कहीं आप ओवरवेट तो नहीं? घर पर बस 10 सेकेंड में लग जाएगा पता, जान लें तरीका
Obesity Risk Test: कहीं आप ओवरवेट तो नहीं? घर पर बस 10 सेकेंड में लग जाएगा पता, जान लें तरीका
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Obesity Risk Test: कहीं आप ओवरवेट तो नहीं? घर पर बस 10 सेकेंड में लग जाएगा पता, जान लें तरीका
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How Cold Weather Affects The Heart: इंडियन आइडल 3 के विनर और पाताल लोक 2 में नजर आने वाले प्रशांत तमांग का निधन हार्ट अटैक की वजह से रविवार (11 जनवरी) को हो गया. वह महज 43 साल के थे. गौर करने वाली बात है कि ठंड के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह ठंडा मौसम है, जो शरीर की ब्लड वेसल्स को सिकोड़ देता है. इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है। यही कारण है कि हर साल सर्दियों में अस्पतालों में दिल के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाती है. एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में हर चार में से एक मौत दिल की बीमारी की वजह से होती है और इनमें से 80 फीसदी से ज्यादा मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण होती हैं. आमतौर पर लोग मानते हैं कि अगर कोलेस्ट्रॉल सामान्य है तो हार्ट सुरक्षित है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में इसके अलावा भी कई ऐसे कारक होते हैं, जिन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है.
सर्दी में क्यों होते हैं ज्यादा हार्ट अटैक?
सर्दियों में हार्ट के लिए कुछ छिपे हुए खतरे होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. साल 2024 में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, कड़ाके की ठंड या फिर अचानक ठंड बढ़ने से हार्ट अटैक का जोखिम काफी बढ़ जाता है. हैरानी की बात यह है कि यह खतरा ठंड शुरू होते ही नहीं आता, बल्कि तापमान गिरने के 2 से 6 दिन बाद सबसे ज्यादा होता है. आंकड़े बताते हैं कि हर साल क्रिसमस और न्यू ईयर के आसपास हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी मौतों के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं. यह सिर्फ संयोग नहीं है. ठंडा मौसम, छुट्टियों के दौरान लाइफस्टाइल में बदलाव और शरीर पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव ये सभी मिलकर दिल पर भारी असर डालते हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नवीन अग्रवाल के मुताबिक, सर्दियों में शरीर ठंड के हिसाब से खुद को ढालने की कोशिश करता है. इस दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, खून ज्यादा गाढ़ा हो सकता है और नसों में बदलाव आते हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने सोशल मीडिया पर इसको लेकर एक वीडियो शेयर करके इसके बारे में बताया था कि आखिर वे कौन से कारण होते हैं, जिनके चलते सर्दियों के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है
कैसे कर सकते हैं बचाव?
सर्दियों में हमारी आदतें भी दिल को नुकसान पहुंचाती हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, ठंड में लोग कम एक्सरसाइज करते हैं, ज्यादा तला-भुना खाते हैं और तनाव भी बढ़ जाता है. डॉक्टर बताते हैं कि सर्दी के मौसम में वजन को कंट्रोल में रखें, रोज योग या ध्यान करें और 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें. सर्दियों में पकौड़े, समोसे जैसे तले-भुने खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में ही खाएं. इसके बजाय फल, सब्जियां और दालों को अपनी डाइट में शामिल करें. नमक और चीनी का ज्यादा सेवन भी दिल के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Harmful Effects Of Processed Food: अमेरिका ने अपने नागरिकों की खाने-पीने की आदतों को लेकर बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने नई डायटरी गाइडलाइंस फॉर अमेरिकन्स 2025–2030 जारी की हैं, जिन्हें बीते कई दशकों में पोषण नीति का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इन गाइडलाइंस को अमेरिका के स्वास्थ्य एवं पब्लिक वेलफेयर डिपार्टमेंट और कृषि विभाग ने मिलकर तैयार किया है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में.
क्या है इसमें खास?
