रात को सोते वक्त आपको भी आते हैं जमकर खर्राटें, ये तरीका आएगा काम

रात को सोते वक्त आपको भी आते हैं जमकर खर्राटें, ये तरीका आएगा काम


Sleeping Tips: अक्सर लोग खर्राटों की समस्या से परेशान रहते हैं लेकिन ज्यादातर इसे केवल गहरी और सुकून भरी नींद का संकेत मानकर इग्नोर कर देते हैं. जबकि, असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है. रात को सोते समय तेजी से खर्राटे लेना न सिर्फ आपके साथ सोने वाले पार्टनर की नींद में खलल डालता है, बल्कि यह आपके खराब स्वास्थ्य की ओर भी इशारा करता है.

मेडिकल साइंस के अनुसार, जब सोते समय हमारे श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में हवा का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता तो वहां की मांसपेशियां वाइब्रेट करने लगती हैं. इसी वाइब्रेशन से तेज आवाज निकलती है, जिसे हम खर्राटे कहते हैं. ऐसे में आइए अब जान लेते हैं कि खर्राटे आने के असली कारण क्या हैं और इनसे हमेशा के लिए छुटकारा कैसे पाया जा सकता है. 

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गलत पोजीशन में सोना- पीठ के बल लेटने पर जीभ और गले की मांसपेशियां पीछे की ओर झुक जाती हैं, जिससे सांस की नली आंशिक रूप से बंद हो जाती है.

बढ़ता हुआ वजन- गले और गर्दन के आसपास अतिरिक्त चर्बी (फैट) जमा होने से वायु मार्ग छोटा हो जाता है और खर्राटे आने लगते हैं. 

नाक की बनावट में गड़बड़ी- नाक की हड्डी का टेढ़ा होना या नाक के अंदर मांस बढ़ना हवा के रास्ते को रोकता है, जिससे खर्राटे आने की समस्या होने लगती है.

नशीले पदार्थों का सेवन- वहीं, सोने से ठीक पहले शराब पीना गले की मांसपेशियों को जरूरत से ज्यादा लूज कर देता है, जिससे रुकावट पैदा होती है और खर्राटे आने शुरू हो जाते हैं. 

सर्दी (क्रॉनिक साइनसाइटिस)- इसके साथ ही नाक बंद होने, एलर्जी या सर्दी-जुकाम के कारण व्यक्ति को मुंह से सांस लेनी पड़ती है, जो खर्राटे आने का बड़ा कारण बनती है.  

बढ़ती उम्र- वहीं, उम्र बढ़ने के साथ गले के ऊतक (टिशू) ढीले होने लगते हैं, जिससे खर्राटों की आवृत्ति (फ्रीक्वन्सी) बढ़ जाती है.

खर्राटों से ऐसे मिलेगा छुटकारा 

करवट लेकर सोएं- अगर आप चाहते हैं कि आपको खर्राटे न आएं तो कोशिश करें कि हमेशा बाईं या दाईं ओर करवट लेकर सोएं क्योंकि यह पोज सांस की नली को पूरी तरह खुला रखने में सहायक होता है. 

नियमित एक्सरसाइज- साथ ही रोज कम से कम 30 मिनट योग या कार्डियो वर्कआउट करें. जिससे वजन कम होने लगेगा और गले की मांसपेशियों का प्रेशर अपने आप कम हो जाएगा.

सिरहाना ऊंचा रखें- सोते समय एक अतिरिक्त तकिया लगाकर अपने सिर को करीब 4 इंच ऊपर उठाएं. इससे ग्रैविटी के कारण सांस की नली ब्लॉक नहीं होती.

हाइड्रेटेड रहें- इसके साथ ही दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं. क्योंकि शरीर में पानी की कमी से नाक और गले के अंदर का बलगम चिपचिपा होकर रुकावट पैदा करता है. 

सोने से पहले भाप लें- अगर आपकी नाक बंद रहती है, तो रात को बिस्तर पर जाने से पहले गर्म पानी की भाप (स्टीम) लें.

