शुगर पेशेंट हैं तो आज से गांठ बांध लें ये 5 बातें, वरना वक्त से पहले आ जाएगी मौत

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डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज उनका खानपान है. अक्सर लोग दवा तो समय पर लेते हैं, लेकिन खाने-पीने में लापरवाही कर बैठते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार मैदा, ज्यादा चीनी, कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है. इसके बजाय साबुत अनाज, ओट्स, ब्राउन राइस, दालें, हरी सब्जियां और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करना चाहिए.

अगर आप चाहते हैं कि आपकी शुगर कंट्रोल में रहे तो शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक, योग या हल्का व्यायाम शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है. साथ ही लगातार बैठे रहने की आदत न केवल वजन बढ़ाती है बल्कि ब्लड शुगर को भी असंतुलित कर सकती है. इसलिए चाहे आप घर पर हों या ऑफिस में, दिनभर सक्रिय रहने की कोशिश करें.

अगर आप चाहते हैं कि आपकी शुगर कंट्रोल में रहे तो शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक, योग या हल्का व्यायाम शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है. साथ ही लगातार बैठे रहने की आदत न केवल वजन बढ़ाती है बल्कि ब्लड शुगर को भी असंतुलित कर सकती है. इसलिए चाहे आप घर पर हों या ऑफिस में, दिनभर सक्रिय रहने की कोशिश करें.

Published at : 10 Jun 2026 07:48 AM (IST)

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क्या सच में आलू खाने से एसिडिटी की दिक्कत होती है? जानें इसको खाने के सही तरीके

क्या सच में आलू खाने से एसिडिटी की दिक्कत होती है? जानें इसको खाने के सही तरीके


Does Eating Potatoes Really Cause Acidity: आलू भारतीय रसोई का ऐसा हिस्सा है जो लगभग हर घर में किसी न किसी रूप में खाया जाता है. लेकिन कई लोग आलू खाने के बाद पेट में जलन, गैस, भारीपन या एसिडिटी की शिकायत करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में आलू एसिडिटी बढ़ाता है या इसके पीछे कोई और वजह होती है? एक्सपर्ट के अनुसार ज्यादातर मामलों में समस्या आलू से नहीं, बल्कि उसे खाने के तरीके और व्यक्ति की पाचन क्षमता से जुड़ी होती है. 

क्या सच में इससे गैस बनती है?

Ubiehealth की रिपोर्ट के अनुसार, आलू में रेजिस्टेंट स्टार्च पाया जाता है. यह एक प्रकार का स्टार्च है जो पूरी तरह पच नहीं पाता और बड़ी आंत तक पहुंच जाता है. वहां मौजूद बैक्टीरिया इसे फर्मेंट करते हैं, जिससे गैस बनने लगती है, कुछ लोगों में यही गैस पेट फूलने, भारीपन और एसिडिटी जैसे लक्षण पैदा कर सकती है खासकर जिन लोगों का डाइजेशन सिस्टम सेंसिटिवहोता है, उन्हें यह समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है.

किन लोगों को हो सकती है दिक्कत?

यदि आप इरिटेबल बाउल सिंड्रोम या बार-बार होने वाली डाइजेशन संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो ज्यादा मात्रा में आलू खाने से भी असहजता बढ़ सकती है. हालांकि आलू को सामान्य तौर पर पाचन के लिए सुरक्षित माना जाता है, लेकिन बड़ी मात्रा में इसका सेवन कुछ लोगों में गैस और पेट दर्द का कारण बन सकता है. 

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कैसे सही तरीके से कर सकते हैं यूज?

आलू खाने का तरीका भी काफी मायने रखता है. उबले या बेक किए गए आलू आमतौर पर आसानी से पच जाते हैं, जबकि फ्रेंच फ्राइज, चिप्स या ज्यादा तेल-मसाले में बने आलू पेट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं. तैलीय भोजन पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे एसिडिटी और गैस की समस्या बढ़ सकती है. इसलिए यदि आलू खाने के बाद जलन महसूस होती है, तो सबसे पहले उसकी तैयारी के तरीके पर ध्यान देना चाहिए. एक्सपर्ट यह भी सलाह देते हैं कि हरे रंग के या अंकुरित आलू खाने से बचना चाहिए. ऐसे आलू में सोलनाइन नामक नेचुरल टॉक्सिक तत्व की मात्रा बढ़ सकती है, जो पेट दर्द, मतली और पाचन संबंधी परेशानियों का कारण बन सकता है.

