बिजी लाइफस्टाइल में स्किप करते हैं ब्रेकफास्ट और लंच, यह आदत कैसे बन जाती है ओवरईटिंग का कारण?

बिजी लाइफस्टाइल में स्किप करते हैं ब्रेकफास्ट और लंच, यह आदत कैसे बन जाती है ओवरईटिंग का कारण?


एक्सपर्ट्स के मुताबिक मील स्किप करने से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन घ्रेलिन ज्यादा सक्रिय हो जाता है. ऐसे में जब खाना मिलता है, तो कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है.



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शरीर ही नहीं आपके दिमाग पर भी असर डालती है शुगर, जानें किन बीमारियों का रहता है खतरा?

शरीर ही नहीं आपके दिमाग पर भी असर डालती है शुगर, जानें किन बीमारियों का रहता है खतरा?


शुगर डायबिटीज की अकेली वजह नहीं है, लेकिन यह एक बड़ा रिस्क फैक्टर जरूर है. मीठे ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है. लंबे समय तक कंट्रोल न रहने पर आंखों, किडनी, नसों और हार्ट को नुकसान हो सकता है.



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बच्चे तो नहीं करते स्मोकिंग फिर उन्हें क्यों हो जाता है लंग कैंसर, क्या हैं इसके कारण?

बच्चे तो नहीं करते स्मोकिंग फिर उन्हें क्यों हो जाता है लंग कैंसर, क्या हैं इसके कारण?


Why Children Get Lung Cancer: आमतौर पर लंग कैंसर को स्मोकिंग से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें मरीज ने कभी सिगरेट तक नहीं पी होती.  यह समझना बेहद जरूरी है कि बच्चों और नॉन-स्मोकर्स में भी यह बीमारी क्यों बढ़ रही है. मेडिकल जर्नल्स के मुताबिक, करीब 25 फीसदी लंग कैंसर के मरीज ऐसे होते हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया. बच्चों में लंग कैंसर के पीछे कई ऐसे कारण होते हैं, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता. चलिए आपको बताते हैं कि जो लोग स्मोकिंग नहीं करते हैं, आखिर उनको भी कैसे हो जाते हैं लंग्स कैंसर. 

पैसिव स्मोकिंग

बच्चे भले ही सिगरेट न पीते हों, लेकिन अगर वे स्मोकिंग करने वालों के आसपास रहते हैं, तो उन्हें पैसिव स्मोकिंग का खतरा रहता है. घर या सार्वजनिक जगहों पर धुएं के संपर्क में आने से फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के रिसर्च बताते हैं कि नॉन स्मोक में इससे लंग कैंसर का खतरा 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.

हवा में बढ़ता प्रदूषण

शहरों में रहने वाले लोगों के लिए एयर पॉल्यूशन एक बड़ा खतरा बन चुका है. गाडियों का धुआं, फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले कण और निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल फेफड़ों के भीतर गहराई तक चली जाती है. लंबे समय तक इसका असर कोशिकाओं में बदलाव लाकर कैंसर का कारण बन सकता है. 

जेनेटिक बदलाव

कुछ मामलों में लंग कैंसर की वजह जेनेटिक होती है. बच्चों में पाए जाने वाले कुछ जीन म्यूटेशन, जैसे EGFR, बिना किसी बाहरी कारण के भी कैंसर सेल्स को तेजी से बढ़ने के लिए उकसा सकते हैं. जिन परिवारों में पहले कैंसर का इतिहास रहा हो, वहां जोखिम और बढ़ जाता है.

रेडॉन गैस का संपर्क

रेडॉन एक रेडियोएक्टिव गैस है, जो जमीन और चट्टानों से निकलती है. खराब वेंटिलेशन वाले घरों में यह जमा हो सकती है. यह न दिखाई देती है, न इसकी कोई गंध होती है, लेकिन लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से नॉन स्मोक में भी लंग कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.

