रात 11 बजे के बाद जागना पड़ सकता है भारी, महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ सकता है असर

रात 11 बजे के बाद जागना पड़ सकता है भारी, महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ सकता है असर


Sleep Cycle For Women: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं घर, नौकरी और परिवार सब संभालते-संभालते खुद की नींद से सबसे ज्यादा समझौता करती हैं. रात को देर तक मोबाइल, काम या घर के काम और फिर सुबह जल्दी उठना. यह सिलसिला हर रोज चलता रहता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि यह अधूरी नींद सिर्फ थकान नहीं, बल्कि आपके पीरियड्स, आपके शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का लेवल, शरीर में इंसुलिन कि कार्य क्षमता और मां बनने की क्षमता तक को नुकसान पहुंचा सकती है? डॉक्टरों  का कहना है कि रात 11 बजे से पहले सो जाना महिलाओं की सेहत के लिए बेहद जरूरी है और इसे नजरअंदाज करना धीरे-धीरे शरीर के अंदर कई परेशानियां पैदा करता है. 

नींद और हार्मोन्स का सीधा रिश्ता 

हमारा शरीर एक घड़ी की तरह काम करता है और नींद उस घड़ी की चाबी है. विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं के हार्मोंस और उनकी नींद का आपस में बहुत गहरा नाता है. आप रात में कुल कितने घंटे सोते हैं, यह तो जरूरी है ही. लेकिन आप किस समय पर सोते हैं, यह बात भी उतनी ही जरूरी है. साथ ही दिमाग का वही हिस्सा जो नींद और जागने के हार्मोन्स को कंट्रोल करता है, वही हिस्सा महिलाओं में ओवुलेशन यानी अंडे बनाने की प्रक्रिया को भी चलाता है. ओवुलेशन को शुरू करने वाला हार्मोन LH यानी Luteinizing Hormone गहरी नींद के दौरान बनता है. अगर नींद में बार-बार रुकावट आए तो LH का बनना कम हो जाता है जिससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या ओवुलेशन छूट सकता है. 

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कम नींद से क्या-क्या हो सकता है जानकर चौंक जाएंगी

जब महिलाएं अच्छी नींद नहीं लेती हैं या गलत समय पर सोती हैं, तो इसका सीधा असर उनके उन हार्मोन्स पर पड़ता है जो मां बनने की क्षमता को संभालते हैं. यानी एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, मेलाटोनिन, कोर्टिसोल, LH और FSH का संतुलन बिगड़ जाता है. इनमें से मेलाटोनिन हार्मोन महिलाओं के अंडों की क्वालिटी को अच्छा रखता है और उन्हें सुरक्षित रखता है, लेकिन नींद की कमी के कारण यह ठीक से नहीं बन पाता है. 

दूसरी तरफ, पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जिसे मुख्य रूप से तनाव का हार्मोन कहा जाता है. कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने के कारण दिमाग और ओवरी के बीच का आपसी संपर्क टूट जाता है, जिससे एलएच (LH) और एफएसएच (FSH) हार्मोन का बहाव रुक जाता है. ये दोनों हार्मोन अंडाशय में अंडों को विकसित करने और उन्हें सही समय पर बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार होते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो, कम सोने से तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन बढ़ते हैं और अंडों को सुरक्षित रखने वाले हार्मोन कम हो जाते हैं, जिससे महिलाओं को आगे चल कर कंसीव करने या प्रेगनेंसी में परेशानी आ सकती है.

महिलाओं को कितनी नींद लेनी चाहिए 

डॉक्टर्स के अनुसार, 7 से 8 घंटे की नींद महिलाओं की प्रजनन सेहत के लिए सबसे सही मानी जाती है.  American Society of Reproductive Medicine के एक अध्ययन में पाया गया कि जो महिलाएं इतने घंटे सोती थीं उनमें गर्भधारण की संभावना उन महिलाओं से काफी ज्यादा थी जो 7 घंटे से कम या 9 घंटे से ज्यादा सोती थीं. इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि रात 11 बजे तक जरूर सो जाए. 

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केरल में निपाह वायरस की दस्तक, जानें यह कैसे फैलता है और कितना खतरनाक?