एंटी-स्नोरिंग गैजेट्स- इसके अलावा डॉक्टर की सलाह पर आप नेजल स्ट्रिप्स या सीपैप मशीन का उपयोग कर सकते हैं, जो वायु मार्ग को साफ रखती हैं

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ये चीजें रोज खाते हैं तो तुरंत छोड़ दीजिए, गिर जाएगा टेस्टोस्टेरोन और कम हो जाएगी कामेच्छा

ये चीजें रोज खाते हैं तो तुरंत छोड़ दीजिए, गिर जाएगा टेस्टोस्टेरोन और कम हो जाएगी कामेच्छा


Foods That May Lower Testosterone Levels: पुरुषों की सेहत में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह न केवल मसल्स की ताकत और एनर्जी को प्रभावित करता है, बल्कि फिजिकल रिलेशन में बहुत अहम रोल प्ले करता है. एक्सपर्ट के अनुसार, शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने पर मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, हार्ट रोग और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि उम्र, लाइफस्टाइल और हेल्थ रिलेटेड कई चीजें टेस्टोस्टेरोन को प्रभावित करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी खाने-पीने की चीजें भी हैं जिनका अधिक सेवन इस हार्मोन के स्तर को प्रभावित कर सकता है.  चलिए उनके बारे में आपको बताते हैं. 

पुदीना

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट healthline के एक्सपर्ट के अनुसार, पुदीना यानी मिंट से बनी कुछ चीजें टेस्टोस्टेरोन पर असर डाल सकती हैं. एक 12 सप्ताह के अध्ययन में पाया गया कि नियमित रूप से स्पीयरमिंट हर्बल टी पीने वाले लोगों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट देखी गई. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि इस विषय पर और अधिक रिसर्च की आवश्यकता है.

मुलेठी की जड़

इसी तरह मुलेठी की जड़ को लेकर भी कई स्टडी सामने आए हैं. वर्ष 2003 के एक अध्ययन में 25 पुरुषों को प्रतिदिन 7 ग्राम मुलेठी की जड़ दी गई, जिसके बाद केवल एक सप्ताह में टेस्टोस्टेरोन स्तर में लगभग 26 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. 

अलसी के बीज

अलसी के बीज  को आमतौर पर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन कुछ रिसर्च में यह भी संकेत मिला है कि इनमें मौजूद लिग्नान नामक तत्व टेस्टोस्टेरोन को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को बढ़ा सकते हैं. प्रोस्टेट कैंसर से जुड़े एक स्टडी में भी इसके प्रभाव देखे गए थे.

प्रोसेस्ड फूड्स

प्रोसेस्ड फूड्स में पाए जाने वाले ट्रांस फैट्स भी चिंता का विषय हैं. 209 पुरुषों पर किए गए एक स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों ने सबसे ज्यादा ट्रांस फैट का सेवन किया, उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर अन्य लोगों की तुलना में करीब 15 प्रतिशत कम था.

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शराब का भी अहम रोल

शराब का अधिक सेवन भी हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है. 2004 के एक अध्ययन में पाया गया कि लगातार तीन सप्ताह तक रोजाना 30 से 40 ग्राम अल्कोहल लेने वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर 6.8 प्रतिशत तक घट गया.

इनसे भी हो सकती है दिक्कत

इसके अलावा कुछ अध्ययनों में अखरोट और बादाम जैसे कुछ नट्स के टेस्टोस्टेरोन पर प्रभाव की भी चर्चा की गई है. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि इन निष्कर्षों को अंतिम नहीं माना जा सकता. इसलिए किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह छोड़ने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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दस्त के साथ भयंकर कब्ज को न करें इग्नोर, हो सकता है कैंसर का संकेत, जानें लक्षण

दस्त के साथ भयंकर कब्ज को न करें इग्नोर, हो सकता है कैंसर का संकेत, जानें लक्षण


Why Watery Diarrhoea Happens After Constipation: अगर आपको कभी ऐसा महसूस हुआ है कि पहले पानी जैसे दस्त हुए और फिर कई दिनों तक कब्ज बनी रही, तो इसे सामान्य डाइजेशन समस्या समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. यह स्थिति भले ही उलझन पैदा करती हो, लेकिन एक्सपर्ट के अनुसार इसके पीछे एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या छिपी हो सकती है, जिसे समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है.

ओवरफ्लो डायरिया की दिक्कत

लेक एरी कॉलेज ऑफ ऑस्टियोपैथिक मेडिसिन से बोर्ड-सर्टिफाइड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जोसेफ सालहाब ने हाल ही में इस विषय पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि कई बार व्यक्ति को दस्त जैसा महसूस होता है, जबकि वास्तव में वह गंभीर कब्ज से जूझ रहा होता है. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ओवरफ्लो डायरिया कहा जाता है. 

क्या हो सकती है इससे दिक्कत?

डॉ. जोसेफ सालहाब के अनुसार, ओवरफ्लो डायरिया सुनने में भले ही दस्त जैसी समस्या लगे, लेकिन यह वास्तव में कब्ज का ही एक रूप है. उन्होंने बताया कि जब बड़ी आंत में लंबे समय तक सख्त मल जमा रहता है और वह बाहर नहीं निकल पाता, तब केवल पानी उस मल के आसपास से रास्ता बनाकर बाहर निकलता है. चूंकि इस पानी का कोई ठोस आकार नहीं होता, इसलिए यह दस्त जैसा दिखाई देता है. कई दिनों तक मल त्याग न होने के बाद अचानक पानी जैसे दस्त होना इसी स्थिति का संकेत हो सकता है.

किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए इग्नोर?

एक्सपर्ट का कहना है कि इस समस्या के साथ पेट दर्द, पेट फूलना, मतली, मल का रिसाव और बार-बार पतले दस्त जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. गंभीर मामलों में अस्पताल में जांच की आवश्यकता पड़ सकती है, जिसमें शारीरिक परीक्षण, पेट का एक्स-रे, सीटी स्कैन, ब्लड टेस्ट और अन्य जांच शामिल हो सकती हैं. 

 

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कैंसर की भी हो सकती है दिक्कत

एक्सपर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि कुछ मामलों में कोलन कैंसर भी ओवरफ्लो डायरिया जैसे लक्षणों के रूप में सामने आ सकता है. कोलन में सिकुड़न या रुकावट बनने के कारण कब्ज और दस्त दोनों जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं. यदि इसके साथ वजन तेजी से कम होना, मल में खून आना, एनीमिया, तेज पेट दर्द, उल्टी या लगातार बढ़ती कब्ज जैसे लक्षण दिखें तो इन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉ. जोसेफ सालहाब का कहना है कि ऐसे लक्षणों का इलाज खुद करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.  अगर समस्या लगातार बनी रहे या गंभीर हो, तो सही जांच और चिकित्सा सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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अगर बार बार हो रहा व्हाइट वॉटर डिस्चार्ज तो संभल जाएं, इस गंभीर बीमारी का हो सकता है खतरा

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White Water Discharge: महिलाओं के शरीर में समय-समय पर कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं. उम्र बढ़ने, पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या तनाव जैसी स्थितियों का असर सीधे उनकी सेहत पर पड़ता है. इन बदलावों के कारण शरीर में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं, जिनमें व्हाइट वॉटर डिस्चार्ज यानी सफेद पानी आना भी शामिल है. आमतौर पर यह एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे या इसके साथ बदबू, खुजली और जलन जैसी समस्याएं भी दिखाई दें, तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है. ऐसे में इसे नजरअंदाज करने के बजाय इसके कारणों और लक्षणों को समझना बेहद जरूरी है. 

इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

सामान्य सफेद पानी आमतौर पर बिना बदबू का और हल्के सफेद रंग का होता है. लेकिन अगर डिस्चार्ज का रंग पीला, हरा या भूरा होने लगे, उसमें तेज बदबू आने लगे या प्राइवेट पार्ट में खुजली और जलन महसूस हो, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है.  वहीं कुछ मामलों में पेशाब करते समय दर्द या जलन भी महसूस हो सकती है.  डॉक्टरों के अनुसार ऐसे लक्षण बैक्टीरियल वेजिनोसिस, यीस्ट इंफेक्शन या पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) जैसी समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं.  अगर समस्या लगातार बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. 

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बार-बार डिस्चार्ज होने के पीछे क्या हैं कारण?

बार-बार व्हाइट डिस्चार्ज होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. हार्मोन में बदलाव, तनाव, थकान, खराब साफ-सफाई और संक्रमण इसके मुख्य कारण माने जाते हैं. वहीं  पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या हार्मोनल बदलाव के दौरान भी इसकी मात्रा बढ़ सकती है.  वहीं गंदे या बहुत टाइट कपड़े पहनना, लंबे समय तक नमी बने रहना और प्राइवेट हाइजीन का ध्यान न रखना संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सफेद पानी के साथ दर्द, खुजली या दुर्गंध हो तो यह केवल सामान्य बदलाव नहीं बल्कि किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है. 

बचाव और इलाज के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

इस समस्या से बचने के लिए रोजाना साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है. हमेशा सूती अंडरवियर पहनें और उन्हें नियमित रूप से बदलें. ज्यादा केमिकल वाले साबुन और खुशबूदार प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कम करें. खाने में दही, छाछ और विटामिन-सी से भरपूर फलों को शामिल करें क्योंकि ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अलावा पर्याप्त पानी पिएं और तनाव कम करने की कोशिश करें. अगर घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी 5 से 7 दिनों तक समस्या में सुधार न हो या लक्षण बढ़ते जाएं, तो तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट से सलाह लेना चाहिए. सही समय पर इलाज करवाने से बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है. 