हार्मोनल कारण

कुछ रिसर्च में यह सामने आया है कि हार्मोनल बदलाव भी लंग कैंसर के खतरे को प्रभावित कर सकते हैं. खासतौर पर लड़कियों में हार्मोन से जुड़ी कुछ स्थितियां कैंसर सेल्स की ग्रोथ को बढ़ावा दे सकती हैं. यह क्षेत्र अभी रिसर्च के दौर में है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

कैंसर इम्यूनोथेरेपी के एक्सपर्ट और कैंसर हीलर सेंटर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. तरंग कृष्णा ने फेफड़ों के कैंसर के तीन ऐसे चेतावनी संकेत बताए हैं,. 22 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले डॉ. तरंग कृष्णा ने 3 दिसंबर को पोस्ट किए गए एक इंस्टाग्राम वीडियो में कहा कि लंग कैंसर सबसे जानलेवा कैंसरों में शामिल है, लेकिन अक्सर इसका पता काफी देर से चलता है. उन्होंने बताया कि अगर इस बीमारी को समय रहते पहचान लिया जाए, तो इलाज शुरू करना कहीं ज्यादा आसान और प्रभावी हो सकता है. यही वजह है कि शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है.

 

 

2022 में प्रकाशित लैंसेट की एक स्टडी में सामने आया कि लंबे समय तक PM2.5 जैसे बारीक प्रदूषक कणों के संपर्क में रहने से नॉन-स्मोकर्स में नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, खासकर शहरी और औद्योगिक इलाकों में. भारत के कई बड़े शहरों, जैसे दिल्ली, बेंगलुरु और नोएड़ा में वायु प्रदूषण का स्तर अब इतना ज्यादा हो चुका है कि वह विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मानकों पर खरा नहीं उतरता. लगातार जहरीली हवा में सांस लेना फेफड़ों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है.

इसे भी पढ़ें: Oversleeping Side Effects: कहीं जरूरत से ज्यादा तो नहीं सो रहे आप? हो सकती है यह गंभीर समस्या, एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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2026 में जिंदगी बदल देंगे ये गैजेट्स, सेहत की दुनिया में ला देंगे क्रांति

2026 में जिंदगी बदल देंगे ये गैजेट्स, सेहत की दुनिया में ला देंगे क्रांति


अब सेहत जानने के लिए अस्पताल जाना ही जरूरी नहीं रहेगा. CES 2026 में पेश किया गया AI स्मार्ट टूथब्रश ब्रश करते समय ही सांस से निकलने वाली गैस को जांच कर बीमारियों के शुरुआती संकेत बता सकता है. दावा है कि यह 300 से ज्यादा बीमारियों के लक्षण पहचान सकता है. वहीं एक AI नेकलेस और ब्रेसलेट ऐसा भी है जो आपकी आवाज, व्यवहार और दिनचर्या से आपका मूड, तनाव और मानसिक स्थिति समझने की कोशिश करता है यानी अब पहनने वाली जूलरी सिर्फ फैशन नहीं, आपकी सेहत की साथी भी बनेगी.

जिन लोगों को ग्लूटेन या डेयरी जैसी फूड एलर्जी होती है, उनके लिए बाहर खाना हमेशा जोखिम भरा होता है. CES 2026 में दिखाई गई एक पॉकेट साइज डिवाइस खाने के छोटे से सैंपल को जांच कर सिर्फ 2 मिनट में बता देती है कि उसमें एलर्जी पैदा करने वाला तत्व है या नहीं, यह डिवाइस खासतौर पर रेस्टोरेंट, शेफ और आम लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है.

जिन लोगों को ग्लूटेन या डेयरी जैसी फूड एलर्जी होती है, उनके लिए बाहर खाना हमेशा जोखिम भरा होता है. CES 2026 में दिखाई गई एक पॉकेट साइज डिवाइस खाने के छोटे से सैंपल को जांच कर सिर्फ 2 मिनट में बता देती है कि उसमें एलर्जी पैदा करने वाला तत्व है या नहीं, यह डिवाइस खासतौर पर रेस्टोरेंट, शेफ और आम लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है.

