डेंगू होने पर सेहत के लिए पपीते के पत्ते कितने फायदेमंद? डॉक्टरों ने बताई सच्चाई

डेंगू होने पर सेहत के लिए पपीते के पत्ते कितने फायदेमंद? डॉक्टरों ने बताई सच्चाई


कई लोग सोचते हैं कि डेंगू साधारण बुखार है और घर पर ही ठीक हो जाएगा. लेकिन सच्चाई यह है कि डेंगू शुरुआत में हल्का लग सकता है. लेकिन यह अचानक गंभीर रूप ले सकता है. प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं. शरीर में पानी की कमी और अंदरूनी ब्लीडिंग का खतरा हो सकता है. इसलिए डेंगू में डॉक्टर की निगरानी बहुत जरूरी होती है. पपीते के पत्तों में कुछ पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C, फ्लेवोनोइड और पैपेन जैसे एंजाइम. कुछ पुराने अध्ययनों और अनुभवों के आधार पर यह माना जाने लगा कि इससे प्लेटलेट्स बढ़ सकते हैं. इसी वजह से लोग इसे प्राकृतिक इलाज समझने लगे. लेकिन लोकप्रिय होना और वैज्ञानिक रूप से सही होना दोनों अलग बातें हैं.

पपीते के पत्तों में कुछ पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C, फ्लेवोनोइड और पैपेन जैसे एंजाइम. कुछ पुराने अध्ययनों और अनुभवों के आधार पर यह माना जाने लगा कि इससे प्लेटलेट्स बढ़ सकते हैं. इसी वजह से लोग इसे प्राकृतिक इलाज समझने लगे. लेकिन लोकप्रिय होना और वैज्ञानिक रूप से सही होना दोनों अलग बातें हैं.

पपीते के पत्तों में कुछ पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C, फ्लेवोनोइड और पैपेन जैसे एंजाइम. कुछ पुराने अध्ययनों और अनुभवों के आधार पर यह माना जाने लगा कि इससे प्लेटलेट्स बढ़ सकते हैं. इसी वजह से लोग इसे प्राकृतिक इलाज समझने लगे. लेकिन लोकप्रिय होना और वैज्ञानिक रूप से सही होना दोनों अलग बातें हैं.

Published at : 14 Jan 2026 10:18 AM (IST)

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बिना दवा गर्दन की जकड़न दूर करें, अपनाएं ये 5 आसान एक्सरसाइज

बिना दवा गर्दन की जकड़न दूर करें, अपनाएं ये 5 आसान एक्सरसाइज


ठुड्डी को अंदर की ओर खींचने की एक्सरसाइज, इस एक्सरसाइज को करने के लिए सीधे बैठ जाएं और सामने देखें. अब ठुड्डी को बिना नीचे झुकाए, धीरे-धीरे गर्दन की तरफ पीछे खींचें. ऐसा करने पर हल्की सी दोहरी ठुड्डी बनती है. इस स्थिति में 5 सेकंड रुकें फिर आराम से छोड़ दें. इसे 10 से 15 बार दोहराए. यह गर्दन को सीधा रखने में मदद करता है, सिरदर्द कम करता है और सही बैठने की आदत बनाता है. ऑफिस में हर घंटे इसका एक सेट करना बहुत फायदेमंद है.

साइड में गर्दन झुकाने का एक्सरसाइज, इसमें सबसे पहले कंधों को ढीला छोड़ दें और उन्हें कानों से दूर रखें. अब सिर को धीरे-धीरे दाईं तरफ झुकाएं, जैसे कान को कंधे के पास ले जाना हो. चाहें तो दाहिने हाथ से सिर को हल्का सा सहारा दें. 20 से 30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें फिर दूसरी तरफ यही प्रक्रिया करें दोनों तरफ 2-2 बार करें. यह एक्सरसाइज उन मांसपेशियों को ढीला करता है और गर्दन को हल्का महसूस कराता है सुबह उठकर इसे करने से पूरा दिन आराम महसूस होता है.

साइड में गर्दन झुकाने का एक्सरसाइज, इसमें सबसे पहले कंधों को ढीला छोड़ दें और उन्हें कानों से दूर रखें. अब सिर को धीरे-धीरे दाईं तरफ झुकाएं, जैसे कान को कंधे के पास ले जाना हो. चाहें तो दाहिने हाथ से सिर को हल्का सा सहारा दें. 20 से 30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें फिर दूसरी तरफ यही प्रक्रिया करें दोनों तरफ 2-2 बार करें. यह एक्सरसाइज उन मांसपेशियों को ढीला करता है और गर्दन को हल्का महसूस कराता है सुबह उठकर इसे करने से पूरा दिन आराम महसूस होता है.