अगर आपको लगता है कि आलू खाने के बाद बार-बार एसिडिटी हो रही है, तो कुछ दिनों तक अपने खानपान का रिकॉर्ड रखें. ध्यान दें कि आपने आलू किस रूप में खाया, कितनी मात्रा में खाया और उसके बाद कौन से लक्षण दिखाई दिए.  इससे सही कारण समझने में मदद मिल सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ये चीजें आज ही कर दें अपनी लाइफ से दूर, ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ाते हैं जुबान को पसंद ये पदार्थ

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सबसे पहले बात करते हैं शुगर से भरपूर ड्रिंक्स की. कसार कई लोगों ये न्ही पता होता है की कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस और एनर्जी ड्रिंक्स जैसी चीजों में काफी मात्रा में चीनी होती है. ऐसे में विशेष्यज्ञ सलाह देतें हैं कि इनका ज्यादा सेवन शरीर में सूजन बढ़ाने का काम कर सकता है. इसके अलावा ये वजन बढ़ाने और कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं. इसलिए जितना हो सके इनकी जगह सादा पानी, नारियल पानी या ताजे फलों का सेवन करना बेहतर माना जाता है.

प्रोसेस्ड मीट भी ऐसी चीजों में शामिल है जिससे दूरी बनाना बेहतर माना जाता है. सॉसेज, सलामी, हॉट डॉग और कई तरह के पैक्ड मीट उत्पाद लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग रसायनों से तैयार किए जाते हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए ताजा और घर में बना खाना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है.

प्रोसेस्ड मीट भी ऐसी चीजों में शामिल है जिससे दूरी बनाना बेहतर माना जाता है. सॉसेज, सलामी, हॉट डॉग और कई तरह के पैक्ड मीट उत्पाद लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग रसायनों से तैयार किए जाते हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए ताजा और घर में बना खाना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है.

Published at : 10 Jun 2026 03:15 AM (IST)

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ब्लॉटिंग से लेकर अनियमित पीरियड्स तक, ओवेरियन कैंसर के ये 6 लक्षण भूलकर भी न करें इग्नोर

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Early Warning Signs Of Ovarian Cancer In Women: भारत में महिलाओं के बीच ओवेरियन कैंसर तीसरा सबसे आम कैंसर माना जाता है. चिंता की बात यह है कि ज्यादातर महिलाओं को इसकी पहचान तब होती है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है. एक्सपर्ट के अनुसार भारत में करीब 70 से 80 प्रतिशत ओवेरियन कैंसर के मामले एडवांस स्टेज में सामने आते हैं. इसकी बड़ी वजह यह नहीं है कि बीमारी को पहले पकड़ा नहीं जा सकता, बल्कि इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि उन्हें अक्सर किसी दूसरी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है.

क्या इसके लक्षण पहले से पता नहीं चलते?

ऑन्कोलॉजिस्ट लंबे समय से ओवेरियन कैंसर को साइलेंट डिजीज कहते रहे हैं, लेकिन डॉ. संपदा देसाई ने TOI को बताया कि यह बीमारी पूरी तरह खामोश नहीं होती. उनके अनुसार ओवेरियन कैंसर साइलेंट कैंसर जरूर कहलाता है, लेकिन यह कम संकेत देता है. इसके लक्षण अक्सर बहुत सामान्य होते हैं और ज्यादातर डाइजेशन से जुड़ी समस्याओं जैसे लगते हैं. संपदा देसाई बताती हैं कि जल्दी पेट भर जाना, लगातार पेट फूलना, ऊपरी पेट में असहजता महसूस होना और डाइजेशन संबंधी दिक्कतें इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं. समस्या यह है कि महिलाएं इन लक्षणों को गैस, हार्मोनल बदलाव या अन्य सामान्य परेशानियों से जोड़कर टाल देती हैं. 