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वजन तो घटेगा, लेकिन मांसपेशियां हो सकती हैं कमजोर! Ozempic लेने वालों के लिए चेतावनी

वजन तो घटेगा, लेकिन मांसपेशियां हो सकती हैं कमजोर! Ozempic लेने वालों के लिए चेतावनी


Weight Loss Drug: आजकल वजन कम करने के लिए लोग कई तरह के तरीके अपना रहे हैं. जिसमें Ozempic नाम की दवा काफी चर्चा में चल रही है. वहीं दुनिया भर में लाखों लोग इस दवा का इस्तेमाल डायबिटीज कंट्रोल करने और वजन घटाने के लिए कर रहे हैं. इस दवा में मौजूद Semaglutide भूख को कम करने में मदद करता है, जिससे व्यक्ति कम खाना खाता है और उसका वजन तेजी से घटने लगता है. लेकिन अब विशेषज्ञों ने एक ऐसी बात बताई है, जिस पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. इससे वजन घटाने के दौरान सिर्फ चर्बी ही नहीं, बल्कि शरीर की मांसपेशियां भी कमजोर हो सकती हैं. यही वजह है कि डॉक्टर अब लोगों को सिर्फ दवा पर भरोसा करने के बजाय व्यायाम को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दे रहे हैं. 

सिर्फ वजन कम होना ही काफी नहीं

जब कोई व्यक्ति वजन कम करना चाहता है, तो उसका मकसद शरीर की अतिरिक्त चर्बी घटाना होता है. लेकिन कई बार वजन कम होने के साथ-साथ मांसपेशियों का भी नुकसान होने लगता है जो की शरीर के लिए अच्छी बात नहीं मानी जाती है, क्योंकि मांसपेशियां हमारे शरीर को ताकत देती हैं, चलने-फिरने में मदद करती हैं और शरीर की ऊर्जा को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं. वहीं अगर मांसपेशियां ज्यादा कमजोर हो जाएं, तो व्यक्ति जल्दी थक सकता है और लंबे समय तक अपना वजन कंट्रोल रखना भी मुश्किल हो सकता है.  खासकर बढ़ती उम्र के लोगों के लिए यह समस्या और ज्यादा चिंता की बात बन सकती है. 

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रिसर्च में क्या सामने आया?

यूरोपियन एथेरोस्क्लेरोसिस सोसायटी (EAS) कांग्रेस 2026 में पेश की गई एक नई स्टडी में इस मुद्दे पर खास ध्यान दिया गया.  शोधकर्ताओं ने मोटापे और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त चूहों पर अध्ययन किया. कुछ चूहों को केवल Semaglutide दिया गया, कुछ को सिर्फ एक्सरसाइज कराई गई और कुछ को दोनों चीजें साथ में दी गईं. 14 हफ्तों बाद जो नतीजे सामने आए, वे काफी दिलचस्प थे.  सिर्फ Semaglutide लेने वाले समूह में शरीर की चर्बी 31 प्रतिशत तक कम हुई, लेकिन उनकी लीन मास यानी मांसपेशियों में 11 प्रतिशत की कमी भी देखी गई.  वहीं जिन चूहों को दवा के साथ नियमित व्यायाम भी कराया गया, उनमें चर्बी 45 प्रतिशत तक घटी और मांसपेशियों का नुकसान केवल 8 प्रतिशत तक सीमित रहा. 

एक्सरसाइज ने दिया बड़ा फायदा

शोध में यह भी देखा गया कि दवा और एक्सरसाइज का मेल सिर्फ वजन कम करने तक सीमित नहीं रहा. इससे इंसुलिन की कार्यक्षमता बेहतर हुई, खून में फैट का स्तर सुधरा और शरीर में सूजन भी कम हुई है. इतना ही नहीं, लिवर में जमा अतिरिक्त चर्बी भी कम देखने को मिला है. सबसे खास बात यह रही कि जिन चूहों ने दवा के साथ एक्सरसाइज की, उनकी मांसपेशियों की ताकत और पकड़ने की क्षमता में भी सुधार हुआ. यानी शरीर सिर्फ पतला नहीं हुआ, बल्कि ज्यादा मजबूत भी बना.

हालांकि यह अध्ययन अभी जानवरों पर किया गया है और इंसानों पर और रिसर्च की जरूरत है, लेकिन इसके नतीजे एक साफ संदेश देते हैं कि अगर आप Ozempic जैसी दवाओं से वजन कम कर रहे हैं, तो नियमित एक्सरसाइज को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.  सही मायनों में स्वस्थ वजन घटाने का रास्ता दवा और व्यायाम, दोनों के संतुलित मेल से होकर गुजरता है. 