नई गाइडलाइंस की सबसे खास बात है फूड पिरामिड की वापसी. लेकिन इस बार इसका संदेश बेहद सीधा और सरल है कि पैकेट से निकलने वाले खाने से दूर रहिए और असली खाना खाइए. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि लोगों को दवाइयों और प्रोसेस्ड फूड पर निर्भर बनाने के बजाय रोजमर्रा के न्यूट्रिशन की ओर लौटाने की कोशिश की जा रही है.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अमेरिका गंभीर स्वास्थ्य संकट से गुजर रहा है. वहां 70 प्रतिशत से ज्यादा वयस्क या तो ओवरवेट हैं या मोटापे का शिकार हैं. लगभग हर तीसरा किशोर प्रीडायबिटीज की स्थिति में है. हालत यह है कि देश का करीब 90 प्रतिशत हेल्थकेयर खर्च उन बीमारियों पर हो रहा है, जिनकी जड़ गलत खान-पान और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल मानी जाती है.
क्या है गाइडलाइन?
नया फूड पिरामिड लोगों के लिए एक आसान गाइड की तरह तैयार किया गया है, ताकि वे रोज़मर्रा की जिंदगी में बेहतर खाने का चयन कर सकें. इसमें ऐसे खाने की चीजों को प्राथमिकता दी गई है, जो पोषक तत्वों से भरपूर हों और ज्यादा प्रोसेस्ड न हों. गाइडलाइंस के मुताबिक, रियल फूड वह है, जिसे देखकर साफ समझ आए कि वह खाना है, जिसमें कम सामग्री हो और जिसमें अतिरिक्त शक्कर, इंडस्ट्रियल ऑयल, आर्टिफिशियल फ्लेवर या प्रिज़र्वेटिव न मिलाए गए हों.
भारत में इसका उल्टा
एक तरफ जहां अमेरिका में खानपान को लेकर बड़ा बदलाव किया जा रहा है, ताकि हेल्थ को सही रखा जा सके, वहीं भारत में इसका उल्टा हो रहा है. लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 2006 से लेकर 2019 तक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की रिटेल बिक्री 40 प्रतिशत बढ़ी है. वहीं खुदरा बिक्री की बात करें तो साल 2011 से 2021 के बीच आईसीआरआईईआर की रिपोर्ट के अनुसार 13 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी हुई है.
देश के अंदर यूरोमॉनिटर की रिपोर्ट के अनुसार, जो पैकेज्ड या प्रोसेस्ड फूड की खपत साल 2012 में प्रति व्यक्ति 2,800 रुपये थी, वह बढ़कर साल 2018 में 5,200 रुपये पहुंच गई. हालात यह हैं कि 11 प्रतिशत लोग डायबिटीज से परेशान हैं, 3.4 प्रतिशत छोटे बच्चे भी मोटापे का शिकार हो रहे हैं, करीब 29 प्रतिशत लोग मोटापे से पीड़ित हैं और 15 प्रतिशत आबादी ऐसी है, जिनमें डायबिटीज के लक्षण दिख रहे हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Physical Activity And Cancer Prevention: रोजाना सिर्फ 10 मिनट की तेज और एनर्जेटिक एक्सरसाइज न सिर्फ आपकी फिटनेस बढ़ा सकती है, बल्कि आंतों के कैंसर यानी बॉवेल कैंसर से लड़ने में भी मदद कर सकती हैय यह दावा न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर के एक अध्ययन में किया गया है. चलिए आपको बताते हैं कि रिसर्च में क्या निकला और एक्सरसाइज कौन सा और कैसे करना है.
क्या निकला रिसर्च में?
रिसर्च में सामने आया कि कम समय की लेकिन तेज एक्सरसाइज शरीर के भीतर खून में ऐसे ऑर्गेनिक बदलाव पैदा करती है, जो कैंसर सेल्स की बढ़त को रोकने और डीएनए को होने वाले नुकसान की मरम्मत को तेज करने में मदद करते हैं. रिसर्चर के मुताबिक, एक्सरसाइज के दौरान खून में कुछ खास छोटे मॉलिक्यूल्स की मात्रा बढ़ जाती है, जिनका संबंध सूजन कम करने, ब्लड वेसल्स की काम करने की क्षमता सुधारने और मेटाबॉलिज्म बेहतर करने से है. जब इन एक्सरसाइज-से पैदा हुए मॉलिक्यूल्स को लैब में बॉवेल कैंसर की कोशिकाओं पर इस्तेमाल किया गया, तो 1,300 से ज्यादा जीन की गतिविधियों में बदलाव देखा गया. इनमें वे जीन भी शामिल थे जो डीएनए रिपेयर, एनर्जी प्रोडक्शन और कैंसर सेल्स की ग्रोथ को नियंत्रित करते हैं.
