Zakir Khan Health: किन लोगों को होती है जाकिर खान वाली बीमारी, कैसे दिखते हैं इसके लक्षण?

Zakir Khan Health: किन लोगों को होती है जाकिर खान वाली बीमारी, कैसे दिखते हैं इसके लक्षण?


Zakir Khan Comedy Break: मशहूर कॉमेडियन जाकिर खान ने कॉमेडी से लंबा ब्रेक लेने का ऐलान किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह ब्रेक 2030 तक जा सकता है. यह बात उन्होंने हैदराबाद में अपने ‘पापा यार’ टूर के दौरान एक लाइव शो में कही. जाकिर ने बताया कि वह फिलहाल अपनी परफॉर्मेंस कम करेंगे और गिने-चुने शहरों में ही कुछ आखिरी शो करेंगे. इसके पीछे वजह सेहत और कुछ निजी जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें वह लंबे समय से टालते आ रहे थे.

लंबा जा सकता है ब्रेक

स्टेज पर खुलकर बात करते हुए जाकिर ने कहा कि यह ब्रेक तीन से पांच साल तक का हो सकता है. उन्होंने साफ किया कि यह फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया, बल्कि अपनी सेहत को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है. दर्शकों का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने कहा कि वह आगे भी लंबे समय तक परफॉर्म करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए अभी रुकना जरूरी है. Gulf News से बातचीत में जाकिर ने कहा कि “मैं कई सालों से लगातार टूर कर रहा हूं. काम और सेहत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन अब थोड़ा ब्रेक लेना जरूरी हो गया है.”

उन्होंने यह भी माना कि रिश्तों को निभाने में समय और मेहनत लगती है, लेकिन यह समय अक्सर उनकी नींद से कटता रहा. जाकिर के शब्दों में, अगर कोई इंसान सालों तक बिना रुके चलता रहे, तो शरीर पर असर पड़ना तय है. इसी सिलसिले में उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बीमारियों की जेनेटिक प्रवृत्ति होती है, जो एक खास उम्र के बाद सामने आती है, खासकर तब जब लाइफस्टाइल लगातार तनावपूर्ण रही हो.

किन लोगों को होती है यह दिक्कत?

अब बात करते हैं कि आखिर जाकिर की तरह किन लोगों को ऐसी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. Mayo Clinic के मुताबिक, लंबे समय तक लगातार काम, अनियमित नींद, बार-बार ट्रैवल और शारीरिक थकान शरीर पर गहरा असर डालती है. इसका शिकार वे लोग ज्यादा होते हैं, जो लगातार अपने काम को प्राथमिकता देते हैं और बिना रुके काम करते रहते हैं. समय के साथ उनके शरीर पर इसके लक्षण दिखने लगते हैं. इसके अलावा, जिनके परिवार में पहले से मेटाबॉलिक, हार्मोनल या क्रॉनिक बीमारियों का इतिहास रहा हो, उन्हें भी यह दिक्कत समय के साथ झेलनी पड़ सकती है. जाकिर खान ने भी इशारों में इसी ओर ध्यान दिलाया है, जब उन्होंने जेनेटिक प्रीडिस्पोज़िशन और एपिजेनेटिक्स की बात की.

क्या दिखते हैं लक्षण?

डॉक्टर बताते हैं कि ऐसे मामलों में शरीर पहले छोटे-छोटे संकेत देता है, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. इसमें लगातार थकान महसूस होना, नींद पूरी होने के बाद भी शरीर का भारी रहना, इम्यूनिटी कमजोर पड़ना, फोकस और एनर्जी लेवल में कमी, और बार-बार बीमार पड़ना शामिल है.

इसे भी पढ़ें- Obesity In India: दुनिया में 1 अरब लोग मोटापे के शिकार, भारत में भी साइलेंट किलर बन रही ये बीमारी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

2 महीने में 15 किलो वजन घटाने का खौफनाक अंजाम, आप न करें स्लिम होने की ये बड़ी गलती!