केरल में निपाह वायरस की दस्तक, जानें यह कैसे फैलता है और कितना खतरनाक?


Nipah Outbreak in Kerala: केरल में निपाह वायरस का एक नया मामला सामने आया है‌. कोझिकोड में किए गए जांच में एक 45 वर्षीय व्यक्ति में निपाह वायरस की पुष्टि की गई है. यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने एहतियात कदम उठाए और उस आदमी के कांटेक्ट में आए लोगों की पहचान शुरू कर दी. मरीज का फिलहाल कोझिकोड मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि निपाह वायरस कैसे फैलता है और यह कितना खतरनाक है.

77 लोगों के कांटेक्ट में आया मरीज 

रिपोर्ट के अनुसार, राहत की बात यह है कि अभी तक मरीज के कांटेक्ट में आए 77 लोगों में से किसी में भी निपाह वायरस के कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए. वहीं अधिकारियों के अनुसार, 77 लोगों में से 14 तो मरीज के परिवार के सदस्य, 5 दोस्त और कलीग और 58 स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि इनमें से 15 लोगों को अति-जोखिम वाली कैटेगरी में रखा गया है. 

क्या है निपाह वायरस? 

निपाह वायरस एक जेनेटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है. इसका मुख्य सोर्स फ्रूट वेट यानी फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं. यह वायरस पहली बार 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में सामने आया था. इसके अलावा भारत, बांग्लादेश और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों में समय- समय पर इसका प्रकोप देखने को मिला है. 

कैसे फैलता है निपाह वायरस?

निपाह वायरस का इन्फेक्शन इंसानों में कई तरह से फैल सकता है, जैसे संक्रमित चमगादड़ों की लार, पेशाब या मल से दूषित फल खाने पर, कच्चा खजूर का रस पीने पर जो चमगादड़ के कांटेक्ट में आया हो, इन्फेक्टेड जानवरों खासकर सूअरों के कांटेक्ट में आने से, उसके अलावा इन्फेक्टेड मरीज की बॉडी फ्लुइड्स जैसे लार, खून या दूसरे स्राव के कांटेक्ट में आने पर यह वायरस फैलता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों में इसके इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है. 

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क्या है निपाह वायरस के लक्षण? 

इंफेक्शन के 4 से 14 दिन बाद इस वायरस के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे होते हैं. इसमें तेज बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, खांसी और गले में खराश, सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. ज्यादा खतरनाक मामलों में वायरस दिमाग तक पहुंच सकता है और ब्रेन इन्फ्लेमेशन का कारण बन सकता है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निपाह वायरस से संक्रमित 40 से 75 प्रतिशत मरीजों की मौत हो सकती है.

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हार्ट और पेट में क्यों भर जाता है पानी? रोजाना की इन गलतियों से हो सकता है गंभीर नुकसान

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Why Does Fluid Build Up Around The Heart And Abdomen: शरीर में पानी की कमी होना जितना खतरनाक है, उतना ही खतरनाक शरीर के कुछ हिस्सों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा होना भी हो सकता है. कई बार लोगों को लगता है कि पेट का अचानक फूलना या सांस फूलना सामान्य समस्या है, लेकिन यह शरीर में फ्लूइड जमा होने का संकेत भी हो सकता है. डॉक्टरों के अनुसार पेट और दिल के आसपास पानी भरना कई गंभीर बीमारियों की ओर इशारा करता है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

किन लोगों को होती है पेट में पानी भरने की दिक्कत?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था Cleveland Clinic के अनुसार पेट में पानी भरने की स्थिति को एसाइटिस कहा जाता है. यह समस्या सबसे ज्यादा लिवर सिरोसिस के मरीजों में देखी जाती है. जब लिवर खराब होने लगता है, तो शरीर में नमक और पानी का संतुलन बिगड़ जाता है. धीरे-धीरे पेट के अंदर तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे पेट असामान्य रूप से बड़ा दिखाई देने लगता है. इसके अलावा तेजी से वजन बढ़ना, टखनों में सूजन, सांस लेने में दिक्कत, पेट दर्द और थकान जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं.