किन दिक्कतों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?

डॉ. शोना नाग के मुताबिक लगातार पेट फूलना सबसे आम संकेतों में से एक है. कई मरीज बताते हैं कि कम खाना खाने के बाद भी उन्हें अत्यधिक भरा हुआ महसूस होता है. यदि इसके साथ पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में दर्द भी बना रहे या बार-बार लौटकर आए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा पीरियड्स में असामान्य बदलाव, बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग, अनियमित पीरियड्स या मेनोपॉज के बाद किसी भी तरह की ब्लीडिंग गंभीर संकेत हो सकते हैं.  डॉ. शोना के अनुसार, हार्मोनल बदलाव आम बात है, लेकिन लगातार बनी रहने वाली अनियमितताएं चिकित्सकीय जांच की मांग करती हैं. इसी तरह बदबूदार, खून जैसा या मेनोपॉज के बाद होने वाला असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज भी चेतावनी का संकेत हो सकता है.

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किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

एक्सपर्ट के अनुसार यदि कोई लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे या महीने में 12 दिनों से ज्यादा दिखाई दे, तो तुरंत गायनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए. जिन महिलाओं के परिवार में ओवेरियन, ब्रेस्ट या कोलन कैंसर का हिस्ट्री रहा है, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है. ऐसे मामलों में जैनिटक जोखिम अधिक होता है. क्योंकि ओवेरियन कैंसर के लिए सर्वाइकल या ब्रेस्ट कैंसर जैसी कोई नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ये 5 लक्षण दिख रहे हैं तो भूलकर भी न खाएं मखाना, वरना बिगड़ जाएगी सेहत

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5 Symptoms That Mean You Should Avoid Makhana: मखाना आज के समय में सबसे लोकप्रिय हेल्दी स्नैक्स में से एक माना जाता है. कम कैलोरी, अच्छी मात्रा में फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इसे सुपरफूड भी कहा जाता है. वजन घटाने से लेकर दिल की सेहत और ब्लड शुगर कंट्रोल तक, मखाने के कई फायदे गिनाए जाते हैं. लेकिन हर हेल्दी चीज हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं है. कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में मखाने का सेवन परेशानी बढ़ा सकता है. 

पेट की दिक्कत में क्या करना चाहिए?

अगर आपको बार-बार पेट फूलने, गैस बनने या पेट में भारीपन की शिकायत रहती है, तो मखाना सोच-समझकर खाना चाहिए. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो आमतौर पर पाचन के लिए लाभदायक माना जाता है. लेकिन इरिटेबल बाउल सिंड्रोम या इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों में यही फाइबर पेट दर्द, गैस और ब्लोटिंग की समस्या को बढ़ा सकता है.

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 यूरिक एसिड बढ़ने या गाउट की समस्या

जिन लोगों को यूरिक एसिड बढ़ने या गाउट की समस्या है, उन्हें भी सावधानी बरतने की जरूरत है. मखाने में मध्यम मात्रा में प्यूरिन पाए जाते हैं. शरीर में प्यूरिन टूटकर यूरिक एसिड बनाते हैं। ऐसे में पहले से हाई यूरिक एसिड की समस्या वाले लोगों में जोड़ों का दर्द और सूजन बढ़ सकती है.

किडनी की दिक्कत

जर्नल ऑफ यूरोलॉजी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर आपको किडनी स्टोन की समस्या रही है या डॉक्टर ने इसके खतरे के प्रति आगाह किया है, तो मखाने का अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार इसमें ऑक्सालेट मौजूद होते हैं, जो कुछ लोगों में किडनी स्टोन बनने के जोखिम को बढ़ा सकते हैं. ऐसे लोगों को अपनी डाइट में इसकी मात्रा सीमित रखने की सलाह दी जाती है.

एलर्जी वाले लोगों को बचना चाहिए

कुछ लोगों को मखाने से एलर्जी भी हो सकती है। यदि इसे खाने के बाद त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे तुरंत बंद कर देना चाहिए. नट्स और सीड्स से एलर्जी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. जर्नल ऑफ एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी  में पब्लिश स्टडी के अनुसार, बीजों  में मौजूद प्रोटीन कुछ अन्य एलर्जी पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों के साथ क्रॉस-रिएक्शन कर सकते हैं.