कहां पब्लिश हुई रिसर्च?
यह स्टडी इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित हुआ है. शोध के मुताबिक, एक्सरसाइज शरीर में ऐसे सिग्नल भेजती है जो जीन के स्तर पर ट्यूमर की ग्रोथ और जीनोम की अस्थिरता को प्रभावित करते हैं. स्टडी का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर सैम ऑरेंज ने कहा कि यह बात खास है कि एक्सरसाइज सिर्फ हेल्दी टिशूज़ के लिए ही फायदेमंद नहीं होती, बल्कि यह ब्लडस्ट्रीम के ज़रिए ऐसे शक्तिशाली संकेत भेजती है, जो कैंसर सेल्स के हजारों जीन को प्रभावित कर सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि यह रिसर्च भविष्य में ऐसे इलाज के रास्ते खोल सकती है, जो एक्सरसाइज के जैविक प्रभावों की नकल कर सकें या उन्हें और मजबूत बना सकें. इससे कैंसर के इलाज और मरीजों के नतीजों में सुधार संभव हो सकता है.
एक्सरसाइज न करने के नुकसान
स्टडी में यह भी पाया गया कि एक्सरसाइज से उन जीन की सक्रियता बढ़ती है जो माइटोकॉन्ड्रियल एनर्जी मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करते हैं, जिससे सेल्स ऑक्सीजन का बेहतर इस्तेमाल कर पाती हैं. वहीं, तेजी से सेल्स की बढ़त से जुड़े जीन की गतिविधि कम हो जाती है, जिससे कैंसर सेल्स का अटैक घट सकता है. इसके साथ ही, एक्सरसाइज के बाद लिया गया खून डीएनए रिपेयर को बढ़ावा देता है और पीएनकेपी नाम के एक अहम जीन को सक्रिय करता है.
इस शोध में 50 से 78 साल की उम्र के 30 लोगों को शामिल किया गया था. सभी प्रतिभागी पुरुष और महिलाएं थे, जो ओवरवेट या मोटापे का शिकार थे, लेकिन अन्य गंभीर बीमारियों से मुक्त थे. उन्होंने लगभग 10 मिनट की हाई-इंटेंसिटी साइक्लिंग की, जिसके बाद उनके ब्लड सैंपल लेकर 249 प्रोटीन का विश्लेषण किया गया. इनमें से 13 प्रोटीन एक्सरसाइज के बाद बढ़े पाए गए, जिनमें इंटरल्यूकिन-6 भी शामिल था, जो डीएनए रिपेयर में मदद करता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Newborn Fall Prevention Tips: जब आप एक नवजात बच्चे की देखभाल कर रहे होते हैं, तो जिंदगी अचानक बहुत सतर्क हो जाती है. बच्चे के छोटे-छोटे हिलने-डुलने, हाथ-पैर चलाने और पलटने की कोशिशें कई बार ऐसे हादसों का कारण बन सकती हैं, जिनकी कल्पना भी डराने वाली होती है. अक्सर माता-पिता बच्चे को कुछ पल के लिए बिस्तर पर लिटा देते हैं, यह सोचकर कि वह अभी पलटेगा नहीं, लेकिन कई बार यही लापरवाही भारी पड़ जाती है और बच्चा अचानक नीचे गिर जाता है. ऐसे हालात में घबराना स्वाभाविक है, लेकिन सही जानकारी और समय पर लिया गया फैसला बच्चे की जान बचा सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि क्या करना चाहिए.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
पटना स्थित ऑरो सुपर स्पेशलिटी क्लीनिक की डॉक्टर दीपा सिंह बताती हैं कि “अगर नवजात बिस्तर से गिर जाए, तो सबसे पहले खुद को शांत रखना बेहद जरूरी है. घबराहट में की गई जल्दबाज़ी नुकसान पहुंचा सकती है. बच्चे को तुरंत उठाने से पहले देखें कि वह रो रहा है या शांत है, सांस सामान्य है या नहीं और शरीर में कोई असामान्य हरकत तो नहीं हो रही. अगर बच्चा बेहोश हो, सुस्त पड़ा हो, सिर से खून आ रहा हो या झटके जैसा कुछ महसूस हो, तो यह मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है. ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल या इमरजेंसी सेवा से संपर्क करना चाहिए.”