2 महीने में 15 किलो वजन घटाने का खौफनाक अंजाम, आप न करें स्लिम होने की ये बड़ी गलती!


What Is The Devil Weight Loss Plan: कम समय में बहुत ज्यादा वजन घटाना कई लोगों को सपने जैसा लगता है, लेकिन इसके गंभीर नुकसान भी हो सकते हैं. अचानक और तेजी से वजन घटाने से शरीर में कमजोरी, हार्मोनल असंतुलन, गॉलस्टोन्स और यहां तक कि अंगों को नुकसान जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसा ही एक मामला चीन के हांगझोउ शहर से सामने आया है, जहां 26 वर्षीय युवती ने महज़ दो महीने में करीब 15 किलो वजन घटाने की कोशिश की, लेकिन अंत में उसे प्रीडायबिटीज का पता चला.

चीन में लड़की ने वजन कम करने के लिए उठाया कदम

यह युवती, जिसका नाम शियाओयू बताया गया है, अपनी सबसे अच्छी दोस्त की शादी के लिए जल्दी स्लिम होना चाहती थी. इसके लिए उसने जिस तरीके को अपनाया, उसे ‘डेविल वेट-लॉस प्लान’ कहा जा रहा है. इस योजना के तहत उसने अपने खाने से लगभग सभी मुख्य खाने की चीजों को हटा दिए और बहुत कम मात्रा में सब्जियां व चिकन ब्रेस्ट खाना शुरू किया. इसके साथ ही वह डेली बेहद कठिन वर्कआउट करती थी और कई बार 10 किलोमीटर से ज्यादा दौड़ भी लगाती थी.

इस सख्त रूटीन का असर जल्द दिखा और शादी से पहले ही शियाओयू का वजन 50 किलो तक पहुंच गया. शुरुआत में वह इस बदलाव से बेहद खुश थी, लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिक पाई. जल्द ही उसे लगातार थकान, अत्यधिक प्यास, तेज भूख लगना, चक्कर आना और दिल की धड़कन तेज होने जैसी परेशानियां होने लगीं.

तब शियाओयू ने हांगझोउ के एक अस्पताल के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग में डॉक्टर से संपर्क किया। जांच में सामने आया कि उसका फास्टिंग ब्लड शुगर और दो घंटे बाद का ग्लूकोज लेवल सामान्य से काफी ज्यादा दिखा, इन लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों ने उसे प्रीडायबिटीज बताया.

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टरों के मुताबिक, उसने लगभग पूरी तरह से कार्बोहाइड्रेट लेना बंद कर दिया था और साथ ही हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज कर रही थी. इससे शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ गया, मांसपेशियों और पानी की भारी कमी हुई और मेटाबॉलिज्म को गंभीर नुकसान पहुंचा. बीमारी का पता चलने के बाद शियाओयू ने अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव किया. उसने संतुलित आहार अपनाया और बहुत ज्याद कठिन एक्सरसाइज की जगह मीडियम स्तर की एरोबिक एक्सरसाइज शुरू की. तीन महीनों में उसका वजन 52.5 किलो पर स्थिर हो गया और उसकी सेहत में भी काफी सुधार देखने को मिला.

क्या होता है डेविल वेट-लॉस प्लान?

दरअसल, ‘डेविल वेट-लॉस प्लान’ कोई मान्यता प्राप्त डाइट नहीं है. इसमें बेहद कम कैलोरी लेना और अत्यधिक एक्सरसाइज करना शामिल होता है. डॉक्टरों का साफ कहना है कि ऐसा तरीका न तो टिकाऊ है और न ही सुरक्षित. हेल्दी वजन घटाने के लिए धीरे-धीरे, संतुलित और साइंटफिक तरीके अपनाना ही सबसे बेहतर विकल्प है.

इसे भी पढ़ें- Bowel Cancer: क्या होता है बाउल कैंसर? जानिए क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण, जिसको लोग कर देते हैं इग्नोर

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

उम्र बढ़ने के साथ क्यों सफेद होते हैं बाल, क्या रोका जा सकता है यह प्रोसेस?