Published at : 14 Jan 2026 09:11 AM (IST)

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सर्दियों में शकरकंद बना सुपरफूड, जानिए दिल से लेकर इम्युनिटी तक शकरकंद के 6 बड़े फायदे

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नाखूनों में काली लाइन दिखे तो न करें नजरअंदाज, हो सकता है स्किन कैंसर का संकेत

नाखूनों में काली लाइन दिखे तो न करें नजरअंदाज, हो सकता है स्किन कैंसर का संकेत


नाखून की लेयर पर दिखने वाली काली या भूरी सीधी लाइन को मेडिकल भाषा में मेलानोनि किया कहा जाता है. यह लाइन हल्की से लेकर गहरी रंग की हो सकती है और हाथ या पैर के किसी भी नाखून में दिख सकती है. कई बार यह जन्म से होती है और कई बार उम्र के साथ दिखाई देती है.

अक्सर नाखूनों में काली लाइन किसी गंभीर बीमारी की वजह से नहीं होती, इसके पीछे कई सामान्य कारण हो सकते हैं, जैसे नाखून पर चोट लगना, शरीर में पोषण की कमी, कुछ दवाओं का असर, हार्मोनल बदलाव गहरी त्वचा वाले लोगों में यह ज्यादा आम है. इसी वजह से कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं.

अक्सर नाखूनों में काली लाइन किसी गंभीर बीमारी की वजह से नहीं होती, इसके पीछे कई सामान्य कारण हो सकते हैं, जैसे नाखून पर चोट लगना, शरीर में पोषण की कमी, कुछ दवाओं का असर, हार्मोनल बदलाव गहरी त्वचा वाले लोगों में यह ज्यादा आम है. इसी वजह से कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं.

Published at : 14 Jan 2026 08:10 AM (IST)

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गंदा पानी पीने से देश में हर साल कितने लोग पड़ते हैं बीमार, कितनों की होती है मौत?

गंदा पानी पीने से देश में हर साल कितने लोग पड़ते हैं बीमार, कितनों की होती है मौत?


भारत में पानी की समस्या हर साल लाखों लोगों की जिंदगी पर असर डालती है. शहरों और गांवों में कई लोग साफ पानी नहीं पी पाते हैं और मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ता है. यही गंदा पानी कई तरह की बीमारियों का मुख्य कारण बनता है. गंदा पानी पीने से पेट, लिवर, किडनी और स्किन जैसी समस्याएं होती हैं. गंभीर मामलों में यह मौत का कारण भी बन सकता है. हमारे देश में पानी जीवन के लिए सबसे जरूरी चीज है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल लाखों लोग गंदा या दूषित पानी पीने की वजह से गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं.

भारत में कई जगहों पर लोग आज भी साफ पानी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. यह सिर्फ गांवों की समस्या नहीं है, बल्कि शहरों और मेट्रो शहरों में भी लोग गंदे पानी के कारण बीमार हो रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि गंदा पानी पीने से देश में हर साल कितने लोग बीमार पड़ते हैं  और कितनों की मौत होती है. 

गंदे पानी से होने वाली आम बीमारियां

गंदा पानी सिर्फ अस्वस्थ महसूस कराने वाला नहीं है. यह गंभीर बीमारियों का भी कारण बन सकता है. इसमें मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और विषैले तत्व हमारे शरीर में प्रवेश करके कई तरह की समस्याएं पैदा करते हैं. जैसे – 

1. पेट संबंधी समस्याएं – उल्टी, दस्त, डायरिया, पेट दर्द, हैजा, टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियां. 

2. जिगर और लीवर की बीमारियां –  हेपेटाइटिस-ए और ई (पीलिया) जैसी समस्याएं. 

3. किडनी और गुर्दे की समस्या – गंदे पानी में मौजूद भारी धातुएं जैसे आर्सेनिक, लेड और कैडमियम धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं. 

4. स्किन संबंधी समस्या – रैशेज, एलर्जी, सोरायसिस और एक्जिमा जैसी समस्याएं. 

5. कैंसर और अन्य गंभीर रोग –  दूषित पानी में मौजूद कार्सिनोजेनिक तत्व और टॉक्सिन्स लंबे समय में कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बन सकते हैं. 

