एक दिन में कितना मीठा खाना है सही, जानिए कितने ग्राम शक्कर से शरीर को नहीं होता नुकसान?

एक दिन में कितना मीठा खाना है सही, जानिए कितने ग्राम शक्कर से शरीर को नहीं होता नुकसान?


Daily Sugar Limit: सुबह एक कप चाय की मिठास, दोपहर में एक टुकड़ा मिठाई की खुशी, ऑफिस में बिस्किट और शाम को शरबत या कोल्ड ड्रिंक, कब कितनी चीनी  हमारी शरीर में जा रही है, इसका अंदाजा हमें खुद नहीं रहता. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही मीठा कब आपके शरीर के लिए नुकसान बन जाता है? मीठास धीरे-धीरे हमारे शरीर के लिए जहर भी बन सकती है. इसलिए स्वाद और सेहत के बीच की यह पतली लाइन समझना आज बेहद जरूरी हो गया है. साथ ही डॉक्टरों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन न केवल मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों को न्योता देता है, बल्कि त्वचा पर झुर्रियां और समय से पहले बुढ़ापा भी ला सकता है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर एक दिन में कितनी शक्कर लेना सुरक्षित माना जाता है. 

WHO के अनुसार कितनी शुगर है सुरक्षित?

रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे WHO मानती हैं कि रोजाना ली जाने वाली “फ्री शुगर” यानी जो चीनी हम खाने-पीने में अलग से लेते हैं, उसे सीमित रखना चाहिए.  WHO के मुताबिक, कुल कैलोरी का 10 प्रतिशत से कम शुगर लेना चाहिए, और बेहतर सेहत के लिए इसे 5 प्रतिशत यानी करीब 25 ग्राम (लगभग 6 चम्मच) तक सीमित करना ज्यादा फायदेमंद माना गया है. यही मात्रा शरीर के लिए सुरक्षित मानी जाती है और इससे मोटापा, डायबिटीज और दांतों की समस्या का खतरा भी कम रहता है. 

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पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग सीमा

इसके अलावा, अलग-अलग हेल्थ संस्थाओं ने पुरुष और महिलाओं के लिए भी शुगर की सीमा अलग- अलग तय की है.  जिसमें आमतौर पर महिलाओं के लिए लगभग 25 ग्राम और पुरुषों के लिए 30 से 36 ग्राम तक की मात्रा सही मानी जाती है. वहीं कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि भारतीयों के लिए 20 से 25 ग्राम शुगर रोजाना पर्याप्त है. इससे ज्यादा मात्रा शरीर में फैट बढ़ाने के साथ-साथ हार्ट, लिवर और ब्लड शुगर से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है. 

छिपी हुई शुगर से रहें सावधान

ध्यान देने वाली बात यह है कि सिर्फ मिठाई या चीनी ही नहीं, बल्कि कई पैकेज्ड फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, जूस और स्नैक्स में भी अधिक मात्रा में छिपी हुई शुगर होती है. एक सॉफ्ट ड्रिंक में ही कई बार पूरे दिन की तय मात्रा से ज्यादा शुगर होती है. इसलिए जरूरी है कि लोग अपनी डाइट में छिपी शुगर को पहचानें और कम करें. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप संतुलित मात्रा में शुगर लेते हैं और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाते हैं, तो आप कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं. 

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आपकी हड्डियों को मजबूत कर देंगे ये देसी फूड, 40 के बाद भी बोल्ट की तरह दौड़ेंगे आप

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20 मई को बंद रहेंगी दवा की दुकानें! ऑनलाइन फॉर्मेसी के खिलाफ 12 लाख केमिस्टों का ‘भारत बंद’

20 मई को बंद रहेंगी दवा की दुकानें! ऑनलाइन फॉर्मेसी के खिलाफ 12 लाख केमिस्टों का ‘भारत बंद’


अगर आप या आपके परिवार का कोई भी सदस्य नियमित रूप से किसी बीमारी की दवा लेता है तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. दरअसल, 20 मई 2026 (बुधवार) को देशभर में दवाइयों की किल्लत हो सकती है, क्योंकि ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के नेतृत्व में देश भर के 12.40 लाख से भी ज्यादा केमिस्ट ‘भारत बंद’ की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में देश के ज्यादातर शहरों, कस्बों और गांवों में दवा की दुकानें पूरी तरह से बंद रहने की आशंका है. 

हड़ताल पर क्यों जा रहे हैं केमिस्ट?