उम्र बढ़ने के साथ क्यों सफेद होते हैं बाल, क्या रोका जा सकता है यह प्रोसेस?


Why Hair Turns Grey With Age: उम्र बढ़ने के साथ बालों का सफेद होना एक नेचुरल प्रक्रिया है. जैसे-जैसे शरीर के बाकी अंग उम्र के असर में आते हैं, वैसे ही बाल भी एजिंग से गुजरते हैं. स्किन स्पेशलिस्ट्स के मुताबिक, बालों का रंग तय करने वाली सेल्स समय के साथ कमजोर होने लगती हैं, जिससे बाल धीरे-धीरे अपना नेचुरल रंग खो देते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि क्या इसको रोका जाता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डर्मेटोलॉजिस्ट्स बताते हैं कि ज्यादातर लोगों में 30 या 40 की उम्र के बाद सफेद बाल दिखने लगते हैं. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह होती है मेलानोसाइट स्टेम सेल्स का कमजोर पड़ना. ये वही सेल्स होती हैं, जो बालों में मेलानिन पिगमेंट पहुंचाकर उन्हें काला, भूरा या सुनहरा रंग देती हैं. जब ये कोशिकाएं ठीक से काम करना बंद कर देती हैं, तो बाल सफेद या ग्रे होने लगते हैं.

इस पूरी प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में सेल्युलर सेंसेंस कहा जाता है. इसमें बाल धीरे-धीरे पिगमेंट बनाना कम कर देते हैं. यही वजह है कि पहले जो बाल काले या भूरे होते थे, वे समय के साथ ग्रे या सफेद नजर आने लगते हैं. कई लोगों को यह भी महसूस होता है कि सफेद बालों की बनावट पहले से ज्यादा रूखी या मोटी हो जाती है. उम्र के अलावा जेनेटिक्स भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अक्सर लोग अपने माता-पिता की तरह ही ग्रे होते हैं. यानी अगर घर में जल्दी सफेद बाल होने का ट्रेंड रहा है, तो अगली पीढ़ी में भी इसकी संभावना ज्यादा होती है. कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया है कि अलग-अलग नस्लों में बाल सफेद होने की उम्र अलग हो सकती है.

क्या इसको रोका जा सकता है?

पहले माना जाता था कि बालों का सफेद होना पूरी तरह तय है और इसे बदला नहीं जा सकता. लेकिन रिसर्च बताती है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह “फिक्स” नहीं होती. कुछ फैक्टर्स इसे तेज या धीमा कर सकते हैं. कुछ स्टडीज में विटामिन B12, आयरन जैसी पोषक तत्वों की कमी को समय से पहले सफेद बालों से जोड़ा गया है. इसके अलावा, लंबे समय तक रहने वाला तनाव भी इस प्रक्रिया को तेज कर सकता है. रिसर्च में पाया गया है कि ज्यादा तनाव बालों के पिगमेंट बनाने वाली सेल्स को नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि बालों के सफेद होने को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन संतुलित डाइट, स्ट्रेस कंट्रोल और हेल्दी लाइफस्टाइल से इस प्रक्रिया को कुछ हद तक धीमा जरूर किया जा सकता है.

इसे भी पढ़ें- Bowel Cancer: क्या होता है बाउल कैंसर? जानिए क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण, जिसको लोग कर देते हैं इग्नोर

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या शराब पीने से शरीर में आती है गर्मी, डॉक्टर से जानें इस बात में कितनी सच्चाई?

क्या शराब पीने से शरीर में आती है गर्मी, डॉक्टर से जानें इस बात में कितनी सच्चाई?