क्या होते हैं इसके कारण?

डॉक्टरों के मुताबिक कुछ रोजमर्रा की आदतें इस खतरे को बढ़ा सकती हैं. लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस बी और सी जैसी बीमारियों का समय पर इलाज न कराना तथा लिवर की सेहत को लगातार नजरअंदाज करना सिरोसिस और आगे चलकर पेट में पानी भरने की वजह बन सकता है. रिसर्च में भी पाया गया है कि लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियां एसाइटिस के सबसे बड़े कारणों में शामिल हैं. 

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हार्ट में पानी भरना कितना खतरनाक?

वहीं हार्ट के आसपास पानी भरने की स्थिति को पेरिकार्डियल इफ्यूजन कहा जाता है. यह तब होता है जब दिल को घेरे रहने वाली थैली में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा हो जाता है. शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समस्या बढ़ने पर सीने में दर्द, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो सकती है. Cleveland Clinic के अनुसार इंफेक्शन का इलाज टालना, गंभीर बीमारियों को नजरअंदाज करना और हार्ट, किडनी या लिवर से जुड़ी समस्याओं का समय पर उपचार न कराना पेरिकार्डियल इफ्यूजन का जोखिम बढ़ा सकता है. कुछ मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है क्योंकि अतिरिक्त पानी दिल पर दबाव डालने लगता है.

किन चीजों को न करें इग्नोर?

डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर पेट तेजी से बढ़ रहा हो, अचानक वजन बढ़ रहा हो, सांस लेने में परेशानी हो रही हो या सीने में लगातार दर्द महसूस हो रहा हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए. समय रहते पहचान और इलाज से इस समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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आपकी आंखें खराब कर रहीं किचन में रखी ये तीन चीजें, आज ही दिखा दें बाहर का रास्ता

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Kitchen Items That Can Damage Your Eyes: घर की रसोई में मौजूद कुछ चीजें आपकी आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं. कई बार लोग इनका इस्तेमाल तो रोज करते हैं, लेकिन इनके संभावित नुकसान से अनजान रहते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार कुछ केमिकल प्रोडक्ट्स और खराब तरीके से रखी गई चीजें आंखों में जलन, इंफेक्शन और यहां तक कि गंभीर चोट का कारण बन सकती हैं. अगर आप अपनी आंखों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो किचन में मौजूद इन तीन चीजों पर विशेष ध्यान दें.

तेज केमिकल वाले किचन क्लीनर

किचन की सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले ब्लीच, अमोनिया आधारित क्लीनर और अन्य मजबूत केमिकल्स आंखों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं. सफाई के दौरान इनकी कुछ बूंदें या छींटे आंखों में चले जाएं तो जलन, लालिमा, केमिकल बर्न और गंभीर नुकसान हो सकता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें और संभव हो तो कम केमिकल वाले या सुरक्षित विकल्प चुनें. सफाई के दौरान दस्ताने और आंखों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें.

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एक्सपायर या गलत तरीके से रखे गए स्प्रे क्लीनर

कई घरों में किचन क्लीनिंग स्प्रे लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाते हैं. एक्सपायर हो चुके या खुली जगह पर रखे स्प्रे क्लीनर के कण हवा में फैलकर आंखों में पहुंच सकते हैं. इससे आंखों में जलन, पानी आना और असहजता की समस्या हो सकती है. इसलिए समय-समय पर स्प्रे क्लीनर की एक्सपायरी डेट जांचें. खराब या पुराने उत्पादों को तुरंत हटाएं और इन्हें बच्चों की पहुंच से दूर रखें.

खुले में रखे मिर्च-मसाला पाउडर

लाल मिर्च, काली मिर्च और अन्य मसालों के महीन कण आंखों में पहुंचकर तेज जलन पैदा कर सकते हैं. खुले में रखे मसाले हवा के संपर्क में आने से अधिक आसानी से उड़ते हैं और आंखों तक पहुंच सकते हैं. मसालों को हमेशा एयरटाइट कंटेनर में रखें. मसाले इस्तेमाल करने के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं और आंखों को छूने से बचें. यदि मसाले का कण आंख में चला जाए तो तुरंत साफ पानी से आंख धो लें.