वे आगे कहती हैं कि यदि बच्चा होश में है और गंभीर चोट के लक्षण नजर नहीं आते, तो उसे धीरे से गोद में लेकर सांत्वना दें. बच्चे का रोना अक्सर डर और झटके की वजह से होता है उसे शांत करते समय उसके सिर, गर्दन, हाथ-पैर और शरीर के दूसरे हिस्सों को ध्यान से देखें, किसी जगह सूजन, नीला निशान या दर्द की प्रतिक्रिया तो नहीं है, इस पर नजर रखें. अगर कहीं से खून निकल रहा हो, तो साफ कपड़े या गॉज से हल्का दबाव डालें, लेकिन ज्यादा जोर न लगाएं.
इन बातों का रखना चाहिए ध्यान
डॉक्टरों के मुताबिक, एक साल से कम उम्र के बच्चे के गिरने के बाद भले ही वह ठीक दिखे, फिर भी डॉक्टर को जानकारी देना जरूरी होता है. कई बार चोट के लक्षण तुरंत सामने नहीं आते. कुछ घंटों बाद बच्चे का व्यवहार बदल सकता है. जैसे जरूरत से ज्यादा नींद आना, बार-बार उल्टी होना, तेज और असामान्य तरीके से रोना, दूध पीने से मना करना या सामान्य से अलग प्रतिक्रिया देना. ऐसे किसी भी बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
कुछ खास संकेत ऐसे होते हैं, जिनमें बिना देर किए इमरजेंसी रूम जाना जरूरी हो जाता है. जैसे सिर के आगे वाले नरम हिस्से में उभार दिखना, नाक या कान से खून या पीला तरल निकलना, आंखों की पुतलियों का बराबर न होना, रोशनी या आवाज से असहज होना या बच्चे का संतुलन बिगड़ना. ये लक्षण अंदरूनी चोट या सिर पर गंभीर असर की ओर इशारा कर सकते हैं.
काफी महत्वपूर्ण होते हैं 24 घंटे
गिरने के बाद अगले 24 घंटे बच्चे के लिए सबसे अहम होते हैं. डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चे को आराम करने देना चाहिए, लेकिन जरूरत पड़ने पर बीच-बीच में हल्के से जांच भी करते रहना चाहिए. अगर बच्चा सामान्य तरीके से सांस ले रहा है और ठीक से प्रतिक्रिया दे रहा है, तो उसे सोने दिया जा सकता है. हालांकि, अगर उसे जगाने में परेशानी हो या वह बिल्कुल प्रतिक्रिया न दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. इस दौरान बच्चे को जोरदार खेल, उछल-कूद या किसी भी तरह की गतिविधि से दूर रखना चाहिए. शांत खेल, गोद में लेकर कहानी सुनाना या स्ट्रॉलर पर हल्की सैर जैसी चीजें सुरक्षित मानी जाती हैं. अगर बच्चा डे-केयर जाता है, तो वहां के स्टाफ को गिरने की जानकारी जरूर दें, ताकि वे अतिरिक्त सतर्कता बरत सकें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Cardiologist Recommended Habits: लंबी और सेहतमंद जिंदगी के लिए किसी महंगे ट्रेंड या असाधारण मेहनत की ज़रूरत नहीं होती. असली राज़ छुपा है रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों और समझदारी भरे फैसलों में, जो समय के साथ शरीर को मजबूत बनाते हैं. इसको लेकर डॉक्टर नरेश त्रेहान चेयरमैन मेडिसिटी मेदान्ता हॉस्पिटल ने कुछ हेल्थ के मंत्र सुझाए हैं, जिन्हें अगर हम अपनी लाइफ में फॉलो करते हैं, तो हम एक बेहतर जिंदगी जी सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि उन्होंने लाइफ को लेकर कौन सा मंत्र दिया है, जिससे आप अपनी उम्र लंबी और हेल्दी दोनों कर सकते हैं.
क्या कहते हैं डॉक्टर
डॉक्टर नरेश त्रेहान ने जो लाइफ जीने के लिए 10 प्वाइंट्स बताए हैं, वे इस प्रकार हैं कि –
डॉक्टर नरेश त्रेहान चेयरमैन मेडिसिटी मेदान्ता हॉस्पिटल का ये वीडियो कृपया एक बार जरूर देखें… pic.twitter.com/xyNKHVKagf
— अतीव (@AtivAb) January 7, 2026
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