Does Alcohol Keep The Body Warm: सर्दियों में यह आम धारणा है कि शराब पीने से शरीर गर्म रहता है, खासतौर पर रम जैसी शराब को ठंड से बचाव का तरीका माना जाता है. लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स और साइंटिस्ट रिसर्च इस दावे को गलत बताते हैं. हकीकत यह है कि शराब शरीर को गर्म नहीं करती, बल्कि कई मामलों में शरीर के अंदरूनी तापमान को और कम कर देती है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट और डॉक्टर क्या कहते हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डायटीशियन भावेश गुप्ता ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में इस मिथक की सच्चाई बताई. उन्होंने समझाया कि शराब पीने के बाद जो गर्माहट महसूस होती है, वह सिर्फ एक अस्थायी अहसास होता है. दरअसल, शराब पीने से त्वचा के पास मौजूद ब्लड वेसल्स फैल जाती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में वासोडाइलेशन कहा जाता है. इससे त्वचा तक ज्यादा खून पहुंचता है और व्यक्ति को गर्मी महसूस होती है.

 

हालांकि, यही प्रक्रिया शरीर के लिए नुकसानदायक साबित होती है. त्वचा के पास ज्यादा खून आने से शरीर की अंदरूनी गर्मी तेजी से बाहर निकलने लगती है, जिससे कोर बॉडी टेम्परेचर गिर जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक, यही वजह है कि ठंड के मौसम में शराब पीने वालों में हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है. कई मामलों में लोगों को इसी कारण अस्पताल तक पहुंचना पड़ा है.

रिसर्च में क्या निकला है इसको लेकर?

साइंटफिक रिसर्च में भी यह सामने आया है कि शराब शरीर की नेचुरल इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देती है. यह कंपकंपी को देर से शुरू करती है और उसकी अवधि भी कम कर देती है, जबकि कंपकंपी ठंड में शरीर को गर्म रखने का एक अहम तरीका होती है. इसके अलावा, शराब व्यक्ति के फैसले लेने की क्षमता को भी प्रभावित करती है, जिससे लोग ठंड से बचाव के जरूरी उपायों को नजरअंदाज कर देते हैं.

WHO के अनुसार, शराब एक जहरीला और कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ है, जो कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि सर्दियों में खुद को गर्म रखने के लिए शराब नहीं, बल्कि गर्म कपड़े, सूप, चाय और संतुलित आहार बेहतर और सुरक्षित विकल्प हैं.

इसको लेकर क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टर अनंत जोशी ने इसको लेकर अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करके इसके बारे में बताया था. उनके अनुसार, शराब आपको सर्दियों में गर्म नहीं रखती, बल्कि यह शरीर को और ठंडा कर देती है. शराब खून को त्वचा की सतह तक लाकर आपको गर्मी का अहसास तो कराती है, लेकिन वह गर्मी बहुत तेजी से शरीर से बाहर निकल जाती है. इससे आपके शरीर का अंदरूनी तापमान  गिर जाता है और शरीर की नेचुरल इम्यून सिस्टम, जैसे कि कपकपी काम करना बंद कर देती है.

 

Health Myths And Facts: शरीर और सेहत को लेकर भ्रम में तो नहीं रहते आप, जानें किन गलत बातों को इंसान मान बैठा है सही?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator





Source link

कितनी ठंड सह सकता है हमारा शरीर, ज्यादा सर्दी बढ़ने पर क्या होती हैं दिक्कतें?

कितनी ठंड सह सकता है हमारा शरीर, ज्यादा सर्दी बढ़ने पर क्या होती हैं दिक्कतें?


How Much Cold Can The Human Body Tolerate: चाहे आपको चिलचिलाती गर्मी पसंद हो या कड़ाके की ठंड, तापमान में अचानक और ज्यादा बदलाव हमारे शरीर के लिए खतरे की घंटी होता है. इंसान का शरीर होमियोथर्मिक होता है, यानी हमारे शरीर का अंदरूनी तापमान लगभग एक-सा बना रहता है. आमतौर पर यह करीब 37 डिग्री सेल्सियस होता है. जब तापमान गिरता है तो शरीर संतुलन बिगड़ने लगता है. चलिए आपको बताते हैं कि इंसान का शरीर कितनी ठंड सह सकता है.