आंखों की सुरक्षा है सबसे जरूरी

किचन में मौजूद ये चीजें छोटी लग सकती हैं, लेकिन लापरवाही की स्थिति में आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसलिए पुराने और एक्सपायर उत्पादों को समय पर हटाएं, केमिकल क्लीनर्स का सावधानी से इस्तेमाल करें और मसालों को सही तरीके से स्टोर करें. आपकी छोटी सी सावधानी आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ और सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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एक दिन में कितने किलोमीटर चलना होता है ठीक, इससे ज्यादा चले तो कितना खतरा?

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How Many Kilometers Should You Walk In A Day: चलना सबसे आसान और असरदार एक्सरसाइज में से एक माना जाता है. यह न सिर्फ हार्ट को स्वस्थ रखने में मदद करता है, बल्कि वजन कंट्रोल करने, मूड बेहतर बनाने और शरीर को सक्रिय रखने में भी अहम भूमिका निभाता है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर एक दिन में कितनी वॉक करना सही है और क्या जरूरत से ज्यादा चलना नुकसान भी पहुंचा सकता है?. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट goodrx के एक्सपर्ट के अनुसार हर व्यक्ति के लिए चलने की आदर्श दूरी अलग-अलग हो सकती है.  यह उसकी फिटनेस, उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और चलने की गति पर निर्भर करता है. जो व्यक्ति नियमित रूप से व्यायाम करता है, वह नए व्यक्ति की तुलना में अधिक दूरी आराम से तय कर सकता है.

कितना चलना माना जाता है सही?

एक्सपर्ट्स सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देते हैं. इसका मतलब है कि आप हफ्ते में छह दिन करीब 25 मिनट तेज चाल से चल सकते हैं. आमतौर पर यह दूरी 2 से 3 किलोमीटर के आसपास हो सकती है, हालांकि यह व्यक्ति की गति पर निर्भर करती है. 10,000 कदम प्रतिदिन चलने का लक्ष्य काफी लोकप्रिय है, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि यह कोई जादुई संख्या नहीं है. एक रिसर्च में पाया गया कि रोजाना लगभग 7,000 कदम चलने वाले लोगों में समय से पहले मृत्यु का जोखिम कम देखा गया. हालांकि 7,000 और 10,000 से अधिक कदम चलने वालों के बीच स्वास्थ्य लाभ में बहुत बड़ा अंतर नहीं पाया गया. अब 4000 स्टेप को लेकर भी क्लेम क्या जा रहा है.

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कब बढ़ सकता है खतरा?

ज्यादा चलना हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता. यदि शरीर को पर्याप्त आराम न मिले और लगातार जरूरत से ज्यादा वॉक की जाए, तो ओवरट्रेनिंग जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. ऐसे में शरीर कुछ संकेत देने लगता है जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर वॉक के बाद लंबे समय तक मांसपेशियों में दर्द बना रहे, शरीर भारी महसूस हो, लगातार थकान रहे या पहले की तुलना में आपकी परफॉर्मेंस कम हो जाए, तो यह संकेत हो सकता है कि आप जरूरत से ज्यादा चल रहे हैं. इसके अलावा बार-बार मोच आना, चोट लगना, चलने की इच्छा कम होना, चिड़चिड़ापन बढ़ना, भूख कम लगना और बार-बार सर्दी-जुकाम होना भी ओवरएक्सर्शन के संकेत माने जाते हैं.

अपने शरीर की सुनें

एक्सपर्ट का मानना है कि किसी तय संख्या के पीछे भागने से ज्यादा जरूरी है कि आप अपनी क्षमता के अनुसार सक्रिय रहें. अगर आप वॉकिंग की शुरुआत कर रहे हैं, तो धीरे-धीरे दूरी और समय बढ़ाएं. वहीं फिट लोग अपनी क्षमता के अनुसार गति, दूरी या वॉक की फ्रीक्वेंसी बढ़ा सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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रोजाना 10 हजार कदम चलने का भ्रम खत्म, सिर्फ 4000 कदम चलकर भी पूरी तरह फिट रहेगा दिल