6. न्यूरोलॉजिकल समस्याएं – मेमोरी लॉस, मूड स्विंग्स और अन्य मानसिक परेशानियां भी हो सकती हैं. 

गंदा पानी पीने से देश में हर साल कितने लोग पड़ते हैं बीमार

भारत में गंदे पानी की समस्या बहुत बड़ी है. जुलाई 2022 की एक स्टडी के अनुसार, भारत में लगभग 1.95 लाख बस्तियों में लोग दूषित पानी पी रहे हैं. इससे न सिर्फ आम बीमारियां फैलती हैं, बल्कि 2019 में लगभग 23 लाख लोगों की मौत भी इसी वजह से हुई. कम्पोजिट वॉटर मैनेजमेंट इंडेक्स (CWMI) की रिपोर्ट बताती है कि हर साल भारत में दूषित पानी पीने से लगभग 2 लाख लोगों की मौत हो जाती है.अगर इस समस्या को समय पर हल नहीं किया गया, तो 2030 तक लगभग 60 करोड़ लोग पानी की कमी और दूषित पानी की समस्या से जूझ सकते हैं. 

गंदा पानी कहां ज्यादा है?

विशेषज्ञों के अनुसार, शहरों के स्लम और कंजेस्टेड इलाके गंदे पानी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. एनसीआर क्षेत्र और दिल्ली-एनसीआर में पानी की सप्लाई खराब होने की वजह से लोग बार-बार बीमार पड़ते हैं.छोटे-छोटे सेक्टरों, कॉलोनियों और अपार्टमेंट में गंदा पानी सप्लाई होने के कारण हर महीने कई सौ लोग अस्पताल जाते हैं. 

विशेषज्ञों की चेतावनी

डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी पीने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी असर पड़ता है. समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर संक्रमण किडनी और लीवर तक फैल सकता है.विशेषज्ञों ने अधिकारियों से अपील की है कि खराब पाइप लाइन बदल कर और पानी की नियमित जांच कर लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराया जाए. ॉ

घर पर सावधानी और ट्रीटमेंट

1. पीने का पानी – हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं.

2. इलेक्ट्रोलाइट्स – डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नींबू पानी, नारियल पानी और ओआरएस का यूज करें.

3. हल्का खाना– उल्टी या दस्त होने पर खिचड़ी, दही-चावल, केला जैसे हल्का खाना लें.

4. अलर्ट रहें – लगातार दस्त, उल्टी, तेज बुखार, पेशाब कम होना या शरीर/आंखों में पीलापन दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

5.हाइजीन – ताजा और ढका हुआ खाना खाएं, हाथों को अच्छे से धोएं और समय पर टीकाकरण करवाएं. 

इसे भी पढ़ें:  Lung Cancer Symptoms: बच्चे तो नहीं करते स्मोकिंग फिर उन्हें क्यों हो जाता है लंग कैंसर, क्या हैं इसके कारण?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सावधान! आपका एक कमेंट ले सकता है किसी की जान, इस स्टडी में सामने आया बॉडी शेमिंग का खौफनाक सच

सावधान! आपका एक कमेंट ले सकता है किसी की जान, इस स्टडी में सामने आया बॉडी शेमिंग का खौफनाक सच


Effects Of Body Shaming On Mental Health: किसी के रंग को लेकर, किसी के शरीर की बनावट को लेकर. यहां तक कि कौन क्या खाता है, कैसे रहता है, क्या बोलता है जैसे तमाम मुद्दे हैं, जिनको लेकर इंसान को ट्रोल होना पड़ता है. यह दिक्कत सालों से चली आ रही है. इसको लेकर आई एक स्टडी में बताया गया है कि युवाओं में बॉडी इमेज को लेकर बढ़ती चिंता मेंटल हेल्थ समस्या बनती जा रही है. यह परेशानी सिर्फ मोटापे से जूझ रहे युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कम वजन वाले युवा भी उतनी ही गंभीर मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं. स्टडी में सामने आया है कि शरीर के वजन के दोनों छोरों पर मौजूद करीब हर दूसरा युवा बॉडी इमेज से जुड़ी मीडियम से गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा है.

क्या निकला है रिसर्च में?