Published at : 13 Jan 2026 12:27 PM (IST)

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क्या है चैटजीपीटी हेल्थ, क्या है इसकी खासियत और मरीजों के लिए कितना फायदेमंद?

क्या है चैटजीपीटी हेल्थ, क्या है इसकी खासियत और मरीजों के लिए कितना फायदेमंद?


Can ChatGPT Analyze Medical Reports: OpenAI ने 7 जनवरी को चैटजीपीटी हेल्थ नाम से एक नया हेल्थ-फोकस्ड फीचर लॉन्च किया है, जो यूजर्स को स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के जवाब देने के साथ-साथ मेडिकल रिकॉर्ड अपलोड करने और वेलनेस ऐप्स को कनेक्ट करने की सुविधा देता है. इस नए टैब के जरिए यूजर Apple Health, MyFitnessPal जैसे ऐप्स को जोड़कर अपनी हेल्थ जानकारी को एक जगह देख और समझ सकते हैं.

इसलिए किया गया तैयार

चैटजीपीटी हेल्थ को खास तौर पर इसलिए तैयार किया गया है क्योंकि चैटबॉट से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों में हेल्थ से जुड़े सवाल शामिल रहते हैं. अब यूजर्स को स्वास्थ्य जानकारी के लिए अलग-अलग जगह भटकने की जरूरत नहीं होगी. यह एक डेडिकेटेड स्पेस देता है, जहां हेल्थ से जुड़ी बातचीत ज्यादा सटीक और उपयोगी हो जाती है. इस फीचर की मदद से लोग अपनी हाल की मेडिकल रिपोर्ट या लैब टेस्ट रिजल्ट को आसानी से समझ सकते हैं. डॉक्टर के पास जाने से पहले रिपोर्ट का सार जानना, ब्लड टेस्ट की जानकारी समझना या अपॉइंटमेंट की तैयारी करना अब पहले से कहीं आसान हो जाएगा. इसके अलावा, यह डाइट और वर्कआउट से जुड़ी गाइडेंस भी दे सकता है.

बीमा से जुड़े फैसलों में भी मददगार

चैटजीपीटी हेल्थ बीमा से जुड़े फैसलों में भी मददगार साबित हो सकता है. यूजर अपनी हेल्थ जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग इंश्योरेंस विकल्पों की तुलना कर सकते हैं और यह समझ सकते हैं कि उनके लिए कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.

हेल्थ प्राइवेसी को लेकर क्या का

प्राइवेसी को लेकर OpenAI ने साफ किया है कि चैटजीपीटी हेल्थ एक अलग और सुरक्षित स्पेस में काम करता है, यहां की गई बातचीत और अपलोड किया गया हेल्थ डेटा मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. कंपनी के मुताबिक, संवेदनशील स्वास्थ्य जानकारी की सुरक्षा को इसमें प्राथमिकता दी गई है. OpenAI का कहना है कि चैटजीपीटी हेल्थ का मकसद मेडिकल केयर की जगह लेना नहीं है, बल्कि लोगों को सही जानकारी देकर बेहतर फैसले लेने में मदद करना है. यह एक सपोर्ट टूल की तरह काम करेगा, जिससे मरीज ज्यादा जागरूक बन सकें.