दवा विक्रेताओं के इस बड़े विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह इंटरनेट पर बिकने वाली दवाएं यानी ‘ई-फार्मेसी’ और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला भारी डिस्काउंट है. केमिस्टों का साफ तौर पर कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दवाओं की बिक्री बिना किसी सख्त नियम-कानून के हो रही है. इससे उनके व्यापार पर तो ताला लगने की नौबत आ ही गई है, लेकिन यह मरीजों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है.

केमिस्टों ने बताईं अपनी 3 सबसे बड़ी चिंताएं

बिना सही जांच के मिल रहीं दवाएं: केमिस्टों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि ऑनलाइन वेबसाइट्स और ऐप्स पर बिना किसी डॉक्टर की सही पर्ची के धड़ल्ले से दवाएं बेची जा रही हैं. इंटरनेट पर लोग एक ही पर्चे को बार-बार अपलोड करके दवाएं मंगा रहे हैं. कई मामलों में तो फर्जी पर्चों के जरिए नशीली दवाएं और हैवी एंटीबायोटिक्स आसानी से घर पहुंच रही हैं. इससे आम लोगों की सेहत को नुकसान पहुंच रहा है.

बड़ी कंपनियों की भारी छूट से छोटे दुकानदार बर्बाद: बड़े कॉरपोरेट घराने ऑनलाइन प्लेटफार्म्स पर दवाइयों पर इतनी भारी छूट दे रहे हैं कि उनके सामने मोहल्ले, गांव-कस्बों और छोटे शहरों के साधारण केमिस्ट टिक ही नहीं पा रहे हैं. लगातार हो रहे भारी घाटे की वजह से छोटे दुकानदारों का व्यापार ठप होने लगा है और दुकानें बंद हो रही हैं.

कोरोना काल के ढीले नियमों का गलत इस्तेमाल: कोरोना महामारी (Covid-19) के दौरान जब घर से निकलना मुश्किल था, तब सरकार ने दवाओं की बिक्री से जुड़े कुछ नियमों में अस्थायी तौर पर ढील दी थी. केमिस्टों का कहना है कि महामारी खत्म होने के बाद भी वे नियम आज तक लागू हैं और ई-फार्मेसी कंपनियां इसका जमकर गलत फायदा उठा रही हैं.

क्या हैं संगठन की मुख्य मांगें?

  • कोरोना काल में जारी किए गए अस्थायी नियम (G.S.R. 220(E)) को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए.
  • ऑनलाइन फॉर्मेसी को छूट देने वाली अधिसूचना (G.S.R. 817(E)) को पूरी तरह वापस लिया जाए.
  • बड़ी कंपनियों द्वारा बाजार के नियम तोड़कर दी जाने वाली भारी छूट पर पाबंदी लगे.

मरीजों की जान और 5 करोड़ लोगों के रोजगार का सवाल

AIOCD के अध्यक्ष जे. एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने चेतावनी दी है कि यह लड़ाई सिर्फ केमिस्टों का धंधा बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ गंभीर मामला है. इन अवैध ई-फॉर्मेसी और भारी छूट के कारण दवा व्यापार से जुड़े करीब 5 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी पर बड़ा संकट आ गया है. संगठन ने अल्टीमेटम दिया है कि अगर 20 मई तक उनकी समस्याओं पर ध्यान देकर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया तो यह हड़ताल सिर्फ एक दिन की नहीं रहेगी. इसके बाद देशभर के केमिस्ट लंबे समय तक आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिससे पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.

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क्या सिगरेट पीने से सच में भारी होती है आवाज? जानिए इसके पीछे की सच्चाई

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Does Smoking Really Make Your Voice Deeper: बहुत से लोग मानते हैं कि लगातार सिगरेट पीने से आवाज भारी और अलग तरह की हो जाती है. फिल्मों और आम जिंदगी में भी अक्सर धूम्रपान करने वालों की आवाज को भारीपन से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन क्या सच में धूम्रपान का असर आवाज पर पड़ता है? एक्सपर्ट के मुताबिक इसका जवाब हां है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था  clevelandclinic के अनुसार,  कान, नाक और गले से जुड़ी बीमारियों की एक्सपर्ट डॉक्टर कैंडेस ह्रेलैक बताती हैं कि धूम्रपान सीधे तौर पर आवाज की क्वालिटी, सुर और भारीपन को प्रभावित कर सकता है. दरअसल, सिगरेट या दूसरे तंबाकू उत्पादों के धुएं में सैकड़ों तरह के रसायन मौजूद होते हैं. जब कोई व्यक्ति धुआं अंदर खींचता है, तो यह सबसे पहले गले और स्वर पैदा करने वाली नलियों से होकर लंग्स तक पहुंचता है. यही वजह है कि इन हिस्सों में जलन और सूजन शुरू हो सकती है.

लगातार धूम्रपान से क्या होता है असर?