इनको भी बचना चाहिए

इसके अलावा यदि आप खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं, तो भी मखाना नियमित रूप से खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. इसमें मौजूद विटामिन- के ब्लड के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, जिससे कुछ दवाओं का असर बदल सकता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि मखाना नुकसानदायक है. कई रिपोर्ट्स में इसे दिल की सेहत, वजन नियंत्रण और ब्लड शुगर मैनेजमेंट के लिए फायदेमंद बताया गया है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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शहरी भारत में हर तीसरा व्यक्ति फैटी लिवर का शिकार, नजरअंदाज किया तो हो सकता है कैंसर

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Can Weight Loss Reverse Fatty Liver Disease: फैटी लिवर को लंबे समय तक एक मामूली समस्या माना जाता रहा. कई लोगों को अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में इसका जिक्र मिलता था, लेकिन क्योंकि कोई खास लक्षण नहीं दिखते थे, इसलिए इसे नजरअंदाज कर दिया जाता था.  हालांकि अब डॉक्टरों का कहना है कि यह गलती भविष्य में गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है. भारत में फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, अनहेल्दी खानपान, कम शारीरिक गतिविधि, खराब नींद और तनावपूर्ण लाइफस्टाइल इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि यह बीमारी कई सालों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बढ़ती रहती है. 

क्यों जल्दी पहचान करना जरूरी?

 डॉ. शलीन अग्रवाल ने TOI को बताया कि  फैटी लिवर उन गिनी-चुनी लिवर बीमारियों में शामिल है जिन्हें शुरुआती चरण में काफी हद तक ठीक किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए समय रहते कदम उठाना बेहद जरूरी है. दरअसल, जब लिवर की सेल्स में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है, तो लिवर के सामान्य कामकाज पर असर पड़ना शुरू हो जाता है. लिवर शरीर में पोषक तत्वों को प्रोसेस करने, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने जैसे कई महत्वपूर्ण काम करता है. इसलिए इसकी सेहत बिगड़ने का असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है.

भारत में क्या है स्थिति?

जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हेपेटोलॉजी में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, शहरी भारत में हर तीन में से एक व्यक्ति किसी न किसी स्तर के फैटी लिवर से प्रभावित हो सकता है. एक्सपर्ट का मानना है कि मोटापा और डायबिटीज बढ़ने के साथ यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. 

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क्या आप इसको घर पर ठीक कर सकते हैं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वजन घटाकर फैटी लिवर को ठीक किया जा सकता है? इस पर डॉ. शलीन अग्रवाल कहते हैं कि शुरुआती अवस्था में इसका जवाब हां है. उनका कहना है कि लिवर में खुद को रिपेयर करने की अद्भुत क्षमता होती है, बशर्ते नुकसान स्थायी न हुआ हो. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के नेतृत्व में हुए कई स्टडी में पाया गया है कि शरीर के कुल वजन का केवल 5 प्रतिशत कम करने से लिवर में जमा फैट घट सकता है. वहीं 7 से 10 प्रतिशत वजन कम करने पर लिवर की सूजन में भी सुधार देखा गया है. कुछ मामलों में शुरुआती फाइब्रोसिस यानी लिवर पर बनने वाले निशानों को भी कम किया जा सकता है. 

किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

एक्सपर्ट क्रैश डाइट या तेजी से वजन घटाने की सलाह नहीं देते. उनका कहना है कि संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, ब्लड शुगर कंट्रोल और लंबे समय तक स्वस्थ आदतें अपनाना ही सबसे प्रभावी उपाय है. डॉ. शलीन अग्रवाल चेतावनी देते हैं कि अगर फैटी लिवर को नजरअंदाज किया जाए तो यह आगे चलकर लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस, लिवर फेलियर और यहां तक कि लिवर कैंसर का कारण भी बन सकता है.  कई बार मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी होती है कि लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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