लोगों को कैसे मिलेगा फायदा

फिलहाल इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को वेटलिस्ट में साइन-अप करना होगा. एक्सेस मिलने के बाद चैटजीपीटी के साइडबार में हेल्थ ऑप्शन चुनकर मेडिकल रिकॉर्ड अपलोड किए जा सकते हैं और हेल्थ ऐप्स को कनेक्ट किया जा सकता है. अगर सरल शब्दों में बात की जाए, तो चैटजीपीटी हेल्थ मरीजों के लिए जानकारी समझने और हेल्थ मैनेजमेंट को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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आंखों के नीचे पड़ रहे पीले धब्बे तो न करें इग्नोर, चेहरे पर दिखते हैं कोलेस्ट्रॉल के ये 5 लक्षण

आंखों के नीचे पड़ रहे पीले धब्बे तो न करें इग्नोर, चेहरे पर दिखते हैं कोलेस्ट्रॉल के ये 5 लक्षण


Symptoms Of High Cholesterol On Face: अक्सर कोलेस्ट्रॉल को सिर्फ हार्ट से जोड़कर देखा जाता है, जबकि इसके संकेत चेहरे और आंखों पर भी नजर आ सकते हैं. कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन जब खराब एलडीएल बढ़ जाता है और अच्छा एचडीएल घटता है, तब समस्या शुरू होती है. ऐसे में आर्टरीज में फैट जमा होने लगता है, जिससे हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.

नॉर्मली कोलेस्ट्रॉल लेवल 100 mg/dL से नीचे होना चाहिए. हाई कोलेस्ट्रॉल की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इसके लक्षण साफ तौर पर महसूस नहीं होते. लेकिन शरीर कभी-कभी त्वचा और आंखों के जरिए इशारे जरूर देता है, जिन्हें समय रहते समझना जरूरी है. चलिए आपको इसके पांच ऐसे लक्षणों के बारे में बताते हैं, जो आपके चेहरे पर दिखाई देते हैं. 

 

 आंखों के आसपास पीले उभरे धब्बे
अगर पलकों के अंदरूनी कोने पर हल्के पीले, मुलायम धब्बे दिखें, तो यह Xanthelasma हो सकता है. ये धब्बे त्वचा के नीचे जमा कोलेस्ट्रॉल से बनते हैं. कई मामलों में ऐसे लोगों का एलडीएल या कुल कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ पाया गया है.

आंख की पुतली के चारों ओर सफेद या ग्रे रिंग
कॉर्नियल आर्कस नाम की यह रिंग आंख के बाहरी हिस्से में नजर आती है। उम्र बढ़ने पर यह सामान्य हो सकती है, लेकिन कम उम्र में दिखे तो यह हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट के खतरे का संकेत हो सकता है.

चेहरे की त्वचा का रूखा या बदला हुआ रंग
कोलेस्ट्रॉल असंतुलन शरीर में सूजन बढ़ा सकता है, जिसका असर चेहरे की त्वचा पर भी दिखता है. लगातार रफनेस, पैचेज या रंग में बदलाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

 होंठ या चेहरे पर हल्का नीलापन या फीका रंग
जब धमनियों में फैट जमा होने लगता है, तो ब्लड फ्लो प्रभावित होता है. इससे त्वचा तक ऑक्सीजन सही से नहीं पहुंचती और चेहरे पर फीका या नीला-सा रंग दिख सकता है.

चेहरे पर लगातार सूजन या रेडनेस
हाई कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी अंदरूनी सूजन कभी-कभी चेहरे पर भी झलकती है. बार-बार रेडनेस, जलन या एक्ने-जैसी समस्या इसका संकेत हो सकती है.

अगर चेहरे या आंखों पर ऐसे बदलाव दिखें, तो सिर्फ क्रीम या घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें. सही तरीका यही है कि लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराकर कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच कराई जाए. समय रहते खान-पान, एक्सरसाइज और जरूरत पड़ने पर दवा से इसे कंट्रोल किया जा सकता है. एक बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि ये लक्षण तभी चेहेर पर दिखाई देते हैं जब कोलेस्ट्रॉल का लेवल काफी बढ़ जाता है. इसलिए जब आपको ये लक्षण दिखाई दें, तो समझ लाजिए कि स्थिति काफी खराब है.

इसे भी पढ़ें: Oversleeping Side Effects: कहीं जरूरत से ज्यादा तो नहीं सो रहे आप? हो सकती है यह गंभीर समस्या, एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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