ज्यादा ठंड होने पर क्या होती है दिक्कत?

जब तापमान गिरता है, तो शरीर पर इसका सीधा असर पड़ता है. ठंड लगने पर शरीर सबसे पहले त्वचा तक जाने वाले खून की मात्रा कम कर देता है, कंपकंपी के जरिए गर्मी पैदा करता है और रोंगटे खड़े कर त्वचा के पास गर्म हवा को फंसाने की कोशिश करता है.   लेकिन जब ठंड बहुत ज्यादा हो जाती है, तो शरीर की ये नेचुरल सुरक्षा प्रणालियां काम करना बंद कर देती हैं. अगर शरीर का अंदरूनी तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाए, तो इसे हाइपोथर्मिया कहा जाता है. अब चलिए आपको बताते हैं कि यह स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है.

हाइपोथर्मिया कितना खतरनाक है?

Medical News Today के अनुसार, हाइपोथर्मिया तीन तरह का होता है. पहले नंबर पर आता है हल्का हाइपोथर्मिया, जिसमें शरीर का तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. इस स्थिति में लक्षण धीरे-धीरे दिखते हैं. व्यक्ति को भूख, मतली, उलझन या भ्रम महसूस हो सकता है. त्वचा पीली और रूखी दिखने लगती है.

दूसरे नंबर पर आता है मध्यम हाइपोथर्मिया, जिसमें शरीर का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ जाता है. इस लेवल पर शरीर सुस्त पड़ने लगता है. दिल की धड़कन और सांसें धीमी हो जाती हैं. ब्रेन का तापमान कंट्रोल करने वाला सिस्टम गड़बड़ा जाता है, जिससे अजीब व्यवहार देखने को मिल सकता है, जैसे बिना वजह कपड़े उतारना. इसके बाद तीसरे नंबर पर आता है गंभीर हाइपोथर्मिया, जिसमें शरीर का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ जाता है. यह सबसे खतरनाक स्थिति होती है. शरीर की एक्टिविटी लगभग बंद होने लगती है, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट तेजी से गिरते हैं और जान का जोखिम बेहद बढ़ जाता है. इस स्थिति में इंसान बेहोश भी हो सकता है.

ज्यादा ठंड होने पर क्या न करें और क्या करें?

अगर कड़ाके की सर्दी पड़ रही हो, तो शरीर को ठंड से बचाने के लिए शराब का सेवन करने से बचें. गर्म पानी की बोतल का सीधा इस्तेमाल न करें. इसके साथ ही शरीर को एक्टिव रखने के लिए हल्की-फुल्की हरकत करते रहें और गर्म लेयर वाले कपड़े पहनें.

इसे भी पढ़ें- Fainting On Standing: अचानक खड़े होते ही आने लगता है चक्कर, यह किस बीमारी का संकेत?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल, ये संकेत हो सकते हैं खतरनाक, तुरंत लें मेडिकल सलाह

नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल, ये संकेत हो सकते हैं खतरनाक, तुरंत लें मेडिकल सलाह


हम में से ज्यादातर लोग अपने नाखूनों को सिर्फ सुंदरता से जोड़कर देखते हैं. कोई उन्हें रंगता है, कोई काटता है, तो कोई उन पर डिजाइन बनवाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके नाखून केवल सजावट का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि आपकी सेहत का आईना भी हैं. डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नाखूनों का रंग, बनावट और आकार हमारे शरीर के अंदर चल रही कई बीमारियों के संकेत दे सकता है.

कई बार दिल, फेफड़े, जिगर, थायरॉइड या यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के शुरुआती लक्षण भी नाखूनों में बदलाव के रूप में दिखाई देने लगते हैं. अगर नाखूनों का रंग अचानक बदल जाए, उन पर अजीब धब्बे दिखने लगें, या वे मोटे, टूटने वाले या सूजे हुए लगें. तो इसे नजरअंदाज करना खतरे से खाली नहीं होता है. तो आइए जानते हैं कि नाखूनों में दिखने वाले ये बदलाव किन बीमारियों की ओर इशारा कर सकते हैं. 