Journal of Education and Health Promotion में प्रकाशित यह अध्ययन, एम्स–आईसीएमआर के युवा एडल्ट में वजन कंट्रोल पर चल रहे रिसर्च प्रोग्राम का हिस्सा है. इसमें 18 से 30 साल के 1,071 युवाओं को शामिल किया गया, जो एम्स की ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे थे. स्टडी के मुताबिक, 49 प्रतिशत मोटे और 47 प्रतिशत कम वजन वाले युवाओं ने गंभीर बॉडी इमेज चिंता की शिकायत की, जबकि सामान्य या थोड़ा ज्यादा वजन वाले युवाओं में यह आंकड़ा करीब 36 प्रतिशत रहा.

स्टडी में शामिल युवाओं में करीब 25 प्रतिशत मोटापे से पीड़ित और 11 प्रतिशत कम वजन वाले थे. इनमें से ज्यादातर छात्र थे और मध्यम इनकम फैमिली से आते थे. आंकड़ों से पता चला कि कम वजन वाले युवा सामान्य वजन वालों की तुलना में करीब दोगुना, जबकि मोटापे से जूझ रहे युवा लगभग तीन गुना ज्यादा बॉडी इमेज तनाव झेल रहे थे.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

रिसर्च से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि वजन से जुड़ी समस्याओं का इलाज मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करके संभव नहीं है. मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर और रिसर्च प्रमुख डॉ पियूष रंजन के मुताबिक, “वजन कंट्रोल सिर्फ वजन घटाने तक सीमित नहीं है. अगर इमोशनल समस्याओं पर ध्यान न दिया जाए, तो युवा लाइफस्टाइल प्रोग्राम बीच में ही छोड़ देते हैं. इसलिए पोषण देखभाल के साथ मानसिक जांच को जोड़ना बेहद जरूरी है.” उन्होंने आगे बताया कि सामान्य वजन के लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं.

लोग वजन कम करने से पीछे हट जाते हैं

इस स्टडी का नेतृत्व न्यूट्रिशनिस्ट और पीएचडी स्कॉलर वारिशा अनवर ने किया. उन्होंने पाया कि कई युवा वजन घटाने की शुरुआत पूरे जोश के साथ करते हैं, लेकिन समय के साथ मानसिक थकान, बॉडी इमेज की चिंता, पढ़ाई का दबाव और जीवन में बदलाव उन्हें पीछे खींच लेते हैं. इससे भारत में वजन कंट्रोल को लेकर अपनाए जा रहे सिर्फ कैलोरी के नजरिए की कमी साफ झलकती है.

सामाजिक दबाव

रिसर्चर का मानना है कि समाज में मौजूद सुंदर बनने की होड़ मानसिक तनाव को और बढ़ाती है, जिससे युवाओं की प्रेरणा, इलाज से जुड़े रहने की क्षमता और लंबे समय की सेहत प्रभावित होती है. हमारे समाज में लोग लुक और बॉडी टेक्सचर से लोगों को जज करते हैं. यह सिर्फ समाज में ही नहीं, परिवार के अंदर भी इंसान को देखने को मिलता है

क्या होता है बॉडी शेमिंग?

बॉडी शेमिंग का सीधा मतलब है किसी के शरीर को लेकर कोई भी निगेटिव बात कहना. यह आप खुद के लिए भी कर सकते हैं और दूसरों के लिए भी. इसमें किसी के वजन, उम्र, बाल, कपड़े, खाने की पसंद या वो कैसा दिखता है, इन सबका मजाक उड़ाना शामिल है.

आजकल बॉडी शेमिंग हर जगह है. चाहे वह किसी के मोटापे पर मारा गया कोई कमेंट हो या सोशल मीडिया पर दिखने वाली वो “परफेक्ट बॉडी” वाली फोटो, जो असलियत में मुमकिन नहीं होती. ये सब चीजें हमें अपने शरीर को लेकर शर्मिंदा महसूस कराती हैं. चाहे कोई हमें सीधे बोले या किसी और को, यह हमारे मेंटल हेल्थ के लिए बहुत नुकसानदायक है. इससे मन में हीन भावना आती है और हमें लगता है कि हमारी वैल्यू सिर्फ हमारे लुक से है.

बॉडी शेमिंग से जुड़ी परेशानियां

  • हर वक्त घबराहट और बेचैनी रहना
  • अपनी बॉडी में कमियां ही ढूंढते रहना
  • खुद को नुकसान पहुंचाने के ख्याल आना
  • लाइफ की क्वालिटी खराब होना और हर वक्त टेंशन में रहना

इसे भी पढ़ें- Nipah Virus: निपाह वायरस कितना खतरनाक, क्या है इससे बचने का तरीका?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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