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Walking 4000 Steps A Day May Reduce Early Death Risk: स्वस्थ रहने के लिए रोजाना 10 हजार कदम चलने की सलाह अक्सर दी जाती है, लेकिन एक नए स्टडी ने इस धारणा पर सवाल खड़े किए हैं. रिसर्च के मुताबिक, उम्रदराज महिलाएं यदि प्रतिदिन 4,000 कदम चलती हैं, तो इससे समय से पहले मृत्यु और हार्ट रोगों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.  खास बात यह है कि इसके लिए हर दिन लंबी वॉक करना भी जरूरी नहीं है. 

कितना चलना सही रहता है?

स्टडी में सामने आया कि यदि महिलाएं सप्ताह में केवल एक या दो दिन भी 4,000 कदम चलने का लक्ष्य हासिल कर लेती हैं, तब भी उन्हें महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं. रिसर्चर का कहना है कि हेल्थ पर पॉजिटिव असर डालने में यह ज्यादा मायने रखता है कि कुल कितने कदम चले गए, न कि सप्ताह में कितने दिन गतिविधि की गई. यह निष्कर्ष लंबे समय से लोकप्रिय 10,000 कदम प्रतिदिन वाले मानक को चुनौती देता है. एक्सपर्ट का मानना है कि स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए कोई एक निश्चित या सर्वश्रेष्ठ पैटर्न नहीं है. सबसे जरूरी बात शरीर को सक्रिय रखना है और लोग अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी तरीके से शारीरिक गतिविधि कर सकते हैं.

महिलाओं के लिए क्या है खास?

स्टडी में पाया गया कि अपेक्षाकृत कम सक्रिय महिलाओं की तुलना में वे महिलाएं, जिन्होंने सप्ताह में एक या दो दिन 4,000 कदम प्रतिदिन पूरे किए, उनमें किसी भी कारण से मृत्यु का जोखिम 26 प्रतिशत कम था. वहीं हार्ट रोग से जुड़ी मौत का खतरा 27 प्रतिशत तक घटा हुआ पाया गया. रिसर्च के अनुसार, यदि यही लक्ष्य सप्ताह में तीन दिन पूरा किया जाए तो फायदे और बढ़ सकते हैं. ऐसी महिलाओं में समय से पहले मृत्यु का जोखिम 40 प्रतिशत तक कम देखा गया. इसके अलावा हृदय रोग का खतरा भी 27 प्रतिशत तक कम पाया गया. 

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हालांकि 5,000 से 7,000 कदम प्रतिदिन चलने वाली महिलाओं को भी अतिरिक्त लाभ मिला, लेकिन इसमें बढ़ोतरी अपेक्षाकृत सीमित रही. इस समूह में मृत्यु का जोखिम 32 प्रतिशत कम था, जबकि हार्ट रोग से मृत्यु के खतरे में लगभग 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. रिसर्चर का कहना है कि एक स्तर के बाद लाभ की गति धीमी पड़ने लगती है.

किन लोगों को रिसर्च में किया गया था शामिल?

अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थानों के रिसर्चर की तरफ से किए गए इस स्टडी को ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है. स्टडी में 13,547 महिलाओं को शामिल किया गया, जिनकी औसत आयु करीब 72 वर्ष थी. स्टडी की शुरुआत में इनमें से किसी को भी हार्ट रोग या कैंसर नहीं था. रिसर्च के दौरान प्रतिभागियों को सात दिनों तक स्टेप काउंट मापने वाले उपकरण पहनाए गए और करीब 11 वर्षों तक उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी गई. इस अवधि में 1,765 महिलाओं की मृत्यु हुई, जबकि 781 महिलाओं में हार्ट रोग विकसित हुआ.

स्टडी के अंत में रिसर्चर ने निष्कर्ष निकाला कि रोजाना अधिक कदम चलना बेहतर स्वास्थ्य परिणामों से जुड़ा है. उनके अनुसार, उम्रदराज महिलाओं के लिए सप्ताह में एक या दो दिन भी 4,000 कदम चलना समय से पहले मृत्यु और हृदय रोग के खतरे को कम करने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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