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किडनी खराब होने से पहले शरीर नहीं देता बड़ा संकेत, डॉक्टर की चेतावनी- देर होने का न करें इंतजार

किडनी खराब होने से पहले शरीर नहीं देता बड़ा संकेत, डॉक्टर की चेतावनी- देर होने का न करें इंतजार


Kidney Health Tips: हम में से ज्यादातर लोग मानते हैं कि कोई भी गंभीर बीमारी आने से पहले शरीर कुछ न कुछ संकेत जरूर देता है. लेकिन किडनी की बीमारी के मामले में अक्सर ऐसा नहीं होता. यही वजह है कि डॉक्टर इसे “साइलेंट डिजीज” यानी चुपचाप बढ़ने वाली बीमारी कहते हैं. वहीं किडनी हमारे शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है. यह खून को साफ करती है, शरीर से गंदगी बाहर निकालती है, पानी का संतुलन बनाए रखती है और तो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करती है. लेकिन किडनी की सबसे बड़ी खासियत ही कई बार सबसे बड़ा खतरा बन जाती है.

 डॉक्टरों के मुताबिक किडनी इतनी मजबूत होती है कि नुकसान होने के बाद भी लंबे समय तक अपना काम करती रहती है. इसी कारण कई लोगों को तब तक पता नहीं चलता कि उनकी किडनी खराब हो रही है, जब तक बीमारी काफी आगे नहीं बढ़ जाती. 

किडनी की बीमारी को क्यों कहा जाता है ‘साइलेंट किलर’?

विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती दौर में कोई साफ लक्षण नहीं दिखते. वहीं कई लोग पूरी तरह सामान्य जीवन जीते रहते हैं और उन्हें लगता है कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं.  लेकिन अंदर ही अंदर किडनी लगातार कमजोर होती रहती है.  डॉक्टर के अनुसार, जब लोगों को पहली बार बीमारी का पता चलता है, तब तक कई मामलों में किडनी अपनी 85 से 90 प्रतिशत तक क्षमता खो चुकी होती है. यही वजह है कि केवल लक्षणों का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है. वहीं कई मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है जब किसी सामान्य हेल्थ चेकअप में रिपोर्ट खराब आती है या फिर अचानक ऐसी स्थिति बन जाती है कि डायलिसिस की जरूरत पड़ने लगती है. इसलिए डॉक्टर बार-बार लोगों को नियमित जांच कराने की सलाह देते हैं. 

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देर से पता चलने पर मरीज और परिवार दोनों पर पड़ता है असर

किडनी की बीमारी का देर से पता चलना सिर्फ शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बड़ा झटका साबित हो सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि कई मामलों में ऐसा होता है कि मरीज अस्पताल पहुंचते समय खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं, लेकिन जांच के बाद उन्हें पता चलता है कि उनकी किडनी गंभीर रूप से खराब हो चुकी होती है. ऐसे में मरीज और उनके परिवार दोनों के लिए इस सच्चाई को स्वीकार करना आसान नहीं होता. वहीं अचानक डायलिसिस, लंबे इलाज और भविष्य की चिंता लोगों को परेशान कर देती है.  इलाज का खर्च, जीवनशैली में बदलाव और आगे की योजना जैसी कई बातें एक साथ सामने आ जाती हैं. यही कारण है कि डॉक्टर कहते हैं कि बीमारी को शुरुआती दौर में पकड़ लेना सबसे बेहतर रास्ता है. 

किन लोगों को ज्यादा खतरा और कैसे बचाएं अपनी किडनी?

डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों में किडनी की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है. इनमें डायबिटीज के मरीज, हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोग, किडनी की बीमारी का पारिवारिक इतिहास रखने वाले लोग, मोटापे से जूझ रहे व्यक्ति, धूम्रपान करने वाले, दिल के मरीज और 60 साल से अधिक उम्र के लोग शामिल होते हैं.   इसलिए ऐसे लोगों को नियमित रूप से किडनी की जांच कराने कि सलाह दी जाती है. 

वहीं अच्छी बात यह है कि किडनी को सुरक्षित रखने के लिए बहुत मुश्किल कदम उठाने की जरूरत नहीं होती. इसके लिए ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रण में रखना, पर्याप्त पानी पीना, कम नमक वाला संतुलित भोजन खाना, नियमित व्यायाम करना, धूम्रपान और ज्यादा शराब से बचना तथा बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवाओं का अधिक इस्तेमाल न करना किडनी को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है. डॉक्टरों का साफ कहना है कि किडनी की बीमारी का इंतजार लक्षणों से नहीं, बल्कि समय पर जांच से करना चाहिए. क्योंकि सही समय पर पता चल जाए तो किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. 

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