लगातार धूम्रपान करने से गले में खराश, बलगम और खांसी की समस्या बढ़ सकती है. बार-बार खांसने से आवाज बनाने वाली नलियां आपस में जोर से टकराती हैं, जिससे उनमें सूजन और ज्यादा बढ़ जाती है. यही सूजन धीरे-धीरे आवाज को भारी और बैठा हुआ बना सकती है. एक्सपर्ट के मुताबिक गाने वाले लोगों में इसका असर जल्दी दिखाई दे सकता है. ऊंचे सुर लगाने के दौरान स्वर पैदा करने वाली नलियों पर ज्यादा दबाव पड़ता है. अगर उनमें पहले से सूजन हो, तो आवाज में बदलाव साफ महसूस होने लगता है. 

क्या होता है इसका असर?

धूम्रपान का असर सिर्फ आवाज भारी होने तक सीमित नहीं रहता. लंबे समय तक तंबाकू का सेवन गले में लगातार सूजन की स्थिति पैदा कर सकता है. कुछ मामलों में आवाज बैठने लगती है या कई दिनों तक ठीक से निकलती ही नहीं. इसके अलावा गले के अंदर मांस बढ़ने जैसी समस्या भी हो सकती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत तक होने लगती है. गंभीर स्थिति में ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है. 

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कैंसर का भी खतरा

एक्सपर्ट यह भी चेतावनी देते हैं कि लगातार धूम्रपान करने से गले के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. शुरुआती दौर में इसके संकेत आवाज में बदलाव के रूप में दिखाई दे सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति की आवाज तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक भारी या बदली हुई रहे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. जहां तक दूसरे नशे वाले धुएं या भाप वाले उत्पादों की बात है, एक्सपर्ट मानते हैं कि अभी इस पर पर्याप्त रिसर्च नहीं हुआ है. हालांकि यह जरूर माना जा रहा है कि किसी भी तरह का धुआं या रसायन गले और स्वर तंत्र पर असर डाल सकता है.

अच्छी बात यह है कि धूम्रपान छोड़ने के कुछ ही हफ्तों बाद आवाज में सुधार दिखने लगता है. पर्याप्त पानी पीना, गले का ध्यान रखना और धूम्रपान से दूरी बनाना आवाज को फिर से सामान्य बनाने में मदद कर सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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8 घंटे सोकर भी नहीं मिट रही थकान, इस गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर रहा शरीर

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Why Body Feels Exhausted Even After Good Sleep: रात को समय पर सोना, देर रात तक मोबाइल न चलाना और पूरे आठ घंटे की नींद लेना, इसके बावजूद अगर सुबह उठते ही शरीर टूटा हुआ महसूस हो, आंखों में भारीपन रहे और दिनभर थकान पीछा न छोड़े, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार शरीर इस तरह किसी गंभीर समस्या का संकेत देता है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

Hartford HealthCare Medical Group के स्लीप स्पेशलिस्ट Dr. Steven Thau के मुताबिक, सिर्फ नींद के घंटे पूरे होना काफी नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि नींद कितनी गहरी और आरामदायक रहे. कई लोग बिस्तर पर तो आठ घंटे बिताते हैं, लेकिन उनका शरीर असली आराम तक पहुंच ही नहीं पाता.

किस वजह से सुबह रहती है थकान?

नींद के दौरान शरीर अलग-अलग चरणों से गुजरता है. इनमें हल्की नींद, गहरी नींद और आरईएम स्लीप शामिल होती है. अगर किसी वजह से बार-बार नींद टूटती रहे, तो शरीर गहरी नींद तक नहीं पहुंच पाता. यही कारण है कि सुबह उठने पर थकान बनी रहती है. तनाव, कमरे में शोर, देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत और ज्यादा कैफीन लेने जैसी चीजें गहरी नींद को प्रभावित कर सकती हैं. 

लगातार थकान बीमारी का संकेत

इस लगातार बनी रहने वाली थकान के पीछे एक गंभीर बीमारी भी हो सकती है, जिसे स्लीप एपनिया कहा जाता है. यह ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है.  डॉ  बताते हैं कि कई लोगों को इसका पता तक नहीं चलता, लेकिन दिमाग बार-बार शरीर को सांस लेने के लिए जगाता रहता है. इससे नींद पूरी होने के बावजूद शरीर को आराम नहीं मिल पाता. जोर से खर्राटे आना, नींद में घुटन महसूस होना या दिनभर अत्यधिक सुस्ती रहना इसके संकेत हो सकते हैं.