कैसे सेहत का हाल नाखूनों से पहचानें?

1. पीले नाखून – अगर आपके नाखून पीले पड़ने लगे हैं, तो इसका सबसे आम कारण फंगल इंफेक्शन हो सकता है. इस स्थिति में नाखून धीरे-धीरे मोटे, कमजोर और टूटने वाले हो जाते हैं. हालांकि कुछ मामलों में पीले नाखून थायराइड की बीमारी, फेफड़ों की समस्या, सोरायसिस या डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकते हैं. अगर लंबे समय तक नाखून पीले बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें.
 
2. सफेद नाखून या सफेद धब्बे- नाखूनों पर सफेद धब्बे दिखना एक आम समस्या है, जिसे मेडिकल भाषा में ल्यूकोनिशिया कहा जाता है. अक्सर ये धब्बे नाखून पर हल्की चोट लगने, एलर्जी या किसी संक्रमण के कारण हो जाते हैं. कुछ मामलों में यह दवाइयों के साइड इफेक्ट या शरीर में पोषक तत्वों की कमी का भी संकेत हो सकता है. अगर सफेद धब्बे बार-बार दिखें या पूरे नाखून सफेद पड़ने लगें, तो जांच करवाना जरूरी है.
 
3. नीले नाखून – अगर आपके नाखून नीले या बैंगनी रंग के दिखाई देने लगें, तो यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है. यह स्थिति दिल या फेफड़ों से जुड़ी बीमारी की ओर इशारा करती है. इसके अलावा, नीले नाखून विल्सन रोग, चांदी की विषाक्तता या विटामिन B12 की कमी के कारण भी हो सकते हैं. यह एक गंभीर संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
 
नाखूनों पर गहरे लाल आधे चांद (Dark Red Half Moon)
 
आमतौर पर नाखूनों के नीचे हल्का सफेद आधा चांद दिखता है, लेकिन अगर यह गहरे लाल रंग का हो जाए, तो सावधान हो जाएं.  अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (AAD) के अनुसार, यह ल्यूपस, हृदय रोग और गठिया (आर्थराइटिस) जैसी बीमारियों का संकेत हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.
 
नाखूनों के आसपास सूजन (Swollen Nail Folds)

अगर नाखूनों के चारों ओर की त्वचा लाल, सूजी हुई और दर्दनाक हो जाए, तो इसे क्रोनिक पैरॉनिचिया कहा जाता है. यह समस्या अक्सर एलर्जी, नमी में रहने या फंगल इंफेक्शन की वजह से होती है. इसका इलाज समय पर न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती है. आमतौर पर इसका इलाज दवाइयों और क्रीम से किया जाता है.

नाखूनों पर गहरी धारियां (Dark Lines on Nails)

अगर नाखून के नीचे कोई नई या बदलती हुई गहरी धारियां दिखाई दें, और वह किसी चोट की वजह से न हों, तो यह एक गंभीर चेतावनी हो सकती है. AAD के अनुसार, कुछ मामलों में यह त्वचा कैंसर (मेलानोमा) का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल जाकर जांच करवाना बेहद जरूरी है.

नाखूनों का क्लबिंग (Clubbing of Nails)

जब नाखून चौड़े, गोल और स्पंज जैसे मुलायम हो जाते हैं, तो इसे नाखूनों का क्लबिंग कहा जाता है.  क्लबिंग आमतौर पर लंबे समय से चल रही बीमारियों का संकेत होती है, जैसे कि फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग या गंभीर फेफड़ों की समस्याएं.

ये भी पढ़ें: Alzheimer Disease: अल्जाइमर ने छीनी याददाश्त, पर नहीं मिटा पाया मुहब्बत, बीमारी से जूझते शख्स ने कैसे जिंदा रखा अपना रिश्ता?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp