं. खासतौर पर इसमें मौजूद ऐसा लौह तत्व शरीर आसानी से सोख लेता है, जिससे खून की कमी दूर करने में मदद मिल सकती है. यही कारण है कि कमजोरी या खून की कमी वाले लोगों को सीमित मात्रा में इसे खाने की सलाह दी जाती है.

क्यों जरूरी है यह?

एक्सपर्ट बताते हैं कि इसमें मौजूद विटामिन शरीर में रेड ब्लड सेल्स के निर्माण, दिमागी विकास और याददाश्त के लिए भी जरूरी माना जाता है. इसके साथ ही इसमें अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन पाया जाता है, जो मांसपेशियों की मरम्मत और बीमारी के बाद शरीर को दोबारा ताकत देने में मदद कर सकता है. इसके अलावा इसमें मौजूद एक खास विटामिन शरीर की इम्यून सिस्टम क्षमता मजबूत करने में मदद करता है. यह आंखों की रोशनी, त्वचा और शरीर के अंदर की झिल्लियों को स्वस्थ बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है. 

किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

हालांकि एक्सपर्ट यह भी चेतावनी देते हैं कि किसी भी चीज की अधिकता नुकसान पहुंचा सकती है. कलेजी में कुछ विटामिन बहुत ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए इसका जरूरत से ज्यादा सेवन शरीर पर उल्टा असर डाल सकता है. खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को इसे सीमित मात्रा में खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि अधिक मात्रा गर्भ में पल रहे शिशु के लिए नुकसानदायक मानी जाती है. 

बच्चों के लिए ध्यान

बच्चों के लिए भी इसे संतुलित मात्रा में ही देना चाहिए. न्यूट्रिशन एक्सपर्ट का कहना है कि कम उम्र के बच्चों को बहुत ज्यादा कलेजी नहीं खिलानी चाहिए. इसके साथ ही इसे ज्यादा तेल में तलने के बजाय हल्के मसालों में पकाकर देना बेहतर माना जाता है, ताकि इसके पोषक तत्व सुरक्षित रह सकें. वहीं जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उन्हें भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.  

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इस बात का रखें ध्यान

सबसे जरूरी बात यह है कि जानवरों की कलेजी खाने से इंसानी लिवर की बीमारी ठीक नहीं होती. एक्सपर्ट का साफ कहते हैं कि इस धारणा का कोई साइंटफिक आधार नहीं है. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद ही सबसे ज्यादा जरूरी मानी जाती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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एक दिन में कितना मीठा खाना है सही, जानिए कितने ग्राम शक्कर से शरीर को नहीं होता नुकसान?

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Daily Sugar Limit: सुबह एक कप चाय की मिठास, दोपहर में एक टुकड़ा मिठाई की खुशी, ऑफिस में बिस्किट और शाम को शरबत या कोल्ड ड्रिंक, कब कितनी चीनी  हमारी शरीर में जा रही है, इसका अंदाजा हमें खुद नहीं रहता. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही मीठा कब आपके शरीर के लिए नुकसान बन जाता है? मीठास धीरे-धीरे हमारे शरीर के लिए जहर भी बन सकती है. इसलिए स्वाद और सेहत के बीच की यह पतली लाइन समझना आज बेहद जरूरी हो गया है. साथ ही डॉक्टरों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन न केवल मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों को न्योता देता है, बल्कि त्वचा पर झुर्रियां और समय से पहले बुढ़ापा भी ला सकता है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर एक दिन में कितनी शक्कर लेना सुरक्षित माना जाता है. 

WHO के अनुसार कितनी शुगर है सुरक्षित?

रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे WHO मानती हैं कि रोजाना ली जाने वाली “फ्री शुगर” यानी जो चीनी हम खाने-पीने में अलग से लेते हैं, उसे सीमित रखना चाहिए.  WHO के मुताबिक, कुल कैलोरी का 10 प्रतिशत से कम शुगर लेना चाहिए, और बेहतर सेहत के लिए इसे 5 प्रतिशत यानी करीब 25 ग्राम (लगभग 6 चम्मच) तक सीमित करना ज्यादा फायदेमंद माना गया है. यही मात्रा शरीर के लिए सुरक्षित मानी जाती है और इससे मोटापा, डायबिटीज और दांतों की समस्या का खतरा भी कम रहता है. 

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पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग सीमा

इसके अलावा, अलग-अलग हेल्थ संस्थाओं ने पुरुष और महिलाओं के लिए भी शुगर की सीमा अलग- अलग तय की है.  जिसमें आमतौर पर महिलाओं के लिए लगभग 25 ग्राम और पुरुषों के लिए 30 से 36 ग्राम तक की मात्रा सही मानी जाती है. वहीं कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि भारतीयों के लिए 20 से 25 ग्राम शुगर रोजाना पर्याप्त है. इससे ज्यादा मात्रा शरीर में फैट बढ़ाने के साथ-साथ हार्ट, लिवर और ब्लड शुगर से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है. 

छिपी हुई शुगर से रहें सावधान

ध्यान देने वाली बात यह है कि सिर्फ मिठाई या चीनी ही नहीं, बल्कि कई पैकेज्ड फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, जूस और स्नैक्स में भी अधिक मात्रा में छिपी हुई शुगर होती है. एक सॉफ्ट ड्रिंक में ही कई बार पूरे दिन की तय मात्रा से ज्यादा शुगर होती है. इसलिए जरूरी है कि लोग अपनी डाइट में छिपी शुगर को पहचानें और कम करें. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप संतुलित मात्रा में शुगर लेते हैं और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाते हैं, तो आप कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं. 

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आपकी हड्डियों को मजबूत कर देंगे ये देसी फूड, 40 के बाद भी बोल्ट की तरह दौड़ेंगे आप

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20 मई को बंद रहेंगी दवा की दुकानें! ऑनलाइन फॉर्मेसी के खिलाफ 12 लाख केमिस्टों का ‘भारत बंद’

20 मई को बंद रहेंगी दवा की दुकानें! ऑनलाइन फॉर्मेसी के खिलाफ 12 लाख केमिस्टों का ‘भारत बंद’


अगर आप या आपके परिवार का कोई भी सदस्य नियमित रूप से किसी बीमारी की दवा लेता है तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. दरअसल, 20 मई 2026 (बुधवार) को देशभर में दवाइयों की किल्लत हो सकती है, क्योंकि ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के नेतृत्व में देश भर के 12.40 लाख से भी ज्यादा केमिस्ट ‘भारत बंद’ की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में देश के ज्यादातर शहरों, कस्बों और गांवों में दवा की दुकानें पूरी तरह से बंद रहने की आशंका है. 

हड़ताल पर क्यों जा रहे हैं केमिस्ट?

दवा विक्रेताओं के इस बड़े विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह इंटरनेट पर बिकने वाली दवाएं यानी ‘ई-फार्मेसी’ और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला भारी डिस्काउंट है. केमिस्टों का साफ तौर पर कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दवाओं की बिक्री बिना किसी सख्त नियम-कानून के हो रही है. इससे उनके व्यापार पर तो ताला लगने की नौबत आ ही गई है, लेकिन यह मरीजों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है.

केमिस्टों ने बताईं अपनी 3 सबसे बड़ी चिंताएं

बिना सही जांच के मिल रहीं दवाएं: केमिस्टों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि ऑनलाइन वेबसाइट्स और ऐप्स पर बिना किसी डॉक्टर की सही पर्ची के धड़ल्ले से दवाएं बेची जा रही हैं. इंटरनेट पर लोग एक ही पर्चे को बार-बार अपलोड करके दवाएं मंगा रहे हैं. कई मामलों में तो फर्जी पर्चों के जरिए नशीली दवाएं और हैवी एंटीबायोटिक्स आसानी से घर पहुंच रही हैं. इससे आम लोगों की सेहत को नुकसान पहुंच रहा है.

बड़ी कंपनियों की भारी छूट से छोटे दुकानदार बर्बाद: बड़े कॉरपोरेट घराने ऑनलाइन प्लेटफार्म्स पर दवाइयों पर इतनी भारी छूट दे रहे हैं कि उनके सामने मोहल्ले, गांव-कस्बों और छोटे शहरों के साधारण केमिस्ट टिक ही नहीं पा रहे हैं. लगातार हो रहे भारी घाटे की वजह से छोटे दुकानदारों का व्यापार ठप होने लगा है और दुकानें बंद हो रही हैं.

कोरोना काल के ढीले नियमों का गलत इस्तेमाल: कोरोना महामारी (Covid-19) के दौरान जब घर से निकलना मुश्किल था, तब सरकार ने दवाओं की बिक्री से जुड़े कुछ नियमों में अस्थायी तौर पर ढील दी थी. केमिस्टों का कहना है कि महामारी खत्म होने के बाद भी वे नियम आज तक लागू हैं और ई-फार्मेसी कंपनियां इसका जमकर गलत फायदा उठा रही हैं.

क्या हैं संगठन की मुख्य मांगें?

  • कोरोना काल में जारी किए गए अस्थायी नियम (G.S.R. 220(E)) को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए.
  • ऑनलाइन फॉर्मेसी को छूट देने वाली अधिसूचना (G.S.R. 817(E)) को पूरी तरह वापस लिया जाए.
  • बड़ी कंपनियों द्वारा बाजार के नियम तोड़कर दी जाने वाली भारी छूट पर पाबंदी लगे.

मरीजों की जान और 5 करोड़ लोगों के रोजगार का सवाल

AIOCD के अध्यक्ष जे. एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने चेतावनी दी है कि यह लड़ाई सिर्फ केमिस्टों का धंधा बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ गंभीर मामला है. इन अवैध ई-फॉर्मेसी और भारी छूट के कारण दवा व्यापार से जुड़े करीब 5 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी पर बड़ा संकट आ गया है. संगठन ने अल्टीमेटम दिया है कि अगर 20 मई तक उनकी समस्याओं पर ध्यान देकर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया तो यह हड़ताल सिर्फ एक दिन की नहीं रहेगी. इसके बाद देशभर के केमिस्ट लंबे समय तक आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिससे पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.

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