इसके अलावा, रोज अलग-अलग समय पर सोना और उठना भी शरीर कीसर्कैडियन रिदम को बिगाड़ देता है. यही वजह है कि छुट्टियों में ज्यादा देर तक सोने के बाद भी कई लोग और ज्यादा थका हुआ महसूस करते हैं.

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लाइफस्टाइल का भी प्रभाव

खानपान की आदतें भी नींद की क्वालिटी पर असर डालती हैं. देर रात भारी खाना, मसालेदार भोजन या शराब लेने से नींद बार-बार टूट सकती है. वहीं शरीर में पानी की कमी होने पर भी बेचैनी और थकान महसूस होती है. मेंटल तनाव और चिंता भी बड़ी वजह बनते हैं. जब दिमाग लगातार सक्रिय रहता है, तो शरीर आराम की स्थिति में नहीं पहुंच पाता. ऐसे में ध्यान, गहरी सांस लेने की आदत और सोने से पहले शांत माहौल बनाने से फायदा मिल सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या सिर्फ पानी से हाथ धोना है काफी? डॉक्टर से जानें बीमारियों का बड़ा सच

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Why Handwashing Is Important For Health: हाथ धोना एक बहुत साधारण सी आदत लगती है. इसमें न ज्यादा समय लगता है, न किसी खास साधन की जरूरत होती है. फिर भी यही छोटी-सी आदत हमें कई तरह के इंफेक्शन से बचा सकती है. यही वजह है कि आधुनिक चिकित्सा के इस दौर में भी डॉक्टर बार-बार हाथ धोने की सलाह देते हैं. यह सिर्फ व्यक्तिगत सफाई का मामला नहीं है, बल्कि पूरे समाज के स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है. 

टीकों और एंटीबायोटिक्स के आने से बहुत पहले भी हाथों की सफाई ने लोगों की जान बचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. कोविड-19 महामारी के दौरान भी यही बात फिर से सामने आई कि साफ हाथ इंफेक्शन की चेन को तोड़ने का सबसे आसान तरीका हैं. 

क्यों हाथ धोना जरूरी

हम रोजमर्रा की जिंदगी में कई चीजों को छूते हैं, जैसे दरवाजे के हैंडल, मोबाइल फोन, पैसे, रेलिंग या फिर किसी से हाथ मिलाना. इन सब पर सूक्ष्म जीव मौजूद हो सकते हैं. डॉ. प्रतीक गोपानी  ने TOI को बताया कि बहुत से लोग हाथ धोने को गंभीरता से नहीं लेते, जबकि यह आदत कई गंभीर इंफेक्शन से बचाती है और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है. जब गंदे हाथ चेहरे, आंख, नाक या मुंह तक पहुंचते हैं, तो यही जीव शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और बीमारियों की शुरुआत होती है. 

इससे कौन सी बीमारियां फैलती हैं

इसी तरह हैजा, टाइफाइड, डायरिया और इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारियां फैलती हैं. खास बात यह है कि इंफेक्शन सिर्फ गंदे माहौल में ही नहीं, बल्कि साफ दिखने वाली जगहों पर भी हो सकता है. इसलिए सतर्क रहना जरूरी है. 

रिसर्च में क्या निकला

साइंटिस्ट रिसर्च भी इस बात की पुष्टि करते हैं. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, सही तरीके से हाथ धोने से इंफेक्शन का खतरा करीब 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है. जिन देशों में साफ पानी और स्वच्छता की बेहतर सुविधा होती है, वहां इंफेक्शन के मामलों में स्पष्ट गिरावट देखी गई है. 

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इन चीजों को नहीं करना चाहिए इग्नोर

अक्सर लोग रोजमर्रा के छोटे-छोटे मौकों को नजरअंदाज कर देते हैं, जहां हाथ धोना जरूरी होता है. जैसे कि शौचालय इस्तेमाल करने के बाद, खाना बनाने या खाने से पहले, कच्चे भोजन को छूने के बाद, खांसने या छींकने के बाद, पालतू जानवरों या कचरे को छूने के बाद, और बाहर से घर आने पर. बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह आदत और भी ज्यादा जरूरी है, क्योंकि उनकी रोग इम्यून सिस्टम अपेक्षाकृत कमजोर होती है.

हाथ धोने का सही तरीका

हाथ धोने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उसे करना. लगभग 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोना चाहिए. हथेलियों, हाथों के पीछे, उंगलियों के बीच और नाखूनों के नीचे अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए. साबुन गंदगी और कीटाणुओं को हटाने में मदद करता है, जबकि केवल पानी से धोना पर्याप्त नहीं होता. अगर साबुन उपलब्ध न हो, तो अल्कोहल-आधारित सैनिटाइजर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह पूरी तरह विकल्प नहीं है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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